Double Bhabhi Ki Chudai
हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम शुभम है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 27 साल है और हाइट 5 फुट 6 इंच है. लंड नपा हुआ 6 इंच का है. आज मैं जो घटना बताने जा रहा हूं, वो मेरे जीवन की सच्ची घटना है. यह घटना आज से करीब 2 साल पहले की है, जब मैं अपने चाचा के घर भोपाल मध्यप्रदेश में एग्जाम के सिलसिले में गया था. Double Bhabhi Ki Chudai
मेरे चाचा भोपाल में रहते हैं. उनके दो लड़के हैं. बड़े भाई सुजीत की उम्र 30 साल और छोटे भाई अजित की उम्र 27 साल की है. सुजीत और अजित भैया दोनों एक ही कंपनी में काम करते हैं. यह बात उन दिनों की है, जब सुजीत भैया की शादी को 8 महीने हुए थे.
मैंने भोपाल स्टेशन पहुंचते ही देखा कि चाचा जी मुझे लेने आए थे. मेरे आने से पहले मां ने चाचा जी को बता दिया था कि मैं आने वाला हूं. इसके लिए उन्होंने वहां रहने के लिए मुझे काफी बार कहा भी था. आज उनकी इसी चाहत के कारण मुझे एग्जाम तक वहीं रुकना पड़ा.
वहां जाते ही चाचा चाची ने मुझे खूब प्यार किया, साथ ही उनके बेटे अजित और सुजीत भैया और सुजीत भैया की वाइफ यानी दिव्या भाभी भी मुझसे बड़े स्नेह से मिले. दिव्या भाभी के बारे में बताना चाहूंगा. दिव्या भाभी की उम्र 25 साल की है. उनकी हाइट 5 फुट है. भाभी जरा मांसल हैं.
भाभी की गांड जरा बड़ी है, जिसको देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. आगे सीने पर उनके दो बड़े-बड़े आम तने हैं, जिन्हें देखते ही चूसने का मन करता है. शुरू में दिव्या भाभी को लेकर मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं थे, पर दो दिन बाद ऐसा हुआ, जो मैंने सोचा ही नहीं था.
मुझे भाई भाभी के साथ वाला कमरा दिया हुआ था, जो पहली फ्लोर पर था. उधर एक टॉयलेट और दो कमरे बने थे. एक में भैया भाभी रहते थे, दूसरे में मुझे ठहराया गया था. इस कमरे में एक खास बात ये थी कि बगल के कमरे में हो रही बात अगर दीवार से कान लगाकर सुनी जाए, तो सब सुनाई पड़ता है.
तीसरे दिन जब मैं खाना खाकर सोने के लिए गया, तो मैंने देखा भाभी के कमरे से कुछ आवाज आ रही है. मैंने कान लगाकर सुनने की कोशिश की. भाभी भाई से कह रही थीं- तुमसे कभी कुछ नहीं होता, तुम्हें बस अपना-अपना दिखता है, मैं वैसी प्यासी की प्यासी रह जाती हूं.
यह सुनकर मैं हैरान हुआ. भाई बस भाभी को चुप कराने में लगे हुए थे, लेकिन भाभी चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थीं. फिर थोड़ी देर बाद भाभी रोने लगीं और भाई भाभी को चुप कराने लगे. इस बीच मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता नहीं चला. सुबह जब मैं उठा, तो मेरे दिमाग में वही सब बातें चल रही थीं.
जिस कारण मेरा लंड काफी टाइट पोजिशन में सीधा खड़ा हो रहा था और मेरे निक्कर के ऊपर से ही उभरकर दिख रहा था. मैं सोते वक्त अंडरवियर उतारकर एक पतले से निक्कर में सोता हूं, जिस वजह से मेरा खड़ा लंड पूरा दिखाई देता है. अभी मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी अचानक मैंने मेरे कमरे की तरफ आती हुई पायल की आवाज सुनी.
मैं जल्दी से आंख बंद करके सोने का नाटक करने लगा. मैंने थोड़ी आंख खोलकर देखा कि भाभी नाश्ते की प्लेट रखकर मेरे फूले हुए लंड को निहार रही थीं, जो कि पहले से ही काफी देर से खड़ा था. भाभी थोड़ा पास आईं और झुककर बड़े गौर से मेरे फूले हुए लंड को देखने लगीं, जैसे उन्होंने इतना बड़ा लंड कभी देखा ही न हो. देखते ही देखते भाभी का एक हाथ उनकी चूत पर आ गया और वे अपनी चूत को ऊपर से ही सहलाने लगीं.
थोड़ी देर बाद भाभी मुझे आवाज देते हुए कमरे से निकल गईं. फिर मैंने उठकर नाश्ता किया और थोड़ी देर बाद निक्कर वहीं उतारकर तौलिया पहनकर टॉयलेट की तरफ आ गया. मैं जैसे ही टॉयलेट में घुसा, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई. मैंने देखा वहां पहले से ही भाभी थीं और अपनी चूत की झांटें साफ कर रही थीं.
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उनका सर नीचे चूत की तरफ था, जिससे शायद भाभी को मेरे आने का पता नहीं चला. शायद भाभी दरवाजा लॉक करना भूल गई थीं या जानबूझकर ऐसा किया था, मुझे नहीं मालूम. जब मैंने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया, तो दरवाजा खुल गया था. इसके बाद जो नजारा मेरी आंखों के सामने था, उसे देखकर मेरी गांड फट गई थी.
चूंकि भाभी ने मुझे नहीं देखा, या देखने की कोशिश नहीं की, क्योंकि भाभी चूत की शेविंग बनाने में इतनी तल्लीन हो गई थीं कि मैं उनके सामने खड़ा दो मिनट तक देखता रहा था. भाभी की मदमस्त देह देखकर और उनकी बिल्कुल गोरी चिट्टी चूत देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
इस वजह से मेरी तौलिया में लंड ने टेंट बना दिया. मेरा मन करने लगा कि अभी के अभी भाभी की चूत में लंड पेलकर चूत फाड़ दूं. दो मिनट के बाद जैसे ही भाभी ने ऊपर देखा और घबराते हुए कहा- तूम.. यहां! भाभी अपने बड़े-बड़े चूचों को और चूत छुपाने की नाकाम कोशिश करने में लग गईं. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जैसे ही सॉरी कहते हुए मैं आगे बढ़ा, मेरा तौलिया खुलकर नीचे गिर गया. मेरे खड़े लंड को देखकर भाभी की दोनों आंखें बड़ी हो गईं और उनके दोनों हाथ मुंह पर आ गए. भाभी बिल्कुल शांत रहकर मेरे खड़े लंड को देखती रहीं. मैंने अचानक अपना तौलिया उठाकर लंड के ऊपर रख लिया और भाभी से सॉरी कहने लगा.
मैं- भाभी आई एम सो सॉरी, मुझे नहीं पता था कि अंदर आप हो.
भाभी- तुम अंदर कैसे आए, क्या दरवाजा लॉक नहीं था?
मैं- नहीं भाभी, लॉक होता तो अंदर कैसे आ जाता?
भाभी- हम्म, मैं ही आज डोर लॉक करना भूल गई होऊंगी.
मैं- सॉरी भाभी जो हुआ, मुझसे गलती से हुआ.
भाभी- गलती तुम्हारी है ही, तुम्हारे चक्कर में ही ये सब हुआ है.
मैं- मेरे चक्कर में? वो कैसे भाभी, मैं समझा नहीं?
भाभी मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए कहने लगीं- इसको देखो अभी भी खड़ा हुआ है, सुबह जब मैं तुम्हारे कमरे में आई, तब तुम्हारा यही लंड मुझे घूर रहा था, मन कर रहा था कि पकड़कर खा जाऊं इसे, यही सोच रही थी कि निक्कर में इतना तगड़ा दिख रहा है तो बिना निक्कर का कैसा होगा, बस इसके चक्कर में शायद डोर लॉक करना भूल गई और शेविंग करने लगी. इतने में तुम आ गए और साथ ही इसके दर्शन करवा दिए.
मैं- क्यों भाभी, भैया का इतना बड़ा नहीं है क्या?
भाभी- उनका लंड तुम्हारे लंड का आधा है वैसे भी तुम्हारा लंड मोटा भी काफी है, जिस किसी की भी चूत में जाएगा, फाड़ के रख देगा.
यह कहकर भाभी हंसने लगीं, साथ ही मैं भी हंसने लगा.
मैं- प्लीज जो आज हुआ भाभी, ये बात किसी को मत बताना.
भाभी- ओके, पर एक शर्त पर.
मैं- कौन सी शर्त भाभी?
भाभी ने मेरा लंड तौलिया के ऊपर से ही पकड़ते हुए कहा- इसे मेरी चूत में डालना होगा.
यह कहकर भाभी ने तौलिया खींच लिया और मैं कुछ समझ पाता, इससे पहले उन्होंने नीचे बैठते हुए मेरे लंड को पकड़कर अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग, जैसे लंड को पूरा निगलने की कोशिश कर रही हों.
भाभी इस तरह से लंड चूस रही थीं, जैसे मानो लंड चूसाई में बहुत एक्सपर्ट हों. मेरा लंड एक लोहे की रॉड की तरह हो गया, जिसे भाभी ने चूस-चूसकर और कड़क कर दिया था. भाभी का इस तरह लंड चूसना मानो कोई परमसुख की प्राप्ति हो, भाभी जिस तरह मेरे लंड को पकड़कर मुंह में आगे-पीछे कर रही थीं, उससे लग रहा था कि वे मेरा सारा रस पी जाने को व्याकुल थीं.
तभी अचानक मेरे लंड से वो रस निकल ही गया, जिसे भाभी ने बड़ी शिद्दत से चूसने का मन बना लिया था. लंड से रस की पिचकारी निकलते ही भाभी ने मुंह से लौड़ा निकाला, जिससे कि मेरा सारा माल उनके मम्मों पर गिर गया. भाभी ने मेरे लंड रस को अपने मम्मों पर मलते हुए मेरे लंड को ऊपर से साफ कर दिया.
मैंने भाभी से पूछा- भाभी, आपको लंड चूसना इतना पसंद है, फिर तो भैया का लंड तो आप बिल्कुल नहीं छोड़ती होगी?
भाभी ने कहा- नहीं, तुम्हारे भैया का लंड इतनी देर तक खड़ा ही नहीं रहता है, मुंह में लेते ही वो अपना सारा रस निकाल देते हैं और फिर मेरी ये बेचारी चूत प्यासी की प्यासी रह जाती है. पर आज ये चूत प्यासी नहीं रहेगी क्योंकि आज इसको बहुत मोटा लंड खाने को मिलेगा, जिसे ये खाकर अपनी प्यास बुझाएगी. चलो आज तुम्हारे लंड की खैर नहीं.
इतने में सुजीत भैया भाभी को पुकारने लगे, जो कि भाभी और मैंने सुन लिया था.
तो भाभी ने कहा- तुम्हारे भैया को ड्यूटी भेजकर खेल करते हैं. अभी उनको ड्यूटी जाना है.
फिर भाभी कपड़े पहनकर चली गईं. थोड़ी देर बाद भैया के साथ चाचा जी और अजित भैया भी ड्यूटी के लिए निकल गए. उन सब के जाने के दस मिनट बाद चाची भी पड़ोस में चली गईं. मेरे पूछने पर भाभी ने बताया कि चाची आजकल पास में अपने भांजे की बहू से मिलने जाती हैं.
कुछ देर बाद चाची के जाते ही मैं अपने कमरे में आया और देखा कि भाभी मैक्सी पहने मेरे कमरे में बैठी हुई हैं. भाभी की मैक्सी काफी झीनी थी, ऊपर से भाभी ने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी, जिस कारण उनके बड़े-बड़े चुचे साफ-साफ दिख रहे थे. भाभी के चुचे देखकर मेरा सोया हुआ लंड फिर से खड़ा होने लगा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे फन उठाते लंड को भाभी ने भी देख लिया और उनके चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गई. मेरे भाभी के पास आते ही भाभी मेरे ऊपर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ीं. भाभी की मैक्सी के ऊपर से ही मैंने उनके बड़े-बड़े चुचे मसले और मैक्सी उतारकर उनको दोनों चूचों को आजाद कर दिया.
इसी बीच भाभी ने मेरा निक्कर उतारकर मेरे लंड पकड़कर जोरों से दबाने लगीं. हम दोनों बिस्तर पर गुत्थम गुत्था हो गए. मैंने भाभी के चूचों को पकड़कर होंठों को बहुत बुरी तरह चूमना शुरू कर दिया. भाभी मेरे खड़े लंड को दबाए जा रही थीं. फिर भाभी लंड को पकड़कर उसके करीब मुंह लाकर लंड चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. गोग, जैसे पूरी गहराई तक ले रही हों.
मैंने भी 69 में आकर भाभी की टांगों को फैला दिया और उनकी झांट रहित गुलाबी चूत पर अपने होंठ रख दिए, आह इह्ह ओह्ह ओह, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह, जैसे भाभी सिसकारियां ले रही हों. इस 69 की पोजिशन में भाभी ने मेरा लंड चूस-चूसकर मेरा लंड लाल कर दिया. मैंने भी भाभी की चिकनी चूत को बुरी तरह चाटी, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई, भाभी की सिसकारियां बढ़ती गईं. “Double Bhabhi Ki Chudai”
भाभी का पानी निकलते ही वे उठकर कहने लगीं- शुभम, अब जल्दी से पेल दो अपना लंड, मेरी चूत से बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने भाभी को सीधा चित्त लेटाया और अपना लंड उनकी चूत पर सेट करके उनकी गांड पकड़कर अंदर की तरफ धक्का दे मारा. मेरा थोड़ा सा लंड ही भाभी की चूत के अंदर क्या घुसा, भाभी की आंखें फैल गईं, उनकी दर्द के मारे चीख निकल गई.
मैंने फौरन उनके मुंह पर हाथ रखा और दूसरा जोरदार झटका दे मारा, जिससे मेरा आधा लंड भाभी की चूत में समा गया. भाभी जल बिन मछली की तड़फ उठीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय सुजीत मार डाला शुभम, तेरे इस मोटे लंड ने तो मेरी चूत फाड़ दी, प्लीज शुभम धीरे घुसाओ, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है.
मैं- ठीक है भाभी.
मैंने धीरे-धीरे भाभी को चोदने की स्पीड बढ़ाई और भाभी की चूत में आहिस्ता-आहिस्ता अपना पूरा लंड घुसा दिया. कुछ देर की पीड़ा के बाद भाभी अब मेरे लंड के मजा ले रही थीं- शुभम, सच में तुम्हारा लंड बड़ा तगड़ा है, मेरी चूत का तो तुमने भोसड़ा बना दिया है, आह.. और जोर-जोर से चोदो मुझे, आह..
मैं- भाभी, आपकी चूत इतनी टाइट है कि ऐसा लग रहा है, जैसे मैंने ही आपकी चूत की सील तोड़ी हो.
कुछ पांच मिनट की चुदाई के बीच में ही भाभी ने अपना सारा पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया. मैं गांड उठा-उठाकर भाभी को चोदता रहा. इस तरह भाभी एक बार और झड़ गई थीं. फिर मैंने भाभी को लंड पर बैठाने की मंशा जाहिर की. भाभी उठकर अपनी फूली हुई चूत को मेरे लंड पर टिकाकर बैठ गईं.
मेरा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ उनकी चूत की गहराइयों में समा गया. फिर इस आसन में मैंने भाभी को जमकर अपने लंड पर कुदाया. भाभी भी उछल-उछलकर लंड के मजा ले रही थीं, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई, जैसे हर धक्के पर सिसकारियां भर रही हों. “Double Bhabhi Ki Chudai”
भाभी ने फिर से लंड पर अपना सारा पानी निकाल दिया, जिससे मेरा लंड, मेरी जांघें सारी जगह भाभी के पानी से गीली हो गईं. मैंने भाभी को लेटाकर उनके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे, इससे भाभी की चूत पूरी तरह से खुल गई थी. फिर मैंने भाभी की चूत में लंड घुसाकर उन्हें खूब चोदा. कुछ देर बाद मैंने भाभी की चूत को अपने रस से भर दिया.
चुदाई होने के बाद भाभी ने मुझे बहुत प्यार किया और इस तरह भाभी के साथ मैंने दो दिन तक खूब चुदाई का मजा लिया. मैंने भाभी की छोटी सी चूत का भोसड़ा बना दिया था. फिर एग्जाम खत्म होने के बाद मैं वापस दिल्ली आ गया. दो दिन बाद भाभी का कॉल आया और उन्होंने बताया कि वे मुझे कितना मिस करती हैं.
भैया के लंड से भाभी अब भी कितनी प्यासी हैं. एग्जाम के 6 महीने बाद भाई भाभी दिल्ली आए. दिल्ली में उनकी काफी सहेलियां रहती हैं. दिल्ली में मेरा घर तीन फ्लोर तक बना हुआ है और हर फ्लोर पर दो रूम हैं. ग्राउंड फ्लोर पर दादा और फर्स्ट फ्लोर पर मॉम और मैं रहता हूं.
बाकी दो फ्लोर गेस्ट फ्लोर हैं. तीसरे फ्लोर को दो परिवारों को किराए पर दिया हुआ है, जिसमें दो बहुत ही खूबसूरत भाभियां रहती हैं. उनमें से एक का नाम प्रिया और दूसरी भाभी का नाम रागिनी था. आखिरकार वो दिन आ ही गया, जब 6 महीने बाद भाभी और सुजीत भैया का दिल्ली आना हुआ.
जैसे ही मुझे दिव्या भाभी के आने की खबर मिली, मैं लोवर पहने ही भैया भाभी को रिसीव करने के लिए स्टेशन पर पहुंच गया. कुछ देर इंतजार करने के बाद भैया भाभी आ गए. मुझे देखते ही भाभी की आंखों में चुदाई की चमक और मुख पर सेक्स से भरी हुई रौनक दिखने लगी. “Double Bhabhi Ki Chudai”
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ठीक वैसा ही कुछ मेरा हाल भी हो गया था. भाभी को देखते ही मुझे मन ही मन खुशी का अहसास होने लगा था. मुझे लगने लगा था मानो कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो. भाभी को 6 महीने बाद देखा था, अब भाभी उससे भी ज्यादा कयामत ढा रही थीं.
भाभी के चुचे जो कि पहले से बड़े नजर आ रहे थे और पीछे से उनकी बड़ी सी गांड जो कि और बड़ी नजर आ रही थी. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही भाभी हैं, जिन्होंने मेरा लंड चूस-चूसकर मेरा बुरा हाल कर दिया था. भाभी की उभरी हुई गांड देखकर मेरा भी लंड अब कुछ-कुछ अकड़ने लगा था, जिस कारण मेरे लोवर में थोड़ा आगे की तरफ उभार आने लगा था. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
भैया पास आते हुए भाभी को मुड़कर देखते हुए बोले- ये सामान अब तो शुभम को दे दो.
इसी बीच जैसे ही मैं अपने उभरे हुए लंड को एडजस्ट करने लगा, तो मेरी इस हरकत को भाभी ने देख लिया. हल्की सी मुस्कान उनके चेहरे पर आ गई. नजदीक आते ही भैया ने मुझे गले लगा लिया. फिर मैं बिंदास भाभी से भी गले मिला. भाभी से गले लगते ही मुझे सेक्सी भाभी के बड़े नुकीले चुचे मेरी छाती में लगने लगे.
इसी बहाने मैंने भाभी के भारी कूल्हों को सहला दिया. भाभी ने भी मुस्कान बिखेरते हुए मुझे सामान पकड़ा दिया. इसके बाद ऑटो पकड़कर हम सब घर आ गए. घर आते ही सब भाभी से खूब प्यार से मिले, क्योंकि भाभी पहली बार हमारे यहां आई थीं. भैया भाभी का सामान मॉम से सेकंड फ्लोर पर रखवा दिया. “Double Bhabhi Ki Chudai”
शाम होते ही दादा जी घूमने और मां, भैया के साथ बाजार निकल जाती हैं. इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैं भाभी के कमरे में चला गया. मैंने भाभी को पीछे से पकड़कर अपना खड़ा लंड भाभी की गांड पर सटा कर उनके चुचे दबाने लगा. भाभी पर हुए इस तरह के वार को भाभी ने भांप लिया और उन्होंने पीछे से मेरे लोवर में उभरे हुए लंड को पकड़ लिया.
भाभी- इतनी भी जल्दी क्या है देवर जी, अभी तो हम आए ही हैं और आपके लंड ने तो बगावत करनी शुरू कर दी.
भाभी ने ये कहा और लंड को दबाते हुए मुझे छेड़ा- देखो तो कितना रॉड की तरह तना हुआ खड़ा है.
मैं- भाभी ये जब से ही खड़ा हुआ है, जब से आपको स्टेशन पर देखा था. देखो ना ये अपनी चूत में जाने के लिए कितना मचल रहा है.
भाभी- हम्म मैं स्टेशन से ही देख रही थी तुम्हारे फूले हुए लंड को, जिसे तुम वहां भी एडजस्ट करने में लगे थे.
यह कहते हुए भाभी हंसने लगीं. मैं भी उनकी हंसी में हंसी मिलाते हुए हंसने लगा.
भाभी- और वो गले लगाते वक्त तुम्हें क्या मस्ती सूझ रही थी?
मैं- मैंने क्या किया भाभी?
भाभी- अच्छा तुमने कुछ नहीं किया, गले लगाते वक्त तुमने मेरे कूल्हे नहीं सहलाए थे क्या?
मैं- भाभी अब मैं क्या करूं, आपकी गांड को देखकर मुझसे रहा ही नहीं गया, इसलिए ये गुस्ताखी कर दी.
भाभी- क्यों ऐसा क्या है मेरी गांड में, जो तुमने इसे पकड़कर दबा दिया? देवर जी, अपने लंड को थोड़ा काबू में रखिए, अब तो मैं आपकी हूं ही.
ये कहते हुए भाभी ने मेरे लोवर में हाथ डाल दिया और मेरे लंड को बाहर निकालकर प्यार से लंड को सहलाने लगीं. भाभी के इस तरह लंड सहलाने से मैं उत्तेजित होकर भाभी के कपड़े उतारने लगा. भाभी भी पूरी मजबूती से लंड को पकड़कर हिलाने का काम शुरू कर दिया था. “Double Bhabhi Ki Chudai”
इसके बाद अचानक से भाभी नीचे बैठ गईं और केला की तरह पूरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग, जैसे पूरा गले तक निगल रही हों. मेरा पूरा लंड भाभी के मुंह में जाते ही मुझ पर न जाने कौन सा शैतान सवार हो गया, मैंने अपना लंड एकदम से भाभी के गले तक ठांस दिया.
इससे भाभी की आंखें फैलकर बड़ी हो गईं. उनकी सांस रुकने लगी, तो उन्होंने जल्दी ही मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दिया. लेकिन एक पल बाद ही खुद को संयत करते हुए भाभी ने फिर से मेरे लंड को चूसना चालू कर दिया. इसी बीच मैंने भाभी के पूरे कपड़े उतार दिए और भाभी को नंगी कर दिया.
भाभी भी मेरा लंड चूसते-चूसते मेरे ऊपर आ गईं. मैंने भी भाभी की दोनों टांगें चौड़ी कर दी. मैं अब उनकी गुलाबी चूत पर अपने होंठों को रख उनका भोसड़ा चाटने लगा, आह इह्ह ओह्ह ओह, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह, भाभी की सिसकारियां शुरू हो गईं. भाभी की चूत एकदम क्लीन थी और उसमें कोई मस्त सुगंध लगाई हुई थी, जिस वजह से मैं भाभी की चूत को अच्छी तरह चाटने लगा.
भाभी जी भी अपनी गांड उछाल-उछालकर अपना भोसड़ा मुझसे चटवाने में लग गईं. अपनी चूत चुसाई के मस्त आनंद से भाभी के मुंह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई. कुछ ही पलों बाद भाभी के भोसड़े से पानी टपकने लगा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मुझे भाभी की चूत का नमकीन शहद बड़ा ही मस्त और स्वादिष्ट लग रहा था, जिसे मैं बड़े प्यार से चाट रहा था. इसी बीच दिव्या भाभी मेरे लंड को मुंह से निकाल अपने नर्म हाथों से लंड को दबाने लगीं. उन्होंने मुझे खुले पड़े दरवाजे की तरफ इशारा किया. हम दोनों ही संभोग में इतने लीन हो चुके थे कि दरवाजा बंद करना भी याद नहीं रहा. “Double Bhabhi Ki Chudai”
मैं फौरन उठकर दरवाजा बंद करने गया. मैं अभी दरवाजे तक पहुंचा ही था कि अचानक सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए किसी की पायल की आवाज सुनाई दी. मैं फौरन खिड़की से झांककर उस नीचे जाती हुई आवाज को सुनते हुए उसे देखने की कोशिश करने लगा. मैंने देखा कि एक ब्लू साड़ी पहने हुए कोई नीचे उतर रही थी. मुझे उसका चेहरा या फिगर नहीं दिखाई दिया.
तभी भाभी ने मुझे इतनी गंभीरता से खिड़की से नीचे झांकते हुए देखा, तो कहने लगीं- क्या हुआ देवर जी, तुम नीचे क्या देख रहे हो?
मैं उनसे कुछ कहता, इससे पहले भाभी मेरे सिकुड़े हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए कहने लगीं- और अपने इस औजार को तो देखो, कैसा चूहे सा सिकुड़ गया है.
मैंने भाभी की बात सुनी, तो मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया.
मैंने कहा- भाभी, मैं सोच रहा हूं क्यों ना आज हम आंगन में चुदाई करें?
ये कहते हुए मैं हंसने लगा.
भाभी- नहीं नहीं देवर जी, आंगन में नहीं, अगर कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी.
मैंने अब तक अपने खड़े हो चुके लंड को हिलाया, तो भाभी अपनी दोनों टांगें मेरे सामने खोलती हुई बोलीं- और अब आओ ना शुभम, देखो ना इसमें क्या चुभ रहा है.
भाभी की क्लीन और गोरी चिट्टी चूत देखकर मेरा लंड फिर से लोहे का सरिया सा कड़क होकर खड़ा हो गया.
मैं- भाभी, आपकी ये नटखट सी चूत कुछ मूसल जैसा बड़ा सा खाना चाह रही है.
भाभी- हां बिल्कुल, और अब तुम्हारे जैसा लंड इसे जल्दी नहीं मिला, तो पता नहीं इसका क्या हाल हो जाएगा.
मैं बेड पर आकर लेटा ही था कि भाभी मुझ पर कूदते हुए झपट पड़ीं. भाभी के इस तरह झपटने से मेरा लंड अचानक ही भाभी की चूत को चीरता हुआ थोड़ा अंदर घुस गया, जिससे भाभी की चीख निकल गई. मैंने भाभी की दोनों टांगें चौड़ी करते हुए उनकी चूत के होंठों को खोला और अपना लोहे जैसे तना हुआ लंड भाभी की चूत पर रख भाभी के चूतड़ों को पकड़ अपना लंड भाभी की चूत की गहराइयों में घुसाने लगा.
मैंने महसूस किया कि भाभी की चूत अब भी उतनी ही टाइट है, जैसे पहले थी. मेरा लंड भाभी की टाइट चूत को फाड़ता हुआ असीम आनंद को प्राप्त करने लगा. भाभी की टाइट चूत भी आज मेरे लंड को ऐसे चबाए जा रही थी कि जैसे मेरे लंड को पूरा निगल ही जाएगी. सच में उनकी चूत मेरे लंड को निगल भी रही थी.
भाभी भी मस्त होकर अपनी टांगें चौड़ी करके अपना टाइट भोसड़ा मुझसे चुदवा रही थीं. मेरे लंड महाराज भी भाभी की चूत की गहराइयों को नापे जा रहे थे, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. ओह्ह ओह. इसी बीच मैंने भाभी को लंड पर कूदने का इशारा किया. जैसा कि भाभी लंड पर काफी अच्छे से कूदती हैं.
तो अब भाभी अपनी टांगें फैलाए हुए अपना खुला भोसड़ा मेरे लंड पर रखते हुए पूरा वजन मेरे लौड़े पर रख दिया. भाभी मेरे लंड पर पूरी बैठ गई थीं. मेरा लंड भी भाभी की चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर तक घुस गया था. इसके बाद तो आह क्या मदमस्त मजा आना शुरू हुआ, उम्म्ह… अहह… हय… याह, मेरी तो आहें निकल गईं.
भाभी जी क्या जमकर मेरे लंड पर कूदीं जिसे मैं शब्दों में तो बयान ही नहीं कर सकता, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई. भाभी ने मेरे लंड पर कूदते-कूदते मेरे लंड को अपने रस से बिल्कुल गीला कर दिया था. भाभी जी की गांड इतनी मस्त मचल रही थी कि क्या कहूं. उनकी गांड लंड पर कूदते हुए किसी को भी अपना शैदाई बना दे. “Double Bhabhi Ki Chudai”
भाभी के इस तरह गांड को उठा-उठाकर लंड पर बैठने की अदा मुझे बड़ी भा रही थी. तभी मुझे एक शरारत सूझी. भाभी के इस तरह लंड पर कूदते हुए खेल के दौरान ही मैंने भाभी के दोनों कूल्हों के बीच के छेद में उंगली घुसा दी, जिससे भाभी भी चिहुंक उठीं- शुभम, अब इसमें भी अपना ये मूसल डालोगे क्या?
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मैं- हां भाभी, पता नहीं कब से मुझे आपकी गांड मारने का मन कर रहा है.
भाभी- नहीं शुभम, उधर नहीं, उधर बहुत दर्द होगा, और तुम्हारा इस मूसल लंड से तो मेरे छोटे से छेद की मां चुद जाएगी. तुम्हारा लंड तो मेरी गांड को फाड़ देगा. फिर मैंने कभी पीछे से नहीं किया है शुभम, प्लीज पीछे की जिद मत करो.
मैं- भाभी प्लीज आज मत रोको, आज अपनी गांड मरवा ही लो, मैं फिर कभी ये जिद नहीं करूंगा.
भाभी- प्लीज शुभम अपने लंड का साइज तो देखो, तुम्हें लगता है मैं इसे पीछे बर्दाश्त कर भी पाऊंगी?
मैं- भाभी, प्लीज दर्द तो फर्स्ट टाइम सबको होता है, लेकिन इतना दर्द भी नहीं होता. वैसे भी अब तो मैं आपका पति हूं ना, तो प्लीज मुझे पीछे करने दीजिए. भाभी मैं तेल लगाकर करूंगा, जिससे कि आपको पेन बहुत कम फील होगा.
मेरी जिद के चलते आखिरकार भाभी ना-ना करके पीछे से करवाने के लिए राजी हो ही गईं. मैंने पास में रखी तेल से भरी बोतल उठाई और अपने लंड को पूरा तेल में तर कर लिया. इसी के साथ ही भाभी को मैंने घोड़ी की पोजिशन में बिठा दिया. भाभी के चूतड़ इतने भारी थे कि उनके दोनों चूतड़ आपस में सटे हुए थे, जिस वजह से भाभी की गांड का छोटा सा छेद वैसे ही दिखाई नहीं दे रहा था. “Double Bhabhi Ki Chudai”
मैंने भाभी के भारी चूतड़ों को थोड़ा सा खोला, जिससे कि उनका वो छोटा सा गुलाबी छेद मुझे दिखाई दे गया. उस मस्त गुलाबी फूल जैसे गांड के छेद में मुझे अपना मोटा लंड घुसाने की तमन्ना जाग उठी. मैंने भाभी के चूतड़ों को थोड़ा खोलकर छेद पर तेल लगा दिया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर भाभी के चूतड़ों को फैलाकर अपना लंड भाभी के छेद से सटा दिया. मेरे लंड का सुपारा उनकी गांड के फूल में लग चुका था. मैंने भाभी के भारी कूल्हे पकड़े और एक करारा स्ट्रोक जड़ दिया. मेरे लंड का सुपारा भाभी की गांड में घुस गया और भाभी तेज दर्द से चीख उठी थीं, आह्ह्ह.. ह्हीईई.. मार डाला.
इसी तरह केवल सुपारे को भाभी की गांड में आगे-पीछे करते हुए मैंने फिर से एक जोरदार स्ट्रोक दे मारा. इस बार मेरा आधे से ज्यादा लंड भाभी की टाइट गांड में घुस गया. भाभी दर्द से चीख उठीं- हाय मैं मर गई मां. मैंने फौरन से भाभी का मुंह दबा दिया और ताबड़तोड़ ऐसे कई झटके उनकी गांड पर लगाता चला गया, जिससे कि भाभी की गांड को गड्ढा बन गया.
भाभी जी मेरा पूरा लंड अपनी गांड में दर्द सहित लेती रहीं, उम्म्ह… अहह… हय… याह.. धीरे शुभम. अब जैसे ही भाभी की गांड में मेरा पूरा लंड अंदर घुसता, उनके भारी कूल्हे मेरी जांघों पर लगते, जिस वजह से मेरा लंड और बुरी तरह गांड को चोदता. भाभी भी अपनी दोनों टांगें खोलकर अपनी भारी गांड मेरे लंड पर लगा देतीं, जिससे मेरा मूसल भाभी की गांड फाड़ता हुआ अंदर-बाहर होकर उनको चोदता जा रहा था.
दसेक मिनट की गांड चुदाई के बाद अब मेरा लंड भी माल निकालने वाला हो गया था. मैंने फौरन भाभी की गांड से लंड निकालते हुए उनके भारी कूल्हों पर अपना सारा माल निकाल दिया. भाभी मेरे लंड से निकले हुए माल को खुद की गांड पर ही मलने का इशारा देते हुए उल्टी लेट गईं. “Double Bhabhi Ki Chudai”
मैं भाभी के कूल्हों पर गिरे हुए माल को अपने लंड से मलने लगा. आखिर भाभी ने गांड मरवा ही ली. इस तरह भाभी के ना-ना करते हुए भी मैंने उनकी गांड का स्वाद चख लिया था. थोड़ी देर बाद हम दोनों नहाने चले गए. फिर भाभी अपने काम में लग गईं.
एक घंटे बाद सुजीत भैया और मां भी आ गईं. मां और भैया के आते ही मैं अपने फ्रेंड्स से मिलने बाहर जा ही रहा था कि तभी सामने से ऊपर किरायेदार भाभी आती दिखाई दीं. भाभी की ब्लू साड़ी देखते ही मेरा दिमाग ठनक गया, क्योंकि ये तो वही साड़ी थी, जिसे मैंने चुदाई करते वक्त खिड़की से देखा था.
भाभी के सामने से आते हुए और लगातार मुझे देखकर नॉटी स्माइल करते हुए देखकर मेरा शक अब भाभी पर होने लगा था. इसके बाद कैसे भाभी की शरारती मुस्कान का सिलसिला बढ़ने लगा, मैंने इस बात को ऐसे महसूस किया कि जो रागिनी भाभी बिना मतलब के मुझसे बात नहीं करती थीं, आज वो मुझे अकेले पाकर कैसे कमेंट मारने लगी थीं.
इससे पहले कि मैं इस कहानी में आगे बढ़ूं, मैं आप सभी को रागिनी भाभी के बारे में बताना चाहूंगा. रागिनी भाभी हमारे घर के तीसरे फ्लोर के एक फ्लैट में रहती थीं. वो एक हाउस वाइफ थीं. रागिनी भाभी की शादी को 5 साल हो गए थे, उनकी एक 4 साल की छोटी लड़की भी थी.
भाभी के हज्बैंड यानी कि भैया का नाम दीपक था, जो कि पेशे से एक टूरिस्ट वैन के ड्राइवर थे. इस वजह से अक्सर बाहर चलते ही रहते थे. आए दिन वे कहीं बाहर घूमने के लिए भी बुकिंग लेते रहते थे. आज से 2 साल पहले रागिनी भाभी और दीपक भैया को रूम की तलाश थी, इसलिए हमने उनको कमरा रेंट पर दे दिया था. “Double Bhabhi Ki Chudai”
भाभी एक शांत स्वभाव की 27 साल की पतली सी, छोटे चूचों वाली माल किस्म की औरत हैं. भाभी अपने काम से काम रखती हैं. मेरा ऊपर आना-जाना किसी न किसी बहाने से लगा रहता था. जब भी मम्मी कपड़े धोती थीं तो मैं ही उन धुले हुए कपड़ों को ऊपर सूखने डालने जाता था.
तीसरे फ्लोर की ग्रिल पर ही मैं कपड़े सुखाने डालता था. इसलिए जब भी मेरा ऊपर जाने का चक्कर लगता था, मैं भाभी के कमरे में जरूर झांक लेता था. मुझे अक्सर भाभी एक मैक्सी में ही दिखती थीं. उनकी मैक्सी का गला इतना बड़ा होता था कि अगर भाभी कभी झुकी हुई दिख जाती थीं, तो मुझे उनकी दोनों चुचियां बाहर आती हुई दिखने लगती थीं.
मेरी भी हमेशा यही कोशिश रहती थी कि मैं भाभी को कुछ ऐसी पोजिशन में देखने का प्रयास करूं, जिसमें मुझे उनके मस्त चुचे हिलते हुए दिख जाएं. इस बात को भाभी ने भी ताड़ लिया था. इसलिए भाभी मुझे देखते ही सबसे पहले अपनी मैक्सी का गला ठीक करती थीं.
रागिनी भाभी को लेकर मेरे मन में सिवाए उनके मस्त जिस्म को देखने के अलावा कभी कोई बुरे विचार नहीं आए थे क्योंकि हम एक दूसरे से ना के बराबर बात करते थे. वैसे भी रागिनी भाभी का फिगर दिव्या भाभी जितना सेक्सी तो नहीं था, जिसे देखकर मेरा लंड भी सलामी दे दे. मतलब रागिनी भाभी से मेरा अब तक ऐसा ही बर्ताव रहता था.
लेकिन जब से रागिनी भाभी ने मुझे दिव्या भाभी के साथ चुदाई करते देखा था. तब से उनके बर्ताव में बदलाव आने लगा था. मैंने भी उनकी चाहत को समझ लिया था कि जो भाभी अपने काम से काम रखती थीं, आज वही भाभी मुझे देखकर स्माइल पास करती हैं और अकेले मिलने पर कमेंट भी मारती हैं. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनके इस बदलते बर्ताव से मुझे टेंशन होने लगी थी, क्योंकि मुझे थोड़ा डर लगा रहता था कि कहीं रागिनी भाभी, मेरी मम्मी को सब कुछ ना बता दें. यही सोचते हुए मुझे उनसे जाकर बात करना उचित लगा. मैं दिव्या भाभी के जाने के दूसरे ही दिन रागिनी भाभी से बात करने के लिए ऊपर तीसरे फ्लोर पर गया. उस वक्त दिन के 3 बज रहे थे. “Double Bhabhi Ki Chudai”
मैंने रागिनी भाभी के कमरे के बाहर खड़ा होकर उन्हें आवाज दी, पर भाभी की कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उस टाइम भाभी के कमरे का दरवाजा खुला था, बस एक पर्दा लगा था. मैंने पर्दे को थोड़ा खिसकाकर अंदर झांका, अंदर झांकते ही मेरी गांड फट गई. भाभी और उनकी 4 साल की बेटी सो रही थी.
भाभी के दोनों चुचे मैक्सी के गले से बाहर की तरफ निकले हुए थे. मैं उनके पर्दे को छोड़कर अपने रूम में नीचे जाने लगा. मुझे अभी भी रागिनी भाभी के नंगे चुचे वासना से भड़का रहे थे. नीचे जाते ही मैं जल्दी से टॉयलेट में घुस गया और भाभी के नाम की मुठ मारने लगा. बस पांच मिनट में लंड हल्का हो गया तो मैं अपने रूम में आकर सो गया.
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दो घंटे की गहरी नींद लेने के बाद मैं उठ गया. थोड़ी देर बाद मां भी आ गई थीं. मां बताने लगीं कि तेरी दिव्या भाभी का कॉल आया था, तेरी भाभी वहां अभी और 2-3 दिन रहने की इजाजत मांग रही थीं क्योंकि तेरी भाभी की सहेली के पति काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए न्यूयॉर्क जा रहे हैं. जिस कारण दिव्या वहां और रुकने की इच्छा जाहिर कर रही थीं, मैं उसकी बात मान गई हूं.
मैं मां की बात सुनकर ‘हूं हां’ कहकर चुप ही रहा. फिर मैं खाना खाकर सोने के लिए अपने रूम में आ गया. बिस्तर पर लेटते ही दोपहर का वही सब नजारा मेरी आंखों के सामने आ गया कि कैसे रागिनी भाभी अपने चूचों को बाहर निकाले सो रही थीं. यही सोचते हुए मेरा लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया और मैं फिर से टॉयलेट में जाकर भाभी के नाम की मुठ मारने लगा.
अब मेरे मन में रागिनी भाभी की चुदाई के विचार आने लगे थे. इसलिए मेरा मन फिर से भाभी के चुचे देखने का होने लगा. मैंने सोचा कि भाभी को देखने का कल वाला समय ही सही रहेगा क्योंकि रात में जाने में खतरा था. अगर भाभी दिन में मुझे देखतीं, तो मैं बहाना बना सकता था कि मैं काम से आया था, लेकिन रात में क्या बहाना बनाया जा सकता था. “Double Bhabhi Ki Chudai”
दूसरे दिन मैं जानबूझकर उसी टाइम पर ऊपर भाभी के कमरे के बाहर आ गया. उधर कल जैसी ही स्थिति आज भी थी. मैंने फिर से पर्दा खिसकाकर अंदर झांकने की कोशिश की. मैंने देखा कि आज उनकी एक चूची मैक्सी के गले के बाहर थी और भाभी की मैक्सी उनकी जांघों तक उठी हुई थी जिससे भाभी की बिना पैंटी की चूत दिख रही थी.
हालांकि उनकी काली झांटों के कारण चूत तो ठीक से नहीं दिखी लेकिन नजारा बड़ा गर्म था. इस सीन को देखकर मेरा लंड एकदम रॉड की तरह खड़ा हो गया. मैंने आज थोड़ी हिम्मत की और जैसे ही थोड़ा पास जाकर देखने की कोशिश की कि उतने में ही भाभी ने करवट ले ली.
उनके करवट लेने से मेरी गांड फट के हाथ में आ गई और मैं हड़बड़ाहट से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा, जिससे दरवाजे के पास टेबल पर रखा ग्लास गिर गया. गिलास गिरने की आवाज से भाभी की झट से आंख खुल गई. भाभी मुझे देखते ही अपनी जांघों से मैक्सी ठीक करने लगीं और अपना बाहर निकला हुआ मम्मा मैक्सी के अंदर कर लिया. मैं चुपचाप सिर झुकाकर वहीं खड़ा हो गया.
रागिनी भाभी गुस्से से कहने लगीं- शुभम, तुम्हें इस तरह मेरे कमरे में अंदर आकर मुझे देखते हुए शर्म नहीं आई?
मैं- भाभी सॉरी, वैसे भी मैंने आपको आवाज दी थी. पर जब आपका कोई उत्तर नहीं मिला, तब मैं अंदर आ गया.
जबकि आज मैंने भाभी को आवाज दी ही नहीं थी.
भाभी- अच्छा तो इसका मतलब ये हुआ कि तुम सीधा अंदर आ जाओगे और कल भी तुम आए थे ना?
मैं उनके मुंह से ये सुनकर चौंक गया. मेरे मुंह से अचानक ही निकल गया कि नहीं भाभी, मैं तो आज ही आया हूं और आपने मुझे देख भी लिया. भाभी अपने मुखड़े पर बिल्कुल हल्की सी स्माइल के साथ, जो कि उन्होंने बिल्कुल शो नहीं होने दी थी, कहने लगीं- अच्छा आज देख लिया, नहीं तो तुम क्या कल भी आते? सच बताओ तुम कल भी आए थे न क्योंकि कल ये पर्दा ऐसे भी आधा खुला हुआ था? “Double Bhabhi Ki Chudai”
उनकी इस बात से मेरी फट गई. मैंने इस बात का ध्यान ही नहीं दिया था. मैं हड़बड़ाते हुए कहने लगा- नहीं भाभी, वो तो मैं ऐसे ही बस कपड़े सुखाने आया था.
भाभी- झूठ मत बोलो शुभम, कल आंटी जी ने कोई कपड़े धोए ही नहीं थे, ये बात तुम भी जानते हो.
मैं- सॉरी भाभी.
भाभी- मुझे ऐसे देखते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती क्या? ऑश, सॉरी में तो भूल ही गई थी, शर्म और तुम्हें, जो कि अपने भाई की वाइफ को ऐसे चोदता हो, उसे शर्म किधर से आती होगी.
भाभी के मुंह से खुल्लम खुल्ला ‘चोदता हो’ जैसे शब्द सुनकर मेरे लंड में हलचल होने लगी.
मैं- भाभी प्लीज मेरी बात पर यकीन कीजिए, मैंने आज आपको आवाज दी थी, आपने नहीं सुना था, तब मैंने पर्दा हटाकर देखा था, तो आप सो रही थीं. जैसे ही मैं जाने को हुआ, ये ग्लास गिर गया. सॉरी भाभी, मेरा वो मतलब नहीं था जैसा आप सोच रही हो. मैं तो बस इसी बारे में एक रिक्वेस्ट करने आया था आपसे बात करने के लिए.
भाभी- किस बारे में बात करने के लिए आए थे?
मैं- भाभी जो अभी आपने कहा, आपने उस दिन मुझे और दिव्या भाभी को चुदाई करते हुए देख लिया था, इसलिए मैं आपसे रिक्वेस्ट करने आया था कि प्लीज इस बात को मम्मी को कभी ना बताएं.
भाभी- वाह बेटा, चुदाई करते वक्त तुम्हें ये बात नहीं सूझी थी. जब तो काफी मजे से चूत चाट रहे थे तुम अपनी भाभी की, और वो भी बड़े चाव से देवर का लंड चूस रही थी.
अब खुल्लम खुल्ला लंड चूत चुदाई जैसे शब्द माहौल की कामुकता को खोलने लगे थे.
मैं- सॉरी भाभी.
भाभी- वैसे चल कब से रहा ये सब दिव्या और तेरा? और मुझसे झूठ मत बोलना.
मैं- भाभी उस दिन सेकंड टाइम था.
भाभी- फर्स्ट टाइम कब हुआ था?
मैं- फर्स्ट टाइम, वो जब मैं एग्जाम देने एमपी गया था, तब वहां हुआ था.
भाभी- बहुत पक्की चुदक्कड़ लगती है ये दिव्या, जो एक साथ दो लंड खा रही है, एक अपने पति का और एक तेरा. उसके पति से उसका पूरा नहीं होता क्या, जो अब वो तेरे लंड के पीछे पड़ी है?
भाभी के इस तरह के शब्द सुनकर मेरे लंड में हलचल होने शुरू हो गई और लंड धीरे-धीरे भाभी के सामने निक्कर में ही टेंट बनाने लगा जिसको भाभी ने भी नोटिस कर लिया. मैं भी रागिनी भाभी के सामने खुलकर चुदाई भरे शब्द इस्तेमाल करता हुआ बात करने लगा, जिससे भाभी गर्म हो जाएं. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं- दरअसल भाभी, दिव्या भाभी बोलती हैं कि सुजीत भैया का लंड मेरे लंड से छोटा है और मेरे जितना मोटा लंड भी नहीं है. जिस वजह से दिव्या भाभी भैया के संग चुदाई में प्यासी की प्यासी रह जाती हैं.
मैं देख रहा था कि रागिनी भाभी अब मेरे खड़े लंड को निहार रही थीं.
भाभी- अच्छा जभी तेरा ये ऐसे निक्कर फाड़ के बाहर आने को हो रहा है.
मैं भाभी के सामने निक्कर के ऊपर से लंड को एडजस्ट करते हुए कहने लगा- नहीं भाभी, ये तो बस आपकी रिस्पेक्ट में खड़ा हुआ है. ये सुनते ही भाभी के मुखड़े पर कटीली मुस्कराहट आ गई- अच्छा दिखा तो जरा अपना लंड, मैं भी तो देखूं कि ये सही से रिस्पेक्ट कर भी रहा है या नहीं.
मैंने अंजान बनते हुए पूछा- मतलब भाभी?
भाभी- अब लंड दिखा रहा है या वहीं आकर निक्कर के ऊपर से पकड़ूं इसे?
मैं भाभी के बेड के करीब आ गया. करीब आते ही भाभी ने निक्कर के ऊपर से मेरा लंड पकड़कर दबा दिया- वाकई शुभम, बड़ा सॉलिड लंड है तेरा.
मैं- भाभी लेकिन आप वो बात मम्मी को तो नहीं बताओगी ना?
भाभी- चूतिए, अगर बताना ही होता, तो मैं उसी दिन बता सकती थी, लेकिन जब से तेरा लंड दिव्या की चूत चोदते हुए देखा है ना, तब से यही सोचकर मेरी चूत पता नहीं कितनी बार पानी छोड़ चुकी है. मेरे नीचे पता नहीं अजीब सी इचिंग होने लगती है, जब भी मैं वो लम्हा याद करती हूं, जिसमें तुम दिव्या की चूत चाट रहे थे. “Double Bhabhi Ki Chudai”
मैं मन ही मन समझ गया था कि रागिनी भाभी भी अपनी चूत मुझसे चटवाना चाहती हैं. भाभी ने काफी गर्म होते हुए मैक्सी के ऊपर से अपनी चूत को सहलाया- मुझे कल भी पता था, जब तुमने कल मुझे आवाज दी थी. मैंने जानबूझकर अपने मम्मे बाहर करके सोते हुए रहने का ड्रामा किया था.
मैं देखना चाह रही थी कि तुम मेरे मम्मे देखकर क्या करते हो. लेकिन तुम कल चले गए थे. आज मैंने ही वहां टेबल पर किनारे पर जानबूझकर ग्लास रखा था ताकि मेरे करवट लेते टाइम तुम जल्दी से जाने की सोचो, तो पहले पर्दे से फिर ग्लास से टकराने से वो गिर जाए.
मैं भाभी की प्लानिंग सुनकर टोटली शॉक्ड था. मुझे जानकर इतनी हैरानी हो रही थी कि मैं रागिनी भाभी की चुदास को शब्दों में बयान नहीं कर सकता. फिर आखिरकार भाभी के नर्म हाथों में मेरा लंड आ गया था, जिसे भाभी सहलाने लगी थीं. मैंने भी भाभी के छोटे-छोटे चुचे मैक्सी के ऊपर से पकड़कर धीरे-धीरे मसलने शुरू कर दिए, भाभी की सांसें तेज हो गईं, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह, जैसे हल्की सिसकारियां निकलने लगीं.
भाभी ने मेरे लंड को निक्कर से बाहर निकाल लिया और नर्म उंगलियों से सुपारे को सहलाने लगीं, ऊपर-नीचे हिलाने लगीं, मेरे लंड से पानी टपकने लगा. मैंने भाभी की मैक्सी का गला नीचे खींचकर उनके छोटे लेकिन सख्त निप्पलों को मुंह में लेकर चूसने लगा, एक चूचे को चूसते हुए दूसरे को उंगलियों से मरोड़ता रहा, भाभी की आंखें बंद हो गईं और वे मेरे बालों में उंगलियां फेरने लगीं, ओह्ह.. शुभम.. आह.. कितना अच्छा लग रहा है. “Double Bhabhi Ki Chudai”
फिर मैंने भाभी की मैक्सी पूरी उतार दी, भाभी बिल्कुल नंगी हो गईं. मैंने उनके छोटे चुचों को जीभ से चाटा, निप्पलों को काटा, फिर पेट पर किस करते हुए नीचे आया, भाभी की जांघों को चूमा, अंदरूनी जांघों को चाटा, भाभी की सिसकारियां बढ़ गईं, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह. मैंने उनकी झांटों वाली चूत पर नाक रगड़ी, सुगंध सूंघी, फिर उंगली से चूत के होंठ अलग करके क्लिट को जीभ से छुआ.
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भाभी की गांड उछल गई, ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई. तभी भाभी ने भी मेरे लंड को पकड़ लिया. उन्होंने मेरे निक्कर में हाथ डालकर लंड को बाहर निकाल लिया था. कुछ देर में ही लंड एकदम भाभी के मुंह के सामने तन्ना रहा था. भाभी भी मेरे गुलाबी सुपारे को बड़ी ललचाई नजर से देख रही थीं. मैं भाभी के मुंह में लंड डालने को हुआ, पर भाभी ने लंड चूसने से मना कर दिया.
भाभी- प्लीज शुभम, मैं ये सब नहीं चूसती हूं, तुम्हारे भैया का लंड भी मैंने आज तक नहीं चूसा है.
मैं भाभी को इमोशनल करते हुए बोला- भाभी हमने भी तो कभी चुदाई नहीं की है, आपको मेरी कसम है, आज सिर्फ मेरे कहने पर कर लो, इसके बाद मैं कभी आपको लंड चूसने के लिए नहीं कहूंगा.
भाभी- ठीक है, शुभम आज तुम्हारे लंड का रस चखकर देखती हूं.
भाभी के मुंह में लंड देते हुए मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया. भाभी मेरा पूरा लंड मुंह में लेकर बड़े मजे से चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग, जैसे पहली बार चूस रही हों लेकिन धीरे-धीरे एक्सपर्ट बनती जा रही हों.
फिर भाभी ने अपनी चूत की तरफ इशारा किया. मैंने फौरन भाभी को अपने ऊपर खींच लिया और 69 में आकर भाभी की झांटों भरी चूत पर अपने होंठ रख दिए. अब मैं अपनी जीभ से भाभी की चूत चाटने लगा, झांटों को मुंह में लेकर खींचा, क्लिट को चूसा, उंगली अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा, आह इह्ह ओह्ह ओह, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह, भाभी की सिसकारियां निकलने लगीं.
दूसरी तरफ भाभी भी मेरे लंड को काफी अच्छे से चाट रही थीं, सुपारे को चूस रही थीं, अंडों को मुंह में ले रही थीं. कुछ ही देर बाद भाभी गांड उठा-उठाकर अपनी चूत मेरे होंठों पर रगड़ने लगीं. जिससे कुछ देर बाद ही उनकी चूत का लावा मेरे मुंह पर फूट पड़ा. “Double Bhabhi Ki Chudai”
भाभी ने अपना सारा कामरस मेरे मुंह पर निकाल दिया, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई. मेरा लंड भी झड़ गया था जिसे भाभी ने भी पूरा सफाचट किया हुआ था. मैं मन ही मन हंस रहा था कि रागिनी भाभी भी कितनी बड़ी चुसक्कड़ निकली, कहां तो लंड चूसने में कतरा रही थीं और कहां मेरे लंड का रस चाटकर साफ कर दिया.
खैर, अब मैं उठकर भाभी के ऊपर लेट गया और मैंने भाभी की टांगों को अच्छे से चौड़ा कर दिया ताकि लंड बेहिचक सीधा भाभी जी की चूत में घुस जाए. मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर सेट किया और एक जोरदार झटका दे मारा, जिससे मेरा आधा लंड सीधा भाभी की चूत में घुस गया.
इसी के साथ ही भाभी की आंखें बड़ी हो गईं और एक दर्द भरी कराह भी निकल गई. मैंने उनकी आह कराह को इग्नोर किया और ताबड़तोड़ 5-6 झटकों में अपना पूरा लंड भाभी की चूत में घुसेड़ डाला. भाभी की मादक सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… शुभम.
मैं भाभी की चूत पर धड़ाधड़ वार करता हुआ कहने लगा- आह भाभी, कैसा लगा मेरा लंड?
भाभी- डंडा सॉलिड है तुम्हारा शुभम, तुम्हारे भैया से भी मोटा लंड है तुम्हारा, ऐसा लग रहा है तुम्हारा ये लंड मेरी चूत को फाड़ ही देगा.
कुछ देर बाद मैंने भाभी के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया. इससे भाभी का भोसड़ा खुलकर मेरे सामने आ गया था. भाभी के भोसड़े पर लंड रखकर मैं जोरदार झटके मारने में लग गया. भाभी भी मजे से अपनी गांड उठा-उठाकर अपनी चूत चुदवाने का मजा लूट रही थीं. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
इसके बाद मैंने भाभी को अपने लंड पर बैठने के लिए कहा. ये मेरा फेवरिट पोज है. मैं सीधा लेट गया और भाभी टांगें खोलकर मेरे लंड पर बैठने लगीं. उनके मेरे लंड पर बैठते ही मेरा 6 इंच का लंड उनकी चूत को फाड़ता हुआ पूरा का पूरा भाभी की चूत में फंस गया, जिससे भाभी को थोड़ा दर्द होना शुरू हो गया. भाभी ने दर्द के मारे अपनी गांड थोड़ा ऊपर उठा ली. मैंने नीचे से भाभी की चूत में धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. “Double Bhabhi Ki Chudai”
अब भाभी को मेरे खड़े लंड पर जंप करने में आसुजीत हो गया था. आखिरकार वही हुआ, भाभी मस्त हो गईं. अब मैं अपनी स्पीड बढ़ाकर जोर-जोर से उनकी गांड उठाकर उन्हें चोदने लगा. भाभी जी ने भी मेरे खड़े लंड पर मजे से जंपिंग करना शुरू कर दिया, जिससे मुझे परम आनंद की प्राप्ति होने लगी, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई, जैसे हर जंप पर सिसकारियां भर रही हों.
इस बार फिर से भाभी ने मेरे लंड पर अपना कामरस निकाल दिया, जिससे मेरा लंड पूरा भाभी के माल में लथपथ हो गया. अब मेरा लंड और चिकना हो गया था. मैं भाभी की चिकनी चूत की तेजी से चुदाई करने लगा. अंत मैं भी भाभी की चूत में ही डिसचार्ज हो गया.
कुछ देर बाद हम एक दूसरे को साफ करने के लिए बाथरूम में आ गए. भाभी मुझे नहलाने लगीं, मेरे लंड को अच्छे से साफ करने लगीं और अपने माल से लथपथ अपनी चूत को भी साफ करने लगीं. इसके बाद रागिनी भाभी मेरे लंड की मुरीद हो गईं. इसी तरह जब भी दीपक भैया लंबे टूर पर जाते, भाभी और मैं जमकर चुदाई का मजा ले लेते.
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