Married Cousin Chudai Story
ये उन दिनों की बात है जब मैं नया-नया बच्चा था। लड़कियों के प्रति मेरा प्रेम चरम पर था। सुंदर लड़कियों के शरीर को मैं घूरता रहता था। रोज मुठ मारना भी एक आदत थी। मैं अपनी चचेरी बहन पर कब गया पता नहीं। वह मेरी ही उम्र की थी और उसका नाम आशवी था। उसे देखकर मुझे लगता था कि मैं उससे बात करूँगा और उसके साथ समय बिताऊँगा। Married Cousin Chudai Story
मैंने कभी भाई-बहन की चुदाई की कल्पना नहीं की थी। बाद में मुझे पता चला कि मेरे साथ ये सब होगा। आशवी का फीगर कैटरीना कैफ से बहुत मिलता है। दिखने में भी वह पूरी तरह से पटाखा है। किसी का भी भरोसा उसके सामने गिर जाता है। आशवी के प्रति मेरा आकर्षण बढ़ता गया जैसे-जैसे मेरी युवावस्था उफान पर आ रही थी।
मैं उसे देखते ही प्यार हो गया। अब मैं आशवी के ख्यालों में ही रहता था। वह हर बार उसकी ओर देखता रहता था। मैंने उसे खुश करने के लिए बहुत कुछ किया। दिन भर उसके साथ बैठकर लड़कियों के शो और सास-बहू के शो भी देखता था। उस समय, मैं इस तरह के सीरियल्स में दिलचस्पी नहीं रखता था, लेकिन उसके साथ समय बिताने के लिए इससे अच्छा कोई माध्यम भी नहीं था।
फिर एक दिन हमारा किसी बात पर विवाद हुआ। तीन साल तक हम दोनों ने नहीं बात की। उससे दूर रहकर भी उसके प्रति मेरा प्यार बढ़ता जा रहा था। मैं अपने दिल की बात उससे कहना चाहता था। लेकिन मुझे डर था कि वह अपने घरवालों को मेरी इस हरकत के बारे में बता दे। इसलिए वह चुप रह गया।
जब मुझसे रहा नहीं गया, मैंने एक उपाय खोजा। मैंने उसकी इन्स्टाग्राम आईडी का पता लगाया। मैं उसकी आईडी पाया। मैंने उससे इन्स्टाग्राम पर एक संदेश भेजा, जो उसने भी स्वीकार कर लिया। मैंने सोचा कि वह रिक्वेस्ट नहीं लेगी। बाद में हम दोनों इन्स्टाग्राम पर चैट करने लगे। हम दो घंटे तक बहस करते रहे।
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मैंने भाई बहन के रिश्ते को दोस्ती की ओर बदला। वह भी मौका मिलने पर उसके साथ फ्लर्ट करने की कोशिश करता था। लेकिन वह भी बहुत चालू था। वह पूरी तरह से मेरी बात नहीं सुनती थी। कभी-कभी मुझे लगता था कि वह भी मुझसे प्यार करती है, लेकिन वह मुझे इस बारे में बताने से बचती है।
फिर भी, कभी-कभी लगता है कि वह बस समय बिता रही है। फिर भी मैं उसके साथ चैटिंग करने लगा। ऐसे ही वर्ष बीत गया। बाद में ये भी धीरे-धीरे बंद हो गए। वह मेरे मैसेज का जवाब देना बंद कर दी थी क्योंकि मैं अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया था। शायद वह दूसरे लड़के से प्यार करता था। लेकिन मैं अभी भी उसी के बारे में सोचा था।
वह मेरे दिल में घर कर चुकी थी; मैं हर लड़की में उसे खोजने की कोशिश करता था, लेकिन सफल नहीं होता था। फिर समय बीता और हम 21 के हो गए और वह शादी कर ली। उसकी शादी की खबर सुनकर मैं बहुत दुखी हूँ। मैं अपने जीवन को किसी और व्यक्ति के हाथ में देने में असमर्थ था।
मैं उससे कभी अपने दिल की बात नहीं कह पाया, जो सबसे ज्यादा दुखदायक था। उसकी चुदाई भी नहीं कर पाया, जो उससे भी अधिक दुखदायक है। मैं जानता था कि यह चल रहा है। ऐसे ही मेरी इच्छा अधूरी रह गई। 4 साल बाद उसकी एक बेटी हुई, जिसे मैं अपनी बेटी की तरह मानता था।
मैं अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ गया था। मैं भी शादीशुदा था। मैंने शादी की लड़की उसके जैसी थी। आशवी में मेरा दिल अटक गया। मेरी जिंदगी में उसकी जगह कोई नहीं ले पाया। ऐसा करते हुए दो साल बीत गए। यद्यपि मैं अपनी पत्नी के साथ खुश था, मैं आशवी को मन से नहीं निकाल पा रहा था।
मैं यह सोच कर ही अपनी पत्नी को चोदता था कि मैं आशवी को चोद रहा हूँ। उसे चोदने की मेरी इच्छा कम नहीं हो रही थी, बल्कि बढ़ती जा रही थी। फिर एक दिन मैंने सोचा कि आशवी को सारी बात बताकर उसे मनाकर ही रहूँगा। मेरी छोटी बहन की शादी भी तभी हुई। हम अपनी छोटी बहन की शादी उदयपुर के एक होटल में कर रहे थे।
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मुझे पता चला कि आशवी के पति, मेरे जीजा, दस दिनों के लिए विदेश में जा रहे हैं। वह भी विवाह में नहीं आने वाले थे। मैंने इसी अवसर का लाभ उठाने का विचार किया। आशवी भी शादी से दस दिन पहले उदयपुर पहुंची थी। उस दिन हमने एक कार्यक्रम निर्धारित किया था। 7 बजे गार्डन में एक छोटा सा कार्यक्रम था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
आशवी तैयार होकर मेरे सामने खड़ी हुई। विभू, मैं कैसी लग रही हूँ? उसने पूछा। (वह मुझे प्यार से “विभू” कहती थी) मैं सब लोगों के साथ था, इसलिए मैंने उससे कहा कि ठीक लग रही हो, सबसे सुंदर नहीं लग रही हो। उसने भी मेरा इशारा समझा। इसके बाद पार्टी शुरू हुई। सबने बहुत मज़ा किया।
फिर पार्टी खत्म होने पर हम दोनों होटल के गार्डन के टेरेस पर बैठकर बातें करने लगे, जिसमें तीन से चार घंटे बीत गए। तब हम सोने जाने लगे। मैं मन ही मन उससे अपने दिल की बात कहने का विचार कर रहा था। मैं भी शादी में नहीं आया था। हम लोगों ने शादी से चार दिन पहले एक फिल्म देखने का कार्यक्रम बनाया था। साथ में सभी ने फिल्म देखी और खरीद भी की।
मैं कुछ काम करना था तो बाकी सब चले गए, लेकिन मैंने आशवी को अपने साथ रखा। जब मैंने वह काम पूरा किया, हम वापस होटल जा रहे थे। आशवी और मैंने उस समय कोई बात नहीं की। हम लोग भी बिना कुछ कहे होटल पहुंच गए। सब लोग अपने-अपने कमरे में चले गए। आशवी का हाथ मैंने पकड़ा और उसे टेरेस पर ले गया।
मैंने उसको वहाँ ले जाकर गार्डन में बैठाया। मुझे तुमसे कुछ कहना है, उसने कहा, हाथ पकड़कर। असमंजस भरी नजरों से उसने मुझे देखा। मैंने कहा कि आशवी, या तो आप समझ नहीं पा रहे हैं या जानबूझकर समझने का नाटक कर रहे हैं। क्या उसने कहा? क्या मतलब नहीं समझ पा रहा हूँ?
मैंने कहा कि मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ और तुम्हारे साथ प्यार करना चाहता हूँ। वह इतना बोलते ही रोने लगी। मैंने उसे तुरंत गले से लगा लिया। 2 मिनट बाद वह मुझे अपने हाथों से मारने लगी और पूछा-तुम्हें इतनी सी बात बोलने में आठ साल लग गए?
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क्या आपने सोचा कि मेरी ओर से आपके लिए कुछ नहीं था, उसने विनम्रता से पूछा। मैं भी बचपन से तुमसे प्यार करती हूँ और तुमसे मिलना चाहती हूँ। तुमने कभी भी बोलने का साहस नहीं दिखाया। मैंने कहा कि मैंने डर से कभी ऐसा नहीं कहा। हां, मैंने भी डर से नहीं कहा।
मैंने फिर से उसके होंठों को चूम लिया और चूमता रहा। वह भी मेरे साथ काम करती थी। फिर अचानक उठकर कहा, “मैं अपनी बेटी को देखने जा रहा हूँ।” इसके बाद वह नीचे चली गई। मैं भी उसे छोड़ दिया। मैंने बस उससे दिल की बात कही। मैं अब उसको कभी भी चोद सकता था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अगली रात फिर कोई कार्यक्रम था और मैं आशवी को देखकर पागल हो गया। फिर कार्यक्रम खत्म हुआ और हर व्यक्ति अपने अपने कमरे में चला गया। आशवी ने मुझे जाते समय एक संकेत दिया था, जिसे मैं समझ गया था। फिर चौबीस मिनट के बाद मैं आशवी के कमरे में पहुंचा और दरवाजा खोला।
जब मैं अंदर गया, मैंने देखा कि वह पूरी तरह से तैयार था। उन्होंने अपनी बेटी को अपनी नानी के पास सुला दिया। द्वार पर पहुंचते ही वह शेरनी की तरह मुझे किस करने लगी। मैं भी जोर से उसे किस करने लगा। 5 मिनट तक किस काम करने के बाद मैंने पूछा कि क्या आज आपको शर्म नहीं आ रही?
उसने कहा कि सिर्फ प्यार कर लिया था, इसलिए शर्म करना क्या? फिर मैंने उसे फिर से चूमना चालू कर दिया. उसके गाल, गर्दन, होंठ, सिर, हाथ, पीठ, पेट। ऐसी कोई भी जगह नहीं थी जहाँ मैंने उसे किस ना किया हो। फिर उसने मेरी शर्ट निकाल दी और मेरे जिस्म को चाटने लगी.
मैंने भी उसका टॉप निकाल दिया और उसकी ब्रा में से उसके बूब्स बाहर आने को बेताब थे और मैंने बड़े ही प्यार से उसकी ब्रा को निकाल दिया और उसके बूब्स दबाने लगा और चूसने लगा. अब कमरे का माहौल बिल्कुल गर्म हो चुका था और वो जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी. आह… आह… उह… उह… हा.. हं.. हं। उसकी कामुक सिसकारियों से मेरा जोश और बढ़ता जा रहा था।
फिर मैंने उसके बूब्स से नीचे आते हुए उसके पेट, उसकी नाभि को चूमते हुए, उसके पजामे को भी निकाल दिया और मेरी जान अब मेरे सामने बस पैंटी में थी. मैं बस उसको देख रहा था और सोच रहा था कि आज मेरा सपना पूरा होने वाला है. फिर मैंने उसकी पैंटी को भी निकाल दिया। “Married Cousin Chudai Story”
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मैंने पहली बार आशवी को ऐसे देखा था. मैं सोच रहा था कि वो बिल्कुल नंगी तो और भी ज्यादा मस्त माल लगती है. उसका गोरा बदन तो मानो चमक रहा था। मैं ये नजारा देख कर अपने होश खो बैठा था. फिर आशवी ने मुझे मेरी तंद्रा से जगाया- विभू क्या हुआ? कहां खो गए हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं. उसने मेरी पैंट में मेरे उठे हुए लौड़े को देखा और उसको हाथ से सहला कर देखने लगी. मेरे लंड पर उसका हाथ लगते ही मेरे अंदर जैसे करंट सा दौड़ गया. जिन पलों का इंतजार मैंने 12 साल किया वो पल यही थे. मेरे जिस्म से लिपटते हुए आशवी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को चूसने लगी.
उसने जैसे ही लंड को मुंह में लिया तो मैं हैरान सा रह गया था. मजा इतना था कि पूछो मत, हैरान इसलिए कि वो लंड चूसने में एकदम एक्सपर्ट थी. पांच मिनट तक उसने मेरे लंड को तबियत से चूसा. अब मेरी बारी थी उसको खुश करने की. मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
दस मिनट तक मैं उसकी चूत को चाटता रहा. वो सिसकारियां भरती रही-आह! आह! उह! उह… हा…हं! फिर मैंने उसके होंठों पर किस किया और कहा- जान अब वक्त आ गया है जन्न्त की सैर करने का. मेरा इतना कहना था कि उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी गुलाबी चूत पर टिकाया और बोली- विभू, कर दे मेरी मुराद पूरी … मैं भी तुम्हारे इस लंड से चुदने के लिए बहुत तरसी हूं. “Married Cousin Chudai Story”
मैंने धीरे-धीरे लंड उसकी चूत के अंदर डालना चालू किया और पूरा अंदर तक पेल दिया. उसको थोड़ा ही दर्द हुआ क्योंकि वो पहले भी अपने पति से न जाने कितनी ही बार चुद चुकी थी. उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे. शायद वो मेरे प्यार को पाने की खुशी के थे और मैंने भी उसे किस करते हुए चोदना जारी रखा।
मैं धक्के लगाता जा रहा था और कमरा फच-फच-फच की आवाजों से गूंज रहा था और वो भी आह! आह! उह! उह! हा! की आवाजें निकाल रही थी. वो बोल रही थी- विभू तुम्हारे प्यार और लंड के लिए मैं कितने सालों से तड़प रही थी. मैं बोला- मैं भी मेरी जान, मुझे उसकी आँखों में सुकून और मेरे लिये बहुत सारा प्यार साफ साफ दिखाई दे रहा था.
मैं भी उसके प्यार को देख कर कब का पिघल गया था. हमारी चुदाई 8-10 मिनट तक चलती रही और फिर मैंने पोजीशन चेंज करने की सोची. अब वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरा 7 इंच का लंड अपनी चूत में लेकर ऊपर नीचे होने लगी. अपनी चूत में लंड लेकर वो कूदने लगी और सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … आह्ह, आह्स … याह्ह … ओह्ह… करते हुए वो मस्ती में चुदते हुए एकदम से मदहोश होती जा रही थी. “Married Cousin Chudai Story”
अब मैंने फिर से उसे अपने नीचे लिया और उसकी जोरदार चुदाई चालू कर दी. फिर मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और अपनी पूरी ताकत से चुदाई जारी रखी. मेरे इतने जोश से उसकी आवाजें और ज्यादा तेज हो गयी थीं. वो जैसे चिल्लाने ही लगी थी. उसकी चिल्लाहटों के साथ मेरा जोश भी बढ़ रहा था और हम दोनों की चुदाई का मजा भी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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इस 5 मिनट की जबरदस्त चुदाई में वो 2 बार झड़ चुकी थी मगर मेरा माल निकलना अभी बाकी थी. मैंने उसकी चूत को ऐसे ही जोश में बजाना जारी रखा. फिर हम दोनों साथ में ही झड़ गये. ऐसा लगा कि कोई तूफान आकर थम गया हो. हम दोनों एकदम से शांत होकर एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे. एक दूसरे की बांहों में लेटे रहे. फिर वो अचानक से बोली- विभू क्या तुम मुझे हमेशा इतना ही प्यार करोगे?
मैंने उसे किस करते हुए कहा- अब तो मेरा प्यार और भी बढ़ता जाएगा. ये सुनकर वो मेरी बांहों में जैसे सिमट गयी. उससे लिपटे हुए सुबह के 4 बज गये थे लेकिन उसको छोड़ कर जाने का मन बिल्कुल नहीं कर रहा था. यहां पर दुनिया का खयाल भी करना पड़ा. दुनिया की नजरों में हम दोनों ही शादीशुदा थे और रिश्ते में भाई-बहन भी लगते थे. इसलिए प्यार वाले रिश्ते को भाई-बहन के रिश्ते के सामने झुकना पड़ा.
न चाहते हुए भी मैं उसको छोड़ कर उठा और मैंने उसको प्यार से किस किया और फिर अपने कपड़े पहन कर वापस अपने रूम में आ गया. सुबह हम उठे और सबके साथ नाश्ता किया. सब कुछ नॉर्मल ही लग रहा था. मेरी बहन की शादी भी बड़ी धूम-धाम से हो गयी. उस रात के बाद से आशवी के साथ मेरे रिश्ते में नया मोड़ आ गया था. दुनिया की नजरों में हम दोनों भाई बहन थे लेकिन अंदर ही अंदर एक दूसरे पर जान देने लगे थे. जब भी हमें मौका मिलता था हम दोनों एक दूसरो को खूब प्यार देने लगे.
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