Biwi Ki Chudai Dekhi
हैलो दोस्तों, मैं संजय हूं और आज मैं आपको अपनी एक मस्त कामुक कहानी सुना रहा हूं। उस समय बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं और मैं तैयार होकर अपने ऑफिस चला गया। ऑफिस पहुंचने के कुछ देर बाद मेरे पास अमित का फोन आया, जो लखनऊ में रहता है और मेरा कजिन है, मुझसे करीब 10 साल छोटा है। Biwi Ki Chudai Dekhi
वो मुझसे बोला, “संजय भैया, कैसे हैं आप और क्या घर में सब ठीक है?”
तो मैंने उसको अपना जवाब देते हुए उससे सबका हालचाल पूछा और बोला, “आज मेरी याद कैसे आई?”
तो अमित मुझसे बोला, “भैया, मैं और स्वाति कुछ दिन दिल्ली घूमने के लिए आ रहे हैं, अगर आपको कोई तकलीफ ना हो तो हमें दिल्ली के दर्शन करवा देना क्योंकि स्वाति मुझसे कई बार बोल चुकी है, लेकिन मुझे अपने ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलती।”
तो मैंने कहा, “यह भी कोई पूछने की बात है, इस बहाने से बच्चे भी खुश हो जाएंगे और अभी उनकी छुट्टियां भी हैं, इस बहाने से हम सब घूम लेंगे।”
फिर हम दोनों ने कुछ देर इधर-उधर की बातें करके फोन कट कर दिया और शाम को जब मैं घर पर आकर दिव्या को बताया कि अमित और स्वाति दिल्ली घूमने के लिए आ रहे हैं तो दिव्या मुझसे बोली, “अमित को हमारी अब याद आई है, उसकी शादी को एक साल हो गया है और वैसे भी मैं उसको कितनी बार बुलाने के लिए फोन कर चुकी हूं, लेकिन वो हर बार मुझसे आने का वादा करता है, लेकिन कभी आता नहीं है, क्यों वो लोग कब आ रहे हैं?”
फिर मैंने कहा कि वो लोग परसों आ जाएंगे और मैं जाकर उन्हें स्टेशन से लेने चला जाऊंगा। दिव्या बोली, “हां हम उनके लिए कुछ खरीद भी कर लेते हैं, शादी के बाद पहली बार वो हमारे यहां पर आ रहे हैं।” फिर हमारे बीच यह सब बातें चलती रहीं और फिर मैं शुक्रवार को उन्हें लेने स्टेशन चला गया.
स्टेशन पर अमित मेरे गले लगा और स्वाति ने मेरे पैर छुए। तो मैंने स्वाति से मजाक में हंसकर कहा, “स्वाति तुम मुझे इतनी जल्दी बुजुर्ग मत बनाओ,” तो हम सब हंसने लगे और घर पर आकर बच्चे भी स्वाति चाची से घुल-मिल गए और दो दिन तक हम सबने बहुत मस्ती की।
एक रात इंडिया गेट घूमने के बाद हम घर पर पहुंचे तो हम सभी बहुत थक चुके थे तो अमित और स्वाति अपने कमरे में चले गए और हम दोनों और हमारे बच्चे भी अपने-अपने रूम में चले आए। फिर कुछ देर लेटकर आराम करने के बाद दिव्या मुझसे कहने लगी कि मैं उनसे पूछती हूं कि किसी को कॉफी पीनी है?
तो मैंने उससे कहा, “क्यों तुम उन्हें परेशान करती हो, पिछली तीन रातों से हम 2 बजे तक जाग रहे हैं और उनकी शादी को अभी एक साल हुआ है और उनकी अपनी प्राइवेट नाइट लाइफ है, उन्हें भी वो सब मजा करने दो।”
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दिव्या मेरी यह बात सुनकर हंस पड़ी और वो मुझसे बोली, “हां वो सब मुझे भी पता है, लेकिन जिस दिन स्वाति आई थी उसी दिन से उसके पीरियड आ गए थे और आज उसका आखिरी दिन है।”
मैंने पूछा, “दिव्या क्या अभी इन दोनों ने फैमिली प्लान नहीं किया?”
तो दिव्या बोली, “हां स्वाति ने मुझे कल सुबह बताया था कि वो अब प्लान कर रहे हैं क्योंकि अमित चाहता था कि एक साल तक सिर्फ हम दोनों एक दूसरे को समझें।”
फिर मैंने उससे कहा, “इसका मतलब अमित बहुत समझदार है.”
तो दिव्या ने मेरी चुटकी ली और बोली, “हां तुम्हारे परिवार में सारे मर्द समझदार हैं,” और फिर हम दोनों हंसने लगे।
फिर दिव्या उनसे कॉफी के लिए पूछने उनके रूम की तरफ चली गई और वो करीब 10 मिनट के बाद आई तो वो मुझसे बोली, “संजय वो लोग तो अभी से शुरू हो गए हैं।”
तो मैंने कहा, “तीन दिन रुक गए हैं बस वो ही बहुत है और तुम क्या मजा ले लेकर देख रही थी?”
तो दिव्या ने तुरंत मेरा एक हाथ पकड़कर अपनी पैंटी में डाल दिया तो मुझे महसूस हुआ कि दिव्या की चूत पूरी गीली थी, मैंने उससे पूछा, “क्यों तुमने ऐसा क्या देखा?” तो दिव्या ने कहा, “तुम भी देखकर आ जाओ,” और मैं चुपके से गया और खिड़की के पास से अंदर देखा तो अमित उस समय बेड पर खड़ा हुआ था और स्वाति उस समय पूरी नंगी थी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
और वो बेड पर अपने घुटनों के बल बैठकर अमित का लंड चूस रही थी, दोस्तों अमित का लंड बहुत मोटा था, इतना कि स्वाति के मुंह में मुश्किल से आधा घुस रहा था, और उसकी नसें फूली हुई थीं, स्वाति की जीभ हर चूसने पर ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. की आवाजें निकाल रही थी, जैसे वो लंड को गले तक ठूंसने की कोशिश कर रही हो।
स्वाति का बदन इतना गोरा था कि जरा सा दाग भी दूर से दिख जाए और उसके बिल्कुल कसे हुए बूब्स थे, जो चूसते हुए ऊपर-नीचे हिल रहे थे, उसकी निप्पल्स सख्त होकर गुलाबी हो गई थीं। फिर अमित बोला, “स्वाति अब तुम उल्टी हो जाओ और मैं आज तुम्हें पीछे से चोदूंगा.”
स्वाति बोली, “आज पूरी मस्ती से चोदना, जल्दी मत निकालना, धीरे-धीरे मेरी गांड को सहला के घुसाओ, मुझे वो जलन वाली गर्मी पसंद है।”
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दोस्तों मैं यह सब शब्द स्वाति के मुंह से सुनकर बहुत हैरान रह गया कि जो लड़की इतनी मासूम सी दिखती है वो बिस्तर पर इतनी तेज बातों से तो बहुत बड़ी रंड लगती है। तभी मेरे पीछे से दिव्या भी आ गई और वो बहुत धीरे से मुझसे बोली, “संजय देखो अमित का कितना मोटा है? और स्वाति उसका कितने आराम से ले रही है, शायद उसे मोटे आकार का लेने में बहुत मजा आ रहा होगा, देखो कैसे उसकी चूत से रस टपक रहा है, वो गंध तक यहां महसूस हो रही है, मीठी-सी।”
मैंने उससे कहा, “क्यों अमित पर दिल आ गया?” तो
दिव्या ने मेरी तरफ देखा और उस समय उसकी आंखों में वासना भरी हुई थी, उसकी सांसें तेज चल रही थीं, और वो अपनी जांघें आपस में रगड़ रही थी। मैंने उससे कहा, “आज तुम मुझसे काम चलाओ, फिर देखता हूं कि अमित को कैसे तैयार करूं?”
उस रात दिव्या ने मुझे अमित बनाकर चुदवाया, वो चुदते हुए बोली, “आह्ह संजय, कल्पना करो ये अमित का मोटा लंड है जो मेरी चूत को फाड़ रहा है, ऊईई.. ह्ह्ह.. इतना मोटा कि मैं चिल्ला उठूं।” मैंने सुबह-सुबह सबको उठाकर मंदिर जाने के लिए बोला और कहा कि सभी लोग जल्दी से तैयार हो जाओ, तभी दिव्या बोली, “तुम सब मंदिर जाओ मैं तुम्हारे लिए लंच तैयार करती हूं।”
दोस्तों मुझे पहले से ही पता था कि अमित किसी भी मंदिर नहीं जाता और फिर वही हुआ अमित बोला, “मैं भी नहीं जाऊंगा और वो दिव्या को बोला, भाभी, लेकिन मैं आपकी खाना बनाना में मदद जरूर करूंगा,” और फिर हम सब मंदिर के लिए निकल गए। रास्ते में मैंने दिव्या को एक मैसेज किया कि आज तुम्हारा रास्ता बिल्कुल साफ है।
तो दिव्या ने भी मुझे ठीक है लिखकर मैसेज भेज दिया। फिर हम करीब 3 बजे घर पर वापस आए तो मैंने दिव्या को इशारे से हाल जानने की कोशिश की तो उसने स्माइल देकर अच्छे संकेत दिए और अब मैं तुरंत समझ गया कि मेरा काम हो गया है और फिर उसी रात तक हम सब मस्ती, हंसी मजाक करते रहे और अमित ने भी अपने स्वभाव से यह बिल्कुल जाहिर नहीं होने दिया कि हमारे पीछे से क्या तूफान आया था। “Biwi Ki Chudai Dekhi”
फिर मैं कुछ देर बाद फ्री होकर दिव्या से बोला, “दिव्या सुनाओ मेरे पीछे से तुमने क्या क्या किया? मजा लूटा या नहीं?” तो दिव्या ने तुरंत अपनी टी-शर्ट को उठाकर मुझे दिखाया कि देखो अमित ने किस तरह अपने दांतों से काट-काटकर मेरे बूब्स पर निशान बना दिए हैं, वो लाल होकर सूजे हुए थे, और निप्पल्स पर दांतों के निशान साफ दिख रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
तो मैंने उससे कहा, “ऐसे नहीं, मुझे पूरी कहानी विस्तार से सुनाओ क्या क्या हुआ?” तो दिव्या ने बेडरूम का दरवाजा बंद किया और पूरी नंगी हो कर बेड पर आ गई और वो मुझसे बोली, “तुम भी अपना लंड बाहर निकाल लो और अपनी बीवी की चुदाई की कहानी सुनो।”
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फिर मैंने भी उसकी चूत में उंगली डाली और कहा, “तुम्हारी चूत तो अभी भी गीली है क्या मन नहीं भरा?”
तो दिव्या बोली, “नहीं, आग तो अमित ने शांत की थी, लेकिन जब तक तुम से ना चुदवाऊं मेरी नियत नहीं भरती।”
फिर दिव्या बोली कि तुम्हारे जाने के बाद मैंने अमित को चाय दी और मैं नहाने चली गई और फिर अमित को आवाज देकर कहा कि अमित किचन में गैस बंद कर दो और तुम भी नहा लो, मैं बस दो मिनट में बाथरूम से बाहर आ रही हूं और फिर एकदम से मैंने जोर से बाल्टी को फेंकी और साथ में चिल्लाई तो अमित भागकर बाथरूम तक आया और बोला, “भाभी क्या हुआ?”
तो मैंने गिरने का नाटक किया और दरवाजा खोला, मैं तब तक जमीन पर ही बैठी रही और मैंने उस समय सिर्फ टॉवल लपेटा हुआ था, जो भीगकर मेरे जिस्म से चिपक रहा था, मेरे बूब्स की आउटलाइन साफ दिख रही थी। फिर मैंने अमित से बोला, “देखते क्या हो मुझे उठाओ और बेड पर लेटा दो.”
अमित ने कुछ हिचकिचाते हुए मुझे अपनी गोद में उठाया और बेड पर लेटा दिया, इतने में मैंने अमित के चेहरे पर पसीना देखा, उसकी सांसें तेज थीं, और उसकी पैंट में उभार साफ महसूस हो रहा था जैसे वो पहले से ही खड़ा था। तभी मैंने अमित से कहा, “तुम मेरे पैरों को मोड़ो.”
और फिर अमित ने भी मेरा एक पैर घुटने से मोड़ दिया जिसकी वजह से पूरा टॉवल उतर गया और मैं उसके सामने पूरी नंगी हो गई और अमित मुझे लगातार घूर-घूरकर देखता रहा, वो मेरे पूरे जिस्म को बस देखे ही जा रहा था, मेरे बूब्स पर नजरें टिकीं, फिर मेरी चूत पर, जो पहले से गीली थी और रस की बूंदें जांघों पर बह रही थीं। “Biwi Ki Chudai Dekhi”
मैंने भी अमित का हाथ पकड़कर उसे अपनी कमर पर दबाने को कहा, तब उसे थोड़ा होश आया और उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे चूमने लगा, उसकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर घूम रही थी, मीठी-सी लार का स्वाद, और उसके हाथ मेरे बूब्स को मसल रहे थे, निप्पल्स को चुटकी में लेकर खींचते हुए, मैं आह.. इह्ह.. ओह्ह.. की सिसकारियां ले रही थी।
करीब 10 मिनट तक हम एक दूसरे को सहलाते रहे, उसके हाथ मेरी जांघों पर फिसलते हुए चूत तक पहुंचे, उंगली अंदर घुसाते ही वो बोला, “भाभी कितनी गीली हो, जैसे किसी लंड की भूखी हो,” और तभी मैंने अपना हाथ उसकी पैंट में डालकर उसका लंड पकड़ लिया और पैंट को खोलकर लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. गों.. की आवाजें निकल रही थीं जैसे मैं उसे डीप थ्रोट कर रही थी, उसका लंड इतना मोटा था कि मेरे गाल फूल गए, और वो गर्मी से थरथरा रहा था, अमित ने भी मेरे बाल पकड़ लिए और सिसकियां लेने लगा और वो मुझसे बोला, “भाभी स्वाति को लंड चूसना नहीं आता, आप तो इस काम में बहुत अनुभवी लगती हो, धीरे-धीरे चूसो ना, मैं पागल हो जाऊंगा।”
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अब मैं भी हंसते हुए बोली, “हां मैं और भी बहुत कामों में अनुभवी हूं, जैसे चूत चटवाना और गांड मरवाना।”
तभी अमित बोला, “प्लीज भाभी अपने पैर खोलो और मुझे दर्शन तो करवाओ.”
फिर मैंने उससे पूछा, “क्यों किसके दर्शन?”
तो अमित बोला, “चूत के.”
तो मैंने अपने दोनों पैर खोल दिए और उससे कहा, “हां लो कर लो दर्शन और इसकी आग को भी शांत कर दो, जीभ से चाटो इसे, देखो कैसे फड़क रही है।”
फिर अमित ने कहा, “भाभी इसकी आग शांत करने के लिए ही तो भैया ने मुझे यहां पर रोका था।”
उसके मुंह से यह बात सुनकर मुझे तो एकदम से झटका लगा, अमित मुझसे बोला, “भाभी मुझे सब पता है। रात को भैया ने छत पर मुझे बुलाया और ड्रिंक करते हुए अपने बारे में सब बता दिया और उन्हें भी यकीन था कि मैं मान जाऊंगा, क्योंकि शादी से पहले भैया के साथ मैंने लखनऊ में हमारी पड़ोसन को बहुत बार चोदा था। “Biwi Ki Chudai Dekhi”
भैया ने आपको अपना तो बताया होगा, लेकिन मेरे बारे में नहीं बताया होगा कि मैं उनके साथ था। तभी मैंने स्वाति को भी सब कुछ बता दिया क्योंकि स्वाति से मैं कुछ नहीं छुपाता हूं और हम अलग-अलग तरीके से सेक्स का मजा लेते हैं और हमने प्लान किया आपको चकित करने का और इसमें स्वाति भी हमारे साथ थी।”
तभी मैंने अमित को लेटा लिया और अपनी चूत उसके मुंह पर रखकर बोली, “अब चुप हो जाओ और मेरी चूत की आग अपनी जीभ और लंड से बुझाओ,” और फिर अमित ने भी करीब 10 मिनट तक मेरी चूत को चाटकर मेरा दो बार पानी निकाला, उसकी जीभ क्लिट पर घूमती हुई आह्ह.. ह्ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ.. ऊई.. उईईई.. की सिसकारियां निकलवा रही थी.
मैं उसके मुंह पर रगड़ रही थी, मेरी चूत की महक उसके चेहरे पर फैल गई थी, और उसके बाद मैंने अपनी चूत उसके लंड पर रख दी और मैं खुद ही उछल-उछलकर उसके लंड से चुदने लगी, हर धक्के पर मेरी चूत स्ट्रेच हो रही थी, वो मोटाई अंदर-बाहर होते हुए जलन पैदा कर रही थी जो मजा दे रही थी।
तभी अमित मुझसे बोला, “भाभी कुछ गंदा बोलो, मुझे पता है कि तुम्हें चुदते हुए गंदा बोलना बहुत अच्छा लगता है।” तो मैंने कहा, “हां अमित, तू आज फाड़ दे मेरी चूत अपने लंड से, मैं तेरी रंडी हूं और मुझे भाभी नहीं बल्कि रंडी बोल, मुझे गालियां दे, अपनी कुतिया बनाकर मुझे चोद. “Biwi Ki Chudai Dekhi”
मैं मानती हूं कि मेरी चूत स्वाति की तरह टाइट नहीं है, लेकिन मुझे चुदाई का अनुभव स्वाति से बहुत ज्यादा है, चोद ना हरामी, जोर से।” तो अमित बोला, “हां साली रंडी वो तो मुझे पता है और मुझे यह भी बहुत अच्छी तरह से पता है कि तुम्हारे साथ रह-रहकर स्वाति भी पूरी रंडी बन जाएगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अभी भी वो रंडी पैंटी नहीं पहनकर गई है और जहां कहीं भी उसे कोई अच्छा मौका मिलेगा वो भैया का लंड ले लेगी।” फिर मैं भी चुदते हुए उससे बोली, “हां संजय भी उसे चोदकर ही आएंगे जब वो मुझे बिना बताए तुम्हारा लंड दिलवा सकते हैं तो स्वाति की चूत कैसे नहीं चोदेंगे.”
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उसके बाद तो हमने आधा घंटा अलग-अलग पोजिशन में चुदाई के मजा लिए, डॉगी में वो मेरी गांड पर थप्पड़ मारता हुआ चोद रहा था, आह इह्ह ओह्ह ओह! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, और आखिर में मैंने अमित से बोला, “अपना पानी मेरी चूत और मुंह में डालना।”
फिर अमित मुझसे बोला, “भाभी एक साथ में दोनों में कैसे गिराऊंगा?” तो मैंने फिर से उसको कहा, “तुम मुझे चोदते हुए भाभी मत बोलो, तुम थोड़ा सा पानी मेरी चूत में गिराना और फिर मेरे मुंह में डाल देना, चल अब आ जा अपने झटके शुरू कर दे।” फिर अमित भी पूरे जोश में आ गया और बोला, “हां ले साली रंडी, कुतिया ले हां ले.” उसका वीर्य निकल गया और तभी कुछ वीर्य चूत में गिराते हुए मैं उठ गई।
फिर मैंने उसका लंड पकड़कर अपने मुंह में डाल लिया और 5 मिनट तक चूस-चूसकर पूरा साफ कर दिया। फिर पूरी कहानी संजय को सुनाने के बाद संजय ने मुझे उल्टा किया और बोला, “तूने मुझे अपनी आप बीती सुनाई, अब मैं तुझे स्वाति की चुदाई कार में कैसे की वो दिखाता हूं,” और संजय ने अपना लंड पीछे से मेरी चूत में डाल दिया और उसने मुझे करीब 20 मिनट इतनी बुरी तरह से चोदा कि मेरा बहुत हाल बुरा हो गया, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह की चीखें निकल रही थीं, तो सोचो कि स्वाति का क्या हाल हुआ होगा?
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