Police Station Me Chudai
जब से मेरी बीवी सुधा को पीएसी के जवानों और उसके जीजा ने पेला था, उसकी चूत की आग और भड़क उठी थी। उसकी जवानी अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। पहले तो वो सिर्फ मेरे साथ मस्ती करती थी, पर अब उसकी भूख ऐसी थी कि हर वक्त उसकी बुर में लंड चाहिए था। Police Station Me Chudai
गालियां देना, गंदी बातें करना, और चुदवाते वक्त रंडी जैसी हरकतें करना उसका शौक बन गया था। सुधा अब 32 साल की थी, गोरी, 32-28-34 का फिगर, कसी हुई चुचियां, और गोल-मटोल गांड जो किसी का भी लंड खड़ा कर दे। मैं, राजेश, 35 साल का, एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था, और मेरा 8 इंच का लंड सुधा को हमेशा खुश रखता था, पर अब वो और ज्यादा की भूखी थी।
मेरी नौकरी की वजह से हमारा तबादला प्रतापगढ़ हो गया था। सुधा की चूत की भूख अब चरम पर थी। वो हर रात मुझसे चुदवाते वक्त ऐसी गंदी बातें करती कि मेरा लंड और सख्त हो जाता। “राजेश, और जोर से पेलो, मेरी बुर को फाड़ दो, साले!” वो चिल्लाती।
पर अब उसकी नजर बाहर के लंडों पर भी थी। एक दिन मुझे ऑफिस के काम से पटना जाना था। हमारी ट्रेन रात 11:30 बजे की थी। सुधा ने काली साड़ी पहनी थी, जो उसके बदन से चिपक कर उसकी चुचियों और गांड को और उभार रही थी। मैंने नीली जींस और शर्ट पहनी थी। खाना खाकर हम ऑटो से स्टेशन पहुंचे।
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स्टेशन पर सन्नाटा था। इक्का-दुक्का लोग ही दिख रहे थे। ट्रेन थोड़ी लेट थी, तो हम प्लेटफॉर्म पर बेंच पर बैठकर बातें करने लगे। सुधा मेरे कंधे पर सिर रखकर बोली, “राजेश, अगर ट्रेन और लेट हुई तो रात भर यहीं चुदाई करनी पड़ेगी, क्या?” मैं हंसकर बोला, “साली, तुझे तो हर वक्त चूत में लंड चाहिए!”
वो हंसी और मेरे सीने पर मुक्का मारा। तभी न जाने कहां से चार पुलिसवाले आ धमके। एक दरोगा और तीन सिपाही। दरोगा, करीब 40 साल का, काला, मूंछों वाला, और भारी-भरकम बदन। सिपाहियों में एक गोरा, पतला, 30-32 साल का, दूसरा मोटा और छोटा, और तीसरा लंबा और दुबला। सबकी नजर सुधा पर टिक गई।
दरोगा ने सख्त लहजे में पूछा, “कौन हो तुम लोग? इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?”
मैंने शांति से जवाब दिया, “साहब, मैं प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं, ये मेरी बीवी है, हम पटना जा रहे हैं।”
मैंने अपना कार्ड दिखाया, पर वो नहीं माने। दरोगा चिल्लाया, “साले, मादरचोद! हमें बेवकूफ बनाएगा? तुम लोग एक मर्डर केस में फरार हो, समझे? चलो थाने!”
मैं समझाने की कोशिश करता रहा, “साहब, ये गलतफहमी है, हम कोई अपराधी नहीं हैं!” पर वो नहीं माने।
एक सिपाही ने सुधा को घूरते हुए कहा, “साली, चल, सामान उठा! साहब से बात होगी, तेरी जवानी तो देख, अगर साहब बोल दें तो यहीं पटक कर चोद दूं!”
सुधा गुस्से में बोली, “ये क्या बदतमीजी है? औरत से ऐसे बात करते हो?”
दूसरा सिपाही हंसा, “तो और कैसे बात करें, रंडी? ज्यादा बोली तो अभी तेरे मर्द के सामने साहब तुझे अपने लंड पर नचवाएंगे!”
सुधा चुप हो गई, पर उसकी आंखों में डर के साथ कुछ और भी था। शायद उसकी बुर में फिर से आग भड़क रही थी। पुलिसवाले हमें ड्यूटी रूम में ले गए। वहां दरोगा ने किसी को फोन किया और मुस्कुराने लगा। उसने सिपाहियों से कुछ फुसफुसाया, फिर हमें स्टेशन के दूसरी तरफ एक गाड़ी में ले गए।
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मैंने पूछा, “हमें कहां ले जा रहे हो?”
दरोगा बोला, “चुप साले, अभी पता चल जाएगा!”
थोड़ी देर बाद हम एक मकान जैसे ऑफिस में पहुंचे। ये कोई वीआईपी गेस्ट हाउस था, जहां कोई नहीं था। वहां पहुंचते ही दरोगा ने मुझे धमकाया, “बोल साले, छूटना चाहता है या 302 का केस लगवाएं? हम चाहें तो तुम्हें छोड़ सकते हैं, पर कुछ देना होगा!” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने गुस्से में पूछा, “क्या?”
वो बेशर्मी से बोला, “तेरी माल, यानी तेरी बीवी!”
मैं आगबबूला हो गया, “साले, जबान संभाल! मैं तुम्हें जेल भिजवा दूंगा!”
वो हंसा, “भिजवा दे, पर पहले यहां से जिंदा निकल तो!”
इतना कहते ही उसने सुधा को पीछे से दबोच लिया। सिपाहियों ने मुझे पकड़कर मेरे मुंह में कपड़ा ठूंसा और रस्सी से बांधकर एक कमरे में फेंक दिया। मैं चिल्लाना चाहता था, पर कुछ कर न सका। आगे की कहानी अब सुधा की जुबानी:-
उस दरोगा ने मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया, उसका सख्त लंड मेरी गांड से टकरा रहा था। वो बोला, “रानी, आज तो तुझे हमारे लंडों पर नाचना पड़ेगा!” मैंने चिल्लाकर कहा, “छोड़ो मुझे, हरामजादों! मैं तुम्हारी बात नहीं मानूंगी!” दरोगा हंसा, “ठीक है, फिर तेरे मर्द का एनकाउंटर कर देंगे, और तुझे रंडीखाने में बेच देंगे, जहां तेरी जवानी का भुरता बन जाएगा!”
मैं डर गई। मेरे दिमाग में ख्याल आया कि अगर मैं इनकी बात मान लूं, तो ज्यादा से ज्यादा ये मेरी चुदाई करेंगे। न मानी, तो राजेश को मार देंगे और मुझे भी बर्बाद करेंगे। मैंने थोड़ा सोचकर कहा, “ठीक है, मुझे मंजूर है। पर सुबह तुम्हें हमें इज्जत से छोड़ना होगा!”
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दरोगा मुस्कुराया, “जो तू बोले, रानी, सब मंजूर!” मेरी बुर में आग सी लग गई। एक सिपाही बोला, “साहब, क्या मस्त माल पकड़ा है! आज तो इसकी बुर फाड़ देंगे!” दूसरा सिपाही मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए बोला, “चल, रंडी, अब ऊपर वाले कमरे में चल!” रास्ते में कोई मेरी चुचियों को दबाता, कोई गांड पर थप्पड़ मारता, तो कोई मेरे गाल सहलाता।
मैं अंदर ही अंदर मस्त हो रही थी। इतने मर्दों के लंड एक साथ लेने का ख्याल मेरे बदन में सनसनी दौड़ा रहा था। ऊपर कमरे में पहुंचते ही दरोगा चिल्लाया, “चल, रंडी, कपड़े उतार! साली, तेरी चूत और गांड आज फाड़ दूंगा!” मैंने नखरे करते हुए कहा, “हाय, ऐसे मत करो! मेरी चुचियां दुख रही हैं! जब मैं चुदने को तैयार हूं, तो जबरदस्ती क्यों?”
वो बोला, “साली, तेरे जैसी माल को जबरदस्ती चोदने का मजा ही अलग है!” इतना कहकर उसने मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी बुर को रगड़ दिया। मैं सिहर उठी, “हाय, क्या कर रहे हो, छोड़ो ना!” पर मेरी बुर तो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज, पेटीकोट, और अंत में ब्रा और पैंटी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अब मैं पूरी नंगी थी। उनकी आंखें मेरे 32 साइज की चुचियों और गोल गांड पर टिक गईं। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी, और मैं उनकी भूखी नजरों को देखकर और उत्तेजित हो रही थी। सबने अपने कपड़े उतारे। दरोगा का लंड 9 इंच का, मोटा और काला, सिपाहियों के भी 7-8 इंच के लंड थे, एकदम सख्त। मेरी बुर पानी छोड़ने लगी।
दरोगा ने मुझे पीछे से पकड़ा, उसका लंड मेरी गांड की दरार में रगड़ रहा था। वो बोला, “रानी, तैयार है ना? नहीं तो तेरे मर्द को तैयार कर दूं!” मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी तरफ देखकर मुस्कुराई। तभी सब मुझ पर टूट पड़े। दरोगा मेरे होंठों को चूसने लगा, उसकी जीभ मेरे मुंह में अंदर-बाहर हो रही थी।
एक सिपाही मेरी बाईं चूची को चूस रहा था, दूसरा दाईं चूची को। तीसरा सिपाही मेरी गांड की दरार में जीभ डालकर चाट रहा था। “आह… ऊह… हाय…” मैं सिसकारियां लेने लगी। मेरी बुर रस से लबालब हो रही थी। पांच मिनट तक वो मेरे बदन को नोचते रहे। फिर दरोगा ने अपनी उंगली मेरी बुर में डाल दी।
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“हाय… सीईई… धीरे करो!” मैं चिल्लाई। वो हंसा, “साली, तेरी बुर तो पहले से गीली है!” उसने अपनी उंगली चाटी और बोला, “क्या नमकीन रस है, रंडी!” बाकी सिपाही हंसने लगे। एक बोला, “साली, तुझे तो पूरी पुलिस फोर्स चोदे, तब भी तेरी आग न बुझे!” मैंने बेशर्मी से जवाब दिया, “साले, रंडी हूं तो रंडी की तरह चोदो! मेरी बुर कोई सस्ती नहीं है, पीएसी के लंडों पर चढ़ चुकी हूं, दिखाओ तुममें कितना दम है!”
दरोगा मेरे कान चूसते हुए बोला, “रानी, तू तो मस्त माल है। जैसा कहें, वैसा कर, तभी मजा आएगा!” मैंने नशीली आवाज में कहा, “राजा, मेरी बुर का दरवाजा तो खोलो! मैं तैयार हूं, जैसे चाहो, वैसे पेलो!” वो खुश हो गया। मैंने उनके लंड चूसने शुरू किए। पहले दरोगा का, फिर सिपाहियों के। “Police Station Me Chudai”
“उम्म… स्स… क्या मस्त लंड हैं!” मैं उनके लंडों को चाट रही थी, जैसे कोई लॉलीपॉप हो। दरोगा ने मेरी बुर पर मुंह लगाया, उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को चाट रही थी। “आह… ऊह… हाय…” मेरी सिसकारियां तेज हो गईं। एक सिपाही ने मेरी गांड में उंगली डाल दी। “सीईई… धीरे!” मैं चिल्लाई, पर मजा ले रही थी।
थोड़ी देर बाद मेरी बुर ने रस छोड़ दिया। “आह… ऊह… हाय मां!” मैं झड़ गई। दरोगा ने मेरा सारा रस चाट लिया और बोला, “रानी, तेरी बुर का स्वाद तो गजब है!” फिर उसने मुझे कुतिया की तरह उल्टा किया। उसने अपने लंड पर थूक लगाया और मेरी बुर में धीरे-धीरे डालना शुरू किया।
“आह… सीईई… धीरे, राजा!” मैं चिल्लाई। उसका 9 इंच का लंड मेरी बुर को चीरता हुआ अंदर जा रहा था। “पच… पच… पच…” उसकी पेलाई की आवाज कमरे में गूंज रही थी। बाकी सिपाही मेरी चुचियां दबा रहे थे, मेरे होंठ चूस रहे थे। दरोगा ने आधे घंटे तक मुझे पेला। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“आह… ऊह… हाय… सीईई…” मेरी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। फिर उसने अपना सारा माल मेरी बुर में डाल दिया। मेरी बुर से उसका पानी टपक रहा था। फिर बाकी सिपाहियों ने बारी-बारी मुझे चोदा। एक ने मेरी गांड में लंड डाला, “हाय… ऊई मां… धीरे!” मैं चिल्लाई, पर मजा ले रही थी। “Police Station Me Chudai”
“पट… पट… पट…” उनकी पेलाई की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मैं चार बार झड़ चुकी थी। अब मैं दरोगा की गोद में थी। वो मेरी चुचियों से खेल रहा था। उसने पूछा, “मजा आया, रानी?” मैंने उसके लंड को सहलाते हुए कहा, “हाय, राजा, तुमने तो मेरी बुर को मस्त कर दिया! और लंड होते तो और चुदवाती!”
वो हंसा और बोला, “साली, तू तो पूरी रंडी है!” मैंने उसे अपने जीजा और पीएसी की चुदाई का किस्सा बताया। उसने जीजा का नाम सुनकर हंसते हुए कहा, “अरे, वो तो यहीं ड्यूटी पर है! बुलाऊं उसे?” मैं सिहर गई। उसने फोन किया और जीजा को बुला लिया। “Police Station Me Chudai”
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थोड़ी देर बाद जीजा आया। मुझे नंगी देखकर वो सन्न रह गया। मैं दौड़कर उससे लिपट गई। वो बोला, “साली, तू यहां? ये सब क्या है?” मैंने सारी बात बताई। वो हंसा, “कोई मर्डर नहीं हुआ, साले! तुझे देखकर इनके लंड खड़े हो गए होंगे!” उसने अपने कपड़े उतारे और बोला, “चल, रंडी, मेरा लंड चाट!” उसका 10 इंच का काला लंड देखकर मेरी बुर फिर गीली हो गई।
अब कमरे में जीजा, दरोगा, और उसका अर्दली था। तीनों मुझ पर टूट पड़े। जीजा बोला, “साली, आज तेरी बुर, गांड, और मुंह, सब फाड़ देंगे!” मैंने कहा, “जीजा, राजा, मेरे तीनों छेद भर दो!” वो सब हंसने लगे। जीजा ने मेरी गांड में, दरोगा ने मेरे मुंह में, और अर्दली ने मेरी बुर में लंड डाला।
“पच… पच… पट… पट…” उनकी पेलाई की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। “आह… ऊह… सीईई… हाय मां!” मैं सिसकारियां ले रही थी। सारी रात वो मुझे पेलते रहे, जगह बदल-बदलकर। मैं 10 बार झड़ चुकी थी। सुबह हुई। मैंने अपनी साड़ी पहनी। जीजा चुपके से चला गया। दरोगा ने राजेश को छोड़ते हुए कहा, “किसी से कहा तो जान से जाओगे, और तेरी बीवी की बुर में फिर डंडा डालेंगे!”
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