Didi Double Chudai Kahani
मेरा नाम सोनाक्षी है। मैं बुलंदशहर की रहने वाली हूं। मैंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है। मेरा कामुक बदन किसी भी लड़के के मन को डांवांडोल कर सकता है। मेरी नौकरी इंफोटेक में लग गई और मुझे दिल्ली जाना पड़ा। दिल्ली रह कर मैं एकदम बिंदास हो गई थी। शराब सिगरेट मेरे लिए आम बात हो गई थी। Didi Double Chudai Kahani
जब तब मैं अपने ऑफिस के बॉस से भी चुद जाती थी। जिससे मुझे चुदाई का मजा तो मिलता ही था साथ ही मेरा ऑफिस में कुछ दबदबा भी बन गया था। मेरा भाई जो कि मुझसे 4 साल छोटा था। मम्मी पापा ने उसे मेरे पास आईएएस की कोचिंग के लिए दिल्ली भेज दिया। वो मेरे पास रहने लगा।
बात उस दिन की है जिस दिन मैं पार्टी करके फ्लैट पर पहुंची। उस दिन मैंने कुछ ज्यादा ही शराब पी रखी थी। मैं खुद के काबू में नहीं थी। मेरी सहेली ने मुझे फ्लैट पर छोड़ा था। मैंने मिनी स्कर्ट और टॉप पहन रखा था पर मुझे इस तरह कपड़े पहन कर सोने की आदत नहीं है।
मैं अपनी आदत के चलते वाशरूम में गई और एक छोटा सा गाउन पहन लिया। मैं इतनी ज्यादा नशे में टल्ली थी कि ब्रा और पैंटी दोनों ही नहीं पहनी। मैं ऐसे ही जाकर लेट गई और सो गई। मेरा भाई और मैं दोनों एक ही बेड पर सोते हैं। वो उस वक्त टीवी देख रहा था।
मेरे सोने के कुछ देर बाद मुझे अहसास हुआ कि मेरे मम्मे और चूत पर कुछ चल रहा है। मैंने ध्यान दिया तो महसूस हुआ कि मेरा भाई मेरे एक मम्मे को चूस रहा था और मेरी चूत में उंगली कर रहा था। मैं कुछ नहीं बोली। दारू के नशे में मुझे न जाने क्यों वो सब अच्छा लग रहा था।
कुछ देर बाद उसने अपना लंड मेरे मुँह में घुसाने की कोशिश की। उसे शायद पता था कि उसकी बहन इतनी ज्यादा नशे में है कि पता ही नहीं चलेगा। उसने अपने लंड के सुपारे से मेरे होंठों को धीरे से खोला और अपना लंड धीरे धीरे मेरे मुँह में घुसाना शुरू कर दिया। मैंने भी उसके लंड को अन्दर ले लिया।
वो अपने खड़े लौड़े को मेरे मुँह में अंदर बाहर करने लगा। मैंने भी कोशिश की कि उसके लंड पर दांत ना लगे और उसे पता भी न चले कि मैं ऐसा कर रही हूं। साथ ही वो मेरे मम्मे जोर जोर से मसल रहा था। उसके उंगलियों की पकड़ मेरे निप्पलों को दबाती जा रही थी, जिससे मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ रही थी।
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फिर वो मेरी मुँह की चुदाई के बाद मेरी चूत के पास आ पहुंचा। उसने मेरी टांगें फैला कर चूत खोल दी और अपना मुँह चूत पर लगा दिया। वो मेरी चूत एकदम पागलों की तरह चाट रहा था। उसकी गर्म सांस मेरी भीगी चूत की त्वचा पर पड़ रही थी। उसकी जीभ मेरी क्लिटोरिस को बार-बार चाट रही थी, फिर अंदर घुसकर चूत की दीवारों को चाटने लगी।
मेरी चूत से निकलता रस वो बिना रुके पी रहा था, उसकी जीभ हर बार अंदर बाहर हो रही थी और चूसने की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। कुछ मिनट तक चूत का रस पीने के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत की फांकों में फंसाया और एकदम से घुसा दिया। जैसे ही उसने ऐसा किया मेरी चीख निकल गई क्योंकि उसका लंड बहुत बड़ा था।
उसके मोटे सुपारे ने मेरी टाइट चूत को पूरी तरह फैला दिया था। दर्द के साथ-साथ अंदर तक भरने का अहसास मुझे नशे में और भी उत्तेजित कर रहा था। उसको अहसास हो गया कि मैं जग रही हूं पर वो कुछ नहीं बोला। जोर जोर से धक्के देता रहा और मुझे चोदता रहा।
हर धक्के के साथ उसका लंड मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था, उसके अंडकोश मेरी गांड से टकरा रहे थे। मैं भी नशे में होने का ड्रामा करती हुई आह आह करके अपने भाई के लंड से चुदती रही। मेरी सांसें तेज हो गई थीं, मेरी चूत उसके लंड के इर्द-गिर्द सिकुड़ रही थी।
बीस मिनट तक अपनी बहन की चूत चोदने के बाद उसने अपना सारा वीर्य मेरे मुँह में भर दिया। उसका गाढ़ा, गरम वीर्य मेरे मुंह में फूट-फूटकर गिरा, मैंने उसे निगलने की कोशिश की लेकिन कुछ मेरे होंठों से बाहर बह गया। फिर वो मेरी चूत को किस करके और चाट कर संतुष्ट हो गया। उसने मेरे गाउन को बंद कर दिया और सो गया। मैं भी सो गई।
अगली सुबह जब मैं जगी तो रोज की तरह नाश्ता तैयार कर रही थी। मैं हमेशा पहले ब्रश करके और फ्रेश होकर ब्रेकफास्ट बनाती थी तो वैसा ही आज कर रही थी। मेरा भाई रोज की तरह सोया हुआ था। आधा नाश्ता बन चुका था तभी मुझे सुनाई दिया कि भाई जग गया है।
वो मेरे पीछे आया और उसने पीछे से मेरे मम्मे पकड़ कर गाउन से बाहर निकाल दिए और जोर जोर से दबाने लगा। उसके हाथ मेरे नरम, भरे हुए स्तनों को मसल रहे थे, उंगलियां निप्पलों को खींच रही थीं। मैंने उसे धक्का देकर पीछे कर दिया और चिल्लाने लगी ये क्या कर रहे हो?
वो मेरे पास आया और बड़ी मासूमियत से बोला दीदी मुझे पता है आप कल रात जग रही थीं। इतना बोलने के साथ ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुस गई, मेरी जीभ से लिपट गई। उसका हाथ सीधे मेरी चूत पर आ गया।
मैंने ब्रा पैंटी अभी भी नहीं पहनी थी तो उसे मेरी चूत के अन्दर हाथ ले जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई। उसने किस करते हुए ही अपना लंड निकाला और मेरी चूत में पूरा घुसा दिया। मेरी फिर से आह निकल गई। वो जानता था कि मुझे चुदने में मजा आ रहा है।
उसके गर्म और मोटे लंड का सुपारा मेरी भीगी चूत की फांकों को अलग करते हुए एक ही झटके में पूरी गहराई तक धंस गया। मेरी चूत की दीवारें उसके मोटे लंड को कसकर जकड़ लीं। दर्द और आनंद का मिला-जुला एहसास मेरे पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी सांसें मेरे चेहरे पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं और उसकी जीभ मेरी जीभ से लगातार उलझ रही थी। उसने मुझे किचन की पट्टी पर बैठाया और चोदना शुरू कर दिया। मेरी टांगें उसकी कमर के चारों ओर लिपट गईं। हर जोरदार धक्के के साथ उसका लंड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा था, उसके अंडकोश मेरी गांड से टकरा-टकराकर चट-चट की आवाज कर रहे थे।
पांच मिनट तक चोदने के बाद उसने अपना मुँह मेरी चूत में घुसा दिया और जोर जोर से चूत चाटने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी सूजी हुई क्लिटोरिस को चूस रही थी, फिर पूरी चूत को लपलपा कर चाट रही थी। मेरी चूत से निकलता रस वो बिना रुके पी रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका सर और जोर से अपनी चूत में दबा दिया।
मेरी उंगलियां उसके बालों में फंसी हुई थीं। उसकी नाक मेरी क्लिटोरिस से रगड़ खा रही थी। उसके बाद उसने मुझे आधे घंटे तक चोदा। हर पोजीशन बदलते हुए वो मेरी चूत को लगातार भरता रहा। कभी तेज धक्के, कभी धीमे और गहरे। मेरी चीखें और आहें पूरे किचन में गूंज रही थीं।
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फिर मुझे ऑफिस जाना था तो मैं फटाफट नहाने चली गई। मेरा भाई बिल्कुल पागल हो गया था। जैसे ही मैं नहा कर बाहर आई उसने मेरी टॉवल निकाल दी और सीधे मेरी चूत में मुँह घुसा दिया। उसकी जीभ मेरी अभी भी गीली चूत को चाटने लगी। पानी की बूंदें उसके चेहरे पर गिर रही थीं।
मैंने मुस्कुरा कर कहा पागल हट जा मुझे अभी ऑफिस जाना है। पर वो हटने को तैयार ही नहीं था और बार बार बस एक ही चीज कह रहा था मुझे आपकी चूत खानी है। उसकी आवाज में भूख साफ झलक रही थी। मैंने उसे दिलासा देने के लिए कह दिया कि जब ऑफिस से वापस आऊंगी तब खा लेना। वो हट गया और मैं ऑफिस चली गई।
मैं ऑफिस से 7 बजे वापस आ गई। मैंने गेट पर नॉक किया और भाई ने गेट खोला। पर जो मैं देख रही थी वो मैंने बिल्कुल भी नहीं सोचा था। वो पूरा नंगा अपना लंड हवा में लहराते हुए खड़ा था। उसका लंड पूरा खड़ा और नसों से फूला हुआ था। मेरे अन्दर घुसते ही उसने अपना मुँह मेरे मुँह पर रख दिया और उसका हाथ सीधे मेरी चूत पर आ गया।
मैंने उसे रोकना चाहा पर वो नहीं रुका। उसने मुझे झुकाया और मेरी जींस व पैंटी उतार कर लंड पेल कर मुझे चोदने लगा। मेरी चूत पहले से ही गीली थी। बहन की गीली चूत में भाई का लंड आसानी से घुस गया। धीरे धीरे उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर फैंक दिए और मुझे धकापेल चोदता रहा।
हर धक्के के साथ मेरे स्तन हिल रहे थे। उसकी मर्दानगी की मैं कायल हो गई थी। रात 9 बजे तक उसने मुझे 3 बार चोदा। हर बार उसका वीर्य मेरी चूत या मुंह में भरता रहा। फिर मैं खाना बनाने चली गई। मुझे काफी थकान हो रही थी तो मैंने अपने बैग से व्हिस्की का हाफ निकाला और एक नीट पैग बना कर पीने लगी।
मेरे भाई ने देखा तो उसने भी एक पैग बना कर पीना शुरू कर दिया। हम दोनों बात करने लगे। उसने पूछा दीदी सिगरेट है? मैंने कहा हां बैग में है एक मेरे लिए भी सुलगा देना। वो बोला एक ही से दोनों का काम चल जाएगा। मैंने ओके कह दिया।
हम दोनों एकदम सहज थे। दारू और सिगरेट का मजा लेने के बाद हम दोनों ने खाना खाया और बिस्तर पर लेट गए। कुछ ही देर में हमें नींद आ गई। फिर उस वक्त रात का एक बजा होगा। वो मुझसे कान में बोला दीदी मेरे लंड को देखो उसे फिर से आपके अन्दर जाना है। “Didi Double Chudai Kahani”
मैंने कहा बेटा सो जाओ मुझे कल ऑफिस भी तो जाना है। पर उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। उसका लंड एकदम कड़क हो रहा था। मुझसे भी रहा नहीं गया तो मैं उसके लंड को ऊपर नीचे करने लगी और उसे बहलाने के लिए कहने लगी अभी इसी से काम चला लो बच्चा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरी उंगलियां उसके मोटे, नसों से फूले लंड को कसकर पकड़ रही थीं। उसकी गर्मी मेरी हथेली में फैल रही थी। पर वो ठहरा पागल लड़का वो उठा और उसने लंड मेरे मुँह में पेल दिया। वो इतना उत्तेजित था कि साले ने पूरा लंड मेरे मुँह में घुसा दिया। उसका मोटा सुपारा मेरे गले तक धंस गया।
मेरी आंखें भर आईं, सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन मैंने मुंह को ढीला रखा। वो मेरे मुँह को मेरी चूत की तरह चोदने लगा था। उसके कूल्हे तेजी से आगे पीछे हो रहे थे। हर धक्के के साथ उसके अंडकोश मेरी ठोड़ी से टकरा रहे थे। फिर वो नीचे आ गया और मेरी चूत में अपना बड़ा सा लंड घुसा दिया।
उसका लंड मेरी भीगी चूत को पूरी तरह फैलाते हुए अंदर तक चला गया। चार बार चुदने के बाद हम दोनों 3 बजे सो गए। फिर मैं सुबह उठ कर नाश्ता बना रही थी। भाई पीछे से आया और नीचे से मेरे गाउन में घुस गया। मैं हंस पड़ी कि ये क्या मेरी जान सुबह सुबह ये क्या कर रहा है।
मगर मेरे भाई ने अपना मुँह मेरी चूत में घुसा दिया था। उसकी गर्म जीभ मेरी क्लिटोरिस को चाट रही थी, फिर पूरी चूत की फांकों को लपलपा कर चूस रही थी। मेरे मुँह से गर्म आहें निकलने लगीं और मैंने अपनी टांगों को फैला दिया। मैंने अपनी चूत को अपने भाई के मुँह से चटवाने का सुख लेने लगी। “Didi Double Chudai Kahani”
मेरी उंगलियां उसके बालों में फंस गईं। फिर वो खड़ा हुआ और उसने मेरा गाउन निकाल कर फैक दिया और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। थोड़ी देर मेरी चूत चोदने के बाद उसने अपना लंड मेरी गांड के मुहाने पर रख दिया। अभी मैं कुछ समझ पाती कि उसने एक जोर से धक्का दे मारा।
मेरी चीख भी उतनी ही जोर से निकली और मैंने उससे ये नहीं करने के लिए कहा पर वो कहां मानने वाला था। उसने किचन की स्लैब पर रखा देसी घी के डिब्बे में हाथ डाला और घी लेकर आधे से ज्यादा बाहर निकले अपने लौड़े पर लगा दिया। घी की चिकनाई लगा कर उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया।
मुझे भी घी की चिकनाहट के कारण कम दर्द हुआ। वो मुझे धकापेल चोदने लगा। मैं भी अपने भाई से गांड मरवाने का सुख लेने लगी। मेरी गांड उसके लंड को कसकर जकड़ रही थी। ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा। अब वो हर रात मेरी चूत गांड मारने लगा था।
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फिर दिसंबर महीने की बात है। घर से पापा का फोन आया कि मौसी की लड़की की शादी है तो तुम दोनों घर आ जाओ। मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और भाई को पैकिंग के लिए बोल दिया। तत्काल में ट्रेन टिकट भी बुक कर ली ताकि सीट की दिक्कत न हो।
हम दोनों ट्रेन में थे। रात का टाइम था। भाई धीरे से मेरे पास आया उसका लंड पूरी तरह से तना हुआ था। उसने मेरे मुँह में अपना लंड भर दिया और अपना हाथ मेरी सलवार में घुसा दिया। जब से मेरी और मेरे भाई का चुदाई का सिलसिला शुरू हुआ था तबसे मैंने पैंटी पहनना बंद ही कर दिया था क्योंकि उसको हर वक्त बस मेरी चूत ही चाटनी होती है और उत्तेजना में न जाने उसने मेरी कितनी पैंटी फाड़ दी थीं। “Didi Double Chudai Kahani”
खैर उस दिन ट्रेन खाली थी। शायद कुछ आगे के स्टेशन से भीड़ चढ़ने वाली थी। उसको ये पता था कि कंपार्टमेंट में एक घंटा तक कोई नहीं आएगा तो उसने मेरे कपड़े निकाले और मुझसे कहा दीदी भाई की गोद में नहीं बैठोगी? मैंने पोजीशन बनाई और मुस्कुराती हुई उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत में लेकर सैट हो गई।
मैं उसकी गर्दन में अपने हाथ डाल कर खुद को ऊपर नीचे करने लगी। मैं पूरे मजे से अपने भाई के मोटे लंड से चुद रही थी। काफी देर की चुदाई के बाद मैंने उसके लंड का सारा रस पी लिया और हम दोनों सो गए। समय पर ट्रेन दिल्ली पहुंच गई। हम वहां से घर पहुंचे। मम्मी ने दरवाजा खोला और हम दोनों को गले से लगा लिया।
फिर मम्मी ने कुछ खाने के लिए पूछा पर हम दोनों ने मना कर दिया और दोनों सोने चले गए। क्योंकि अगले दिन हम सबको लखनऊ के लिए निकलना था। सुबह हुई तो हम लोगों ने नाश्ता किया और पूरा दिन ऐसे ही बीत गया। शाम को लखनऊ की ट्रेन थी तो हम सब स्टेशन के लिए निकल गए।
रात में घर वालों के होने की वजह से भाई मुझे ट्रेन में चोद तो नहीं पाया पर वो कभी मेरे मम्मे सहलाता रहा तो कभी चूत में और गांड में उंगली करता रहा। सुबह हम लोग लखनऊ पहुंच गए। हम सबसे मिले फिर गेस्ट रूम में आराम के लिए चले गए। घर में ज्यादा भीड़ भाड़ होने की वजह से रूम ज्यादा खाली नहीं थे तो एक रूम में 3-4 लोगों को रहना था। “Didi Double Chudai Kahani”
हमारे रूम में मैं मेरा भाई और बड़ी मौसी का लड़का रुका था। दोपहर का टाइम था। मैं नहाने चली गई थी। मेरे भाई रूम में नहीं थे वो दोनों शायद कहीं गए थे। पर जब मैं नहा रही थी तो मुझे ऐसा लगा कि रूम में कोई आया है। मैंने आवाज देकर पूछा कौन है?
तो भाई झट से बाथरूम में घुस आया और मुझे कमोड पर बिठा कर मेरी टांगें खोल दीं। उसने मेरी चूत फैला कर मुँह लगा दिया और चूत चाटने लगा। मैंने उसके सर पर हाथ फेरते हुए पूछा भाई जल्दी कर ले कोई आ जाएगा। वो बोला सब बिजी हैं यहां कोई नहीं आएगा।
मैंने अक्षय का पूछा। अक्षय हमारी मौसी का लड़का था वो हमारे रूम में रुका था। भाई ने बताया कि वो साला दारू पीने गया है। मैंने कहा उसके साथ तू क्यों नहीं गया? उसने कहा दारू से ज्यादा नशा तो आपकी चूत चाटने में मिलता है। मैंने कहा हां ये तो है। मुझे भी तुझसे चूत गांड चटवा कर बड़ा मजा मिलता है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसने कहा दीदी आपको मुझसे चूत गांड चटवाने से ज्यादा मजा मिलता है या चुदवाने से ज्यादा मजा मिलता है? मैंने कहा अब कैसे बताऊं बेटा बस तू चूत चूस और अपनी दीदी को मजा दे। वो बोला हां दीदी अभी चूत चूस कर आपको चोदकर भी मजा दूंगा। ये कहकर वो मेरी गांड और चूत फिर से चाटने लगा।
उसकी गर्म जीभ मेरी सूजी हुई क्लिटोरिस को बार-बार चूस रही थी। फिर वो पूरी चूत की फांकों को फैलाकर अंदर तक जीभ घुसा रहा था। मेरी चूत से निकलता रस वो चट-चट की आवाज के साथ पी रहा था। उसकी नाक मेरी क्लिटोरिस से रगड़ खा रही थी। “Didi Double Chudai Kahani”
फिर उसने अपना लंड निकाला और मेरे मुँह में दे दिया। मैं भी एकदम पागलों की तरह उसके लंड को खा रही थी। मेरी जीभ उसके मोटे सुपारे को लपेट रही थी। मैंने पूरा लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। मेरे मुंह में उसके लंड की नसें फड़क रही थीं।
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मेरे भाई को अपनी गांड चटवाने में भी बहुत मजा आता है तो मैं बीच बीच में उसकी गांड भी चाट रही थी। वो आह आह करके अपनी गांड में मेरी जीभ का अहसास करता रहा। मैंने उसकी गांड एक उंगली की और कहा एक दिन मुझे तेरी गांड मारनी है। वो हंस पड़ा और बोला मेरी गांड कौन से लंड से मारोगी दीदी?
मैं बोली भैन चोद तेरे लिए एक डिल्डो मंगाऊंगी। उसे मैं कमर पर बांध कर तेरी गांड मारूंगी। वो हंस कर बोला हां दीदी आप मेरी गांड मार लेना। मैं भी किसी दिन आपकी चूत में एक साथ दो लंड पेलूंगा। मैंने कहा साले दूसरा लंड किसका लाएगा? क्या तेरे दिमाग में अपने किसी दोस्त से चुदवाने का विचार तो नहीं चल रहा है?
वो हंस दिया और बोला नहीं दीदी अभी तक तो सिर्फ सोचा है। बिना आपकी मर्जी के आपकी चूत में किसी को भी लंड नहीं लगाने दूंगा। हम दोनों काफी गर्म हो गए थे। अब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया और अपना लंड एक झटके में पूरा अन्दर कर दिया। उसका मोटा लंड मेरी चूत को पूरी तरह फैलाते हुए गहराई तक धंस गया।
थोड़ी देर बाथरूम में मुझे चोदने के बाद उसने मुझे कमरे में लाकर बेड पर पटक दिया और ताबड़तोड़ चोदने लगा। उसका लंड मेरी चूत में सटासट चल रहा था और 3 उंगलियां मेरी गांड में थीं। कुछ देर बाद उसने लंड मेरी गांड में डाल दिया। काफी देर से चुदाई का समारोह चल रहा था और मेरा बेवकूफ भाई गेट पर कुंडी लगाकर नहीं आया था। “Didi Double Chudai Kahani”
मौसी का लड़का अचानक कमरे में आ गया वो शराब पीकर आया था। उसने जैसे ही देखा कि हम दोनों चुदाई कर रहे हैं उसने कहा ये तुम दोनों क्या कर रहे हो तुम दोनों तो सगे भाई बहन हो। पागल हो गए हो क्या? मैं अभी जाकर सबको बताता हूँ। मेरे भाई ने उसे रोका और कहा मैं तुझे सब समझाता हूँ कि बात क्या है।
अक्षय बैठ गया। मैं अभी भी बिना कपड़े के पड़ी थी। मैंने बस चादर ओढ़ ली थी। भाई ने अक्षय को समझाने की बहुत कोशिश की। पर उसे समझ नहीं आ रहा था और वो सबको बताने की बात पर अड़ा था। अचानक उसने कुछ ऐसा कहा जिससे मैं शॉक हो गई। वो बोला मुझे अगर तुम सोनाक्षी की चूत चोदने दो तो मैं किसी को नहीं बताऊंगा।
हम दोनों के पास कोई और चारा नहीं था। मैंने कह दिया कि ठीक है चोद लो पर किसी को मत बताना प्लीज। मेरे इतना कहते ही उसने झट से अपने कपड़े उतार फेंके और अपना लंड सीधे मेरे मुँह में घुसा दिया। कुछ देर बाद वो मेरी चूत के अन्दर लंड पेल रहा था।
मेरा भाई वहीं बैठ कर मेरी चुदाई देख रहा था। मुझे पता था कि मुझे नंगी देखने के बाद मेरा भाई भी रुकने वाला नहीं है। उसने अक्षय से कहा तुम लेट जाओ और सोनाक्षी को ऊपर आने दो। मैं ज्यादा मजा दूँगा। अक्षय बोला ठीक है मुझे तो बस चूत चोदने मिलनी चाहिए। चाहे ऊपर से या नीचे से मिले मुझे बस सोनाक्षी की चूत चाहिए।
मेरा भाई राजी हो गया। मैं पहले से ही राजी थी। जैसे ही अक्षय लेटा और उसके ऊपर बैठकर मैंने उसका लंड अपनी चूत में भरा मेरे भाई ने पीछे से आकर अपना लंड भी मेरी चूत में घुसा दिया। मैं चीख पड़ी क्योंकि दो लंड एक साथ मेरी चूत में थे। जबकि मैं समझ रही थी कि ये मेरी सैंडविच चुदाई करने की सोच रहा है।
दोनों मोटे, गर्म और नसों से फूले लंड मेरी टाइट चूत को पूरी तरह फैलाते हुए एक साथ अंदर घुस गए थे। मेरी चूत की दीवारें बुरी तरह खिंच गईं। तेज दर्द के साथ आनंद की लहर पूरे शरीर में दौड़ गई। मेरी आंखें फट गईं, मुंह से चीख निकल गई। अक्षय नीचे से और मेरा भाई ऊपर से, दोनों के लंड मेरी चूत में एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे।
मैं भी आज एक अपनी गांड और चूत में लंड लेना चाह रही थी। मगर साले ने चूत में ही लंड पेल दिया था। मेरी चूत परपराने लगी। पर कुछ देर बाद मुझे डबल सेक्स का मजा आने लगा। अब वो दोनों कभी मेरी गांड मारते कभी चूत या कभी दोनों एक साथ चोदने लगते। “Didi Double Chudai Kahani”
उनके धक्कों की रफ्तार बढ़ती जा रही थी। मेरी चूत से रस निकलकर दोनों लंडों को चिकना बना रहा था। कमरे में चट-चट, पच-पच की आवाजें गूंज रही थीं। काफी देर तक चुदाई करने के बाद अक्षय बाहर चला गया और उसके कुछ देर बाद भाई भी निकल गया।
मैं एक सिगरेट पीकर अपने आपको शान्त करने लगी। बाद में मैं तैयार होकर नीचे चली गई। अगले दिन शादी थी तो तैयारियां बहुत जोरों से चल रही थीं किसी के पास टाइम नहीं था। वो दिन ऐसे ही बीत गया। रात को खाना खाकर सब अपने अपने रूम में चले गए। मुझे पता था कि आज हमारे रूम में रात का क्या माहौल होने वाला है।
मैंने रूम का दरवाजा खोला तो वो अन्दर से लॉक था तो मैंने नॉक किया। भाई ने दरवाजा खोला और मुझे अन्दर खींच कर झट से दरवाजा बंद कर दिया। अन्दर दोनों पूरे नंगे होकर मेरे आने का इंतजार कर रहे थे। दोनों सामने दारू की बोतल खोल कर पी रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे अन्दर आते ही अक्षय ने मेरे सारे कपड़े खींच कर उतार दिए। आज से पहले मेरे कपड़े शायद इससे जल्दी कभी नहीं उतरे होंगे। दोनों ने मेरे कपड़े उतार कर मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया और मुझे घोड़ी बनाकर अक्षय ने अपना लंड मेरे मुँह में भर दिया। भाई ने अपना मुँह मेरी गांड में भर दिया।
भाई की जीभ मेरी चूत के अंदर जा रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि आज सच में मैं जन्नत की हूर बनी हुई हूँ। उसके बाद हम तीनों ने चार चार पैग दारू पी और उसके बाद मेरे दोनों भाइयों ने रात भर मुझे चोदा। अगले दिन शादी निपटा कर हम वापस आ गए। घर पर मम्मी ने कहा 2 एक दिन और रुक जाओ। तुम लोग तो आ ही नहीं पाते हो। “Didi Double Chudai Kahani”
हम दोनों मान गए। मैंने ऑफिस कॉल करके एक हफ्ते की छुट्टी ले ली। अब हम दोनों घर पर थे तो चुदाई करने में बहुत रिस्क था कोई पकड़ लेता तो न जाने क्या हो जाता। पर भाई को जब कोई आसपास नहीं दिखता तो उसका हाथ सीधे मेरी सलवार में होता था और वो मेरी चूत मसलता रहता था।
दो दिन बीत गए थे हम दोनों को चुदाई का मौका ही नहीं मिल पा रहा था। अब मेरी भी चूत में चुदाई की खुजली हो रही थी। मेरी चूत जब देखो चुदाई के बारे में सोच कर गीली हो जाती थी। मैं तीसरे दिन किचन में खाना बना रही थी। पापा ऑफिस गए थे। मम्मी टीवी देख रही थी और उनके साथ भाई भी था।
मैंने भाई को आवाज दी कि इधर आ। वो आ गया और जैसा मुझे मालूम था उसका हाथ सीधे मेरी स्कर्ट में आ गया। वो मेरी चूत मसलते हुए बोला बताओ दीदी क्या हुआ? मैंने कुछ नहीं बोला बस स्कर्ट उठा दी। उसे समझने में देर कहां लगनी थी। वो नीचे बैठा और उसने अपनी बहन की चूत में मुँह घुसा दिया।
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वो 10 मिनट तक मेरी चूत चाटता रहा। तभी मम्मी ने उसे आवाज दे दी तो वो बाहर चला गया। कुछ देर बाद वापस किचन में आकर मेरी स्कर्ट के अन्दर घुस गया। पर सिर्फ चूत चटवाने से आज मेरी प्यास नहीं बुझने वाली थी। मैंने भाई से कहा तुम नींद की गोली लेकर आओ। वो मार्केट गया और ले आया।
मैंने मम्मी की लस्सी में नींद गोली मिला दी और वो कुछ देर बाद अपने रूम में जाकर सो गईं। बस फिर क्या था पापा तो शाम को आने थे और मम्मी सो चुकी थीं। हम दोनों ने लगातार बहुत देर तक चुदाई की। मेरी चूत और गांड का दरवाजा ऐसे खुल गया था मानो कोई पहाड़ की गुफा हो। “Didi Double Chudai Kahani”
जम कर चुदाई करवाने के बाद एक अच्छी नींद तो बनती थी। मैं सो गई। इस तरह से धीरे धीरे एक हफ्ता बीत गया। अब हम दिल्ली वापस जा रहे थे। भाई मुझसे बोला आपने मुझे पिछले हफ्ते बहुत कम प्यार दिया मैं आपसे गुस्सा हूं। मैंने कहा कोई बात नहीं पागल फ्लैट पहुंचने की देर है मैं तुझे ढेर सारा प्यार दूंगी।
कुछ घंटे बाद हम अपने फ्लैट पर पहुंच गए थे। अगले दिन संडे था। फ्लैट पर पहुंच कर हम दोनों ने दारू पी और खाना खाकर एक सिगरेट सुलगा कर चुदाई की तैयारी करने लगे। एक बार चुदाई करके हम दोनों आराम करने लगे। अगली सुबह में उठती उससे पहले मेरा गाउन गायब हो चुका था। मेरा भाई मेरी चूत चाटने में लगा हुआ था। मैंने उसका सर जोर से अपनी चूत में दबा लिया और वो और जोर चूत चाटने लगा।
उसने मेरी चूत अपनी उंगलियों से पूरी तरह खोल रखी थी और जीभ बिल्कुल अन्दर रगड़ रही थी। पूरे दिन हम दोनों नंगे ही रहे क्योंकि पूरे दिन भाई मेरी चुदाई ही करता रहा। उस दिन से मेरे ऑफिस से घर आने के बाद मेरा भाई मुझे कपड़े ही नहीं पहनने देता है और न ही खुद पहनता है। उसका जब भी मन करता है तो मेरी चूत में घुस जाता है। फिलहाल तो सब ऐसे ही चल रहा है। आगे कुछ स्पेशल होता है तो मैं अपनी चुदाई की कहानी लिख कर जरूर बताऊंगी।
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