Sex With Sleeping Sister
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम रंजन है और मुझे हमेशा से बड़ी उम्र की औरतें बहुत भाती रही हैं। घर में तो मेरी सगी बड़ी दीदी कामिनी से खूबसूरत कोई थी ही नहीं। उनका फिगर एकदम कातिलाना था, 34-32-36, गोरा रंग, भरी हुई चूचियाँ और इतनी भारी-गोल गांड कि बस देखते ही लंड खड़ा हो जाता। Sex With Sleeping Sister
दीदी जब घर में टाइट कुर्ती-लेगिंग या सलवार-सूट पहनती थीं तो उनकी गांड की शेप और चूचियों का उभार इतना साफ दिखता था कि मैं दिन भर बस उन्हें ही ताड़ता रहता था। रात को जब वो सोती थीं तो मैं चुपके से उनके कमरे में जाता, कभी उनका कुर्ता ऊपर करके ब्रा के ऊपर से चूचियों को दबाता, कभी उनकी पैंटी सूंघता और फिर मुठ मारकर सो जाता।
फिर एक दिन वो सुनहरा मौका आ ही गया। मम्मी ननिहाल चली गई थीं और घर में सिर्फ हम दोनों थे। रात को हम एक ही बेड पर सोए। दीदी ने काले रंग का टाइट कुर्ता और पीली सलवार पहनी हुई थी, उसमें उनकी गांड दो बड़े-बड़े तरबूजों जैसी लग रही थी।
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आधी रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि दीदी की गांड मेरी तरफ है, कुर्ता थोड़ा ऊपर चढ़ा हुआ था और पैंटी भी नहीं थी। उनकी नंगी चूतड़ों की गहरी दरार साफ दिखाई दे रही थी। मैंने सबसे पहले सिर्फ उंगली की नोक से उनकी गांड की दरार पर छुआ, उफ्फ्फ कितनी गर्म और मुलायम थी।
फिर हिम्मत करके पूरा हाथ रख दिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा, दोनों चूतड़ों को हल्के-हल्के मसलता रहा, कभी उन्हें फैलाकर बीच की गुलाबी लाइन को देखता रहा। मेरा लंड अब पत्थर जैसा हो चुका था। मैंने लोअर नीचे की, अपना मोटा-लंबा लंड बाहर निकाला और दीदी की गांड की दरार में फंसा दिया।
धीरे-धीरे आगे-पीछे रगड़ने लगा, सुपारा उनकी गर्म दरार में फिसल रहा था, कभी गांड के छेद को छूता तो पूरा बदन सिहर जाता। इसी जोश में दीदी की नींद खुल गई। वो पलटकर उठीं और मेरी हालत देखकर चौंक गईं, मेरा आठ इंच का मोटा लंड हवा में तना हुआ था। वो बोलीं, “रंजन ये क्या कर रहा है तू?” लेकिन मेरे अंदर का जानवर जाग चुका था।
मैंने एक झटके में उनके ऊपर चढ़ गया, दोनों हाथ बेड पर दबाकर उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो वो हल्का विरोध करने की कोशिश करने लगीं, पर मैंने उनके होंठों को चूसना शुरू किया, हल्के से काटा, जीभ अंदर डालकर उनका सारा रस पीने लगा।
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दो मिनट में ही दीदी का मुंह खुल गया, वो भी मेरी जीभ को चूसने लगीं और हल्की-हल्की सिसकारी लेने लगीं, आह्ह्ह्ह। मैंने उनके गाल, कान की लौ, गर्दन, कंधे सब कुछ चूमना शुरू कर दिया। गर्दन पर हल्के-हल्के दांत गड़ा कर काटता और फिर जीभ से चाटता तो दीदी की साँसें तेज हो जातीं, आह्ह्ह रंजन। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने उनका कुर्ता धीरे-धीरे ऊपर उठाया, पेट पर किस करना शुरू किया, नाभि में जीभ घुमाई तो दीदी की कमर अपने आप ऊपर उठने लगी। फिर कुर्ता पूरा ऊपर करके उनकी ब्रा में कैद चूचियों को देखा और ब्रा के ऊपर से ही दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगा, निप्पल्स को उंगलियों से मसलता और खींचता रहा।
दीदी अब खुलकर सिसकार रही थीं, आह्ह्ह इह्ह्ह्ह। मैंने ब्रा का हुक खोला और उनकी बड़ी-बड़ी गोरी चूचियाँ आजाद कर दीं। सबसे पहले दोनों निप्पल्स को उंगलियों से मरोड़ा, खींचा, फिर एक चूची मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा, दूसरी को हाथ से मसलता रहा।
निप्पल को दांतों से हल्का काटा तो दीदी चिहुंक उठीं, आह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है, पर साथ ही उनकी कमर और तेजी से ऊपर उठ रही थी। मैंने दोनों चूचियों को बारी-बारी चूसा, काटा, मसलते हुए एकदम लाल कर दिया। दीदी का पूरा बदन अब आग की तरह तप रहा था।
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फिर मैं नीचे खिसका। सलवार का नाड़ा खोला और धीरे-धीरे सलवार नीचे सरकाते हुए उनकी जाँघों को चूमने लगा। अंदरूनी जाँघों पर हल्के-हल्के दांत गड़ाए, चूमा, फिर चूत के ठीक ऊपर वाली जगह पर जीभ फेरी। दीदी तड़प उठीं, आह्ह्ह्ह ऊउइइइ रंजन मत तड़पाओ।
मैंने उनकी चूत की बाहरी लिप्स को उंगलियों से फैलाया, गुलाबी क्लिटोरिस को देखकर उस पर हल्के से जीभ फेरी तो दीदी का पूरा बदन काँप गया, आह्ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह्ह। मैंने क्लिट को जीभ से रगड़ना शुरू किया, कभी तेज, कभी धीरे, कभी चूसता, कभी हल्का काटता।
साथ में दो उंगलियाँ चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा। दीदी अब पूरी तरह पागल हो चुकी थीं, उनकी कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी, आह्ह्ह्ह्ह ऊईईईई मेरी चूत खा जाओ रंजन, आह्ह्ह्ह्ह्ह। मैंने उनकी चूत को ऐसे चाटा जैसे भूखा शेर हो, जीभ अंदर तक घुसाई, सारा रस पी गया। “Sex With Sleeping Sister”
फिर दीदी को पलटकर लिटाया और उनकी गांड को दोनों हाथों से फैलाया। गांड का गुलाबी छेद देखकर मैंने उस पर जीभ फेरी तो दीदी चौंक गईं, आह्ह्ह्ह गंदा मत करो, पर मैंने उनकी गांड को भी खूब चाटा, जीभ अंदर डालकर चोदने लगा। दीदी अब सिर्फ सिसकारियाँ भर रही थीं, ऊउइइइइ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
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अब दीदी ने खुद मेरे कपड़े उतार दिए। मेरा मोटा लंड देखकर उनकी आँखें फैल गईं, “इतना मोटा?” वो लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगीं, फिर होंठों से छुआ, सुपारे को चूमा और धीरे-धीरे मुंह में ले लिया। ग्ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, दीदी बहुत देर तक मेरा लंड चूसती रहीं, कभी पूरा अंदर, कभी गोलियाँ चूसतीं, कभी लंड को होंठों पर रगड़तीं।
मैं उनका सिर पकड़कर मुंह चोदने लगा, उनके गले तक लंड पहुँच रहा था, आंसू आ गए लेकिन वो नहीं रुकीं। फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए। दीदी ऊपर थीं, उनकी चूत मेरे मुंह पर और उनका मुंह मेरे लंड पर। मैं उनकी चूत और गांड दोनों चाट रहा था, दीदी मेरा लंड पागलों की तरह चूस रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
पंद्रह मिनट तक हमने एक-दूसरे को चाटा-चूसा। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने दीदी को लिटाया, उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और अपना मोटा लंड उनकी चूत पर रगड़ा। दीदी बोलीं, “धीरे रंजन, तेरा बहुत मोटा है।” मैंने सुपारा अंदर किया तो दीदी चिल्लाईं, आह्ह्ह्ह्ह मर गई, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर ले लिया।
मैंने पहले धीरे-धीरे चोदा, फिर स्पीड बढ़ाई, फच फच फच की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। दीदी की चूचियाँ उछल रही थीं, मैं गालियाँ दे रहा था, ले रण्डी दीदी, आज तेरी चूत फाड़ दूंगा। पंद्रह मिनट बाद दीदी झड़ गईं, उनका रस मेरे लंड पर बह रहा था।
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मैंने लंड बाहर निकाला और उनके मुंह में डालकर सारा माल उड़ेल दिया, दीदी ने सब पी लिया। थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार दीदी ऊपर चढ़ीं और मेरे लंड पर बैठ गईं, पूरा लंड उनकी चूत में गायब। वो ऊपर-नीचे उछल रही थीं, मैं उनकी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था, थप्प थप्प थप्प।
फिर मैंने उन्हें डॉगी बनाया और पीछे से चूत में लंड पेल दिया। बाद में थूक लगाकर उनकी गांड भी मारी। दीदी पहली बार गांड मारवा रही थीं, बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर मज़ा आने लगा। फिर मैंने उन्हें गोदी में उठाया, दीवार से सटाकर खड़ा-खड़ा चोदा। पूरी रात और सुबह तक हमने छह-सात बार चुदाई की। दीदी की चूत-गांड दोनों सूज गईं, चूचियाँ और गांड पर मेरे दांतों के निशान थे। अब भी जब भी मौका मिलता है, मैं पहले दीदी को घंटों छूता-चाटता-काटता हूँ और फिर खूब चोदता हूँ। दीदी भी अब मेरे बिना नहीं रह पातीं।
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