Horny Sisters Group Sex
मेरा नाम दीक्षा है, उम्र अभी-अभी 23 की हुई है, वजन 58 किलो, फिगर 32-28-34। मेरी चूचियाँ इतनी टाइट और गोल कि ब्रा में भी उभरी-उभरी दिखती हैं, कमर इतनी पतली कि हाथ में आ जाए और गांड इतनी भारी-उभरी कि चलते वक्त लहराती है, देखने वाले का लंड तुरंत सलामी देने लगता है। Horny Sisters Group Sex
मेरी बड़ी बहन अनामिका भी बिल्कुल मेरी कार्बन कॉपी है, हम दोनों के कपड़े तक एक जैसे पहनते हैं, कभी-कभी लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि कौन दीक्षा है कौन अनामिका। हमारे परिवार में मम्मी-पापा, छोटा भाई और हम दोनों बहनें हैं। एक दिन मम्मी-पापा और भाई दो दिन के लिए बाहर गए थे।
मैं कॉलेज जाने को तैयार होकर निकली, लेकिन कॉलेज पहुँचते ही पता चला कि आज छुट्टी है। मन खुश हो गया, सोचा घर लौटकर अनामिका के साथ बिस्तर पर लेटकर टीवी देखेंगे, पॉपकॉर्न खाएंगे, मस्ती करेंगे। लेकिन घर पहुँचकर जो नजारा देखा, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और चूत में आग सुलग गई।
घर में घुसते ही मुझे किसी मर्द की भारी-भारी सांसें और हल्की गुर्राहट सुनाई दी, वो आवाज अनामिका के कमरे से आ रही थी। मैं चुपके से दरवाजे के पास गई, दरवाजा हल्का सा खुला था, झांककर देखा तो मेरी सांस रुक गई। हमारी गली का दर्जी सूर्या अंकल, करीब 35-36 साल का अधेड़, गठीले बदन वाला, बेड पर बैठा था और अनामिका सिर्फ गुलाबी ब्रा-पैंटी में उसके सामने घुटनों पर बैठी थी।
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अनामिका का गोरा-गोरा बदन पसीने से चमक रहा था, ब्रा में उसकी चूचियाँ उफन रही थीं। सूर्या अंकल ने अपना पैंट का चेन खोला और मोटा, काला, नसों वाला लंड बाहर निकाल कर अनामिका के मुँह के सामने लटका दिया। लंड से हल्की-हल्की मर्दाना गंध आ रही थी, पसीने और मूत की मिली-जुली खुशबू।
अनामिका ने बिना कुछ बोले जीभ बाहर निकाली और लंड की टिप को धीरे-धीरे चाटना शुरू कर दिया, जैसे कोई बच्ची आइसक्रीम चाट रही हो। पहले सिर्फ सुपारा, फिर नसों पर जीभ फेरते हुए, ग्ग्ग्ग्ग… गीगीगी… गोंगों… फिर अचानक पूरा लंड मुँह में ले लिया और गले तक उतारने लगी।
उसके गाल अंदर धंस रहे थे, लार टपक रही थी, ग्ग्ग्ग्ग… गोंगों… गीगीगी… चूसने की गीली-गीली आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मैं छुपकर देखती रही। मेरी सांसें तेज हो गईं, दिल धक-धक कर रहा था, चूत में अचानक गर्मी सी फैल गई। सोच रही थी, “ये अनामिका कब से इतनी बेशर्म हो गई? लेकिन भगवान… ये देखकर मेरी पैंटी क्यों भीग रही है?”
मेरी जांघें आपस में रगड़ने लगीं, निप्पल्स कड़े होकर ब्रा में चुभने लगे। मैं इतनी खोई हुई थी कि पता ही नहीं चला मेरे पीछे कोई खड़ा है। अचानक दो मजबूत, रूखे हाथ मेरे बूब्स पर आ गए और जोर से मसलने लगे। मैं हड़बड़ाई नहीं, क्योंकि हवस मेरे दिमाग पर छा चुकी थी।
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पीछे मुड़ी तो दीपक अंकल थे, सूर्या अंकल के साथी दर्जी, और भी गठीले, काले, दाढ़ी वाले। उनकी आँखें लाल थीं, सांसें गरम। उन्होंने मेरे होंठ अपने मुँह में ले लिए और जीभ अंदर डाल दी। मैंने भी उनका साथ देना शुरू कर दिया, हमारी जीभें आपस में लड़ रही थीं, लार मिल रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीपक अंकल ने मुझे गोद में उठाया और सीधे अनामिका वाले कमरे में ले गए। मुझे बेड पर लिटा दिया, बेड हिल गया। अनामिका और सूर्या अंकल एक पल को रुक गए। दीपक अंकल हंसते हुए बोले, “अरे सूर्या, छोटी वाली भी आ गई… आज से ये रंडी भी हमारे लंड की गुलाम बनेगी, देखना कितनी जोर से चिल्लाएगी!”
उधर सूर्या अंकल ने अनामिका को घोड़ी बना रखा था, उसकी चूत में अपना मोटा लंड पेल-पेल कर ठुकाई कर रहे थे। पछपछ… पछपछ… पछाााक… की जोरदार आवाजें आ रही थीं। अनामिका चिल्ला रही थी, “आह्ह्ह… सूर्या अंकल… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… ओह्ह्ह्ह… ह्ह्हीईई!”
दीपक अंकल ने मेरे सारे कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। पहले टॉप, फिर स्कर्ट, फिर ब्रा-पैंटी। कुछ ही सेकंड में मैं बिल्कुल नंगी थी। दीपक अंकल ने अपनी दर्जी वाली कैंची निकाली और मेरी लाल ब्रा के स्ट्रैप काट दिए, “अब तेरी सिलाई खोलता हूँ साली,” वो हंसते हुए बोले।
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फिर अपना लंड बाहर निकाला, मोटा, काला, सुपारा चमक रहा था। मेरे मुँह के सामने लटका दिया। मैं समझ गई। मैंने लंड पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया, ग्ग्ग्ग्ग… गोंगों… गीगीगी… पूरा गले तक ले लिया। दीपक अंकल मेरे बाल पकड़कर मुँह चोदने लगे, “हाँ साली… ऐसे ही… पूरा निगल ले!”
फिर दीपक अंकल नीचे आए, मेरी टांगें फैलाईं और चूत चाटने लगे। जीभ अंदर तक डालकर चूस रहे थे, क्लिट पर दाँतों से हल्का काटा, मैं तड़प उठी, “आह्ह्ह्ह… दीपक अंकल… ओह्ह्ह्ह… मर गयीीी… ऊईईई माँ!” मेरी चूत ने झटके मारकर पानी छोड़ दिया, मैं काँप गई, शरीर ढीला पड़ गया।
दीपक अंकल ने मेरी टांगें कंधों पर रखीं, लंड पर खूब सारा थूक लगाया और मेरी चूत के होंठों पर रगड़ने लगे। “देख दीक्षा, तेरी चूत कितनी भूखी है,” वो हाँफते हुए बोले। फिर एक जोरदार झटका, आधा लंड अंदर घुस गया। मैं चीख पड़ी, “आअह्ह्ह्ह… माँ… फट गयीीी!” आँसू आ गए। “Horny Sisters Group Sex”
तभी सूर्या अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया ताकि मैं शोर न मचा सकूँ, अनामिका मेरे बूब्स मसल रही थी। दीपक अंकल ने दूसरा झटका मारा और पूरा लंड अंदर। मुझे लगा कोई गर्म-गर्म लोहा चूत में घुस गया हो, लेकिन धीरे-धीरे दर्द मजा बनने लगा। मैं गांड उचकाकर साथ देने लगी, “हाँ अंकल… और जोर से… आह्ह्ह… ह्ह्हीईई… भर दो मुझे!”
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सूर्या अंकल का लंड फिर खड़ा हो गया। उन्होंने अनामिका को फिर घोड़ी बनाया और चोदना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद दोनों ने अदला-बदली कर ली। अब सूर्या अंकल मेरी चूत में लंड पेल रहे थे, उनकी स्पीड इतनी तेज थी कि बेड हिल रहा था, पछपछपछ… पछाााक… “ले साली… ले रंडी… तेरी चूत तो दूध की तरह चूस रही है मेरा लंड!”
फिर दीपक अंकल वापस मेरे पास आए, मुझे नीचे लिटाया, ऊपर चढ़कर मिशनरी में लंड पेला और मेरे होंठ चूसते हुए जोर-जोर से ठुकाई करने लगे। कुछ ही मिनट में उनकी गांड अकड़ गई और सारा गर्म-गर्म माल मेरी चूत में छोड़ दिया। उधर सूर्या अंकल भी झड़ने वाले थे, वो मेरे पास आए और सारा वीर्य मेरे बूब्स पर उड़ेल दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अनामिका झुककर मेरे बूब्स से माल चाटने लगी और फिर मेरे होंठों पर किस कर दिया, हमारी जीभें आपस में लड़ रही थीं, दोनों के मुँह में वीर्य का स्वाद था। दीपक अंकल हाँफते हुए बोले, “यार सूर्या, इन बहनों की चूत है ही इतनी रसीली… साली जैसे लंड को निचोड़ रही हों… जितना चोदो मन नहीं भरता!”
हम चारों ठहाके मारकर हंस पड़े, लेकिन मेरी चूत अभी भी फड़क रही थी। उसके बाद दो दिन तक लगातार चुदाई चली। रात को भी दोनों अंकल आ गए। कभी मैं घोड़ी बनती, कभी अनामिका, कभी हम दोनों एक साथ लंड चूसतीं, कभी एक की चूत में लंड और दूसरे का मुँह में।
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कमरे में सिर्फ पछपछ… आह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह… ऊई माँ… ह्ह्हीईई… और वीर्य-पसीने की मिली-जुली खुशबू रहती। दो दिन बाद जब मम्मी-पापा लौटे तो हमारी चूत अभी भी लंड की याद में फड़क रही थी। अब जब भी मौका मिलता है, हम दोनों चुपके से सूर्या और दीपक अंकल के पास चली जाती हैं और खूब चुदाई करवाती हैं।
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