Jawani Ki Pyas Story
मैं प्रदुमन, गाजियाबाद का रहने वाला, आज अपनी जिंदगी की एक सच्ची और चटपटी कहानी आपसे साझा करने जा रहा हूँ। यकीन मानिए, मेरी ये कामुक कहानी पढ़कर लड़कों के लंड तन जाएँगे और लड़कियों की गुलाबी चूत रस से तरबतर हो जाएगी। मैं 23 साल का जवान मर्द हूँ, गठीला बदन, 5 फुट 10 इंच की हाइट और चेहरा ऐसा कि लड़कियाँ एक बार देखकर मुस्कुरा दें। Jawani Ki Pyas Story
गाजियाबाद में मैं अपनी बुआ और फूफा के साथ रहता हूँ। मेरी बुआ, रानी, 27 साल की हैं, बिलकुल देसी माल, गोरी-चिट्टी, 36-28-34 का फिगर, मानो कोई अप्सरा हो। जब वो सज-संवरकर साड़ी में बाहर निकलती हैं, तो उनका कसा हुआ जिस्म और भरे-पूरे दूध देखकर गली के लड़के सीटियाँ मारते हैं।
लेकिन बुआ सभ्य और संस्कारी औरत हैं, कोई छिनाल नहीं जो किसी पराये मर्द की बाहों में चली जाए। दूसरी तरफ मेरे फूफा, राजेश, 35 साल के हैं, दुबले-पतले, चश्मिश और सेक्स में बिलकुल फिसड्डी। उनकी कमजोरी की वजह से बुआ की जवानी की आग हमेशा अधूरी रह जाती थी।
बुआ और फूफा की शादी को 6 साल हो चुके थे, लेकिन एक बच्चा पैदा करने में उन्हें पूरा वक्त लग गया। फूफा की सेक्स पावर इतनी कम थी कि अगर वो एक बार चुदाई कर लेते, तो हफ्ते भर बुआ को हाथ भी नहीं लगाते। कभी-कभी हफ्ते में दो-तीन बार कर लेते, तो या तो उन्हें बुखार चढ़ जाता, या सिरदर्द, सीने में दर्द, या साँस फूलने लगती।
बेचारी बुआ की चूत की प्यास कभी बुझती ही नहीं थी। इस बात को लेकर दोनों में अक्सर झगड़े होते थे। बुआ की शिकायत थी कि फूफा उनकी जवानी को बर्बाद कर रहे हैं, और फूफा का जवाब होता कि वो अपनी कमजोरी से मजबूर हैं। एक शाम फिर वही तमाशा हुआ।
मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी : सहेली ने अपने कस्टमर से चुदवाया मुझे
मैं अपने कमरे में था, जब बुआ और फूफा की तीखी बहस सुनाई दी। बुआ चिल्ला रही थीं, “राजेश! तुमसे शादी करके मेरी जिंदगी नर्क हो गई। एक रात भी तुमने मेरी प्यास नहीं बुझाई। तुम मर्द नहीं, नामर्द हो! अगर मुझे पहले पता होता, तो मैं तुमसे कभी शादी न करती।” उनकी आवाज में गुस्सा और बेबसी साफ झलक रही थी।
फूफा ने तंज कसते हुए कहा, “तो जा, किसी और से चुदवा ले। अपनी जवानी की आग बुझा ले। क्यों न प्रदुमन का लौड़ा ले ले? वो अब जवान हो गया है।”
बुआ ने गुस्से में जवाब दिया, “हाँ, चुदवा लूँगी! अगर तुम मेरी जरूरत पूरी नहीं कर सकते, तो प्रदुमन से जरूर चुदवाऊँगी।”
ये सुनकर मेरे कान खड़े हो गए। मैं हैरान था कि बात इतनी दूर तक कैसे पहुँच गई। मन में अजीब-सी हलचल हुई, लेकिन मैं चुप रहा। कुछ देर बाद दोनों की बहस खत्म हुई, और वो अलग-अलग कोनों में जाकर सो गए। सुबह फूफा अपने काम पर निकल गए, और घर में सिर्फ मैं और बुआ रह गए।
सुबह के 10 बज रहे थे। मुझे सुबह-सुबह बीएफ (ब्लू फिल्म) देखने का बड़ा शौक था। उस दिन भी मैंने अपना कंप्यूटर ऑन किया और एक देसी चुदाई वाली बीएफ चला दी। स्क्रीन पर एक लड़की की चूत में मोटा लंड घुस रहा था, और मैं मस्ती में आकर अपने हाफ पैंट को नीचे सरका चुका था।
मेरा 10 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लौड़ा, जो तंदुरुस्त और गबरू था, मेरे हाथ में था। मैं सोफे पर बैठा, लंड को सहलाते हुए मुठ मार रहा था। सुपाड़ा लाल होकर चमक रहा था, और मैं पूरी तरह बीएफ में खोया हुआ था। तभी, बुआ चाय का कप लेकर मेरे कमरे में दाखिल हुईं। मैं इतना मगन था कि मुझे उनके आने का अहसास ही नहीं हुआ।
बुआ ने मुझे लंड हिलाते देख लिया। उनके हाथ से चाय का कप छूट गया, और चाय फर्श पर बिखर गई। “ओह्ह… बुआ जी!” मेरे मुँह से निकला। लेकिन दोस्तों, मैं उस वक्त झड़ने की कगार पर था। मैं खुद को रोक नहीं पाया और बुआ के सामने ही मेरे लौड़े ने पिचकारी छोड़ दी। मेरा गर्म-गर्म माल हवा में उछला और सोफे पर बिखर गया।
चुदाई की गरम देसी कहानी : चाची की बुर में तेल लगा कर चोदा
बुआ ने मेरी हालत देखकर तंज कसा, “तो सुबह-सुबह ये पढ़ाई चल रही है? गरमा-गर्म चुदाई और कामशास्त्र की क्लास?” उनकी आवाज में शरारत थी, लेकिन आँखों में कुछ और ही चमक थी। मैं शर्म से पानी-पानी हो गया। इतनी हिम्मत नहीं थी कि पैंट ऊपर खींच लूँ। मेरा लंड और गोलियाँ बुआ के सामने नंगे पड़े थे। मैं हकलाते हुए बोला, “वो… बुआ जी… मैं… मैं पढ़ने जा रहा था…”
बुआ ने मुझे बीच में टोक दिया, “अरे, बहाने मारने की जरूरत नहीं।” वो मेरे पास आईं और सोफे पर मेरे बगल में बैठ गईं। फिर, मेरे लंड को अपने नरम हाथों में पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगीं। मैं सन्न रह गया। मेरा दिमाग सुन्न था, समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“प्रदुमन बेटा,” बुआ ने कामुक आवाज में कहा, “आज तू मुठ मत मार। असली चूत को चोद!”
उनके मुँह से ये सुनकर मेरे बदन में बिजली-सी दौड़ गई। बुआ ने अपनी साड़ी का पल्लू सरका दिया और ब्लाउस के बटन खोलने लगीं। जैसे-जैसे ब्लाउस खुलता गया, उनके 36 इंच के दूध मेरे सामने आए, जो पिंक ब्रा में कैद थे। ब्रा पर छोटी-छोटी सफेद बिंदियाँ थीं, जो उनके गोरे जिस्म पर और भी सेक्सी लग रही थीं।
“बता प्रदुमन, कैसी दिखती हूँ मैं? आ, मुझसे प्यार कर। डरने की कोई बात नहीं,” बुआ ने कहा, उनकी आवाज में शहद-सी मिठास थी।
मैं हिचक रहा था, “सच में बुआ जी? कहीं ये मजाक तो नहीं?”
“नहीं बेटा, कोई मजाक नहीं। आज तू मुठ मत मार, सीधा मेरी चूत को चोद!” बुआ ने दोबारा कहा, और उनकी आँखों में वासना की चमक साफ दिख रही थी।
मैं अब 23 साल का जवान मर्द था, और मेरे अंदर भी आग सुलग रही थी। इतने साल सिर्फ मुठ मारकर गुजारे थे, लेकिन आज मेरे घर में ही चूत का जुगाड़ हो गया था। मैंने हिम्मत जुटाई और बुआ को अपनी बाहों में खींच लिया। उनके गोरे-गोरे गालों पर मैंने चुम्बनों की बरसात कर दी।
मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : चचेरे भाई बहन बाथरूम में प्यार करने लगे
बुआ का जिस्म बिलकुल मैदा-सा गोरा और चिकना था, जैसे तापसी पन्नू की जवानी का नमूना। मैं उनके गालों और गले पर चूमता रहा, और वो हल्के-हल्के सिसकियाँ लेने लगीं। मैंने उनकी ब्रा के ऊपर से उनके भारी-भरकम दूधों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे दबाने लगा।
बुआ की साँसें तेज हो गईं, और वो “ओह्ह… माँ… ओह्ह… उउउ… आआआ…” करने लगीं। मैंने उन्हें सोफे पर पीछे की तरफ झुका दिया और उनके गुलाबी होंठों को चूसने लगा। बुआ के होंठ बिना लिपस्टिक के भी इतने रसीले थे कि मैं खो सा गया। मैं उनके होंठ चूसता रहा और साथ ही उनके दूधों को ब्रा के ऊपर से मसलता रहा। बुआ “सी सी सी…” की आवाजें निकालने लगीं।
“भतीजे! तुझमें तो बड़ी आग है रे! बेटा, मुझे अच्छे से गर्म कर, फिर चोद!” बुआ ने कामुक अंदाज में कहा।
“जैसी आपकी मर्जी, बुआ जी!” मैंने जवाब दिया और उनकी ब्रा के हुक खोल दिए। जैसे ही ब्रा हटी, उनके 36 इंच के दूध मेरे सामने नंगे हो गए। दोस्तों, क्या गजब की चूचियाँ थीं! गोल-गोल, रसीली, तनी हुई, जैसे दो बड़े-बड़े संतरे। मैंने उनके दूधों पर हाथ फेरा, तो ऐसा लगा जैसे बिजली का झटका लगा हो।
मेरे फूफा पर तरस आ रहा था, जो इतनी मस्त बीवी को चोद नहीं पाते थे। मैंने उनके दूधों को दोनों हाथों से मसलना शुरू किया। बुआ की सिसकियाँ तेज हो गईं, “ओह्ह… अह्ह… कर बेटा, और जोर से कर… उउउ… आआआ…” मैंने उनके एक दूध को मुँह में लिया और चूसने लगा।
उनका निप्पल सख्त हो चुका था, और मैं उसे जीभ से चाटने लगा। बुआ की चूत से रस टपकने लगा था, जो उनकी जाँघों पर चमक रहा था। मैंने दूसरा दूध मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। बुआ की साँसें अब और तेज हो गई थीं। फिर बुआ ने खुद ही अपनी साड़ी उतारी।
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : मौलवी साहब की हवस पूरी हो गई
उनका पेटीकोट भी नीचे सरक गया। अब वो सिर्फ पिंक पैंटी में थीं, जो उनकी चूत के रस से गीली हो चुकी थी। मैंने उनकी पैंटी खींचकर उतार दी। बुआ ने अपनी टाँगें खोल दीं, और मैंने पहली बार उनकी चूत देखी। दोस्तों, क्या भोसड़ा था! 6 इंच लंबा, गद्दीदार, फूला हुआ, जैसे कोई ताजा पाव। मैं कुछ देर उनकी चूत को देखता रहा, फिर सोफे पर लेट गया और उनकी चूत को चाटने लगा। “Jawani Ki Pyas Story”
“मम्मी… मम्मी… चाट बेटा… अच्छे से चाट… उउउ… हा हा…” बुआ सिसक रही थीं। उनकी चूत के होंठ छोटे-छोटे थे, जो अंदर की तरफ धँसे हुए थे। मैंने जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू किया। उनका रस नमकीन और कामुक था। मैंने उनकी चूत की गद्दियों को जीभ से सहलाया, और बुआ तड़पने लगीं। वो अपनी चूचियों को खुद ही मसलने लगीं और अपने होंठ दाँतों से काटने लगीं। मैंने 20 मिनट तक उनकी चूत चाटी, जब तक कि वो पूरी तरह चमक नहीं गई।
“आ बेटा, अब तू लेट। मैं तेरा लंड चूसूँगी!” बुआ ने कहा।
मैं सोफे पर लेट गया, और बुआ मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और किसी माहिर औरत की तरह फेटने लगीं। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया, सुपाड़ा लाल होकर चमक रहा था। बुआ ने उसे मुँह में लिया और चूसने लगीं। “ऊँ… ऊँ… सी सी… हा हा…” मैं सिसकने लगा। बुआ ने मेरी गोलियों को भी मुँह में लिया और टॉफी की तरह चूसने लगीं। उनकी इस हरकत से मेरी वासना सातवें आसमान पर थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने बुआ को लिटाया और उनकी चूत की गद्दी पर अपने 10 इंच के लौड़े से पीटना शुरू किया। “चट… चट… चट…” की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं। बुआ “उउउ… सी सी… ऊँ ऊँ…” करने लगीं। मैंने अपने सुपाड़े से उनकी चूत को ऊपर-नीचे रगड़ा, और फिर हल्का-सा धक्का मारा। मेरा लंड उनकी कसी चूत में उतर गया। “आउ… आराम से बेटा!” बुआ ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। बुआ की चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड पूरा अंदर नहीं जा रहा था। मैंने उनकी बायीं टाँग उठाई और धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। “फच… फच… फच…” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। बुआ की चूचियाँ इधर-उधर उछल रही थीं। “उंह… उंह… हूँ… हूँ… अह्ह… आआआ…” बुआ की सिसकियाँ मुझे और जोश दिला रही थीं। मैं उनकी चूत को देख-देखकर चोद रहा था। “Jawani Ki Pyas Story”
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : छोटे भाई को चूत मारना सिखाया
कुछ देर बाद मैंने उनकी बायीं टाँग नीचे की और दायीं टाँग उठा दी। अब मैं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। बुआ की चूत मेरे लंड से दोस्ती कर चुकी थी। “चोद बेटा… और जोर से चोद… उउउ… आआआ…” बुआ चिल्ला रही थीं। उनकी आँखें नशे में डूबी थीं। मैंने 15 मिनट तक उनकी चूत को चोदा, और फिर अपनी क्रीम उनकी चूत में ही छोड़ दी।
10 मिनट बाद, मैंने बुआ की गाँड की बारी ली। उनकी गोल-मटोल गाँड को देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने उनकी गाँड को सहलाया और धीरे-धीरे अपना लंड उनकी टाइट गाँड में डाला। “आह्ह… धीरे बेटा… उउउ…” बुआ सिसक रही थीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और जल्द ही उनकी गाँड भी मेरे लंड की आदी हो गई। “फट… फट… फट…” की आवाजें गूँज रही थीं। बुआ की सिसकियाँ और मेरे धक्कों का तालमेल कमाल का था।