Gay Sex Hindi Story
मैं 21 साल का था, गांव से नया-नया शहर आया था। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था, बस सीधा-सादा लड़का, जिसका नाम संजय है। मेरी कद-काठी अच्छी थी, चौड़ी छाती, गठीला बदन और 5 फुट 10 इंच की हाइट। चेहरा सांवला, लेकिन आंखों में एक तेज था, जो लोगों को अपनी तरफ खींच लेता था। Gay Sex Hindi Story
गांव में खेतों में मेहनत करने की वजह से मेरी ताकत और स्टैमिना दोनों जबरदस्त थे। शहर में आकर मुझे एक बड़े अपार्टमेंट में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई थी। साथ में कैम्पस में ही एक छोटा सा कमरा भी दे दिया गया था, जिसमें मैं रहता था।
नौकरी शुरू हुए अभी एक महीना ही हुआ था। धीरे-धीरे मैं शहर के माहौल में ढलने लगा था। मेरी ड्यूटी में रात को 11 बजे के बाद पूरे कैम्पस, छत और बेसमेंट का चक्कर लगाना शामिल था, ताकि सबकुछ ठीक हो, ये चेक कर सकूं। मैं रात को अपनी वर्दी में, डंडा लिए, पूरे अपार्टमेंट में गश्त लगाता।
मेरी आवाज में एक रौब था, जो मेरी सख्त शक्ल और गठीले बदन की वजह से और बढ़ जाता था। एक रात, जब मैं बेसमेंट में चक्कर लगा रहा था, तो मुझे एक कोने से कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दीं। जैसे कोई धीरे-धीरे सिसक रहा हो या कोई बात कर रहा हो।
मैंने सोचा, शायद कोई गलत काम हो रहा है। मैं दबे पांव उस तरफ बढ़ा, ताकि कोई मुझे देख न ले। कोने में पहुंचा तो मैंने जो देखा, उससे मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। एक कमसिन सा लड़का, जिसकी उम्र कोई 18-19 साल रही होगी, वहां एक मवाली टाइप के आदमी के साथ था।
वो लड़का, जिसका नाम बाद में मुझे पता चला कि एल्विश है, दिखने में बिल्कुल चिकना था। गोरा-चिट्टा चेहरा, पतली कमर, और मुलायम सी त्वचा, जैसे कोई लड़की हो। उसका कद मुझसे थोड़ा छोटा, शायद 5 फुट 6 इंच, और बाल बेतरतीब से बिखरे हुए। वो मवाली, जिसका नाम मुझे नहीं पता था, एक गंदा सा आदमी था। 30-35 साल का, दाढ़ी बढ़ी हुई, और कपड़े मैले-कुचैले। उसकी आंखों में हवस साफ दिख रही थी।
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वो मवाली लड़के को दीवार से सटाकर उसके गालों और गर्दन पर चूम रहा था। उसका एक हाथ एल्विश की कमर पर था, और दूसरा उसकी गांड को जोर-जोर से दबा रहा था। एल्विश का चेहरा लाल हो रहा था, और वो थोड़ा छटपटा रहा था, जैसे उसे ये सब पसंद भी था और नहीं भी।
मवाली ने अब अपनी हरकतें और बढ़ा दीं। उसने एल्विश को पीछे से जकड़ लिया और अपनी पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को एल्विश की गांड पर रगड़ने लगा। “आह… साले, कितनी मुलायम गांड है तेरी,” वो भद्दी आवाज में बोला, और एल्विश के निप्पल्स को शर्ट के ऊपर से मसलने लगा।
एल्विश के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली, “उह…”, लेकिन वो उस आदमी को अपने होठों को चूसने से रोक रहा था। “चल, भोसड़ी के, मेरा लंड चूस,” मवाली ने गंदी गाली देते हुए अपनी पैंट की जिप खोली और अपना लंड बाहर निकाल लिया। उसका लंड कोई 6 इंच का रहा होगा, मोटा और सख्त, जिसकी नसें फूली हुई थीं।
एल्विश ने डरते हुए कहा, “नहीं… मैंने तुम्हें ये सब करने के लिए नहीं बुलाया था। प्लीज, मुझे जाने दो।” उसकी आवाज में डर था, लेकिन वो चिल्ला नहीं रहा था, शायद डर की वजह से या शर्मिंदगी की वजह से। मवाली ने उसकी बात अनसुनी कर दी। उसने एल्विश के बाल पकड़े और उसे जबरदस्ती घुटनों पर बिठा दिया।
“चल, मुँह खोल, वरना सूखा लंड ही तेरी गांड में पेल दूंगा,” वो चिल्लाया। एल्विश की आंखों में आंसू आ गए। वो माफी मांगते हुए बोला, “अंकल, प्लीज, मुझे छोड़ दो।” लेकिन मवाली ने उसकी एक न सुनी। वो एल्विश के मुँह में जबरदस्ती अपना लंड डालने ही वाला था कि मैंने अपना डंडा जमीन पर जोर से पटका और उनकी तरफ बढ़ गया।
“साले, उसके बाल छोड़!” मैंने अपनी भारी आवाज में चिल्लाते हुए कहा। मेरी आवाज सुनकर मवाली की हालत खराब हो गई। उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। एल्विश ने मौका पाते ही खुद को छुड़ाया और मेरे सीने से लिपट गया। उसका शरीर कांप रहा था, और वो मेरी वर्दी को कसकर पकड़े हुए था।
मैंने मवाली को घूरते हुए कहा, “भाग यहाँ से, वरना डंडा तेरी गांड में घुसा दूंगा।” वो मवाली एल्विश को धमकी देता हुआ, “साले, तुझे बाद में देखूंगा,” कहकर भाग खड़ा हुआ। जब वो चला गया, तो मैंने एल्विश को देखा। वो अभी भी डर से कांप रहा था, लेकिन अब थोड़ा रिलैक्स लग रहा था।
मैंने उससे पूछा, “तू कौन है? और यहाँ क्या कर रहा था?” उसने धीमी आवाज में बताया, “मेरा नाम एल्विश है। मैं इसी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 304 में रहता हूँ। मेरे मम्मी-पापा आज पार्टी में गए हैं, देर रात आएंगे।” मैंने गुस्से में उससे कहा, “तेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं हैं, और तू यहाँ बेसमेंट में ये गंदा काम कर रहा था? ये सब क्या चल रहा था?”
एल्विश ने हकलाते हुए कहा, “नहीं… वो आदमी जबरदस्ती कर रहा था।” मैंने उसकी बात काटते हुए कहा, “झूठ मत बोल। कोई बिना बुलाए इस कैम्पस में दीवार फांदकर नहीं आ सकता। तूने ही उसे बुलाया होगा।” एल्विश ने थोड़ा झिझकते हुए माना, “हां, मैंने उसे बुलाया था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो मेरे साथ ऐसा करेगा।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने गुस्से में उससे कहा, “मैंने सब देखा है। पहले तू ही उससे लिपट रहा था, उससे चुम्मियां करवा रहा था। फिर जब उसने जबरदस्ती शुरू की, तो तू इधर-उधर मदद मांगने लगा। अच्छा हुआ मैं आ गया, वरना वो साला तेरा मुँह चोद देता। बता, तू अच्छे घर का लड़का होकर ऐसी गंदी हरकतें क्यों कर रहा था? मैं ये सब तेरे मम्मी-पापा को बताता हूँ।”
एल्विश ने अचानक अपना रुख बदला। वो मुस्कुराते हुए बोला, “अब तुम क्या बताओगे? वो आदमी तो भाग गया। यहाँ तुम और मैं ही हैं, कोई और नहीं। और यहाँ कोई कैमरा भी नहीं है।” उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा चौंका। वो आगे बोला, “अगर तुमने मेरे पापा को बताया, तो वो बस यही पूछेंगे कि मैं इतनी रात को बेसमेंट में क्या कर रहा था। और कहीं ऐसा न हो कि वो तुम पर ही शक करें।”
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उसकी बात सुनकर मैं ठिठक गया। मुझे अपनी नौकरी की चिंता हुई। ये नौकरी मेरे लिए बहुत जरूरी थी। अगर एल्विश के पापा को कुछ गलत लगा, तो वो मुझे निकाल सकते थे। मैंने सोचा, ये लड़का तो सही बोल रहा है। बड़े लोग क्या सोचेंगे, क्या नहीं, इसका कोई ठिकाना नहीं। कहीं वो मुझे ही उल्टा दोषी न ठहरा दें। मैंने उससे कहा, “ठीक है, अब जा।”
लेकिन एल्विश गया नहीं। उसने कहा, “मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।” मैंने हैरानी से पूछा, “कैसी मदद, बे?” उसने बताया, “मेरे मम्मी-पापा जॉब करते हैं। मैं कई सालों से अकेला रहता हूँ। घर पर कोई नहीं होता। धीरे-धीरे मुझे प्यार की जरूरत महसूस होने लगी। लेकिन मेरे मम्मी-पापा का स्वभाव इतना सख्त है कि यहाँ कोई मुझसे दोस्ती नहीं करता।”
मैं उसकी बातें सुन रहा था। वो आगे बोला, “एक दिन स्कूल जाते वक्त मुझे वो मवाली मिला। उसने मुझे अपनी बातों में फंसा लिया। उसने मुझे गंदे चित्र दिखाए, मोबाइल पर कुछ अश्लील वीडियो भेजे। मैं उसकी तरफ आकर्षित हो गया।” मैंने पूछा, “फिर क्या हुआ?”
एल्विश ने बताया, “वो मुझे सुनसान गलियों में ले जाता था। मेरे शरीर को सहलाता, मुझे अपनी बाहों में लेता। मुझे उसके तने हुए लंड का अहसास होता था। धीरे-धीरे वो मेरी गांड को सहलाकर मुझे इतना उत्तेजित कर देता था कि मेरा मूड बन जाता था। आज मुझे लगा कि एक बार उससे अपनी गांड में डलवा ही लूं।”
उसकी बोल्ड बातें सुनकर मैं थोड़ा हैरान हुआ। वो बोला, “हां, मैंने ही उसे बुलाया था। मुझे लगा था कि वो मुझे प्यार करेगा, और मैं उससे लंड डलवाकर मजा लूंगा। लेकिन वो दारू पीकर आया था। मुझे उसके साथ अच्छा नहीं लगा। और फिर तुमने सब देख लिया।”
मैंने पूछा, “तो अब तुझे मेरी मदद किस लिए चाहिए?” उसने कहा, “कल जब मैं स्कूल जाऊंगा, तो वो अपने दोस्तों के साथ मुझे परेशान करेगा।” उसकी बात सुनकर मुझे उस पर दया आ गई। मैंने पूछा, “तू स्कूल कब जाता है?” उसने कहा, “सुबह साढ़े दस बजे।” मैंने कहा, “ठीक है, तू अब अपने घर जा। मैं उसका हिसाब कर लूंगा।”
अगले दिन, जब एल्विश स्कूल के लिए निकला, तो मैंने उसे दूर से देखा। वो पैदल जा रहा था, और कुछ दूरी पर वही मवाली अपने तीन-चार बदमाश दोस्तों के साथ उसका इंतजार कर रहा था। एल्विश का चेहरा डर से सफेद पड़ गया था। वो कांप रहा था, जैसे उसका गला सूख गया हो। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जैसे ही वो मवाली एल्विश की तरफ गालियां बकते हुए बढ़ा, मैं अचानक उसके सामने खड़ा हो गया। मैंने उससे कहा, “क्या है, साले? बच्चे को क्यों परेशान कर रहा है?” मेरी चौड़ी छाती और गठीला बदन देखकर वो सब ठिठक गए। मैंने धमकाते हुए कहा, “इस लड़के ने अपने बाप को तेरे बारे में सब बता दिया है। और इसके बाप का दोस्त थाने का सब-इंस्पेक्टर है। वो तुम सबको ढूंढ रहा है। तुझे पहचानने के लिए इसके बाप ने मुझे भेजा है।”
मेरी बात सुनकर वो सब डर के मारे भाग खड़े हुए। उसके बाद एल्विश को किसी ने परेशान नहीं किया। एक दिन मैं दिन की ड्यूटी पर था, तो एल्विश मेरे लिए खीर लाया। खीर इतनी स्वादिष्ट थी कि मैंने उससे पूछा, “ये तूने बनाई?” उसने हंसते हुए कहा, “नहीं, मम्मी ने बनाई थी। मैं तो बस लाया हूँ।”
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मैंने पूछा, “अब कोई तुझे छेड़ता तो नहीं?” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं, अब कोई परेशान नहीं करता। तुमने उस दिन मेरी बहुत मदद की।” उसके बाद एल्विश का आना-जाना मेरे पास बढ़ गया। वो कभी खाना, कभी मिठाई, तो कभी तीज-त्यौहार पर कुछ पैसे दे जाता।
मैं भी उससे अब खुलने लगा था। एक रात, जब मैं चौकी पर बैठा था, एल्विश फिर से आया। मैंने मजाक में पूछा, “अबे, इतनी रात को फिर क्या? आज फिर किसी को बुलाया है क्या?” वो हंसते हुए बोला, “नहीं, आज मैं तुम्हारे लिए कुछ स्पेशल लाया हूँ।”
उसने मेरे सामने एक विदेशी ब्रांड की शराब की बोतल रख दी। वो कोई महंगी स्कॉच थी, आधी भरी हुई। मैंने हैरानी से पूछा, “अबे, तुझे कैसे पता कि मैं शराब पीता हूँ?” उसने बताया, “मुझे मालूम है। एक दिन साफ-सफाई वाली बाई ने तुम्हारी चौकी से कुछ छोटी-छोटी शराब की बोतलें निकाली थीं।”
मैंने हंसते हुए कहा, “हां, उस दिन मैं टॉयलेट गया था। लेकिन तू ये बोतल कहाँ से लाया?” उसने कहा, “मेरे पापा भी पीते हैं। कल उनके दोस्त आए थे, और वो ये बोतल छोड़ गए।” फिर उसने एक टिफिन और पेप्सी की बोतल मेरे सामने रख दी। टिफिन में गर्म-गर्म चिली चिकन था।
मैंने हैरानी से कहा, “अबे, तू तो पूरी तैयारी करके आया है!” वो हंस पड़ा। मैंने पूछा, “ये चिली चिकन कब बनाया?” उसने कहा, “सुबह का बना है, मैंने बस गर्म किया है।” मैंने उसका शुक्रिया अदा किया और कहा, “चल, अब तू जा।” लेकिन वो उदास हो गया। उसने कहा, “मैं यहीं बैठ जाऊं क्या?”
मैंने उसकी मासूमियत भरी आंखों में देखा और हंसते हुए कहा, “ठीक है, बैठ जा।” वो मेरे पास बैठ गया, और हम दोनों बातें करने लगे। मैं अपनी सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी में चौकी पर बैठा था। रात का सन्नाटा चारों तरफ पसरा था। हल्की सी ठंडी हवा चल रही थी, और पोल पर लगी धीमी रोशनी में चौकी के आसपास का माहौल और भी रहस्यमयी लग रहा था।
एल्विश मेरे पास बैठा था, उसका गोरा-चिट्टा चेहरा रोशनी में चमक रहा था। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे बेचैन कर रही थी। वो 18-19 साल का कमसिन लड़का था, पतली कमर, मुलायम त्वचा, और गुलाबी होंठ, जो किसी को भी ललचा सकते थे।
उसकी भरी हुई गांड उसकी टाइट जीन्स में साफ दिख रही थी, और मैं कई बार उसकी तरफ आकर्षित हो चुका था, पर नौकरी के डर से कभी कुछ करने की हिम्मत नहीं की थी। मैंने उससे मजाक में पूछा, “अबे, तू भी पिएगा क्या?” उसने ना में सिर हिलाया, और अपनी मासूम सी मुस्कान दी। “Gay Sex Hindi Story”
मैंने फटाफट दो लार्ज पैग बनाए और गटागट पी गए। वो विदेशी स्कॉच थी, स्वाद ऐसा कि जीभ पर जैसे मखमल घुल गया। नशा धीरे-धीरे मेरे दिमाग में चढ़ने लगा। मैंने महसूस किया कि एल्विश मुझे बड़ी ही कामुक नजरों से देख रहा था। उसकी आंखें जैसे मेरे जिस्म को चाट रही थीं। मैंने हंसते हुए कहा, “क्या इरादा है तेरा, एल्विश?”
वो थोड़ा झेंपते हुए बोला, “मेरे इरादे से क्या होता है, संजय भैया। असली बात तो तुम्हारे इरादे पर टिकी है।” उसकी बात सुनकर मैं उसे घूरने लगा। वो आगे बोला, “मुझे तुमसे प्यार हो गया है।” उसकी आवाज में एक अजीब सी गर्मी थी, जो मेरे बदन में भी सनसनी दौड़ा गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने उसे गौर से देखा। एल्विश सचमुच बड़ा सैक्सी लौंडा था। उसकी गोरी त्वचा, गुलाबी होंठ, और भरी हुई गांड मेरे मन में कई बार गलत ख्याल ला चुके थे। लेकिन मैं हमेशा अपने आपको रोक लेता था। आखिर ये नौकरी मेरे लिए सबकुछ थी। मैंने उससे कहा, “एल्विश, तू बड़े घर का लड़का है। तू मुझसे सब कुछ करवा भी ले, लेकिन कहीं तू मुझे फंसा न दे। आज तू मेरे साथ है, कल किसी और के साथ चला जाएगा। फिर मेरा क्या होगा? मुझे ये नौकरी चाहिए, यार।”
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एल्विश मेरी बात सुनकर मेरे और करीब आ गया। वो मेरी बगल में सटकर बैठ गया। उसका मुलायम बदन मेरे गठीले जिस्म से टकराया, और मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। चौकी की लाइट मैंने पहले ही बंद कर दी थी, और पोल की हल्की रोशनी में हम एक-दूसरे को साफ देख पा रहे थे।
एल्विश ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा, “तुम पहले मुझे अपना तो बनाओ, संजय भैया। डर के मारे इतना टंच माल छोड़ दोगे क्या?” उसकी बात में एक शरारत थी, जो मुझे अंदर तक भड़का रही थी। नशा अब मेरे दिमाग पर पूरी तरह से हावी हो चुका था। मैंने कहा, “ओये, क्या बोला तू?” एल्विश मेरी आंखों में देख रहा था, और कसम से, उस पल मुझे अपने ऊपर काबू नहीं रहा। “Gay Sex Hindi Story”
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया। उसने भी देर न करते हुए अपने रसीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मेरी गोद में आकर बैठ गया। उसके गर्म होंठों की छुअन और उसकी सांसों की गर्मी ने मेरे बदन में आग लगा दी। मैंने उसे जोर से चूमना शुरू किया। उसके होंठ इतने नर्म थे कि मैं उन्हें चूसते हुए खो सा गया।
एल्विश ने मेरे होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी। “म्मम…”, उसकी सिसकारी मेरे कानों में गूंजी। मेरा लंड अब पैंट में तनकर सख्त हो चुका था, और एल्विश अपनी गांड से उसे दबा रहा था। उसकी हर हरकत मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
उसने धीरे-धीरे अपनी शर्ट के बटन खोल दिए। उसका गोरा-चिट्टा सीना और फूले हुए गुलाबी निप्पल्स देखकर मेरा दिमाग हिल गया। मैंने बिना देर किए उसके एक निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। “आह्ह… संजय भैया… उह्ह…”, एल्विश की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगीं।
उसकी कामुक आवाजों ने मुझे और भड़का दिया। मैंने उसकी निक्कर में हाथ डाला और उसके छोटे से लंड को सहलाने लगा। उसका लंड मेरे 7 इंच के मोटे लंड से छोटा था, शायद 5 इंच का, लेकिन सख्त और गर्म। मैंने उसकी निक्कर नीचे खींच दी, और उसका चिकना, गोरा बदन मेरे सामने था। “Gay Sex Hindi Story”
एल्विश ने मेरी वर्दी के बटन खोल दिए और मेरे चौड़े, बालों वाले सीने को चूमने लगा। “उस दिन तुम न होते, तो वो मवाली मेरी ले लेता। लेकिन इसकी असली हकदारी तुम्हारी है, संजय भैया,” उसने धीमी आवाज में कहा। उसकी बातों ने मेरे बदन में और आग लगा दी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “सच में, तू बड़ा नमकीन लौंडा है।” वो हंसते हुए मेरी बांहों में और सट गया। उसने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरा लंड बाहर निकाल लिया। “आह… कितना बड़ा लंड है, संजय भैया,” उसने हैरानी से कहा। मैंने हंसते हुए जवाब दिया, “हां, यार, बड़ा भी और कुंवारा भी। इसने आज तक किसी की नहीं ली।”
एल्विश मेरे लंड को सहलाते हुए बोला, “तो आज इसकी ओपनिंग कर दो।” उसकी बात सुनकर मैं और गर्म हो गया। मैंने उसे चौकी पर लिटा दिया और हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। उसका गोरा, चिकना बदन मेरे सांवले, गठीले जिस्म के नीचे था। मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को चूसने लगा।
मेरा लंड उसके लंड से टकरा रहा था, और मैं उसे चोदने की स्टाइल में ऊपर-नीचे हो रहा था। “आह्ह… उह्ह… संजय भैया…”, एल्विश की सिसकारियां मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। मैं चित होकर लेट गया, और एल्विश मेरे लंड को मुँह में लेने लगा। उसने मेरे लंड के सुपारे को चाटा, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड मुँह में ले लिया। “Gay Sex Hindi Story”
“म्मम… कितना मोटा है…”, वो बीच-बीच में बोल रहा था। मैंने उसके सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाया, और वो जोर-जोर से चूसने लगा। “आह… एल्विश, तू तो बड़ा मस्त चूसता है,” मैंने सिसकते हुए कहा। कुछ देर बाद मैंने उसे फिर से चित लिटाया और उसके ऊपर आ गया।
मैंने उससे पूछा, “इतना बड़ा ले पाएगा?” उसने गर्मजोशी से कहा, “पता नहीं, लेकिन तुम ही मेरी सील तोड़ो, संजय भैया। मैं तुम्हें जिंदगी भर याद रखूंगा।” मैंने एक और पैग मारा, और फिर उसकी गांड को चूमने लगा। उसकी चिकनी, गोरी गांड इतनी मुलायम थी कि मैं उसे चाटने और मसलने से खुद को रोक नहीं पाया। “आह… संजय भैया… और करो…”, एल्विश सिसक रहा था।
मैंने अपना लंड उसके छोटे से छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा। उसकी गांड इतनी टाइट थी कि मेरा 7 इंच का लंड सिर्फ 3-4 इंच ही अंदर गया। “आह… उई… मम्मी… दर्द हो रहा है…”, एल्विश दर्द से छटपटाने लगा। मैंने धीरे से कहा, “बस, थोड़ा बर्दाश्त कर।”
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मैंने फिर एक जोरदार धक्का मारा, और मेरा पूरा लंड उसकी गांड में समा गया। “आह्ह… फट गई मेरी… उई… मम्मी…”, एल्विश की चीख निकल गई। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन वो मुझे रोक नहीं रहा था। मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया, ताकि वो हिल न सके। “Gay Sex Hindi Story”
उसकी गांड मेरे लंड को कस रही थी, और उसकी गर्मी मुझे पागल कर रही थी। “आह… एल्विश, तेरी गांड तो जन्नत है,” मैंने सिसकते हुए कहा। कुछ देर बाद उसका दर्द कम हुआ, और उसकी गांड मेरे लंड को लहक-लहक कर कसने लगी। “आह… संजय भैया… अब मजा आ रहा है… और करो…”, एल्विश की आवाज अब दर्द से नहीं, बल्कि मजे से भरी थी।
मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ उसकी सिसकारियां बढ़ रही थीं, “आह्ह… उह्ह… चोदो मुझे… आह… मेरी गांड फाड़ दो…” मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदने लगा। पहले मैंने उसे उल्टा किया और उसकी गांड में पीछे से लंड पेला।
“पच… पच… पच…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और नीचे से धक्के मारने लगा। उसकी सिसकारियां अब चीखों में बदल गई थीं, “आह… उई… संजय भैया… और जोर से… मेरी गांड फट रही है… आह्ह…”
मैंने उसे फिर से चित लिटाया और उसके पैर अपने कंधों पर रखकर जोर-जोर से धक्के मारे। उसकी गांड मेरे लंड को पूरी तरह जकड़ रही थी। “आह… एल्विश, तेरी गांड ने तो मेरे लंड को निचोड़ लिया,” मैंने सिसकते हुए कहा। करीब 10 मिनट तक मैंने उसे बिना रुके चोदा। “Gay Sex Hindi Story”
आखिरकार, मेरा लंड उसकी गांड में झड़ने लगा। “आह्ह… ले साले… मेरा माल ले…”, मैंने चीखते हुए कहा। मेरा गर्म माल उसकी गांड में पिचकारी की तरह छूट रहा था। एल्विश ने मेरे हाथों को कसकर पकड़ लिया और “आह… संजय भैया… भर दो मेरी गांड… उह्ह…” कहते हुए सिसकने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरा लंड पूरी तरह ढीला होने तक उसकी गांड में रहा। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने। एल्विश ने जाते-जाते कहा, “ये पल मुझे जिंदगी भर याद रहेगा।” मैंने हंसते हुए पूछा, “मेरा कैसा लगा?” उसने शरारती अंदाज में कहा, “बड़ा मस्त था, लेकिन अगली बार और ढंग से पेलना।”
मैंने हंसते हुए कहा, “चौकी में तो बस इतना ही हो सकता था।” उसने कहा, “अगली बार मैं तुम्हें दिन में अपने फ्लैट पर बुलाऊंगा। हम साथ खाना खाएंगे, और फिर देखेंगे कि चौकी में ज्यादा मजा आया या मेरे रूम में।” मैंने हामी भर दी। उसने जाते-जाते पूछा, “आओगे ना?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, जरूर।”