Sali Didi Chudai Kahani
मैं सुजीत हूँ। वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे यादगार पल बन गया- जब मैं अपनी बहन के घर गया था। मेरी बहन दीपिका शादीशुदा थी, उसका घर दिल्ली के एक शांत इलाके में। मैं वहाँ कुछ दिनों के लिए रुका था, काम के सिलसिले में। लेकिन वो घर मुझे एक ऐसी रात दे गया, जो मैं कभी नहीं भूल सकता। Sali Didi Chudai Kahani
मेरी बहन की ननद, यानी उसकी पति की बहन, नाम था सोनिया। सोनिया 22 साल की थी, एकदम जवान, गोरी-चिट्टी, लंबे बालों वाली, और उसकी आँखों में एक मासूम सी चमक थी जो मुझे पहली नजर में ही आकर्षित कर गई। वो कॉलेज की छात्रा थी, घर में रहकर पढ़ाई करती थी। हम दोनों की उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था- मैं 25 का था- और शायद यही वजह थी कि हमारी बातचीत जल्दी ही दोस्ताना हो गई।
पहले दिन तो सब सामान्य था। बहन और जीजाजी काम पर चले जाते थे, और मैं घर में सोनिया के साथ अकेला रहता। हम साथ में चाय पीते, टीवी देखते, और हल्की-फुल्की बातें करते। लेकिन दूसरे दिन शाम को, जब बारिश हो रही थी, कुछ ऐसा हुआ जो सब बदल गया। मैं बालकनी में खड़ा बारिश देख रहा था, ठंडी हवा मेरे चेहरे पर लग रही थी, और तभी सोनिया आई।
वो सफेद टॉप और शॉर्ट्स में थी, उसके बाल गीले थे जैसे वो अभी नहाकर आई हो। “भैया, क्या सोच रहे हो?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा। मैंने मुड़कर देखा, और उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। “कुछ नहीं, बस बारिश का मजा ले रहा हूँ,” मैंने कहा, लेकिन मेरी नजर उसके गीले होंठों पर अटक गई।
हम बात करने लगे, लेकिन मेरी नजरें उसके गीले बालों से टपकती बूंदों पर अटक गईं, जो उसके सफेद टॉप को पारदर्शी बना रही थीं, उसके निप्पल्स की हल्की आउटलाइन दिख रही थी जो मुझे पागल कर रही थी, मन में सोचा- ये गलत है, वो तेरी बहन की ननद है, लेकिन उसकी मुस्कान इतनी मासूम और उत्तेजक थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाया।
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धीरे-धीरे वो मेरे करीब आ गई, बारिश की बूँदें बालकनी में छींटे मार रही थीं, ठंडी हवा हमारी त्वचा पर सरसराती हुई हमें और पास खींच रही थी, उसकी सांसों से आने वाली गर्माहट मेरे गाल पर लग रही थी, और उसकी खुशबू- नहाने के बाद की ताजा साबुन की मिली हुई उसकी प्राकृतिक मादक गंध- मुझे मदहोश कर रही थी।
“भैया, आप बहुत हैंडसम हो,” उसने शरमाते हुए कहा, उसकी सांसें तेज हो गईं, उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी जैसे वो भी इस आकर्षण को महसूस कर रही हो। मैं हैरान था, लेकिन मेरे दिल में एक जंग छिड़ गई- इच्छा की आग जो मेरे लिंग को सख्त कर रही थी- “सोनिया, तुम भी बहुत खूबसूरत हो, इतनी कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा.”
मैंने कहा और अनजाने में मेरा हाथ उसके कंधे पर रख दिया, उसकी त्वचा इतनी गर्म और नरम थी कि मेरी उंगलियां खुद-ब-खुद उसकी गर्दन की ओर सरकने लगीं। वो नहीं हटी, बल्कि और करीब आ गई, उसकी गर्म साँस मेरे गाल पर लगी, और मैंने महसूस किया कि उसका शरीर कितना नरम और उत्तेजक है।
“क्या मैं तुम्हें छू सकता हूँ?” मैंने धीरे से पूछा, क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि कुछ जबरदस्ती हो। “हाँ भैया… प्लीज,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखें बंद हो गईं। मैंने उसकी गर्दन पर अपना मुँह रखा, हल्के से चूमा, उसकी त्वचा का स्वाद हल्का नमकीन था, जैसे बारिश की बूंदों से मिला हुआ.
और वो सिहर उठी, “ओह… सुजीत… ये इतना अच्छा लग रहा है,” उसने सिसकारी ली, उसके हाथ मेरी कमीज पकड़ने लगे। मैंने धीरे-धीरे उसके कंधे से हाथ नीचे सरकाया, उसके कमर को सहलाया, उसकी पीठ पर उंगलियाँ फेरते हुए, और वो मेरे सीने से सट गई, उसकी सांसें मेरी छाती पर लग रही थीं, गर्म और तेज।
हम कमरे में चले गए, जहाँ लाइट्स धीमी थीं और बाहर बारिश की आवाज आ रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर बिठाया और धीरे से उसके गाल पर हाथ फेरा, उसकी त्वचा इतनी मुलायम थी जैसे रेशम। मैंने उसके होंठों पर अपना होंठ रखा, और वो पहला चुंबन इतना मीठा था कि मेरी सारी इंद्रियाँ जाग गईं, उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली, गर्म और गीली, और हम दोनों की साँसें मिलकर एक हो गईं।
“सोनिया, क्या तुम सच में चाहती हो ये? मैं तुम्हारी चूत में अपना लंड डालूं?” मैंने रुककर फुसफुसाया, मेरी सांसें उसकी गर्दन पर लग रही थीं। “हाँ सुजीत… पहली बार है, लेकिन तुम्हारे साथ- तुम्हारा मोटा लंड मुझे चोदे, प्लीज… मैं गीली हो चुकी हूँ तुम्हारे लिए,” उसने शरमाते हुए कहा, उसकी आवाज कांपती हुई, आँखों में इच्छा की चमक थी।
मैंने धीरे से उसका टॉप ऊपर किया, और उसके स्तनों को देखा- गोल, उभरे हुए, गुलाबी निप्पल्स जो सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें सहलाया, उँगलियों से दबाया, और सोनिया की सिसकारी निकल गई, “आह… सुजीत…” उसने मोआन किया, उसकी पीठ झुक गई। मैंने अपना मुँह उसके एक स्तन पर रखा, जीभ से चाटा और चूसा, उसका स्वाद नमकीन और मीठा था, और उसकी साँसें तेज हो गईं।
दूसरे स्तन को हाथ से मसलते हुए, मैंने निप्पल को उंगलियों से घुमाया, हल्का खींचा, और वो सिसक उठी, “ओह्ह… सुजीत… चूसो इन्हें जोर से, मुझे दर्द और मजा दोनों चाहिए,” उसने फुसफुसाया, उसके हाथ मेरे बालों में उलझ गए। मैंने बारी-बारी से दोनों स्तनों को चाटा, चूसा, और काटा, उसकी त्वचा पर लाल निशान छोड़ते हुए, और वो कमर हिलाने लगी, जैसे इच्छा की आग में तड़प रही हो।
मेरे हाथ उसके शॉर्ट्स में घुस गए, और मैंने महसूस किया कि वो पहले से ही गीली हो चुकी थी। “तुम इतनी गर्म हो,” मैंने फुसफुसाया, और अपनी उँगलियाँ उसकी योनि पर फेरने लगा। वो काँप रही थी, उसकी टाँगें फैल गईं, और वो मेरे कंधे पकड़कर सिसक रही थी “ओह्ह… सुजीत… आह्ह… ह्ह्ह… इह्ह…” उसकी आवाज में दर्द और उत्तेजना का मिश्रण था लेकिन उत्साह साफ झलक रहा था।
मैंने अपनी उँगलियाँ धीरे-धीरे उसकी योनि के होंठों पर फेरा, पहले बाहर से छेड़ते हुए, उसकी गीली चिकनाहट मेरी उँगलियों पर लग रही थी, उसकी मादक गंध- एक मीठी, मिट्टी जैसी सुगंध- कमरे में फैल रही थी जो मुझे और पागल बना रही थी, मन में सोचा- ये कितनी टाइट है, पहली बार की तरह, मैं इसे धीरे-धीरे खोलूंगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली, उसकी दीवारें मेरी उंगली को जकड़ रही थीं, गर्म और स्पंजी, हर हलचल पर वो सिसकती ‘आऊ… ऊऊ… ऊउइ… सुजीत, प्लीज… और अंदर, धीरे मत करो,’ वो बोली, उसकी कमर ऊपर उठ रही थी, मैंने स्पीड बढ़ा दी, दो उंगलियां डालकर अंदर-बाहर करने लगा.
उसके रस मेरी उँगलियों पर बहने लगे, चिपचिपे और गर्म, और वो जोर से काँपी, उसकी योनि की मांसपेशियां सिकुड़ रही थीं ‘उईईई… आह ह ह ह ह्हीईई… बस… नहीं रुकना!’ उसकी आवाज कमरे में गूँज रही थी, उसका पसीना उसके जांघों पर चमक रहा था। फिर मैंने अपना मुँह उसकी योनि पर रखा, पहले जीभ से हल्के से चाटा, उसकी क्लिटोरिस को छेड़ा जो सख्त और सूजी हुई थी.
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मैंने उसे दाँतों से हल्का काटा और वो चीखी ‘ओह्ह… आह्ह… सुजीत… गी… गी… गों… इतना अच्छा लग रहा है, चाटो मुझे, पूरा खा जाओ!’ उसकी टाँगें मेरे सिर को दबा रही थीं, उसकी जांघों की गर्मी मेरे गालों पर लग रही थी, मैंने जीभ अंदर डालकर उसे खाया, घुमाकर हर कोने को छुआ. “Sali Didi Chudai Kahani”
उसके रस का स्वाद मीठा और नमकीन था, एक नशीला अमृत, जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था, मेरा लिंग दर्द कर रहा था रुकने की मिन्नत कर। मैंने जीभ से उसकी क्लिट को चूसा, उंगलियाँ अंदर डालकर मिलाकर, और वो तड़प उठी, “सुजीत… मैं नहीं सह पाऊंगी… आह्ह… ह्ह… ऊईईई… और चाटो, तुम्हारी जीभ जादू है!” उसकी आवाज में हल्की हँसी थी, जैसे मजा लेते हुए।
मैंने अपने कपड़े उतारे, और मेरा लिंग सख्त हो चुका था, उसे देखकर सोनिया की आँखें फैल गईं। “ये… इतना बड़ा, मोटा लंड,” उसने शरमाते हुए कहा, अपना हाथ उस पर रखा, ऊपर-नीचे सहलाते हुए, उसकी छुअन इतनी नरम थी कि मैं कराह उठा ‘आह… सोनिया… चूसो इसे, अपना मुंह भर लो मेरे लंड से,’ मैंने कमांडिंग टोन में कहा.
और वो झुकी, पहले जीभ से टिप चाटी, फिर मुंह खोलकर अंदर लिया, ‘ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गोग… सुजीत, तुम्हारा स्वाद कितना नमकीन है, मैं पूरा गला उतारूंगी,’ उसने मुंह में लेते हुए हल्का गुनगुनाया, वो बचपन का गाना जो हमने पहले बात किया था, जो मेरे लंड पर कंपन पैदा कर रहा था, एक अनोखा सुख, “तेरा गुनगुनाना मुझे मार डालेगा,” मैंने कराहते हुए कहा, उसके बाल पकड़कर हल्का धक्का दिया।
वो थोड़ी देर चूसती रही, फिर मैंने उसे रोका क्योंकि मैं नहीं चाहता था जल्दी झड़ना। मैंने उसे लेटाया, उसके पैरों के बीच आया, और धीरे से अपना लिंग उसकी योनि पर रगड़ा, वो गीली थी, गर्म और तैयार। “क्या मैं अंदर डालूँ?” मैंने पूछा। “हाँ… प्लीज,” उसने कहा, उसकी आँखें बंद।
मैंने धीरे से धक्का दिया, पहले सिर्फ टिप अंदर डाला, उसकी टाइट योनि की गर्मी मुझे घेर रही थी, दर्द और आनंद का मिश्रण उसकी चीख में- ’आह इह्ह… ओह्ह… सुजीत… धीरे, लेकिन रुकना मत’- लेकिन वो नहीं रुकी, बल्कि अपनी कमर ऊपर उठाई, मुझे और अंदर खींचते हुए, उसकी योनि इतनी टाइट थी कि हर इंच पर आनंद की लहर दौड़ती थी, हमारी साँसें तेज, पसीना बह रहा था. “Sali Didi Chudai Kahani”
उसकी पीठ पर चिपचिपा, मेरी छाती पर उसका मिश्रित- और कमरे में सिर्फ हमारी मोआनिंग, बारिश की थपथपाहट, और हमारे शरीरों की चपचपाहट थी। मन में सोचा- ये पाप है, लेकिन इतना मीठा कि मैं इसमें डूबना चाहता हूँ, पास ही टेबल पर दीपिका की फोटो थी, जो हल्की हिल रही थी हमारे धक्कों से, एक पल को अपराधबोध हुआ लेकिन वो इच्छा को और भड़का रहा था।
सोनिया की टाँगें मेरी कमर पर लिपट गईं और वो मेरे साथ ताल मिलाने लगी ‘सुजीत… तेज चोदो मुझे… आह… ह्ह्ह… इह्ह… ऊईईई, तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया, और जोर से पेलो!’ उसने सांस फूलते हुए कहा, और मैंने स्पीड बढ़ा दी, गहरे धक्के देते हुए। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया, उसकी कमर पकड़ी, उसके गोल नितंबों को सहलाते हुए पीछे से धक्के दिए.
हर थ्रस्ट पर उसके स्तन हिल रहे थे, मैंने उन्हें दबाया, निप्पल्स को मसलते हुए, बारिश की बूंदें खुली बालकनी से उसकी पीठ पर गिर रही थीं, ठंडी लेकिन हमारी गर्मी से भाप बन रही थीं, मैंने उन्हें चाटा, “ओह ! आह.. ह्ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. सुजीत, पीछे से इतना अच्छा लगता है, और जोर से! बारिश हमें आशीर्वाद दे रही है,” उसकी सिसकारियाँ तेज हो गईं, उसकी योनि मेरे लिंग को दूध रही थी, हल्की हँसी के साथ।
फिर मैंने उसे ऊपर बिठाया और वो मेरे लिंग पर बैठ गई, धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, उसकी आँखें बंद, सिर पीछे झुका ‘आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह… सुजीत… इतना गहरा, तुम्हारा लंड मुझे भर रहा है’ उसकी आवाज में उत्तेजना थी और मैंने नीचे से धक्के दिए, उसके क्लिट को रगड़ते हुए, उसका शरीर काँप रहा था. “Sali Didi Chudai Kahani”
उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे, खरोंचते हुए, और आखिरकार वो झड़ गई, उसकी योनि सिकुड़ती हुई, रस बहता हुआ, एक जोरदार सिसकारी के साथ ‘उईईई… आह्ह… ह्ह.. ओह्ह…! मैं आ रही हूँ, तुम्हारे लिए!’ उसने मेरे कंधे को काटते हुए कहा, वो काटना इतना उत्तेजक था कि मैं भी नहीं रुक सका। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं भी नहीं रुक सका और उसके अंदर ही झड़ गया, गर्म तरल उसकी योनि में भरते हुए। हम दोनों हाँफते हुए लेटे रहे, एक-दूसरे से लिपटे। “ये अद्भुत था,” उसने फुसफुसाया, और मैंने उसे चूमा। वो रात हमारी पहली थी, लेकिन हम दोनों जानते थे कि ये सिर्फ शुरुआत है.
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उस पहली रात के बाद सोनिया और मैं पूरी तरह बेकाबू हो चुके थे, हर दिन दीपिका और जीजाजी के ऑफिस जाते ही घर हमारा हो जाता था और मौका मिलते ही हम एक-दूसरे पर टूट पड़ते थे, मन में अपराधबोध की लहरें उठती रहतीं क्योंकि ये मेरी सगी बहन दीपिका का घर था और उसकी सगी ननद सोनिया को मैं रोज चोद रहा था, लेकिन वो अपराधबोध ही आग को और भड़का देता था, जैसे कोई निषिद्ध फल जितना मना उतना ही मीठा लगता।
पहले दिन तो किचन में चाय बनाते वक्त ही शुरू हो गया था, सोनिया चाय उबाल रही थी और भाप उसके चेहरे पर चढ़ रही थी, उसके गीले बाल गर्दन पर चिपक गए थे, उसकी त्वचा से चाय की हल्की गंध मिली हुई उसके पसीने की नमकीन, गर्म खुशबू मुझे मदहोश कर गई थी।
मैं पीछे से आया, उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और धीरे से उसकी गर्दन पर होंठ रखे, उसकी त्वचा इतनी मुलायम और गर्म थी कि मेरी साँसें खुद तेज हो गईं। वो सिहर उठी और फुसफुसाई, “सुजीत… कोई आ गया तो?” लेकिन उसकी आवाज में डर कम था, उत्साह ज्यादा, उसकी साँसें मेरे गाल पर गर्माहट बिखेर रही थीं।
मैंने उसकी साड़ी ऊपर की, पैंटी को साइड किया और उंगलियाँ उसकी गीली चूत पर फेरीं, वो इतनी गर्म और चिपचिपी थी कि उसके रस की मीठी-तेज़, मादक गंध कमरे में फैल गई, मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मन में सोचा- ये दीपिका की ननद है, लेकिन इसकी बुर की ये गंध इतनी नशीली है कि मैं रुक नहीं पा रहा।
मैंने धीरे-धीरे दो उंगलियाँ अंदर डालीं और अंदर-बाहर करने लगा, उसकी चूत की दीवारें मेरी उंगलियों को जकड़ रही थीं, गर्म और स्पंजी। वो चाय का कप छोड़कर मेरे कंधे पकड़ ली और सिसकी, “आह्ह… सुजीत… धीरे… चाय गिर जाएगी…” लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, उसकी जांघें काँप रही थीं। “Sali Didi Chudai Kahani”
मैंने स्पीड बढ़ाई, क्लिट को अंगूठे से रगड़ा और उसके रस मेरी उंगलियों पर बहने लगे, चिपचिपे और गर्म। वो काँपकर झड़ गई, उसकी सिसकारियाँ तेज होती गईं “आऊ… ऊऊ… ऊउइ… उईईई… आह ह ह ह ह्हीईई!” और उसका शरीर झटके खा रहा था, पसीना उसकी गर्दन पर चमक रहा था।
हमने जल्दी से खुद को संभाला, लेकिन वो दिन भर मेरी आँखों में वो चमक रही थी, जैसे कोई गुप्त वादा। अगले दिन लिविंग रूम में सब कुछ और गहरा हो गया, टीवी पर कोई फैमिली ड्रामा चल रहा था जहां भाई-बहन का रिश्ता दिखाया जा रहा था, सोनिया मेरी गोद में सर रखकर लेटी थी और उसका हाथ मेरे लंड पर सरक गया, ऊपर-नीचे सहलाने लगा, उसकी उंगलियों की नरमी और गर्माहट मेरे लंड को सख्त कर रही थी।
मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की, ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाया, उसके निप्पल्स सख्त हो चुके थे और उसकी साँसें तेज होकर मेरी छाती पर लग रही थीं, उसकी त्वचा से आने वाली हल्की फूलों वाली खुशबू मुझे और करीब खींच रही थी। वो फुसफुसाई, “सुजीत… भाभी की फोटो हमें देख रही है…” और दीवार पर दीपिका और जीजाजी की शादी की तस्वीर लगी थी, वो नजर मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
मैंने सोनिया को गोद में उठाया, उसकी शॉर्ट्स नीचे की और अपना लंड बाहर निकाला, वो ऊपर बैठ गई और धीरे-धीरे अंदर लिया, उसकी चूत की गर्माहट और चिपचिपाहट मेरे लंड को घेर रही थी। हमारी साँसें टीवी की आवाज में मिल रही थीं, हर धक्के पर मैं सोचता- अगर दीपिका अभी आ गई तो?
लेकिन वो सोच ही मुझे और जोर से पेलने पर मजबूर कर रही थी, उसके नितंब मेरे पेट से टकरा रहे थे। सोनिया सिसक रही थी “आह… ह्ह्ह… भाभी की सोफे पर मुझे चोद रहा है… आह्ह… और तेज… पेल दे रे!” और हम जल्दी में झड़े, उसके रस और मेरे रस की मिली हुई गंध कमरे में फैल गई, लेकिन वो रिस्क हमें और भूखा बना गया। “Sali Didi Chudai Kahani”
तीसरे दिन शाम को सोनिया के कमरे में हम पूरी तरह खुल गए थे, मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और दीपिका का दुपट्टा पास पड़ा था, मैंने उसे सोनिया की आँखों पर बाँध दिया, “अब सिर्फ महसूस करो,” मैंने कहा और उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने फ्रिज से आइस क्यूब लिया और उसकी जांघों पर फेरा, ठंडक से उसकी त्वचा पर रोंगटे खड़े हो गए और वो काँप उठी, “ओह्ह… सुजीत… ये क्या…”
उसकी आवाज में उत्सुकता और उत्तेजना मिली हुई थी। मैंने आइस उसके निप्पल्स पर रगड़ा और फिर मुँह से चूसा ठंडा और गर्म का मिश्रण उसे तड़पा रहा था, उसकी कमर झुक रही थी और उसके स्तनों से आने वाली गर्माहट मेरे होंठों पर लग रही थी। फिर नीचे गया, आइस उसकी चूत के होंठों पर फेरा और वो चीखी “आह्ह… ठंडा… लेकिन अच्छा… अब चाटो!”
मैंने जीभ से चाटा, पहले बाहर से छेड़ते हुए, उसकी मादक गंध, मीठी, हल्की मिट्टी जैसी, मिली हुई उसके पसीने की नमकीन खुशबू- मुझे और नीचे खींच रही थी, उसके रस का स्वाद मेरी जीभ पर फैल रहा था। मन में सोचा- ये दीपिका की ननद है, लेकिन इसकी बुर की ये गंध इतनी नशीली है कि मैं रुक नहीं पा रहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने जीभ अंदर डाली, क्लिटोरिस को चूसा, उंगलियाँ मिलाकर अंदर-बाहर किया। जैसे ही वो झड़ने वाली थी- उसकी बुर की दीवारें सिकुड़ने लगीं, उसकी जांघें थरथराने लगीं- मैं रुक गया, सिर्फ हल्के से जीभ की नोक से क्लिट को छेड़ता रहा। “प्लीज… सुजीत… मुझे झड़ने दो… आह… ह्ह्ह… इह्ह!”
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वो गिड़गिड़ाई, उसकी साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं, उसका शरीर पसीने से चमक रहा था। मैंने तीन बार ऐसा किया, हर बार तनाव बढ़ाते हुए, उसकी सिसकारियाँ तेज होती गईं- ”ऊऊ… ऊउइ… ऊई… उईईई…”- जब तक वो पूरी तरह बर्बाद नहीं हो गई। आखिर में तेज चाटा, उंगलियाँ अंदर घुमाईं और वो झड़ गई.
उसकी बुर सिकुड़ती हुई, रस की धार बहती हुई मेरे मुँह पर- ”उईईई… आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह… मैं आ गई… तुम्हारी जीभ ने मुझे मार डाला, सुजीत!” उसका शरीर झटके खा रहा था, पसीना उसकी पीठ पर चमक रहा था, उसकी जांघें अभी भी काँप रही थीं, कमरे में उसके रस की गंध फैली हुई थी।
फिर सोनिया ने मुझे लिटाया और बोली, “अब मेरी बारी,” आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी। उसने पहले जीभ से टिप चाटी, फिर मुंह में लिया, डीपथ्रोट ट्राई करते हुए गला घोंटने जैसी आवाजें निकलीं- ”ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गोग…”- और बीच-बीच में हल्का गुनगुनाया, वो पुराना बचपन का गाना, कंपन मेरे लंड पर महसूस हो रही थी, उसके गर्म मुंह की नमी और लार की चिपचिपाहट मुझे और सख्त कर रही थी। “Sali Didi Chudai Kahani”
मैं कराहा “सोनिया… तेरा गुनगुनाना मुझे पागल कर देगा… चूस जोर से, अपना गला भर ले मेरे लौड़े से… हाँ… और गहरा!” उसके लार मेरे लंड पर बह रहे थे, चिपचिपे और गर्म, उसके बालों से आने वाली शैंपू की खुशबू मेरे नाक में भर रही थी। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया, वो चारों पर हो गई, नितंब ऊपर उठाए.
मैं पीछे से घुसा, हर धक्का जोरदार था और चप-चप की आवाज कमरे में गूंज रही थी, उसके नितंबों की मुलायम त्वचा मेरे पेट से टकरा रही थी। सोनिया चिल्ला रही थी “सुजीत… आह… पेल मुझे जोर से रे… भाभी के बिस्तर के पास, मेरी बुर को फाड़ दे अपने मोटे लौड़े से… हाँ… और अंदर डाल… मैं तेरी रंडी बन गई हूँ… ऊह… पेल ना, और जोर से!”
मैं भी बोला “तेरी चूत कितनी टाइट… अगर दीपिका अभी आ गई तो क्या होगा?” ये गंदी बातें हमें और बेकाबू बना रही थीं, मैं उसकी कमर पकड़े जोर-जोर से धक्के दे रहा था, उसके स्तन हिल रहे थे, पसीना हमारी पीठ पर बह रहा था और कमरे में हमारे शरीरों की मिली हुई गंध फैली हुई थी।
तभी दरवाजा खुला और मेरा खून सूख गया, दीपिका खड़ी थी, मेरी सगी बहन और सोनिया की भाभी, ऑफिस से जल्दी लौट आई थी। उसकी आँखें फैली हुईं थीं- अपनी सगी ननद को घोड़ी बनाकर अपने सगे भाई से चुदवाते देखकर, मेरा लंड अभी सोनिया की चूत में था और चपचपाहट की आवाज रुक गई थी।
सोनिया भी घबरा कर सिकुड़ गई। दीपिका पत्थर हो गई, उसकी नजर मेरे मोटे लंड पर अटकी जो सोनिया की गीली चूत से बाहर निकल रहा था, फिर सोनिया के हिलते स्तनों पर, उसकी साँसें तेज हो रही थीं और उसकी त्वचा पर हल्की लाली चढ़ गई थी। “Sali Didi Chudai Kahani”
वो कमरे में आई और दरवाजा बंद किया, उसकी साड़ी का पल्लू सरक रहा था, उसके स्तन उभरते दिख रहे थे और उसके शरीर से आने वाली परफ्यूम की हल्की गंध कमरे में मिल गई। “ये… ये क्या हरकत है तुम दोनों की?” उसकी आवाज काँप रही थी, “सुजीत… तू मेरा सगा भाई है… और सोनिया तू मेरी सगी ननद… ये क्या गंदगी?”
लेकिन वो पास आती गई, उसकी साँसें तेज थीं और उसकी आँखें मेरे लंड से हट नहीं रही थीं। मन में वो सोच रही थी- बचपन में हम साथ नहाते थे, खेलते थे, सुजीत मुझे गोद में उठाता था, कहीं गहरे में एक अनकही चाहत थी जो कभी बाहर नहीं आई, अब सामने था- उसका सगा भाई नंगा, इतना मर्दाना, उसकी चूत गीली हो रही थी और उसकी जांघें हल्की काँप रही थीं।
“ये राज बाहर नहीं जाना चाहिए,” वो बोली, लेकिन उसकी नजर मेरे सख्त लंड पर थी, पल्लू फिर सरका और उसके निप्पल्स साड़ी के ऊपर से दिख रहे थे, वो खुद को छू रही थी हल्के से, लेकिन दिखावा कर रही थी गुस्से का। सोनिया और मैं घबराए थे, लेकिन सोनिया ने हिम्मत की और बोली, “भाभी… आप भी…”
दीपिका करीब आई, पहले सोनिया को देखा फिर मुझे और बोली, “तूने मेरी ननद को इतने जोर से चोदा… अब मुझे दिखा कितना मर्द है मेरा सगा भाई,” उसकी आवाज में गुस्सा कम था, वासना ज्यादा, उसकी साँसें गर्म होकर मेरे चेहरे पर लग रही थीं। दीपिका ने धीरे-धीरे साड़ी उतारी, उसके गोरे स्तन बाहर आए, गुलाबी निप्पल्स सख्त और उसका मंगलसूत्र लटक रहा था. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी त्वचा से आने वाली हल्की पसीने की गंध मिली हुई उसकी परफ्यूम की खुशबू कमरे में फैल गई। वो सोनिया के पास गई, उसे चूमा- पहले होंठों पर, फिर गर्दन पर, सोनिया ने जवाब दिया और हल्की हँसी के साथ बोली “भाभी… हम अब सैलियाँ से ज्यादा…” दीपिका नीचे झुकी, सोनिया की चूत चाटी- जहाँ मेरा रस लगा था और फुसफुसाई, “सोनिया… तेरी बुर में मेरे भाई का रस… मैं चाट रही हूँ… कितना नमकीन है… आह… तू मेरी रंडी बन, मैं तुझे खाती रहूँ… ओह्ह… और फैला अपनी टाँगें!”
सोनिया सिसकी “आह्ह… भाभी… चाटो… ओह्ह… आपकी जीभ कितनी गर्म… ऊई… उईईई!” दीपिका का मंगलसूत्र सोनिया की जांघ पर रगड़ रहा था, ठंडी धातु गर्म त्वचा पर और सोनिया की जांघें काँप रही थीं, कमरे में उनके रस की मिली हुई गंध फैल रही थी। “Sali Didi Chudai Kahani”
मैं देखता रहा, लंड दर्द कर रहा था और मेरी साँसें तेज हो रही थीं। दीपिका मेरे पास आई, उसने मेरा लंड हाथ में लिया और बोली, “ये मेरा सगा भाई का लौड़ा… इतना मोटा, इतना गर्म,” उसकी उंगलियों की गर्माहट और दबाव मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मैंने उसे लिटाया, पहले उसके स्तनों को चूसा, निप्पल्स काटा और वो कराह रही थी “सुजीत… सगे भाई… चूस अपनी बहन के स्तन… आह्ह… याद है बचपन में तू इन्हें देखता था, अब चूस रहा है?”
उसके स्तनों का स्वाद नमकीन और मीठा था। फिर मैं नीचे गया, उसकी चूत चाटी, उसका स्वाद सोनिया से अलग- ज्यादा मीठा, ज्यादा परिपक्व, उसके रस की गंध मुझे और पागल बना रही थी और उसकी जांघें मेरे गालों को दबा रही थीं। वो तड़प रही थी “चाट मुझे… तेरी सगी बहन की बुर चाट… ओह्ह… ह्ह्ह… मैं कितने दिन से भूखी थी… याद है बचपन में तू मेरी गोद में सोता था, अब मेरी गोद भरने वाला है!”
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा- पहले सिर्फ टिप- उसके रस की चिपचिपाहट मेरे लंड पर लग रही थी, उसकी खुशबू- उसके शरीर की मस्की गंध, मिली हुई उसकी उत्तेजना की तेज़, नमकीन सुगंध- मुझे पागल बना रही थी। मन में सोचा- ये मेरी सगी बहन है, लेकिन इसकी बुर की ये गर्मी मुझे खींच रही है, क्या ये पाप इतना मीठा होना चाहिए?
वो गिड़गिड़ाई “डाल ना रे… सगे भाई… अपनी बहन की गीली बुर में अपना मोटा लौड़ा पेल… आह… कितना मोटा है तेरा… चोद अपनी सगी बहन को जैसे रंडी हो… हाँ… और रगड़ो पहले!” मैंने धीरे से अंदर किया, सिर्फ आधा, उसकी टाइट दीवारें मुझे जकड़ रही थीं, गर्म और स्पंजी, उसकी चूत की गर्माहट मेरे लंड को घेर रही थी।
वो चीखी “आह इह्ह… ओह्ह… सुजीत… धीरे… लेकिन रुकना मत… आऊ… ऊऊ… ऊउइ!” उसकी पीठ झुक गई, नाखून मेरी बाहों में गड़ रहे थे। मैं बाहर निकाला, फिर अंदर, हर इंच पर आनंद की लहर दौड़ती। जैसे ही स्पीड बढ़ाई, रुक गया- सिर्फ टिप से रगड़ता रहा। तीन बार ऐसा किया, हर बार तनाव बढ़ाते हुए, उसकी सिसकारियाँ तेज- “ऊई… उईईई… आह्ह.. ह्ह.. बस अब डालो!”- जब तक हम दोनों बर्बाद नहीं हो गए।
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : हरामी पड़ोसी ने बहन की सील तोड़ दी
आखिर में पूरा अंदर, तेज धक्के दिए, उसके स्तन हिल रहे थे, मंगलसूत्र मेरी छाती पर खरोंच रहा था- ठंडी धातु गर्म त्वचा पर, मैंने उसे हल्के से दाँतों से पकड़ा, जैसे पाप का स्वाद चख रहा हूँ, उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को दूध रही थीं। वो जोर-जोर से सिसक रही थी और सोनिया की ओर देखकर बोली “सोनिया… देख… तुम्हारा भाई तो नमर्द है… छोटा लंड और दो मिनट में झड़ जाता है… मर्द तो मेरा भाई है देखो… कितना मोटा लंड… कितने देर से पेल रहा है मुझे!”
सोनिया पास बैठी देख रही थी, खुद की चूत सहला रही थी और हँसकर बोली “हाँ भाभी… असली मर्द है… आज दो-दो प्यासी औरतों को अकेले पेल कर रख दिया… आह्ह्ह्ह!” सोनिया फिर दीपिका के स्तन चूसने लगी, उसके होंठों की गर्माहट दीपिका की त्वचा पर लग रही थी। “Sali Didi Chudai Kahani”
फिर मैंने दीपिका को घोड़ी बनाया, पीछे से घुसा, उसके नितंब पकड़े जो मुलायम और गर्म थे। सोनिया नीचे लेट गई, मेरे अंडकोष चाटने लगी, उसकी जीभ की नमी और गर्माहट मुझे और तेज कर रही थी। “ओह ! आह.. ह्ह्ह.. सुजीत… सगे भाई… पीछे से पेल… और जोर से… याद है बचपन में तू मुझे पीठ पर चढ़ता था, अब मेरी पीठ पर चढ़कर पेल रहा है?”
दीपिका चिल्ला रही थी, उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं। फिर पोजिशन बदली- सोनिया ऊपर बैठ गई मेरे लंड पर, उछल रही थी “आह ह ह ह ह्हीईई… सुजीत… भाभी देख रही है… आह्ह… और गहरा!” और दीपिका मेरे मुँह पर बैठ गई, उसकी चूत की गर्माहट और रस मेरे होंठों पर बह रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं उसकी चूत चाट रहा था, सोनिया मेरे लंड पर उछल रही थी, कमरे में हमारे शरीरों की मिली हुई गंध, पसीने की नमी और सिसकारियों की आवाजें भर गई थीं। आखिरकार हम तीनों एक साथ झड़े, मैं पहले सोनिया के अंदर, फिर दीपिका के, दोनों की चूत में मेरा रस भर गया, उनके रस और मेरे रस की मिली हुई गंध कमरे में फैली हुई थी।
हम हाँफते हुए लेटे रहे, एक-दूसरे से लिपटे, उनकी त्वचा की गर्माहट और साँसों की लय मेरी छाती पर महसूस हो रही थी। दीपिका ने मुझे चूमा, फिर सोनिया को और बोली, “ये गलत है… लेकिन इतना मीठा,” उसकी आँखों में अपराधबोध और नई भूख चमक रही थी। सोनिया मुस्कुराई “अब हम तीनों साथ हैं भाभी… अगली बार और मजा करेंगे।” मैं बस देखता रहा- मेरी सगी बहन और उसकी सगी ननद, दोनों मेरे साथ, उनकी त्वचा की गर्माहट अभी भी मेरे शरीर पर लग रही थी।
Ak says
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