Cousin Devar Bhabhi Sex
ये मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी है, जिसमें मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैं और मेरी कज़िन भाभी एक-दूसरे के दीवाने बन गए। मैं उस वक्त 25 साल का था, भूरा रंग, इतना हैंडसम तो नहीं लेकिन साफ-सुथरा और भरा-भरा बदन, 6 इंच का मोटा लंड। भाभी उम्र में 39-40 की थीं, साँवला रंग, कातिल फिगर, मुलायम-मुलायम रेशमी त्वचा, थोड़ी चब्बी पर गजब की सेक्सी लगती थीं। उनके बूब्स 38D के भारी-भरकम, कमर 38 इंच और गांड़ 42 इंच की गोल-मटोल, हर कदम पर हिलती हुई। Cousin Devar Bhabhi Sex
पिछले साल की बात है, मैं नाशिक में कज़िन भै भैया के घर एक फैमिली फंक्शन में गया था। रिश्तेदारों से मैं ज़्यादा घुलता-मिलता नहीं था, पर भाभी बहुत प्यारी और बिना जजमेंट वाली थीं, इसलिए उनसे खुलकर बात हो जाती थी। घर में सब फंक्शन की तैयारियों में लगे थे।
मैं भी मम्मी की मदद कर रहा था। तभी भाभी ने पूछा, “अखिलेश, स्कूटी चला लेते हो ना?” मैंने कहा, “हाँ भाभी, बिल्कुल।” तो बोलीं, “चलो मेरे साथ मार्केट, कुछ सामान लाना है।” मैंने मम्मी से पूछ लिया और भाभी के साथ निकल पड़ा। स्कूटी पर पीछे बैठी थीं, उनकी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं, मुलायम बूब्स मेरी पीठ से दब रहे थे।
रास्ते में हम खूब हँसे, मजाक किए, पहली बार इतना कंफर्टेबल फील लगा। जब लौटे तो भाभी ने मुस्कुराते हुए थैंक्स कहा और मेरे कंधे पर हल्का सा हाथ रखा, वो टच ही इतना बिजली सा था। उस दिन से हम और करीब हो गए। शाम को वो मेरी और मेरे कज़िन्स के साथ मस्ती करने लगीं।
फिर सब छत पर चले गए जहाँ फंक्शन होना था। भाभी ने मुझे रोका और बोलीं, “थोड़ा इंतज़ार करो, कंबल ले जाना है, रात में ठंड लगेगी।” अलमारी से कंबल निकालते वक्त भाभी स्टूल पर चढ़ीं। मैंने स्टूल पकड़ा। कंबल निकालते ही वो नीचे कूदीं और सीधे मेरी छाती से टकराईं।
उनके भारी बूब्स मेरी छाती पर पूरी तरह दब गए, मेरे हाथ खुद-ब-खुद उनकी नरम कमर पर चले गए। हमारी आँखें मिलीं, वो पल जैसे रुक गया, दिल तेज़ धड़कने लगा, भाभी की गर्म साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। अचानक हड़बड़ा कर अलग हुए और ऊपर छत पर चले गए।
कुछ घंटे बाद फिर भाभी ने बुलाया, “नीचे चलो मेरी मदद चाहिए।” मैं उनके पीछे-पीछे सीढ़ियां उतर रहा था, उनकी मटकती कमर और हिलती गांड देखकर लंड खड़ा हो रहा था। अचानक वो रुकीं, मुड़कर मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और ऐसे चलने लगीं जैसे हम लवर्स हों।
एक कमरे से सहन करने की आवाजें आ रही थीं, ग्ग्ग्ग… ओह्ह्ह… आह्ह्ह… हम दोनों समझ गए, भाभी शरमा कर मुस्कुराईं। सीढ़ियां उतरते वक्त भाभी ने शरारत से पूछा, “पता है उस कमरे में क्या हो रहा था?” मैं हकलाया पर मूड अच्छा था तो बोल दिया, “हाँ भाभी पता है।”
बस फिर क्या था, भाभी ने मेरी पर्सनल लाइफ के सवाल पूछने शुरू कर दिए, कभी किसी लड़की के साथ किया या नहीं। मैं सब बता गया। फिर वो अपनी ज़िंदगी की बातें बताने लगीं। किचन में पहुँचते ही वो पलटीं और पूछा, “तुम्हें कौन सी लड़कियाँ पसंद हैं?” मैंने कहा, “मेच्योर, थोड़ी चब्बी, क्यूट सी।”
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भाभी ने शैतानी स्माइल दी और तिरछी नज़रों से बोलीं, “तो मेरे बारे में क्या ख्याल है? मैं पसंद आऊँगी?” मैं तो पत्थर रह गया। वो हल्के से मेरे गाल पर थपकी मारकर बोलीं, “बोलो ना।” मैं शरमाते हुए बोला, “भाभी आप तो गजब की खूबसूरत हो, अगर भाभी ना होतीं तो गर्लफ्रेंड बनाने की पूरी कोशिश करता।”
भाभी मेरे और करीब आईं, मेरे कंधे पर हाथ रखा और बिना कुछ कहे मेरे होंठों पर लंबा, गर्म, गीला किस कर दिया, जीभ अंदर डाल दी, फिर हँसते हुए बाहर जाने लगीं। मैं तो पागल सा हो गया, लंड पत्थर जैसा खड़ा। उनके पीछे भागा, दरवाज़ा बंद किया, उन्हें खींचकर अपने सीने से चिपका लिया और पागलों तक किस करते रहे, जीभ एक-दूसरे की मुँह में चूस रहे थे।
भाभी ने किस तोड़ा और बोलीं, “ये गलत है अखिलेश, मैंने लाइन क्रॉस कर दी, सॉरी।” पर मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने फिर खींचा, गांड़ मसलते हुए बोला, “भाभी अब रुक नहीं सकता।” वो बोलीं, “अभी चलो ऊपर, बाद में बात करेंगे।” जाते-जाते मैंने उनकी गांड पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा, आवाज़ तक गूँजी। पूरी रात फंक्शन में थे पर दिमाग सिर्फ भाभी के होंठ और बूब्स में था।
अगले दिन मम्मी-पापा कुछ काम से चले गए, मैं भैया-भाभी के घर रुक गया। भैया को भी ऑफिस से बुला लिया गया। घर में सिर्फ कुछ मेहमान और हम। भाभी ने फिर बुलाया, “छत से सामान लाना है।” मैं तो मैं दौड़ा। आखिरी सीढ़ियों पर पहुँचते ही मैंने पीछे से उनकी पीठ और कमर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।
वो शरमाईं और बोलीं, “बदमाशी मत सोचना।” सामान लिया और निकलने से पहले मैंने हाथ पकड़कर खींचा, दीवार से सटा दिया, उनके सामने खड़ा हो गया। वो घबराईं, “अभी नहीं प्लीज, मेहमान हैं।” मैंने कहा, “यहाँ तो कोई नहीं।” और उनकी कमर पकड़कर फिर किस शुरू, जीभ चूसते हुए, उनके बूब्स मेरी छाती पर मसल रहे थे। अचानक बच्चों की आवाज़ आई तो हड़बड़ा कर कपड़े ठीक किए और नीचे आ गए।
शाम को मेहमान चले गए पर मम्मी-पापा और भैया वापस आ गए, कुछ कर नहीं पाए। अगले दिन सुबह मम्मी-पापा फिर बाहर, भैया ऑफिस, घर में सिर्फ मैं, भाभी और उनका छोटा बच्चा। हम फ्लर्ट कर रहे थे, गंदी-गंदी बातें। बच्चे ने चिल्लाकर कहा, “मैं नीचे खेलने जा रहा हूँ।”
मैं मन ही मन बोला, भगवान इसका भला करे। फटाक से दरवाज़ा लॉक किया। भाभी पहले से समझ गई थीं, किचन से निकलकर लिविंग रूम में आईं। हमने एक-दूसरे को कसके गले लगाया और खड़े-खड़े ही किस करना शुरू कर दिया, ग्ग्ग… म्म्म्ह्ह… आह्ह्ह… ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर भाभी ने मुझे सोफे पर धकेला, मेरी गोद में बैठ गईं, मेरे बाल पकड़कर खींचे और फिर गहरी स्मूचिंग, उनकी जीभ मेरे मुँह में, मेरे हाथ उनकी मोटी गांड मसल रहे थे, थप्पड़ पर थप्पड़ मार रहा था। मैंने किस रोका और उनके नाइट सूट के ऊपर से ही निप्पल्स चूसने लगा।
वो शरमाईं और धीमी आवाज़ में बोलीं, “अगर टॉप उतारना है तो कोई रोक नहीं रहा।” मैंने फटाक से टॉप ऊपर किया और साइड में फेंक दिया, ब्रा के ऊपर से बूब्स चूमने लगा। ब्रा खोलने में हाथ काँप रहे थे, वो हँस पड़ीं और खुद ब्रा निकाल दीं। उफ्फ्फ क्या नज़ारा था, साँवले जिस्म पर दूध से भरे 38D बूब्स, काले-काले निप्पल्स तने हुए।
मैं बस देखता रह गया। भाभी शरमाते हुए बोलीं, “बस देखोगे ही या कुछ करोगे भी?” मैंने उन्हें कसके गले लगाया और एक बूब चूसने लगा जैसे भूखा बच्चा, ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था, भाभी की सिसकियाँ निकल रही थीं, आह्ह्ह… अखिलेश धीरे… आअह्ह्ह्ह… पर मैं पागल था, दूसरा बूब हाथ से मसल रहा था।
भाभी ने मेरा सिर पकड़ा, मुझे ऊपर खींचा, किस किया और बोलीं, “आराम से मेरी जान, मैं कहीं नहीं भाग रही।” मैंने सॉरी कहा, वो हँस दीं, “चूसो ना मेरे राजा।” फिर मैंने गले पर किस किया और फिर बूब्स चूसने लगा, निप्पल्स को दाँतों से हल्का काटा तो भाभी की कमर उठ गई, ओह्ह्ह्ह्ह… अखिलेश्श्श… फिर वो उठीं गैस बंद करने किचन गईं।
मैं पीछे-पीछे, वो पलटीं तो मैं सामने खड़ा था। हँसकर बोलीं, “दो मिनट भी नहीं रुक सकते?” मैंने फिर गले लगाया, उनकी टी-शर्ट उतार कर फेंक दी। वो मेरा सीना चूमने लगीं। मैंने उन्हें किचन काउंटर पर बिठाया और दस मिनट तक वहीं किस करते रहे, उनके बूब्स मसलते हुए, गांड पर थप्पड़ मारते हुए।
किचन काउंटर पर भाभी को चूमते-चूमते हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे, साँसें तेज़ चल रही थीं, बदन गर्मागर्म। भाभी ने मेरी आँखों में देखकर धीमी शरारती आवाज़ में कहा, “फिर से सोफे पर जाकर जारी रखें?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “सोफा क्यों भाभी, तुम्हारे बेड पर चलते हैं ना।” वो हँस पड़ीं और बोलीं, “चलो ठीक है बदमाश।”
ये सुनते ही मेरी धड़कनें दोगुनी हो गईं। मैंने भाभी को गोद में उठा लिया, उनके होंठ चूसते हुए, जीभ अंदर डालते हुए बेडरूम तक ले गया। बेड पर बिठाया, फिर हल्का सा धक्का देकर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया। भाभी मेरे गले पर, छाती पर किस करने लगीं, गर्म जीभ से चाटने लगीं, अचानक मेरे निप्पल पर हल्का सा काटा और शैतानी हँसी छोड़ी।
मैंने भी बदला लिया, उनके काले निप्पल्स को दाँतों से पकड़ा, हल्का खींचा तो भाभी की कमर अपने आप ऊपर उठ गई, आह्ह्ह… अखिलेश्श्श… हम लेटे-लेटे दस मिनट तक ऐसे ही किस करते रहे, जीभ एक-दूसरे के मुँह में, लार मिल रही थी। फिर भाभी ने मुझे नीचे लिटाया, खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं और मेरे बदन चूमते हुए नीचे आने लगीं।
मेरी पैंट के ऊपर से ही लंड पर किस किया, मेरी तरफ देखा, मेरा पागल होता चेहरा देख मुस्कुराईं और फिर दो-तीन बार गर्म होंठों से चूूूम्म्म… चूम्म्म… किया। फिर पैंट की बटन खोली, ज़िप नीचे की और पैंट उतार फेंकी। अंडरवियर के ऊपर से मेरा खड़ा लंड पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाने लगीं।
प्रीकम का गीला दाग देखकर उंगली से रगड़ा और गंदी नज़रों से बोलीं, “कोई तो बहुत गर्म हो रहा है।” मैं तड़प रहा था, बोला, “भाभी प्लीज़ अब और मत सताओ, निकालो ना इसे बाहर, चूसो ना प्लीज़।” वो शैतानी हँसी हँसीं, उस गीले दाग पर किस किया और अंडरवियर भी नीचे सरका दिया। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
अब मैं बिल्कुल नंगा उनके सामने था, लंड सीधा खड़ा तना हुआ। भाभी ने अपने नरम-नरम हाथों से लंड पकड़ा, झुककर सुपारे पर चूम्म… किया, गर्म साँसें मेरे लंड पर फेंक रही थीं, जीभ से हल्का चाटा, पर पूरा मुँह में नहीं ले रही थीं। मैं पागल हो रहा था, “भाभी प्लीज़… अब तो चूसो ना पूरा…”
वो मुझे वैसे ही देखती रहीं जैसे शिकारी शिकार को, फिर अचानक मुँह खोला और लंड अंदर ले लिया, ग्ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गोग… उनकी गर्म-गीली जीभ लंड के नीचे फिर रही थी, मुँह ऊपर-नीचे, हाथ से जड़ हिला रही थीं। इतना तड़पाने के बाद जब चूसा तो मैं दो मिनट भी नहीं टिक पाया, कमर ऊपर उठी और सारा माल उनके मुँह में छोड़ दिया।
भाभी हँस पड़ीं, “अरे वाह, कोई तो बहुत जल्दी में था।” मैं शरमा गया, सॉरी बोला। वो बोलीं, “कोई बात नहीं मेरी जान, पहली बार जो ठहरो। मैं मुँह धोकर आती हूँ।” मैं उनके पीछे-पीछे बाथरूम पहुँचा, वो जैसे ही फ्रेश हुईं मैंने हाथ पकड़कर फिर बेडरूम खींच लाया। उन्हें लिटाया और पजामा नीचे सरका दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अब सिर्फ पैंटी में थीं, शरमाकर तांगे जोड़ लीं। मैंने तांगे अलग करने की कोशिश की तो बोलीं, “कंडोम नहीं है अखिलेश, आज बस यहीं तक, प्लीज़।” मैं हँसा, उनके निप्पल्स चूसते हुए बोला, “सेक्स नहीं करेंगे आज, पर एक सवाल, भैया ने कभी तुम्हारी चूत कभी चाटी है?” वो चौंकीं, “नहीं… वो तो बस ऊपर-नीचे कर लेते हैं।”
मैंने उन्हें चुप कराने को लंबा स्मूच किया और बोला, “आज मैं तुम्हें असली मज़ा दूँगा, बस लेट जाओ।” पैंटी के ऊपर से ही किस करने लगा, पैंटी पूरी गीली थी। फिर धीरे से पैंटी नीचे की, उफ्फ्फ… क्या नज़ारा था, साँवली जाँघें, काली झांटें, चूत से रस टपक रहा था, पैंटी पर चिपका हुआ।
भाभी ने तांगे बंद कर लीं, शरमाते हुए बोलीं, “बहुत गीली हूँ, पहले धो लूँ?” मैंने कहा, “नहीं भाभी, गीली चूत चाटने में ही मज़ा है।” तांगे अलग कीं, भाभी ने आँखें बंद कर लीं। मैंने नाक उनके चूत के पास ले जाकर गहरी साँस ली, उनकी मादक महक ने दिमाग घुमा दिया। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
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गर्म साँसें उनकी चूत पर पड़ते ही वो काँप उठीं, आह्ह्ह्ह… अखिलेश्श्श… मैंने जीभ निकालकर क्लिटोरिस पर फिराई, ऊऊईई… आह्ह्ह्ह… भाभी की कमर उछल गई। फिर पूरा मुँह लगा दिया, जैसे फ्रेंच किस कर रहा हूँ उनकी चूत को, जीभ अंदर-बाहर, रस चूस-चूसकर पी रहा था, ऊऊ… ओह्ह्ह्ह… अखिलेश… आह्ह्ह्ह्ह… ह्ह्ह्ह… उनके हाथ मेरे बालों में कस गए, कमर ऊपर उठाकर मेरे मुँह में चूत दबा रही थीं।
पाँच-सात मिनट में ही भाभी झड़ गईं, पूरा रस मेरे मुँह पर, गालों पर, ठुड्डी पर। मैं ऊपर चढ़ा उन्हें किस करने गया तो वो मुँह फेर लिया, “ची गंदे, अभी तो नीचे चाटके आए हो।” मैं हँसा, उनके हाथ दबोचे और जबरदस्ती गीले-गीले होंठ उनके होंठों पर रख दिए, अपना ही रस चटाया।
पहले तो मिनट वो विरोध करती रहीं, फिर खुद जीभ निकालकर चूसने लगीं। फिर हम नंगे लेटकर एक-दूसरे से लिपट गए, उनके भारी बूब्स मेरी छाती से दबे हुए, पसीना-पसीना। थोड़ी देर बाद बाहर घंटी बजी, हम हड़बड़ा कर कपड़े ढूंढने लगे। पिछले दिन के पागलपन के बाद अगली सुबह हम मुंबई वापस जाने वाले थे, पर मैंने मम्मी-पापा से झूठ बोल दिया कि पढ़ाई का तनाव है, कुछ दिन और रुकना चाहता हूँ।
भाभी ने भी तुरंत सपोर्ट किया, “अरे रहने दो ना, मेरी तो बहुत मदद करता है ये। बस बात बन गई। अगली सुबह मम्मी-पापा चले गए, भैया ऑफिस और बच्चा स्कूल। भाभी बच्चे को बस तक छोड़ने नीचे गई थीं। मैं बालकनी से देख रहा था, उनकी मटकती गांड, पसीने से चिपकी साड़ी, लंड खड़ा हो गया। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मैं दौड़ा और भाभी को कसके गले लगा लिया, होंठ चूसने लगा, हाथ उनकी गांड पर ज़ोर-ज़ोर से मसल रहे थे। भाभी की गर्म साँसें मेरे कानों में, आह्ह्ह… अखिलेश… सुबह-सुबह… कुछ देर किस करने के बाद भाभी बोलीं, “बस करो, मुझे नहाना है, सुबह से भाग-दौड़ में पसीना हो गया।”
मैंने कहा, “मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।” वो हँस पड़ीं और बाथरूम की तरफ बढ़ीं। मैंने हाथ पकड़ा और बोला, “वैसे मैं भी नहीं नहाया हूँ।” भाभी समझ गईं, शरमाते हुए बोलीं, “तो मेरे बाद चले जाना।” मैंने मिन्नतें कीं तो आखिर बोलीं, “ठीक है आ जाओ बदमाश।”
मैं तो वहीँ खड़े-खड़े नंगा हो गया और बाथरूम में घुस गया। भाभी हँसते हुए कपड़े धोने डाले और टॉवल लपेट कर आईं। आते ही मैंने खींचा, टॉवल खींच फेंका, नाइट गाउन भी उतार दिया, अंदर सिर्फ़ पैंटी थी। उनके भारी बूब्स मेरी छाती से दबे, निप्पल्स टाइट, मैंने गांड पर थप्पड़ मारा और बाल पकड़कर गहरी स्मूचिंग शुरू कर दी। एक हाथ से चूत रगड़ रहा था, पैंटी गीली होने लगी।
पैंटी उतारी और घुटनों पर बैठ गया। भाभी प्यार से बोलीं, “आज भी चाटोगे अपनी भाभी की चूत?” मैं बोला, “जितना मिले उतना कम है।” वो दीवार का सहारा लेकर तांगे फैला कर खड़ी हो गईं। मैंने जीभ से क्लिट पर वार किया तो भाभी काँप उठीं, ऊऊईई… आह्ह्ह्ह… अखिलेश्श्श… पाँच मिनट में ही एक तांग मेरे कंधे पर रख दीं और मेरे मुँह में झड़ गईं, पूरा रस मेरे होंठों-ठुड्डी पर।
मैं खड़ा हुआ और बोला, “अब तुम्हें अपना रस चखाना है।” वो शरमाईं, “नहीं करूँगी।” मैंने कल जैसा ही किया, हाथ दबोचे और जबरदस्ती गीले होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले तो मना करती रहीं, फिर खुद जीभ निकाल कर चूसने लगीं। फिर मुझे बाहर धकेल कर बोलीं, “अब मुझे नहाने दो!” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं बाहर आया, तैयार हुआ। भाभी ने आवाज़ दी कि सब्जी-पनीर लाना है। मैं बाज़ार गया और चुपके से एक छोटा सा कंडोम पैकेट भी ले आया। घर लौटा तो भाभी नहा-धो कर काम निपटा रही थीं। मैंने सामान दिया, कंडोम छुपा लिया। थोड़ी देर बाद भाभी स्लीवलेस टॉप और पजामा में पसीने से तर-बतर लिविंग रूम में आईं और मेरे बगल में बैठ गईं।
मैंने उनकी जाँघ पर हाथ फेरा, “बहुत थक गई हो, आराम करो।” वो मेरे गले में बाँह डाल कर लिपट गईं। फिर उठीं और किचन बुलाया, “देखो ना फिर पसीना आ गया, फिर नहाना पड़ेगा, आओगे साथ?” मैंने हाथ पकड़ा और लिविंग रूम में ले आया, फैन बंद कर दिया। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
भाभी चौंकीं, “यहाँ क्यों?” मैं बोला, “आज तुम्हारे पसीने से लथपथ बदन को चाटना है।” वो मना करने लगीं, “ये क्या गंदी बातें हैं?” पर बीस-पच्चीस मिनट मिन्नतों के बाद मान गईं। मैंने पजामा नीचे किया, भाभी सोफे पर बैठीं, मैं ज़मीन पर। जाँघें चाटीं, पैंटी चाटी, देखा तो साफ-सुथरी चूत कर रखी थीं। निप्पल्स टाइट थे, मैंने दोनों उंगली से मरोड़ा तो भाभी चीख पड़ीं, आह्ह्ह्ह… अखिलेश्श्श…
फिर पैंटी उतारी, टॉप भी खुद उतार दिया। भाभी बिल्कुल नंगी। मैं भी नंगा हो गया। भाभी ने मेरे लंड पर किस किया, अंडरवियर उतारा और चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग्ग… गी… गी… मैं उनकी गांड मसल रहा था। दस मिनट बाद उनके मुँह में ही झड़ गया। वो फ्रेश होने गईं।
मैंने कंडोम पैकेट निकाला। भाभी कपड़े लेने आईं तो मैंने खींचकर गोद में बिठाया, होंठ चूसते हुए कान में फुसफुसाया, “अभी कपड़े पहनने का वक्त नहीं आया।” वो शरमाईं, “क्यों, अब और क्या चाटना बाकी है?” मैंने मुस्कुरा कर कंडोम पैकेट दिखाया और बोला, “चाटना-चूसना खत्म, अब तुम्हें चोदना है।”
भाभी की आँखें चौड़ी हो गईं, चेहरा गुलाबी, साँसें तेज़।
जैसे ही भाभी की नज़र उस छोटे से कंडोम पैकेट पर पड़ी, उनकी साँसें रुक सी गईं। गाल एकदम लाल, आँखें चौड़ी और होंठ हल्के से काँपते हुए बोलीं, “ये कहाँ से लाया तू?” मैंने बिना एक शब्द बोले उन्हें गोद में उठा लिया, बेडरूम की तरफ चलते हुए उनके होंठ चूसते हुए फुसफुसाया, “अब बस सवाल-जवाब बन्द करो भाभी, मैं भी यही चाहता हूँ और तुम भी।”
बेड पर धीरे से लिटाया, कंडोम फाड़ा और लण्ड पर चढ़ा लिया। भाभी अभी भी घबरा रही थीं, साँसें तेज़ चल रही थीं, दोनों हाथों से अपनी चूत ढँकने की कोशिश कर रही थीं। मैं उनके ऊपर चढ़ गया, गहरी स्मूचिंग शुरू की, जीभ एक-दूसरे के मुँह में खेल रही थी, मेरे हाथ उनके भारी 38D बूब्स मसल रहे थे, निप्पल्स को उंगलियों से मरोड़ते हुए कभी दाँतों से हल्का काटता तो भाभी की कमर अपने आप ऊपर उठ जाती, आह्ह्ह्ह… अखिलेश्श्श… धीरे से…
उनका हाथ हटाकर दो उंगलियाँ चूत में डालीं तो अभी भी थोड़ी सूखी लगी। मैं नीचे सरका और जीभ से क्लिटोरिस पर वार करना शुरू कर दिया। दस मिनट में ही भाभी की चूत फिर से रस से लबालब भर गई, ऊउईई… आह्ह्ह… अखिलेश… क्या कर रहा है… बस कर… नहीं बस… और चाट… उनकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
लण्ड का सुपारा चूत के मुँह पर रगड़ा, एक-दो धक्के मारे, पर इतनी टाइट थी कि फिसल रहा था। तीसरे ज़ोरदार धक्के में सुपारा अंदर घुसा तो भाभी चीख पड़ीं, आह्ह्ह्ह्ह मार डाला रे… रुक जा… मैं रुक गया, उनके होंठ चूसते हुए पूछा, “भाभी इतनी टाइट कैसे हो?” वो मुझे कसके गले लगा लीं और फुसफुसाईं, “बच्चे के बाद भैया ने दो साल से छुआ तक नहीं… सिर्फ कभी-कभी किस कर लेते हैं, बस।”
ये सुनकर मैं गुस्से और खुशी दोनों में बोला, “बेहेंचोद भैया को इतनी मस्त चूत मिली और कदर ही नहीं।” भाभी ने मेरे निचले होंठ पर ज़ोर से काटा और बोलीं, “अपने भैया को गाली देगा नालायक? भूल मत, अगर उनसे शादी न हुई होती तो आज तेरे साथ नंगी न होती।” हम दोनों हँस पड़े। मैंने कहा, “तो अब मैं रोज चोदूँगा तुम्हें।” वो शरमाते हुए बोलीं, “तू तो वैसे भी रोज चोदने वाला है मेरी जान।”
फिर हम गहरी स्मूच में डूब गए। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। भाभी की चूत इतनी टाइट थी कि हर धक्के पर फच्च… फच्च… की आवाज़ हो रही थी, भाभी दर्द से मेरे कंधे पर काट रही थीं, आह्ह्ह्ह… धीरे अखिलेश… फट जाएगी आज… धीरे-धीरे चूत खुलने लगी। बीस मिनट तक मिशनरी में पेलता रहा और आखिर में झड़ गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
पानी लाकर दोनों नंगे लिपट कर लेट गए। थोड़ी देर बाद भाभी ने मेरा लण्ड सहलाना शुरू कर दिया, फिर से तन गया। मैं नीचे सरका और चूत चाटने लगा। इस बार जानबूझकर तड़पाया – सिर्फ क्लिटोरिस पर जीभ फिराता, अंदर नहीं डालता। भाभी तड़पने लगीं, मेरे बाल खींचकर बोलीं, “अब सिर्फ चाटते रहोगे या चोदोगे भी कभी?” मैंने मस्ती में कहा, “चाट ही रहा हूँ ना।”
वो सिसकारियाँ लेते हुए बोलीं, “मैं जानती हूँ तू क्या कर रहा है… चाहता है मैं बिंदी करूँ ना? ठीक है… प्लीज़ अखिलेश… प्लीज़ अब चोद दो… और मत तड़पाओ यार… तेरी भाभी तेरे लण्ड की गुलाम बन गई है… प्लीज़ डाल दो अंदर… मेरी चूत जल रही है… प्लीज़ मेरी जान… चोद दो अपनी भाभी को… मुझे तेरे लण्ड की सख्त ज़रूरत है… प्लीज़…”
ये सुनकर मेरा लण्ड फौलाद सा हो गया। मैं हँसते हुए ऊपर आया, उनके गाल कसके पकड़े और होंठ काटते हुए बोला, “बहुत मज़ा आया अपनी भाभी को लण्ड के लिए गिड़गिड़ाते सुनकर।” फिर नया कंडोम चढ़ाया और भाभी को घोड़ी बनने को कहा। भाभी तुरंत चारों खड़े हो गईं, गांड ऊपर करके बोलीं, “जल्दी करो… अब और इंतज़ार नहीं होता।” मैंने लण्ड सेट किया और एक झटके में पूरा अंदर, फ्च्च्च्च… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… मादरचोद… मार डाला…
इस बार आसानी से घुस गया। मैंने कमर कसके पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से ठोकना शुरू कर दिया। कमरे में सिर्फ फच-फच-फच और भाभी की चीखें गूँज रही थीं, आह्ह्ह्ह… ह्ह्ह्ह… और तेज़… अखिलेश… आज फाड़ दो… ओह्ह्ह्ह्ह… पंद्रह मिनट घोड़ी में पेला.
फिर भाभी ऊपर आईं, काउगर्ल में उछलने लगीं, उनके भारी बूब्स उछल-उछल कर मेरे मुँह पर लग रहे थे। थक गईं तो फिर मैं ऊपर आया, मिशनरी में ले आया और ज़ोर-ज़ोर से पेलते हुए भाभी ने मुझे कसके जकड़ लिया, नाखून पीठ में गड़ गए, पैर कमर पर लॉक और झड़ गईं, आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… निखिल्ल्ल्ल… मर गई रे… ऊउउईईई…
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दो मिनट बाद मैंने लण्ड निकाला, कंडोम उतारा और भाभी के पेट, बूब्स और मुँह पर अपना माल उड़ेल दिया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटकर लेटे रहे। शाम पाँच बजे बच्चा आया तो भाभी ने रूम बन्द कर दिया और मुझे नंगा ही सोता छोड़ गईं। जब नींद खुली तो भाभी मेरे ऊपर बैठी थीं, निप्पल काटकर जगाया और लंबा किस देकर बोलीं, “कपड़े पहनो, बाहर आओ।”
दोपहर की लंबी चुदाई के बाद जब शाम को बच्चा घर लौटा तो मैं कपड़े पहनकर बाहर निकला और उसके साथ खेलने-मस्ती करने लगा। रात आठ बजे भैया भी ऑफिस से आ गए। हम तीनों सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे, भैया मुझसे पूछ रहे थे कि दिन भर क्या किया, कहीं घूमने गया या नहीं, भाभी की कोई मदद की या नहीं। मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था क्योंकि दिन भर तो भाभी को ही “मदद” करता रहा था। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
इतने में भाभी अंदर के कमरे में झाड़ू-पोंछा लगा रही थीं। जब वो झुकतीं तो उनका ढीला-सा टॉप नीचे लटक जाता और गहरा क्लिवेज साफ नज़र आता। भाभी को पता चल गया कि मैं चुपके-चुपके देख रहा हूँ, तो वो जानबूझकर और शरारत करने लगीं – कभी अपने निप्पल्स पर खुद ही चुटकी काटतीं, कभी बूब्स को हल्के से दबाकर मुझे तड़पातीं, कभी आँख मारतीं, कभी हवा में फ्लाइंग किस भेजतीं।
सोफे पर बैठे-बैठे मेरा लण्ड पत्थर सा हो गया। जैसे ही भैया टॉयलेट गए, मैं फुर्ती से उठा और भाभी के पीछे पहुँच गया। उन्हें पीछे से कसके जकड़ लिया, खड़ा लण्ड उनकी गांड की दरार में दबा दिया, दोनों हाथ आगे से उनके बूब्स मसलने लगे और गर्दन पर किस करने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
बालकनी का दरवाज़ा खुला था, मुझे ख्याल ही नहीं रहा। भाभी ने घबराकर मुझे धक्का दिया और फुसफुसाईं, “पागल हो गए हो? भैया ने देख लिया तो दोनों को घर से निकाल देंगे।” मैंने कहा, “सब तुम्हारी गलती है, तुमने ही मुझे उकसाया।” वो हँस पड़ीं, सॉरी बोला और एक लंबा, गीला किस कर दिया। मैं फिर से गांड दबाने ही वाला था कि फ्लश की आवाज़ आई, मैं तुरंत भाग गया।
रात का खाना खाकर मैंने भैया से कहा, “भैया, मैं भाभी को वॉक पर ले जाऊँ?” भैया ने बिना सोचे कहा, “जाओ, चाबी लेते जाना, मैं सोने जा रहा हूँ।” मेरी तो लॉटरी लग गई। भाभी सब समझ गईं, शरमाते हुए बोलीं, “ठीक है, मैं दो मिनट में तैयार होकर आती हूँ।” दो मिनट बाद वो वही नाइटी में निकलीं। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
भैया ने हैरानी से पूछा, “इसी में तैयार हुई?” भाभी ने मुझे आँख मारी और बोलीं, “बस हल्का-सा मेकअप किया था।” हम दोनों हँसते हुए घर से निकल पड़े। सीढ़ियाँ उतरते वक्त भाभी मेरे कान में फुसफुसाईं, “तुम्हारा इरादा समझ गई हूँ, पर तुम नहीं समझे कि मैं तैयार होने क्यों गई थी।”
मैंने नाइटी पीछे से उठाई तो दिल की धड़कन रुक गई – ना पैंटी, ना ब्रा, बिल्कुल नंगी थीं नीचे। भाभी ने हँसते हुए दो बटन खोलकर अपने भारी बूब्स भी दिखा दिए। मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “बेहेंचोद, संस्कारी भाभी से सीधी रंडी बन गई हो।” वो शरमाते हुए बोलीं, “सब तेरी वजह से है बदमाश, तूने ही मुझे फिर से जवान और हवसी बना दिया।” मैंने कहा, “नीचे नहीं जाते, सीधे छत पर चलते हैं।”
भाभी की आँखें चमक उठीं, वो तुरंत राज़ी हो गईं। छत पर घुप्प अंधेरा था, सिर्फ दूर की सड़क की हल्की लाइटें दिख रही थीं। हमने एक चक्कर लगाकर पक्का कर लिया कि कोई नहीं है। जैसे ही पक्का हुआ, भाभी मुझसे लिपट गईं और पागलों की तरह किस करने लगीं। कुछ ही पलों में उनका हाथ मेरे शॉर्ट्स में घुस गया, लण्ड पकड़कर हिलाते हुए बोलीं, “इसी इरादे से लाए थे ना मुझे यहाँ?” मैंने कहा, “इरादा तो अभी बहुत कुछ है।” वो हँसकर बोलीं, “सब मिलेगा मेरी जान।”
मैंने शॉर्ट्स नीचे सरका दी और भाभी को घुटनों पर बिठाकर लण्ड उनके मुँह में ठूँस दिया। इस बार वो पूरा गले तक लेने की कोशिश कर रही थीं। मैंने बाल पकड़े और धीरे-धीरे उनका मुँह चोदने लगा। उनका थूक लण्ड पर लटक रहा था। फिर वो नीचे झुकीं और गोटे चूसने लगीं। कल तक जो भाभी लण्ड चूसकर मुँह धो लेती थीं, आज वो मेरे गोटे चाट रही थीं – मैं हैरान और खुश दोनों था।
मैंने उन्हें खड़ा किया तो वो मुझे दीवार से सटा कर अपना थूक-भरा मुँह मेरे मुँह पर रख दिया। मैंने उन्हें गोद में उठाया, गांड पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा और बोला, “आज तुम्हारी चूत भी चाटूँगा।” वो बोलीं, “चाट ना, आज तो नदी बहा दूँगी।” मैं उन्हें गोद में लिए ही छत के किनारे ले गया और दीवार पर टिका दिया।
भाभी घबरा कर बोलीं, “कोई देख लेगा!” मैंने कहा, “आज यहीं चाटूँगा।” नाइटी के नीचे से घुसकर चूत चाटने लगा। ठंडी हवा चल रही थी, भाभी नीचे सड़क देखते हुए सिसकियाँ ले रही थीं और मैं पीछे से गांड मसलते हुए चूत चाट रहा था। दस मिनट में भाभी दो बार मेरे मुँह पर झड़ गईं – पूरा रस मेरे होंठों-ठुड्डी पर। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर मैं बाहर निकला और एक झटके में उनकी नाइटी उतार दी। भाभी पूरी नंगी, घबराकर बोलीं, “पागल हो गए हो? कोई देख लेगा!” मैंने हँसकर कहा, “तुम्हें तो किनारे पर ही ज़्यादा मज़ा आया ना, दो बार झड़ीं?” वो शरमाते हुए वो नंगी ही छत के बीच में भागीं। मैं उनकी नाइटी लेकर पीछे-पीछे गया। वहाँ पहुँचते ही भाभी ने मेरी टी-शर्ट उतारी और मुझे कसके लिपटा लिया। अब हम दोनों खुले आसमान के नीचे, ठंडी हवा में पूरी तरह नंगे थे। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
थोड़ी देर और किस करने के बाद मैंने नाइटी ज़मीन पर बिछाई, जेब से कंडोम निकाला और लण्ड पर चढ़ा लिया। भाभी नाइटी पर लेटकर तांगे फैलाए तैयार थीं। मैंने उनकी तांगे कंधों पर रखीं, लण्ड को चूत पर रगड़ा और एक झटके में पूरा अंदर धकेल दिया।
भाभी की चीख निकलते ही मैंने होंठों पर होंठ रख दिए ताकि आवाज़ दब जाए। दस मिनट ज़ोरदार धक्कों के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैं उनके बदन पर गिर पड़ा, पसीने और ठंडी हवा में दोनों मिलकर काँप रहे थे। फिर कंडोम उतारा, भाभी ने उसे ले लिया। हमने जल्दी से कपड़े पहने, घर से थोड़ी दूर जाकर कंडोम कचरे में फेंका और लौट आए।
घर पहुँचकर भाभी ने मुझे आखिरी लंबा, गीला किस दिया और बिना मुँह धोए, मेरे थूक और अपने रस से भरा मुँह लिए भैया के बगल में जा सोईं। मुझे घर आए पाँच दिन हो चुके थे और आज मेरा आखिरी दिन था। कल दोपहर की ट्रेन से मुझे फिर मुंबई लौटना था।
सुबह से ही भाभी उदास-उदास सी लग रही थीं। भैया ऑफिस चले गए, बच्चा स्कूल बस में बैठकर चला गया। जैसे ही भाभी ऊपर आईं, वो सीधे बेडरूम में घुसीं और मुझसे लिपटकर रोने लगीं। मैं घबरा गया, उनके गाल पकड़े, आँसू पोंछे और धीरे से पूछा, “क्या हुआ भाभी? भैया ने कुछ कहा?”
वो सिसकते हुए बोलीं, “कल तुम चले जाओगे ना, सुबह से मन नहीं लग रहा। लगा था अब तुम कॉलेज की लड़कियों में व्यस्त हो जाओगे, मुझे भूल जाओगे।” मैंने उन्हें कसके गले लगाया, उनके भारी बूब्स मेरी छाती से दब गए, गांड पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा और कहा, “कॉलेज की लड़कियों के पास ऐसी मुलायम, गोल-मटोल गांड कहाँ जो मैं पागल हो जाऊँ? मैं तो तुम्हारे लिए बार-बार आता रहूँगा।”
ये सुनकर भाभी की आँखें चमक उठीं, वो हँस पड़ीं और मेरी जीन्स के ऊपर से ही लण्ड सहलाने लगीं। मैंने फिर से उनकी गांड पर थप्पड़ जड़ा, कसके मसलते हुए लंबा स्मूच किया। हम खड़े-खड़े एक-दूसरे के बदन से खेल रहे थे, फिर मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से दबाकर उठाया और बेड पर लिटा दिया। खुद ऊपर चढ़कर किस करने लगा। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
थोड़ी देर बाद मैं लेट गया और भाभी मेरे ऊपर चढ़ गईं, मेरी छाती, गर्दन, कान हर जगह गर्म होंठ और जीभ फेर रही थीं। अचानक वो रुकीं, खड़ी हो गईं और नाइटी का पायजामा खोलकर फेंक दिया। फिर पैंटी उतारी और मेरे मुँह पर दे मारी। मैंने उस गीली पैंटी को नाक पर रखकर गहरी साँसें ली – भाभी की चूत की तेज़, मीठी खुशबू ने दिमाग घुमा दिया।
अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। भाभी फिर मुझसे लिपट गईं और कान में फुसफुसाईं, “कंडोम कहाँ है?” मैंने कहा, “खत्म हो गए।” वो शरमाते हुए मुस्कुराईं और बोलीं, “चलो अच्छा है… आज अगर तुम चाहो तो बिना कंडोम के भी कर सकते हैं।” मेरी तो साँसें ही रुक गईं। मैंने चिल्लाकर कहा, “फक! भाभी आज तुम मुझे असली मज़ा देने वाली हो। आज तुम्हारी चूत की गर्मी, नमी, फिसलन सब सीधे मेरे लण्ड को महसूस होगी।”
मैंने उन्हें 69 में लिटाया। भाभी ने मेरा लण्ड मुँह में लिया और ग्ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग्ग… की आवाज़ें करते हुए चूसने लगीं। मैंने उनकी चूत पर जीभ फिराई तो वो काँप उठीं, ऊउईई… अखिलेश… क्या कर रहा है… पूरा रस निकाल लेगा… मैं जीभ अंदर-बाहर करने लगा, क्लिटोरिस को चूसने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दस मिनट में भाभी की कमर ऊपर उठी और मेरे मुँह पर पहली बार बिना कंडोम की चुदाई से पहले ही झड़ गईं। मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया, बोला, “बस भाभी अब नहीं रुक सकता, पलट जाओ।” वो हँसते हुए घोड़ी बन गईं और बोलीं, “आज मैं भी तेरे लण्ड की गर्मी अंदर महसूस करना चाहती हूँ।”
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : शादीशुदा महिला का अनैतिक यौन संबंध 1
मैंने लण्ड को उनकी चूत पर रगड़ा, दो-तीन बार फिसलाया ताकि पूरा गीला हो जाए, फिर कमर पकड़ी और धीरे-धीरे अंदर धकेला। बिना कंडोम के लण्ड पहली बार नंगी चूत में घुस रहा था – गर्माहट, चिकनाहट, फिसलन सब कुछ अलग था। भाभी सिसकियाँ लेने लगीं, मेरी छाती पर मुँह दबाकर काटने लगीं।
जब पूरा लण्ड अंदर तक गया तो मैंने उनकी गांड पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा और ठोकना शुरू कर दिया। पहले धीरे-धीरे, फिर स्पीड बढ़ाते गया। फच-फच-फच की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। भाभी की चूत इतनी गर्म और गीली थी कि हर धक्के में लण्ड और अंदर खिंचता जा रहा था। मैंने उन्हें पलटा, मिशनरी में लाया और ऊपर चढ़ गया। वो तांगे फैलाकर मुझे कसके जकड़ रही थीं, गर्दन पर किस कर रही थीं, काट रही थीं।
बीस मिनट हो चुके थे, भाभी दो बार झड़ चुकी थीं। अब मैं भी झड़ने वाला था। मैंने कहा, “भाभी मैं झड़ने वाला हूँ।” वो मुझे हाथ-पैरों से लॉक करके, सिसकियाँ लेते हुए कान में बोलीं, “आज मेरे अंदर ही झड़ जा प्लीज़… बहुत दिन हो गए किसी ने मेरे अंदर गर्म वीर्य नहीं डाला… प्लीज़ मेरी जान… भर दे मुझे…”
ये सुनते ही मैंने आखिरी चार-पाँच ज़ोरदार झटके मारे और भाभी की चूत की सबसे गहराई में अपना पूरा माल उड़ेल दिया। भाभी चीख पड़ीं, मेरे निप्पल्स पर काटा, पीठ पर नाखून गड़ा दिए। मैंने भी उनकी गर्दन पर काटकर लाल निशान बना दिया। हम दोनों चिल्लाते हुए, काँपते हुए एक साथ झड़े। मैं कुछ सेकंड तक उनके ऊपर ही पड़ा रहा, लण्ड अभी भी उनकी चूत में धड़क रहा था।
फिर मैं बगल में लेट गया। भाभी मुझसे लिपटकर पसीने से तर बदन को मेरे बदन से रगड़ रही थीं, मेरे होंठ चूम रही थीं और बार-बार कह रही थीं, “आज फिर से पूरा महसूस हुआ कि मैं औरत हूँ… तूने मुझे फिर से जीना सिखा दिया।” हम दोनों नंगे ही लिपटकर लेटे रहे, मेरे वीर्य की गर्माहट अभी भी उनकी चूत से बाहर टपक रही थी। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
दोपहर की बिना कंडोम वाली चुदाई के बाद हम दोनों नंगे ही लिपटकर लेटे थे। भाभी मेरी छाती पर सिर रखे फुसफुसाईं, “यार, इतने साल बाद किसी का गर्म माल अपनी चूत के अंदर महसूस किया है… आज फिर से औरत होने का एहसास हुआ।” मैंने हँसते हुए कहा, “मैं तो पहले से कह रहा था बिना कंडोम के ही करते हैं, तुम ही डरती थीं।” वो शरमाते हुए बोलीं, “अब नहीं डरूँगी… जो होगा सो होगा, पर अब चुदाई सिर्फ़ नंगा लण्ड ही लेगी।”
थोड़ी देर बाद मैं वॉशरूम जा रहा था तो भाभी ने मेरी पीठ पर अपने नाखूनों के लाल-लाल निशान देखे। वो पीछे-पीछे आईं, मुझे कसके गले लगाया और उन निशानों पर किस करने लगीं। फिर बोलीं, “तुमने रोका क्यों नहीं? बहुत जोर से खरोंच दिए मैंने।” मैंने मुस्कुराकर कहा, “औरत को इस तरह चीखते-झड़ते देखकर मर्द अपना दर्द भूल जाता है… ये निशान मेरे लिए मेडल हैं।”
भाभी ने हँसकर मुझे किस किया, अपनी चूत अच्छे से धोई और हमने कपड़े पहन लिए। मैं नीचे वॉक पर गया, एक सिगरेट का पैकेट लिया और दो सिगरेट फूँककर लौटा। भाभी को मुँह से स्मेल आई तो पहले तो डाँटा, फिर मैंने समझाया कि रोज नहीं पीता, बस कभी-कभी थकान में। वो मान गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर हम बालकनी में बैठकर चाय पीने लगे। चाय खत्म हुई तो मैं कप रखने किचन गया। लौटा तो देखा भाभी ने मेरी ही सिगरेट जला ली थी और पहला कश लेकर खाँस रही थीं। मैंने हँसते हुए पानी पिलाया और पीठ थपथपाई। वो बोलीं, “बस ट्राई करना था… मैं भी तो थक गई हूँ ना।” मैंने उन्हें गोद में खींचा और होंठ चूसते हुए कहा, “यहाँ नहीं करना तो अंदर चल।” वो बोलीं, “नहीं यार, कोई देख लेगा।”
मैंने हाथ पकड़ा, ज़मीन पर बैठ गया और उन्हें अपनी गोद में बिठा लिया। बोला, “अब कोई नहीं देख सकता।” फिर शुरू हो गया – लंबा स्मूच, एक हाथ से बूब्स मसल रहा था, दूसरा गांड के अंदर घुसा हुआ था। भाभी ने मेरी टी-शर्ट उछालकर बेडरूम में फेंक दी। मैंने उनकी नाइटी ऊपर से खींचकर उतार दी – अंदर कुछ नहीं था, बिल्कुल नंगी। वो मेरी गोद में नंगी बैठी थीं, मैं उनके बूब्स चूस रहा था और वो अपनी गांड मेरे लण्ड पर रगड़ रही थीं।
फिर भाभी ने नाइटी मेरे पैरों के बीच बिछाई, घुटनों पर बैठीं और मेरी शॉर्ट्स-अंडरवियर नीचे खींच दी। अब मैं बालकनी की दीवार से टेक लगाकर ज़मीन पर नंगा बैठा था और भाभी मेरे पैरों के बीच नंगी बैठकर लण्ड चूस रही थीं। मैंने बाल पकड़े और उनका मुँह चोदने लगा – ग्ग्ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग्ग्ग… गी… गी… उनका थूक लण्ड से टपक रहा था।
कुछ देर बाद मैंने बालों से खींचकर ऊपर किया और बोला, “अब बैठो।” भाभी ने चूत को लण्ड पर रगड़ी और धीरे से बैठ गईं। पूरा लण्ड एक झटके में अंदर। वो मेरे बाल पकड़कर मुझे चूमने लगीं। मैंने उनकी कमर पकड़कर गोद में ही उछालना शुरू कर दिया। नीचे गली में लोग आ-जा रहे थे, किसी ने ऊपर देखा तो हम पकड़े जाते, पर हमें परवाह नहीं थी।
दस मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो उन्हें नीचे लिटाया और चेहरे, होंठों, गालों पर अपना पूरा माल उड़ेल दिया। भाभी पहली बार अपने चेहरे पर गर्म वीर्य महसूस कर रही थीं। वो हैरान-खुश मुस्कुराते हुए बोलीं, “ये क्या था?” मैंने कहा, “तुम मेरे माल से सनी हुई कितनी प्यारी लग रही हो।” वो हँसकर उठने लगीं कि मुँह धोने जाएँगी। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
मैंने उंगलियों से चेहरा साफ किया और उंगलियाँ उनके मुँह में दे दी। पहले मना किया, फिर मैंने कहा, “आज मेरा आखिरी दिन है, इतना भी नहीं करोगी?” भाभी ने मेरी आँखों में देखा और चुपचाप सारी उंगलियाँ चाटकर मेरा पूरा माल निगल गईं।
फिर मैंने उन्हें कसके किस किया और गांड पर थप्पड़ मारकर बोला, “गंदी साली… कुछ दिन पहले तक सोच भी नहीं सकता था कि तुम ऐसा करोगी।” वो मुझे धक्का देकर लिटा कर ऊपर चढ़ गईं, होंठ काटते हुए बोलीं, “हाँ बेटा, ये सब तेरी ही करामात है… तूने ही मुझे ये गंदी-गंदी बातें सिखाई हैं।”
शाम को भैया आए तो बताया कि आज रात उन्हें नाइट शिफ्ट पर जाना है। मैं और भाभी मन ही मन मुस्कुरा दिए – पूरी रात हमारे पास थी। भैया जैसे ही नाइट शिफ्ट के लिए निकले, भाभी ने सारे बर्तन साफ किए, बच्चे को सुलाया और आधे घंटे बाद लिविंग रूम की लाइट्स बंद करके मेरी गोद में आकर बैठ गईं। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
आज उन्होंने स्लीवलेस नाइटी पहनी थी – अंदर कुछ भी नहीं। मैंने दो मिनट में ही नाइटी ऊपर से खींचकर फेंक दी, और वो मेरी गोद में पूरी नंगी लिपट गईं। मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था। हमने वहीं सोफे पर एक-दूसरे को चाटना-चूमना शुरू कर दिया, फिर मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
बेड पर लिटाकर मैंने उनके तांगे चौड़े किए और चूत चाटने लगा। दस मिनट तक पूरा बदन चाटा – गर्दन, बूब्स, निप्पल्स, नाभि, जाँघें, फिर चूत में जीभ अंदर-बाहर करने लगा। भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फिर वो मुझे लिटाकर मेरे पैरों के बीच आईं, अंडरवियर फेंका और लण्ड को प्यार से चूमने-चाटने लगीं। कुछ देर बाद पूरा मुँह में लेकर चूसने लगीं – ग्ग्ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग्ग्ग… गी… गी…
लण्ड पूरा गीला हो गया तो वो मेरे ऊपर चढ़ीं, लण्ड सेट किया और धीरे से बैठ गईं। फिर मेरी छाती पर गिरकर गांड हिलाने लगीं। मैंने एक हाथ से कमर पकड़ी, दूसरे से बाल खींचकर गर्दन चाटने लगा। भाभी कान में फुसफुसाईं, “आज अगर रफ़ होना चाहते हो तो कर लो… बस आखिरी राउंड प्यार से करना।”
ये सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जाग गया। मैंने उन्हें पलटा, ऊपर चढ़ गया, एक हाथ से मुँह दबाया और दूसरे से निप्पल्स को इतना मरोड़ा कि वो बिस्तर में मुँह दबाकर चीखने लगीं। फिर निप्पल्स को मुँह में लेकर काटा, चूसा और साथ ही ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
पाँच मिनट बाद बाल पकड़कर घोड़ी बनाया, अपनी अंडरवियर उनके मुँह में ठूँस दी ताकि चीखें दब जाएँ, और पीछे से कमर पकड़कर जानवरों की तरह पेलने लगा। थप-थप-थप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। हर धक्के पर उनकी गांड पर लाल थप्पड़ जड़ रहा था।
फिर बेड से नीचे उतारा, उन्हें बेड के किनारे झुकाया, दोनों हाथ पीछे खींचकर पकड़े और खड़े-खड़े इतना ज़ोर से ठोका कि उनके पैर काँपने लगे। दस मिनट बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया। लण्ड अभी भी अंदर था, धड़क रहा था। मैं बिना कंडोम के गर्म वीर्य उनकी दीवारों से टकरा रहा था।
मैं बगल में गिर पड़ा। भाभी ने अंडरवियर मुँह से निकाली, मेरी छाती चूमते हुए बोलीं, “वाह… आज तक किसी ने ऐसा नहीं चोदा… तेरे भैया ने दस साल में भी नहीं किया जो तूने आज किया।” मैंने हँसकर कहा, “अब कोई टेंशन नहीं, जब मन करे बुला लेना।”
वो उदास होकर बोलीं, “पर तुम तो कल चले जाओगे…” मैंने उन्हें गले लगाया और कहा, “एक मैसेज या कॉल काफी है, मैं ट्रेन पकड़कर चला आऊँगा।” वो खुश हो गईं, फिर मुझे चूमने लगीं और बोलीं, “फिर तो रोज़ वीडियो कॉल करेंगे… फोन सेक्स भी करेंगे ना?” मैंने हँसकर सब समझा दिया। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
दस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया। मैंने कान में फुसफुसाया, “भाभी, एक आखिरी ख्वाहिश… बालकनी में खड़े-खड़े नंगी चुदाई करनी है।” वो पहले घबराईं, फिर मेरी मिन्नतों पर मान गईं। हम दोनों बिल्कुल नंगे बालकनी में निकले। रात के ग्यारह बज रहे थे, नीचे सड़क पर कभी-कभार गाड़ियाँ गुज़र रही थीं।
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मैंने भाभी को दीवार से सटाया, एक टाँग ऊपर उठाई और लण्ड एक झटके में अंदर घुसेड़ दिया। भाभी ने मेरे कंधे पर मुँह दबा लिया ताकि चीख न निकले। मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से उछालना शुरू कर दिया। ठंडी हवा उनके नंगे बदन को सहला रही थी, बूब्स उछल-उछल कर मेरी छाती से टकरा रहे थे। “Cousin Devar Bhabhi Sex”
वो सिसकियाँ लेते हुए फुसफुसा रही थीं, “कोई देख लेगा… आह्ह्ह… और तेज़… फाड़ दो आज…” पंद्रह मिनट बाद मैंने उन्हें दीवार पर ही चिपकाकर आखिरी झटके मारे और फिर से उनकी चूत में गर्म वीर्य से भर दी। भाभी की टाँगें काँप रही थीं, वो मेरे गले में लिपटकर रोने सी लगीं – खुशी के मारे। हम दोनों पसीने और वीर्य से लथपथ, नंगे ही बालकनी में खड़े रहे।
फिर अंदर आकर नहाए, एक-दूसरे को साबुन लगाया, फिर बेड पर लिपटकर सो गए। सुबह पाँच बजे मेरी आँख खुली तो भाभी मेरे मेरे लण्ड को सहला रही थीं। बोलीं, “एक आखिरी बार… सिर्फ़ प्यार से।” हमने धीरे-धीरे, आँखों में आँखें डालकर, किस करते हुए चुदाई की और मैं तीसरी बार उनकी चूत में झड़ गया।
सुबह सात बजे मैं स्टेशन के लिए निकला। भाभी आँखें भरकर मुझे देख रही थीं। ट्रेन में बैठते वक्त उनका आखिरी मैसेज आया – “जल्दी लौटकर आना… तेरी रंडी भाभी इंतज़ार करेगी।” और इस तरह मेरा वो हफ्ता खत्म हुआ – जिसने मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
Rohit says
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