New Bhabhi Hotel Sex
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम गुलशन है, मैं मुंबई में ही रहता हूँ, अभी 30 साल का हूँ। ये बात करीब दो साल पुरानी है जब मैं 28 का था। मैं बचपन से ही देसी सेक्स स्टोरी पढ़ने का शौकीन रहा हूँ, पर कभी सोचा नहीं था कि मेरे साथ भी कुछ ऐसा होगा जो मैं आज आपको लिखकर बता रहा हूँ। New Bhabhi Hotel Sex
ये मेरी जिंदगी की सबसे हॉट और बिल्कुल सच्ची घटना है। मेरा दोस्त प्रीतम मेरे कॉलेज टाइम से ही बहुत अच्छा दोस्त है। वो एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में है, काम के चलते उसे महीनों-महीनों दूसरे शहरों में रहना पड़ता है। उसकी शादी को तब पाँच साल हो चुके थे।
उसकी बीवी माधुरी का नाम है, उम्र उस वक्त 30-31 के आसपास रही होगी। एक तीन साल की बहुत प्यारी सी बेटी भी है उनकी। माधुरी दिखने में गजब की सुंदर है, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी काली नशीली आँखें, लंबे घने बाल, कसी हुई कमर और भरे हुए मम्मे। गाँड भी इतनी उभरी हुई कि कोई भी देखे तो लंड खड़ा हो जाए।
पहले हम सिर्फ मिलते तो हल्की स्माइल करते, कभी ज्यादा बात नहीं हुई थी। प्रीतम उस बार छह महीने से बाहर गया हुआ था। एक दिन शाम को मैं बाजार से सामान लेकर लौट रहा था, रास्ते में माधुरी मिली। उसने लाइट पिंक कलर की सलवार-कमीज पहनी थी, दुपट्टा हल्का सा सर पर था।
उसने मुझे देखकर हल्के से मुस्कुराया, मैंने भी स्माइल वापस किया और दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए। बस यही छोटी सी मुलाकात थी, पर उसी शाम मैंने उसे इंस्टाग्राम पर सर्च किया और फॉलो रिक्वेस्ट भेज दी। दस-पंद्रह मिनट बाद उसने एक्सेप्ट कर लिया। मैंने हाय लिखा, उसने भी हाय किया।
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फिर नॉर्मल बातें शुरू हुईं। मैंने पूछा, “प्रीतम कब आएगा?” उसने बताया, “अभी तो चार महीने और लगेंगे, प्रोजेक्ट बड़ा है।” धीरे-धीरे हमारी चैट रोज की हो गई। पहले घर-परिवार, बेटी की बातें, फिर मौसम, फिल्में, फिर थोड़ी पर्सनल बातें। वो बिल्कुल सहज थी, पर मुझे उसमें कुछ अलग सा आकर्षण लगने लगा था। कुछ दिन बाद बातें थोड़ी खुलीं। एक रात वो ऑनलाइन थी, मैंने मज़ाक में लिखा, “भाभी आज बहुत देर तक जाग रही हो?”
उसने हँसते हुए लिखा, “नींद नहीं आ रही, प्रीतम भी नहीं है, बेटी सो गई, अकेले बोर हो रही हूँ।”
उस दिन बातें थोड़ी लंबी चलीं।
फिर एक दिन बात नॉनवेज पर आ गई। पता नहीं कैसे टॉपिक लंड के साइज़ पर पहुँच गया। मैं दुबला-पतला हूँ तो माधुरी ने मज़ाक में लिखा, “तुम्हारा तो छोटा-मोटा ही होगा ना?” मैं
ने हँसकर लिखा, “अरे नहीं भाभी, मेरा सात इंच का है, मोटा और सख्त।”
वो हँसने लगी, “झूठ मत बोलो, इतना बड़ा कहाँ होता है किसी का!”
मैंने कहा, “सच में है, देखना हो तो देख लो।”
वो बोली, “हाँ दिखाओ ना!”
मैंने मज़ाक में लिखा, “फोटो तो नहीं भेज सकता, सामने से देखोगी तो दिखा दूँगा।”
वो शर्मा गई, “पागल हो गए हो?” पर वो बार-बार यही पूछती रही, “सच में सात इंच का है?”
मैं हर बार यही कहता, “हाँ भाभी, सामने आकर देख लो।”
धीरे-धीरे उसकी जिज्ञासा बढ़ती गई। वो मुझे “सात इंच वाला बाबू” कहकर चिढ़ाने लगी थी। एक दिन उसने खुद लिखा, “सच बता, कितना है?”
मैंने फिर वही बात दोहराई, “फोटो नहीं भेजूँगा, सामने देखो।”
वो बोली, “सामने कैसे देखूँ? घर में सास-ससुर, ननद, बेटी सब हैं।”
मैंने कहा, “कोई बहाना बना लो, बाहर निकल आओ।”
वो थोड़ा सोच में पड़ी, फिर बोली, “ठीक है, देखती हूँ।”
अगले दिन उसने लिखा, “कल दोपहर को दो-तीन घंटे निकाल सकती हूँ, घर पर बोल दूँगी कि सहेली से मिलने जा रही हूँ। तुम प्लान करो।”
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मैं तो खुशी से पागल हो गया। मैंने तुरंत अंधेरी के पास एक अच्छा सा होटल सर्च किया, कुछ घंटे के लिए रूम बुक कर लिया। उसे लोकेशन भेज दी। वो बोली, “ठीक है, कल मिलते हैं।” अगले दिन मैं बाइक लेकर पहुँचा। वो काले रंग की सिंथेटिक साड़ी में आई थी, चेहरा स्कार्फ से ढका हुआ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसे पीछे बिठाया और होटल की ओर चल दिया। रास्ते में हम दोनों चुप थे, बस मेरी धड़कनें तेज थीं। होटल पहुँचे, रिसेप्शन पर मैंने आईडी दी, रूम की चाबी ली और हम ऊपर चले गए। रूम में घुसे तो उसने स्कार्फ हटाया, बाल खोल लिए और शरमाते हुए मुस्कुराई।
मैंने कहा, “भाभी बैठो ना।”
वो बेड के किनारे पर बैठ गई।
मैंने बोला, “पानी लोगी?”
उसने सिर हिलाया। मैंने दो ग्लास पानी लिया, उसके पास बैठ गया।
फिर वो खुद बोली, “अब दिखाओ ना अपना सात इंच वाला सामान, इतना तड़पाया है।”
मैं हँस पड़ा, “भाभी ऐसे तो खड़ा नहीं होता, थोड़ा टाइम दो।”
मैं वॉशरूम में गया, अच्छे से नहाया, लंड को साबुन से अच्छी तरह धोया, तौलिया लपेटकर बाहर आया। वो मुझे देखकर चौंक गई, तौलिया में मेरा लंड इतना कड़क था कि तंबू बन गया था। मैं उसके ठीक सामने जाकर खड़ा हो गया, लंड उसके चेहरे से सिर्फ एक फुट दूर।
मैंने कहा, “खुद तौलिया हटाकर देख लो।”
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उसने हल्के से हाथ बढ़ाया, फिर रुक गई। मैंने उसके हाथ पकड़कर तौलिया पर रख दिया। उसने धीरे से तौलिया खींचा। मेरा सात इंच का मोटा, काला, नसों वाला लंड एकदम सीधा खड़ा था। वो कुछ पल बस देखती रही, उसकी साँसें तेज हो गईं, होंठ सूखने लगे। उसने धीरे से जीभ से होंठ चाटे।
मैंने उसके हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिए। वो हल्के से पीछे खींचना चाही, पर मैंने नहीं छोड़ा। आखिर उसने दोनों हाथों से मुठ्ठी बनाकर लंड पकड़ लिया। उसका हाथ ठंडा था, लंड गर्म। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। मैंने उसका सिर पीछे से पकड़ा और लंड उसके होंठों से छुआया। “New Bhabhi Hotel Sex”
वो पहले तो मना करती रही, “नहीं गुलशन… ये नहीं कर सकती…” पर मैंने प्यार से दबाया तो उसने मुँह खोल दिया। जैसे ही सुपारा उसके गर्म मुँह में घुसा, मेरी आँखें बंद हो गईं, “आआह्ह्ह… भाभी… क्या मुँह है तेरा…” वो ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… करती हुई लंड चूसने लगी।
कभी आधा लंड मुँह में लेकर चूसती, कभी जीभ से सुपारे को चाटती। उसकी लार मेरे लंड पर चमक रही थी। फिर मैंने उसे खड़ा किया, उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चूमने लगे। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिराया, ब्लाउज के हुक खोल दिए।
उसकी काली ब्रा में बड़े-बड़े मम्मे उछलकर बाहर आए। मैंने ब्रा ऊपर उठाई और एक मम्मा मुँह में लेकर चूसने लगा। वो सिसक रही थी, “ऊउम्म… गुलशन… आह्ह्ह… कितना जोर से चूस रहा है…” मैंने उसकी साड़ी पूरी खोल दी, पेटीकोट का नाड़ा खींचा, वो नीचे गिर गया।
अब वो सिर्फ काले रंग की पैंटी और ब्रा में थी। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसकी पैंटी पर किस किया, फिर धीरे से नीचे खींच दी। उसकी चूत पर हल्की झाँटें थीं, गुलाबी फाँक चमक रही थी। मैंने उसकी दोनों टाँगें चौड़ी कीं और चूत चाटने लगा। वो तड़प उठी, “आआह्ह्ह… गुलशन… ऊउइईई… मार डाला… ह्ह्ह्ह… आह इह्ह्ह… कोई चाटता है ऐसा?”
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वो मेरे सिर को चूत पर दबा रही थी, गाँड ऊपर उठा-उठा कर चुदवा रही थी। मैंने दो उंगलियाँ उसकी चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा। वो और पागल हो गई, “आह्ह्ह… ह्हीईई… गुलशन… बस… निकल जाएगा…” अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं उसके ऊपर चढ़ गया, लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। “New Bhabhi Hotel Sex”
वो बोली, “नहीं गुलशन… चूत में नहीं डाल सकते… ये सिर्फ प्रीतम का हक है… मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ…” मैंने मिन्नत की, “प्लीज भाभी… सिर्फ एक बार… अंदर डालकर तुरंत निकाल लूँगा… तुम्हें पता भी नहीं चलेगा…” वो मना करती रही, पर उसकी आँखों में वासना साफ दिख रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने फिर उसकी चूत चाटी, उंगलियाँ तेज कीं, वो फिर तड़पने लगी। आखिर में वो हाँफते हुए बोली, “ठीक है… सिर्फ एक बार… बस डालकर निकाल देना…” मैंने लंड चूत के मुँह पर रखा और धीरे से दबाया। सुपारा भी मुश्किल से घुसा। उसकी चूत सच में बहुत टाइट थी।
वो चिल्लाई, “आआह्ह्ह… माँ… फट गई… बहुत बड़ा है तेरा…” मैंने किस करते हुए धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर ठूँस दिया। वो मेरे गले में हाथ डालकर लिपट गई, “ऊउइईई… निकाल… दर्द हो रहा है…” मैं रुका रहा, फिर बोला, “अब निकालूँ?” वो बस देखती रही। “New Bhabhi Hotel Sex”
मैंने आधा लंड बाहर निकाला, फिर अंदर, फिर बाहर… दस-बारह बार ऐसे ही करता रहा। अब उसका दर्द कम हो रहा था, चूत ने लंड को एडजस्ट कर लिया था। अचानक मैंने स्पीड बढ़ाई और जोर-जोर से ठोकने लगा। वो बेड पर लहराने लगी, “आआह्ह्ह… गुलशन… ओह्ह्ह… हाँ… जोर से… चोद मुझे… आह ह ह ह ह्हीईईई… कितना मोटा है रे तेरा लंड… प्रीतम का तो आधा भी नहीं…”
उसने मेरे गले में हाथ डाले और गाँड पर हाथ रखकर मुझे और जोर से दबाया, “अब मत रोक… आज पूरा चोद डाल मुझे… तेरी रंडी बना दे…” मैंने उसे पलटा, घोड़ी बनाया और पीछे से पेलने लगा। उसकी गाँड थपथपा रहा था, “ले भाभी… ले मेरा सात इंच का लंड… बोल कितना मज़ा आ रहा है…”
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वो चीख रही थी, “आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है… फाड़ दे मेरी चूत… आह्ह्ह… ऊउइईई…” फिर मैंने उसे ऊपर किया। वो मेरे ऊपर सवार हो गई, खुद लंड चूत में डालकर उछलने लगी। उसके मम्मे मेरे मुँह पर लग रहे थे। मैं एक को चूसता तो दूसरा दबाता। वो पागल होकर चिल्ला रही थी, “आअह्ह्ह… मर गई… कितना मोटा है… आह्ह्ह… ऊउइईई… आज तक ऐसा लंड नहीं लिया…” आखिर में मैंने उसे फिर नीचे किया, उसकी टाँगें कंधे पर रखीं और पूरी ताकत से झटके मारने लगा। वो दो बार झड़ चुकी थी।
मैं भी अब झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “कहाँ निकालूँ?” वो बोली, “अंदर ही… भर दे मुझे…” मैंने जोर से गले लगाया और उसकी चूत में पूरा माल उड़ेल दिया। हम दोनों पसीने से तर, नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर पड़े रहे। उसने मेरे सीने पर सिर रखा और बोली, “गुलशन… आज तक ऐसा मज़ा नहीं आया… तेरा लंड तो जादू है…” उसके बाद जब भी मौका मिलता है, साल में सात-आठ बार हम होटल में मिलते हैं। उसकी चूत को मेरे सात इंच के लंड की बुरी तरह लत पड़ गई है।
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