Desi Cuckold Sex Story
दोस्तो, मेरा नाम अमरेश है, उम्र 35 साल। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ, दिल्ली में रहता हूँ, और एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर हूँ। मेरी शक्ल-सूरत ठीक-ठाक है, 5 फीट 10 इंच की हाइट, गठीला बदन, और चेहरे पर हमेशा एक हल्की-सी मुस्कान। लेकिन मेरी सोच, मेरे दोस्त, शायद इस ज़माने से सौ साल आगे की है। मुझे वो चीज़ें पसंद हैं, जो आम हिंदुस्तानी मर्द शायद सोचने से भी डरता है। Desi Cuckold Sex Story
मेरी पत्नी का नाम दीक्षा है, उम्र 30 साल। दीक्षा का रंग गोरा है, लंबाई 5 फीट 4 इंच, और बदन ऐसा कि कोई भी मर्द एक बार देखे तो देखता रह जाए। उसकी चूचियाँ 36 साइज़ की हैं, गोल, कठोर, और इतनी भरी हुई कि दबाने में मज़ा आ जाए। उसकी कमर पतली, और गाँड इतनी उभरी हुई कि साड़ी में भी उसका आकार साफ दिखता है।
दीक्षा का चेहरा गोल है, आँखें बड़ी-बड़ी, और होंठ रसीले। घर में वो सती-सावित्री की तरह रहती है, सास-ससुर की सेवा करती है, पर बिस्तर पर वो किसी अंग्रेजन से कम नहीं। मेरा लंड चूसना, मेरी जीभ से अपनी चूत चटवाना, उसे सब पसंद है। लेकिन उसकी दुनिया यहीं खत्म हो जाती है।
ये कहानी, दोस्तो, कोई बनावटी कहानी नहीं, बल्कि मेरे जीवन की सच्ची घटना है। मैं हमेशा से चाहता था कि मेरी बीवी को कोई गैर मर्द चोदे, और मैं उसे चुदते हुए देखूँ। जी हाँ, मैं कुकोल्ड फंतासी में जीता हूँ। लेकिन दीक्षा के संस्कार, उसके ससुराल वालों ने उसके दिमाग में इतने डाल दिए थे कि वो किसी गैर मर्द के बारे में सोचने को भी तैयार नहीं थी।
मैंने बचपन में चोरी-छिपे अपनी माँ-पिताजी को चुदाई करते देखा था। रात को दो-दो बजे तक जागता रहता, सिर्फ उनकी सिसकारियाँ सुनने के लिए। शादी की पहली रात, जब दीक्षा 22 साल की थी, तब भी मेरे दिमाग में यही ख्याल था कि काश कोई और इसे मेरे सामने चोदे। लेकिन उसकी सख्त सोच को देखते हुए मैंने कभी हिम्मत नहीं की कि ये बात मुँह पर लाऊँ।
शादी के पहले पाँच साल, मैं चुप रहा। हम निसंतान थे, और शायद ये भी एक वजह थी कि मेरे दिमाग में ये ख्याल और गहरा गया। पाँच साल बाद, मैंने धीरे-धीरे दीक्षा को टटोलना शुरू किया। मैंने उसे हिंट दिए, कहा कि आजकल लोग वाइफ स्वैपिंग करते हैं, या पति अपनी बीवी को किसी और से चुदवाते हैं।
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मैंने झूठे किस्से गढ़े, यहाँ तक कि ये भी कहा कि मेरी माँ को मेरे पिताजी के बॉस ने उनके सामने चोदा था, और मैंने खुद देखा। लेकिन दीक्षा पर इसका उल्टा असर हुआ। वो गुस्से में आग-बबूला हो गई, बोली, “लोग जो करें, मुझे मतलब नहीं। लेकिन तुम अपनी माँ के लिए ऐसा कैसे बोल सकते हो? मैं तुम्हारी किसी बात पर भरोसा नहीं करूँगी।”
मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन मेरी इच्छा थी कि मैं हार नहीं मानूँगा। मैंने दूसरा तरीका अपनाया। रात को जब मैं दीक्षा को चोदता, तो मैं ऐसी बातें करता, जो उसकी सोच को थोड़ा हिला सकें। मैं कहता, “दीक्षा, कई लोग अपनी बीवी को अपने दोस्त या किसी अनजान मर्द के साथ सुलाते हैं, और मज़े लेते हैं। कई तो पूरी रात के लिए वाइफ स्वैप कर लेते हैं।”
वो गुस्से में बोलती, “ये गंदा काम है। इसमें मज़ा क्या?” मैं उसकी चूचियों को सहलाते हुए, उसकी चूत पर उंगलियाँ फिराते हुए कहता, “हाँ, गलत तो है, पर मज़ा तो आता होगा। दीक्षा, एक काम कर। हम तो असल में ऐसा करेंगे नहीं, लेकिन तू मेरे लिए इतना तो कर सकती है। रूम में अंधेरा कर देता हूँ, और तू मुझे नहीं, किसी गैर मर्द की कल्पना कर।”
दीक्षा ने साफ मना कर दिया। मेरा सब्र टूट गया। मैंने उसकी चूत से हाथ हटा लिया, गुस्से का नाटक किया, और मुँह फेरकर सो गया। दीक्षा, जो पहले से गर्म हो चुकी थी, ये बर्दाश्त नहीं कर पाई। वो उठकर बैठ गई, लाइट जलाई, और मुझे मनाने लगी। मेरे पैर दबाने लगी, मेरे लंड को सहलाने लगी, यहाँ तक कि उसे चूसने भी लगी। लेकिन मैं टस से मस नहीं हुआ।
वो परेशान होकर बोली, “बता ना, क्या बोल रहे थे?” मैंने वही बात दोहराई, “मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती? कौन सा मैं सचमुच चुदने को बोल रहा हूँ?” आखिरकार, वो मान गई। मुझे लगा, आज नहीं तो कल, ये गैर मर्द से चुद ही जाएगी। मैंने लाइट बंद की, क्योंकि मुझे लगता था कि अंधेरे में वो गैर मर्द की कल्पना बेहतर कर पाएगी।
मैंने उसकी गीली चूत को सहलाना शुरू किया, लेकिन दिक्कत ये थी कि दीक्षा के दिमाग में किसी गैर मर्द की छवि आ ही नहीं रही थी। मैंने अपनी स्टाइल बदल दी। आमतौर पर मैं उसकी चूत में उंगली नहीं करता, लेकिन उस रात मैंने उसकी चूत में उंगली डाली, और अंदर-बाहर करने लगा।
फिर मैंने कुछ ऐसा किया, जो मैंने पहले कभी नहीं किया था। मैं उसकी चूत चाटने के बाद उसकी गाँड पर टूट पड़ा। मेरी जीभ उसकी गाँड के छेद में घुसी, और ये वो पल था, जब दीक्षा को लगा कि कोई गैर मर्द उसका मज़ा ले रहा है। वो अचानक मचल उठी, मुझे अपने ऊपर खींच लिया, और बेतहाशा चूमने लगी।
साथ में वो गंदी-गंदी गालियाँ देने लगी, “मादरचोद, चोदेगा मुझे? बहनचोद, तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी चूचियाँ छूने की?” मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। मैंने भी गाली दी, “भोसड़ी की, तेरी चूत मारने का मैं छह महीने से इंतज़ार कर रहा हूँ।” मैंने उसकी चूची को जोर से काट लिया। वो चिल्लाई, “आह, मादरचोद, चोद दे जल्दी से!”
उसके मुँह से ये सुनकर मेरा दिल गदगद हो गया। वो फुसफुसाई, “आज पति घर पर नहीं है, पूरी रात चोद साले!” मैंने उसे सीधा लिटाया, उसके ऊपर चढ़ा, और अपने लंड को उसकी चूत पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा। उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरे लंड पर उसका पानी छपक-छपक कर बह रहा था।
मैं उसे घपाघप चोदने लगा, और वो मुझे जकड़कर सेक्सी गालियाँ बुदबुदाने लगी। “उह्ह… आह्ह… मादरचोद, और जोर से!” वो मेरी पीठ पर प्यार से मुक्के मार रही थी, जैसे कोई गैर मर्द उसकी चूत को रगड़ रहा हो। मैं 20 मिनट तक उसे चोदता रहा, और आखिरकार उसकी चूत में ही झड़ गया।
इसके बाद ये हमारा रूटीन बन गया। हर रात मैं उसे किसी गैर मर्द की कल्पना में चोदता, और वो मज़े लेती। कुछ महीनों बाद, मेरे लगातार दबाव और कोशिशों से दीक्षा गैर मर्द से चुदने को राज़ी हो गई। एक साल के अंदर मैंने चार मर्दों से उसकी चुदाई करवाई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
लेकिन हर बार वो ये दिखाती थी कि वो मेरे लिए ऐसा कर रही है, उसकी अपनी कोई इच्छा नहीं। हर बार जिद, नखरे, और दबाव के बाद ही वो किसी गैर मर्द के बिस्तर पर जाती। चुदाई के बाद वो मेरे पास वापस आती, और मेरे साथ चुदती। रात को एक बजे के बाद वो गैर मर्द के साथ नहीं रुकती, बल्कि मेरे पास आकर सो जाती।
लेकिन एक घटना ने मुझे हिलाकर रख दिया। एक बार मैंने एक मर्द को बुलाया, जिसका नाम था अभिषेक। अभिषेक 33 साल का था, लंबा, चौड़ा, और मर्दानगी से भरा हुआ। उसका लंड मेरे जितना लंबा, यानी 6 इंच, लेकिन मोटाई में मुझसे कहीं ज़्यादा। खाना खाने के बाद मैंने दीक्षा को उसके कमरे में भेजा, और साथ में मैं भी गया, ये डर था कि कहीं वो वापस न आ जाए।
लेकिन अभिषेक ने पाँच मिनट बाद ही मुझसे कहा, “भाई साहब, अब आप जाइए।” मैं हैरान रह गया, लेकिन मन मारकर अपने कमरे में लौट आया। मैंने पहले से ही दीवार में एक छोटा-सा छेद बनाकर रखा था, जिससे मैं सब कुछ देख सकूँ। जैसे ही मैंने आँख लगाई, देखा कि अभिषेक ने दीक्षा को बिस्तर पर लगभग पटक दिया।
वो उस पर टूट पड़ा, जैसे दीक्षा उसकी अपनी बीवी हो। दोनों करवट लेकर लेटे थे, उनके चेहरे एक-दूसरे से सटे हुए थे। चुम्मा-चाटी की आवाज़ें गूंज रही थीं। दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… आह्ह…” कमरे में गूंज रही थीं। अभिषेक ने कम्बल ओढ़ लिया, लेकिन कमर से ऊपर का हिस्सा दिख रहा था।
अभिषेक ने सांड की तरह हुंकार भरी, और दीक्षा तुरंत उससे लिपट गई। वो “उँह… उँह…” की आवाज़ें निकाल रही थी, जैसे उसे सांड की हुंकार ने और गर्म कर दिया हो। अभिषेक ने उसकी चूचियों को कम्बल के अंदर जोर-जोर से मसला, और दीक्षा की दर्द भरी सिसकारियाँ, “उई माँ… आह्ह…” मुझे साफ सुनाई दे रही थीं। फिर दीक्षा धीरे-धीरे नीचे खिसकी, और कम्बल के अंदर अभिषेक की जाँघों तक पहुँच गई।
कम्बल हट गया, और अभिषेक का लंड नज़र आया। मोटा, तना हुआ, जैसे फटने को तैयार। दीक्षा ने उसे अपने मुँह में लिया, और चूसने लगी। वो “म्म… म्म…” की आवाज़ें निकाल रही थी, और अभिषेक के चेहरे से लग रहा था कि वो सातवें आसमान पर है। दीक्षा ने उसका लंड इतने प्यार से चूसा कि मुझे जलन होने लगी। फिर अचानक उन्होंने लाइट बंद कर दी।
मैंने छेद पर कान लगाया। सिसकारियाँ, बिस्तर की चरमराहट, और “फच-फच” की आवाज़ें साफ सुनाई दे रही थीं। करीब एक घंटे बाद दीक्षा मेरे कमरे में आई, और मेरे साथ लेट गई। मैंने पूछा, “कैसा रहा?” वो बोली, “बस, ठीक-ठाक।” लेकिन उस रात वो मुझसे नहीं चुदी, और नींद का बहाना बनाकर सो गई।
रात को 3 बजे मेरी नींद खुली, और दीक्षा बिस्तर पर नहीं थी। मैंने फिर से छेद पर आँख लगाई। कमरे में रोशनी थी, और नज़ारा देखकर मेरे होश उड़ गए। दीक्षा अपनी गोरी टाँगें फैलाकर लेटी थी, और अभिषेक पूरी ताकत से उसकी चूत में धक्के मार रहा था। “फच-फच-फच” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।
दीक्षा की सिसकारियाँ, “आह्ह… उह्ह… और जोर से…” और अभिषेक की हुंकार, “ले साली, तेरी चूत फाड़ दूँगा!” अभिषेक का स्टाइल मेरे जैसा था। वो पूरा शरीर हिलाने की बजाय, सिर्फ लंड से सटीक निशाना लगा रहा था। दीक्षा की चूत इतनी गीली थी कि हर धक्के के साथ पानी की छप-छप सुनाई दे रही थी।
दीक्षा ने उसे कसकर जकड़ रखा था, और उसकी चूचियाँ अभिषेक के सीने से रगड़ रही थीं। करीब 30 मिनट तक वो ऐसे ही चोदता रहा, और दीक्षा दो बार झड़ चुकी थी। उसकी सिसकारियाँ अब दर्द में बदल गई थीं, “उई… माँ… धीरे… मेरी चूत सूख गई…”
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लेकिन अभिषेक रुका नहीं। उसने दीक्षा को घोड़ी बनाया, और पीछे से उसकी चूत में लंड पेल दिया। दीक्षा की गाँड हवा में थी, और अभिषेक ने उसकी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे। “पट-पट-पट” की आवाज़ गूंज रही थी, और दीक्षा की चीखें, “आह्ह… मादरचोद… मेरी गाँड मार डालेगा क्या?” अभिषेक हँसा, “तेरी गाँड तो बाद में मारूँगा, पहले इस भोसड़े को शांत कर!”
दीक्षा की चूत अब सूख चुकी थी, लेकिन अभिषेक का लंड अभी भी तना हुआ था। उसने दीक्षा को फिर से सीधा लिटाया, और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं। इस बार उसने धीरे-धीरे लंड अंदर डाला, और दीक्षा की सिसकारियाँ फिर से शुरू हो गईं, “उह्ह… हाँ… ऐसे ही… और गहरे…” अभिषेक ने अपनी रफ्तार बढ़ाई, और दीक्षा की चूत फिर से गीली हो गई।
अचानक दीक्षा चिल्लाई, “आह… मुझे अपने बच्चे की माँ बना दे!” अभिषेक ने जवाब दिया, “तू नहीं भी कहती, मैं तो तुझे गर्भवती करने वाला था। अब बार-बार बुलाएगी मुझे!” मैं दंग रह गया। दीक्षा ने कंडोम की बात तक नहीं की, जो उसका सख्त नियम था। अभिषेक ने आखिरकार अपनी मर्दानगी दिखाई, और दीक्षा की चूत को अपने वीर्य से भर दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे रहे, और अभिषेक का लंड अभी भी दीक्षा की चूत में था। “Desi Cuckold Sex Story”
कुछ देर बाद अभिषेक ने दीक्षा के होंठ चूमे, और “थैंक्यू” कहा। दीक्षा ने भी उसे चूमा, और फिर नंगी ही मेरे कमरे में आकर मेरे पास लेट गई। मैं सोच में डूब गया कि ये क्या हो गया। मेरी बीवी अब किसी और का बीज अपनी कोख में लिए हुए थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उस घटना के बाद दीक्षा की सोच में बदलाव आया। अब वो मुझसे बड़े लंड वाले मर्द की डिमांड करने लगी। उसकी ये ख्वाहिश सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बनाई और दीक्षा के लिए एक तगड़ा लंड ढूँढना शुरू किया। कई मर्द तैयार थे, लेकिन कोई छोटे लंड वाला था, कोई बूढ़ा, तो कोई देखने में फीका।
बातों-बातों में मुझे पता चला कि दीक्षा को 35 साल से ऊपर के मर्द पसंद हैं, जो मर्दानगी से भरे हों। आखिरकार मेरी खोज एक आदमी पर जाकर रुकी। उसका नाम था जितेन्द्र, 42 साल का, एक मल्टीनेशनल कंपनी में जनरल मैनेजर। वो दिल्ली में रहता था, जबकि हम दिल्ली से 200 किलोमीटर दूर एक छोटे से शहर में।
जितेन्द्र का लंड 7 इंच लंबा और इतना मोटा कि वीडियो कॉल में देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उसका रंग काला, और बदन गठीला, जैसे कोई सांड हो। मैंने कल्पना की कि जितेन्द्र का काला, मोटा लंड दीक्षा की गोरी, दूधिया चूत में घुस रहा है। उसकी सफेद जाँघें और चूचियाँ ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रही हैं, और जितेन्द्र उसे रौंद रहा है। “Desi Cuckold Sex Story”
ये सोचकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया। लेकिन समस्या थी कि जितेन्द्र को पूरी रात के लिए घर कैसे बुलाऊँ? दीक्षा कभी खुद से चुदने को तैयार नहीं होती। वो मना नहीं करती, लेकिन उसका मूड बनाना पड़ता है। अगर इतनी दूर से जितेन्द्र आए और दीक्षा मना कर दे, तो मेरी बेइज्ज़ती हो जाएगी।
मैंने जितेन्द्र से सारी बात शेयर की। मैंने कहा, “देखो, मैं बुला तो लूँगा, लेकिन पक्का नहीं कि दीक्षा चुदेगी। वो अपने आप कभी राज़ी नहीं होती।” जितेन्द्र समझदार था। उसने कहा, “कोई बात नहीं, भाई। कोई भी औरत इतनी आसानी से गैर मर्द से चुदने को तैयार नहीं होती। हम एक प्लान बनाते हैं।”
उसने प्लान बताया, “तुम और दीक्षा किसी रात रेस्टोरेंट में डिनर के लिए जाओ। मैं वहाँ अचानक मिल जाऊँगा, जैसे पुराने दोस्त हों। हम साथ डिनर करेंगे। मैं दीक्षा के सामने कहूँगा कि मैं ऑफिस के काम से आया हूँ और रात को लुधियाना जाना है। रात का सफर मुश्किल है। तुम कहना कि सुबह चले जाना, रात में धुंध खतरनाक है। फिर मैं तुम्हारे घर रुकने को मान जाऊँगा। दीक्षा मेरे सामने मना नहीं कर पाएगी।”
प्लान पक्का हो गया। तय दिन पर मैं दीक्षा को लेकर एक फैंसी रेस्टोरेंट गया। दीक्षा ने लाल साड़ी पहनी थी, जिसमें उसकी गोरी चूचियाँ और उभरी गाँड और भी मादक लग रही थीं। हम टेबल पर बैठे ही थे कि जितेन्द्र आ गया। मैंने नाटक किया, “अरे, जितेन्द्र! कितने साल बाद मिले, यार!”
हमने गले मिलकर पुराने दोस्त होने का ड्रामा किया। दीक्षा को थोड़ा अजीब लगा, लेकिन वो चुप रही। जितेन्द्र ने कहा, “बस, ऑफिस के काम से आया था। रात को लुधियाना जाना है, पर रात का सफर बड़ा खतरनाक है।” मैंने तुरंत कहा, “अरे, सुबह निकल जाना। रात में धुंध छा जाती है। हमारे घर रुक जा।”
दीक्षा के चेहरे पर हल्का गुस्सा दिखा, लेकिन वो मेरे सामने कुछ बोल नहीं पाई। जितेन्द्र ने थोड़ा नाटक किया और फिर मान गया। रेस्टोरेंट में डिनर ऑर्डर करने में देर थी। मैंने बहाना बनाकर काउंटर की तरफ जाने का नाटक किया और जितेन्द्र को इशारा किया कि कुछ करो। दीक्षा की पीठ काउंटर की तरफ थी, वो मुझे देख नहीं पा रही थी। “Desi Cuckold Sex Story”
जितेन्द्र ने दीक्षा से बात शुरू की, हाल-चाल पूछा। फिर उसने बोतल से पानी गिलास में डाला और दीक्षा की तरफ बढ़ाया। गिलास पकड़ते वक्त उसने जानबूझकर दीक्षा की उंगलियों को छू लिया। दीक्षा ने इसे नज़रअंदाज़ किया, लेकिन जितेन्द्र ने उसकी आँखों में देखकर एक आँख मार दी। दीक्षा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, लेकिन वो चुप रही।
मैं वापस टेबल पर आ गया। डिनर का ऑर्डर हो चुका था, और खाना आने में आधा घंटा लगने वाला था। रेस्टोरेंट में बार था, तो जितेन्द्र ने मेरे और अपने लिए व्हिस्की मँगाई। दीक्षा से पूछा, “भाभीजी, आप क्या लेंगी?” दीक्षा ने मना किया, लेकिन जितेन्द्र ने हँसते हुए कहा, “इससे ज़्यादा खास मौका क्या होगा, भाभीजी?”
उसने बिना इजाज़त के दीक्षा के लिए भी एक पैग मँगाया और वेटर को इशारा किया कि पैग रिपीट करता रहे। दीक्षा ड्रिंक नहीं करती थी, कभी-कभार आधा पैग लेती थी। लेकिन उस रात वेटर ने जितेन्द्र के इशारे पर दो हार्ड पैग दीक्षा को पिला दिए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
खाना आया, लेकिन नशे की वजह से दीक्षा से कुछ खाया नहीं गया। जितेन्द्र और मुझे भी जल्दी थी। हमने जल्दी-जल्दी डिनर खत्म किया। मैं बिल चुकाने गया, तो जितेन्द्र ने गाड़ी की चाबी माँगी और बोला, “भाईसाहब, भाभी को ज़्यादा चढ़ गई है। मैं इन्हें गाड़ी में बिठाता हूँ।” वो दीक्षा को लेकर गाड़ी की तरफ चला गया। “Desi Cuckold Sex Story”
पार्किंग में मैंने देखा कि दीक्षा नशे में लड़खड़ा रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था, और ब्लाउज़ से उसकी चूचियाँ बाहर झाँक रही थीं। जितेन्द्र ने उसे बाँहों के नीचे से पकड़ा, लेकिन उसका तरीका ऐसा था कि उसके हाथ दीक्षा की चूचियों पर टिक गए।
वो सबके सामने दीक्षा के दूध मसलता हुआ उसे गाड़ी तक ले गया। होटल के गेट पर खड़े कुछ लोग ये नज़ारा देख रहे थे। एक आदमी, करीब 32-33 साल का, अपनी पैंट खुजलाते हुए मुझसे बोला, “मस्त माल है, सर। इसने अपनी बीवी को टुन्न कर लिया। आज रात इसकी गाँड मारेगा।” वो जितेन्द्र को दीक्षा का पति समझ रहा था। मैं चुप रहा।
जितेन्द्र ने गाड़ी का दरवाज़ा खोला और दीक्षा को अंदर धकेला। दीक्षा नशे में थी, वो सीट पर ठीक से बैठ भी नहीं पा रही थी। जितेन्द्र दूसरी तरफ से गाड़ी में घुसा। मैं चुपके से डिक्की के पास खड़ा हो गया। पार्किंग की लाइट से गाड़ी के अंदर सब दिख रहा था। दीक्षा का पल्लू उसकी जाँघों पर गिरा था, और उसकी चूचियाँ ब्लाउज़ से बाहर झाँक रही थीं।
जितेन्द्र ने दीक्षा की गर्दन अपनी तरफ मोड़ी और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। दीक्षा इतनी टुन्न थी कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने अपना सिर जितेन्द्र के कंधे पर टिका दिया। जितेन्द्र ने उसके होंठ चूमने शुरू किए और उसकी चूचियाँ दबाने लगा। दीक्षा नशे में थी, ना तो वो जवाब दे रही थी, ना विरोध कर रही थी। “Desi Cuckold Sex Story”
मैंने खिड़की के पास जाकर खटखटाया। जितेन्द्र तुरंत दीक्षा से हट गया और बोला, “लो भाईसाहब, चाबी। आप गाड़ी चलाओ, मैं भाभी को संभालता हूँ।” मैंने गाड़ी स्टार्ट की, लेकिन जानबूझकर धीरे चलाने लगा ताकि कुछ और देख सकूँ। मिरर में देखा कि जितेन्द्र फिर से दीक्षा को चूम रहा था।
चुम्मा-चाटी की “चप-चप” आवाज़ें गूंज रही थीं। दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… आह्ह…” निकल रही थीं। जितेन्द्र ने दीक्षा के ब्लाउज़ के दो बटन खोल दिए और उसकी एक चूची बाहर निकाल ली। उसने निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। दीक्षा की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं, “उम्म… आह्ह…” शायद उसकी चूत गीली होने लगी थी।
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जितेन्द्र ने धीरे से कहा, “दीक्षा, तुझे ज़्यादा चढ़ गई है। घर पहुँचने तक मेरी गोद में लेट जा।” दीक्षा लुढ़कते हुए उसकी गोद में सिर रखकर लेट गई। उसके पैर सीट से लटक रहे थे। मिरर में मैंने देखा कि जितेन्द्र ने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपना 7 इंच का काला, मोटा लंड बाहर निकाला।
वो इतना तना हुआ था कि फनफना रहा था। दीक्षा का सिर उसी के पास था। अचानक मैंने गाड़ी एक सुनसान जगह पर रोकी और अंदर की लाइट जलाई। मैंने पूछा, “दीक्षा को ज़्यादा दिक्कत तो नहीं? नींबू पानी ले लें?” जितेन्द्र बोला, “नहीं, भाई। अब ये ठीक है।”
मैंने देखा कि जितेन्द्र का लंड दीक्षा के होंठों के बीच फँसा था। दीक्षा नशे में थी, लेकिन उसका मुँह हल्का-हल्का हिल रहा था, जैसे वो लंड चूस रही हो। मैंने लाइट बंद की और गाड़ी चलाने लगा। स्ट्रीट लाइट में देखा कि जितेन्द्र ने दीक्षा की साड़ी और पेटीकोट ऊपर खींच लिया था। “Desi Cuckold Sex Story”
वो उसकी गाँड सहलाने लगा। दीक्षा की गाँड इतनी गोरी थी कि लाइट में चमक रही थी। जितेन्द्र इतना झुका कि उसका लंड दीक्षा के मुँह में पूरा घुस गया। दीक्षा ने उल्टी जैसी आवाज़ निकाली, “उक…” मैंने पूछा, “क्या हुआ, भाई? दीक्षा को दिक्कत तो नहीं?” जितेन्द्र हँसा, “नहीं, सब ठीक है।”
आखिरकार हम घर पहुँच गए। मैंने दीक्षा को संभालकर बेडरूम में लिटाया। उसकी साड़ी इतनी अस्त-व्यस्त थी कि मैंने उसे उतार दिया। अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। वो नशे में बेपरवाह सो गई। जितेन्द्र उतावला हो रहा था। मैंने उसे इशारा किया, “थोड़ा सब्र कर, यार। पूरी रात पड़ी है। अभी ये होश में नहीं है, मज़ा नहीं आएगा।”
हम दोनों बेड पर बैठकर बातें करने लगे। दीक्षा अर्धनिद्रा में थी, और अपने पेटीकोट को घुटनों तक खींचने की कोशिश कर रही थी। जितेन्द्र का लंड पहले से ही तना हुआ था, और वो उसे बार-बार खुजला रहा था। मैंने उसे समझाया, “थोड़ा होश में आएगी, तब चोदना। मज़ा दोगुना होगा।”
लेकिन जितेन्द्र का सब्र जवाब दे रहा था। वो दीक्षा की गोरी जाँघों को देखकर पागल हो रहा था। उसकी आँखों में वासना साफ दिख रही थी। दीक्षा अब धीरे-धीरे होश में आने की कोशिश कर रही थी। उसकी साँसें भारी थीं, और नींद में वो बार-बार कसमसा रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
करीब आधे घंटे बाद जितेन्द्र बोला, “भाई, मुझे नींद आ रही है। दीक्षा देगी तो ठीक, नहीं तो भी कोई बात नहीं। मैं अब सोना चाहता हूँ।” मैंने सोचा, आधा घंटा हो गया, दीक्षा का नशा अब थोड़ा उतर चुका होगा। मैंने कहा, “ठीक है, मैं भी यहीं लेट जाता हूँ।”
जितेन्द्र ने तुरंत कहा, “भाईसाहब, आप बगल वाले कमरे में सो जाओ। मुझे दूसरे के सामने चुदाई में झिझक होती है।” मुझे बुरा लगा। मैं तो ये सब इसलिए कर रहा था कि दीक्षा को चुदते देख सकूँ, लेकिन अब मुझे दूसरा कमरा लेना पड़ रहा था। मैंने कहा, “ठीक है, मैं बगल वाले कमरे में जाता हूँ।” जैसे ही मैं जाने लगा, जितेन्द्र बोला, “बीच का दरवाज़ा बंद कर देना।”
मैंने दरवाज़ा बंद किया, लेकिन मेरे पास पहले से ही इंतज़ाम था। मैंने दीवार में एक छोटा-सा छेद बनाया हुआ था, जिससे मैं सब कुछ देख सकूँ। मैंने अपने कमरे की लाइट बंद की और उस छेद पर आँख गड़ा दी। नज़ारा वही था, जो मैं छोड़कर गया था। दीक्षा बिस्तर पर पड़ी थी, उसका पेटीकोट घुटनों तक खिसका हुआ था, और ब्लाउज़ के दो बटन खुले थे, जिससे उसकी गोरी चूचियाँ बाहर झाँक रही थीं।
जितेन्द्र अपने कपड़े उतार रहा था। उसने पहले शर्ट, फिर पैंट, और आखिर में अंडरवियर उतारा। उसका 7 इंच का काला, मोटा लंड तना हुआ था, जैसे कोई लोहे का डंडा। उसे देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। दीक्षा अगर होश में होती, तो शायद उसकी गाँड फट जाती। लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था।
जितेन्द्र पढ़ा-लिखा और सभ्य आदमी था। वो दीक्षा को ज़बरदस्ती चोदना नहीं चाहता था। उसका तरीका था प्यार से, गर्म करके चोदना, ताकि दीक्षा बार-बार उससे चुदवाए। वो चुपके से दीक्षा के बगल में लेट गया, बिना उसे जगाए। दीक्षा का गोरा, अर्धनग्न जिस्म और जितेन्द्र का काला, नंगा बदन एक-दूसरे से सटे थे।
दीक्षा सीधी लेटी थी, उसकी साँसें भारी थीं, और ब्लाउज़ में कैद चूचियाँ हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं, जैसे छत को छूना चाहती हों। जितेन्द्र ने धीरे से दीक्षा का पेटीकोट और ऊपर खिसकाया, अब वो जाँघों तक पहुँच गया था। दीक्षा की गोरी, चिकनी जाँघें ट्यूबलाइट में चमक रही थीं।
दीक्षा नींद में थी, लेकिन उसका जिस्म हल्की-हल्की हरकतें कर रहा था। अचानक उसने करवट बदली, और उसकी गाँड जितेन्द्र की तरफ हो गई। जितेन्द्र भी करवट लेकर लेट गया। उसका तना हुआ लंड अब दीक्षा की गाँड से टकरा रहा था। उसने अपने लंड को मोड़कर दीक्षा की गाँड की दरार में सेट किया और पूरी तरह से उससे सट गया। “Desi Cuckold Sex Story”
दीक्षा ने कोई हरकत नहीं की। जितेन्द्र ने अपना हाथ दीक्षा की कमर पर रखा, और धीरे-धीरे ऊपर ले जाकर उसकी चूचियों तक पहुँचा। दीक्षा थोड़ा कसमसाई। उसने अपनी गाँड को हल्का-सा एडजस्ट किया, शायद उसे लंड की चुभन महसूस हुई। जितेन्द्र ने बहुत सावधानी से दीक्षा के ब्लाउज़ के बाकी बटन खोले और उसकी लाल ब्रा को ऊपर खिसका दिया।
दीक्षा की चूचियाँ अब पूरी तरह आज़ाद थीं। करवट में होने की वजह से वो एक-दूसरे से सटी थीं, जैसे दो गोरे पहाड़। जितेन्द्र ने दीक्षा की चूचियों को प्यार से दबाना शुरू किया। दीक्षा के मुँह से “स्स्स…” की आवाज़ निकली, लेकिन वो अभी भी नींद में थी।
जितेन्द्र ने दीक्षा का कंधा पकड़ा और उसे फिर से सीधा लिटाया। दीक्षा गुड़िया की तरह सीधी लेट गई, ना विरोध, ना सहयोग। जितेन्द्र ने इसे उसकी मूक सहमति समझा। उसने दीक्षा का पेटीकोट कमर तक खींच दिया। अब दीक्षा की चूत और चूचियाँ दोनों नंगी थीं।
जितेन्द्र ने दीक्षा की ब्रा पूरी तरह उतार दी और उसकी चूचियों को अपने हाथों में लिया। वो एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा, और दूसरी को मसलने लगा। दीक्षा की साँसें तेज़ हो गईं, “उह्ह… उम्म…” उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं। मुझे लगा, अब वो पूरी तरह जाग चुकी है, लेकिन वो कुछ बोल नहीं रही थी।
मैं सोच रहा था कि शायद वो मन ही मन अपनी किस्मत को कोस रही है कि आज फिर गैर मर्द से चुदना पड़ेगा। लेकिन उसकी चूत शायद पहले से ही गीली थी। जितेन्द्र ने चूचियाँ चूसना बंद किया और अपना हाथ दीक्षा की चूत पर ले गया। वो चूत को सहलाने लगा, और साथ में दीक्षा के होंठ चूमने लगा। “Desi Cuckold Sex Story”
दीक्षा की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं, “आह्ह… स्स्स…” वो नींद का नाटक कर रही थी, लेकिन उसकी जाँघें हल्की-हल्की फैल गईं। जितेन्द्र दीक्षा के ऊपर चढ़ गया। वो उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके होंठ चूम रहा था। दीक्षा अब बीच-बीच में आँखें खोलकर जितेन्द्र को देख रही थी।
अचानक जितेन्द्र ने फिर से आँख मारी और मुस्कराया। दीक्षा ने अपने होंठ हल्के से खोलकर जवाब दिया, जैसे कह रही हो, “कर लो जो करना है।” वो जानती थी कि मुझे उसकी चुदाई देखने में मज़ा आता है। उसे ये भी पता था कि मैं चोरी-छिपे सब देख रहा हूँ। शायद इसलिए वो ज़्यादा साथ नहीं दे रही थी, ताकि मुझे बुरा न लगे।
जितेन्द्र का तरीका बाकी मर्दों से अलग था। वो दीक्षा को प्यार से, गर्म करके चोदना चाहता था। बाकी मर्द जो दीक्षा को चोद चुके थे, वो बस लंड पेलकर पानी निकालते थे। लेकिन जितेन्द्र का प्यार भरा अंदाज़ मुझे थोड़ा परेशान कर रहा था। कहीं दीक्षा उसे ज़्यादा पसंद न करने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जितेन्द्र का चेहरा दीक्षा के चेहरे से बस कुछ इंच दूर था। उसने दीक्षा की आँखों में देखकर भौंहें मटकाईं, जैसे पूछ रहा हो, “तैयार हो?” दीक्षा ने आँखें बंद कर लीं, जैसे कह रही हो, “अब सब तुम्हारे हाथ में है।” दीक्षा की गोल गाँड और गोरा जिस्म उस वक़्त किसी वीणा की तरह लग रहा था, और जितेन्द्र उस वीणा के हर तार को छेड़ने वाला था।
जितेन्द्र ने अपना एक हाथ चूचियों से हटाया और अपने लंड को पकड़ा। उसने दीक्षा की चूत की हालत देखी, जो इतनी गीली थी कि मानो बारिश हो गई हो। वो चुदने को तैयार थी, और जितेन्द्र का लंड तो पहले से ही फनफना रहा था। उसने अपने लंड को दीक्षा की चूत के मुँह पर रखा और हल्का-सा रगड़ा। “Desi Cuckold Sex Story”
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दीक्षा की सिसकारी निकली, “उह्ह…” जितेन्द्र ने अपनी जाँघों से दीक्षा की जाँघें और फैलाईं और एक जोरदार धक्के के साथ अपना 7 इंच का लंड दीक्षा की चूत में पेल दिया। दीक्षा चीख पड़ी, “ऊई माँ…!” उसने इतने मोटे लंड की उम्मीद नहीं की थी।
जितेन्द्र ने लगातार 10-12 धक्के मारे, “फच-फच-फच” की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी। दीक्षा की चूत ने लंड को जगह दे दी। फिर जितेन्द्र रुका और दीक्षा के होंठ चूमने लगा। वो बोला, “दीक्षा, मैं तुझे अच्छा लगा?” दीक्षा ने जवाब नहीं दिया, लेकिन अपने होंठ खोलकर उसे चूमने का न्योता दे दिया।
जितेन्द्र ने कहा, “आई लव यू, दीक्षा!” और अपनी जीभ दीक्षा के मुँह में डाल दी। साथ ही उसने 8-10 कसकर धक्के मारे। दीक्षा सातवें आसमान पर थी। उसकी चूत से “फच-फच” की आवाज़ें आने लगीं। मैं छेद से देख रहा था, जितेन्द्र का काला लंड दीक्षा की गोरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।
उसका काला, गठीला बदन दीक्षा के गोरे जिस्म को रौंद रहा था, और उसकी चूचियाँ मसल रहा था। जितेन्द्र अब धीरे-धीरे दीक्षा की चूत पेल रहा था। उसका लंड दीक्षा की मुलायम चूत में आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… आह्ह…” तेज़ हो रही थीं।
उसकी चूत का पानी जितेन्द्र को और तेज़ करने के लिए उकसा रहा था। अचानक जितेन्द्र ने रफ़्तार बढ़ाई। वो दीक्षा को बुरी तरह चोदने लगा। “फच-फच-फच” की आवाज़ से कमरा गूंज उठा। वो लंड को चूत के मुँह तक खींचता और फिर बच्चेदानी तक पेल देता। दीक्षा हर धक्के पर बिलबिला रही थी, “उई… माँ… धीरे…”
पहली बार दीक्षा ने जितेन्द्र की कमर को अपने हाथों से जकड़ लिया। वो हर धक्के को झेल रही थी, और उसकी सिसकारियाँ अब चीखों में बदल रही थीं, “आह्ह… मादरचोद… और जोर से!” पाँच मिनट बाद दीक्षा की चूत से “फच-फच” की आवाज़ बंद हो गई। “Desi Cuckold Sex Story”
शायद वो झड़ चुकी थी, और उसकी चूत सूख गई थी। लेकिन जितेन्द्र रुका नहीं। उसने दीक्षा को घोड़ी बनाया, उसकी गाँड हवा में उठाई, और पीछे से लंड पेल दिया। “पट-पट-पट” की आवाज़ गूंजने लगी। दीक्षा चीख रही थी, “उई… मेरी गाँड… धीरे…!” जितेन्द्र हँसा, “अभी तो तेरी चूत मार रहा हूँ, गाँड की बारी बाद में आएगी!”
कुछ देर बाद दीक्षा की चूत फिर गीली हो गई, और “फच-फच” की आवाज़ दोबारा शुरू हो गई। जितेन्द्र ने रफ़्तार और बढ़ाई। उसने दीक्षा को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और 10-12 धक्के मारकर उसकी चूत में झड़ गया। उसने कंडोम नहीं पहना था, और दीक्षा की चूत उसके वीर्य से भर गई।
दोनों एक-दूसरे से लिपटे रहे, और जितेन्द्र का लंड अभी भी दीक्षा की चूत में था। दीक्षा का ये रूप देखकर मुझे हैरानी भी हो रही थी, और खुशी भी। वो जितेन्द्र को पसंद कर रही थी, जो अभी तक उसके लिए अनजान था। मुझे लग रहा था कि वो सचमुच मज़े ले रही है।
चुदाई की गर्मी और नशा उतरने के बाद दोनों कम्बल में लिपट गए। कमर से ऊपर कम्बल नहीं था, तो मैं सब देख पा रहा था। दोनों करवट लेकर लेटे थे, उनके चेहरे एक-दूसरे से सटे थे। चुम्मा-चाटी की “चप-चप” आवाज़ें गूंज रही थीं। दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… आह्ह…” कमरे में गूंज रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अचानक जितेन्द्र ने सांड की तरह हुंकार भरी। दीक्षा तुरंत उससे लिपट गई और “उँह… उँह…” की आवाज़ें निकालने लगी, जैसे कोई मादा पशु। दोनों के मुँह एक-दूसरे में घुसे थे। जितेन्द्र कम्बल के अंदर दीक्षा की चूचियाँ मसल रहा था, और दीक्षा की दर्द भरी सिसकारियाँ, “उई माँ… आह्ह…” गूंज रही थीं।
अचानक उन्होंने लाइट बंद कर दी। मैंने छेद पर कान सटा दिया। “फच-फच” की आवाज़ें, सिसकारियाँ, और जितेन्द्र की हुंकार साफ सुनाई दे रही थीं। मैं अपने लंड को सहलाने लगा, लेकिन लाइट बंद होने से मेरी ख्वाहिश अधूरी रह गई। लाइट बंद होने के बाद मैंने छेद पर कान सटा दिया। “Desi Cuckold Sex Story”
चुदाई की आवाज़ें, “फच-फच”, “पट-पट”, और दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… आह्ह…” साफ सुनाई दे रही थीं। जब जितेन्द्र ने दीक्षा को डॉगी स्टाइल में चोदा, तो उसका मुँह छेद के पास था। उसकी चीखें, “उई माँ… और जोर से…!” मेरे कानों में गूंज रही थीं। उसकी साँसों की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि मुझे लगा, वो मेरे सामने ही चुद रही है।
फिर जब जितेन्द्र ने उसे सीधा लिटाकर चोदा, तो उनका सिर छेद से दूर था, लेकिन चूत और लंड की ठोकरों की आवाज़, “ठक-ठक” और “फच-फच”, इतनी तेज़ थी कि मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उसी वक़्त मुठ मारकर पानी निकाला और बिस्तर पर लेट गया।
करीब एक घंटे बाद, जैसी दीक्षा की आदत थी, वो मेरे कमरे में आकर मेरे बगल में लेट गई। मैंने पूछा, “कैसा रहा?” वो बोली, “बस, ठीक-ठाक।” मैंने मज़ाक में कहा, “ठीक-ठाक या कुछ ज़्यादा ही मज़ा आया?” वो गुस्से में बोली, “मेरी नींद खराब होती है। तुम क्यों बुलाते हो अपने दोस्तों को? तुम भी तो ठीक ही सेक्स करते हो।”
उसका लापरवाही भरा अंदाज़ मुझे चुभ गया। मैंने सोचा, अब वो मेरे साथ चुदेगी, जैसे हर बार करती है। लेकिन उस रात उसने नींद का बहाना बनाया और सो गई। मैं भी मुठ मारकर थक चुका था, सो चुपचाप सो गया। रात को 3 बजे मेरी नींद खुली, तो दीक्षा बिस्तर पर नहीं थी। मैंने उठकर छेद पर आँख सटाई।
कमरे में रोशनी थी, और नज़ारा देखकर मेरे होश उड़ गए। दीक्षा, जिसे मैं दबाव डालकर गैर मर्द से चुदवाता था, खुद जितेन्द्र के कमरे में थी। वो घुटनों के बल बैठी थी, और जितेन्द्र का 7 इंच का काला लंड चूस रही थी। उसकी लार से लंड गीला चमक रहा था। दीक्षा बार-बार लंड पर थूक रही थी और उसे चूस रही थी, जैसे कोई पॉर्नस्टार। मैंने पहले कभी उसे इतने मज़े से लंड चूसते नहीं देखा था। “Desi Cuckold Sex Story”
दीक्षा पूरी तरह नंगी थी, और उसकी गोल गाँड ट्यूबलाइट में चमक रही थी। जितेन्द्र उसके चूतड़ों को सहला रहा था, और कभी-कभी उसकी गाँड में उंगली डाल रहा था। अचानक उसने पूरी उंगली दीक्षा की गाँड में पेल दी। दीक्षा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि और जोश से लंड चूसने लगी।
जितेन्द्र को समझ आ गया कि दीक्षा गाँड मरवाने को तैयार है। उसका चेहरा देखकर लग रहा था कि वो दीक्षा के प्रति प्यार भरा अहसास रखता है। जितेन्द्र ने दीक्षा को सीधा लिटाया। दीक्षा ने अपनी गोरी जाँघें फैला दीं, और जितेन्द्र ने एक झटके में अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया।
उसकी चुदाई की स्टाइल मेरी तरह थी—वो पूरा शरीर नहीं हिलाता था, बल्कि सिर्फ़ लंड से सटीक निशाना लगाता था। वो अपने हाथों और पैरों के सहारे अपने शरीर को संभाले था, और दीक्षा की चूत में डिप्स की तरह धक्के मार रहा था। “फच-फच-फच” की आवाज़ गूंज रही थी, और दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… आह्ह… और गहरे…” कमरे में गूंज रही थीं।
जितेन्द्र ने 200 से ज़्यादा धक्के मारे, और उसकी रफ़्तार में कोई कमी नहीं आई। सचमुच वो एक मर्द था, जो किसी भी औरत को अपने लंड का दीवाना बना सकता था। कुछ देर बाद दीक्षा निढाल हो गई। वो शायद दूसरी बार झड़ चुकी थी। जितेन्द्र भी दीक्षा के ऊपर ढेर हो गया, और उसकी साँसों की आवाज़ मुझे साफ सुनाई दे रही थी।
दीक्षा कुछ देर बाद उठी और नंगी ही बाथरूम चली गई। जब वो वापस आई, तो जितेन्द्र ने एक सिगरेट सुलगा ली थी। उसने दीक्षा को अपनी बाँहों में खींच लिया और मस्ती करने लगा। दीक्षा भी उसके साथ खुश दिख रही थी। वो सिगरेट लेने के लिए जितेन्द्र की उंगलियों में अपनी उंगलियाँ फँसाने लगी। अगले ही पल सिगरेट दीक्षा के होंठों में थी, और वो मज़े से धुआँ उड़ा रही थी। “Desi Cuckold Sex Story”
जितेन्द्र ने दीक्षा के कान में कहा, “मेरे साथ कैसा लगा?” दीक्षा ने उसके होंठ चूमकर कहा, “बेहद दिलकश। तेरा मेरे अंदर बहुत गहराई तक जा रहा था।” जितेन्द्र बोला, “मतलब मैंने तुझे खुश किया?” दीक्षा ने सिगरेट बुझाते हुए कहा, “हाँ।” जितेन्द्र ने कहा, “फिर मुझे इनाम भी मिलना चाहिए!”
उसने धीरे से अपनी उंगली दीक्षा की गाँड में फिराई। दीक्षा ने मुस्कुराकर उसे चूम लिया, जैसे कह रही हो, “गाँड भी मार ले।” दीक्षा ने कहा, “मगर तेरा बहुत बड़ा है। कैसे करेगा?” जितेन्द्र बोला, “मेरी जान, फिक्र मत कर। मेरे पास इसका भी उपाय है। बस ये बता, यहाँ तेल है?”
दीक्षा कभी-कभी अपने पैरों पर तिल के तेल की मालिश करती थी, और तेल की कटोरी बेड के नीचे रखी थी। उसने टटोलकर कटोरी निकाली और जितेन्द्र को थमा दी। जितेन्द्र ने दीक्षा को घोड़ी बनने को कहा। दीक्षा तुरंत घोड़ी बन गई, उसका सिर बेड पर टिका था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जितेन्द्र ने ढेर सारा तेल लिया और दीक्षा की पीठ और चूतड़ों पर मलने लगा, जैसे मसाज कर रहा हो। फिर उसने दीक्षा की गाँड और चूत के आसपास तेल लगाया। उसने अपने लंड पर भी ढेर सारा तेल चुपड़ लिया। दीक्षा को कुछ पता नहीं था कि वो तेल कहाँ लगा रहा है।
जितेन्द्र ने पहले दीक्षा की चूत के आसपास लंड रगड़ा, जिससे दीक्षा फिर से गर्म हो गई। फिर उसने लंड को दीक्षा की गाँड पर टिका दिया। दीक्षा पहले भी गाँड मरवा चुकी थी, लेकिन वो इसमें ज़्यादा अभ्यस्त नहीं थी। जितेन्द्र ने लंड को गाँड के छेद पर टिकाकर हल्का-सा दबाव डाला।
दीक्षा को लगा कि वो चूतड़ों का मज़ा ले रहा है। लेकिन तेल की वजह से लंड का सुपारा धीरे-धीरे गाँड में घुस गया। दीक्षा को दर्द का अहसास नहीं हुआ। जितेन्द्र ने और तेल डाला, और लंड को धीरे-धीरे गाँड में पेलता गया। करीब ढाई इंच लंड अंदर था। दीक्षा की सिसकारियाँ, “उह्ह… स्स्स…” गूंज रही थीं।
उसे कोई तकलीफ नहीं थी। जितेन्द्र ने अब दबाव बढ़ाया, और एक झटके में पूरा लंड दीक्षा की गाँड में समा गया। दीक्षा की चीख निकली, “आह्ह…!” लेकिन तेल की वजह से दर्द कम था। जितेन्द्र दीक्षा की पीठ पर झुक गया और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। दीक्षा अपनी गाँड हिलाकर मज़े ले रही थी।
जितेन्द्र ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, और दीक्षा की गर्दन पीछे मोड़कर उसके होंठ चूमने लगा। धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी। दीक्षा तेज़ धक्कों को झेल नहीं पा रही थी। वो धीरे-धीरे पेट के बल लेट गई। उसकी गाँड बाहर को निकली थी, तो लंड बाहर नहीं निकला। जितेन्द्र भी दीक्षा के ऊपर चिपक गया। “Desi Cuckold Sex Story”
वो लगातार गाँड मार रहा था, और दीक्षा मीठे दर्द के साथ सिसकारियाँ भर रही थी, “उह्ह… आह्ह…” जितेन्द्र का एक हाथ दीक्षा की कमर के नीचे गया और उसकी चूत को रगड़ने लगा। करीब 20 मिनट तक गाँड मारने और चूत में उंगली करने के बाद दोनों स्खलन के कगार पर थे।
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जितेन्द्र बोला, “दीक्षा, मेरा निकलने वाला है!” दीक्षा बोली, “हाँ, मेरा भी… अंदर ही निकाल दे!” जितेन्द्र ने कहा, “नहीं, मुझे तेरी चूत में निकालना है!” दीक्षा चुप रही। जितेन्द्र ने लंड गाँड से निकाला और दीक्षा से बोला, “जल्दी सीधी लेट!” दीक्षा एक झटके में सीधी लेट गई और अपनी टाँगें फैला दीं।
जितेन्द्र ने बिना देर किए उसकी चूत में लंड पेल दिया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। “फच-फच-फच” की आवाज़ गूंज रही थी। दीक्षा ने अपनी टाँगें जितेन्द्र की कमर पर लपेट लीं, और जितेन्द्र ने अपने हाथ दीक्षा की पीठ के नीचे डालकर उसे जकड़ लिया। उसका मुँह दीक्षा के मुँह से चिपक गया।
जितेन्द्र ने धक्कों की रफ़्तार और तेज़ की। दीक्षा चीखने लगी, “आह… मादरचोद, पेल दे… भोसड़ी के, फाड़ दे!” उसे मेरे दूसरे कमरे में होने का ख्याल भी नहीं रहा। जितेन्द्र ने दीक्षा की चूत को अपने वीर्य से भर दिया। दीक्षा निढाल हो गई, जैसे उसने अमृत पी लिया हो।
जितेन्द्र के चेहरे पर मर्दानगी का गर्व था, जैसे उसने दीक्षा को जीत लिया हो। दोनों एक-दूसरे से जकड़े रहे। जितेन्द्र ने आखिरी बूँद तक अपने लंड को दीक्षा की चूत में रखा। फिर उसने लंड निकाला, और दीक्षा आँखें बंद किए निढाल पड़ी रही। जितेन्द्र ने उसके होंठ चूमे और “थैंक्यू” कहा।
दीक्षा ने आँखें खोलीं, उठी, और उसे फिर से चूमा। फिर वो नंगी ही मेरे कमरे में आकर मेरे बगल में लेट गई। कुछ देर बाद मैंने नींद का बहाना बनाकर उसकी चूत पर हाथ रखा, लेकिन उसने “स्स्स…” की आवाज़ करके मेरा हाथ हटा दिया। शायद उसे दर्द हो रहा था। मैं फिर सो गया। दीक्षा ने इस चुदाई का कभी ज़िक्र नहीं किया। हाँ, एक महीने बाद उसने पूछा, “तुम्हारे वो दोस्त आजकल कहाँ हैं? उनके साथ मज़ा आया था।” मैं बस मुस्कुरा दिया। मेरे दिमाग में तो दीक्षा को नए-नए लंड से चुदवाने का प्लान था। मैं अब जितेन्द्र जैसा ही तगड़ा मर्द ढूँढ रहा हूँ।
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