Paki Bhabhi Chut Chudai
मेरा नाम अशरफ है, और मैं उस वक्त इंटर में पढ़ रहा था। हमारे मोहल्ले में एक भाभी रहती हैं, जिन्हें सब भाभी ही कहते हैं मतलब हम सब लड़के जो मोहल्ले में हैं, उनके हसबैंड को भाई मानते हैं। उनका नाम हसीना है, और उनका फिगर क्या मस्त है यार—36-34-40! Paki Bhabhi Chut Chudai
देखने में बस सादी सी लगती हैं, लेकिन इतनी सेक्सी हैं कि पूछो मत। उनकी शादी को पाँच साल हो चुके थे, लेकिन उनके घर कोई औलाद नहीं थी। एक दिन उनके हसबैंड की तबीयत अचानक खराब हो गई— उन्हें दमा की बीमारी है। मैं उनके साथ उन्हें लेकर हॉस्पिटल चला गया। वहाँ डॉक्टर ने उन्हें एडमिट कर लिया। भाभी बहुत परेशान थीं, रो रही थीं।
मैंने उन्हें तसल्ली दी, “भाभी, सब ठीक हो जाएगा। मैं आपके साथ हूँ ना।”
उन्होंने कहा, “अशरफ, ऐसे साथ होने का क्या फायदा है?”
मैंने पूछा, “भाभी, क्या मतलब?”
तो उन्होंने कहा, “मैं तुमसे कुछ बातें करना चाहती हूँ, दिल हल्का हो जाएगा।”
मैं परेशान हो गया, सोचा भाभी आज बहुत उदास हैं। मैंने उन्हें हौसला दिया और कहा, “भाभी, चलिए बाहर चलते हैं।” रात के दो बज रहे थे, हॉस्पिटल के बाहर हम घूमने लगे। उन्होंने अपनी स्टोरी सुनानी शुरू की, लेकिन बीच में रुक गईं।
मैंने कहा, “भाभी, क्या बात है? मुझे बता सकती हैं, मैं आपका भाई ही तो हूँ।”
उन्होंने कहा, “अच्छा, एक शर्त पर— तुम किसी को नहीं बताओगे।”
मैंने कहा, “भाभी, बिल्कुल नहीं बताऊँगा। आप बताओ।”
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फिर उन्होंने बताया, “हमारी शादी को पाँच साल हो चुके हैं, लेकिन मैं अपने हसबैंड से सेक्स में सेटिस्फाइड नहीं हूँ।”
मैं तो सुनकर हैरान रह गया! क्या कह रही हैं भाभी?
मैंने कहा, “भाभी, मैं समझा नहीं।”
तो उन्होंने विस्तार से बताया, “शादी की पहली रात भी इन्हें दमे का अटैक हो गया था, और मैं प्यासी ही रह गई थी। उसके बाद भी, जब कभी हम सेक्स करने की कोशिश करते हैं, ये हो जाता है। मैं इससे बहुत परेशान हूँ।”
इतने में डॉक्टर आ गया और बोला कि आपके हसबैंड को होश आ गया है। हम दोनों अंदर गए। उनके हसबैंड मुझे जानते थे, उन्होंने कहा, “चलो, अच्छा है अशरफ साथ है। अब मुझे किसी चीज़ की फिक्र नहीं।” फिर उन्होंने कहा, “अशरफ, ज़रा बाहर जाना, मुझे भाभी से कुछ बात करनी है।”
मैं बाहर चला गया। थोड़ी देर बाद मुझे अंदर बुलाया और कहा, “तुम मेरा एक काम करोगे?”
मैंने कहा, “जी, ज़रूर।”
फिर उन्होंने कहा, “अशरफ, मैं अपनी भाभी को खुश नहीं रख पा रहा हूँ। क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?”
मैंने कहा, “मैं समझा नहीं।”
तो उन्होंने साफ-साफ कहा, “मैं चाहता हूँ कि तुम अपनी भाभी के साथ सेक्स करो।”
मैं तो सुनकर स्तब्ध रह गया! “ये आप क्या कह रहे हैं भाई?”
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उन्होंने कहा, “भाभी का ये काम ज़रूर करो। अभी घर जाओ और करो। सुबह होने में अभी टाइम है। जल्दी जाओ और जल्दी आओ।”
मैंने कहा, “अच्छा, सही है।”
और भाभी को लेकर अपनी बाइक पर उनके घर जाने लगा। पूरे रास्ते हम दोनों चुप रहे, कुछ नहीं बोले। घर पहुँचे तो भाभी ने कहा, “अशरफ, क्या हुआ? तुम कुछ बोल नहीं रहे हो।”
मैंने कहा, “भाभी, मैंने आपको कभी इस नजर से नहीं देखा। अब मैं आपके साथ क्या करूँ? मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया।”
भाभी ने मुस्कुराकर कहा, “मैं हूँ ना तुम्हारे साथ। तुम मेरे पास आओ तो।”
मैं उनके पास चला गया। उन्होंने अचानक मेरा कुंड पकड़ लिया—ओह, क्या मज़ा आया! मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। भाभी ने कहा, “मेरे बूब्स को पकड़ो।” मैंने उनके बूब्स पर हाथ रखा—क्या नरम थे यार, जैसे रुई के गोले! मैं दबाने लगा, और उन्होंने अपनी कमीज उतार दी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अब वो ब्रा में मेरे सामने थीं। मेरा लंड और ज़्यादा टाइट हो गया। फिर उन्होंने अपनी सलवार उतारी—अंदर पैंटी नहीं पहनी थी! उनकी चूत साफ दिख रही थी, गीली और गुलाबी। मुझे जोश आ गया। मैंने उनका ब्रा उतार दिया और उनके बड़े-बड़े बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगा।
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निप्पल्स कड़े हो चुके थे, मैं उन्हें चूसने लगा। भाभी सिसकारियाँ ले रही थीं, “आह… अशरफ… और ज़ोर से…” फिर उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया। मेरा लंड देखकर उनकी आँखें चमक उठीं। उन्होंने उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगीं—ओह गॉड, क्या मज़ा आ रहा था! उनकी जीभ लंड के टॉप पर घूम रही थी, मैं तो पागल हो रहा था। थोड़ी देर में मैं रिलीज़ हो गया, सारा माल उनके मुँह में।
मैंने कहा, “भाभी, आज के लिए इतना बस है। कल फिर करेंगे।”
भाभी ने कहा, “मैं तो अभी रिलीज़ भी नहीं हुई हूँ!”
मैंने कहा, “भाभी, उंगली डाल लो। कल तक वेट करो।”
फिर भाभी ने अपनी चूत में उंगली डाली, रगड़ने लगीं। उनकी सिसकारियाँ… “आह… अशरफ… देखो कैसे गीली हूँ मैं…” और जल्दी ही वो झड़ गईं। मैंने उन्हें खूब किस किया और उनकी चूत की तरफ बढ़ा। उनकी चूत पर किस किया और एक उंगली से चोदना शुरू किया। उनकी चूत वर्जिन जैसी थी।
मैंने पास पड़ा ऑयल उंगली पर लगाया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। भाभी चिल्ला उठीं। मैंने स्पीड बढ़ाई तो उन्हें मजा आने लगा और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया। वो बहुत खुश थीं। फिर मैंने दो उंगलियों से चोदना शुरू किया। वो फिर चिल्लाईं, पर मैं नहीं रुका।
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जब वो पूरी तरह गरम हो गईं, मैंने अपने लंड पर ढेर सारा ऑयल लगाया और उनकी चूत पर भी लगाया। लंड को चूत से टच करने लगा। भाभी बोलीं, “बस डाल दो!” मैंने एक झटका मारा तो वो रोने लगीं। दर्द से चिल्लाते हुए बोलीं, “मुझे नहीं करना!” और मुझे धक्का दे दिया। “Paki Bhabhi Chut Chudai”
मैंने उन्हें व्हिस्की पिलाई, जिससे वो होश में नहीं रहीं। फिर उन्हें गरम किया और एक झटके में सुपाड़ा अंदर डाल दिया। व्हिस्की की वजह से दर्द कम था। दूसरा धक्का मारा तो वो फिर चिल्लाईं, “अम्मी!” पर मैं धीरे-धीरे धक्के लगाता रहा।
थोड़ी देर बाद उन्हें मजा आने लगा। फिर मैंने एक और झटका मारा और उनकी सील तोड़ दी। वो जोर से चीखीं, “अशरफ, छोड़ दो! तुम्हारा बहुत बड़ा है, निकालो इसे!” लेकिन मैं नहीं रुका और बड़े-बड़े शॉट मारते हुए पूरा लंड अंदर डाल दिया। वो चिल्लाती रहीं, “छोड़ दो प्लीज!” पर मैं धक्के लगाता रहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
4-5 मिनट बाद उन्हें मजा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगीं। उन्होंने मुझे हग किया और बोलीं, “फक मी हार्ड अशरफ, फास्टर एंड हार्डर!” मैं जोश में आकर धक्के पे धक्के लगाने लगा। फिर उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से खूब चोदा। पूरा घर “ढप ढप ढप ढप्प्प” की आवाजों से गूंज उठा।
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भाभी बोलीं, “रुकना मत, चोदते रहो!” मेरा निकलने वाला था।
मैंने पूछा, “कहाँ छोड़ू?”
वो बोलीं, “एक बूंद भी बाहर नहीं, सब अंदर डाल दो!”
हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैं उनके ऊपर ही लेट गया। फिर हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपककर सो गए। उनकी गर्म बॉडी मेरे खिलाफ… क्या फीलिंग थी! अब जब भी दिल करता है, मैं भाभी को चोदने जाता हूँ। हम दोनों की ज़िंदगी में अब वो प्यास नहीं है। भाभी कहती हैं, “अशरफ, तू मेरा असली हसबैंड है!” और मैं उनके साथ हर तरह के गेम खेलता हूँ कभी डॉगी स्टाइल, कभी मिशनरी, कभी उनके बूब्स पर रगड़ता हूँ।
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