Family Mein Threesome Chudai
हमारी कहानी शुरू होती है मेरे गाँव से, जहाँ मैं, रोबिन, अपनी छोटी बहन दीक्षा और हमारे परिवार के साथ रहता था। हमारे पिताजी गाँव के सरपंच थे, और हमारा घर गाँव का सबसे बड़ा मकान था, आठ बीघा जमीन के साथ। मैं उस वक्त 19 साल का था, मेडिकल कॉलेज में नया-नया दाखिला लिया था। Family Mein Threesome Chudai
पहली छुट्टियों में जब मैं घर लौटा, तो हमारे घर में कुछ मेहमान आए हुए थे- अम्माजी की छोटी बहन प्रियंका आंटी और उनकी बड़ी बहन शोभा बा। प्रियंका आंटी, जिन्हें मैं प्रिया आंटी कहता था, मेरे दादाजी की तीसरी पत्नी थीं। वो अम्माजी से 15 साल छोटी थीं, यानी उम्र में मेरे और दीक्षा के करीब। उनकी उम्र 25-26 के आसपास थी।
प्रिया आंटी का गोरा रंग, पतली कमर, हेमामालिनी जैसा चेहरा और लंबे काले बाल उन्हें बेहद खूबसूरत बनाते थे। उनके गोल-गोल चूचे, जो ज्यादा बड़े नहीं थे, फिर भी ब्लाउज में छिप नहीं पाते थे। जब वो चलती थीं, तो उनकी चौड़ी कमर और थिरकते चूचे किसी का भी लंड खड़ा कर दें।
मैंने तो पहले ही दिन बाथरूम में जाकर उनके नाम की मुठ मार ली थी। दीक्षा, मेरी 17 साल की छोटी बहन, और प्रिया आंटी दिनभर फुसफुसाकर बातें करती थीं। एक दिन मैंने प्रिया आंटी को मुझे घूरते हुए पकड़ा। उनकी आँखों में चमक थी, और जब हमारी नजरें मिलीं, तो वो शरमा गईं।
उनका दुपट्टा नीचे सरक गया, और उनके चूचे साफ दिखे। मेरे लंड ने पैंट में तंबू बना लिया। वो नकली गुस्सा दिखाकर मुस्कुराईं, लेकिन उनकी होंठों की हंसी छिप नहीं पाई। एक दिन मैंने दीक्षा को पकड़ लिया और पूछा, “तुम दोनों दिनभर क्या फुसफुसाती रहती हो?”
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दीक्षा ने उंगली होंठों पर रखकर चुप रहने का इशारा किया और बोली, “भैया, सुनोगे तो दंग रह जाओगे। गुस्सा मत करना।”
मैंने कहा, “बोल, क्या बात है?”
वो शरमाते हुए बोली, “आंटी… वो… चुदाई की बातें करती हैं।”
मैंने चौंककर पूछा, “चुदाई? वो क्या-क्या कहती हैं?”
दीक्षा ने चेहरा छिपाते हुए कहा, “वो कहती हैं कि उनकी चूत हमेशा गीली रहती है। कभी-कभी तो वो रबड़ का लंड इस्तेमाल करती हैं।”
मैंने हंसते हुए पूछा, “रबड़ का लंड? यानी डिल्डो? तूने देखा है?”
दीक्षा शरमाई, “भैया, तुम भी ना! तुम तो बाथरूम में मुठ मारते हो, है ना? वो लंबा-मोटा लंड तुम्हारा?”
मैंने हंसकर कहा, “हां, और तू क्या प्रिया आंटी के साथ कुछ करती है?”
वो लाल हो गई और बोली, “हां, एक-दो बार हमने डिल्डो से मजा लिया। लेकिन वो तुम्हारी तारीफ करती हैं, भैया। कहती हैं तुम जवान और तगड़े हो।”
मैंने मौका देखकर कहा, “दीक्षा, तू उनसे बोल कि मुझे भी वो पसंद हैं।”
दीक्षा ने शरारती हंसी के साथ कहा, “क्यों बोलूं? मेरा क्या फायदा?”
मैंने कहा, “तू मांग, जो चाहिए दूंगा।”
वो बोली, “ठीक है, जब तुम और आंटी चुदाई करोगे, तो मुझे वहां रहने देना। मैं देखना चाहती हूं कि तुम्हारा लंड उनकी चूत में कैसे जाता है।”
मैंने हंसकर कहा, “तुझे चुदाई देखकर मन करता है?”
वो बोली, “हां, फिर तुम मुझे भी चोदना।”
मैंने कहा, “पक्का, दूसरा तोहफा तेरा।”
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अगले दिन रात को खाने के बाद दीक्षा ने सबको फिल्म देखने का प्लान बताया। रात दस बजे ब्लैक एंड व्हाइट इंग्लिश फिल्म शुरू हुई। हम तीनों—मैं, दीक्षा और प्रिया आंटी—जानते थे कि ये सिर्फ बहाना है। अम्माजी और शोभा बा थकान का बहाना बनाकर अपने घर चले गए। अब सिर्फ हम तीन बचे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
प्रिया आंटी बोलीं, “मुझे नींद आ रही है, मैं जाती हूं।”
मैंने कहा, “आंटी, थोड़ी देर अपने भतीजे के साथ बैठो ना।”
दीक्षा ने चहकते हुए कहा, “हां आंटी, भतीजा तरस रहा है।”
प्रिया शरमाईं और बोलीं, “तू भी, दीक्षा?”
दीक्षा ने हंसकर कहा, “आंटी, भैया की पैंट में तंबू देख रही हो? वो तुम्हारे लिए ही है।”
प्रिया ने मेरी तरफ देखा, और मेरे लंड की उभार को देखकर उनका चेहरा गुलाबी हो गया। वो मुस्कुराईं, और उनकी दांतों की चमक ने मेरा दिल चुरा लिया। मैं उनके पास गया और बैठ गया। उनके कंधे पर हाथ रखकर कान में फुसफुसाया, “आंटी, हम दोनों को अच्छा लगेगा, है ना?”
वो शरमाकर सिर हिलाईं और चेहरा छिपा लिया। मैंने उनके कान पर हल्का सा चूमा, और वो मेरे करीब खिसक आईं। मेरे होंठ उनके गालों पर गए, फिर धीरे-धीरे उनके नरम, रसीले होंठों तक। मैंने उनकी जीभ को चूमा, और वो थोड़ा पीछे हटीं, शायद पहली बार फ्रेंच किस कर रही थीं। “Family Mein Threesome Chudai”
मैंने उनके सिर को पकड़कर होंठों को चूसना जारी रखा। धीरे-धीरे वो भी मजा लेने लगीं। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी, और मैंने उनकी गर्दन को सहलाते हुए उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया। मैंने उनका पल्लू हटाया और ब्लाउज के ऊपर से उनके चूचों को सहलाया। उनके निप्पल सख्त हो चुके थे, और पतले कपड़े के ऊपर से साफ महसूस हो रहे थे।
मैंने उनके निप्पल को उंगलियों से हल्का सा दबाया, और वो सिसकारी भरने लगीं, “आह…” मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोले, और देखा कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी। उनके गोल, भारी चूचे मेरे सामने थे—2 इंच के गुलाबी घेरों के साथ, जिनके बीच निप्पल किशमिश की तरह सख्त हो चुके थे। मैंने उनके चूचों को मसला, और वो मेरे कंधों पर झुक गईं।
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दीक्षा सब देख रही थी और बोली, “भैया, धीरे दबाओ, आंटी के चूचे अभी कच्चे हैं।”
मैंने हंसकर कहा, “इतने बड़े और कच्चे? आंटी, ये कैसे?”
प्रिया ने जवाब में मेरा हाथ पकड़ा और अपने चूचों पर रख दिया। मैंने फिर से उनके चूचों को सहलाया, मसला और चूसा। उनका एक निप्पल मेरे मुंह में था, और दूसरा मेरी उंगलियों में। वो सिसकारियां ले रही थीं, “आह… उह…” अचानक प्रिया ने मेरी पैंट के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया। दीक्षा ने भी अपना हाथ मेरी पैंट में डाला और बोली, “आह… भैया, ये तो लोहे जैसा है।” मेरा 7 इंच का लंड पूरा तन चुका था। प्रिया ने मेरी पैंट का नाड़ा खोला और लंड को बाहर निकाला।
वो उसे देखकर बोली, “हाय, इतना बड़ा?”
दीक्षा ने कहा, “भैया, ये आंटी की चूत में जाएगा?”
मैंने हंसकर कहा, “देख लेना, आसानी से ले लेगी।”
प्रिया मेरे सामने घुटनों पर बैठ गईं और मेरे लंड को धीरे-धीरे मुठ मारने लगीं। उनकी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर फिरने लगी। वो उसे चूसने लगीं, और पीछे से दीक्षा बोली, “भैया, मुझे भी पकड़ने दे।” मैंने हां कहा। दीक्षा ने मेरे लंड को पकड़ा और बोली, “ये तो लोहे जैसा सख्त है। दर्द नहीं होगा?”
मैंने कहा, “नहीं, मजा आएगा।”
प्रिया और दीक्षा दोनों मेरे लंड के साथ खेल रही थीं। प्रिया का मुंह मेरे लंड पर था, और दीक्षा उसे मुठ मार रही थी। मेरे लंड से लार और प्रीकम टपक रहा था। मैंने सोचा, अब और नहीं रुक सकता। मैंने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और उनकी सलवार का नाड़ा खोला। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उन्होंने शरमाते हुए जांघें बंद कर लीं, लेकिन मैंने धीरे से उनकी सलवार उतार दी। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी, और काली झांटों के बीच उनकी गुलाबी चूत चमक रही थी। मैंने उनकी जांघों को चौड़ा किया, और उनकी क्लिटोरिस को जीभ से चाटा। वो उछल पड़ीं, “आह… रोबिन!”
मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया। उनकी क्लिटोरिस 1 इंच लंबी थी, और मैंने उसे होंठों में लेकर चूसा। प्रिया की सिसकारियां तेज हो गईं, “आह… उह… हाय…” मैंने उनकी चूत में दो उंगलियां डालीं और जी-स्पॉट को सहलाया। वो अपनी कमर हिलाने लगीं।
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दीक्षा ने कहा, “भैया, आंटी की चूत कितनी गीली है।”
मैंने प्रिया से पूछा, “आंटी, तैयार हो?” वो शरमाते हुए मुस्कुराईं और आँखें बंद कर लीं। मैंने उनके कूल्हों के नीचे तकिया रखा और अपने लंड को उनकी चूत के मुंह पर रगड़ा। धीरे से दबाव डाला, और मेरा सुपारा उनकी चूत में घुस गया। वो सिसकारी, “आह…”
मैंने धीरे-धीरे आधा लंड अंदर डाला और रुका। उनकी चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। प्रिया की सिसकारियां तेज हो गईं, “आह… उह… रोबिन… धीरे…” मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ाई।
हर धक्के के साथ उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। उनकी क्लिटोरिस मेरे लंड से रगड़ रही थी, और वो हर धक्के के साथ सिहर रही थीं। “आह… हाय… कितना मोटा है… आह…” वो मेरे कूल्हों को पकड़कर मुझे और करीब खींच रही थीं। मैंने उनके होंठों को चूमा और तेज धक्के मारने शुरू किए।
स्स… स्स… स्स… उनकी चूत से रस टपक रहा था, और मेरा लंड उसमें आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। दीक्षा पास बैठकर सब देख रही थी। उसने प्रिया की क्लिटोरिस को उंगली से सहलाया, और प्रिया जोर से चिल्लाई, “आह… हाय… मैं गई!” उनका शरीर अकड़ गया, और वो ऑर्गेज्म के चरम पर पहुंच गईं। “Family Mein Threesome Chudai”
उनकी चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया, और मैं भी झड़ने वाला था। मैंने तेज धक्के मारे और उनकी चूत में ही झड़ गया। प्रिया बिस्तर पर निढाल होकर लेट गईं। मैं बाथरूम जाकर लंड धोया और वापस आया। दीक्षा मेरी बाहों में थी और बोली, “भैया, अब मेरी बारी?”
मैंने उसके चूचों को सहलाया और कहा, “थोड़ा इंतजार, मेरा लंड अभी नरम है।” प्रिया ने मेरे लंड को फिर से पकड़ा और मुंह में लिया। उनकी जीभ मेरे सुपारे पर फिरने लगी, और मेरा लंड फिर से तन गया। मैंने दीक्षा की चूत को सहलाया। उसकी चूत छोटी और कसी हुई थी, लेकिन पूरी गीली थी।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को चाटा, और वो सिसकारी, “आह… भैया… गुदगुदी हो रही है…” पांच मिनट तक उसकी चूत चाटने के बाद मैंने उसमें एक उंगली डाली। उसकी चूत टाइट थी, लेकिन धीरे-धीरे मैंने दो, फिर तीन उंगलियां डालीं। वो दर्द से थोड़ा सिहरी, लेकिन बोली, “बस, थोड़ा और…”
दीक्षा ने मुझे खींचा और बोली, “भैया, अब और मत तड़पाओ।” मैंने उसके कूल्हों के नीचे तकिया रखा और अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। धीरे से सुपारा अंदर डाला, और वो चिल्लाई, “आह… दर्द हो रहा है!” मैंने धीरे-धीरे आधा लंड अंदर डाला और रुका। उसकी चूत बहुत टाइट थी। “Family Mein Threesome Chudai”
मैंने फ्रेंच किस करते हुए धीरे-धीरे धक्के मारे। स्स… स्स… उसकी चूत गीली होने लगी, और दर्द कम हो गया। वो बोली, “भैया, अब दर्द नहीं हो रहा।” मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ाई। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी। हर धक्के के साथ वो सिसकारी, “आह… उह… भैया… कितना मजा आ रहा है…”
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प्रिया ने दीक्षा के चूचों को मसला, और मैंने तेज धक्के मारे। दस मिनट तक चुदाई के बाद दीक्षा की चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया, और वो ऑर्गेज्म पर पहुंच गई। उसका शरीर अकड़ गया, और वो चिल्लाई, “आह… भैया… मैं गई!” मैंने भी तेज धक्के मारे और उसकी चूत में झड़ गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
हम तीनों थककर बिस्तर पर लेट गए। रात काफी हो चुकी थी। हम तीनों बिना कपड़ों के एक ही बिस्तर पर सो गए। सुबह जब मैं जगा, तो दीक्षा मेरे सीने से चिपकी सो रही थी। उसकी जांघ मेरे लंड को छू रही थी। प्रिया मेरे पीछे थीं और मेरे लंड के साथ खेल रही थीं। मैंने दीक्षा की चूत को सहलाया, और वो भी जाग गई।
मैंने कहा, “पहले ये तय करो, कौन पहले चुदवाएगी।” दीक्षा बोली, “भैया, मेरी चूत अभी दुख रही है। आंटी को चोदो।” प्रिया ने मेरे लंड को चूसा, और मैंने दीक्षा की चूत को चाटा। बीस मिनट तक हमने फिर से चुदाई की। प्रिया बोलीं, “हाय, कितना मजा आया।” दीक्षा ने कहा, “भैया, तुम्हारा लंड इतना प्यारा है।” बाहर अभी अंधेरा था। हम तीनों ने नाइट ड्रेस पहनी और सो गए।