Dehati Maa Beta Chudai
भारत के एक छोटे से गाँव की बात है, जहाँ जीवन धीमी गति से चलता था। धूल भरी सड़कें, खेतों की हरियाली, और दूर से सुनाई देने वाली ट्रैक्टर की आवाज़ें वहाँ की पहचान थीं। इसी गाँव में रानी और उनके इकलौते बेटे राजू का घर था। रानी एक विधवा थीं, जिन्होंने अपने पति की मौत के बाद अकेले ही राजू को पाल-पोस कर बड़ा किया था। Dehati Maa Beta Chudai
वह एक साधारण सी महिला थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक अलग ही तरह की ममता मयी चमक थी। उनकी उम्र 40 के करीब थी, लेकिन वह अभी भी बेहद खूबसूरत थीं। गहरे भूरे बाल, आँखों में एक अजीब सी गहराई, और शरीर पर एक ऐसा आकर्षण था जो किसी भी इंसान को घायल कर सकता था।
राजू अब जवान हो चला था। उसकी उम्र 20 साल के आसपास थी और वह अपनी माँ के बहुत करीब था। गाँव में ज़्यादातर लड़के उसकी उम्र में शहर जाकर नौकरी या पढ़ाई करने लगते थे, लेकिन राजू ने अपनी माँ को अकेला नहीं छोड़ा। वह खेतों में उनका हाथ बंटाता, घर के कामों में मदद करता, और शाम को दोनों आँगन में बैठकर दिन के किस्से सुनते।
यह उनकी दुनिया थी, एक छोटी सी दुनिया, लेकिन उसमें प्यार बहुत था। लेकिन राजू के दिल में एक ऐसी भावना उमड़ रही थी जो उसे खुद भी समझ नहीं आ रही थी। वह अपनी माँ को नहीं, बल्कि एक औरत के रूप में देखने लगा था। जब वह झूठे पर कपड़े सुखाती, तो उसकी गीली साड़ी उसके करीब-करीब चिपक जाती और उसके शरीर का कातिलाना नक्शा साफ दिखाई देता।
जब वह रोटी बनाते समय पसीने से तर-बतर हो जाती, तो उसके माथे पर चमकती बूँदें और गले पर लटकती मोतियों की माला राजू को मंत्रमुग्ध कर देती। वह रात को अपने कमरे में लेटकर उन्हीं छवियों के बारे में सोचता और उसका शरीर एक अजीब सी गर्मी से भर जाता। वह अपनी माँ को इतना चाहता था कि यह चाहत अब उसके लिए एक जुनून बन गया था।
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एक दिन गाँव में तेज़ बारिश हुई। खेतों से लौटते समय रानी और राजू बुरी तरह भीग गए। घर पहुँचकर रानी ने राजू से कहा, “राजू, जल्दी से कपड़े बदल ले, वरना बुखार हो जाएगा। मैं भी तुरंत आई।” राजू ने अपने कमरे में जाकर कपड़े बदले, लेकिन उसका दिल कर रहा था कि वह अपनी माँ को देखे। वह धीरे से उसके कमरे के पास गया और दरवाज़े की क्रैक से झाँका।
रानी अपनी गीली साड़ी उतार चुकी थीं और सिर्फ एक पुरानी, फीकी पड़ी पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। वह अपने बालों को तौलिए से सुखा रही थीं और इस दौरान उनकी पीठ का बड़ा हिस्सा खुला था। उनकी गोरी चमड़ी पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं, जैसे मोती बिखरे हों। राजू की साँसें थम गईं।
उसने पहली बार अपनी माँ को इस नज़रिए से देखा था। उसकी पीठ पर बालों का एक छोटा सा जुड़ा था, जो उसकी गर्दन तक लटक रहा था। जब वह अपना ब्लाउज उतारने लगी, तो उसकी पीठ का हर एक हिस्सा राजू की आँखों में उतर आया। राजू का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
वह जानता था कि यह गलत है, लेकिन वह खुद को रोक नहीं पा रहा था। अचानक, रानी ने पलटकर देखा और राजू को दरवाज़े पर खड़ा पाया। उनकी आँखों में एक पल के लिए आश्चर्य और फिर एक अजीब सी नरमी आ गई। वह घबराई नहीं, बल्कि शांत थीं।
उन्होंने धीरे से कहा, “राजू? तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”
राजू का चेहरा लाल हो गया। वह कुछ नहीं बोल पाया और सिर झुका लिया। रानी ने उसके पास आकर उसका हाथ पकड़ लिया। उनकी आँखें नम थीं, लेकिन उनमें प्यार था।
उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि तुम क्या सोच रहे हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ, लेकिन मैं भी एक औरत हूँ… जिसे प्यार चाहिए।”
यह सुनकर राजू हैरान रह गया। उसने माँ की आँखों में देखा। उनमें एक ऐसी भूख थी, जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी। रानी ने उसका हाथ अपने चेहरे पर रखा और धीरे से चूम लिया। फिर वह उसके करीब आई और उसके होठों पर एक नरम चुम्बन दिया। राजू का शरीर काँप उठा। उसने भी अपनी माँ को गले लगा लिया।
दोनों के बीच अब कोई दूरी नहीं थी। वह एक-दूसरे को चूम रहे थे, जैसे सालों से भूखे थे। रानी ने राजू का हाथ पकड़कर उसे अपने बिस्तर पर ले गई। वह उसके ऊपर झुकी और उसकी छाती पर चूमने लगी। राजू ने भी अपनी माँ के बालों में हाथ फेरते हुए उसे और करीब खींचा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ अपनी माँ की छवि थी। रानी ने धीरे से उसकी पैंट की चेन खोली और उसके मर्दाना हिस्से को अपने हाथ में ले लिया। राजू सिहर उठा। “माँ…” उसने फुसफुसाया। “शुश… बस मुझे महसूस करो, राजू,” रानी ने कहा।
वह उसके नीचे लेट गई और उसे अपनी ओर खींचा। राजू ने अपनी माँ के शरीर को छूना शुरू किया। उसकी उंगलियाँ उनकी पीठ, कमर, और फिर उनके नितंबों पर घूमने लगी। रानी ने आहें भरनी शुरू कर दीं। उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं। राजू ने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और वह उनके ऊपर आ गया।
वह उनके बदन को चूमने लगा। उनकी गर्दन, उनकी छाती, और फिर उनके पेट पर। रानी का शरीर गर्म हो चला था। वह उसकी आँखों में देख रही थी, जैसे उसे खा जाए। राजू ने उनकी साड़ी को पूरी तरह से खींचकर अलग कर दिया। अब वह सिर्फ एक पतली सी पेटीकोट में थीं।
उनकी जाँघें चमक रही थीं, और उनकी छाती की लहरें उसके सामने खुली पुस्तक की तरह थीं। राजू ने उनके पेटीकोट को भी उतार दिया। अब वह बिल्कुल नंगी थीं। राजू ने पहली बार अपनी माँ को इस रूप में देखा था। उसका दिल धड़कने लगा। वह उनके नाभि को चूमने लगा, फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया।
रानी की साँसें और तेज़ हो गईं। वह उसके बालों में हाथ फेर रही थीं और उसे अपने और करीब खींच रही थीं। “राजू… मुझे तुम्हारी ज़रूरत है,” उसने फुसफुसाया। राजू ने उनकी टाँगों को अपने कंधों पर रखा और खुद को उनके अंदर कर लिया। जैसे ही वह अंदर गया, दोनों ने एक साथ आह भरी। “Dehati Maa Beta Chudai”
यह एक ऐसा अनुभव था, जो दोनों ने पहले कभी महसूस नहीं किया था। राजू धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाने लगा। रानी की आँखों से आँसू आ गए, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी। “तुम मेरे हो, राजू… सिर्फ मेरे,” उसने कहा। वह उसकी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी। राजू का शरीर पसीने से तर-बतर हो गया था।
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वह उनकी छाती को चूम रहा था और उनके होठों को अपने होठों में दबा रहा था। कुछ देर बाद, रानी ने उसे रोक दिया और उसके ऊपर आ गई। “अब मेरी बारी,” उसने कहा। वह ऊपर से उस पर कूदने लगी। उसकी गति तेज़ थी, और वह पूरी तरह से खो गई थी। राजू ने उनके कूल्हों को पकड़ा और उन्हें अपनी ओर खींचा। दोनों एक साथ झड़ने वाले थे।
“माँ… मैं… मैं झड़ने वाला हूँ,” राजू ने चीखा।
“हाँ… मेरे साथ… झड़ो,” रानी ने कहा।
दोनों एक साथ झड़ गए। उनके शरीर कांप रहे थे। वह एक-दूसरे को गले लगाए हुए थे। कुछ देर तक वह ऐसे ही लेटे रहे। फिर रानी ने उठकर उसके चेहरे पर एक चुम्बन दिया। “मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, राजू,” उसने कहा। “मैं भी आपसे बहुत प्यार करता हूँ, माँ,” राजू ने कहा।
फिर राजू ने उसे अपनी बांहों में उठाया और उसे अपने चेहरे पर बिठा दिया। उसने उसे अपने मुँह पर रखा और उसे पेशाब करने के लिए कहा। रानी ने शर्म से अपना चेहरा छिपा लिया, लेकिन वह मान गई। उसने उसके चेहरे पर पेशाब कर दी। राजू ने उसे पी लिया। “यह मेरे लिए एक पवित्र अनुष्ठान है, माँ। मैं तुम्हारा हर एक कतरा अपने अंदर समेटना चाहता हूँ,” उसने कहा।
रानी इस बात से बहुत खुश हुई। वह उसकी बाहों में समा गई और रोने लगी। यह खुशी के आँसू थे। उसने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और बोली, “तुमने मेरी सारी कमियों को पूरा कर दिया है, राजू। तुम्हारे पिता चले गए, लेकिन तुमने उनकी जगह ले ली है। नहीं, तुम उनसे भी ज़्यादा हो।”
इस कहानी की जड़ें बहुत पुरानी थीं, राजू के बचपन में दफ्न थीं। जब वह छोटा था, तब भी वह अपनी माँ को देखकर एक अजीब सी शांति महसूस करता था। उसे याद है, कैसे वह छिपकर उसका पीछा करता था। जब भी रानी गाँव के सार्वजनिक शौचालय में जाती, तो राजू दूर से खड़े होकर इंतज़ार करता। “Dehati Maa Beta Chudai”
उसे समझ नहीं आता था कि वह क्यों करता है, लेकिन उसे लगता था कि वह उसकी सुरक्षा कर रहा है। धीरे-धीरे, जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसकी इच्छाओं में भी बदलाव आया। अब वह सिर्फ सुरक्षा नहीं चाहता था। वह उसका हिस्सा बनना चाहता था। वह अपनी माँ को सोचते हुए हस्तमैथुन करता।
उसकी कल्पना में, वह उसके चेहरे पर बैठती और उस पर पेशाब करती। वह उसकी गर्मी को महसूस करना चाहता था, उसके हर कतरे को अपने अंदर समेटना चाहता था। यह सिर्फ एक कल्पना नहीं थी, यह एक पूजा थी। उसके लिए, उसकी माँ का पेशाब अमृत के समान था।
उसकी इच्छाएँ यहीं नहीं रुकती थीं। वह उसके गंदे छेद को भी चाहता था। जब भी वह उसे स्नान करते हुए देखता, तो उसकी निगाहें उसकी गोल मटोल गांड पर टिक जातीं। वह कल्पना करता कि कैसे वह उसकी गंदी गांड को चाटता और चाटता। वह उसकी गंदगी को भी अपने मुँह में लेना चाहता था। यह उसके लिए प्यार का सबसे बड़ा प्रमाण था।
जब रानी नदी के किनारे कपड़े धोती, तो राजू पास के पेड़ के पीछे छिप जाता। वह देखता कि कैसे वह झुककर कपड़े धोती है, उसकी पीठ पर पसीने की परत चमकती है। उसकी साड़ी उसकी जाँघों के बीच फँस जाती है और उसकी योनि का एक छोटा सा हिस्सा दिखाई देता है। राजू का दिल धड़कने लगता। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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वह कल्पना करता कि वह उसके पीछे जाता है, उसकी साड़ी को उठाता है और उसकी चूत को चाटने लगता है। वह उसके रस को पीना चाहता था, जब तक कि वह उसके मुँह में ही झड़ न जाए। और आज, सब कुछ सच हो रहा था। उसने अपनी माँ को पाया था। वह उसकी थी, पूरी तरह से।
रानी ने उसे अपने सीने से लगा लिया और बोली, “अब मेरी बारी, राजू। मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करना चाहती हूँ।” वह उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। वह उसके चेहरे पर अपनी गांड घिसने लगी। राजू के लिए यह कोई नई बात नहीं थी, लेकिन इस बार यह हकीकत थी। “Dehati Maa Beta Chudai”
उसने अपनी माँ की मखमली गांड पर हाथ फेरा और उसे अपनी ओर खींचा। रानी ने उसके बालों को अपनी उंगलियों से सहलाया और फिर उसके मुँह पर अपनी गांड दबा दी। “चाटो, मेरे राजा,” उसने कहा। “चाटो अपनी माँ को।” राजू ने उसकी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटा। यह एक ऐसा अनुभव था, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
उसकी माँ की गांड का स्वाद उसे पागल कर रहा था। वह उसे चाटता रहा, जैसे भूखा व्यक्ति भोजन करता है। रानी की साँसें तेज़ हो गईं। वह उसके सिर को अपनी गांड पर दबा रही थी। “हाँ… ऐसे ही… और अंदर तक,” वह सिसकारियाँ ले रही थी। राजू ने अपनी जीभ को उसकी गांड के अंदर तक घुसा दिया।
रानी ने एक लंबी सिसकारी भरी। उसका शरीर कांप उठा। वह उसके चेहरे पर ही झड़ने वाली थी। लेकिन राजू ने उसे रोक दिया। वह उसे और परेशान करना चाहता था। वह उठा और उसे बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। अब रानी की गांड उसके सामने उठी हुई थी। उसने अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया।
रानी ने आहें भरनी शुरू कर दीं। राजू उसकी चूत को चाट रहा था, जैसे वह दुनिया का सबसे स्वादिष्ट फल हो। वह उसकी क्लिटोरिस को अपने दाँतों से हल्के से काटता, फिर जीभ से सहलाता। “राजू… मैं मर जाऊँगी,” रानी चीख पड़ी। “मरो तो सही, माँ। पर मेरे हाथों में,” राजू ने कहा और फिर से उसकी चूत में अपना मुँह दे दिया।
वह उसकी चूत का रस पी रहा था। वह उसकी चूत में अपनी जीभ घुमा रहा था, जैसे कोई कलाकार अपनी कला को निखार रहा हो। रानी बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठियों में दबा रही थी। उसकी आँखों से पानी निकल रहा था। “मैं झड़ रही हूँ, राजू… मैं झड़ रही हूँ!” और वह झड़ गई। उसका पूरा शरीर कांप रहा था।
राजू ने उसका हर एक कतरा पी लिया। वह उठा और उसके होठों पर एक चुम्बन दिया, ताकि वह अपना ही स्वाद चख सके। “अब मेरी बारी, माँ,” राजू ने कहा। वह फिर से लेट गया और उसे अपने चेहरे पर बिठा लिया। लेकिन इस बार उसने उसे अपनी चूत पर बिठाया। रानी ने उसके सीने पर हाथ रखा और धीरे-धीरे अपनी चूत को उसके मुँह पर घिसने लगी।
राजू उसकी चूत को चाट रहा था और उसे और उत्तेजित कर रहा था। “माँ, मुझे तुम्हारा पानी चाहिए,” उसने कहा। “लो, मेरे बेटे। लो अपनी माँ का अमृत,” रानी ने कहा और उसके चेहरे पर पेशाब कर दी। राजू ने उसकी गर्म पेशाब को अपने मुँह में भर लिया। वह एक बूँद भी बर्बाद नहीं होने देना चाहता था। “Dehati Maa Beta Chudai”
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यह उसके लिए जीवन का अमृत था, उसकी माँ का तिरस्कार, उसका प्यार, उसकी सब कुछ। वह गटकता रहा, और जब वह रुक गई, तो उसने उसकी चूत को चाटकर साफ़ कर दिया। रानी उसके चेहरे से उठकर उसके बगल में लेट गई और उसकी छाती पर सिर रख दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके शरीर से उठी भाप और उसके शरीर से लगी उसकी पेशाब की महक उसे एक अजीब सी शांति दे रही थी। “तुमने मुझे आज पूरा कर दिया, राजू,” वह धीरे से बोली। “मैंने तुम्हें एक बेटे के रूप में पाला, लेकिन तुमने एक पति का फर्ज़ निभाया। नहीं, एक पति से भी ज़्यादा।”
राजू ने उसे और कसकर अपनी बांहों में भर लिया। “आप मेरी हो, माँ। सिर्फ मेरी। कल से आप मेरी पत्नी होंगी, मेरी रानी। मैं आपको हर रोज़ इसी तरह प्यार करूँगा।” यह बात सुनकर रानी फिर से खुशी से भर गई। उसने उसके होठों पर एक गहरा चुम्बन दिया। यह चुम्बन अब किसी माँ-बेटे का नहीं, बल्कि दो प्रेमियों का था। “मैं तुम्हारी रानी हूँ, राजू,” उसने फुसफुसाया। “हमेशा के लिए।”
उस रात वे दोबारा सोए नहीं। वह बातें करते रहे, एक-दूसरे को चूमते रहे, और फिर से एक हो गए। इस बार राजू ने उसे पीछे से लिया। वह उसकी कमर पर किस करता रहा और उसके स्तनों को मसलता रहा। रानी पीछे से उसकी ओर मुड़ी और उसे चूमने लगी। उनकी साँसों में एक-दूसरे की महक थी, और उनके शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
जब सूरज निकला, तो घर में एक नई ऊर्जा थी। रानी ने राजू के लिए नाश्ता बनाया, लेकिन इस बार वह एक पत्नी की तरह उसकी सेवा कर रही थी। वह उसे खिला रही थी, और वह उसे चूम रहा था। “आज रात मैं तुम्हारे लिए कुछ खास बनाऊँगी,” रानी ने कहा। “मुझे तुम्हारी चूत से ज़्यादा खास कुछ नहीं चाहिए,” राजू ने कहा और उसे अपनी गोद में खींच लिया।
वह उसे रसोई में ही चोदने लगा। रानी की सिसकियाँ घर के कोने-कोने में गूंज रही थीं। उसने उसे रसोई की स्लैब पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटा। फिर उसने उसे फिर से चोदा, और इस बार वह उसके मुँह में ही झड़ गया। रानी ने उसका हर एक कतरा पी लिया। उनका जीवन अब एक नई परिकल्पना था।
वह दिन में माँ-बेटे थे, और रात में पति-पत्नी। गाँव वालों को इस बारे में कुछ पता नहीं था, और अगर किसी को पता भी चलता, तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी दुनिया सिर्फ वे दोनों थे, और वे अपनी दुनिया में खुश थे। राजू का जुनून अब और गहरा हो गया था। वह अपनी माँ को हर लम्हे में चाहता था।
जब वह खेतों में काम करती, तो वह पीछे से जाकर उसकी साड़ी उठा देता और उसकी गांड पर एक चुम्बन कर देता। रानी शर्मा जाती, लेकिन उसे यह पसंद भी था। वह जानती थी कि उसका बेटा उसे कितना चाहता है। एक दिन राजू ने उसे एक चुनौती दी। “माँ, आज हम खेत में ही करेंगे।”
रानी चौंक गई। “पागल हो गए हो क्या? कोई देख लेगा!”
“कोई नहीं देखेगा,” राजू ने कहा। “और अगर कोई देख भी ले, तो क्या? हम प्रेमी हैं।”
यह बात सुनकर रानी का दिल पिघल गया। वह मान गई। दोपहर में, जब सूरज अपने चरम पर था, वह एक सुनसान खेत के कोने में गए। ऊँची बाजरे की फसल उन्हें छुपा रही थी। राजू ने रानी को अपनी बांहों में लिया और उसके कपड़े उतारने लगा। रानी का शरीर पसीने से चमक रहा था। “Dehati Maa Beta Chudai”
राजू ने उसे ज़मीन पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। धूप की किरणें उनके शरीर पर नाच रही थीं। हवा में मिट्टी और उनके पसीने की महक थी। राजू ने उसे धीरे-धीरे चोदा। रानी की सिसकियाँ पक्षियों के चहचहाट के साथ मिल गईं। यह एक ऐसा अनुभव था, जिसने उन्हें और भी करीब कर दिया। जब वह झड़ गए, तो वह वैसे ही लेटे रहे।
राजू ने उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फेरी और बोला, “माँ, मैं तुम्हारे साथ हमेशा ऐसे ही रहना चाहता हूँ।”
“हम हमेशा ऐसे ही रहेंगे, राजू,” रानी ने कहा। “मैं कभी तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगी।”
उनकी दुनिया अब उस छोटे से घर और खेतों तक सीमित नहीं थी। उनकी दुनिया तो उनके प्यार में थी, उनके जिस्म में थी, उनकी साँसों में थी। वह दो जीव थे, जो एक आत्मा बन चुके थे। उनके लिए, समाज के नियम कोई मायने नहीं रखते थे। उनका अपना एक संसार था, जहाँ सिर्फ प्यार और वासना थी। एक रात, जब पूरा गाँव सो रहा था, राजू ने रानी को आँगन में ले गया।
चाँद का प्रकाश उन पर ऐसा पड़ रहा था, जैसे खुद चाँद उनके प्यार का साक्षी बना हो। राजू ने उसे वहीं पर, ज़मीन पर चोदा। रानी की आवाज़ें खामोश रात में गूंज रही थीं। उसने उसे बताया कि वह उसके बच्चे की माँ बनना चाहती है। “मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी, राजू,” उसने कहा।
“मैं तुम्हारे बच्चे को जन्म दूँगी।” यह सुनकर राजू का उत्साह दोगुना हो गया। उसने उसे और ज़ोर से चोदा, जैसे वह अपना वीर्य उसके गर्भ में भरना चाहता हो। वह चाहता था कि उसकी माँ उसके बच्चे की माँ बने। यह उनके प्यार की सबसे बड़ी पराकाष्ठा थी| उस दिन के बाद से उनका रिश्ता एक नई चरम सीमा पर पहुँच गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
राजू की माँ के प्रति आज़ादी अब पूरी तरह से खुली चाह में बदल चुकी थी, और रानी भी इस नई दुनिया में पूरी तरह से डूब चुकी थी। उसे अपने बेटे का यह पागलपन, यह जुनून, अपने ऊपर होता देखकर एक अजीब सी ताकत मिल रही थी। एक दोपहर, जब रानी भारी घड़े से पानी भरकर आ रही थी, तो राजू ने उसे पकड़ लिया और उसे अपने कमरे में खींच ले गया।
उसने उसका हाथ छीनकर घड़ा ज़मीन पर रख दिया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया। बिना कुछ बोले, उसने उसकी साड़ी को ऊपर उठा दिया और उसकी चूत पर अपना मुँह दबा दिया। रानी ने आहें भरते हुए उसके बालों को सहलाया। राजू उसकी चूत चाट रहा था, उसकी जीभ उसके रस को चाट रही थी। “Dehati Maa Beta Chudai”
“माँ, मुझे प्यास लगी है,” उसने अपना मुँह उसकी चूत से न उठाते हुए कहा। रानी समझ गई। उसने अपनी टाँगें और चौड़ी कर लीं और थोड़ी देर बाद, उसने अपना गर्म पानी उसके मुँह पर छोड़ दिया। राजू बेताबी से उसे पीने लगा। उसके चेहरे और गले पर उसकी माँ का पेशाब बह रहा था, लेकिन वह एक बूँद भी बर्बाद नहीं होने दे रहा था।
यह उसके लिए रोज़ का अनुष्ठान बन चुका था। रात को, जब दोनों खाना खाकर आँगन में बैठे थे, तो राजू का मन फिर से बेचैन होने लगा। उसने रानी से कहा, “माँ, आज मैं आपकी गांड खाना चाहता हूँ।” रानी मुस्कुराई और उठकर अपने कमरे में चली गई। राजू भी उसके पीछे-पीछे गया।
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रानी ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके चेहरे पर अपनी गांड टिका दी। राजू ने उसकी गांड के छेद को अपनी जीभ से गीला किया और फिर उसे चाटने लगा। वह उसकी गांड को चूस रहा था, जैसे कोई भूखा आदमी अंतिम बचे भोजन को खा रहा हो। “हाँ… मेरे राजा… खा ले अपनी माँ की गांड… यह सिर्फ तेरी है,” रानी कामुकता से बोल रही थी।
राजू का लंड अब पूरी तरह से खड़ा हो चुका था। वह उठा और रानी को कुतिया की तरह घोड़ी बना दिया। उसने अपना मोटा, गर्म लंड उसकी गांड के छेद पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का दे दिया। रानी दर्द से चीख पड़ी, लेकिन राजू ने उसे कोई मौका नहीं दिया। “Dehati Maa Beta Chudai”
वह उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। उसकी गांड से आवाज़ें आ रही थीं, ‘फट… फट… फट’। “ले माँ, ले मेरा लंड! तेरी यह गांड अब मेरी है!” राजू चिल्ला रहा था। कुछ देर बाद, राजू ने अपना वीर्य उसकी गांड में ही छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक गए।
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