Hot Bhai Bahan Chudai
मेरा नाम सुहाना है और मैं महाराष्ट्र की रहने वाली हूँ। मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूँ। मेरे घर में मम्मी, पापा, मैं और मेरा छोटा भाई शुभांकर रहते हैं। मेरे पापा की आइस की फैक्ट्री है, और मम्मी हाउसवाइफ हैं। मम्मी को धार्मिक कामों से फुर्सत ही नहीं मिलती, वो दिन-रात बस भगवान का नाम जपती रहती हैं। Hot Bhai Bahan Chudai
मैं शादीशुदा हूँ और मेरे हसबैंड का खुद का बिजनेस है, जिसमें वो हमेशा व्यस्त रहते हैं। मेरा छोटा भाई शुभांकर 12वीं का स्टूडेंट है और उसकी उम्र 19 साल है। अब मैं आपको अपने बारे में थोड़ा बताती हूँ। मेरा रंग गोरा है, मेरे बूब्स बड़े और टाइट हैं, और मेरी गांड बाहर को निकली हुई है, जो मेरी खूबसूरती को और बढ़ाती है।
मेरा फिगर 34-30-34 है, जो मुझे और भी हॉट बनाता है। मेरी उम्र 25 साल है। अब शुभांकर के बारे में बताऊँ तो वो दिखने में बहुत अट्रैक्टिव है। उसका रंग गोरा, बॉडी फिट और शेप में है, और उसकी भूरी आँखें इतनी नशीली हैं कि उसकी क्लास की लड़कियाँ उस पर लाइन मारती हैं। लेकिन वो बस पढ़ाई में ध्यान देता है और हमेशा क्लास में फर्स्ट या सेकंड रैंक लाता है।
अब कहानी शुरू करती हूँ। ये बात तब की है जब मेरी शादी नहीं हुई थी। मैं 23 साल की थी और अपनी पढ़ाई पूरी करके घर के काम सीख रही थी। शुभांकर तब 19 साल का था। मैं पूरी जवान हो चुकी थी और सेक्स के बारे में सब कुछ जान चुकी थी। मेरे मन में अब सेक्स की इच्छा बहुत जोर मारने लगी थी।
मैं किसी के साथ चुदाई करना चाहती थी, लेकिन डर भी लगता था कि कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी इज्जत का क्या होगा। इस डर की वजह से मैं बस सोच-सोचकर परेशान रहती थी और उंगली या कभी-कभी पेन से अपनी चूत की आग बुझाती थी।
मुझे पोर्न देखना बहुत पसंद था। जब भी मुझे टाइम मिलता, मैं पोर्न देखने बैठ जाती। खासकर इंडियन सेक्स वीडियोज़ मुझे बहुत भाते थे। एक दिन जब घर पर कोई नहीं था, मैं अपने रूम में लैपटॉप पर पोर्न देख रही थी। तभी एक वीडियो के नीचे लिखा था, “कैसे अपने भाई को सेक्स के लिए तैयार करें।”
मैंने उत्सुकता में वो वीडियो देखना शुरू किया। उसमें एक लड़की अपने बड़े भाई को चुदाई के लिए पटाने की प्लानिंग कर रही थी। उसने भाई को सेक्सुअली अट्रैक्ट करने के लिए कई तरीके अपनाए थे। फिर मैंने उसी तरह की 8-10 और वीडियोज़ देखीं। एक वीडियो में तो एक लड़की अपने छोटे भाई के साथ बाथरूम में नंगी नहा रही थी।
वो अपने भाई के लंड के साथ खेल रही थी और उसकी उंगली अपनी चूत में डाल रही थी। ये देखकर मेरे दिमाग में आया कि मैं भी अपने छोटे भाई शुभांकर के साथ ऐसा कर सकती हूँ। मैं उसे बचपन से नहलाती थी, तो ये मेरे लिए नया नहीं था। लेकिन अब मेरा नजरिया बदल गया था। मैं अब शुभांकर को अपनी चूत की भूख मिटाने का जरिया समझने लगी थी।
फिर भी मेरा मन मान नहीं रहा था क्योंकि वो मेरा छोटा भाई था। लेकिन फिर मैंने सोचा, अगर किसी और से करवाऊँगी तो बात फैल सकती है, अपने भाई से करवाऊँगी तो कम से कम बात घर में ही रहेगी। फिर भी डर था कि कहीं उसने किसी को बता दिया तो? इसलिए मैंने प्लान बनाना शुरू किया कि कैसे शुभांकर को चुदाई के लिए राजी करूँ और वो किसी को बताए भी नहीं।
मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने सोचा कि मैं शुभांकर को मजबूर करके उससे चुदवाऊँगी, ताकि वो डर के मारे किसी को न बताए। मैंने प्लान बनाया कि मैं उसकी किताबों में अपनी हॉट फोटो रखूँगी और फिर उससे कहूँगी कि वो मेरे नाम की मुठ मार रहा है। अगले ही दिन मैंने अपनी एक सेक्सी फोटो, जिसमें मैं टाइट टॉप और शॉर्ट्स में थी, उसकी किताब में रख दी।
फिर मैं उसका पीछा करने लगी कि वो क्या करता है। लेकिन उसने फोटो देखते ही उसे मम्मी को दे दिया और कहा, “शायद दीदी की फोटो उनकी किताब में रह गई होगी।” मम्मी ने शाम को मुझे वो फोटो लाकर दी और कहा, “अपनी चीजें ध्यान से रखा कर, कहीं भी रख देती है।” मेरा वो प्लान फेल हो गया।
लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने दूसरा प्लान बनाया। इस बार मैंने अपनी एक लाल रंग की पैंटी, जो हल्की-सी गीली थी, शुभांकर के बैग में रख दी। मैं देखना चाहती थी कि वो इसके साथ क्या करता है। मैं इंतजार करने लगी। वो उस दिन खेलने गया था और शाम को लौटा।
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जब वो अपने रूम में पढ़ने बैठा, मैं चुपके से उस पर नजर रख रही थी। जैसे ही उसने बैग खोला, उसे मेरी पैंटी दिखी। वो उसे देखकर उठा और बाहर आने लगा। मैं डर गई, मुझे यकीन था कि वो अब मम्मी के पास जाएगा। मैं फटाफट उसके पास दौड़ी और बोली, “शुभांकर, मेरी चड्डी देखी? मुझे कहीं मिल ही नहीं रही।”
शुभांकर ने कहा, “हाँ दीदी, ये मेरे बैग में थी।” मैंने पूछा, “तेरे पास कैसे?” उसने बताया कि उसे वो अपने बेड पर मिली थी। उसने कहा, “शायद मम्मी की होगी, मैं उन्हें देने जा रहा था।” मैंने झट से कहा, “नहीं, ये मेरी है, मुझे दे दे।” फिर मैंने हँसते हुए कहा, “गलती से कपड़े सेट करते वक्त गिर गई होगी।”
शुभांकर ने कहा, “दीदी, ध्यान से रखा करो, कहीं भी चीजें छोड़ देती हो।” मैं बाल-बाल बच गई। अगर मम्मी को पता चल जाता तो बवाल हो जाता। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने तीसरा प्लान बनाया, और मुझे यकीन था कि ये 100% काम करेगा। वो सोमवार का दिन था। मम्मी अपनी सहेलियों के साथ धार्मिक मीटिंग में गई थीं और पापा फैक्ट्री में थे।
घर पर सिर्फ मैं और शुभांकर थे। मुझे लगा ये सही मौका है। शुभांकर सुबह 8 बजे उठता है और सीधा बाथरूम में नहाने जाता है। मैंने सोचा कि यही सही टाइम है अपने प्लान को अंजाम देने का। मैं बाथरूम में गई, अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हो गई। मैंने जानबूझकर बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ दिया ताकि शुभांकर मुझे इस हालत में देखे और मेरा प्लान कामयाब हो।
मैं नहाने लगी, पानी मेरे बदन पर गिर रहा था। मेरे बूब्स पर साबुन की झाग थी और मैं अपनी चूत को धीरे-धीरे सहला रही थी, ताकि शुभांकर के आने पर मैं और सेक्सी लगूँ। तभी उसका अलार्म बजा और वो उठ गया। वो नींद में चूर था, लेकिन जैसे ही उसने बाथरूम का दरवाजा खोला, मुझे पूरी नंगी देखकर वो एकदम शॉक्ड हो गया।
उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वो हड़बड़ा गया और “सॉरी सॉरी दीदी!” बोलकर बाहर जाने लगा। मैंने फटाक से उसका हाथ पकड़ा और उसे अंदर खींच लिया। मैंने गुस्से में उसकी तरफ देखा और एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया। “क्या कर रहा था तू? मुझे नहाते हुए देख रहा था?” मैंने चिल्लाकर कहा।
वो डर गया और बोला, “नहीं दीदी, मैं गलती से अंदर आ गया। मुझे नहीं पता था कि आप यहाँ हो।” वो घबराहट में बोल रहा था, उसकी आवाज काँप रही थी। मैंने और सख्ती से कहा, “तू मुझे नंगा देखने आया था, मैं मम्मी को बताती हूँ!” वो रोने लगा और बोला, “प्लीज दीदी, मम्मी को मत बताना। मुझे सचमुच नहीं पता था कि आप अंदर हो। मैं गलती से आ गया।”
वो मेरे सामने हाथ जोड़कर माफी माँगने लगा। मैंने मौका देखकर और दबाव बनाया। “तू जानबूझकर मुझे नंगा देखने आया था। अब मैं मम्मी को सब बता दूँगी।” वो और डर गया, आँसू निकल आए और बोला, “प्लीज दीदी, जो बोलोगी वो करूँगा, बस मम्मी को मत बताना।”
मैंने उसे और डराते हुए कहा, “अच्छा, जो मैं बोलूँगी वो करेगा? अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं मम्मी को बता दूँगी कि तू मुझे नंगा देख रहा था।” उसने कसम खाकर कहा, “हाँ दीदी, जो तुम बोलोगी, मैं वही करूँगा।” मैंने कहा, “ठीक है, अब रोना बंद कर और बाहर जा।” वो सॉरी-सॉरी बोलता हुआ बाहर चला गया।
मैं मन ही मन बहुत खुश थी। मेरी चूत की आग अब जल्दी ही बुझने वाली थी। मैं नहाकर बाहर आई तो शुभांकर अपने कमरे में था, सिर झुकाए खड़ा था। जैसे ही मैं कमरे में घुसी, उसने मुझे देखा और फटाफट बोला, “दीदी, वो सब गलती से हो गया था। मैंने जानबूझकर कुछ नहीं किया। प्लीज, आप किसी को कुछ मत बताना।” उसकी आवाज में डर साफ झलक रहा था। मैंने सख्त लहजे में कहा, “अगर तूने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं मम्मी को सब बता दूँगी।”
वो घबरा गया और बोला, “दीदी, आप जो भी कहोगी, मैं वो करूँगा। बस मम्मी को कुछ मत बताना।” मैंने फिर दोहराया, “ठीक है, लेकिन मेरी एक भी बात नहीं मानी, तो मैं मम्मी को सब बता दूँगी।” वो बार-बार माफी माँग रहा था, “हाँ दीदी, मैं सब मानूँगा।” मैंने कहा, “चल, अब जा, नहा ले, वरना स्कूल के लिए लेट हो जाएगा।”
वो बाथरूम में चला गया। मैं मन ही मन इतनी खुश थी कि बता नहीं सकती। मुझे जो चाहिए था, वो अब मेरी मुट्ठी में था। आज नहीं तो कल, मेरी चूत की आग बुझने वाली थी। वो नहाकर बाहर आया, अपना बैग पैक किया और स्कूल जाने को तैयार हुआ। मैंने कहा, “शुभांकर, नाश्ता तो कर ले।” उसने मना कर दिया। लेकिन मैं जानती थी कि अगर वो नाश्ता नहीं करता, तो मम्मी मुझ पर गुस्सा होंगी।
मैंने फिर कहा, “शुभांकर, थोड़ा-सा तो खा ले।” वो फिर भी नहीं माना। मैंने गुस्से में दबाव बनाया, “अगर तूने नाश्ता नहीं किया, तो मैं मम्मी को बाथरूम वाली बात बता दूँगी।” बस, ये सुनते ही वो तुरंत मान गया और नाश्ता करने बैठ गया। वो इतनी जल्दी-जल्दी खा रहा था, जैसे कोई रेस जीतने की कोशिश कर रहा हो। मैंने कहा, “आराम से खा, अगर गले में अटक गया तो मुसीबत हो जाएगी।”
लेकिन वो नहीं माना और जल्दी-जल्दी खाने लगा। तभी अचानक उसके गले में कुछ फंस गया। वो जोर-जोर से खाँसने लगा। मैंने कहा, “रुक, पानी पी ले।” लेकिन उसकी छाती में दर्द होने लगा। मैंने कहा, “रुक, मैं तेरी मदद करती हूँ।” मैंने उसकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया।
उसकी चिकनी और मस्कुलर छाती को छूते ही मेरे पूरे बदन में करंट-सा दौड़ गया। उसकी बॉडी इतनी अट्रैक्टिव थी कि मेरे मन में गंदे ख्याल आने लगे। मैं धीरे-धीरे उसकी छाती सहलाने लगी, और मुझे मजा आने लगा। वो बोला, “दीदी, अब ठीक लग रहा है।” ये कहकर वो स्कूल के लिए निकल गया।
मैं भी घर के बचे-खुचे काम निपटाकर अपने कमरे में चली गई। वहाँ मैंने शुभांकर का एक पेन लिया और उसे अपनी चूत में अंदर-बाहर करने लगी। मैं सोच रही थी कि उसका लंड कैसा होगा। उसकी चिकनी छाती का स्पर्श अभी भी मेरे दिमाग में था। मैंने पूरा दिन पोर्न देखा, और करीब 4:30 बजे मैंने कपड़े पहने और बाहर आई।
मैं घर के कामों में लग गई। तभी डोरबेल बजी। मैंने दरवाजा खोला तो मम्मी थीं। मैंने उन्हें पानी दिया और पूछा, “मम्मी, आप इतनी जल्दी आ गईं?” उन्होंने बताया कि उनके सारे काम जल्दी खत्म हो गए थे। फिर मम्मी ने कहा, “आज मैं खाना बनाऊँगी, तू जा, अपना काम कर।”
मैं अपने कमरे में चली गई और एक नया प्लान बनाया। मैंने अपनी अलमारी साफ करने का फैसला किया। उसमें मेरे ढेर सारे पुराने कपड़े थे, जिनमें ज्यादातर मेरी पुरानी ब्रा और पैंटी थीं। तभी फिर से डोरबेल बजी। मम्मी ने दरवाजा खोला, और मुझे शुभांकर की आवाज सुनाई दी। वो घर में शांति देखकर समझ गया कि मैंने मम्मी को कुछ नहीं बताया। वो मेरे कमरे में आया और बोला, “थैंक्स दीदी, आपने मम्मी को कुछ नहीं बताया।”
मैंने सख्ती से कहा, “अगर तूने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं मम्मी को सब बता दूँगी।” वो बोला, “हाँ दीदी, मैं आपकी हर बात मानूँगा। जो आप कहोगी, वही करूँगा।” मैंने कहा, “ठीक है, जा, फ्रेश हो जा।” वो फ्रेश होने चला गया। मैंने सोचा, क्यों न उसकी अलमारी भी साफ कर दूँ। उसकी अलमारी में भी ढेर सारे कपड़े थे। जब वो वापस आया, तो मैंने कहा, “शुभांकर, तूने अपनी अलमारी कितनी गंदी कर रखी है।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
वो बोला, “दीदी, इसे सेट करने का टाइम ही नहीं मिलता।” मैंने कहा, “इसमें तेरे कई पुराने कपड़े हैं जो अब तुझे फिट नहीं होंगे। इन्हें फेंक क्यों नहीं देता?” उसने कहा कि उसे टाइम नहीं मिला। मैंने कहा, “चल, एक-एक करके ट्राई कर, जो नहीं आते, उन्हें फेंक देंगे।” वो कपड़े लेकर बाथरूम जाने लगा। मैंने कहा, “बाथरूम में क्यों जा रहा है? यहीं चेंज कर ना।”
वो शरमाते हुए बोला, “दीदी, मुझे आपके सामने शर्म आती है। मैं बाथरूम में करता हूँ।” मैंने गुस्से में कहा, “रुक, मैं मम्मी को बता देती हूँ।” वो तुरंत डर गया और बोला, “रुको दीदी, मैं यहीं ट्राई करता हूँ।” उसने धीरे-धीरे अपनी शर्ट उतारनी शुरू की। उसकी बॉडी इतनी शानदार थी, जैसे किसी हीरो की। मैं तो बस उसकी चिकनी और मस्कुलर छाती को देखती रह गई।
उसने एक-एक करके शर्ट्स ट्राई कीं। एक शर्ट के बटन नहीं लग रहे थे। मैंने कहा, “रुक, मैं मदद करती हूँ।” मैंने उसके बटन लगाते हुए उसकी बॉडी को छुआ। उसकी त्वचा इतनी मुलायम थी कि मेरे मन में फिर से गंदे ख्याल आने लगे। वो हँसने लगा। मैंने पूछा, “क्यों हँस रहा है?” उसने कहा, “दीदी, मुझे गुदगुदी हो रही है।” मैंने उसे स्माइल दी और जानबूझकर और गुदगुदी करने लगी।
सारी शर्ट्स ट्राई हो गईं, अब पैंट की बारी थी। उसने कहा, “दीदी, अब पैंट ट्राई करनी है। बाथरूम में करूँ?” मैंने कहा, “यहीं कर ना।” वो फिर शरमाने लगा और बोला, “नहीं दीदी, मुझे शर्म आती है।” मैंने गुस्से में कहा, “रुक, मैं मम्मी को बता देती हूँ।” वो पीछे से मेरा हाथ पकड़कर बोला, “प्लीज दीदी, मम्मी को मत बताना। मैं यहीं करता हूँ।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने दरवाजा लॉक किया और उसके सामने बैठ गई। वो धीरे-धीरे अपनी पैंट उतारने लगा। मैंने गुस्से में कहा, “जल्दी कर, पैंट उतारने में इतना टाइम क्यों लगा रहा है?” उसने पैंट उतार दी और एक हाथ से अपनी नुन्नी छुपाने की कोशिश करने लगा। उसने पैंट ट्राई करनी शुरू की, लेकिन एक हाथ से पैंट पहनना मुश्किल था। मैंने कहा, “रुक, मैं मदद करती हूँ।”
मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसकी पैंट ऊपर चढ़ाने लगी। मैंने कहा, “हाथ हटा, मुझे बटन लगाने हैं।” उसने धीरे से हाथ हटाया, और उसका 4 इंच लंबा और 1.5 इंच मोटा लंड मेरी आँखों के सामने आ गया। वो अभी शांत था, फिर भी इतना बड़ा था। मैं तो उसे देखती ही रह गई। मैं सोचने लगी, अगर ये खड़ा हो गया तो कितना बड़ा होगा? तभी उसने कहा, “दीदी, अब बटन लगाओ ना।”
मैं शरमा गई और अपना ध्यान उसके लंड से हटाकर दूसरी तरफ किया। मैंने कहा, “ये पैंट परफेक्ट है। अब दूसरी ट्राई कर।” उसने फिर पैंट उतारी और अपने लंड पर हाथ रख लिया। मैंने कहा, “रुक, मैं तुझे पैंट पहनाती हूँ।” मैंने एक-एक करके उसकी पैंट्स सिलेक्ट और रिजेक्ट कीं। एक पैंट बहुत छोटी थी, जो उसे फिट नहीं हो रही थी। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने जानबूझकर उसे जबरदस्ती पहनाने की कोशिश की। इस दौरान मेरा हाथ बार-बार उसके लंड को छू रहा था। उसने कहा, “दीदी, आपका हाथ मेरी नुन्नी को लग रहा है।” मैंने बेफिक्री से कहा, “हाँ तो, क्या हुआ?” वो फिर बोला, “दीदी, बार-बार लग रहा है।” मैंने हँसते हुए कहा, “अरे, ये सब तो चलता है।” ये कहकर मैंने उसके लंड को जोर से दबा दिया।
उसके मुँह से “आह्ह” निकल गई। मैंने पूछा, “क्या हुआ?” उसने कहा, “कुछ नहीं दीदी।” मैंने फिर पूछा, “तो तूने आह्ह क्यों की?” उसने बताया, “जब आपने मेरी नुन्नी दबाई, तो दर्द हुआ।” वो अपने लंड को मुझसे छुपाने की कोशिश करने लगा। मैंने कहा, “बता, कहाँ दर्द हो रहा है?”
उसने बताने से मना कर दिया। मैंने गुस्से में कहा, “अबे, बोल ना, कहाँ दर्द हो रहा है?” उसने शरमाते हुए कहा, “जब आपने मेरी नुन्नी दबाई, आपके नाखून मुझे चुभ गए।” मैंने उसके लंड को अपने हाथ में लिया और देखने लगी। सचमुच मेरे नाखून के निशान थे। मैंने कहा, “सॉरी, रुक, मैं तेरी नुन्नी पर तेल लगा देती हूँ।”
मैं तेल की बोतल लेने गई। लौटकर मैंने कहा, “पैंट उतार, मैं तेल लगा देती हूँ।” उसने पैंट नहीं उतारी। मैंने खुद उसकी पैंट उतार दी। इस दौरान मेरा दुपट्टा भी गिर गया। मैंने उसे साइड में रखा और उसका लंड अपने हाथ में लिया। मैंने धीरे-धीरे तेल लगाना शुरू किया। उसका लंड इतना मुलायम और गर्म था कि मुझे पोर्न फिल्म की हीरोइन जैसा लग रहा था। मैं धीरे-धीरे उसके लंड को सहलाने लगी, जैसे वो मेरा पति हो। मुझे बहुत मजा आ रहा था। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने सोचा, अब इसे मुँह में ले लूँ। मेरे से कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने जैसे ही अपना मुँह खोला, तभी बाहर से किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैं डर के मारे सहम गई। मेरी आवाज ही नहीं निकल रही थी। तभी मम्मी की आवाज आई, “सुहाना, आज खाना नहीं खाना क्या?”
मैंने हड़बड़ाते हुए कहा, “हाँ मम्मी, आती हूँ।” मम्मी बोलीं, “ठीक है, शुभांकर को भी साथ ले आ। जल्दी नीचे आ।” मैंने कहा, “जी मम्मी, आ रही हूँ।” शुभांकर अभी भी वैसे ही खड़ा था, उसका लंड मेरे सामने था। मुझे मजबूरी में कहना पड़ा, “पैंट पहन ले।”
हम दोनों नीचे आए और खाने की टेबल पर बैठ गए। तभी मेरे दिमाग में एक शैतानी प्लान आया। मैंने जानबूझकर कहा, “मम्मी, आज सुबह जब मैं…” इतना कहते ही शुभांकर ने डरते हुए मेरी तरफ देखा और धीरे से बोला, “दीदी, प्लीज मत बोलो।” मम्मी ने पूछा, “हाँ, तो आगे क्या हुआ, बोल?” शुभांकर की तो हालत खराब हो गई थी, वो डर के मारे काँप रहा था।
तभी मम्मी गुस्से में बोलीं, “क्या बोलना है तुझे? जल्दी बोल ना!” मैंने शांत लहजे में कहा, “मम्मी, वो जब मैं आज सुबह नहा रही थी, तो नल से पानी बहुत धीरे-धीरे आ रहा था।” मम्मी ने राहत की साँस ली और बोलीं, “ठीक है, मैं तेरे अब्बा को बोलकर नल ठीक करवा दूँगी।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने चुपके से शुभांकर की तरफ देखा। वो डर से पसीने में तर-बतर था, लेकिन मेरी बात सुनकर उसे थोड़ा सुकून मिला। उसका चेहरा देखकर मुझे हँसी आ रही थी, पर मैंने खुद को कंट्रोल किया। खाना खत्म होने के बाद हम दोनों अपने कमरे की ओर जाने लगे। शुभांकर ने धीरे से कहा, “दीदी, थैंक्स। और प्लीज, मम्मी को कुछ मत बताना, वरना मेरी पिटाई हो जाएगी।”
मैंने सख्ती से कहा, “आगे से मेरी कोई बात नहीं मानी, तो मैं मम्मी को सब बता दूँगी। समझा?” वो तुरंत बोला, “हाँ दीदी, मैं आपकी हर बात मानूँगा।” तभी मम्मी ने शुभांकर को आवाज दी, “शुभांकर, सुन! अभी तेरे अब्बा का फोन आया था। वो आज रात घर नहीं आएँगे। तू अपनी किताबें लेकर मेरे रूम में आ जा।”
शुभांकर ने जवाब दिया, “जी मम्मी, मैं अभी चेंज करके और किताबें लेकर आता हूँ।” वो अपने कमरे में चला गया। मैं भी उसके पीछे जाने लगी, तभी मम्मी ने मुझे पुकारा, “सुहाना, जरा इधर तो आ!” मैंने कहा, “जी मम्मी, आती हूँ।” नीचे जाकर मम्मी ने कहा, “बेटा, ये बर्तन किचन में रख दे।” मैं बर्तन रखने लगी। इतने में शुभांकर आया और मम्मी उसे अपने कमरे में ले गईं।
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था। मम्मी ने मेरा सारा प्लान खराब कर दिया। लेकिन मैं कर भी क्या सकती थी? मैंने बर्तन रखे और अपने कमरे में चली गई। गुस्से में मैंने सारा सामान इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया। पता नहीं मुझे क्या हो गया था। मैं ऐसा क्यों कर रही थी? थोड़ी देर बाद मैं शांत हुई और सोचने लगी कि शुभांकर तो बस आज रात के लिए मम्मी के पास सोने गया है। कल से वो मेरे साथ ही होगा।
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मैंने खुद को तसल्ली दी और शुभांकर के बारे में सोचने लगी। उसका लंड मेरे दिमाग में बार-बार घूम रहा था। मैं उसे फिर से देखना चाहती थी, उसका लंड अपने मुँह में लेना चाहती थी। ये सोचकर मेरी चूत गीली होने लगी। मैं कुछ बहाना बनाकर मम्मी के कमरे में चली गई। वहाँ मम्मी शुभांकर को डाँट रही थीं, “तू अपना होमवर्क ठीक से क्यों नहीं करता?” मम्मी ने उसे एक थप्पड़ भी मारा। शुभांकर मुझे देखकर अपने आँसू पोंछने लगा। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मम्मी ने मुझे देखा और गुस्से में कहा, “हाँ, तू यहाँ क्यों आई? अब तुझे क्या काम है?” मैं डर गई और कुछ बोल नहीं पाई। मैं अपने कमरे में लौट आई, कपड़े उतारे और अपनी चूत में उंगली करने लगी। मैं शुभांकर के लंड को इमैजिन कर रही थी। उंगली करते-करते मैं झड़ गई और उसी हालत में सो गई, मेरा हाथ मेरी चूत में ही था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
सुबह जब आँख खुली तो 7 बज रहे थे। मैंने कपड़े पहने और सोचने लगी कि आज कैसे शुभांकर का लंड फिर से देखूँ। तभी मेरे दिमाग में एक प्लान आया। क्यों न मैं आज शुभांकर के साथ बाथरूम में नहा लूँ? मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ दिया। मैं जानती थी कि शुभांकर सुबह उठते ही सीधा बाथरूम आता है। मैं तैयार थी।
जैसे ही दरवाजे की आवाज आई, मैं अलर्ट हो गई। शुभांकर बाथरूम की तरफ आ रहा था, लेकिन अचानक रुक गया। उसने आवाज लगाई, “दीदी, दीदी!” मैंने कोई जवाब नहीं दिया। उसने दरवाजा खटखटाया और बोला, “दीदी, क्या आप अंदर हो?” मैंने झट से दरवाजा खोला और उसे अंदर खींच लिया। वो डर गया और बोला, “सॉरी दीदी, मैं बाहर रुकता हूँ। आप पहले नहा लो।”
वो बाहर जाने लगा, लेकिन मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और अपनी गोद में उठा लिया। मैंने कहा, “कहाँ जा रहा है तू?” वो बोला, “दीदी, आप पहले नहा लो, मैं बाद में नहा लूँगा।” मैंने हँसते हुए कहा, “चल, आज हम दोनों साथ में नहाते हैं।” वो घबरा गया, “नहीं दीदी!” मैंने सख्ती से कहा, “मैं आज मम्मी को सचमुच बता दूँगी कि तू रोज मुझे नहाते हुए देखता है।”
ये कहते हुए मैंने जोर से चिल्लाया, “मम्मी!” मेरे मुँह से मम्मी का नाम सुनते ही उसने फटाक से मेरा मुँह बंद किया और बोला, “दीदी, प्लीज मम्मी को मत बोलो। मैं आपके साथ नहा लूँगा।” मैंने उसके गाल पर एक चुम्मी दी और कहा, “चल, अब जल्दी से कपड़े उतार। आज हम दोनों साथ नहाएँगे।”
लेकिन उसका मन नहीं था। वो बिना कपड़े उतारे मेरे साथ नहाने लगा। उसका सिर नीचे झुका हुआ था। मैंने पूछा, “क्या मेरी चूत को देख रहा है?” वो बोला, “नहीं दीदी!” मैंने फिर कहा, “तो फिर क्या देख रहा है?” वो घबराते हुए बोला, “नहीं दीदी, कुछ नहीं। दरअसल, आपको इस हालत में देखकर मुझे बहुत डर लग रहा है।”
मैंने हँसते हुए कहा, “क्यों? मैं इतनी बुरी लगती हूँ तुझे?” वो बोला, “नहीं दीदी, वैसा नहीं।” मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसका लंड फिर से मेरे सामने था। मैंने पूछा, “तेरी नुन्नी का दर्द कैसा है अब?” उसने कहा, “अब कम हो गया है।” मैंने उसका लंड हाथ में लिया और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी। उसका लंड मुलायम और गर्म था। “Hot Bhai Bahan Chudai”
वो बोला, “दीदी, मुझे स्कूल जल्दी जाना है। मैं नहाकर जल्दी निकल जाऊँगा।” मैंने कहा, “ठीक है, आज मैं तुझे नहलाती हूँ।” मैंने उसके पूरे बदन पर साबुन लगाना शुरू किया। मेरा हाथ बार-बार उसके लंड पर जा रहा था। मैंने कहा, “दे, मैं तेरे चेहरे को भी अच्छे से साफ कर देती हूँ।” मैंने उसके चेहरे पर ढेर सारा साबुन लगा दिया और कहा, “अब अपनी आँखें मत खोलना।”
मैं उसके लंड को मुँह में लेने के लिए तड़प रही थी। मैंने जल्दी से उसके लंड को पानी से साफ किया और उसे अपने मुँह में ले लिया। मैं धीरे-धीरे उसे चूसने लगी, मेरी जीभ उसके लंड के टॉप पर गोल-गोल घूम रही थी। “आह्ह,” मेरे मुँह में उसका लंड और सख्त हो गया। अब वो पूरा खड़ा हो चुका था, करीब 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा। मैं उसे और तेजी से चूसने लगी।
शुभांकर बोला, “दीदी, मेरी नुन्नी पर कुछ गर्म-गर्म लग रहा है।” मैंने कुछ नहीं कहा और बोली, “चुप कर।” मैंने उसका लंड और गहराई से चूसा, मेरी जीभ उसके लंड के नीचे तक जा रही थी। वो धीरे-धीरे सिसकारियाँ लेने लगा, “आह्ह… दीदी…” मैंने उसका लंड मुँह से निकाला और फिर से चूसना शुरू किया।
तभी उसने कहा, “दीदी, प्लीज पानी डालो, मेरी आँखों में साबुन जा रहा है।” मैंने उस पर पानी डाला और उसे अच्छे से साफ किया। फिर मैंने उसके बदन को तौलिये से पोंछा। मैं उसे अपने कमरे में ले आई। मैं अभी भी पूरी नंगी थी, लेकिन वो मुझे देख ही नहीं रहा था। उसने सिर नीचे कर रखा था।
मैंने पूछा, “तुझे क्या हुआ? तू मुझे क्यों नहीं देख रहा?” वो बोला, “दीदी, मुझे अच्छा नहीं लगता कि मैं आपको ऐसे देखूँ।” मैंने जानबूझकर कहा, “अरे शुभांकर, देख ना, पीछे मुझे कुछ काट रहा है।” उसने बिना देखे कहा, “दीदी, कुछ भी नहीं है।” मैंने कहा, “अरे, फिर हाथ फेर दे, अगर कुछ होगा तो निकल जाएगा।”
वो बोला, “कहाँ पर दीदी?” मैंने कहा, “कमर के नीचे।” वो धीरे-धीरे मेरी कमर पर हाथ फेरने लगा। मैंने फिर कहा, “शुभांकर, थोड़ा और नीचे।” वो और नीचे हाथ ले गया। मैंने फिर कहा, “थोड़ा और नीचे, मेरी गांड के बीच में।” ये सुनते ही वो डर गया और उसने हाथ रोक लिया। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने गुस्से में कहा, “जल्दी हाथ फेर ना, मुझे वहाँ कुछ काट रहा है।” उसने मेरी गांड पर हाथ फेरा। मैंने कहा, “शुभांकर, और थोड़ा फेर दे।” वो धीरे-धीरे मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा। मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी गांड के छेद पर रगड़ने लगी। मेरे पूरे बदन में करंट दौड़ गया। पहली बार किसी का हाथ मेरी गांड पर था। मैं सिसकारियाँ लेने लगी, “आह्ह… शुभांकर…”
वो बोला, “दीदी, बस, अब मैं लेट हो रहा हूँ।” मैंने स्माइल करते हुए कहा, “अब अच्छा लग रहा है।” वो अपना बैग लेकर स्कूल चला गया। मैंने अपनी चूत को देखा, वो पूरी गीली थी। मैंने उसे साफ किया, कपड़े पहने और नीचे चली गई। तब तक शुभांकर जा चुका था और मम्मी मार्केट से लौट आई थीं। मैंने उनका सामान लिया और खाना बनाने की तैयारी शुरू की।
मम्मी ने मार्केट से मोटे-मोटे गाजर लाए थे, जो शुभांकर के लंड जैसे दिख रहे थे। मैंने दो गाजर मम्मी की नजरों से बचाकर अपने कमरे में रख लिए। खाना बनाने के बाद मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, मेरा सिर दर्द कर रहा है। मैं थोड़ी देर सोने जा रही हूँ।” मम्मी बोलीं, “ठीक है।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं अपने कमरे में गई, सारे कपड़े उतारे और पोर्न मूवी देखने लगी। उसमें एक लड़की अपनी चूत और गांड में डिल्डो डाल रही थी। मैंने भी एक गाजर लिया, उस पर थोड़ा तेल लगाया और अपनी चूत में धीरे-धीरे डालना शुरू किया। गाजर 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था। पहले तो थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने उसे बाहर नहीं निकाला। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैं धीरे-धीरे गाजर को अंदर-बाहर करने लगी। अब वो आराम से मेरी चूत में जा रहा था। मैं सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… उह्ह…” मेरा पानी निकल गया। फिर मैंने गाजर पर और तेल लगाया और अपनी गांड पर भी तेल लगाया। मैंने गाजर को धीरे-धीरे अपनी गांड में डालना शुरू किया। तेल की वजह से वो आसानी से अंदर-बाहर होने लगा।
मैंने और जोर लगाया, गाजर आधा और अंदर चला गया। मुझे दर्द होने लगा, लेकिन साथ ही एक अजीब-सा मजा भी आ रहा था। मेरे मुँह से “आह्ह… ओह्ह…” की आवाजें निकल रही थीं। मैं गाजर को और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। तभी मम्मी ने मुझे आवाज दी। मैं हड़बड़ा गई और जल्दी-जल्दी कपड़े पहनने लगी। जल्दबाजी में मैं ब्रा पहनना भूल गई।
मैं नीचे आई तो मम्मी बोलीं, “चल, खाना खाते हैं।” हम खाने बैठे। मम्मी की नजर मेरे निप्पल्स पर थी, जो मेरी टाइट टी-शर्ट में साफ दिख रहे थे। मैं शरमा गई, लेकिन कुछ बोली नहीं। मम्मी ने मेरे निप्पल्स को मेरी टाइट टी-शर्ट में साफ-साफ देख लिया था। वो गुस्से में बोलीं, “सुहाना, तू अब ब्रा पहना कर। अब तू छोटी बच्ची थोड़े ही है कि मुझे तुझे हर बात बतानी पड़े।” मैंने शरमाते हुए कहा, “जी मम्मी।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
मम्मी ने फिर ताने मारते हुए कहा, “तू अपने छोटे भाई के साथ रहती है, तुझे शर्म नहीं आती क्या? ऐसे खुला रहने में?” मैंने बहाना बनाया, “मम्मी, अभी तो शुभांकर घर पर नहीं है, इसलिए मैंने ब्रा उतार दी थी।” मम्मी ने सख्ती से कहा, “घर पर नहीं है तो क्या हुआ? तुझे ब्रा पहनने में क्या दिक्कत है? घर में कोई भी आता-जाता है, ये अब अच्छी बात नहीं है, सुहाना।”
मैंने कहा, “मम्मी, खाना खाकर ब्रा पहन लूँगी।” खाना खत्म करके मैं अपने कमरे में जाने लगी, तभी मम्मी ने फिर से आवाज दी, “सुहाना, ब्रा पहनकर मेरे कमरे में आ।” मैंने जल्दी से ब्रा पहनी और मम्मी के कमरे में चली गई। वहाँ मम्मी ने कहा, “चल, मार्केट चलकर आते हैं।”
हम दोनों मार्केट गए और शाम 5 बजे घर लौटे। अब शुभांकर के आने का टाइम हो चुका था। मैं अपने कमरे में गई और बेड पर बैठकर मोबाइल में गेम खेलने लगी। तभी डोरबेल बजी। मम्मी ने दरवाजा खोला, वो शुभांकर था। वो सीधा मेरे कमरे में आया और बोला, “दीदी, आज बहुत सारा होमवर्क मिला है। क्या आप मेरी हेल्प करोगी?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, लेकिन तुझे मेरा एक काम करना होगा।” उसने कहा, “दीदी, मैं होमवर्क करने के बाद आपका काम भी कर दूँगा।” मैंने शरारत से पूछा, “अगर तूने मना कर दिया तो?” वो बोला, “नहीं दीदी, मैं मना नहीं करूँगा। प्लीज, मेरी हेल्प कर दो।” मैंने कहा, “हाँ, बता, क्या करना है?”
शुभांकर ने मुझे सारा होमवर्क समझाया कि क्या-क्या और कैसे करना है। हम दोनों मिलकर उसके होमवर्क में जुट गए। अभी कुछ काम बाकी था कि खाने का टाइम हो गया। हमने खाना खाया और फिर बाकी का होमवर्क पूरा करने में जुट गए। रात के 10 बज गए, तब जाकर उसका सारा होमवर्क पूरा हुआ।
शुभांकर ने कहा, “थैंक्स दीदी।” मैंने हँसते हुए कहा, “थैंक्स नहीं, अब तुझे मेरा काम करना है।” वो बोला, “हाँ दीदी, बताओ, क्या काम करना है?” मैंने बनावटी थकान भरे लहजे में कहा, “यार शुभांकर, मेरी बॉडी बहुत दर्द कर रही है। तू प्लीज आज मेरी बॉडी की मसाज कर दे ना।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
वो शरमाते हुए बोला, “दीदी, मैं तो…” मैंने उसे बीच में काटते हुए कहा, “तूने ही तो कहा था कि मेरा काम करेगा। अब तू मना नहीं कर सकता।” वो हिचकिचाते हुए बोला, “ठीक है दीदी।” मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ ब्रा और पैंटी में उसके सामने खड़ी हो गई। मैंने कहा, “जा, तेल की बोतल ले आ और मेरी मसाज कर।” वो तेल की बोतल लेने चला गया और थोड़ी देर में लौट आया। उसने पूछा, “दीदी, कहाँ लगाना है तेल?” मैंने कहा, “पहले पैरों से शुरू कर, फिर पूरी बॉडी पर लगाना है।”
वो मेरे पैरों पर तेल लगाने लगा। उसके हाथों का स्पर्श मेरे पूरे बदन में करंट की तरह दौड़ रहा था। मैंने कहा, “शुभांकर, थोड़ा और ऊपर, मेरी पैंटी के पास भी लगा दे ना।” उसने मेरी जाँघों पर तेल लगाना शुरू किया। उसके हाथ कभी-कभी मेरी पैंटी को छू रहे थे। मैंने कहा, “शुभांकर, पैंटी की वजह से शायद तुझे प्रॉब्लम हो रही है।”
वो बोला, “नहीं दीदी।” मैंने कहा, “रुक, मैं इसे भी उतार देती हूँ।” ये कहकर मैंने झट से अपनी पैंटी उतारकर फेंक दी। अब मेरी चूत उसके सामने पूरी नंगी थी। वो अपनी नजरें बचाने की कोशिश कर रहा था। मैंने बेफिक्री से कहा, “नो प्रॉब्लम शुभांकर, सब चलता है। तू इस पर भी हाथ लगा सकता है।”
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वो घबराकर बोला, “नहीं दीदी, मैं नहीं।” मैंने उसका हाथ जबरदस्ती पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया। मैंने उसके हाथ से अपनी चूत रगड़वानी शुरू की। वो धीरे-धीरे वैसे ही करने लगा। मैंने कहा, “शुभांकर, उस छेद में अपनी एक उंगली से तेल लगा ना, प्लीज।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसने वैसा ही किया। जैसे ही उसकी उंगली मेरी चूत के छेद पर लगी, मेरे मुँह से “आह्ह…” निकल गया। वो डर गया और उसने उंगली बाहर निकालते हुए पूछा, “दीदी, क्या हुआ?” मैंने कहा, “कुछ नहीं, तू कंटिन्यू कर।” वो फिर से मेरी चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगा। मैं अब झड़ने वाली थी। मैंने कहा, “शुभांकर, तेज-तेज कर, बहुत अच्छा लग रहा है। प्लीज और तेज कर ना।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैं जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी, “आह्ह… उह्ह…” और मेरा पानी निकल गया। मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी। शुभांकर ने हैरानी से पूछा, “दीदी, ये क्या था?” मैंने उसे कुछ नहीं बताया और कहा, “कुछ नहीं, तू बस ऊपर तेल लगाकर मालिश कर दे, मेरे भाई।”
उसने मेरे पेट पर तेल लगाना शुरू किया और रगड़ने लगा। मैंने कहा, “शुभांकर, मेरी ब्रा भी उतार दे, और मेरे बूब्स पर भी तेल लगाकर अच्छे से मालिश कर।” उसने ब्रा खोलने से मना कर दिया। मैंने खुद ही अपनी ब्रा उतार दी। मेरे 34 साइज के बूब्स उछलकर उसके सामने आ गए। अब मैं उसके सामने पूरी नंगी थी।
मैंने कहा, “शुभांकर, मुझे तेल की बोतल दे।” उसने बोतल दी, तो मैंने ढेर सारा तेल अपने बूब्स पर डाला और कहा, “अब मालिश कर।” वो सिर झुकाकर बोला, “दीदी, नहीं, ये गलत है। मैं मसाज नहीं करना चाहता।” मैंने सख्ती से कहा, “तूने कहा था ना कि मेरा काम करेगा? अब अगर तूने नहीं किया, तो मैं मम्मी को बता दूँगी कि तू मुझे रोज चोदता है।”
वो चौंक गया, “क्या?” मैंने कहा, “हाँ, मैं मम्मी को यही बोलूँगी।” वो डर गया और बोला, “ठीक है दीदी, मैं करता हूँ। प्लीज मम्मी को कुछ मत बोलना।” उसने मेरे बूब्स पर मालिश शुरू की। उसके हाथ मेरे बूब्स पर पड़ते ही मेरे निप्पल्स खड़े और सख्त हो गए। मैंने कहा, “शुभांकर, मेरे दोनों निप्पल्स पर भी थोड़ा और तेल लगा दे।”
उसने मेरे निप्पल्स पर तेल लगाया और धीरे-धीरे मसलने लगा। मेरे मुँह से फिर सिसकारियाँ निकलने लगीं, “आह्ह… शुभांकर…” मैंने पूछा, “तुझे भी अपनी मसाज करवानी है?” उसने मना कर दिया, लेकिन जब मैंने थोड़ा जोर दिया, तो वो मान गया। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों कमरे में पूरी तरह नंगे थे।
मैंने उसकी बॉडी पर तेल लगाया और मसाज शुरू की। मेरे हाथों की गर्मी से उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। वो अपने हाथों से उसे छुपाने की कोशिश कर रहा था। मैंने उसके हाथ हटाए और कहा, “शुभांकर, हाथ साइड कर। मुझे तेरी नुन्नी की मसाज करनी है। देख, मुझे नंगा देखकर ये कैसे सलामी दे रहा है।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
वो बोला, “नहीं दीदी, सिर्फ बॉडी की मालिश कर दो।” लेकिन मैंने जबरदस्ती उसका हाथ हटाया। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था, करीब 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा। मैंने कहा, “अरे शुभांकर, तेरी नुन्नी तो अब लंड बन चुका है। देख, मुझे नंगा देखकर ये कैसे सलामी दे रहा है।”
वो शरमा गया। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया और तेल लगाकर मालिश शुरू कर दी। उसका लंड और सख्त हो गया। वो अब किसी मर्द के लंड जैसा लग रहा था। मुझे उसकी मालिश करने में बहुत मजा आ रहा था। मैंने कहा, “शुभांकर, क्या मैं तेरे लंड को किस कर सकती हूँ?”
वो बोला, “क्यों दीदी?” मैंने कहा, “क्योंकि मेरा बहुत मन कर रहा है।” उसने कहा, “अगर आपको कोई प्रॉब्लम नहीं है तो…” उसकी बात पूरी होने से पहले ही मैंने उसके लंड पर किस करना शुरू कर दिया। मैंने धीरे-धीरे उसके लंड को अपने मुँह में लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। मेरी जीभ उसके लंड के टॉप पर गोल-गोल घूम रही थी। “आह्ह…” उसके मुँह से सिसकारी निकली।
मैं रुकी नहीं। मैंने और जोश के साथ उसके लंड को चूसा, उसे पूरा मुँह में लेकर अंदर-बाहर करने लगी। शुभांकर बोला, “नहीं दीदी, ये गलत है, प्लीज ऐसा मत करो।” लेकिन मैं कहाँ मानने वाली थी? मैंने करीब 10 मिनट तक उसका लंड चूसा। तभी वो अचानक सख्त हो गया। शायद वो झड़ने वाला था। उसने कहा, “दीदी, मेरी नुन्नी से कुछ निकलने वाला है।”
मैंने उसकी बात अनसुनी की और और तेजी से चूसने लगी। तभी मेरे मुँह में उसके लंड से एक जोरदार पिचकारी मारी। वो उसका गर्म, गाढ़ा माल था। मैं रुकी नहीं और पागलों की तरह चूसती रही। उसका माल इतना ज्यादा था कि मेरे मुँह से बाहर निकलने लगा। लेकिन मैंने सारा माल गटक लिया। “Hot Bhai Bahan Chudai”
फिर मैंने उसके लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस-चूसकर साफ कर दिया। उसका माल आम के रस जैसा स्वादिष्ट था। मुझे पीने में बहुत मजा आया। वो थककर बेड पर लेट गया, उसकी आँखें बंद थीं। मैं उसके ऊपर लेट गई और धीरे से उसके कान में बोली, “शुभांकर, कैसा लगा?” वो बोला, “दीदी, मैं बहुत सॉरी हूँ।”
मैंने पूछा, “सॉरी क्यों?” उसने कहा, “मैंने आपके मुँह में सुसु किया ना, इसलिए।” मैंने हँसते हुए उसके गाल पर एक चुम्मी दी और कहा, “मेरे भाई, वो सुसु नहीं था, कुछ और था।” वो हैरानी से बोला, “अगर वो सुसु नहीं था, तो क्या था?” मैंने कहा, “अरे, वो जूस था। मुझे पीकर बहुत मजा आया।”
उसने पूछा, “दीदी, वो जूस कैसे हुआ? और वो कहाँ से आया?” मैंने हँसते हुए कहा, “अरे, वो हर एक के जिस्म में होता है। बस उसे निकालने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।” वो बोला, “मैं भी अपना जूस पीना चाहता हूँ।” मैंने कहा, “शुभांकर, अपना जूस नहीं पीते। अगर लड़का है, तो वो लड़की का जूस पिएगा, और अगर लड़की है, तो वो लड़के का जूस पिएगी।” मैंने उसे स्माइल दी और पूछा, “क्या तुझे भी जूस पीना है?”
वो बोला, “हाँ, पीना है।” मैंने पूछा, “किसका पीना है?” उसने कहा, “किसी का भी।” मैंने शरारत से कहा, “मेरा पिएगा?” वो बोला, “हाँ, आपका पिऊँगा। लेकिन निकलता कहाँ से है?” मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया। मैंने शुभांकर को शरारती स्माइल दी और पूछा, “तुझे भी मेरा जूस पीना है?”
वो उत्साह से बोला, “हाँ!” मैंने पूछा, “किसका पिएगा?” उसने मासूमियत से कहा, “किसी का भी!” मैंने हँसते हुए कहा, “तो मेरा पिएगा?” वो बोला, “हाँ, दीदी!” मैंने शरारत भरे लहजे में कहा, “लेकिन तुझे मेरा जूस पीने के लिए अपना मुँह लगाना पड़ेगा।” वो थोड़ा हिचकिचाया और बोला, “हाँ दीदी, चलेगा। लेकिन आपका जूस निकलता कहाँ से है?” “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया। मेरी चूत अभी भी गीली थी, और उसका स्पर्श मुझे और गर्म कर रहा था। वो हँसने लगा और बोला, “दीदी, यहाँ से कैसे जूस निकलेगा?” मैंने कहा, “यहीं से निकलता है। तू एक बार अपना मुँह लगाकर तो देख।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो मेरी चूत के पास अपना मुँह ले गया और बोला, “दीदी, आप अपना जूस निकालो, मैं पीता हूँ।” मैंने हँसते हुए कहा, “शुभांकर, ऐसे जूस नहीं निकलता। पहले तुझे इसे चाटना होगा, तब जूस निकलेगा।” वो नाक-भौं सिकोड़कर बोला, “छी दीदी, इतनी गंदी जगह को कौन चाटेगा?” मैंने सख्ती से कहा, “मेरी इस गंदी जगह को तुझे चाटना ही होगा, अगर तू मेरा जूस पीना चाहता है।”
वो बोला, “दीदी, इस पर इतने सारे बाल क्यों हैं?” मैंने हँसते हुए कहा, “जब तू बड़ा होगा, तेरे भी बाल आएँगे। तेरी नुन्नी पर तो हर जगह बाल होंगे।” वो हैरानी से बोला, “क्या दीदी?” थोड़े नखरे दिखाने के बाद आखिरकार वो मान गया। उसने मेरी चूत को धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। उसके जीभ का पहला स्पर्श मेरे पूरे बदन में आग की तरह फैल गया। मेरे मुँह से “आह्ह… उह्ह…” की सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मैं मन ही मन सोच रही थी, “और जोर से चाट, मेरी चूत को चाट, अपनी बहन की चूत को अच्छे से चाट, साले बहनचोद, और तेज कर!” मैंने अपनी दोनों टाँगें उठाकर उसकी गर्दन पर रख दीं और उसे अपनी चूत पर कसकर दबा लिया। उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक चली गई। मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं झूम उठी। ये मेरा पहला मौका था जब किसी ने मेरी चूत चाटी थी। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैं मजे से सिसकार रही थी, “आह्ह… शुभांकर… और चाट…” मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने कहा, “शुभांकर, मेरा जूस बाहर आने वाला है। तू सारा पी जाना। और जोर से चाट मेरी चूत को!” उसने और तेजी से चाटना शुरू किया। मेरी चूत ने फव्वारे की तरह पानी छोड़ दिया। शुभांकर ने मेरा सारा पानी पी लिया। मैंने अपनी टाँगें खोल दीं और उसे बेड पर पटक दिया।
मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसके होंठों को चूमने लगी। उसके होंठ इतने मुलायम थे कि मुझे चूमने में बहुत मजा आ रहा था। मैंने पूछा, “कैसा लगा मेरा जूस?” वो बोला, “दीदी, बहुत टेस्टी था। लेकिन ये जूस आता कहाँ से है?” मैंने हँसते हुए कहा, “खुद अंदर देख ले।” मैंने अपनी गांड के नीचे एक तकिया रखा और अपनी दोनों टाँगें हाथों से पकड़कर फैला दीं, ताकि उसे मेरी चूत अच्छे से दिखे।
वो मेरी टाँगों के बीच बैठ गया और अपनी उंगलियों से मेरी चूत को खोलकर देखने लगा। उसने कहा, “दीदी, इसमें तो कुछ भी नहीं दिख रहा।” मैंने कहा, “तुझे नीचे एक छेद दिख रहा है क्या?” वो बोला, “हाँ दीदी।” मैंने कहा, “वहीं से जूस आता है।” वो बोला, “वहाँ कहाँ से आता है?” मैंने कहा, “उसमें उंगली डालकर खोलकर देख, तुझे समझ आ जाएगा।”
उसने अपनी दोनों उंगलियों से मेरी चूत को फैलाना शुरू किया। मैं चीख पड़ी, “आह्ह… शुभांकर, ऐसा नहीं करते, तू तो मेरी चूत ही फाड़ देगा!” वो डर गया और बोला, “सॉरी दीदी, मैं तो अंदर देखने की कोशिश कर रहा था।” मैंने कहा, “अपनी एक उंगली अंदर-बाहर कर, तुझे दिख जाएगा।”
उसने अपनी एक उंगली मेरी चूत में डालकर अंदर-बाहर करना शुरू किया। मैं फिर सिसकारने लगी, “आह्ह… शुभांकर…” मैंने कहा, “एक और उंगली डाल।” उसने दूसरी उंगली भी डाल दी और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा। मैं तीसरी बार झड़ने वाली थी। मैंने कहा, “शुभांकर, मेरा जूस फिर आ रहा है। अपना मुँह लगाकर मेरी चूत चाट।”
उसने उंगलियाँ निकालीं और अपनी जीभ मेरी चूत पर लगा दी। वो फिर से चाटने लगा। थोड़ी देर में मैं फिर झड़ गई, और उसने मेरा सारा पानी पी लिया। वो बोला, “दीदी, इस बार टेस्ट कुछ अलग था।” मैंने उसे गले लगाया, और वो मेरे ऊपर चढ़कर मुझे हग करने लगा। मैंने उसका सिर पकड़ा और फिर से उसके होंठ चूमने लगी। अब वो मुझसे काफी खुल गया था और मेरी हर बात मान रहा था। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने शरारत से कहा, “शुभांकर, तू बहुत मतलबी है।” वो बोला, “क्यों दीदी, मैं कहाँ से मतलबी हूँ?” मैंने कहा, “तूने मेरा जूस दो बार पिया, और मुझे सिर्फ एक बार पिलाया।” वो बोला, “आपको मेरा जूस और पीना है क्या?” मैंने कहा, “हाँ, मेरा बहुत मन कर रहा है। शुभांकर, एक बार और पिला दे ना।”
वो मेरे बूब्स पर बैठ गया और अपना लंड मेरे मुँह में डालने लगा। वो मेरे ऊपर बैठा था, जिससे मेरे निप्पल्स उसकी गांड में चुभ रहे थे। उसने कहा, “दीदी, मुझे कुछ चुभ रहा है।” मैंने कहा, “शायद मेरे निप्पल्स होंगे।” वो उठकर देखने लगा और बोला, “दीदी, आपकी चेस्ट इतनी बड़ी क्यों है, और मेरी इतनी छोटी क्यों है?” मैंने हँसते हुए कहा, “लड़कियों की चेस्ट बड़ी होती है, और लड़कों की छोटी।”
वो बोला, “ऐसा क्यों होता है?” मैंने कहा, “लड़कियों की चेस्ट में दूध होता है।” वो हैरानी से बोला, “क्या, इसमें दूध होता है?” मैंने कहा, “हाँ।” वो बोला, “मुझे दूध पीना है।” मैंने कहा, “अभी मेरे अंदर नहीं है।” वो बोला, “क्यों, आपके अंदर क्यों नहीं है?” मैंने हँसते हुए कहा, “जब लड़की माँ बनती है, तभी उसकी चेस्ट में दूध आता है। चल, अब तू मुझे अपना जूस पिला। बाकी बातें मैं तुझे कल बताऊँगी।”
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : चुदते समय बोली इतना बड़ा लंड कभी नहीं लिया
वो बेड पर लेट गया, और मैं उसकी टाँगों के बीच में आकर उसका लंड चूसने लगी। मैं किसी रंडी की तरह उसके लंड को चूस रही थी। वो सिसकारियाँ ले रहा था, “आह्ह… दीदी…” उसे भी अब मजा आने लगा था। करीब 10 मिनट बाद वो झड़ने वाला था। उसने कहा, “दीदी, मेरा जूस आ रहा है, आप पी लो।” मैंने कहा, “शुभांकर, आने दे, तू रोक मत।”
वो बोला, “हाँ दीदी, पी लो… आह्ह…” और वो झड़ गया। मैंने उसका सारा माल पी लिया और उसके लंड को चूस-चूसकर साफ कर दिया। फिर मैं उसके ऊपर चढ़कर उसे चूमने लगी। हम दोनों थक गए थे और उसी हालत में सो गए। सुबह जब उसका अलार्म बजा, वो उठा और मुझे जगाते हुए बोला, “दीदी, आप कपड़े पहन लो, मैं नहाने जा रहा हूँ।”
मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया और चूमने लगी। वो बोला, “प्लीज दीदी, बाद में करें। मुझे स्कूल के लिए देर हो जाएगी।” मैंने कहा, “कल रात जो मैंने तेरे साथ किया, उसके बारे में किसी को मत बताना।” वो बोला, “नहीं दीदी, किसी को नहीं बताऊँगा।” मैंने कहा, “प्रॉमिस?” उसने कहा, “हाँ दीदी, पक्का प्रॉमिस।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “एक किस दे दे।” उसने मेरे होंठों पर किस की और जाने लगा। मैं भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम में चली गई। हम दोनों ने साथ में नहाया, फिर साथ में नाश्ता किया। वो स्कूल चला गया, और मैं बहुत खुश थी। मेरा प्लान 100% सक्सेसफुल हो गया था।
अब मैं सुबह से ही रात का इंतजार करने लगी कि कब शुभांकर स्कूल से आए और कब मैं उससे चुदवाऊँ। मैंने दिन में अपनी चूत के सारे बाल साफ कर लिए, ताकि उसे चाटने में कोई दिक्कत न हो। देखते-देखते शाम के 5 बज गए, और शुभांकर स्कूल से लौट आया। वो आज कुछ उदास-सा लग रहा था। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैंने पूछा, “क्या हुआ शुभांकर?” उसने बताया कि उसके दोस्त के साथ किसी बात पर झगड़ा हो गया था, इसलिए उसका मूड ठीक नहीं था। मुझे अपने भाई का मूड ठीक करना था। मैंने उसे गुदगुदी करनी शुरू की। वो हँसने लगा और बोला, “दीदी, मुझे छोड़ो, मैं फ्रेश होकर आता हूँ।”
वो बाथरूम में चला गया। जैसे ही वो बाहर आया, मैंने शरारत से पूछा, “जूस पीना है मेरे भाई को?” उसने मना कर दिया और बोला, “नहीं दीदी, मुझे आपका दूध पीना है।” मैंने कहा, “मुझे तो दूध नहीं आता।” वो बोला, “नहीं, मुझे आपका दूध ही पीना है।” ये कहकर वो मुँह फुलाकर बैठ गया।
मैं ये मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी। मैंने चुपके से अपनी शर्ट उतारी और उसके सामने खड़ी हो गई। वो खुश हो गया और पागलों की तरह मेरे बूब्स चूसने लगा। उसके दाँत मेरे निप्पल्स में चुभ रहे थे। मैंने कहा, “शुभांकर, आराम से कर, तेरे दाँत चुभ रहे हैं।” लेकिन वो मेरी नहीं सुन रहा था। उसे मजा आ रहा था, और मुझे भी। मैंने उसे और कुछ नहीं कहा और चूसने दिया।
वो किसी छोटे बच्चे की तरह मेरे बूब्स पी रहा था, जैसे मैं उसकी माँ हूँ। उसने करीब एक घंटे तक मेरे बूब्स चूसे। मेरे दोनों बूब्स लाल हो गए थे। मैंने कहा, “तूने तो मेरे बूब्स को चूस-चूसकर लाल कर दिया।” मैंने उसे चूमना शुरू किया और एक हाथ से उसकी पैंट की जिप खोलने लगी। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था।
मैंने कहा, “तेरा लंड तो पूरी तरह खड़ा हो चुका है।” वो बोला, “क्या मैं इसे मुँह में ले लूँ?” मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, ले लो।” जैसे ही मैंने मुँह खोला, तभी मम्मी की आवाज आई। मैं डर गई और जल्दी-जल्दी कपड़े पहनने लगी। शुभांकर अभी भी वैसे ही खड़ा था। मैंने कहा, “शुभांकर, जल्दी जिप बंद कर, मम्मी आ रही हैं।”
उसने जिप बंद की और मम्मी के साथ नीचे चला गया। मैं जल्दबाजी में अपनी ब्रा के हुक लगाना भूल गई थी। मैं वैसे ही नीचे चली गई। मम्मी खाना किचन से ला रही थीं। उन्होंने मुझे मदद के लिए बुलाया। मैं उनकी मदद करने लगी। हम सब खाना खाने बैठ गए। खाना खत्म होने के बाद मैं बर्तन किचन में रखने लगी।
शुभांकर ऊपर अपने कमरे में चला गया। तभी मम्मी ने मुझे बुलाया और गुस्से में बोलीं, “ये सब क्या चल रहा है, सुहाना?” ये कहकर उन्होंने मेरे मुँह पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। मैं रोते हुए बोली, “क्या हुआ मम्मी?” उन्होंने फिर गुस्से में कहा, “तू अब छोटी बच्ची है जो मुझे बार-बार तुझे बोलना पड़ रहा है?” “Hot Bhai Bahan Chudai”
उन्होंने एक और थप्पड़ मारा। मैं रोते हुए बोली, “मम्मी, क्या हुआ? मेरी क्या गलती है?” मम्मी बोलीं, “कभी तू बिना ब्रा के होती है, कभी ब्रा पहनकर उसके हुक भी नहीं लगाती। तेरे छोटे भाई पर इसका क्या असर होगा, तूने कभी सोचा?” मैंने कहा, “मम्मी, वो खुल गए होंगे। मैं अभी लगा देती हूँ।”
मम्मी बोलीं, “रुक, मैं लगा देती हूँ।” उन्होंने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डालकर मेरे ब्रा के हुक लगाए। फिर मुझे घुमाकर एक और थप्पड़ मारा और बोलीं, “अगर मैंने तुझे आगे से ऐसा देखा, तो तेरी जान ले लूँगी।” ये कहकर मम्मी गुस्से में अपने कमरे में चली गईं।
मैं रोते हुए अपने कमरे में गई और दरवाजा लॉक कर लिया। शुभांकर वहाँ था। उसने पूछा, “दीदी, आप क्यों रो रही हो?” मैंने मौके का फायदा उठाने की सोची और बोली, “मम्मी ने मुझे तीन बार मारा।” मैं जोर-जोर से रोने लगी। शुभांकर ने पूछा, “मम्मी ने आपको मारा, लेकिन क्यों?”
मैंने कहा, “ये सब तेरी वजह से हुआ। अगर मैं तुझे दूध पीने नहीं देती, तो मुझे मार नहीं पड़ती।” वो बोला, “लेकिन मम्मी ने आपको मारा क्यों?” मैंने कहा, “जल्दबाजी में मैं ब्रा के हुक लगाना भूल गई थी। मम्मी ने ये देख लिया और मुझे मार दिया। देख, मेरे गाल कैसे लाल हो गए।”
उसने मेरे गाल पर हाथ फेरा और बोला, “दीदी, सॉरी। मेरी वजह से आपको मार पड़ी। मैं बहुत सॉरी हूँ।” मैंने गुस्से में कहा, “अब सॉरी बोलने से क्या होगा? मार तो मुझे ही खानी पड़ी।” वो फिर बोला, “सॉरी दीदी।” वो मुझे चूमने लगा। मैंने कहा, “छोड़ मुझे, मेरा मूड बहुत खराब है। तू सो जा।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
वो मेरे पास आया और बोला, “तो आपको खुश करने के लिए मुझे क्या करना होगा?” मैंने कहा, “तू मुझे अकेला छोड़ दे।” लेकिन वो मुझे मनाने की कोशिश करने लगा। शुभांकर ने अपने कपड़े उतार दिए और मेरे मुँह के सामने अपना लंड लेकर खड़ा हो गया। मैंने उसे शरारती स्माइल दी और कहा, “किसी को मनाना तो कोई तुझसे सीखे। जा, पहले देखकर आ, कहीं दरवाजा खुला तो नहीं है।” वो भागकर गया, दरवाजा चेक किया और लौटकर बोला, “दीदी, दरवाजा लॉक है।”
वो फिर मेरे मुँह के सामने अपना लंड लेकर खड़ा हो गया। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी। उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा हो गया था, करीब 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा। मैंने कहा, “देख, मेरे गाल कितने लाल हो गए हैं।” वो बोला, “सॉरी दीदी, आप मेरा जूस पी लो, सब ठीक हो जाएगा।”
मैंने उसका लंड अपने मुँह में लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। मेरी जीभ उसके लंड के टॉप पर गोल-गोल घूम रही थी। “आह्ह…” उसके मुँह से सिसकारी निकली। करीब 10 मिनट बाद वो झड़ गया। उसका गर्म, गाढ़ा माल मेरे मुँह में भर गया। मैंने सारा माल पी लिया और उसके लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया। उसका माल आम के रस जैसा स्वादिष्ट था।
मैंने पूछा, “तुझे एक मूवी दिखाऊँ?” वो उत्साह से बोला, “हाँ दीदी!” मैंने अपने मोबाइल में एक पोर्न वीडियो प्ले कर दी। उसमें एक लड़का और लड़की सेक्स कर रहे थे। लड़के ने अपना लंड लड़की की चूत में डालकर अंदर-बाहर कर रहा था। शुभांकर ने हैरानी से पूछा, “दीदी, ये क्या कर रहे हैं?” मैंने हँसते हुए कहा, “ये लोग सेक्स कर रहे हैं।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो बोला, “सेक्स क्या होता है?” मैंने समझाया, “सेक्स उसे कहते हैं जब एक लड़का अपनी लंड को लड़की की चूत में डालता है। बस, इसे ही सेक्स कहते हैं।” वो बोला, “लेकिन वो ऐसा क्यों कर रहे हैं?” मैंने कहा, “ऐसा करने से लड़की को मजा आता है।” वो हैरान होकर बोला, “क्या दीदी?” मैंने कहा, “हाँ।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
उसने मासूमियत से पूछा, “क्या मैं आपके साथ भी सेक्स कर सकता हूँ?” मैंने शरारत से कहा, “हाँ, क्यों नहीं।” वो बोला, “दीदी, मुझे भी ऐसा करना है, अगर आपको ठीक लगे तो।” मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन याद रख, किसी को बताना नहीं।” वो बोला, “दीदी, मैं किसी को नहीं बताऊँगा। आप टेंशन मत लो।”
मैंने कहा, “तो फिर ठीक है, तू मेरे साथ सेक्स कर सकता है।” वो बोला, “दीदी, पहले मुझे क्या करना होगा?” मैंने उसे 69 की पोजीशन में मेरे ऊपर लेटने को कहा। वो मेरे ऊपर लेट गया। मैंने कहा, “शुभांकर, अब तू मेरी चूत चाट, और मैं तेरा लंड चाटती हूँ।”
वो मेरी चूत चाटने लगा, और मैं उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर में वो गर्म हो गया, और उसका लंड एकदम सख्त हो गया। मैंने कहा, “शुभांकर, तू मेरी टाँगों के बीच बैठ जा, और जैसा मैं कहती हूँ, वैसा कर।” वो बोला, “ठीक है दीदी।”
वो मेरी टाँगों के बीच बैठ गया। मैंने कहा, “अब धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल और अंदर-बाहर कर। लेकिन ध्यान रख, पूरा बाहर मत निकालना। जैसा तूने वीडियो में देखा, वैसा ही कर।” उसने कहा, “ठीक है दीदी।”
उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला और अंदर धकेलने लगा। मैंने पहले कई बार अपनी चूत में गाजर, ककड़ी, मूली डाली थी, इसलिए मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। लेकिन मजा बहुत आ रहा था। मैंने कहा, “शुभांकर, अब थोड़ा और तेज कर।”
वो थोड़ा तेज हो गया और मुझे चोदने लगा। मैं सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… शुभांकर… और तेज…” मैंने कहा, “अब तू एकदम तेज अंदर-बाहर कर अपने लंड को मेरी चूत में।” वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। वो ऐसे ही 5 मिनट तक करता रहा। मैंने उसे रुकने को कहा। “Hot Bhai Bahan Chudai”
मैं डॉगी स्टाइल में आ गई और बोली, “अब तू मेरी चूत में एक ही झटके में अपना लंड घुसा दे।” उसने वैसा ही किया। उसने एक जोरदार धक्का मारा, और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया। मेरे मुँह से “आह्ह…” निकल गया। मैंने कहा, “शुभांकर, अब जोर-जोर से कर।”
मैं सिसकारने लगी, “आह्ह… उह्ह… अब रुक मत, और जोर से चोद मुझे। शुभांकर, आज मेरी चूत को चोद-चोदकर फाड़ दे।” उसका लंड किसी ड्रिल मशीन की तरह मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। तभी मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने कहा, “शुभांकर, मेरा जूस निकलने वाला है।”
वो बोला, “दीदी, मेरा भी निकलने वाला है।” मैंने कहा, “अपना सारा जूस मेरी चूत में ही निकाल दे। मेरी चूत को अपने माल से भर दे।” वो और जोर से धक्के मारने लगा और झड़ गया। वो बुरी तरह थक गया और मेरे ऊपर ही गिर पड़ा। कुछ देर बाद उसका लंड सिकुड़कर मेरी चूत से बाहर निकल गया।
मेरी चूत से उसका माल बाहर बहने लगा। मैंने उसे अपने हाथ में लिया और सारा पी गई। मैंने कहा, “शुभांकर, नीचे हो जा।” वो नीचे लेट गया, लेकिन उसकी आँखें अभी भी बंद थीं। मैंने उसके होंठों पर चूमना शुरू किया। वो थकान के मारे सो गया। मैं भी उसके बगल में सो गई।
सुबह जब मैं उठी, मैं एकदम फ्रेश फील कर रही थी। मैंने शुभांकर को जगाया और कहा, “चल शुभांकर, अब नहाते हैं।” हम दोनों बाथरूम में गए। मैंने उसे नहलाना शुरू किया। मैंने पूछा, “रात को मजा आया था?” वो बोला, “हाँ दीदी, बहुत मजा आया।”
मैंने शरारत से कहा, “तुझे इससे भी ज्यादा मजा आएगा, अगर तू अपना लंड मेरी गांड में डाले।” वो उत्साह से बोला, “क्या दीदी, सच में? मुझे और ज्यादा मजा चाहिए। क्या मैं आपकी गांड मार सकता हूँ?” मैंने हँसते हुए कहा, “ये सब तेरा ही तो है। तू जब चाहे, जो मर्जी कर सकता है।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
वो बोला, “दीदी, क्या मैं अभी आपके साथ कर सकता हूँ?” मैंने अपनी गांड खोलकर उसके सामने झुक गई और कहा, “लंड पर थोड़ा साबुन लगा ले, और फिर मेरी गांड में डाल दे।” उसने वैसा ही किया। उसने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड में डाला। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैंने कहा, “शुभांकर, आराम से कर, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।”
वो धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। जब मुझे मजा आने लगा, मैंने कहा, “शुभांकर, अब थोड़ा जोर लगा।” उसने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरे मुँह से “आह्ह… उह्ह…” की आवाजें निकलने लगीं। वो बिंदास होकर जोर-जोर से मेरी गांड मार रहा था, और मैं जन्नत के मजे ले रही थी।
वो बोला, “दीदी, मेरा निकलने वाला है। कहाँ निकालूँ?” मैंने कहा, “मेरे मुँह में निकाल।” उसने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने उसका सारा माल पी लिया और उसके लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
अब ये सब हमारा रोज का काम हो गया था। वो मुझे दिन में दो बार चोदता था। लेकिन इसी बीच मेरी शादी हो गई, और मैं अपने ससुराल चली गई। पहले महीने तो मेरे पति ने मुझे जमकर चोदा, लेकिन एक महीने बाद वो हफ्ते में बस 2-3 बार ही मुझे चोदते थे। उनका लंड सिर्फ 4 इंच का था, और वो बहुत जल्दी झड़ जाते थे। इसलिए मैं अपनी चूत को पोर्न वीडियो देखकर ही शांत करती थी।
ससुराल में एक साल से ज्यादा हो गया था। मुझे अपने भाई का लंड बहुत याद आता था। मैंने अपनी सास से कहा, “अम्मी, क्या मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर जा सकती हूँ?” सास बोलीं, “क्यों बहू, हमारे प्यार में कोई कमी रह गई थी जो तुझे मायके की याद आ रही है?” मैंने कहा, “नहीं अम्मी, ऐसी बात नहीं है।
दरअसल, मुझे मम्मी, शुभांकर और अब्बू की बहुत याद आ रही है। मैं एक महीने के लिए अपने घर जाना चाहती हूँ। प्लीज, मुझे जाने दो।” कुछ देर सोचने के बाद सास मान गईं और बोलीं, “ठीक है बेटी, जा। लेकिन याद रख, सिर्फ एक महीने के लिए।” मैं बहुत खुश हो गई और उन्हें गले लगाकर बोली, “आई लव यू, अम्मी।” उन्होंने हँसते हुए कहा, “देखो तो, मायके के नाम से ये लड़की कितनी खुश हो रही है। मैं तेरे पति से कहकर कल की तेरी टिकट करवा देती हूँ।”
शाम को मेरे पति मेरे मायके जाने की टिकट लेकर आए। मैं पूरी रात सो नहीं पाई, ये सोचकर कि कल मैं अपने भाई से फिर चुदवाऊँगी। मैं रात भर शुभांकर के बारे में सोचती रही। सुबह होने वाली थी, तो मैं उठकर नहा ली और अपना बैग तैयार करने लगी। सास ने कहा, “तुझे तो दोपहर में जाना है, और तू अभी से तैयार होने लगी? तू कितनी एक्साइटेड है अपने मायके जाने के लिए। तू अपना काम कर, मैं आज सबके लिए खाना बनाती हूँ।” “Hot Bhai Bahan Chudai”
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : भाभी की पेंटी चाट कर मुठ मार रहा था
मेरे पति उठे और खाना खाने बैठ गए। उन्होंने मुझे खाने के लिए कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया, “जी, मुझे भूख नहीं है।” पति बोले, “देखो अम्मी, ये अपनी मम्मी के घर जाने के लिए कितनी बेचैन हो रही है। मैंने खाना खाने को कहा, तो मना कर रही है।” सास बोलीं, “बेटा, थोड़ा तो खा ले।” मैंने कहा, “आज मन नहीं है खाना खाने का।”
सास ने मुझे जबरदस्ती खाना खिलाया। मैंने थोड़ा-सा खाया और पति से बोली, “चलो, अब जल्दी करो, वरना मेरी बस निकल जाएगी।” पति बोले, “थोड़ा सब्र तो रखो, मुझे खाना तो खाने दे। अभी 11 बजे हैं, और तेरी बस 1 बजे है। बस स्टैंड जाने में सिर्फ 10 मिनट लगते हैं।” मैंने कहा, “जल्दी-जल्दी खाओ ना।”
सास हँसते हुए बोलीं, “बेटा, इसे पहले छोड़कर आ, फिर खाना खा लेना। वरना ये तुझे खाना भी नहीं खाने देगी।” पति बोले, “अम्मी, आपने ही इसे सिर पर चढ़ा रखा है, इसलिए इतना नाटक कर रही है।” सास ने डाँटते हुए कहा, “कुछ मत बोल मेरी बेटी को। वो पहली बार अपने मायके जा रही है। हँसी-खुशी छोड़कर आ जा।”
पति उठे और बोले, “सुहाना मेम, चलो अपने मायके।” मैं भागकर बैग लाई और फटाक से कार में बैठ गई। पति बोले, “अगर तू इतनी हड़बड़ी करेगी, तो मैं तुझे जाने नहीं दूँगा।” मैंने कहा, “सॉरी-सॉरी, प्लीज अब चलो ना। आप टाइम पास करने लग गए हो।” वो मेरी बात नहीं मान रहे थे, बस मुझे सता रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “प्लीज जी, अब चलो, वरना बस निकल जाएगी।” वो बोले, “निकल जाने दे, तब तो और अच्छा होगा।” ये सुनकर मैं रोने लगी। पति बोले, “क्या हुआ, क्यों रो रही है सुहाना?” वो हँसने लगे और बोले, “पागल, रो मत। मैं मजाक कर रहा था। चल, अपने आँसू पोंछ ले, वरना मैं ड्राइव नहीं करूँगा।”
मैंने आँसू पोंछे और खुश होकर बैठ गई। पति ने स्माइल दी और बोले, “सुहाना, तू रोते हुए बहुत अच्छी लगती है। प्लीज एक बार और रो ना।” मैं बस में बैठ गई और अपने घर की ओर निकल पड़ी। रात 10 बजे मैं घर पहुँची। मम्मी ने दरवाजा खोला और बोलीं, “आजा मेरी बच्ची, बहुत दिनों बाद घर आई है।”
हम हॉल में बैठकर बातें करने लगे। आधे घंटे बाद मैंने पूछा, “मम्मी, शुभांकर कहाँ है? वो दिख नहीं रहा।” मम्मी बोलीं, “बेटा, वो पिकनिक पर गया है। 2 दिन बाद आएगा।” ये सुनकर मेरा मूड खराब हो गया। हमने खाना खाया, और मैं अपने कमरे में चली गई। मैं सोने की कोशिश करने लगी, लेकिन नींद नहीं आई। “Hot Bhai Bahan Chudai”
रात के 1 बजे मैं किचन में गई और दो केले ले आई। मैंने सारे कपड़े उतारे, एक केले पर तेल लगाया और अपनी चूत में डाल लिया। दूसरा केला मैंने अपनी गांड में डाला और सो गई। सुबह उठी तो दोनों केले बाहर निकल चुके थे। मैं नहाने चली गई।
वो दिन मैंने बहुत मुश्किल से गुजारा। आज शुभांकर आने वाला था, तो मैं बहुत खुश थी। वो दोपहर 12 बजे तक आने वाला था। मैंने आज खूब सज-संवरकर उसका इंतजार किया, जैसे आज मेरी सुहागरात हो। जैसे ही डोरबेल बजी, मैं भागकर दरवाजा खोला। शुभांकर था। मैंने उसे जोर से गले लगाया। मम्मी बोलीं, “देखो तो, इन भाई-बहन में कितना प्यार है।”
मैंने कहा, “मम्मी, हम दोनों कमरे में हैं। कुछ बातें कर रहे हैं।” मम्मी बोलीं, “खाना तो खा लो।” शुभांकर बोला, “मम्मी, मैंने बाहर खा लिया था।” मैंने कहा, “और मम्मी, मैं बाद में खा लूँगी।” मैंने शुभांकर का हाथ पकड़ा और उसे कमरे में ले गई। मैंने दरवाजा लॉक किया और कहा, “चल, अब और मत तड़पा अपनी दीदी को। जल्दी से मुझे अपना जूस पिला दे।”
वो बोला, “दीदी, मैं फ्रेश होकर आता हूँ।” मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर चूमते हुए कहा, “बाद में फ्रेश होना, पहले मुझे अपना जूस पिला।” मैंने उसकी शर्ट के बटन खोले और उसकी पैंट उतार दी। मैं पागलों की तरह उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
वो बोला, “दीदी, आराम से, आपके दाँत चुभ रहे हैं। प्लीज धीरे करो।” लेकिन मैं कहाँ मानने वाली थी? मैं उसी तरह चूसती रही। 10 मिनट बाद उसने मेरा सिर कसकर पकड़ा, और उसके लंड से माल की पिचकारी मेरे मुँह में मारी। मैंने सारा माल गटक लिया और उसके लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया। मैंने कहा, “अब जाकर मेरी दीदी का गला गीला हुआ।” फिर मैं उसे पागलों की तरह चूमने लगी। वो बोला, “थोड़ा आराम से दीदी, मैं कहीं जाने वाला नहीं हूँ। प्लीज थोड़ा धीरे करो।”