Horny Delhi Aunty Chudai
नमस्कार दोस्तो, भाभी और आंटियों को भी। मेरा नाम राहुल है मैं इंदौर मध्य प्रदेश से हु। मैं जॉब करता हु। मेरा लन्ड का साइज 7.4 इंच का है जो औरत को एक दम तृप्त कर देता है। आपने मेरी पिछली कहानियां बहुत पढ़ी थी और मैसेज भी करा था। आज आप लोगो के लिए लेके आया हु एक और नई कहानी जिसमे आप पढ़ेंगे कैसे एक भाई ने मुझसे अपनी मम्मी को मिलवाया और चुदवाया। Horny Delhi Aunty Chudai
मेरी कहानी crazysexstory.com में आने के बाद बहोत लोगो ने मुझसे फोटो मांगी, डिटेल्स मांगा, फेक आईडी से मैसेज करा तो कोई मुझसे टिप पूछने आया मगर मैं आप सभी को ये बता देता हु मै किसीकी डिटेल्स कभी नही बताता और ना अपनी खुद की ट्रिक बताता हु। खुद को करना है तो अपने दम पर करो मैं किसी की कोई मदद नहीं कर सकता और ना मांगने आना।
चलिए अब बोर ना करते हुए कहानी में आता हु। बात ऐसी है की एक दिन अंशुल नाम के भाई ने मुझे मेल करा और मेरे बारे में पूछने लगा कहा रहता हु, क्या करता हु, मेरा लन्ड कितना बड़ा है। मैने उसको जानकारी सारी दे दी मगर साथ में ये भी कहा की मैं सिर्फ फीमेल को सर्विस देता हु।
तब उसने बताया कि उसके पापा की डेथ 7 साल पहले हो चुकी है। तो मैने उससे पूछा की इसमें मैं क्या मदद कर सकता हु तब कहने लगा मैं अपनी मां को चुदवाना चाहता हु ताकि वो खुश रहे। मैने उसकी मम्मी की फोटो और डिटेल्स मांगी तो उसने तुरंत भेज दी। जिनका नाम रीना है, 40 साल की हैं।
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रीना के बारे में क्या बताऊँ? उनका फिगर 36-30-34 का है, और वो इतनी हॉट हैं कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। उनकी आँखों में एक अलग सी चटक मस्ती है, होंठ गुलाबी, और जब वो चलती हैं तो उनकी गोल-मटोल गांड का उछाल देखकर कोई भी पागल हो जाए।
रीना की स्किन गोरी है, और उनके लंबे काले बाल उनकी कमर तक लहराते हैं। उनकी मुस्कान में एक शरारत भरी मासूमियत है, लेकिन उनकी जिस्मानी प्यास उनके चेहरे पर साफ दिखती थी। मैने कहा मुझे कहा आना है तो उसने मुझे दिल्ली बुलाया। मैं चला गया वो मुझे स्टेशन में लेने भी आया।
अंशुल बहुत फ्रेंडली नेचर का था इस वजह से हम दोनो मिलते ही घुल मिल गए। वो मुझे अपने घर लेके गया दोस्त बना के और ये बहाना दिया था की मै यहां घूमने आया हु। जैसे ही हम उसके घर पहुंचे उसकी मां ने गेट खोला। मैं सामने से देखता ही रह गया क्या तो माल लग रही थी।
एक तो उसने काली साड़ी पहनी थी और ऊपर से बैकलेस ब्लाउज। ऐसा लग रहा था अभी पटक के चोद दू। अपने मन को जैसे तैसे मना के अंदर आया उसकी मम्मी से नमस्ते वागेरा कह के रूम में गया तो अंशुल पूछने लगा कैसी लगी तो मैने बताया कि मजा आ जायेगा चोदने में।
अंशुल ने पूछा की क्या प्लान है तो मैने उसे कहा वो दारू पीती है क्या तो कहने लगा हा पीती है बताओ कब पिलाना है मैने कहा शाम को करते है। उसने हामी भरी और कहने लगा मैं आता हु कुछ सामान लेकर। मैं बाथरूम गया और नहाके बाहर टॉवेल में आया तो उसकी मम्मी ने मुझे देख लिया था।
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मैं रूम में जाके कपड़े पहने और मोबाइल चलाने लगा। मगर मैने एक चीज नोटिस किया की उसकी मम्मी खुद घूर घूर के देख रही है। अंशुल शाम के लिए दारू की बॉटल, स्नैक्स वगैरा ले आया। जैसे शाम के 7 बजा तो अंशुल ने मुझे बुलाया तब तक सब रेडी हो चुका था। तीनों बैठ के दारू पीने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
3 पेग पीने के बाद अंशुल ने बता दिया की उसकी और उसके मम्मी की पहले से बात हो चुकी है सेक्स के बारे में। उसकी मम्मी उठ के मेरे पास आके बैठ गई और अंशुल को कहने लगी तू अब चले जा मैं सब देख लूंगी। अंशुल मुझे बोलता है की वो आज रात अपने दोस्त के घर में रहेगा ताकि मैं और उसकी मां फुल एंजॉय कर पाए।
मैने ओके कहा और फिर वो चला गया। उसकी मम्मी ने गेट लॉक कर के मेरे पास आके बैठी और कहती है मुझे वो मजा दो जो मैं चाहती हु। वो धीरे-धीरे मेरे पास आईं और घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने अपने हाथों से मेरा लंड पकड़ा। जैसे ही उन्होंने उसे मुँह के पास लाया, वो हिचकने लगीं।
मैंने उनके बाल पकड़े और उनका मुँह अपने लंड पर दबा दिया। मेरा 7.4 इंच का लंड उनके चेहरे पर चिपक गया। आंटी ने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की, लेकिन मैंने और जोर से दबाया। आखिरकार, उन्होंने मेरा लंड मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगीं।
मैं एक हाथ से दारू पी रहा था और दूसरे हाथ से उनके सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबा रहा था। आंटी के होंठ मेरे लंड पर फिसल रहे थे, और उनका थूक मेरे लंड को गीला कर रहा था। “आह्ह… आंटी, कितना मजा आ रहा है,” मैंने कहा। दारू खत्म होने के बाद मैंने उनके सिर को दोनों हाथों से पकड़ा और उनके मुँह में अपना लंड जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।
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आंटी “उम्म… उम्फ…” की आवाजें निकाल रही थीं। वो खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन मैंने उन्हें छोड़ा नहीं। आखिरकार, उन्होंने मुझे धक्का देकर पीछे हटाया। उनके मुँह से ढेर सारा थूक निकला, जो मेरे लंड पर लगा था। मैं हँसने लगा। आंटी मुझे देखकर और डर गईं।
मैं उनके पास गया, लेकिन वो पीछे हटने लगीं। मैंने उन्हें पकड़ा और कहा, “आंटी, अभी तो शुरुआत है। असली मजा तो अब आएगा।” मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। आंटी ने रोकने की कोशिश की, लेकिन मैंने एक झटके में उनका ब्लाउज फाड़ दिया।
मेरी आँखें फटी रह गईं- आंटी ने ब्रा नहीं पहनी थी। उनकी गोरी, भरी-भरकम चुचियाँ और उनके भूरे निप्पल देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उनकी एक चूची को मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। “आह्ह… राहुल, प्लीज… रुको,” आंटी कराह रही थीं, लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने उनकी दूसरी चूची को हाथ से मसला, और उनके निप्पल को उंगलियों से कसकर दबाया। आंटी की सिसकारियाँ तेज हो गईं, “उह्ह… आह्ह…” मैंने उनकी साड़ी को ऊपर उठाया और उनकी मोटी, गोल गांड को देखा। मैंने उसे जोर से दबाया और मसला। आंटी की गांड इतनी मुलायम थी कि मेरा लंड और बेकाबू हो गया।
मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह उतार दी और उन्हें नंगा कर दिया। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, और वो पहले से ही गीली थी। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ा। आंटी सिहर उठीं, “आह आहा आह राहुल…” लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी की और अपना लंड उनकी चूत में धीरे-धीरे घुसा दिया।
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उनकी चूत इतनी टाइट थी कि मुझे लगा जैसे मेरा लंड किसी गर्म भट्टी में घुस गया हो। “आह्ह… उह्ह…” आंटी कराह रही थीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। कुछ देर बाद मैंने आंटी को सोफे पर झुकाया और उन्हें कुतिया की तरह बना दिया। उनकी चूत और गांड मेरे सामने थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाला और तेज-तेज धक्के मारने लगा। “थप… थप… थप…” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। आंटी की सिसकारियाँ भी तेज हो गई थीं, “आह्ह… उह्ह… राहुल, धीरे…” मैंने उनकी गांड पर एक जोरदार चपत मारी और कहा, “रंडी, चुपचाप ले!” मैं कभी उनकी चूत में लंड डालता, तो कभी उनकी गांड में। “Horny Delhi Aunty Chudai”
आंटी की चूत से पानी टपक रहा था, जो मेरे लंड को और चिकना कर रहा था।मैंने उन्हें कुत्ते की तरह चोदा, ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारते हुए। वो चिल्ला रही थी, “आह… राहुल… मेरी चूत फाड़ दे… और ज़ोर से…” मैंने 55 मिनट तक चुदाई की, और फिर उनकी चूत में दूसरी बार झड़ गया।
तीसरी बार मैंने उन्हें गोद में उठाया और दीवार के सहारे चोदना शुरू किया। उनकी टाँगें मेरी कमर के चारों ओर लिपटी थी, और वो मेरे होंठों को चूस रही थी। मैंने उनकी चूत को फिर से ज़ोर-ज़ोर से चोदा, और इस बार हम दोनों एक साथ झड़ गए। वो थककर मेरे कंधे पर सिर रखकर हाँफ रही थी। कमरे में उनकी सिसकियों की गूँज थी, और हम दोनों पसीने से तर थे।
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तीसरा राउंड 1 घंटे के ऊपर चला फिर हम एक साथ झड़ गए। उस रात मैने 5 राउंड चोदा। एक दूसरे को पकड़ के सो गए थे जब सुबह अंशुल घर आया तो देखता है उसकी मां मेरे गले में हाथ डाल के सो रही है। हम उस दिन के बाद भी मिलते रहते है। अगले कहा में बताऊंगा की कैसे मैने आंटी का ग्रुप सेक्स कराया। कैसी लगी मेरी कहानी मुझे मेल कर के बताना जरूर। कोई आंटी भाभी मुझसे मिलना चाहती हो तो मिल सकती है। मेरा मेल आईडी है roleplayexpertincest@gmail.com धन्यवाद.