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अपनी प्यासी चूत के लिए लंड का इन्तेजाम किया 1

February 2, 2026 by crazy 2 Comments

Devar Bhabhi Sex Story

शहर की व्यस्त जिंदगी में मेरा जीवन बहुत खाली और उदास लगता था, जहां मेरा पति विशाल एक व्यस्त बिजनेसमैन था जो सुबह जल्दी निकल जाता और रात देर से घर लौटता, जिससे घर में अकेली मैं वंशिका अपनी 28 साल की उम्र में अपने गोरे चमकदार बदन, भरे हुए स्तनों और कसी हुई कमर के साथ किसी को भी आकर्षित कर सकती थी. Devar Bhabhi Sex Story

लेकिन विशाल के पास मेरी जरूरतों को पूरा करने का समय ही नहीं था, और मैं अंदर ही अंदर उस कमी से जलती रहती थी, जहां हर रात बिस्तर पर लेटकर मैं अपनी उंगलियों से खुद को छूकर थोड़ी राहत पाने की कोशिश करती लेकिन वो कभी काफी नहीं होता।

घर में मेरा देवर यतीन्द्र था जो 22 साल का जवान और मजबूत लड़का था, जो कॉलेज से घर लौटकर अक्सर मेरे आसपास मंडराता रहता, उसकी गहरी नजरें मेरे शरीर के हर हिस्से पर रुकतीं जैसे वो मेरी हर वक्र को महसूस कर रहा हो, और मुझे भी उसकी मस्कुलर बॉडी, चौड़ी छाती और शरारती मुस्कान पसंद आने लगी थी, जहां कभी-कभी हमारे बीच की बातों में एक अजीब सी गर्माहट महसूस होती जो मेरी त्वचा पर झनझनाहट पैदा कर देती।

एक दिन विशाल सुबह ही ऑफिस के लिए निकल गया, घर में सिर्फ मैं और यतीन्द्र थे जिससे हवा में एक अजीब तनाव महसूस हो रहा था, मैं किचन में चाय बनाते हुए उसकी खुशबू महसूस कर रही थी जब यतीन्द्र पीछे से आया और उसकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर लगीं.

वो बोला, “भाभी आज आप अकेली लग रही हो, भैया तो काम में लगे रहते हैं”, उसकी आवाज में एक गहराई थी जो मेरे शरीर में कंपन पैदा कर रही थी। मैं मुस्कुराई लेकिन मेरी आंखों में उदासी साफ झलक रही थी, “हां देवर जी क्या करूं जिंदगी ऐसी ही है”.

यतीन्द्र और करीब आया और उसके मजबूत हाथ मेरे कंधे पर रखे गए जिससे उसकी उंगलियों की गर्मी मेरी त्वचा के माध्यम से अंदर तक उतर गई, वो बोला, “भाभी मैं हूं ना आपकी हर जरूरत पूरी कर सकता हूं”, उसकी बातों में छिपा मतलब मेरे कानों में गूंजा और मेरी सांसें तेज हो गईं।

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मेरा दिल तेज धड़क रहा था क्योंकि मैं समझ गई थी कि यतीन्द्र की बातों का डबल मीनिंग क्या है, मैं धीरे से मुड़ी और यतीन्द्र की आंखों में देखा जहां उसकी पुतलियां मेरे चेहरे पर टिकी हुई थीं, अचानक यतीन्द्र ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में खींच लिया और उसके गर्म होंठ मेरे होंठों पर दब गए, वो किस इतना गहरा था कि मैं उसकी सांसों की खुशबू महसूस कर रही थी और मेरी जीभ उसकी जीभ से टकरा रही थी।

मैंने पहले थोड़ा मना किया लेकिन मेरी अंदर की जरूरत इतनी ज्यादा थी कि मैं पूरी तरह मान गई और उसके चुंबन में खो गई, यतीन्द्र के हाथ मेरे ब्लाउज पर सरक गए और उसने बटन खोल दिए जिससे मेरी सांसें और तेज हो गईं, मेरे बड़े स्तन ब्रा से बाहर आने को बेताब थे और हवा में उनकी गर्मी महसूस हो रही थी.

यतीन्द्र ने ब्रा उतारी और मेरे कड़े निप्पल्स को मुंह में लेकर जोर से चूसने लगा जिससे मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं, “आह देवर जी ये गलत है” मैं बोली लेकिन मेरे हाथ खुद-ब-खुद यतीन्द्र के पैंट पर चले गए जहां मैं उसके उभरे हुए लंड की कठोरता महसूस कर रही थी।

यतीन्द्र ने मुझे किचन स्लैब पर उठाकर बिठाया और मेरी साड़ी ऊपर उठा दी जिससे मेरी नंगी जांघों पर ठंडी हवा लगी, मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसकी नमी मेरी पैंटी से टपक रही थी, पैंटी उतारकर यतीन्द्र ने अपनी गर्म जीभ से उसे चाटना शुरू किया.

जिससे मेरी चूत पर उसकी जीभ की गीली और रफ सेंसेशन ने मुझे पागल कर दिया, “ओह भाभी तुम्हारी चूत कितनी अच्छी है भैया ने कभी ऐसी नहीं चाटी होगी”, मेरी सिसकारियां बढ़ गईं और मैंने उसके सिर को अपनी चूत पर दबाया, “आह देवर चाटो जोर से मैं इस जरूरत से परेशान हूं”।

यतीन्द्र ने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा जिससे अंदर की दीवारों पर उसकी उंगलियों की रगड़ ने मुझे झनझनाहट दी, मेरा शरीर कांप उठा और मैंने महसूस किया कि मेरी मांसपेशियां सिकुड़ रही हैं, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई”.

और मैं जोर से झड़ गई जहां मेरी चूत से गर्म रस की धारा बह निकली जो यतीन्द्र की जीभ पर लगी और उसने उसे चाट लिया। अब यतीन्द्र का लंड पूरी तरह खड़ा हो गया था और उसकी नसें फूली हुई महसूस हो रही थीं, उसने अपना पैंट उतारा और 8 इंच का मोटा लंड बाहर आया.

जिसकी गर्मी और कठोरता देखकर मेरी आंखें चमक उठीं, “देवर जी इतना बड़ा भैया का तो छोटा है”, यतीन्द्र मुस्कुराया और मुझे घुटनों पर बिठा दिया जहां फर्श की ठंडक मेरी घुटनों पर लग रही थी। मैंने उसके लंड को मुंह में लिया और चूसने लगी जैसे मैं भूखी थी, उसका स्वाद नमकीन और गर्म था.

यतीन्द्र के हाथ मेरे बालों में कसकर जकड़े थे और वो जोर-जोर से धक्के देने लगा जिससे लंड मेरे गले तक उतर रहा था, “भाभी चूसो पूरा अंदर लो आह ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गी गों गों गोग”। फिर यतीन्द्र ने मुझे गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया जहां बेड की चादर की मुलायमाहट मेरी पीठ पर लगी.

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उसने मुझे बेड पर लिटाकर मेरी टांगें फैला दीं और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा जिससे उसकी गर्मी और रगड़ ने मुझे और गीला कर दिया, फिर एक झटके में अंदर पेल दिया जिससे दर्द और मजा का मिश्रण मेरे पूरे शरीर में फैल गया, “आआआह देवर फाड़ दो मेरी चूत” मैं चिल्लाई।

यतीन्द्र ने तेज धक्के मारने शुरू किए जहां उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था और हर धक्के के साथ मेरी चूत की दीवारें उसकी मोटाई महसूस कर रही थीं, मेरे स्तन उछल रहे थे और यतीन्द्र ने उन्हें जोर से दबाया और दांतों से काटा जिससे हल्का दर्द लेकिन गहरा मजा आया, “भाभी तुम्हारी चूत टाइट है भैया ने कभी इस्तेमाल नहीं किया अब मैं रोज पूरी करूंगा तुम्हारी जरूरत”।

हम घंटों चुदाई करते रहे जहां पसीने की खुशबू कमरे में फैल गई थी, यतीन्द्र ने मुझे डॉगी स्टाइल में घोड़ी बनाकर चोदा जहां उसका लंड मेरी चूत के गहरे हिस्सों तक पहुंच रहा था, फिर उसने मेरी गांड में उंगली डाली जिससे उसकी उंगली की गर्मी और रगड़ ने मुझे नई सेंसेशन दी.

मैं बोली, “देवर गांड भी मारो सब तुम्हारा है”, यतीन्द्र ने लंड पर थूक लगाया और धीरे से मेरी गांड में घुसाया जहां शुरुआत में तीखा दर्द हुआ लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा जैसे मेरी गांड की टाइटनेस उसके लंड को निचोड़ रही हो, “ओह दर्द हो रहा है लेकिन अच्छा लग रहा है” मैं बोली, “आह इह्ह ओह्ह ओह आह ह्ह्ह इह्ह”। “Bhabhi Devar Sex Story”

यतीन्द्र ने स्पीड बढ़ाई और हम दोनों एक साथ झड़ गए जहां उसका गर्म वीर्य मेरी गांड से बहकर मेरी जांघों पर लगा और उसकी चिपचिपाहट महसूस हुई। उस दिन से जब भी विशाल बाहर जाता यतीन्द्र और मैं मिलते जहां हमारे शरीर की गर्मी और पसीने की मिली हुई खुशबू हमें और करीब लाती.

मेरी जरूरत देवर से पूरी होती और घर में ये राज छिपा रहता लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी क्योंकि अगले दिनों हमारी मुलाकातें और ज्यादा तीव्र हो गईं। एक रात विशाल देर से आने वाला था, मैं और यतीन्द्र छत पर गए जहां ठंडी हवा मेरी त्वचा पर झनझनाहट पैदा कर रही थी.

मैंने पतली नाइटी पहनी थी जो मेरे बदन से चिपककर मेरे कड़े निप्पल्स को उभार रही थी और हवा में उनकी सेंसेशन बढ़ा रही थी, यतीन्द्र की नजर उन पर टिकी थी, “भाभी रात ठंडी है लेकिन तुम्हारा बदन गर्म लग रहा है” यतीन्द्र ने कहा और मुझे दीवार से सटा लिया जहां दीवार की ठंडक मेरी पीठ पर लगी।

मैं हंसी, “देवर जी तुम्हारी वजह से गर्मी है”, यतीन्द्र ने नाइटी ऊपर की और पैंटी में हाथ डाला जहां उसकी उंगलियों की गर्मी मेरी गीली चूत पर लगी, चूमते हुए बोला, “भाभी छत पर ही करें” जहां उसके होंठों की नरमी मेरे गाल पर महसूस हुई। मैं मान गई, यतीन्द्र ने मुझे घुटनों पर बिठाया और लंड निकाला जहां उसकी गर्मी मेरे चेहरे पर लगी.

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मैंने मुंह में लिया और गले तक उतारा जहां उसका स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया, यतीन्द्र की सिसकारियां हवा में गूंजीं, “आह भाभी चूसो जोर से ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गी गों गों गोग”। मैंने तेजी से चूसा और यतीन्द्र मेरे मुंह में झड़ गया जहां उसका गर्म वीर्य मेरे गले से नीचे उतर गया और उसका नमकीन स्वाद मुंह में रह गया। “Bhabhi Devar Sex Story”

फिर यतीन्द्र ने दीवार से सटाकर मेरी टांगें उठाईं और लंड मेरी चूत में डाला जहां हवा की ठंडक और उसके लंड की गर्मी का कंट्रास्ट मुझे पागल कर रहा था, “ओह देवर छत पर कोई देख लेगा” मैं बोली लेकिन मजा ले रही थी जहां सितारों के नीचे ये सब हो रहा था, यतीन्द्र ने धक्के मारे और मेरे स्तन हवा में उछलते हुए महसूस हो रहे थे, “भाभी रिस्क में मजा है तुम्हारी चूत टाइट लग रही है”, “आह इह्ह ओह्ह ओह आह ह्ह्ह इह्ह”।

हम दोनों चिल्लाते हुए झड़ गए जहां मेरा रस यतीन्द्र के लंड पर बहा और हवा में उसकी खुशबू फैल गई, उस रात छत हमारी गर्म मुलाकात का गवाह बनी। अगले दिन सुबह विशाल जल्दी निकल गया, मैं नहाने गई जहां पानी की ठंडी बौछारें मेरी त्वचा पर गिर रही थीं.

यतीन्द्र चुपके से बाथरूम में घुस गया और पीछे से मुझे पकड़ा जहां उसकी गर्म बॉडी मेरी पीठ से चिपक गई, उसने मेरे स्तनों को दबाया जिससे पानी के साथ उनका मसला जाना मजेदार लगा, “देवर जी क्या कर रहे हो” मैं चौंककर बोली लेकिन मुस्कुरा उठी।

यतीन्द्र ने साबुन लगाकर मेरे बदन को सहलाया खासकर मेरी चूत और गांड को जहां साबुन की फिसलन और उसकी उंगलियों की रगड़ ने मुझे गीला कर दिया, “भाभी आज साफ करके चोदूंगा”, उसने मुझे घुमाया और घुटनों पर बिठाया जहां पानी मेरे चेहरे पर गिर रहा था, मैंने लंड चूसा और साबुन का फेन वाला स्वाद मुंह में आया, “ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गी गों गों गोग”।

यतीन्द्र ने मुझे उठाया और शावर के नीचे डॉगी स्टाइल में चोदा जहां पानी की धारें हमारी चुदाई को और गीला बना रही थीं, “आह देवर पानी में चुदाई अच्छी है जोर से”, यतीन्द्र ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारे जिससे गीली त्वचा पर चटाक की आवाज आई और लंड तेजी से अंदर-बाहर किया, मेरी चूत से रस और पानी मिलकर बह रहा था, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई”।

हम दोनों पानी की धार में भीगे हुए झड़ गए जहां यतीन्द्र ने मेरी पीठ पर वीर्य गिराया जो पानी के साथ बह गया, बाथरूम अब हमारी गंदी खेलों का अड्डा बन गया जहां साबुन की खुशबू और हमारे पसीने की मिली हुई गंध फैली रहती। एक शाम हम दोनों शॉपिंग से लौट रहे थे.

विशाल घर पर था लेकिन यतीन्द्र ने मुझे कार पार्किंग में रोक लिया जहां कार की सीट की चमड़े की खुशबू नाक में आ रही थी, “भाभी थोड़ी देर रुकें भैया को पता नहीं चलेगा”, कार की बैकसीट पर यतीन्द्र ने मेरी साड़ी उठाई और मेरी चूत में उंगलियां डाली जहां उसकी उंगलियों की गर्मी और रगड़ ने मुझे सिसकारियां भरवाई। “Bhabhi Devar Sex Story”

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मैं सिसक उठी, “देवर बाहर कोई देख लेगा आह” लेकिन मैं रुक नहीं सकी जहां बाहर की आवाजें हमें और एक्साइटेड कर रही थीं, यतीन्द्र ने अपना लंड निकाला और मुझे ऊपर बिठाया, मैं उछल-उछल कर चुदाई करने लगी जहां कार हिल रही थी और उसकी आवाज बाहर जा रही थी, “भाभी तुम्हारी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है जोर से उछलो”, “आह इह्ह ओह्ह ओह आह ह्ह्ह इह्ह”।

मेरे स्तन यतीन्द्र के मुंह में थे जहां वो उन्हें चूस रहा था और उसके दांतों की हल्की काट मुझे दर्द और मजा दे रही थी, बाहर से आवाजें आ रही थीं लेकिन हम रुके नहीं, मैं जोर से झड़ गई जहां मेरा रस सीट पर गिरा और उसकी चिपचिपाहट महसूस हुई।

यतीन्द्र ने मुझे नीचे लिटाकर मेरी गांड मारी जहां उसका लंड मेरी गांड की टाइटनेस में घुसते हुए दर्द पैदा कर रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था, “ओह देवर फाड़ दो आह”, हम चुपके से घर लौटे लेकिन हमारे दिल में और मुलाकातों की चाहत और मजबूत हो गई जहां उस रिस्क की याद हमें तड़पाती रहती।

फिर एक वीकेंड पूरा परिवार गांव गया, रात में सब सो गए लेकिन यतीन्द्र और मैं चुपके से खेतों में निकल गए जहां चांदनी रात में घास की नरमाहट और मिट्टी की सोंधी खुशबू हवा में फैली थी, मेरी साड़ी हवा में उड़ रही थी, यतीन्द्र ने मुझे घास पर लिटाया और पूरा नंगा कर दिया जहां ठंडी घास मेरी पीठ पर गुदगुदी कर रही थी, “भाभी आज खुले आसमान के नीचे चोदूंगा”।

मैंने उसके लंड को चूसा जहां खुले में उसकी खुशबू और स्वाद और तीव्र लग रहा था, फिर यतीन्द्र ने मेरी चूत चाटी जहां उसकी जीभ की गर्मी और रगड़ ने मुझे सिसकारियां भरवाई, “देवर जीभ अंदर डालो आह”, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई”.

यतीन्द्र ने मिशनरी स्टाइल में चोदा जहां सितारों के नीचे उसका लंड मेरी चूत में घुस रहा था। फिर उसने मुझे ऊपर लिया जहां मैं उछल रही थी और हवा मेरे स्तनों पर लग रही थी, मेरी सिसकारियां खेतों में गूंज रही थीं, “जोर से फाड़ दो मेरी ओह देवर”.

यतीन्द्र ने मेरी गांड में लंड डाला जहां हम दोनों पसीने से तर हो गए और मिट्टी की खुशबू हमारे पसीने के साथ मिल गई, हम कई बार झड़ गए जहां खेतों की मिट्टी हमारे बदन पर चिपक गई जैसे वो हमारी चुदाई का हिस्सा बन गई हो, वो रात हमारी सबसे यादगार और वाइल्ड मुलाकात थी। “Bhabhi Devar Sex Story”

समय बीतता गया और हमारी मुलाकातें जारी रहीं जहां हर बार नई सेंसेशन और गर्मी हमें बांधती रहती, मेरी प्यास यतीन्द्र के प्यार से पूरी हो चुकी थी लेकिन हमारा अफेयर एक राज बना रहा जो कभी भी खुल सकता था, लेकिन अभी हम दोनों अपनी इस गुप्त दुनिया में खुश थे जहां हर स्पर्श, हर खुशबू और हर आवाज हमें और करीब लाती।

लेकिन कुछ दिनों के मजेदार चुदाई के बाद मुझे मायके जाना पड़ा, मेरी मम्मी का तबीयत खराब था और मेरे माता पिता की इकलौती औलाद मैं ही हूं इसलिए मुझे जाना पड़ा, जाने के एक रात पहले पतिदेव कहीं बाहर गए हुए थे तो देवर जी ने भरपूर चुदाई किया और बोला भाभी आपकी राह देखूंगा जल्दी आना.

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मैं भी सोची थी जल्दी ही वापस आ जाऊंगी, लेकिन मम्मी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें पूरा आराम चाहिए जहां दवाइयों के साथ-साथ देखभाल जरूरी है, तो मुझे मायके में महीनों तक रुकना पड़ा, विशाल फोन पर बात करता लेकिन उसके काम की वजह से आ नहीं पाता था और उसकी आवाज सुनकर भी मेरी प्यास नहीं बुझती.

यतीन्द्र से भी फोन पर बात होती जहां वो मुझे अपनी चुदाई की याद दिलाता लेकिन दूर होने की वजह से मेरी चूत की गर्मी और बढ़ जाती, रातों में बिस्तर पर लेटकर मैं अपनी उंगलियां चूत में डालकर सहलाती जहां उंगलियों की रगड़ से थोड़ी राहत मिलती लेकिन वो देवर के लंड की मोटाई और गहराई जैसा मजा नहीं देती.

मेरी त्वचा पर पसीने की बूंदें चिपकतीं और मैं करवटें बदलती रहती जहां मेरी जांघें आपस में रगड़तीं लेकिन वो कमी पूरी नहीं होती, मैं सोचती कि अब क्या करूं क्योंकि मायके में कोई ऐसा नहीं था जो मेरी इस आग को बुझा सके। आगे की कहानी अगले भाग में…

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  1. Rk says

    February 2, 2026 at 5:56 pm

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    February 2, 2026 at 2:26 pm

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