Maa Beta Bahu Chudai
सौम्या, 22-23 साल की जवान और खूबसूरत लड़की, उसका बदन ऐसा जैसे किसी मूर्तिकार ने बड़ी फुर्सत से तराशा हो। कद पांच फीट तीन इंच, हर अंग एकदम सांचे में ढला हुआ। उसकी आंखें कजरारी, होंठ गुलाबी, और चाल ऐसी कि देखने वाला बस देखता रह जाए। अभी आठ महीने पहले ही उसकी शादी दीपक से हुई, जो दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में काम करता है। Maa Beta Bahu Chudai
दीपक भी 24 साल का हट्टा-कट्टा नौजवान, चेहरा सुंदर, और लंबा-मोटा लंड का मालिक, जो सौम्या की हर रात को रंगीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता। सौम्या अपनी शादी से बेहद खुश थी। दीपक हर रात उसकी चुदाई में ऐसा जोश दिखाता कि सौम्या सातवें आसमान पर पहुंच जाती।
उसकी चूत हर बार पानी-पानी हो जाती, और दीपक का लंड उसे बार-बार झड़ने पर मजबूर कर देता। घर में एक और अहम् शख्स था- दीपक की माँ रेखा। उम्र 45 के आसपास, पर बदन इतना मस्त कि जवान लड़कियां भी शरमा जाएं। कद पांच फीट, चुचे बड़े-बड़े, जैसे हिमाचल की पहाड़ियां, पेट सपाट, और कूल्हे इतने उभरे हुए कि देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।
रेखा का चेहरा अभी भी ऐसा था कि लोग उसे देखकर उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा पाते। उसकी चाल में एक अजीब सा ठहराव था, जो कामुकता को और बढ़ा देता। अब आप सोच रहे होंगे कि सौम्या की कहानी में मैं उसकी सास की इतनी तारीफ क्यों कर रहा हूँ? तो सुनिए, इस कहानी की असली नायिका सौम्या की सास रेखा ही है।
कहानी तब शुरू हुई, जब एक दोपहर सौम्या ने रेखा के कमरे से सिसकारियों की आवाज सुनी। उसका दिल धक-धक करने लगा। वो चुपके से दरवाजे के पास गई और झांककर देखा तो हैरान रह गई। रेखा सिर्फ पेटीकोट में बिस्तर पर लेटी थी, एक हाथ की दो उंगलियों से अपनी चूत को रगड़ रही थी, और दूसरे हाथ से अपनी कड़क चुचियों को जोर-जोर से मसल रही थी।
उसकी आंखें बंद थीं, चेहरा लाल, और मुंह से “आह… ऊह…” की आवाजें निकल रही थीं। शायद वो झड़ने वाली थी, तभी उसकी सिसकारियां तेज हो गई थीं। सौम्या का ध्यान रेखा की चूत पर गया। वो एकदम क्लीन शेव थी, जैसे आज ही झांटें साफ की हों। चूत पानी से चमक रही थी, मानो कोई मोती रोशनी में दमक रहा हो।
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सौम्या को यकीन नहीं हुआ कि उसकी सास इतनी कामुक हो सकती है। उसने सोचा, रेखा तो बाहर से इतनी सभ्य और शांत दिखती है, पर अंदर की आग तो कुछ और ही कहानी कह रही थी। सौम्या वही दरवाजे पर खड़ी रही, उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। जब रेखा झड़कर शांत हुई, तो उसने गहरी सांस ली और आंखें खोलीं।
तभी सौम्या ने एकदम से दरवाजा खोल दिया और अंदर चली गई। रेखा, जो अभी भी अस्त-व्यस्त कपड़ों में लेटी थी, सौम्या को देखकर हड़बड़ा गई। उसने जल्दी से पास पड़ी साड़ी उठाई और अपने बदन को ढक लिया। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया, जैसे कोई चोर पकड़ा गया हो।
“अब क्या फायदा मम्मी जी… सब कुछ तो देख लिया मैंने!” सौम्या ने हंसते हुए कहा, माहौल को हल्का करने की कोशिश में।
रेखा शर्म से मरी जा रही थी। उसकी आंखें नीचे थीं, और वो कुछ बोल नहीं पा रही थी। सौम्या उसके पास बिस्तर पर बैठ गई और बोली, “मम्मी जी, क्यों परेशान हो रही हो? ये सब तो होता रहता है। ये तो शरीर की जरूरत है, इसमें शर्माने की क्या बात? मैं भी तो कई बार ऐसा करती हूँ जब दीपक घर पर नहीं होते।” सौम्या का लहजा दोस्ताना था, पर रेखा अभी भी चुप थी।
सौम्या ने उसे सहज करने के लिए उसका हाथ पकड़ा और उसकी चूची को हल्के से दबाते हुए बोली, “क्या बात है मम्मी जी, आपकी चुचियां तो इतनी कड़क और मस्त हैं! देखो, मेरी तो इनके सामने फीकी पड़ जाती हैं।” कहते हुए सौम्या ने रेखा का हाथ अपनी चूची पर रख दिया। रेखा ने झटके से हाथ खींच लिया और बोली, “क्यों शर्मिंदा कर रही हो बहू…”
“अरे, मम्मी जी, ये सब तो नॉर्मल है। कभी-कभी सेक्स का भूत सिर चढ़ जाता है। जब दीपक टूर पर जाते हैं, तो मैं भी उंगली से अपनी चूत को शांत करती हूँ। आप तो इतने सालों से अकेली हैं, फिर भी इतना कंट्रोल! मैं तो दो दिन भी बिना चुदे नहीं रह पाती,” सौम्या ने हंसकर कहा।
रेखा अभी भी चुप थी। सौम्या ने बहुत कोशिश की, पर रेखा का मन नहीं बदला। आखिरकार सौम्या ने कहा, “ठीक है मम्मी जी, आज से हम दोनों सहेलियां हैं। जब भी आपको ऐसी जरूरत महसूस हो, मुझे बताना। मैं आपकी मदद कर दूंगी। और जब दीपक टूर पर होंगे, तो आप मेरी मदद कर देना।” रेखा ने सिर्फ हल्का सा सिर हिलाया और चुप रही।
कुछ दिन ऐसे ही बीते। सौम्या रेखा को खुश करने की हर कोशिश करती, पर रेखा उसके सामने शर्मा जाती। फिर एक दिन दीपक को तीन दिन के टूर पर जाना पड़ा। घर में सिर्फ सौम्या और रेखा रह गए। सौम्या ने ठान लिया कि इन तीन दिनों में वो रेखा की शर्म को तोड़ देगी।
पहली ही रात सौम्या ने रेखा को अपने कमरे में साने को कहा। रेखा ने मना किया, बोली, “नहीं बहू, मैं अपने कमरे में ही ठीक हूँ।” पर सौम्या ने जिद की, “मम्मी जी, अकेले क्या करेंगी? चलो मेरे साथ, थोड़ी गपशप करेंगे।” आखिरकार रेखा मान गई। रात को सौम्या एक पतली सी नाइटी पहनकर बिस्तर पर आ गई, जिसमें उसका बदन साफ झलक रहा था।
रेखा साड़ी में थी। सौम्या ने उसकी साड़ी खींचकर अलग की और बोली, “मम्मी जी, इतने भारी कपड़ों में कैसे सोएंगी? आराम से लेटो।” थोड़ी देर इधर-उधर की बातें हुईं। फिर सौम्या ने अचानक अपनी नाइटी उतार दी और एक तरफ फेंक दी। रेखा हैरान रह गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“ये क्या कर रही हो सौम्या?” उसने हड़बड़ाते हुए पूछा। पर सौम्या ने बिना जवाब दिए रेखा के पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और फिर उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगी। रेखा ने रोकने की कोशिश की, पर सौम्या ने उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। अब दोनों सास-बहू बिस्तर पर जन्मजात नंगी थीं।
“अरे मम्मी जी, आप तो नई दुल्हन की तरह शरमा रही हो! थोड़ा मस्ती करो,” सौम्या ने हंसकर कहा।
“सौम्या, तू तो बड़ी बेशर्म है रे! देख, इस बेशर्म ने मुझे भी अपने जैसा नंगा कर दिया!” रेखा शर्म से लाल हो गई।
“मम्मी जी, अभी तो सिर्फ नंगा किया है, आगे-आगे देखो क्या-क्या करती हूँ!” सौम्या ने शरारत से कहा।
“तू तो पागल है!” रेखा ने शर्माते हुए कहा। ये पहला मौका था जब वो अपने पति के अलावा किसी के सामने पूरी तरह नंगी थी।
कपड़े उतरते ही सौम्या रेखा से लिपट गई और उसकी खरबूजे जैसी चुचियों को मसलने लगी। रेखा कसमसाई, पर सच ये था कि उसे भी मजा आने लगा था। सौम्या ने किसी मर्द की तरह उसकी चुचियों को जोर-जोर से मसला, फिर उसके तने हुए निप्पलों को मुंह में लेकर चूसने लगी।
“आह… सौम्या… ये क्या कर रही है…” रेखा की सिसकारी निकल गई। सौम्या ने बिना रुके एक उंगली रेखा की चूत में डाल दी। चूत पहले से ही गीली थी। उंगली अंदर जाते ही रेखा के मुंह से “आह्ह्ह… ऊह…” निकल पड़ा। रेखा ने भी अब सौम्या की चुचियों को पकड़ लिया और मसलने लगी।
सौम्या ने उसकी चुचियों को छोड़कर नीचे की तरफ बढ़ना शुरू किया। जब उसने रेखा की चूत पर अपने होंठ रखे, तो रेखा का बदन सिहर उठा। “हाय… सौम्या… ये क्या… आह…” रेखा की आवाज कांप रही थी। सौम्या ने जीभ निकालकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया।
रेखा के लिए ये सब नया था। उसकी चूत से पानी का फव्वारा छूटने लगा। सौम्या भी अब गर्म हो चुकी थी। वो अपनी चुचियों को मसल रही थी, और उसकी चूत में भी खुजली शुरू हो गई थी। जब बर्दाश्त नहीं हुआ, तो उसने पलटी मारी और 69 की पोजीशन में आ गई।
उसने अपनी चूत रेखा के मुंह पर रख दी। रेखा समझ गई और उसने भी सौम्या की चूत में जीभ डाल दी। “आह… मम्मी जी… चाटो… हाय… कितना मजा आ रहा है…” सौम्या सिसक रही थी। दोनों सास-बहू एक घंटे तक एक-दूसरे से लिपटकर मजे लेती रहीं। रेखा चार बार झड़ी, और सौम्या भी तीन बार। आखिरकार दोनों थककर बिस्तर पर ढेर हो गईं।
“सौम्या… आज सालों बाद मेरी चूत ने इतना पानी छोड़ा… चार बार झड़ी मैं…” रेखा ने हांफते हुए कहा।
“मम्मी जी, सच बताओ, आखिरी बार चूत में लंड कब लिया था?” सौम्या ने शरारत से पूछा।
“बहू… बहुत साल हो गए… अब तो याद भी नहीं…” रेखा ने शर्माते हुए कहा।
“फिर भी बताओ ना?” सौम्या ने जिद की।
रेखा ने अपनी कहानी सुनानी शुरू की। “जब मैं स्कूल में पढ़ती थी, तब दीपक के पापा से मेरी शादी हुई। वो तब फौज में नए-नए भर्ती हुए थे, 19-20 साल के। दोनों नादान थे। सुहागरात को न उन्हें कुछ पता था, न मुझे। पहली रात तो बस यूँ ही बीत गई। अगले दिन उनके दोस्तों ने बताया कि क्या करना है, तब दूसरी रात उन्होंने मेरी सील तोड़ी।
मेरी छोटी सी चूत और उनका मोटा लंड… सारी रात अंदर डालकर पड़े रहे। सुबह देखा तो बिस्तर खून से सना था। करीब 20 दिन हम साथ रहे, रोज तीन-चार बार चुदाई होती। फिर उनकी छुट्टियां खत्म हुईं, और वो ड्यूटी पर चले गए। उनकी बहुत याद आती थी। ससुराल में भरा-पूरा परिवार था। मेरी सास इतनी सख्त थी कि उनकी नजर से डर लगता था। “Maa Beta Bahu Chudai”
कभी इधर-उधर देखने की हिम्मत नहीं हुई। दोनों तरफ तड़प थी। फिर धीरे-धीरे आदत हो गई। वो छुट्टियों में आते, और हम पूरा वक्त एक-दूसरे में खोए रहते। रात-रात भर चुदाई का मजा लेते। फिर मैं प्रेग्नेंट हो गई। दीपक के जन्म के वक्त वो आए। फिर उनकी ड्यूटी बंगाल बॉर्डर पर हो गई, और एक साल तक नहीं आए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं दीपक की परवरिश में व्यस्त हो गई। तीन साल तक जब भी वो आते, हम सिर्फ रात को मिल पाते। दिन में बात तक नहीं होती थी। जब उनकी ड्यूटी पठानकोट में हुई, तब हम दो साल फैमिली क्वार्टर में साथ रहे। जिंदगी ऐसे ही चल रही थी। फिर तेरह साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई। तब से मैं अकेली जिंदगी काट रही हूँ।”
“मम्मी जी, बुरा न मानो… पर इन तेरह सालों में कभी मन नहीं हुआ किसी से चुदवाने का?” सौम्या ने सावधानी से पूछा।
“नहीं… दीपक की परवरिश ही मेरा मकसद बन गया था। इधर-उधर ध्यान ही नहीं गया,” रेखा ने गंभीरता से कहा।
“मतलब आप इतने सालों से सिर्फ उंगली से काम चला रही थीं?” सौम्या ने थोड़ा मजाकिया लहजे में पूछा।
“बताया ना, मन ही नहीं हुआ…” रेखा ने बात टालने की कोशिश की।
“फिर उस दिन इतनी गर्म कैसे हो गई थीं आप?” सौम्या ने जिद पकड़ ली।
“वो… वो… छोड़ ना बहू… तू भी क्या बात लेकर बैठ गई!” रेखा शरमा गई।
सौम्या के बार-बार कहने पर रेखा ने बताना शुरू किया। “अब तू मेरी बहू के साथ-साथ सहेली भी है, तो तुझसे क्या छुपाना। उससे एक रात पहले जब मैं पेशाब करने उठी, तो तुम और दीपक चुदाई कर रहे थे। तुम्हारे कमरे से सिसकारियां, आहें, और तेरी पायल की छमछम की आवाज आ रही थी।
मैं समझ गई कि मेरा बेटा मेरी बहू की चुदाई कर रहा है। तुम्हारा दरवाजा भी थोड़ा खुला था। मैंने बहुत कोशिश की, पर खुद को रोक नहीं पाई। मैंने झांककर देखा। अंदर का नजारा देखकर मेरा बदन सिहर उठा। दीपक अपने मोटे लंड से तेरी चूत बजा रहा था। मैं तुरंत अपने कमरे में चली गई, पर मेरा दिल बेचैन हो गया।
बहुत कोशिश की, पर मन नहीं माना। मैं फिर तुम्हारे कमरे के पास पहुंच गई और पूरे 20 मिनट तक तुम दोनों की चुदाई देखती रही। मेरी चूत पानी-पानी हो गई। सारा दिन मेरे दिमाग में वही सीन घूमता रहा। जब कंट्रोल नहीं हुआ, तो उंगली से खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी, तभी तू आ गई और मेरी चोरी पकड़ ली।”
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“ओह… तो ये बात है!” सौम्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
“बहू, प्लीज, ये बात किसी को मत बताना!” रेखा ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
“मम्मी जी, मैं समझती हूँ। ये शरीर की जरूरत है। मैं तो दो दिन भी दीपक से चुदे बिना नहीं रह पाती, और आपने तेरह साल बिना चुदाई के काट दिए। पर अब चिंता मत करो, आपकी इस जरूरत को मैं पूरा करूंगी,” कहकर सौम्या रेखा से लिपट गई। दोनों फिर से एक-दूसरे के बदन से रगड़ने लगीं। सौम्या ने रेखा की चूत में उंगली डाली, और रेखा ने सौम्या की चुचियां मसलीं। दोनों ने एक बार फिर चूत से पानी निकाला और थककर सो गईं। “Maa Beta Bahu Chudai”
कहते हैं, सेक्स की आग में जब मस्ती का तड़का लगता है, तो वो और भड़क उठती है। करीब एक महीना बीत गया। सौम्या और रेखा जब भी मौका मिलता, कपड़े उतारकर बिस्तर पर मस्ती करने लगतीं। सौम्या हर बार रेखा की चूत चाटती, और रेखा भी सौम्या की चूत में जीभ डालकर उसे झड़ा देती। पर सौम्या को लग रहा था कि रेखा की आग सिर्फ उंगली या जीभ से नहीं बुझने वाली। उसे कुछ और चाहिए था।
एक दिन रेखा ने सौम्या से कहा, “सौम्या, मेरी जान… तूने मेरी आदत बिगाड़ दी है। पिछले तेरह सालों से जो आग दबी थी, तूने उसे सुलगा दिया।”
“तो क्या हुआ मम्मी जी? जिंदगी है, मजे लो!” सौम्या ने बिंदास जवाब दिया।
“पर सौम्या, अब दिक्कत कुछ बढ़ रही है,” रेखा ने बेचैनी से कहा।
“क्या मतलब?” सौम्या ने भौंहें चढ़ाईं।
“मतलब… कभी-कभी सेक्स इतना हावी हो जाता है कि कंट्रोल नहीं होता,” रेखा ने हिचकिचाते हुए कहा।
“तो क्या हुआ? आपकी बहू है ना, मजे देने के लिए!” सौम्या ने मुस्कुराकर कहा।
“बात वो नहीं है…” रेखा और बेचैन हो गई।
“तो क्या बात है? खुलकर बोलो, हम तो सहेलियां हैं!” सौम्या ने उसे प्रोत्साहित किया।
“सौम्या… जब से तूने मुझे ये लत लगाई, मेरा दिल बेचैन रहता है। रात को जब आंख खुलती है, तो ध्यान तुम्हारे कमरे की तरफ जाता है। सोचती हूँ कि तू दीपक के मोटे लंड से मजे ले रही होगी, और मैं अकेली अपनी चूत में उंगली डालकर तड़प रही हूँ,” रेखा ने आखिरकार दिल की बात कह दी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“ओह… तो मम्मी जी, आपका मन अब लंड से चुदने का करने लगा है?” सौम्या ने शरारत से पूछा।
“हट पागल! इस उम्र में लंड लेकर क्या करूंगी?” रेखा ने शर्माते हुए बात टालने की कोशिश की।
“मन करता है तो बताओ ना!” सौम्या ने जिद की।
“छोड़ ना ये बात!” कहकर रेखा अपने कमरे में चली गई।
सौम्या को रेखा की बातों से साफ था कि उसकी सास की चूत अब लंड मांग रही है। पर सवाल ये था कि वो अपनी सास के लिए लंड कहां से लाए? दिन बीतते गए, और रेखा की बेचैनी बढ़ती गई। सौम्या ने कई बार उससे इस बारे में बात की, पर रेखा हर बार टाल देती। फिर एक दिन रेखा ने कुछ ऐसा कहा कि सौम्या एक पल के लिए सन्न रह गई। “Maa Beta Bahu Chudai”
“सौम्या, मुझे ये बात नहीं कहनी चाहिए, पर अगर तुझे बुरा न लगे, तो एक बात बोलूं?” रेखा ने हिचकिचाते हुए कहा।
“बोलो ना मम्मी जी, पूछना कैसा?” सौम्या ने उत्साह से कहा।
“सौम्या… मुझे कहते हुए शर्म आ रही है… कैसे बोलूं!” रेखा का चेहरा लाल हो गया।
“अरे, सहेली से क्या शर्म? बोलो!” सौम्या ने उसे हौसला दिया।
“सौम्या… मैं चाहती हूँ कि तू कोई ऐसा इंतजाम कर, जिससे मैं तेरी और दीपक की चुदाई देख सकूं!” रेखा ने आखिरकार कह ही दिया।
“मम्मी जी, आपने तो पहले भी देखी है?” सौम्या ने हैरानी जताई।
“अरे, तब तो डर के मारे ठीक से देख भी नहीं पाई थी। अब ऐसा कुछ कर कि शुरू से आखिर तक देख सकूं,” रेखा ने शरमाते हुए कहा।
“कोई बात नहीं, मैं कुछ इंतजाम करती हूँ!” सौम्या ने मुस्कुराकर कहा।
“तू बहुत अच्छी है सौम्या… मेरा बहुत ख्याल रखती है!” रेखा ने राहत की सांस ली।
“एक बात बताओ मम्मी जी… आपके मन में मेरी और दीपक की चुदाई देखने का ख्याल कैसे आया?” सौम्या ने शरारत से पूछा।
“अब क्या बताऊं… तू दिन में मेरे साथ मस्ती करती है, और रात को दीपक के लंड का मजा लेती है। कभी-कभी तुम्हारे कमरे से सिसकारियां सुनकर मेरी चूत में आग लग जाती है। बहुत कोशिश करती हूँ, पर कंट्रोल नहीं होता। सारी रात करवटें बदलती रहती है। उंगली से भी शांत करने की कोशिश करती हूँ, पर आग नहीं बुझती। बस मन करता है कि तुम दोनों को चुदते देखूं, शायद कुछ राहत मिले,” रेखा ने दिल खोलकर कहा।
“ओह… ऐसी बात है! ठीक है मम्मी जी, मैं कुछ ना कुछ इंतजाम करती हूँ। पर एक बात बताओ, अगर मेरी और दीपक की चुदाई देखकर आपकी चूत और गर्म हो गई, तो फिर क्या करोगी?” सौम्या ने चुटकी लेते हुए पूछा।
रेखा चुप हो गई। उसके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। सौम्या ने ही चुप्पी तोड़ी, “मम्मी जी, मुझे लगता है आपको अपनी चूत की आग बुझाने के लिए लंड चाहिए।”
“हट पगली! अब मेरी उम्र थोड़े ही है लंड लेने की!” रेखा ने शर्माते हुए कहा।
“मम्मी जी, लंड लेने की कोई उम्र नहीं होती। मैंने तो सुना है कि 80 साल की बूढ़ी औरतें भी लंड लेती हैं। अगर यकीन न हो, तो नेट पर देख लो। जब तक चूत में आग है, लंड की चाहत रहती है। और लंड लेने से बूढ़ी भी जवान हो जाती है,” सौम्या ने हंसकर कहा। “Maa Beta Bahu Chudai”
“बस कर बहू! अब क्या मुझे चुदवाकर ही मानेगी? पहले ही तूने मेरी चूत चाट-चाटकर दबी हुई आग सुलगा दी!” रेखा ने गुस्से में कहा।
“मम्मी जी, आप इशारा तो करो… कोई ना कोई लंड ढूंढ ही लेंगे आपके लिए!” सौम्या ने हंसते हुए कहा।
“जब भरी जवानी में दीपक के पापा ड्यूटी पर जाते थे, तब मैंने कोई लंड नहीं ढूंढा। अब बुढ़ापे में ढूंढकर नरक में जाऊं?” रेखा ने गंभीर होकर कहा।
“वो तो ठीक है, पर चूत में आग लगी है, तो उसे बुझाना तो पड़ेगा ना? नहीं तो ये आग बहुत तंग करती है!” सौम्या ने समझाया।
“बस कर… जैसे पिछले कुछ दिन से तू मेरी आग बुझा रही है, वैसे ही बुझाती रह। अब लंड लेने की ना उम्र है, ना चाहत!” रेखा ने बात खत्म की।
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बात करते-करते दोनों फिर नंगी हो गईं और एक-दूसरे की चूत से पानी निकालने में जुट गईं। शांत होने के बाद सौम्या बोली, “चिंता मत करो मम्मी जी, जल्दी ही मैं आपको मेरी और दीपक की चुदाई का लाइव शो दिखाती हूँ। और हां, आपकी चूत के लिए भी एक मोटा-लंबा लंड ढूंढ ही लूंगी।”
“मुझे नहीं चाहिए कोई लंड! इस उम्र में बदनाम करवाएगी क्या, कमीनी?” रेखा ने गुस्से में कहा।
“चिंता मत करो, बदनामी नहीं होने दूंगी। आपके लिए ऐसा लंड ढूंढूंगी, जिसमें कोई रिस्क ना हो,” कहकर सौम्या अपने कमरे में चली गई।
रेखा नंगी बिस्तर पर लेटी अपनी चुचियां मसलते हुए सोच रही थी। क्या उसकी बहू सच में उसके लिए लंड का इंतजाम करेगी? और अगर करेगी, तो किसका? ऐसा कौन है, जिससे चुदवाने में बदनामी का डर न हो? यही सोचते-सोचते उसकी आंख लग गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
शाम सात बजे आंख खुली, तो खुद को नंगा देखकर वो शरमा गई। जल्दी से कपड़े पहने और बाहर आई। दीपक ड्यूटी से लौट चुका था। रेखा का दिल धक से रह गया। अगर दीपक उसके कमरे में आ जाता और उसे नंगा देख लेता, तो क्या सोचता? पर बाहर सब नॉर्मल था।
दो-तीन दिन बाद सौम्या ने रेखा को बताया, “मम्मी जी, आज रात तैयार रहना। मेरी और दीपक की चुदाई देखने का इंतजाम हो गया।” रेखा की धड़कनें बढ़ गईं। वो शरमा रही थी, पर मन ही मन उत्साहित भी थी। वो अपनी बहू और बेटे की चुदाई देखने वाली थी। “Maa Beta Bahu Chudai”
शाम तक का वक्त रेखा के लिए पहाड़ जैसा था। शर्म के मारे कुछ बोल नहीं रही थी, पर नजर घड़ी पर थी। शाम हुई, दीपक घर आया, सबने खाना खाया, और सोने की तैयारी होने लगी। रेखा की बेचैनी बढ़ रही थी। दीपक अपने कमरे में टीवी देखने चला गया। तभी सौम्या रेखा के कमरे में आई और उसे अपने साथ चलने को कहा। रेखा चुपचाप उसके पीछे चल दी।
सौम्या के कमरे के दरवाजे पर पहुंचकर उसने रेखा को रुकने को कहा। “जब मैं बुलाऊं, तब अंदर आ जाना,” सौम्या ने फुसफुसाते हुए कहा। रेखा दरवाजे पर खड़ी इंतजार करने लगी। हर पल भारी था। उसे डर था कि कहीं दीपक को पता चल गया, तो क्या होगा। पर चुदाई देखने की लालसा उसकी चूत से पानी टपकने के रूप में बाहर आ रही थी। “Maa Beta Bahu Chudai”
दस मिनट बाद सौम्या के कमरे की लाइट बंद हो गई। रेखा ने सोचा, शायद प्लान फेल हो गया। वो वापस अपने कमरे की तरफ मुड़ी, तभी सौम्या बाहर आई और उसका हाथ पकड़कर अंदर ले गई। कमरे में नाइट बल्ब जल रहा था। दीपक बाथरूम में था। सौम्या ने रेखा को एक परदे के पीछे छुपा दिया। परदे के पीछे एक कुर्सी रखी थी, ताकि रेखा आराम से बैठकर सब देख सके। रेखा सौम्या की समझदारी पर गदगद हो गई।
सौम्या ने रेखा से फुसफुसाकर कहा, “लाइट जलाकर ही सब करूंगी, ताकि आप अच्छे से देख सको।” तभी बाथरूम का दरवाजा खुला। सौम्या ने परदा ठीक किया और बिस्तर पर जाकर बैठ गई। दीपक सिर्फ अंडरवियर में बाहर आया और सौम्या के पास बैठ गया। सौम्या, जो अपनी सास को लाइव चुदाई दिखाने के लिए बेताब थी, दीपक से लिपट गई और अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ दिए।
“क्या बात है मेरी जान… आज तो बड़ी गर्मी है?” दीपक ने शरारत से पूछा।
“बात मत कर… बस शुरू हो जा… चूत में आग लगी है…” सौम्या ने हांफते हुए कहा।
“ओके मेरी रानी… तुझे तो पता है, मैं तेरी चूत का कितना प्यासा हूँ,” दीपक ने हंसकर कहा।
दीपक ने सौम्या की नाइटी उतार दी। नाइटी के नीचे सौम्या पूरी नंगी थी। उसे भी उत्साह था कि आज उसकी चुदाई कोई देख रहा है। दीपक ने सौम्या की चुचियों को मसलना शुरू किया, फिर एक चूची मुंह में लेकर चूसने लगा। “आह… दीपक… चूस… जोर से चूस… हाय…” सौम्या की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगीं।
उधर, रेखा की चूत गीली हो चुकी थी। वो परदे के पीछे बैठी अपनी साड़ी में हाथ डालकर चूत सहला रही थी। सौम्या का हाथ दीपक के अंडरवियर में घुस गया और उसके लंड से खेलने लगा। रेखा बेसब्री से दीपक के लंड के बाहर आने का इंतजार कर रही थी। उसने पहले छुपकर उनकी चुदाई देखी थी, पर तब उसे लंड की सिर्फ झलक मिली थी। आज वो चार फीट की दूरी से सब कुछ साफ देखने वाली थी। “Maa Beta Bahu Chudai”
सौम्या ने एक झटके में दीपक का अंडरवियर नीचे खींचा। आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड बाहर आया। रेखा की चूत ने पानी छोड़ दिया। इतने सालों बाद उसने इतने करीब से लंड देखा था। दीपक का लंड कड़क और चमकदार था। रेखा का मन हुआ कि वो अभी उठकर जाए और सौम्या को हटाकर उस लंड को अपने हाथों में ले ले।
दीपक ने लंड का सुपारा सौम्या के होंठों पर रखा। सौम्या ने मुंह खोलकर उसे अंदर ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। “आह… सौम्या… कितना मजा दे रही है… चूस… और चूस…” दीपक की आहें निकल रही थीं। उसका एक हाथ सौम्या की चूची मसल रहा था, और दूसरा उसकी चूत के दाने को सहला रहा था। रेखा ने अपना पेटीकोट ऊपर उठाया और तीन उंगलियां अपनी चूत में डाल दीं। उसकी चूत पानी-पानी थी।
दीपक और सौम्या अब 69 की पोजीशन में आ गए। दीपक सौम्या की चूत चाट रहा था, और सौम्या उसके लंड को चूस रही थी। “आह… दीपक… चाट… मेरी चूत फाड़ दे… हाय…” सौम्या सिसक रही थी। दस मिनट बाद दोनों का पानी छूट गया। सौम्या ने दीपक का लंड मुंह से निकाला और हिलाने लगी। कुछ ही देर में लंड फिर तन गया।
दीपक ने सौम्या की टांगें अपने कंधों पर रखीं और लंड को चूत पर सेट करके एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। “आह्ह्ह… ऊई… मर गई…” सौम्या चिल्लाई। दीपक ने धक्के शुरू किए। “आह… जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… तेरा लंड कितना कड़क है… हाय… चोद… और जोर से…” सौम्या की सिसकारियां तेज हो गईं। वो जानबूझकर रेखा को और गर्म करने के लिए ऐसी बातें कर रही थी। “Maa Beta Bahu Chudai”
दीपक भी जोश में आ गया। “ले मेरी रानी… पूरा लंड ले… तेरी चूत आज आग उगल रही है… ले… चुद मेरे मोटे लंड से…” वो और तेज धक्के मारने लगा। रेखा की हालत खराब थी। उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी। वो तीन उंगलियों से चूत को रगड़ रही थी, पर आग बुझ नहीं रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीपक ने सौम्या को घोड़ी बनाया और पीछे से लंड पेल दिया। “आह… दीपक… फाड़ दे मेरी चूत… हाय… कितना गहरा जा रहा है तेरा लंड…” सौम्या चिल्ला रही थी। दीपक के टट्टे सौम्या की गांड पर थप-थप की आवाज कर रहे थे। बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद दीपक ने सौम्या की चूत में अपना माल छोड़ दिया। सौम्या पांच बार झड़ चुकी थी और निढाल होकर बिस्तर पर पड़ी थी। दीपक भी हांफते हुए उसके बगल में लेट गया। “Maa Beta Bahu Chudai”
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रेखा भी झड़-झड़कर थक गई थी। उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकला था। सौम्या को अचानक रेखा की याद आई। उसे कमरे से निकालना था। उसने दीपक से कहा, “आज तूने कमाल कर दिया… मन तो कर रहा है एक और राउंड हो जाए…”
“क्या खा लिया तूने आज? बीस मिनट की चुदाई के बाद भी और चाहिए?” दीपक ने हंसकर पूछा।
“पता नहीं, आज मन कर रहा है सारी रात चुदवाऊं। तू बाथरूम से फ्रेश होकर आ, फिर सोचते हैं,” सौम्या ने कहा।
दीपक बाथरूम चला गया। सौम्या ने रेखा को इशारा किया। रेखा लड़खड़ाते कदमों से अपने कमरे में पहुंची और बिस्तर पर ढेर हो गई। वो इतनी थक चुकी थी कि उसे नींद आ गई।
अगली सुबह रेखा नौ बजे उठी। सौम्या नाश्ता बनाकर दीपक को ऑफिस भेज चुकी थी। रेखा अभी भी अस्त-व्यस्त कपड़ों में थी। सौम्या ने उसकी साड़ी खींच दी। रेखा हड़बड़ाकर उठ बैठी।
“क्या हुआ मम्मी जी? आज तो बड़ी नींद आ रही है?” सौम्या ने शरारत से पूछा।
“पूछ मत… रात तो जैसे बदन निचोड़ लिया… टांगों के बीच दरिया बह रहा था!” रेखा ने शरमाते हुए कहा।
“ऐसा क्या हो गया, जो दरिया बहने लगा?” सौम्या ने आंखें नचाते हुए पूछा।
“तू तो बड़ी कमीनी है… मुझे भी अपने जैसी बेशर्म बना दिया!” रेखा ने हंसकर कहा।
“बताओ ना, रात को क्या हुआ?” सौम्या ने जिद की।
“बताया ना, शुरू से आखिर तक टांगों के बीच दरिया बहता रहा। इतना मजा तो ब्लू फिल्म में भी नहीं आता, जितना तेरी और दीपक की चुदाई देखकर आया। वैसे, मेरा बेटा मस्त चोदता है। तेरी तो हालत खराब कर दी थी!” रेखा ने शरारत से कहा।
“एक बात पूछूं… दीपक का लंड कैसा लगा?” सौम्या ने हंसकर पूछा।
“हट कमीनी! कुछ तो शर्म कर… मां से पूछ रही है कि बेटे का लंड कैसा है!” रेखा ने नकली गुस्सा दिखाया।
“अरे, मैंने क्या गलत पूछा? आपने रात को देखा ही है!” सौम्या ने नाराज होने का नाटक किया।
“ठीक है… बहुत लंबा, कड़क, और मोटा है दीपक का लंड। अब खुश?” रेखा शरमाते हुए बोली।
“वो तो है… जब अंदर जाता है, तो चूत की नस-नस में करंट दौड़ा देता है!” सौम्या ने हंसकर कहा।
“तेरी तो मौज है… ऐसा कड़क मर्द मिला है!” रेखा ने कहा, और दोनों ठहाके मारकर हंस पड़ीं।
रेखा बाथरूम में गई, नंगी होकर शावर के नीचे खड़ी हो गई। ठंडा पानी उसके बदन पर पड़ा, तो रात का नजारा फिर आंखों के सामने आ गया। उसका हाथ अपनी चूत पर चला गया, और वो फिर से उंगली करने लगी। कुछ दिन बाद रेखा का मन फिर चुदाई देखने को मचलने लगा।
उसने सौम्या से कुछ नहीं कहा, पर सौम्या उसकी बेचैनी समझ गई। सौम्या ने एक बार फिर रिस्क लिया और रेखा को अपनी और दीपक की चुदाई दिखाई। पर इस बार रेखा की आग और भड़क गई। सौम्या सोच में पड़ गई कि अपनी सास के लिए लंड कहां से लाए।
एक दिन सौम्या ने कुछ कहानियां पढ़ीं, जिनमें मां-बेटे की चुदाई की बात थी। उसका दिमाग घूम गया। वो सोचने लगी कि क्यों न रेखा की चूत दीपक के लंड से ठंडी करवा दी जाए। पर क्या दीपक अपनी मां को चोदने को तैयार होगा? और रेखा क्या मानेगी? सौम्या ने प्लान बनाना शुरू किया। उसने दीपक को मां-बेटे की चुदाई की कहानियां पढ़वाईं और बार-बार रेखा की तारीफ करने लगी। “Maa Beta Bahu Chudai”
एक रात चुदाई के बाद सौम्या ने दीपक से कहा, “दीपक, एक बात पूछूं?”
“पूछ…” दीपक ने लेटे-लेटे जवाब दिया।
“मम्मी जी ने इतने साल बिना चुदाई के कैसे काटे होंगे?” सौम्या ने सावधानी से पूछा।
“मतलब?” दीपक ने भौंहें चढ़ाईं।
“मतलब… मम्मी जी इतनी खूबसूरत हैं, बदन भी इतना मस्त। क्या उनका मन नहीं करता होगा चुदाई का?” सौम्या ने बात आगे बढ़ाई।
“क्या सारा दिन ऐसी बातें सोचती रहती है?” दीपक ने झुंझलाकर कहा।
“अरे, मैंने मम्मी जी को एक-दो बार अपनी चूत में उंगली करते देखा है। तभी सोचा, शायद उनका भी मन करता होगा। उम्र तो ज्यादा नहीं हुई उनकी,” सौम्या ने कहा।
दीपक कुछ नहीं बोला। सौम्या रसोई में पानी लेने गई, पर तुरंत लौट आई। उसने दीपक को अपने साथ चलने को कहा। दीपक पूछता रहा, पर सौम्या उसे रेखा के कमरे के सामने ले गई। दरवाजा थोड़ा खुला था। सौम्या ने दीपक को झांकने को कहा। दीपक ने पहले मना किया, पर सौम्या की जिद के आगे उसे झांकना पड़ा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
रेखा बिस्तर पर नंगी पड़ी अपनी चूत रगड़ रही थी। कमरे की लाइट जल रही थी, और उसका बदन चमक रहा था। दीपक सन्न रह गया। रेखा को नहीं पता था कि कोई उसे देख रहा है। वो मस्ती में बड़बड़ा रही थी, “सौम्या कमीनी… अकेले दीपक के मोटे लंड का मजा लेती है… मेरी चूत का भी तो सोच… मुझे भी दीपक जैसा लंड चाहिए… तेरह साल से प्यासी है मेरी चूत… कुछ तो इंतजाम कर कमीनी!”
दीपक और सौम्या दोनों हैरान रह गए। सौम्या को तो पता था कि रेखा लंड चाहती है, पर दीपक के लिए ये नया था। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी मां इतनी कामुक होगी। उस रात से दीपक का दिमाग बदलने लगा। वो बार-बार रेखा के बारे में सोचने लगा। सौम्या ने भी उसकी बेचैनी भांप ली। “Maa Beta Bahu Chudai”
कुछ दिन बाद सौम्या के मायके से फोन आया कि उसके पापा की तबीयत ठीक नहीं है। सौम्या का मायका चंडीगढ़ में था। दीपक छुट्टी नहीं ले सका, तो सौम्या ने अकेले जाने का फैसला किया। उसने जानबूझकर रेखा को साथ नहीं लिया। वो दीपक और रेखा को अकेले छोड़ना चाहती थी।
अगली सुबह सौम्या चंडीगढ़ चली गई। दीपक की मीटिंग देर तक चली। उसने दोस्त के साथ दो पेग व्हिस्की पी और रात बारह बजे घर पहुंचा। रेखा को फोन करके बता दिया था। रेखा खाना खाकर टीवी देख रही थी। एक रोमांटिक सीन देखकर उसकी चूत में खुजली हुई।
उसने साड़ी उतारकर नाइटी पहनी, उसे ऊपर उठाया, और चूत में उंगली करके पानी निकाल लिया। फिर वो सोफे पर ही सो गई। दीपक ने चुपके से दरवाजा खोला। उसकी नजर रेखा पर पड़ी। वो अधनंगी थी, नाइटी जांघों तक उठी हुई थी। दीपक की धड़कनें बढ़ गईं।
वो अपने कमरे में गया, फ्रेश हुआ, और बनियान-अंडरवियर में वापस आया। उसने सोचा, मम्मी को जगाकर उनके कमरे में भेज दे। पर रेखा को अधनंगी देखकर उसका लंड खड़ा हो गया। उसने रेखा की नाइटी ठीक करने की कोशिश की, पर उसकी चूत दिख गई। रेखा ने पैंटी नहीं पहनी थी। उसकी क्लीन शेव चूत देखकर दीपक का दिमाग खराब हो गया।
उसने उंगली से रेखा की चूत को छुआ। चूत का रस उसकी उंगली पर लग गया। उसने चखा, तो नशा चढ़ गया। तभी रेखा ने करवट ली। दीपक घबरा गया और अपने कमरे में जाकर रेखा को आवाज दी। रेखा चौंककर उठी। उसने अपने कपड़े ठीक किए और रसोई में चली गई। दोनों रातभर सो नहीं पाए। दीपक अपनी मां की चूत के बारे में सोचता रहा, और रेखा को डर था कि कहीं दीपक ने उसे नंगा देख लिया हो। “Maa Beta Bahu Chudai”
अगली सुबह सौम्या का फोन आया। उसने दीपक से पूछा, “कुछ बात बनी रात को?”
“क्या मतलब?” दीपक ने अनजान बनकर पूछा।
“अरे, मम्मी जी के साथ कुछ किया या नहीं?” सौम्या ने साफ कहा।
“सौम्या, तू पागल हो गई है!” दीपक ने गुस्सा दिखाया।
“मैं सिर्फ परिवार की भलाई चाहती हूँ। तुम दोनों एक-दूसरे को चाहते हो। मैं मम्मी जी को तड़पते नहीं देख सकती। चोद दो उनकी चूत!” सौम्या ने बिंदास कहा।
दीपक चुप रहा। सौम्या ने रेखा से बात करने को कहा। दीपक ने फोन रेखा को दे दिया। सौम्या ने रेखा से कहा, “मम्मी जी, मौका मत गंवाओ। दीपक के लंड से मजा ले लो!”
“कमीनी, तू मुझे अपने बेटे से चुदवाकर ही मानेगी!” रेखा ने गुस्से में कहा। तभी दीपक रसोई में आ गया। उसने सब सुन लिया। रेखा की बोलती बंद हो गई।
दीपक ने रेखा का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचा। “दीपक… ये क्या कर रहा है… छोड़ मुझे!” रेखा ने गुस्सा दिखाया। पर दीपक ने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा। रेखा छटपटाई, पर दीपक का लंड उसकी नाभि पर चुभ रहा था। उसकी चूत गीली हो गई। वो भी दीपक से लिपट गई।
दीपक ने रेखा की नाइटी उतार दी। वो सिर्फ पैंटी में थी। दीपक ने उसकी चुचियों पर टूट पड़ा। “आह… दीपक… धीरे… जान निकाल देगा क्या…” रेखा सिसक रही थी। उसने दीपक का लंड पकड़ लिया और मसलने लगी। दीपक ने उसकी पैंटी फाड़ दी और चूत में उंगली डाल दी। “हाय… बेटा… आह…” रेखा कांप उठी।
दीपक ने रेखा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत चाटने लगा। “आह… दीपक… चाट… मेरी चूत… कितना मजा आ रहा है…” रेखा चिल्ला रही थी। उसने दीपक का लंड मुंह में ले लिया। दोनों 69 में मजे लेने लगे। “कमीने… कब तक तड़पाएगा… अब चोद दे… मेरी चूत प्यासी है!” रेखा ने चिल्लाकर कहा।
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दीपक ने लंड रेखा की चूत पर रखा और एक धक्का मारा। “आह्ह्ह… ऊई… मर गई… धीरे… फट जाएगी चूत!” रेखा चिल्लाई। दीपक ने दूसरा धक्का मारा, और पूरा लंड अंदर पेल दिया। “हाय… मर गई… कुत्ते… धीरे… तेरी मां की चूत है!” रेखा तड़प रही थी। “Maa Beta Bahu Chudai”
दीपक ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। “आह… चोद… मेरी चूत… कितना मस्त लंड है तेरा… हाय…” रेखा मस्ती में थी। दीपक ने तेजी बढ़ाई। “मां… तेरी चूत तो जन्नत है… कब से तड़प रही थी… अब रोज चोदूंगा!” दीपक जोश में था। “चोद… मेरे बेटे… ये चूत अब तेरी है… जब चाहे चोद ले… आह… फाड़ दे…” रेखा चिल्ला रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
बीस मिनट की चुदाई के बाद दीपक ने रेखा की चूत में माल छोड़ दिया। रेखा तीन बार झड़ चुकी थी। दोनों थककर लेट गए। दीपक को ऑफिस जाना था। रेखा को ग्लानि हो रही थी, पर मजा भी आया था। दोपहर को दीपक जल्दी लौटा और फिर से रेखा को चोदा। शाम से रात तक तीन बार चुदाई हुई।
अगली रात भी दोनों ने जमकर चुदाई की। रेखा ने दीपक को कहा कि सौम्या के सामने नाटक करना है, ताकि उसे लगे कि वो ही उन्हें चुदवाने में कामयाब हुई। सौम्या अगले दिन लौटी। वो रेखा और दीपक पर गुस्सा थी कि उन्होंने कुछ नहीं किया। उसने दोनों पर दबाव बनाना शुरू किया।
एक रात उसने रेखा को अपने कमरे में बुलाया और उसकी साड़ी-पेटीकोट उतार दिया। दीपक ने नाटक किया, पर आखिरकार रेखा की चूची पकड़ ली। सौम्या डायरेक्टर की तरह निर्देश दे रही थी। दीपक और रेखा ने मजे से चुदाई की, और सौम्या खुश थी कि उसने रेखा की प्यास बुझाई। इस चुदाई का सिलसिला आज भी चल रहा है। सास-बहू और बेटा, तीनों अपनी आग बुझाते हैं।
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