Father Daughter Night Sex
रात के ग्यारह बज चुके थे। शहर अचानक अंधेरे में डूब गया था- लाइट चली गई थी, और बाहर तेज़ बारिश की झमाझम आवाज़ घर को घेर रही थी। बिजली की कड़कड़ाहट से कभी-कभी कमरा चमक उठता, फिर वापस घने अंधेरे में समा जाता। सुरेन्द्र अपने बिस्तर पर अकेले लेटे थे। Father Daughter Night Sex
पत्नी की मौत को दो साल हो चुके थे। बेटी अनीशा अब 21 साल की हो चुकी थी- कॉलेज हॉस्टल से गर्मियों की छुट्टियों में घर लौटी थी। अनीशा अपने कमरे में थी, लेकिन अंधेरा और बारिश की वजह से नींद नहीं आ रही थी। बचपन से ही उसे अंधेरे से डर लगता था। आज भी वही पुराना डर सता रहा था। उसने हिम्मत जुटाई और पापा के कमरे की ओर बढ़ी। दरवाज़ा हल्का सा खुला था।
“पापा…?” उसने धीमी, काँपती आवाज़ में पुकारा।
सुरेन्द्र ने मोबाइल की टॉर्च जलाई। नीली रोशनी में अनीशा का चेहरा दिखा- वो सिर्फ़ एक पतली सी सफ़ेद नाइटी पहने थी। गर्मी और बारिश की ठंडक ने उसके बदन पर रोंगटे खड़े कर दिए थे। नाइटी उसके गोरे बदन से चिपक रही थी, कर्व्स साफ़ नज़र आ रहे थे।
“क्या हुआ मेरी जान? डर लग रहा है?” सुरेन्द्र की आवाज़ में चिंता थी, लेकिन दो साल की अकेलापन भी छुपा था।
अनीशा ने सिर हिलाया और बिस्तर के पास आकर खड़ी हो गई। “सो जा मेरे पास आज… जैसे बचपन में सोती थी,” सुरेन्द्र ने बिस्तर का किनारा खींचा।
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अनीशा बिना कुछ बोले लेट गई। अंधेरा इतना घना था कि कुछ दिख नहीं रहा था। सिर्फ़ बारिश की आवाज़, बिजली की गड़गड़ाहट और दोनों की तेज़ होती साँसें। सुरेन्द्र ने टॉर्च बंद कर दी। कुछ देर तक ख़ामोशी रही। फिर अनीशा करवट बदली। उसका बदन अनजाने में पापा के बदन से टकराया।
सुरेन्द्र का सीना गर्म था, दिल की धड़कन तेज़। अनीशा ने अपना हाथ पापा की छाती पर रख दिया- जैसे बचपन में करती थी। लेकिन अब वो बचपन नहीं था। सुरेन्द्र का दिल ज़ोर से धड़का। उसका हाथ काँपते हुए अनीशा की पतली कमर पर सरक गया। अनीशा का बदन झनझना उठा, जैसे बिजली दौड़ गई हो।
उसकी साँसें रुक-रुक कर आने लगीं। वो हटी नहीं। अंधेरा सब कुछ छुपा रहा था- उनके पाप को, उनकी हवस को। सुरेन्द्र की उँगलियाँ अब अनीशा की नाइटी के ऊपर से उसकी मुलायम जाँघों पर फिसलने लगीं- धीरे-धीरे ऊपर की तरफ़, जहाँ गर्मी बढ़ रही थी। अनीशा की चूत में हल्की सी खुजली होने लगी। वो भीगने लगी थी, अनजाने में।
“पापा… ये क्या कर रहे हो…?” अनीशा ने फुसफुसाया, लेकिन आवाज़ में डर नहीं था- कुछ और था, कुछ गीला, कुछ भूखा।
“शशश… चुप कर मेरी रानी…” सुरेन्द्र की आवाज़ भारी थी, हवस से लबालब।
“सिर्फ़ तू और मैं… ये अंधेरा हमारी हवस छुपा लेगा। तेरी ये गर्म जाँघें… पापा को पागल कर रही हैं…”
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सुरेन्द्र ने अनीशा को अपनी तरफ़ खींच लिया। अंधेरे में उनके होंठ मिल गए। अनीशा ने पहले हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर खुद पापा के गले लग गई। सुरेन्द्र का हाथ अनीशा की नाइटी के अंदर सरक गया। उसके निप्पल्स पहले से ही कड़े हो चुके थे- उँगलियों से छूते ही अनीशा सिहर उठी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“आह… पापा…” छोटी सी सिसकारी निकल गई।
सुरेन्द्र ने अनीशा की नाइटी को सूंघा- उसकी जवान बदन की मादक खुशबू, मीठी और मस्की, उसकी हवस को और भड़का रही थी। उसने नाइटी ऊपर उठा दी। अनीशा ने अंदर कुछ नहीं पहना था। उसकी चिकनी, गीली चूत पर उँगलियाँ फिसलने लगीं। अनीशा की साँसें हाँफने लगीं।
“पापा… वहाँ मत छुओ… लेकिन… रुको मत…” अनीशा की आवाज़ काँप रही थी। उसका हाथ पापा की पैंट के ऊपर से लंड पर पहुँच चुका था। वो पहले से ही लोहे जैसा सख्त हो चुका था। “बेटी… तू इतनी बड़ी हो गई है… इतनी गर्म…” सुरेन्द्र ने काँपते हाथों से पैंट नीचे सरका दी।
उसका मोटा, नसों से फूला लंड बाहर उछल पड़ा। टोपी पर प्री-कम की चिपचिपी बूँदें चमक रही थीं। अनीशा ने अंधेरे में टटोलकर उसे पकड़ लिया। उँगलियाँ उसके चारों तरफ़ लपेटते हुए सहलाने लगीं। लंड की मर्दाना, मस्की गंध अनीशा के नथुनों में भर गई।
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“ओह पापा… कितना बड़ा है… कितना गर्म…” अनीशा मन ही मन सोच रही थी, चूत से पानी टपक रहा था। सुरेन्द्र ने अनीशा की टांगें और चौड़ी कर दीं। अपना लंड उसकी गीली चूत की दरार पर रगड़ने लगा- ऊपर-नीचे, क्लिट को छूते हुए। अनीशा की कराहटें तेज़ हो गईं। बदन पसीने से चिपचिपा हो चुका था। बारिश की कड़कड़ाहट हर रगड़ के साथ ताल मिला रही थी, जैसे प्रकृति उनकी चुदाई को स्वीकृति दे रही हो।
“डालूँ बेटी…?” सुरेन्द्र ने हाँफते हुए पूछा।
“हाँ पापा… घुसा दो अपना मोटा लंड… मेरी चूत में…” अनीशा ने कराहते हुए कहा। “मैं आपकी हूँ… सिर्फ़ आपकी…”
सुरेन्द्र ने धीरे से टोपी अंदर सरकाई। अनीशा की चूत की दीवारें कसकर लिपट गईं- टाइट, गर्म, गीली। अनीशा चीखी, “आह… पापा… दर्द… लेकिन मत रोकना… जोर से पेलो…” सुरेन्द्र ने पूरा धक्का मारा। पूरा लंड अंदर समा गया। अनीशा की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन दर्द में मज़ा था। “Father Daughter Night Sex”
उसकी चूत लंड को निचोड़ रही थी। सुरेन्द्र धीरे-धीरे चोदने लगा। चप-चप की गीली आवाज़ अंधेरे में गूँज रही थी। “आह… पापा… चोदो मुझे जोर से…” अनीशा ने कमर उछालते हुए कहा। “मैं तुम्हारी छोटी सी रंडी हूँ… तेरी बेटी की चूत सिर्फ़ तेरे लंड के लिए बनी है…”
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“उफ्फ… बेटी… तेरी ये टाइट चूत… पापा का मोटा लंड निचोड़ रही है…” सुरेन्द्र ने धक्के तेज़ कर दिए। वो अनीशा के बूब्स चूस रहा था, पसीना टपक रहा था। “और तेज़ हिल… ले मेरी जान… चुदाई का पूरा मज़ा ले…”
अनीशा झड़ने वाली थी। “पापा… आ रहा है… आह… चोदो जोर से…!” सुरेन्द्र ने स्पीड और बढ़ा दी। अनीशा झड़ गई- उसकी चूत ने लंड को बुरी तरह कस लिया। सुरेन्द्र भी नहीं रुक पाया। “ले बेटी… पापा का गरम माल… तेरी चूत में भर रहा हूँ…!” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
गर्म वीर्य अनीशा की चूत में उड़ल पड़ा। दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। अनीशा के मन में अपराध बोध उमड़ा- ये गलत था, बहुत गलत। लेकिन पापा के लंड की गर्मी अभी भी उसकी चूत में महसूस हो रही थी। वो जानती थी, अब रुकना नामुमकिन था।
कुछ देर बाद अनीशा ने फुसफुसाया, “पापा… फिर…?” सुरेन्द्र ने मुस्कुराकर अनीशा को अपने ऊपर खींच लिया। दूसरी बार अनीशा ऊपर थी- धीरे-धीरे लंड पर बैठकर हिल रही थी। तीसरी बार सुरेन्द्र ने उसे पीछे से लिया, जाँघें पकड़कर जोर-जोर से पेलते हुए।
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सुबह लाइट आई। बारिश रुक चुकी थी। लेकिन उनके बीच का अंधेरा हमेशा के लिए गहरा हो चुका था- वो हवस भरा, गंदा अंधेरा, जो सिर्फ़ उन्हें जोड़ता था। अनीशा ने पापा को आखिरी किस करते हुए कहा, “पापा… अगली बार फिर लाइट जाएगी ना…?” सुरेन्द्र ने हँसकर कहा, “हाँ मेरी रानी… और अगर नहीं भी गई, तो हम खुद अंधेरा कर लेंगे।”
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