Randi Mummy Chudai Show
मेरा नाम प्रियांशी है। मैं सोनीपत की रहने वाली हूं। आज मेरी उम्र 28 साल है और मेरा फिगर 34-28-38 का है। मैं थोड़ी मोटी-तगड़ी हूं, लेकिन पुरुषों की नजरें अक्सर मेरी गांड और चूचियों पर टिक जाती हैं। हमारे घर में मम्मी-पापा, मुझसे दो साल छोटा भाई शांतनु और तीन साल छोटी बहन शाम्भवी है। Randi Mummy Chudai Show
मम्मी का नाम माया है। उनका फिगर 36-30-40 का है। मम्मी की कमर थोड़ी मोटी है, चूचियां भारी-भरकम और गांड इतनी मोटी कि सलवार में भी साफ उभर आती है। वो बेहद खूबसूरत हैं, गोरी चिट्ट और चेहरा ऐसा कि 40 पार होने के बाद भी कॉलेज की लड़कियों को मात दे दें।
ये कहानी उस समय की है जब मैं अभी 18-19 साल की थी, यानी लगभग 10 साल पहले। उस वक्त मैंने पहली बार अपनी मम्मी की असली चुदाई देखी थी और वो भी इतने करीब से कि आज भी याद करके मेरी चूत गीली हो जाती है। हमारी मौसी दिल्ली में रहती थीं। वो बहुत अच्छी थीं, लेकिन कैंसर की वजह से उनकी मौत हो गई।
मौसी के जाने के बाद उनका पूरा परिवार उदास हो गया। मौसा जी राजीव और उनका इकलौता बेटा कुनाल। कुनाल उस समय 21 साल का था, कॉलेज में पढ़ता था, लंबा, गोरा और काफी हैंडसम। मौसा जी मौसी की मौत से बहुत टूट गए थे। दिन-रात शराब में डूबे रहते। खाना-पीना छोड़ दिया था, बस पीते और रोते।
ये सब सुनकर पापा और मम्मी ने फैसला किया कि कुछ दिन दिल्ली जाकर मौसा जी को संभालेंगे, शायद घर में लोग रहेंगे तो वो संभल जाएं। पापा का कपड़ों का बड़ा बिजनेस है। वो अक्सर बाहर रहते हैं, इसलिए कुछ दिन दिल्ली में रहने में कोई दिक्कत नहीं थी। हम सब परिवार दिल्ली चले गए।
पहले कुछ दिन पापा और मम्मी मिलकर मौसा जी को समझाते रहे। कहते, “जो होना था सो हो गया, अब कुनाल का भी ध्यान रखना है। जिंदगी रुकती नहीं।” मौसा जी सुनते, लेकिन आंखों में आंसू आ जाते। एक हफ्ता बीत गया। पापा को वापस काम पर लौटना था।
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उन्होंने मम्मी से कहा, “माया, तुम यहां कुछ दिन और रुक जाओ। मैं बच्चों को लेकर घर चला जाता हूं। दुकान भी देखनी है।”
मम्मी ने मुझे अपने साथ रोक लिया। बोलीं, “प्रियांशी मेरे साथ रहेगी, तुम शांतनु और शाम्भवी को ले जाओ।”
पापा दोपहर में निकल गए। अब घर में सिर्फ मौसा जी, कुनाल, मम्मी और मैं थी। मौसा जी अब धीरे-धीरे उबर रहे थे। दिन में शराब नहीं पीते थे, लेकिन शाम को एक-दो पैग जरूर लगाते। एक शाम अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। छत पर बहुत सारे कपड़े सुखाए हुए थे। मम्मी जल्दी-जल्दी ऊपर गईं।
कपड़े उतारते वक्त सीढ़ियों पर उनका पैर फिसल गया। वो सीढ़ियों से लुढ़ककर नीचे आ गईं। कमर में जोर की चोट लगी। वो चिल्लाईं, “आह्ह… मेरी कमर!” मौसा जी ड्राइंग रूम में बैठे शराब का पैग पी रहे थे। मम्मी की आवाज सुनकर वो दौड़कर आए। मम्मी को सहारा देकर उठाया।
मम्मी ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं। मौसा जी ने उन्हें गोद में उठाकर बेडरूम में ले जाकर लिटा दिया। मौसा जी ने तुरंत दर्द निवारक क्रीम निकाली और मम्मी की कमर पर लगाई। दर्द की गोली भी दी। मम्मी को बोला, “आराम करो, मैं देखता हूं।” उस दिन सबने बाहर से खाना मंगवाया। मम्मी खाना भी नहीं खा पाईं ठीक से। रात को बहुत दर्द हुआ।
अगली सुबह मौसा जी जल्दी उठे और मम्मी के पास आए। पूछा, “माया, आज दर्द कैसा है?”
मम्मी कराहते हुए बोलीं, “बहुत दर्द है राजीव जी… चल भी नहीं पा रही।”
मौसा जी बोले, “उल्टा लेट जाओ, मैं फिर से दवा लगाता हूं।”
मम्मी उल्टा लेट गईं। मौसा जी ने उनका कुर्ता धीरे से ऊपर किया। रात भर ढीली हुई सलवार थोड़ी नीचे खिसक गई थी। मम्मी की मोटी, गोरी गांड की दरार साफ दिख रही थी। मौसा जी की आंखें चमक उठीं।
उन्होंने क्रीम लगाते हुए हाथ गांड की तरफ ले गए। पूछा, “यहां भी दर्द है?”
मम्मी ने हां में सिर हिलाया। मौसा जी ने तुरंत सलवार को और नीचे खींच दिया। अब मम्मी की आधी गांड नंगी हो गई। वो धीरे-धीरे दोनों गालों को मसलने लगे, क्रीम फैलाते हुए। मौसा जी बोले, “चलो, पूरा दर्द दूर कर दूं।” फिर उन्होंने दोनों गालों को फैलाकर देखा।
मम्मी की गांड का छेद और चूत की लकीर साफ दिख रही थी। मौसा जी की सांसें तेज हो गईं। फिर वो ऑफिस के लिए निकल गए और जाते-जाते बोले, “शाम को डॉक्टर दोस्त से बात करके और अच्छी दवा लाऊंगा।” शाम को मौसा जी लौटे। फ्रेश हुए, कुनाल से थोड़ी बात की, एक पैग लगाया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर दूसरा पैग हाथ में लेकर मम्मी के कमरे में आए। मम्मी बिस्तर पर लेटी आराम कर रही थीं। मौसा जी ने एक तेल की शीशी दिखाई। बोले, “डॉक्टर ने कहा है इससे अच्छे से मालिश करो, दर्द पूरी तरह चला जाएगा।” मौसा जी ने पैग खत्म किया और कहा, “उल्टा लेट जाओ माया।”
मम्मी उल्टा लेट गईं। मौसा जी ने कुर्ता ऊपर किया और बोले, “सलवार का नाड़ा ढीला कर लो, तेल कपड़ों पर न लग जाए।” मम्मी ने नाड़ा ढीला कर दिया। मौसा जी ने तेल हाथ में लिया और मालिश शुरू की। पहले कमर, फिर कूल्हे। धीरे-धीरे हाथ गांड पर पहुंच गए। “Randi Mummy Chudai Show”
अब मम्मी की पूरी गांड नंगी थी। मौसा जी दोनों गालों को मसलते, फैलाते। जब फैलाते तो गांड का छेद और चूत पूरी तरह खुल जाती। मौसा जी का अंगूठा बार-बार चूत की लकीर पर रगड़ने लगा। मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं… “आह्ह… इह्ह… राजीव जी…”
मौसा जी की हिम्मत बढ़ी। उन्होंने अंगूठा चूत के अंदर डाल दिया। फिर दो उंगलियां। मम्मी चुप रहीं, बस कराह रही थीं… “आह्ह… ओह्ह…” तभी मौसा जी ने मुझे आवाज दी, “प्रियांशी बेटा, बाहर मेरी बॉटल रखी है, वो और फ्रिज से पानी ले आना।”
मैं बाहर गई। लौटते वक्त दरवाजे से झांका तो देखा कि मौसा जी और मम्मी एक-दूसरे को गहरा किस कर रहे थे। मौसा जी का हाथ मम्मी की चूत में था, उंगलियां अंदर-बाहर हो रही थीं। मैं अंदर गई तो दोनों झट से अलग हो गए। मौसा जी बोले, “हां, इससे दर्द बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा। आज रात अच्छे से मालिश करेंगे।”
रात को खाना खाकर सब सो गए। थोड़ी देर बाद मौसा जी चुपके से हमारे कमरे में आए। उन्हें लगा कि मैं सो गई हूं। उन्होंने दरवाजा अंदर से लॉक किया। मम्मी के पास लेट गए और बोले, “बोलो माया… आज कौन सी मालिश चाहिए… आगे की या पीछे की?”
मम्मी ने जवाब नहीं दिया। बस मौसा जी की तरफ मुड़ीं और उन्हें जोर से किस करने लगीं। मौसा जी ने तुरंत मम्मी के सारे कपड़े उतार फेंके। कुर्ता, ब्रा, सलवार, पैंटी… सब फेंक दिया। मम्मी पूरी नंगी हो गईं। मौसा जी खुद भी तैयार थे। सिर्फ अंडरवियर पहना था। मम्मी ने उसे भी उतारा। “Randi Mummy Chudai Show”
मौसा जी का लंड खड़ा और मोटा था। मम्मी ने उसे हाथ में पकड़ा और मुंह में ले लिया। मम्मी पागलों की तरह चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… गोग… गी… गों… गों… की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। मौसा जी मम्मी के बाल पकड़कर उनका मुंह चोद रहे थे। “आह मेरी रंडी… मेरी लंड की प्यासी साली… आज तेरी चूत फाड़कर सोऊंगा।”
फिर मौसा जी ने मम्मी को लिटाया। अपना मुंह उनकी चूत पर रखा और जोर-जोर से चाटने लगे। जीभ अंदर-बाहर, चूत की लकीर पर रगड़ते। मम्मी चिल्ला रही थीं… “आह्ह… ओह्ह… और जोर से राजीव जी… चाटो… मेरी चूत चाटो… इह्ह… ओह्ह्ह…”
कुछ मिनट बाद मौसा जी ऊपर चढ़े। लंड चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर पेल दिया। धप्प… धप्प… धप्प… कमरा चुदाई की आवाजों से भर गया। मम्मी अपनी गांड ऊपर-नीचे करके चुदवा रही थीं। “और जोर से मेरे राजा… चोदो… मेरे भोसड़े को फाड़ दो… आह्ह्ह… ओह्ह्ह… हाय… कितना मोटा है तेरा लंड…”
मौसा जी ने मम्मी को तीन बार चोदा उस रात। पहले घोड़ी बनाकर, फिर मिशनरी में, फिर मम्मी ऊपर आकर सवार होकर। हर बार मम्मी की चूत से रस टपक रहा था। अंत में दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर ही सो गए। सुबह मौसा जी ऑफिस चले गए। मम्मी बहुत खुश और तरोताजा लग रही थीं। आज कुनाल भी कॉलेज नहीं गया था। घर पर ही था। दोपहर में किचन से कुछ गिरने की आवाज आई। मैं देखने गई तो देखा कुनाल मम्मी के पीछे खड़ा था। “Randi Mummy Chudai Show”
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मम्मी बोलीं, “कुनाल ये गलत है… मैं तुम्हारी मौसी हूं… रहने दो…”
कुनाल बोला, “पापा भी तो तुम्हारे जीजा लगते हैं। रात भर तुमने उनका लंड लिया, फिर मुझे क्यों नहीं?”
मम्मी चुप हो गईं। कुनाल ने पीछे से मम्मी की चूचियां पकड़ीं और जोर-जोर से दबाने लगा।
मम्मी बोलीं, “रहने दो बेटा… ये नहीं होना चाहिए…” लेकिन उनकी आवाज कमजोर थी। कुनाल ने मैक्सी के ऊपर से चूचियां निकालीं। ब्रा नीचे की। मम्मी की बड़ी-बड़ी, गोरी चूचियां हवा में लटक गईं। कुनाल ने गर्दन पर किस करना शुरू किया। मम्मी की आंखें बंद हो गईं। उनका हाथ कुनाल के सिर को सहलाने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो मुंह से तो बोल रही थीं “मत करो कुनाल…” लेकिन शरीर साथ दे रहा था। कुनाल ने मैक्सी पूरी ऊपर की। पैंटी उतारी और फेंक दी। फिर घुटनों पर बैठ गया और मम्मी की गांड में मुंह घुसा दिया। जीभ से गांड का छेद और चूत दोनों चाटने लगा। मम्मी दीवार से टिक गईं। कराह रही थीं… “आह्ह… कुनाल… ओह्ह… क्या कर रहे हो… इह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”
थोड़ी देर बाद कुनाल ने मम्मी को घुटनों पर बिठाया। अपना लंड निकाला। कुनाल का लंड मौसा जी से भी मोटा और डेढ़ इंच लंबा था। मम्मी ने उसे मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… गोग… गों… गी… गों… कमरे में आवाज गूंज रही थी।
कुनाल ने 10 मिनट तक मम्मी का मुंह चोदा। फिर जोर से झटके देकर मम्मी के मुंह में सारा माल उड़ेल दिया। मम्मी ने सब निगल लिया। फिर कुनाल ने मम्मी को उठाया। दीवार से टिकाया। पीछे से चूत में पूरा लंड पेल दिया। आधे घंटे तक घोड़ी बनाकर जोर-जोर से चोदा।
मम्मी चिल्ला रही थीं… “आह्ह… कुनाल… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… ओह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा लंड… हाय…” अंत में कुनाल ने मम्मी की चूचियों पर सारा माल गिरा दिया। मम्मी की चूचियां लाल हो गईं थीं दबाने से। मम्मी के चेहरे पर संतुष्टि साफ दिख रही थी। वो मुस्कुरा रही थीं।
मौसा जी राजीव और उनका बेटा कुनाल मेरी मम्मी को हर मौके पर चोद रहे थे। मम्मी की भारी-भरकम चूचियां और मोटी गांड देखकर दोनों पागल हो चुके थे। मुझे सब पता चल चुका था। मैं चुपके-चुपके दरवाजों के पीछे से या सीढ़ियों से झांककर उनकी चुदाई देखती रहती थी। “Randi Mummy Chudai Show”
उन सीनों को देखकर मेरे अंदर एक अजीब सी सिहरन होती थी, मेरी चूत गीली हो जाती थी और मैं रातों में उंगलियां डालकर खुद को संतुष्ट करती थी। लेकिन मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि जल्द ही मेरी भी चूत में असली लंड जाएगा। कुनाल भैया उस समय 21 साल के थे। लंबे, गोरे, मस्कुलर बॉडी वाले और उनका लंड मौसा जी से भी बड़ा और मोटा था।
वो कॉलेज में पढ़ते थे लेकिन घर पर ज्यादा समय बिताते, खासकर मम्मी के साथ। अब वो हर मौके पर मम्मी के पास आते। जान-बूझकर कोई न कोई बहाना बनाते, जैसे पानी मांगना या कुछ पूछना, और फिर मम्मी की भारी चूचियां दबा लेते। कभी कंधे पर हाथ रखते, कभी झुककर कान में कुछ कहते और हाथ सीधा चूचियों पर चला जाता।
वो उन्हें जोर से मसलते, निप्पल को मरोड़ते। मम्मी मेरी तरफ देखकर इशारे से मना करतीं, “कुनाल, रहने दो… प्रियांशी देख लेगी…” लेकिन उनकी आवाज में वो जोश था जो बता रहा था कि उन्हें भी मजा आ रहा है। कुनाल रुकता नहीं, बल्कि और जोर से दबाता। मुझे सब साफ दिखता था, पर वो समझते थे कि मैं कुछ नहीं देख रही। मैं चुप रहती क्योंकि मुझे भी वो सब देखकर गर्माहट महसूस होती थी।
धीरे-धीरे दोपहर हो गई। बाहर तेज धूप थी, घर में सन्नाटा। मम्मी खाना बनाने किचन में चली गईं। उन्होंने मुझसे कहा, “बेटा, तुम ऊपर कमरे में जाओ और थोड़ी देर आराम कर लो। बाहर बहुत गर्मी है।” मैं सीढ़ियां चढ़ने लगी, लेकिन पूरी तरह ऊपर नहीं गई। मैंने सोचा, देखूं तो क्या होता है।
जैसे ही कुनाल को लगा कि मैं ऊपर चली गई, वो मम्मी पर टूट पड़ा। उसने मम्मी को पीछे से पकड़ा, उनकी मैक्सी एक झटके में ऊपर की और पूरी उतार फेंकी। मम्मी ने अंदर ब्रा-पैंटी पहनी थी, लेकिन कुनाल ने अगले ही पल ब्रा के हुक खोल दिए और पैंटी नीचे खींचकर फेंक दी। मम्मी पूरी नंगी हो गईं। “Randi Mummy Chudai Show”
उनकी गोरी-मोटी गांड और भारी चूचियां हवा में लटक रही थीं। मम्मी भी अब पूरी तरह तैयार थीं। उन्हें अलग-अलग लंडों का स्वाद लेने का शौक था। कुनाल का मोटा-लंबा लंड देखकर वो मर रही थीं। वो बोलीं, “कुनाल, जल्दी करो… प्रियांशी आ जाएगी…” लेकिन उनके चेहरे पर वो वासना थी जो बता रही थी कि वो रुकना नहीं चाहतीं।
मैं सीढ़ियों के किनारे छिपकर सब देख रही थी। कुनाल ने मम्मी को दीवार से सटाकर गहरा किस करना शुरू किया। दोनों के होंठ चिपक गए। कुनाल ने जीभ मम्मी के मुंह में डाल दी और जोर-जोर से चूसने लगा। मम्मी भी जोश में आकर उसकी जीभ चूस रही थीं, उनके हाथ कुनाल की पीठ पर घूम रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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कुनाल ने एक हाथ से मम्मी की चूचियां मसलनी शुरू कीं, निप्पल को पिंच करते हुए। मम्मी सिसकारियां ले रही थीं, “आह्ह… कुनाल… धीरे…” लेकिन कुनाल रुका नहीं। उसने दूसरा हाथ मम्मी की चूत पर रखा, उंगलियां अंदर डालीं और रगड़ने लगा। मम्मी की चूत पहले से गीली थी।
कुछ ही देर में मम्मी ने टांगें फैला दीं। कुनाल ने अपना लंड पकड़ा, जो पहले से खड़ा और सख्त था। उसने लंड को मम्मी की चूत पर रगड़ा, सुपारे से चूत की लकीर को सहलाया। मम्मी कराह रही थीं, “डालो ना कुनाल… और मत तड़पाओ…” फिर कुनाल ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड अंदर पेल दिया। धप्प… धप्प… धप्प… चुदाई शुरू हो गई।
कुनाल तेज-तेज धक्के मार रहा था, मम्मी की गांड दीवार से टकरा रही थी। मम्मी चिल्ला रही थीं, “आह्ह… कुनाल… और जोर से… ओह्ह… कितना मोटा है तेरा… मेरी चूत फाड़ दो… इह्ह… हाय…” कुनाल ने मम्मी की एक टांग ऊपर उठाई और और गहराई से पेलने लगा। “Randi Mummy Chudai Show”
करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद कुनाल ने चूत के अंदर ही सारा माल उड़ेल दिया। दोनों पसीने से तर थे। लेकिन ये खत्म नहीं हुआ। दोनों थोड़ी देर चूमाचाटी करते रहे। कुनाल ने मम्मी की चूचियां चूसीं, निप्पल काटे। मम्मी ने कुनाल का लंड हाथ में लेकर हिलाया और फिर मुंह में ले लिया। ग्ग्ग्ग… गोग… गी… की आवाजें आने लगीं।
कुनाल का लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार कुनाल ने मम्मी को सोफे पर लिटाया, टांगें फैलाईं और ऊपर चढ़कर फिर से पेलना शुरू किया। इस राउंड में कुनाल ने पोजीशन बदली, कभी मिशनरी, कभी डॉगी स्टाइल। मम्मी गांड उठा-उठाकर चुदवा रही थीं। “ओह्ह… कुनाल… तेरे लंड का मजा कुछ और है… चोदो मुझे… आह्ह्ह…” दो बार चोदकर दोनों थक गए। कुनाल ने दोनों बार चूत में झड़ा।
चुदाई के बाद मम्मी ने सिर्फ मैक्सी पहन ली। ब्रा-पैंटी बाथरूम में फेंक दीं। फिर खुशी-खुशी खाना बनाने लगीं। उनका चेहरा चमक रहा था, जैसे बहुत संतुष्ट हों। मैं चुपके से कमरे में चली गई और लेट गई। मेरी चूत गीली हो चुकी थी, मैंने उंगली डाली और सोचा कि कैसा लगता होगा असली लंड।
शाम को मौसा जी ऑफिस से लौटे। उन्होंने थोड़ी देर आराम किया, फिर कुनाल को दारू और आइसक्रीम लाने भेज दिया। कुनाल जैसे ही निकला, मौसा जी ड्राइंग रूम में मम्मी के पास पहुंचे। अपना लंड बाहर निकाला, जो पहले से तना हुआ था, और एक झटके में मम्मी के मुंह में पेल दिया।
मम्मी घुटनों पर बैठ गईं और जोर-जोर से चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… गोग… गी… गों… की आवाजें गूंज रही थीं। मौसा जी उनके बाल पकड़कर मुंह चोद रहे थे, “आह माया… मेरी रंडी… चूस अच्छे से… आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊंगा…” मम्मी ने लंड चूसा, फिर मौसा जी ने मम्मी को उठाया, अपनी गोद में बिठाया और चूत में पूरा लंड घुसा दिया। “Randi Mummy Chudai Show”
घप्प… घप्प… तेज धक्के चलने लगे। मम्मी ऊपर-नीचे हो रही थीं, चूचियां उछल रही थीं। “आह्ह… राजीव जी… और जोर से… आपका लंड कितना सख्त है… चोदो मुझे…” तभी घंटी बजी। कुनाल लौट आया। मम्मी ने जल्दी मैक्सी पहनी और दरवाजा खोला। मौसा जी ने कुनाल से कहा, “दारू यहीं रखो, आइसक्रीम फ्रिज में डालो और अपने कमरे में पढ़ाई करो।”
मैं जल्दी अपने कमरे में घुस गई। कुनाल का कमरा मेरे बगल में था। वो अंदर आया और मुझसे बोला, “क्या कर रही हो प्रियांशी? बोर हो रही हो ना?”
मैंने कहा, “हां भैया, यहां तो खेलने को कुछ है ही नहीं। बस टीवी और किताबें।”
कुनाल ने मुस्कुराकर कहा, “अरे बताया होता, मैं ढेर सारी चीजें दे देता खेलने को। चलो, मैं तुम्हें एक मजेदार खेल सिखाता हूं।”
ये कहकर उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और कुंडी लगा दी। फिर अपना लोअर नीचे किया और मोटा-लंबा लंड मेरे मुंह के पास ले आया। बोला, “ये लो, इससे खेल लो। ये बहुत मजेदार है।”
मैंने हैरान होकर कहा, “भैया, इससे तो सूसू करते हैं ना? ये खेलने की चीज थोड़े है।”
वो हंसा, “हां, सूसू भी करते हैं लेकिन इससे खेलते भी हैं। जैसे लॉलीपॉप चूसती हो, वैसे ही चूसो। बहुत मजा आएगा।”
मैंने मम्मी को मौसा जी और कुनाल का लंड चूसते देखा था। मुझे पता था ये बड़े लोगों का खेल है। लेकिन मैं उत्सुक थी। मैंने उसका लंड पकड़ा, जो गर्म और सख्त था। धीरे-धीरे मुंह में लिया और चूसने लगी। कुनाल आगे-पीछे होने लगा। लंड मुंह में अंदर-बाहर होता रहा। ग्ग्ग्ग… गी… गोग… की आवाजें आने लगीं। मुझे अजीब सा स्वाद आया, लेकिन मजा भी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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कुछ देर बाद उसने कहा, “अब टोपी को जीभ से चाटो।” मैंने सुपारे को जीभ से चाटा, गोल-गोल घुमाया। कुनाल सिसकारियां ले रहा था, “आह्ह… अच्छा कर रही हो प्रियांशी…” मुझे मजा आने लगा। फिर कुनाल बोला, “एक और खेल है मेरे पास, और भी मजेदार।”
वो मुझे बिस्तर पर लिटाया, मेरी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी उतारी। मेरी छोटी-सी गुलाबी चूत को देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। वो सहलाने लगा, उंगली से लकीर पर रगड़ा। मैं सिहर उठी, “भैया… क्या कर रहे हो…” लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था। बोला, “अब मेरा लॉलीपॉप तेरे अंदर जाएगा, और मजा आएगा।”
मुझे समझ आ गया कि ये वही खेल है जो मम्मी खेल रही हैं। मैंने सोचा, मम्मी कर रही हैं तो मैं क्यों नहीं। मैंने कहा, “ठीक है भैया, लेकिन धीरे से।” कुनाल ने उंगली मेरी चूत में डाली। वो बहुत टाइट थी। उसने दो उंगलियां डालकर फैलाने की कोशिश की। फिर ढेर सारा थूक लगाया, अपनी लार मेरी चूत पर मली और अपने लंड पर भी। फिर लंड सेट किया और धक्का मारा। मुझे तेज दर्द हुआ। मैंने कहा, “भैया, बहुत दर्द हो रहा है… निकालो…”
वो बोला, “बस थोड़ा सा, फिर मजा आएगा। सहन करो।” फिर उसने जोर का धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। मेरी आंखों से आंसू निकल आए। दर्द असहनीय था। उसने मेरा मुंह दबा रखा था ताकि चीख न निकले। फिर एक और जोरदार धक्का। पूरा लंड अंदर। मेरी सील फट गई। चूत से खून निकलने लगा। मैं रोने लगी, “भैया… निकालो… दर्द हो रहा है…”
कुनाल बोला, “ये खून लॉलीपॉप से निकल रहा है, डर मत। अब मजा आएगा।”
फिर वो धक्के मारने लगा। पहले धीरे-धीरे, फिर जोर-जोर से। चालीस-पचास धक्के मारे। दर्द कम होने लगा और अंदर से एक मीठी सी सनसनाहट उठी। चूत गीली हो गई। कुनाल ने मेरे अंदर ही सारा माल उड़ेल दिया। मैं लस्त पड़ गई, सांसें तेज चल रही थीं।
कुनाल ने लंड निकाला, रूमाल से साफ किया। मेरी चूत भी पोंछी, खून साफ किया और पैंटी पहना दी। बोला, “देखो कुछ नहीं हुआ। दर्द ठीक हो जाएगा। मम्मी से मत कहना, वरना आगे खेल नहीं मिलेगा।” वो अपने कमरे में चला गया। मुझे दर्द तो बहुत हुआ, लेकिन अजीब सा मजा भी आया।
चूत में जलन थी, लेकिन मैं सोच रही थी कि अगली बार और मजा आएगा। मैं चुप रही। नीचे गई तो मम्मी और मौसा जी खुश दिख रहे थे। मम्मी खाना बना रही थीं। मैं दर्द की वजह से ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। मैंने दवा खाकर लेट गई। रात को खाना खाकर सब सोने चले गए।
थोड़ी देर बाद मौसा जी चुपके से हमारे कमरे में आए। मुझसे पूछा, “प्रियांशी सो गई?” मम्मी ने कहा, “हां, सो गई है।” मैं जाग रही थी, लेकिन आंखें बंद रखीं। मौसा जी ने मम्मी की मैक्सी उतारी। मम्मी अंदर कुछ नहीं पहने थे। उनकी नंगी देह चांदनी में चमक रही थी। मौसा जी ने अपना अंडरवियर उतारा। दोनों नंगे हो गए। “Randi Mummy Chudai Show”
मौसा जी ने मम्मी को किस किया, चूचियां मसलीं। फिर बोले, “माया, मेरा लंड कैसा लगता है?” मम्मी ने लंड पकड़कर हिलाते हुए कहा, “बहुत दिन बाद इतना मोटा-बड़ा लंड मिला। उमेश का तो खड़ा भी नहीं होता। वो नपुंसक है। दवा खाकर ही कभी-कभार चोद पाता है। लेकिन उसका लंड छोटा है, मजा नहीं आता।”
मौसा जी ने हैरान होकर पूछा, “तो ये तीनों बच्चे किसके? उमेश के तो नहीं लगते।” मम्मी ने विस्तार से बताया, “तीनों मेरे पुराने बॉयफ्रेंड्स के हैं। प्रियांशी एक पुराने बॉयफ्रेंड की है, जो मेरी शादी से पहले का था। शांतनु और शाम्भवी बुआ के लड़के के लंड का प्रसाद हैं।”
मौसा जी और हैरान हुए, “तू बुआ के लौंडे से भी चुद चुकी है? दो बच्चे भी? वो तो तेरे भाई जैसा लगता है।” मम्मी बोलीं, “हां, प्रियांशी के बाद वो घर आया था। उमेश का खड़ा नहीं होता था। मेरी चूत को लंड की जरूरत थी। जोश में उससे चुद गई। कई रातें हमने साथ बिताईं। फिर शांतनु के बाद फिर आया, किसी काम से। जितने मौके मिले, उतनी बार चोदा। शाम्भवी उसी की है।”
मौसा जी ने मम्मी की चूचियां पीछे से पकड़ीं, जोर से मरोड़ीं और पीछे से लंड चूत में पेल दिया। चुदाई शुरू हो गई। धप्प… धप्प… मौसा जी कहते रहे, “साली, तू तो बड़ी रंडी है। बॉयफ्रेंड से बच्चे पैदा करवाती है। हमसे ही चुदवा लेती, मेरा लंड तो हमेशा तेरे लिए तैयार था।”
मम्मी बोलीं, “मुझे क्या पता था तुम्हारा घोड़े जैसा लंड मेरी चूत के लिए तरस रहा है। अब तो रोज चोदो मुझे।”
मौसा जी ने पूछा, “उमेश को पता है?”
मम्मी बोलीं, “हां, पता है। इसलिए वो बच्चों को अपने नहीं मानता। लेकिन चुप रहता है।”
चुदाई चलती रही। मौसा जी ने मम्मी को घोड़ी बनाया, फिर ऊपर चढ़कर चोदा। मम्मी चिल्ला रही थीं, “आह्ह… राजीव जी… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… ओह्ह्ह…” मैं कब सो गई, पता नहीं। सुबह उठी तो कुनाल के कमरे से आवाजें आ रही थीं। मैंने धीरे से दरवाजा खोला। देखा मम्मी कुनाल के नीचे हैं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : मदमस्त भाभी की मस्त चुदाई
कुनाल उनकी चूचियां दोनों हाथों से दबाए चूत चोद रहा है। मम्मी “आह्ह… आह्ह… कुनाल… और गहरा… हाय…” कर रही थीं। कुनाल की गांड पकड़कर लंड अंदर घुसवा रही थीं। कमरा उनकी सिसकारियों से भरा था। फिर दोनों नीचे ड्राइंग रूम में गए। मैं चुपके से पीछे-पीछे गई। दोनों नंगे थे।
मम्मी कुनाल का लंड चूस रही थीं। ग्ग्ग्ग… गोग… गों… कुनाल चूचे हिला रहा था, निप्पल चूस रहा था। मम्मी की चूत फैली हुई थी, पिंक-पिंक अंदर दिख रहा था। कुनाल ने मम्मी को सोफे पर लिटाया, टांगें खोलीं, चूत चाटी। जीभ अंदर-बाहर, क्लिट को चूसा। मम्मी कराह रही थीं, “ओह्ह… कुनाल… चाटो… मेरी चूत खा जाओ…” फिर कुनाल ने हर पोजीशन में चोदा – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल। आधे घंटे तक चुदाई चली।
उस एक महीने में ये सिलसिला रोज चला। कुनाल ने मुझे भी पांच बार चोदा। पहली बार दर्द हुआ, लेकिन बाद में मजा आने लगा। मैं भी चुदाई की आदी हो गई। मेरी चूत अब कुनाल के लंड के लिए तरसने लगी। फिर एक महीने बाद हम घर लौट आए। लेकिन ये सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। आगे भी बहुत कुछ हुआ। मेरे सगे भाई से चुदाई का किस्सा भी है, जहां उसने मुझे घर में चोदा। वो सब अगली बार सुनाऊंगी।
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