Muslim Jija Sali Chudai
मेरा नाम अब्बास खान है और मैं बनारस का रहने वाला हूँ, पेशे से जुलाहा हूँ लेकिन मैट्रिक तक पढ़ाई की है, जवानी से ही सेक्स कहानियाँ पढ़ता हूँ क्योंकि उनसे नए-नए सेक्स आसन और लड़कियाँ पटाने के दाँव सीखता हूँ, आज अपनी असली जिंदगी का एक किस्सा आप सबको सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें मेरी साली मेहर को माँ बनाने में मैंने मदद की और उसकी चूत का मजा भी जमकर लिया. Muslim Jija Sali Chudai
वो रात जो सिर्फ बच्चा पैदा करने के लिए थी लेकिन मेरे लिए साली की टाइट चूत चोदने का मौका बन गई. इस कहानी के मुख्य किरदार हैं मैं, मेरी बीवी कुलसूम और मेरी साली मेहर, हम दोनों यानी मैं और कुलसूम बड़े चुदक्कड़ हैं और इसी चुदाई के चलते हमारे घर में पाँच-पाँच बच्चों की लाइन लगी हुई है.
मेहर की शादी को तीन साल हो चुके थे लेकिन उसके घर में अभी तक कोई बच्चा नहीं रोया था, और यही वजह बनी मेरी साली की चूत का मेरे पास आने की, एक ऐसा टर्निंग पॉइंट जो मेरी जिंदगी में सेक्स की नई दास्तान लेकर आया और मेहर को बांझपन से छुटकारा दिलाया, मैनुद्दीन की कमजोरी ने मुझे वो मौका दिया जो शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा था.
एक दिन मैं रेशम साफ कर रहा था तभी कुलसूम मेरे पास आई और बोली, “अजी सुनते हो इरफान के अब्बा.”
मैंने कहा, “हाँ बोलो, क्या हुआ.”
वो बोली, “एक काम है आपसे, तनिक रेशम छोड़ेंगे.”
मैंने कहा, “बोलो ना,” और उसकी ओर घूमा, उसकी निगाहें नीची थीं और शर्म से बोल नहीं पा रही थी, मुझे लगा शायद छठा बच्चा भी भर गया है, आखिर धीरे से बोली, “मेहर के लिए एक काम है, अगर आप कर दें तो.”
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मैंने पूछा, “कैसा काम.”
वो बोली, “उसके सोहर मैनुद्दीन और मेहर कल आपके खड्डी पर जाने के बाद आए थे.”
मैंने कहा, “अरे भाई, काम क्या है.”
वो बोली, “मुझे शर्म आ रही है.”
मैं उठा, उसके दोनों कंधे पकड़े और हिम्मत दी, तब उसके मुँह से निकला, “मैनुद्दीन चाहते हैं कि आप मेहर के साथ हमबिस्तरी कर लें एक बार.”
मैं चौंक गया और बोला, “क्या, पागल हो क्या तुम लोग.”
कुलसूम ने समझाया, “नहीं ऐसा नहीं है, डॉक्टर ने मैनुद्दीन की जाँच की है और कहा है कि वो कभी बाप नहीं बन सकते, उनके वीर्य में बच्चे के कीटाणु ही नहीं हैं, जो हैं वो भी मरे हुए हैं, और वो घर में अपनी इज्जत गँवाना नहीं चाहते, किसी को पता नहीं चलेगा हम चारों के अलावा, मेहर को मैनुद्दीन भाई ने राजी कर लिया है, बस आपकी हाँ की देर है.”
बाप रे, ये सब सुनकर पता नहीं क्या हो रहा था, लेकिन मेहर दिखने में मधुबाला से कम नहीं थी, गोरी, कजरारी आँखें, उभरी हुई छाती और पतली कमर, उसकी और कुलसूम की उम्र में सात साल का फर्क था और मेहर को अठारह साल की उम्र में ही ब्याह दिया गया था, पहली बार उसके नंगे बदन का ख्याल मेरे दिमाग में घूमने लगा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके गोरे बदन पर मेरे लंड की कल्पना करने लगा, इससे पहले कभी साली की चूत चोदने का ख्वाब तक नहीं देखा था, लेकिन अब खुद बीवी साली की चूत का तोहफा लेकर आई थी और कह रही थी कि साढू भाई भी सहमत हैं, मेरा मन भी मेहर की चूत लेने को ललचा गया, लंड में हल्की सी हरकत महसूस हुई.
मैंने हाँ में सिर हिला दिया, कुलसूम खुशी से कमरे से भागी गई, वो बाहर जाते वक्त बहुत खुश लग रही थी, मैं रेशम सही करके काम पर चला गया लेकिन दिमाग में मेहर की चूत घूमती रही. शाम को घर लौटा तो देखा कि मेहर और मैनुद्दीन घर पर ही थे, मैनुद्दीन ने सिर्फ औपचारिक बातें कीं.
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मेहर जो हमेशा मुझे छेड़ती रहती थी आज बिलकुल चुप थी, उसकी निगाहें बार-बार मेरी ओर उठतीं और फिर झुक जातीं, कुलसूम ने पानी लाया और सबके लिए गोश्त-रोटी परोसी, खाने के दौरान भी कम ही बोलचाल हुई, मैनुद्दीन बीच-बीच में कुछ कहता लेकिन मेहर खामोश रही, उसके होंठ काँप रहे थे.
खाना खत्म करने के बाद मैं टीवी देखकर सोने के लिए कमरे की ओर बढ़ा, देखा कि कुलसूम आँखों से मेहर को इशारे कर रही थी, मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और कमरे में चला गया, बिस्तर पर लेटकर इंतजार करने लगा. पाँच मिनट बाद दरवाजा खुला और कुलसूम मेहर का कंधा पकड़कर उसे कमरे में लेकर आई, बिस्तर तक छोड़ा और बाहर चली गई.
मैंने दरवाजा बंद होते देखा और सक्कल लगा दी, अब मेहर की जान में जान आई, उसने मेरी ओर देखा और हँस पड़ी, “जीजा जी, आपको इससे कोई ऐतराज तो नहीं ना,” मैं मन में सोचा कि साली की चूत से किसी जीजू को ऐतराज हुआ है क्या, फिर बोला, “नहीं, मैनुद्दीन को पता है तो मुझे क्या प्रॉब्लम.”
इतना कहते ही मैं बिस्तर पर बैठा और मेहर मेरे पास आई, मेरी दाढ़ी में हाथ फेरने लगी, उसकी साँसों की खुशबू मेरी नाक में घुसने लगी, उसकी उँगलियाँ मेरे गालों पर फिसल रही थीं, वो मुझे करीब खींचने की कोशिश कर रही थी, उसके होंठ काँप रहे थे, लेकिन उसे पता नहीं था कि मैं पाँच बच्चों का बाप बन चुका हूँ और मुझे चुदाई के लिए नाटक की जरूरत नहीं पड़ती, मेरा लंड पहले से ही तन चुका था.
मैंने सीधे कहा, “मेहर, चलो जल्दी कपड़े उतार दो, मैनुद्दीन और कुलसूम बाहर इंतजार कर रहे होंगे, ये सुहागरात थोड़े है कि पूरी रात साथ रहें.”
मेहर हँस पड़ी और फट से खड़ी हो गई, अपना फ्रॉक और इजार खींचकर फेंक दिया, पैंटी नहीं पहनी थी, ऊपर सिर्फ सस्ती ब्रा, उसके गोरे बदन पर ब्रा के नीचे उभरी हुई चूचियाँ साफ दिख रही थीं, उसकी चूत देखते ही कसावदार लगी, गुलाबी होंठ, हल्के बाल जो शायद आज ही साफ किए गए थे.
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मैंने बनियान उतारी, लुंगी निकाली, चड्डी खोली तो मेरा नौ इंच का लंड बाहर आया, मोटा और नसों वाला, सुपारा लाल हो चुका था, मेहर की आँखें चमक उठीं, वो उसे घूरने लगी, मैंने कहा, “लो इसे चूसो थोड़ा और अपनी चूत मेरे सामने रख दो,” वो शर्मा गई लेकिन फिर मेरी टाँगों के पास उलटी हो गई. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके चूतड़ मेरे सामने थे, गोल और मुलायम, मैंने दोनों हाथों से गांड खोली तो गुलाबी चूत चमक उठी, छोटा सा छेद जो अभी तक सिर्फ मैनुद्दीन के छोटे लंड से चूका था, मैंने उँगली पर थूक लगाकर साली की चूत में डाल दी, मेहर के मुँह से हल्की सिसकी निकली, “आह्ह…” और उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया, चूसने लगी, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, उसकी जीभ सुपारे पर घूम रही थी. “Muslim Jija Sali Chudai”
मैं उँगली से चोद-चोदकर चूत गीला करने लगा, चूत के अंदर गर्माहट थी, दीवारें सिकुड़ रही थीं, फिर दूसरी उँगली भी डाल दी, मेहर आह आह करने लगी, “आह इह्ह ओह्ह जीजा जी ह्ह्ह इह्ह…” दोनों उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा, चूत से रस टपकने लगा, चिकना और गर्म.
मैंने चूतड़ सहलाते हुए स्पीड बढ़ाई, कभी उँगलियाँ घुमाता, कभी जी-स्पॉट दबाता, मेहर का बदन काँपने लगा, वो लंड पूरा मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन गैग हो जाती, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग, उसके गले से आवाजें आ रही थीं, मैंने उसके सिर को पकड़कर हल्के झटके दिए, लंड उसके गालों में उभर रहा था, उसकी लार लंड पर लपेट रही थी, चमकने लगा.
अब मैंने उसकी चूत छोड़ी और मुँह में झटके देने लगा, वो गर्म हो चुकी थी, उसकी चूत से रस मेरी उँगलियों पर लगा था, मैंने उँगलियाँ चाटीं, मीठा स्वाद, लंड निकालकर खड़ा किया, “चलो उलटी लेट जाओ, गांड ऊपर कर लो,” मेहर बोली, “गांड क्यों,” उसे लगा गांड मारूँगा. “Muslim Jija Sali Chudai”
मैंने कहा, “अरे पीछे से डालने से कीटाणु गहराई तक पहुँचते हैं,” वो हँस पड़ी, उल्टी लेटी और गांड उठा दी, उसके घुटने बिस्तर पर, कमर झुकी हुई, चूत नीचे से खुली हुई, मैं पीछे खड़ा हुआ, चूत खोलकर लंड छेद पर रखा, सुपारा अंदर सरका, मेहर रो पड़ी, “अरे बाप रे मर गई, ये लंड है या नाग, पूरा अंदर तक घुस गया, अम्मी रे बहुत दर्द, आह्ह्ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह…”
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उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं, इतनी टाइट कि हर इंच अंदर जाना मुश्किल था, मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ाया, आधा लंड अंदर, मेहर की साँसें तेज, “जीजा जी धीरे… आह्ह्ह…” मैंने बाल पकड़े और कहा, “तेरी बहन को कभी इतना दर्द नहीं हुआ, तू पहले झटके में मर गई, बच्चे आसानी से नहीं आते, कुछ पाने के लिए कुछ सहना पड़ता है,”
मेहर चुप हो गई, मैं लौड़ा रगड़ने लगा, धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर, चूत की गहराई तक पहुँच गया, मेहर की आँखें बंद, मुँह खुला, “आह्ह्ह… जीजा जी… पूरा… अंदर…” दो मिनट में उसे मजा आने लगा, चूत ने लंड को ढीला छोड़ा, रस बहने लगा, वो गांड उठाकर चोदने लगी, “आह ह ह ह ह्हीईई जीजा जी और जोर से…” चट चट चपचप की आवाजें गूँजने लगीं.
मैंने बाल खींचे रखे जैसे घोड़ी चोद रहा हूँ, चूतड़ों पर हल्के थप्पड़ मारे, हर थप्पड़ पर चूत सिकुड़ती, “ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई मेहर…” मैंने कमर घुमाई, लंड गोल-गोल रगड़ा, चूत की हर दीवार को छुआ, मेहर का बदन काँपता, “जीजा जी… आह्ह… वहाँ… हाँ… इह्ह्ह…”
बीवी से टाइट चूत थी, लंड पूरा घुस रहा था, झाग निकल आया, सफेद और चिपचिपा, मेरे लंड पर लिपटा, साँसें उखड़ने लगीं, पसीना तरबतर हो गए, मेरे माथे से पसीना उसकी पीठ पर टपक रहा था, मैंने स्पीड बढ़ाई, जोर-जोर से ठोके, हर ठोके पर मेहर का बदन आगे झूलता, चूचियाँ लटककर हिल रही थीं. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“आह आह ओह ओह जीजा जी और जोर से, आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई,” मैंने कूल्हे खोले, लंड और गहराई तक, बच्चेदानी को छूता हुआ, मेहर चिल्लाई, “जीजा जी… वहाँ… बच्चा… वहाँ डालो… आह्ह्ह… ह्हीईई…” मैंने कमर और तेज घुमाई, लंड की जड़ चूत के होंठों से रगड़ती, क्लिट को उत्तेजित करती, मेहर का पहला ऑर्गेज्म आया, चूत सिकुड़ी, रस की बौछार, “आअह्ह्ह्ह… जीजा जी… बस… मर गई… ऊईईई…” लेकिन मैं नहीं रुका, ठोकता रहा.
अब मैंने उसे सीधा किया, पैर फैलाए, मिशनरी में लंड डाला, उसके होंठ चूमे, जीभ अंदर, वो मेरी जीभ चूसने लगी, चूचियाँ दबाईं, निप्पल मुँह में लिए, काटा, मेहर फिर सिहर उठी, “जीजा जी… चूसो… आह्ह…” लंड अंदर-बाहर, उसकी टाँगें मेरी कमर पर, मैंने स्पीड बढ़ाई, बिस्तर चरमराने लगा.
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मेहर की नाखून मेरी पीठ पर, खरोंचें, “जीजा जी… और… बच्चा… डालो… आह्ह्ह…” मेरा लंड मचला, वीर्य की गर्माहट, मैंने गांड दबाकर अंदर भरा, झटके पर झटके, पूरी मलाई बच्चेदानी में, “ले मेहर… बच्चा… बन… आह्ह…” मेहर की चूत ने वीर्य सोख लिया, मैं लंड अंदर ही रखा, पाँच मिनट लेटे रहे, साँसें सामान्य हुईं.
मैंने लुंगी से पोंछा, कपड़े पहने, मेहर आह आह करती रही, फिर उठकर कपड़े पहने और बिना बोले बाहर चली गई, मैनुद्दीन आया, “चलो हम जा रहे हैं,” मैं लेटा तो कुलसूम आई, मेरे साथ लेटी और बोली, “मैनुद्दीन भाई और मेहर ने शुक्रिया कहा है,” दस दिन बाद कुलसूम ने बताया, “मुबारक हो, मेहर माँ बनने वाली है.”
Rakesh says
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