Daughter Antarvasna Sex Story
मेरे और पापा का नयाजय सम्बन्ध तब बन गया था जब मैं अपने पति को छोड़ कर दुबारा मायके आ गयी थी. मेरा नाम रिंकल हैं मैं एक जवान शादीशुदा लड़की हूँ। मेरे गोल गोल बड़े बूब्स और मेरी मोटी गाँड़ किसी का भी लंड खड़ा करने के लिए काफ़ी हैं, शादी से पहले मैंने ना जाने कितने लड़कों से अपनी चूत चुदवा चुकी हूँ। Daughter Antarvasna Sex Story
मेरे पति का लंड बहुत छोटा है और वो मुझे अच्छे से चोद भी नहीं पाता था। शादी के बाद मेरी चूत और गाँड़ की प्यास बुझाने वाला कोई नहीं था। इसलिए मैं अपने पति से झगड़ा करके अपने मायके चली आयी थी, ये सोच कर कि वहाँ किसी ना किसी से अपनी चूत चुदवा लूँगी। पर मुझे पता नहीं था कि मुझे अपने पापा का लंड ही खाना पड़ेगा।
पापा को मुझ पर पहले से गंदी नज़र तो थी ही, ना जाने कितनी बार वो मुझे सपने में चोद चुके होंगे। जब से मैं वापस मायके आयी हूँ मेरे पापा की जैसे लाटरी लग गई हो, पूरे दिन वो मुझे ताड़ते रहते है। एक दिन मम्मी ननिहाल गई हुई थी और घर में मैं और पापा ही थे.
तो पापा ने मौक़ा पा कर रात को आये और बोले ‘बेटी! तुम अपने पति को छोड़ कर यह आ चुकी हो, पर तुम्हारी चूत तो अभी बिलकुल नयी है. इसका इस्तेमाल तो करती रहो. उधर मेरा भी लंड खाने का दिल कर रहा था. पर मैं डर गई थी पर सोचा कि ऐसा मौक़ा बाद में नहीं मिलेगा। बस दोस्तों, उसी रात हम बाप बेटी में समझौता हो गया था.
पापा मेरे कमरे में आ गए और सीधे मेरे होंठ पीने लगे. अभी भी मैं मंगल सूत्र पहनती थी, क्यूंकि अब तक मेरा डाइवोर्स नहीं हुआ था. मेरे होंठ पीते पीते पापा के हाथ मेरे बूब्स पर चले गये. वो जोर जोर से अपने हाथों से मेरी कसी कसी गोल गोल छातियाँ दबाने लगे. मुझे बहुत जोर का नशा चढ़ने लगा.
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पापा मेरे होठ अपनी किसी माल की तरह पीते जा रहे थे. कुछ देर बाद तो मैं बिलकुल कंट्रोल नही कर पा रही थी. और मैंने बोल ही दिया कि चोद दो पापा!! अब मुझे मत तड़पाओ! चोद डालो अपनी जवान कमसिन बेटी को!’ मैंने कहा. मैंने रेड रंग की साडी पहन रखी थी. पापा मुझे बिस्तर पर ले गयी. मेरे कपडे निकाल दिए.
मेरा ब्लाउज खोल दिया, मेरी साड़ी निकाल दी, मेरा पेटीकोट का नारा खोल दिया. यहाँ तक की मेरी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी. मेरे सगे पापा ने मुझे नंगा कर दिया. बेटी तू तो अपनी माँ की तरह खुबसूरत है!! पापा बोले. पर जब मैं वापस मायके आ गई तो अब पापा को एक नई नई चूत मिलने वाली थी.
पापा मेरे उपर लेट गये. मेरी नर्म नर्म गर्म गर्म चुचियाँ पीने लगा. बेटी!! तू तो बहुत गजब का माल है. तेरा पति को तुझको रोज चोदता होगा??’ वो बोले. ‘हाँ पापा! वो मुझे रोज रात में लेता था लेकिन उसका लंड इतना छोटा था की मज़ा ही नहीं आता था। बेटी!! तू है ही इतना कडक माल. तुझे जो मर्द एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाए. वो तुझको चोद के ही माने.’
पापा बोले और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा. मेरे पापा बड़े शरारती निकले. वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहे थे और पी रहे थे. मुझे दर्द भी हो रहा था, उत्तेजना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था. ‘पापा आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से पापा’ मैंने कहा.
पर उनके उपर कोई असर नही पड़ा. वो अपनी धुन में थे. जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चुचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे थे. पापा बहुत ज्यादा चुदासे हो गए थे. उनका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेते. मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा देते थे और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पीते थे.
दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा. फिर पापा मेरी चूत पर आ गए. मेरी बुर पीने लगा. मेरी झांटें बिलकुल साफ़ थी. पापा मेरी बुर पीने लगे. मेरी चूत को वो उँगलियों से खोलकर अच्छे से पी रहे थे. अभी मैं बहुत कम ही चुदी हुई थी. क्यूंकि मेरी गुलाबी चूत पर काफ़ी टाइम से मेहनत नहीं हुई थी.
इसलिए अब मेरे पापा ही मेरी चूत पर मेहनत कर रहे थे. पापा अपनी जुबान को निकाल कर मेरी चूत के लाल लाल ओंठ पी रहे थे. चूत के दाने को ऊँगली से सहला रहे थे. और जीभ चूत के छेद में डाल रहे थे. मुझे बहुत मजा आ रहा था. अब पापा ही मेरे प्रियतम हो गये थे. मैं उनको अपनी चूत पिला रही थी.
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पुरे ज़हन में चुदास हो रही थी. यौन उतेज्जना को मैं अनुभव कर रही थी. चुदास ने हल्की भूख भी लगने लगी थी. मुहे पेशाब भी लग रही थी. मेरे मुतने के छेद से मूत की 2-4 बुँदे निकल आई थी जो पापा पी गये थे. वो किसी देसी कुत्ते की तरह मेरी चूत चाट रहे थे. आज के लिए मैं उनकी कुतिया बन गयी थी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरी चूत में बड़ी जोर की सनसनी हो रही थी. दोस्तों, पापा मुझे किसी रण्डी की तरह चोदने के मूड में दिख रहे थे. उन्होंने अपनी कई ऊँगली मेरे चूत में डाल और मेरी चूत फेटने लगी. इससे तो मुझे बहुत ज्यादा चुदास लग गयी. कामवासना मेरे खून में दौड़ने लगी, चुदवाने की तीव्र इक्षा प्रबल हो गयी.
पापा बड़ी जोर जोर से चूत फेटने लगे. फिर उन्होंने अपना बड़ा सा लौड़ा मेरे गुलाबी भोसड़े में डाल दिया. मुझे कूट कूटकर वो चोदने लगे. जैसा मेरी चूत पर कपड़े धो रहे हो. पापा के झटके मुझे बड़े मीठे लग रहे थे. इससे पहले मैंने ऐसे कभी लंड नहीं खाया था, पापा मुझे खट खट करके चोदने लगे, मुझे लगा की मैं परमात्मा तक पहुच रही हूँ.
पापा में सच में बहुत ताकत और उर्जा थी. इतनी जोर जोर से तो किसी लड़के ने नही चोद खा पाता था. मुझे पेलते पेलते पापा मेरे बूब्स को भी जोर जोर से मसल रहे थे और दबा रहे थे. ये सब बहुत शानदार और कमाल का था दोस्तों. मैं अपने सगे बाप से चुदवा रही थी और इश्वर के करीब पहुच रही थी.
वो मुझे अपनी औरत समज के चोद रहे थे. दोस्तों, मैं उच्च स्तर का मानसिक और शरीरिक सुख महसूस कर रही थी. मेरी चूत में खलबली मची हुई थी. मेरी चूत से मीठी आनंदमई तरंगे निकल रही थी जो मेरी जाँघों और नाभि दोनों तरफ जा रही थी. मेरे पापा बहुत कलाकर आदमी साबित हो चुके थे.
वो कामशास्त्र के सम्पूर्ण ज्ञाता साबित हो चुके थे. किसी लौडिया को किस तरह से अच्छे से चोदा जाता है, ये पापा अच्छे से जानते थे. उनका लौड़ा मजे से मेरी चिकनी चूत में फिसल रहा था और अंदर बाहर हो रहा था. मैं मजे से चुदवा रही थी और आ आहा माँ माँ माँ आ हा हा हा !! की सिसकारी ले रही थी.
मुझको लग रहा था की पापा का लौड़ा अपना माल मेरी चूत में छोड़ने वाला है. फिर कुछ देर बाद पापा ने मुझे चोदते चोदते सीने से लगा लिया. मुझे अपनी बाहों में भर लिया जैसे कोई आदमी अपनी औरत को भर लेता है. फिर पापा ताबड़तोड़ धक्के मारने लगे. पापा बोले- मेरी मेरी बिटिया, क्या चूत हैं तेरी इतना मज़ा तो मुझे कभी तेरी मम्मी को चोदने में भी नहीं आया।
मैं- हाँ पापा मुझे भी इतना मज़ा कभी नहीं आया।
पापा- साली रण्डी अब से तू मेरी बीवी बनके रहेगी। तुझे अब सिर्फ़ अपने बाप के लंड की सेवा करनी है।
मैं- हाँ पापा आप इसी तरह मुझे चोदोगे तो मैं आपकी बीवी क्या, हमेशा आपकी रखैल बन कर रहूँगी।
रखैल तो तू मेरी बन चुकी है मेरी राँड बिटिया, पापा बोले.
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फिर उन्होंने अपना गर्म गर्म माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया. हम दोनों साथ में ही सो गये. जब हम बाप बेटी उठे तो दोपहर के 2 बज चुके थे. पापा को भूख लग आई थी. ‘जा बेटी खाना बना. पर इस तरह नंगे नंगे ही बना. तभी मजा आयेगा. आज सारा दिन हम नंगे ही रहेंगे!’ पापा बोली. ‘जी पापा जी’ मैंने कहा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दोस्तों, मैं अपने बदन पर एक भी कपड़ा नही पहना. मेरे बाल भी खुले थे थे. आज एक बार मैं पापा से चुदवा चुकी थी. अब पापा के लिए खाना बनाने जा रही थी. मेरी छातियाँ बिलकुल नंगी थी. दुपट्टा तक मैंने नही डाला था. क्यूंकि पापा का आदेश था की आज हम बाप बेटी नग्न अवस्था में ही रहे. “Daughter Antarvasna Sex Story”
मैं बाथरूम में मुतने गयी. खड़े खड़े ही बिना दरवाजा बंद करके मैं मुतने लगी. फिर रसोई में नग्न अवस्था में ही खाना बनाने चली गयी. कुछ देर बाद मैं डाइनिंग टेबल पर खाना लगा दिया. पापा भी आ गये. अब उनका लौड़ा किसी गधे के लौड़े की तरह बहुत ही बड़ा दिख रहा था.
उनका लौड़ा एक बार फिर से अपनी बेटी की चूत मारना चाहता था. पापा का लौड़ा दोबारा खड़ा हो गया था. मैं पप्पा के बगल ही बैठ के खाना खाने लगी. पापा का एक हाथ मेरी चूत में था तो दुसरे हाथ से वो दाल चावल खा रहे थे. मेरी चूत का रस उनके हाथ में लग जाता था तो वो पी जाते थे.
कुछ देर बाद हम बाप बेटी खाना खा चुके थे. ‘बेटी ! तुमको एक बार और चोदने का मन है! पापा बोले. ‘चोद लो पापा! अब कौन सा मेरा मर्द बैठा है यहाँ. अब मेरी चूत आपकी ही है. क्यूंकि अब मैं आप पर आश्रित हूँ’ मैंने कहा. पापा ने इस बार मुझे खड़े खड़े ही चोदने का फैसला लिया.
उन्होंने मुझे डाईनिंग टेबल पर बिठा दिया और मेरे होंठ पीने लगा. वो इस बार मेरे उपर के ओंठ पी रहे थे. क्यूंकि ऐसा कहा जाता है की उपर के ओंठ पीने से बड़ी जोर की चुदास चढ़ती है. मैंने अपना हाथ पापा के सुडोल चिकने कंधे पर रख दिया. पापा मेरे उपर के ओंठ पीने लगा. मेरे गुलाबी ओंठों का रंग लूटने लगे. “Daughter Antarvasna Sex Story”
आज मैं अपने पापा की औरत बन गयी थी. कोई और चोदने वाला तो था नही मेरी जिन्दगी में. इसलिए मैं अब अपने बाप की बीवी बन गयी थी. पापा के हाथ मेरी लटकती छातियों पर थे. जिस तरह से किसी मंदिर की घंटियाँ लटकती रहती है ठीक उसी तरह मेरी नुकीली छातियाँ भी मेरे सीने से लटक रही थी.
पापा के हाथ मेरी चिकनी नुकीली छातियों पर था. आज पापा भी जन्नत का मजा ले रहे थे. दोस्तों, मेरे ओंठ पीने के बाद पापा ने मुझे अपने घुटनों पर बिठा दिया और अपना लंड मेरे चेहरे पर रगड़ने लगे। थोड़ी देर लंड सहलाने के बाद पापा ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया और मेरा मुँह चोदने लगे। और मैं भी किसी रण्डी की तरह अपने बाप का लंड चूस रही थी।
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पापा का लंड काफ़ी देर तक चूसने के बाद पापा ने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया। पापा जस्ट मेरे पीछे खड़े थे. मेरी चिकनी पीठ को वो बड़ी देर तक सहलाते रहे. चुमते रहे. फिर दांत गड़ाने लगे. इससे दोस्तों, मुझे बहुत ज्यादा चुदास लग गयी. किसी भी औरत की पीठ पर कोई मर्द काटता है तो जाहिर सी बात है वो और ज्यादा चुदवाना चाहेगी.
पापा के जोर जोर से मेरी पीठ में काटने से मेरी गोरी चमड़ी में उनके दांत के निशान पड़ गये. दर्द भी हो रहा था, पर चुदास भी चढ़ रही थी. फिर पापा निचे जमीन पर बैठ गये. मेरे गोल मटोल गोरे चुतड पापा के सामने थे. पहले तो उन्होने मेरे पुट्ठों को हाथ से छू छूकर सहलाया फिर वही पुरानी हरकत दोहराने लगे.
अपने तेज धारदार दांतों से मेरे चुतड काटने लगे. एक ओर जहाँ दर्द हो रहा था, मैं उतेज्जना और यौन सनसनी मैं महसूस कर रही थी. फिर पापा पीछे से बैठकर मेरा भोसडा चाटने लगे. मेरी चूत की लाल लाल फाकों पर पापा के ओंठ थे. वो पी रह थे. मुझे मजा आ रहा था. मैं दीवार के सहारे खड़ी थी और पापा को बुर की फ़ाकें पिला रही थी.
फिर पापा ने मेरी मस्त लाल लाल बुर की फाकों में अपना मोटा लौड़ा डाल दिया और मुझे चोदने लगे. अब पापा मुझे खड़े खड़े की चोद रहे थे. जबकि सुबह पापा ने मुझे लिटाकर चोदा था. मैं अपने सगे बाप के साथ रति क्रीडा कर रही थी. मेरे चूत के गुप्त छेद में पापा लौड़ा दे रहे थे. “Daughter Antarvasna Sex Story”
इस तरह से खड़े होकर चोदने में मुझे ज्यादा गहराई तक लौड़ा खाने को मिल रहा था. गच गच की बड़ी ही मादक आवाज मेरी चूत से पैदा हो गयी थी. पापा ने मुझे दीवार पर हल्का से आगे की ओर झुका रखा था. वो मुझे गचागच चोद रहे थे. मैंने अपनी चूत की सिकोड़ लिया था जिससे ज्यादा और ज्यादा रगड़ चूत में मिले. और ज्यादा आनंद प्राप्त हो.
आज मैं उच्च स्तर का शारीरिक और मानसिक सुख मह्सुस कर रही थी. आज के लिए मैं अपने सगे बाप की रंडी बन चुकी थी. आज के लिए मैं पापा की प्यारी बीवी बन गयी थी. पापा ने मेरी कमर में हाथ डाल दिया था. मेरी नाभि में वो ऊँगली कर रहे थे और पीछे से फटाफट चोद रहे थे. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे चूचो पर भी पापा के हाथ थिरक रहे थे. वो बहुत जोर जोर से मेरी चूत पर हमला कर रहे थे और बुर फाड़ रहे थे. पट पट की आवाज पुरे कमरे में गूंज रही थी. आज मैं पापा की प्यारी रंडी बन गयी थी. पापा मेरे सिल्की मनमोहक घुंघराले बालों में अपनी नाक डाल रहे थे और मेरे गजब के चुदासे जिस्म की खुसबु सूंघ रहे थे. और पीछे से मुझे फट फट करके चोद रहे थे.
फिर धीरे से पापा ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर मेरी गाँड़ में डाल दिया। और मैं ज़ोर से चिल्लायी- उईईई माँ मर गई पापा। पर पापा कहा रुकने वाले थे वो ज़ोर ज़ोर के झटकों के साथ मेरी गाँड़ चोदे जा रहे थे। मुझे भी गाँड़ में लण्ड लेने का बहुत शौक़ था, मुझे मज़ा भी आ रहा था। काफ़ी देर मेरी गाँड़ मारने के बाद पापा में फिर से मेरी चूत में लण्ड डाल कर फ़चा फ़च मेरी चूत चोदना चालू कर दिया।
फिर कुछ देर बाद पापा फिर से मेरी खौलती चूत में ही झड गए. एक बार फिर से वो कामवासना के कारण मेरे नंगी चिकनी पीठ पर दांत गड़ाके काटने लगे. मैं पापा को कुछ नही कहा. अपनी पीठ को कटवाती रही. जिस आदमी ने मुझे चोद चोदकर इतना ज्यादा सुख प्रदान किया आखिर मैं कैसे उसे मना कर सकती थी. “Daughter Antarvasna Sex Story”
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1 हफ्ते बाद हम बाप बेटी फिर से चुदाई में रत हो गये थे. कोई नही जानता था की अपने पापा के साथ मैं एक शादी शुदा औरत के मजे मार रही हूँ. मैं अपने पापा की बीवी बन चुकी थी। अब बहुत चीजे बदल चुकी थी. अब रोज़ मैं स्नान करती थी. रंगीन साड़ी पहनती थी. पापा के नाम का सिंदूर लगाती थी. मांग भरती. पुरी तरह से सजती थी. ओंठों में लिपस्टिक लगाती थी.
फिर पापा के कमरे में चुदवाने जाती थी. इस बात में दोस्तों कोई शक नही है की मैं पापा की प्यारी रंडी बन चुकी थी. आज पापा ने एक बार फिर से मुझे नंगा कर दिया और मुझे अपने सीने पर लिटा लिया. मेरी चूत में लौड़ा दे दिया और मुझे सीने पर लिटाकर चोदने लगे. मेरे चिकने गोरे जिस्म पर पापा ने एकाधिकार कर लिया था. मेरी पीठ और पुट्ठों को सहला सहलाकर वो चोदने लगे.
मेरे दूध को पी रहे थे पापा. दोस्तों, मेरे पति के घर से आने के बाद अगर किसी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ था तो वो पापा ही थे. अब वो रोज मेरी चूत मारते थे. मेरी गोल गोल मखमली छातियाँ पापा के सीने ने कुचल रही थी. और निचे मेरी चूत भी पापा के लौड़े से कुचल रही थी. आज पापा ने फिर से पुरे दिन मुझे देसी रंडी बनाकर चोदा और झड गये.