Padosan Chudai XXX Kahani
हेलो दोस्तों, मैं संजय। उस दिन जब मैं कॉलेज से शाम को घर लौटा तो हमारे ड्रॉइंग रूम में दो नए लोग बैठे हुए थे। मम्मी ने बताया कि ये हमारे नए पड़ोसी हैं, भैया और भाभी। भैया मिथुन, 30 साल के, मार्केटिंग की जॉब करते थे। भाभी सोनिया, 26 साल की, एकदम हॉट और सेक्सी। Padosan Chudai XXX Kahani
गोरा चिकना रंग, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ और सबसे खास बात – 36D साइज की भारी-भरकम छातियाँ जो ब्लाउज में फटने को तैयार रहती थीं। पतली कमर, चौड़े गोल नितंब और मोटी-मोटी जाँघें। उनकी एक झलक देखकर ही मेरा 18 साल का लंड तन जाता था।
दोनों लव मैरिज थी। परिवार वालों ने स्वीकार नहीं किया तो दोनों घर छोड़कर किराए के इस घर में आ गए थे। शुरुआत में औपचारिक बातें होती रहीं, लेकिन जल्दी ही हम सब घुल-मिल गए। भैया की नौकरी की वजह से वो हफ्ते में सिर्फ दो-तीन दिन घर आ पाते थे।
बाकी समय भाभी अकेली रहतीं। मैं कॉलेज से शाम को आकर फ्री होता था, तो धीरे-धीरे भाभी का ज़्यादातर समय मेरे साथ बीतने लगा। हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। वो मुझे प्यार से “संजू” बुलातीं। मैं उनके घर छोटे-मोटे काम कर देता – सामान उठाना, बिजली का स्विच ठीक करना, बाजार से सामान लाना।
बदले में वो मेरी पढ़ाई में मदद करतीं, खाना बनाकर खिलातीं, कभी-कभी कार्ड गेम या लूडो खेलतीं। हँसी-मजाक का दौर चलता रहता। उनकी मुस्कान, उनकी शरारती नजरें, और कभी-कभी ब्लाउज से झाँकता उनका गहरा क्लीवेज मुझे रात को सोने नहीं देता।
3-4 दिन ही बीते होंगे कि एक रात अचानक पूरे मोहल्ले में “चोर-चोर” का शोर मच गया। पता चला कि भाभी की छत पर कोई चोर चढ़ आया था जो कूदकर भाग गया। भाभी बुरी तरह डर गई थीं। वो रो रही थीं, काँप रही थीं। मम्मी उन्हें समझाकर हमारे घर ले आईं।
लेकिन रात में अकेले रहने का डर बना रहा। आखिरकार फैसला हुआ कि भैया के आने तक मैं रात को भाभी के घर सोऊंगा। भाभी को भी इस बात से बहुत राहत मिली। उस रात मैं उनके बेडरूम में बेड के एक तरफ लेट गया। भाभी दूसरी तरफ। लाइट बंद करने के बाद अंधेरा छा गया।
कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि भाभी धीरे-धीरे मेरी तरफ सरक आई हैं। उनकी नरम, गर्म सांस मेरे गले पर पड़ रही थी। उनकी एक जाँघ हल्के से मेरी जाँघ से सट गई थी। उनका हल्का परफ्यूम और शरीर की गर्माहट मेरे पूरे शरीर में बिजली दौड़ा रही थी। मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा।
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मैं जाग गया था लेकिन चुपचाप लेटा रहा। पूरी रात उनकी सांसें सुनता रहा। उस रात के बाद हमारी दोस्ती और गहरी हो गई। अब मैं दिन में भी उनके घर ज्यादा समय बिताने लगा। भाभी मुझे कॉलेज की पढ़ाई समझातीं, साथ में टीवी पर सीरियल देखतीं और कभी-कभी मेरे कंधे पर सिर रखकर बातें करतीं। उनके स्पर्श से ही मेरा शरीर गर्म हो जाता।
एक रात अचानक मेरी नींद खुल गई। ड्रॉइंग रूम की तरफ से हल्की-हल्की सिसकियाँ और कराहने जैसी आवाजें आ रही थीं। भाभी बेड पर नहीं थीं। मैं उठकर दोनों कमरों के बीच वाली खिड़की के पास गया। मोटा पर्दा हल्का सा हटाया। अंधेरा था, कुछ साफ नहीं दिख रहा था।
मैंने धीरे से आवाज दी, “भाभी?” आवाजें तुरंत बंद हो गईं। कुछ सेकंड बाद भाभी अंदर आईं।
“क्या हुआ संजू? नींद क्यों खुल गई?” उनकी आवाज थोड़ी घबराई हुई थी।
“आप उधर क्या कर रही थीं? रो रही थीं क्या?”
भाभी थोड़ी हिचकिचाईं, “भैया को याद करके… तुम सो जाओ ना।”
दूसरे दिन सुबह भाभी ने फिर पूछा, “रात को तुमने कुछ देखा था क्या?” मैंने बार-बार कहा कि कुछ नहीं देखा तो आखिरकार उन्हें यकीन हो गया।
दोपहर को भाभी ने पुकारा, “संजू, साबुन ले आओ।”
जब मैं गया तो वो किचन में आटा गूँध रही थीं। दोनों हाथ पूरी तरह आटे से सने हुए थे। ब्लाउज का ऊपरी बटन खुला हुआ था।
“मेरे हाथ गंदे हैं, पैसे निकाल लो।”
मैंने हिचकिचाते हुए उनके ब्लाउज के पास हाथ बढ़ाया। पहली बार किसी औरत के स्तनों को छू रहा था। भाभी के भारी, नरम, गरम स्तन मेरी हथेली में दब गए। वो बहुत मुलायम थे लेकिन अंदर से भरे-भरे। मेरे हाथ काँप रहे थे। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उँगलियाँ उनके नरम मांस में धंस गईं।
“बीच में नहीं… साइड में हैं,” भाभी ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा।
उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं। मैंने हाथ को साइड में घुमाया। उनके स्तन और भी नरम लग रहे थे। उँगलियाँ हल्के से उनके निप्पल के पास से गुजरीं। भाभी का शरीर हल्का सा काँपा। मैंने जैसे-तैसे पैसे निकाल लिए लेकिन हाथ निकालते वक्त जानबूझकर एक बार और दबाया।
साबुन लेकर वापस आया तो भाभी बाथरूम में थीं। दरवाजा आधा खुला था। वो सिर्फ काली लेस वाली ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। उनकी भारी छातियाँ ब्रा में मुश्किल से समा रही थीं। गहरी खाई बन रही थी। कमर बिल्कुल पतली, नितंब बाहर को उभरे हुए, जाँघों के बीच का हिस्सा पैंटी से सटा हुआ।
“साबुन दे दो संजू…” मैंने साबुन दिया।
“अब मेरी पीठ पर साबुन लगा दो ना… प्लीज। मैं खुद नहीं लगा पा रही।”
मैं अंदर चला गया। भाभी ने ब्रा की हुक खोल दी। ब्रा ढ़ीली हो गई। उनकी गोरी पीठ पूरी तरह नंगी। मैंने साबुन लगाना शुरू किया। उनकी त्वचा इतनी स्मूद और नरम थी कि हाथ फिसल रहा था।
“ऊपर कंधों पर… बगलों में भी लगा दो,” उन्होंने आह भरते हुए कहा।
जब मैं बगल में हाथ डाला तो उनके स्तन की साइड मेरी उँगलियों को छू गई। वो गीले और भारी थे। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा और पत्थर जैसा हो चुका था। भाभी हल्के-हल्के कराह रही थीं, “हाँ… वहाँ… बहुत अच्छा लग रहा है संजू… धीरे-धीरे…”
मैं बाहर निकल आया। थोड़ी देर बाद भाभी सिर्फ हल्का ट्रांसपेरेंट गाउन पहनकर बाहर आईं। गीले बालों से पानी की बूँदें उनकी गर्दन पर, छातियों की खाई में सरक रही थीं। निप्पल गाउन से साफ उभरे हुए थे।
“कितना शर्माता है तू… शादी हो जाएगी तो क्या करेगा? लड़की को छूने में भी इतना डर लगेगा?” उन्होंने शरारत भरी नजरों से कहा।
शाम को उन्होंने मुझे बुलाया, “आइसक्रीम खाने का मन है। ले आओ, दोनों मिलकर खाएंगे।” फिर वही ड्रामा शुरू। “पैसे निकाल लो।” आज उनके हाथ खाली थे लेकिन उन्होंने ब्लाउज और आगे कर दिया। मैंने हाथ डाला। इस बार थोड़ा और देर तक सहलाया। भाभी की सांसें तेज हो गईं।
उनके निप्पल पूरी तरह सख्त हो चुके थे। मैंने हल्के से दबाया तो भाभी की आह निकल गई। कुछ दिन बाद भैया रात को अचानक आ गए। मुझे ड्रॉइंग रूम के सोफे पर सुला दिया गया। आधी रात को मेरी नींद खुली। बेडरूम से हँसी, कराह, चूमने की आवाजें और चमड़ी की चटकार सुनाई दे रही थी। मैं उठकर खिड़की के पास गया और पर्दा हल्का सा हटाया।
दृश्य देखकर मेरा लंड पत्थर हो गया। भाभी पूरी तरह नंगी लेटी हुई थीं। उनके बड़े-बड़े स्तन दोनों तरफ लहरा रहे थे। भैया उनके एक स्तन को जोर-जोर से चूस रहे थे, दाँत से काट रहे थे, दूसरे को मसल रहे थे। भाभी की आँखें बंद थीं, मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं – “आह्ह… मिथुन… जोर से चूसो… और जोर से… हाँ… काटो मेरे स्तन…”
भैया नीचे सरके। भाभी की जाँघें फैलाईं। उनकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और गीली चमक रही थी। भैया ने जीभ से चाटना शुरू किया। भाभी पागल हो गईं – “आआह्ह… और अंदर डालो जीभ… चूत चाटो… हाँ भैया… मैं मर जाऊँगी…!”
फिर भैया ऊपर चढ़े। उनका मोटा, लंबा लंड भाभी की चूत में धीरे-धीरे घुसा। भाभी की चीख निकल गई। फिर तेज-तेज धक्के। कमरा चुदाई की आवाजों से भर गया – फच फच फच… भाभी के स्तन उछल-उछलकर उनके मुँह पर पड़ रहे थे। भैया नितंबों पर थप्पड़ मार रहे थे।
“फाड़ दो मेरी चूत… हाँ… और तेज… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… आह्ह… और गहरा…!”
मैं वहाँ खड़ा-खड़ा लंड पकड़कर जोर-जोर से सहलाने लगा। भैया 5 दिन बाद चले गए। उस शाम भाभी ने मुझे बुलाया। खाना खाते-खाते मैंने हिम्मत करके पूछ लिया, “भाभी… बड़े लोग भी दूध पीते हैं?”
भाभी चौंक गईं। “तुमने देख लिया था?” मैंने सब कुछ विस्तार से बता दिया। भाभी शर्माईं लेकिन उनकी आँखों में शरारत और गर्मी साफ दिख रही थी। “ये बात किसी को मत बताना… समझ गए ना संजू?”
उसके 4-5 दिन बाद एक रात मेरी नींद खुली। भाभी का नरम गर्म हाथ मेरे अंडरवियर के अंदर था। वो मेरे लंड को धीरे-धीरे सहला रही थीं। उँगलियाँ पूरे शाफ्ट पर ऊपर-नीचे कर रही थीं।
“भाभी… ये क्या कर रही हो?” मैं चौंककर बोला।
“बस देख रही थी… तुम्हारा सू-सू टाइट तो नहीं हो रहा…” मुस्कुराते हुए बोलीं।
मैं चुप रहा। मज़ा आने लगा था। 3-4 दिन बाद फिर हुआ। इस बार उन्होंने अंडरवियर पूरी तरह ऊपर कर लिया था। मेरे लंड को खुलेआम पकड़कर धीरे-धीरे मुठ मार रही थीं। मेरा लंड पूरा खड़ा, नसें उभरी हुईं, सिरे से प्रीकम निकल रहा था। मैं चुपचाप लेटा मज़ा ले रहा था।
एक हफ्ते बाद तो वो मेरे लंड को पूरा पकड़कर तेजी से ऊपर-नीचे करने लगीं। उनकी सांसें भी तेज हो गई थीं। उस रात के बाद भाभी और मेरे बीच का खेल और तेज हो गया था। अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो भाभी मुस्कुराते हुए मेरे पास बैठी थीं।
“मुझे हँसी आ गई… कितनी देर से देख रही थी आप?” मैंने शरमाते हुए कहा।
“मैं मम्मी से शिकायत कर दूँगा,” मैंने मजाक में कहा।
भाभी हँस पड़ीं। “कर दे… लेकिन फिर मैं भी बता दूँगी कि तू रात को मेरी छातियों को घूर रहा था।”
उन्होंने मेरे लंड को छूना बंद कर दिया, लेकिन चिढ़ाने से बाज नहीं आती थीं। कभी पैसे निकालने के बहाने मुझे ब्लाउज में हाथ डलवातीं और जैसे ही मेरा हाथ अंदर जाता, वो मेरी निक्कर नीचे खींच देतीं। कभी बेड से उठकर खड़ी हो जातीं तो मेरा हाथ उनके ब्लाउज में फंसकर रह जाता।
एक-दो बार तो उनके ब्लाउज के बटन भी टूट गए और उनके भारी बूब्स झाँकने लगे। मैं फौरन नजर घुमा लेता, लेकिन दिल जोर-जोर से धड़कता रहता। कभी वो मुझे बाथरूम बुलाकर पीठ पर साबुन लगाने के बहाने पूरा नंगा बदन दिखा देतीं। मैं इग्नोर करने की कोशिश करता, लेकिन अब मुझे भी मज़ा आने लगा था।
कॉलेज में दोस्तों के साथ सेक्स वाली बातें होतीं, मैं सुनता रहता। अब मुझे लंड-चूत का फर्क समझ आने लगा था, हालाँकि पूरा ज्ञान अभी नहीं था। मेरा लंड अब अक्सर टाइट हो जाता और मैं समझ नहीं पाता कि ये क्या हो रहा है। भाभी जैसे मुझे और उकसाने को तैयार ही नहीं थीं।
उन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही थी। भाभी रात को बहुत कम कपड़ों में सोतीं – सिर्फ हल्का ब्लाउज और पैंटी। मेरी आँख खुलती तो मैं घंटों उनका गोरा, नरम जिस्म घूरता रहता। 1-2 बार उनकी नींद खुल गई तो मैं फौरन टॉयलेट का बहाना करके उठ जाता।
एक दिन शाम को गर्मी के बाद अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। मम्मी ने मुझे जल्दी भाभी के घर भेज दिया ताकि मैं भीग न जाऊँ। मैं पहुँचा तो भाभी ने कहा, “मैं तुम्हारा ही वेट कर रही थी। तुम आ जाओ तो नहा लूँ, वरना दरवाजा कौन खोलेगा?”
“मैं आ गया हूँ, आप नहा लो,” मैंने कहा।
भाभी ने तुरंत अपनी मैक्सी उतार दी। मैं चौंक गया।
“ये आप क्या कर रही हो?”
“नहाने जा रही हूँ,” उन्होंने सहज भाव से कहा और ब्लाउज के हुक खोलने लगीं।
मेरा लंड तुरंत टाइट हो गया। अच्छा था कि मैंने लंबी टी-शर्ट पहन रखी थी। उन्होंने ब्लाउज भी उतार दिया। अब वो सिर्फ काली ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थीं। मैं फौरन उठकर लॉबी में चला गया। बाहर तेज बारिश हो रही थी। तभी भाभी भी बाहर आ गईं – सिर्फ ब्रा और पैंटी में। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“मैं बारिश में नहाने जा रही हूँ। तुम नहाओगे?”
मैंने मना किया तो उन्होंने ज़बरदस्ती मेरा हाथ पकड़कर बारिश में खींच लिया। मैं समझ गया कि बचना मुश्किल है।
“मेरे पास कपड़े नहीं हैं, भीग जाएँगे तो क्या पहनूँगा?”
“मेरी पैंटी पहन लो,” उन्होंने हँसते हुए कहा।
मैंने बहुत मना किया, लेकिन वो नहीं मानीं। आखिरकार उन्होंने एक तौलिया दे दिया। “ये लपेट लो, नहाने के बाद अपने कपड़े पहन लेना।”
मैं रूम में जाकर कपड़े उतारकर सिर्फ तौलिया लपेटकर बाहर आ गया। भाभी पहले से ही दालान में खड़ी थीं। हम दोनों बारिश में आ गए। पानी तेजी से गिर रहा था। काफी देर तक हम भीगते रहे। भाभी बार-बार मेरे बदन पर हाथ फेरतीं, कभी मेरे से पूरी तरह चिपक जातीं। उनका गीला, नरम शरीर मेरे शरीर से रगड़ खा रहा था। अचानक उन्होंने मेरे तौलिए को खींच लिया। मैं बिल्कुल नंगा हो गया।
“भाभी!” मैं चीख पड़ा और दोनों हाथों से अपना लंड छिपाने की कोशिश करने लगा।
भाभी जोर से हँस दीं। “ले लो तौलिया…” उन्होंने कहा और पास आ गईं। मैंने सोचा तौलिया वापस करने आई हैं, लेकिन उन्होंने मेरी चूतड़ के बीच उँगली फिरा दी। मैं लाल हो गया।
“भाभी, तौलिया वापस दो…”
“कितना शर्माता है… ये ले,” उन्होंने तौलिया फेंक दी।
जब तक मैं तौलिया उठाकर लपेटता, भाभी ने अपनी ब्रा उतार दी और दालान के फर्श पर लेट गईं। उनके भारी बूब्स ऊपर को उठे हुए थे। बारिश की बूँदें उन पर गिर रही थीं, निप्पल सख्त होकर खड़े थे। मैं स्तब्ध खड़ा देखता रह गया। अचानक उनकी नजर मेरी तरफ पड़ी।
मैं घबरा गया और रूम में भागकर अंदर घुस गया। दरवाजा बंद कर लिया। भाभी बाहर से कह रही थीं, “रूम भीग जाएगा…” लेकिन मैंने अंदर से ही कपड़े पहन लिए। जब मैं बाहर निकला तो भाभी अभी भी नहा रही थीं – बिल्कुल नंगी। मैंने तौलिया उन्हें फेंका और अंदर चला गया। “शर्मीला का भाई…” उनकी हँसी सुनाई दी।
रात को हमने खाना खाया और सो गए। अगले दिन भाभी की तबीयत खराब हो गई थी। बारिश में नहाने की वजह से सर्दी-खाँसी हो गई। मैंने मम्मी को बता दिया। उस रात मम्मी उनके पास रुकीं, लेकिन अगली रात फिर मुझे जाना पड़ा। मैं खाना लेकर गया। भाभी ठीक-ठाक लग रही थीं लेकिन बीच-बीच में कराह रही थीं।
“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा।
“हाँ… पीठ, सर और सीने में बहुत दर्द है।”
खाना खाने के बाद हम लेट गए। वो लगातार कराह रही थीं।
“दवा ली?”
“कल मम्मी ने विक्स लगा दी थी, आराम मिला था। आज भी लगा लो।”
“लाओ, मैं लगा देता हूँ।”
भाभी ने गाउन उतार दिया। अब वो ब्लैक ब्लाउज और पैंटी में थीं।
“ब्लाउज भी उतार देती हूँ, वरना विक्स लग जाएगी।”
मैंने मुँह घुमा लिया। वो उल्टी लेट गईं। उनकी पीठ नंगी थी, सिर्फ ब्रा की पट्टी थी। मैंने विक्स लगानी शुरू की। हाथ बार-बार ब्रा की पट्टी से अटक जाता।
“पट्टी खोल दो,” उन्होंने कहा।
मैंने पट्टी खोल दी। उनकी पूरी नंगी पीठ सामने थी। मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा। मैं विक्स लगा ही रहा था कि भाभी ने अचानक करवट ले ली। अब वो सीधी लेटी थीं। ब्रा खुली हुई थी। एक बूब पूरी तरह दिख रहा था – गोरा, भारी, निप्पल सख्त। मैं घूरने लगा। वो आँखें बंद किए लेटी थीं। मैंने ब्रा उठाकर उनके बूब पर रखने की कोशिश की कि उन्होंने आँख खोल ली।
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“संजू प्लीज… सीने और गले पर भी विक्स लगा दो।”
उन्होंने ब्रा पूरी तरह हटा दी और आँखों पर हाथ रख लिया। क्या नजारा था! दोनों भारी बूब्स पूरी तरह खुले हुए, निप्पल खड़े। मैं गला सूख गया।
“प्लीज संजू… बहुत दर्द हो रहा है।”
मैंने गले पर विक्स लगाई। फिर सीने पर।
“दोनों के बीच में भी लगा दो…”
मैंने उनके बूब्स के बीच विक्स लगानी शुरू की। उनके बूब्स हिल रहे थे। मेरा लंड अब काफ़ी टाइट हो चुका था। मैंने बनियान ऊपर करके लंड को सीधा करने की कोशिश की। तभी भाभी ने आँखों से हाथ हटाया।
“क्या कर रहे हो?”
मैं डर गया। “कुछ नहीं…”
“कुछ तो है…” कहते हुए उन्होंने निक्कर के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया।
“अरे… ये तो बहुत टाइट हो रहा है,” उन्होंने दबाते हुए कहा।
मैं हक्का-बक्का रह गया।
“छोड़ो… मुझे टॉयलेट जाना है।”
“ओह… सूसू आ रही है?”
उन्होंने छोड़ा नहीं। पकड़े हुए ही बोलीं, “सच में सूसू आ रही है?”
“हाँ…”
“अगर सूसू आ रही होती तो ये लूस होता,” उन्होंने कहा और निक्कर के ऊपर से मसलने लगीं।
मैंने बहुत मना किया, लेकिन वो नहीं मानीं। आखिरकार उन्होंने मुझे बेड पर गिरा दिया, मेरे ऊपर चढ़ गईं और मेरे हाथ अपने घुटनों के नीचे दबा दिए।
“मुझसे झूठ बोल रहे हो… अब देखती हूँ कितनी सूसू आ रही है।”
उन्होंने ज़बरदस्ती मेरा निक्कर उतार दिया और मेरा लंड पकड़ लिया।
“अभी इतना टाइट था, अब इतना लूस? झूठ बोल रहे हो…”
“चलो, अब सूसू करने…” कहकर वो मुझे बाथरूम की तरफ खींचने लगीं। मेरा लंड उनके हाथ में था और वो उसे सहलाती जा रही थीं। उनके बूब्स मेरे सामने झूल रहे थे।
बाथरूम पहुँचकर भी उन्होंने लंड नहीं छोड़ा।
“अब तो मैं जान गई… लंड कहते हैं इसे।”
मैं घबरा गया। “भाभी प्लीज छोड़ दो…”
“नहीं… अब ये तभी छूटेगा जब तुम सूसू कर लोगे।”
उन्होंने मेरे लंड को पकड़े रखा, सहलाती रहीं और मुस्कुराती रहीं। मेरा लंड उनके हाथ में फिर से पूरा खड़ा हो गया। बाथरूम में घुसते ही भाभी ने दरवाजा बंद कर दिया और चटकनी लगा दी। मेरा निक्कर उन्होंने शावर के ऊपर वाले रॉड पर लटका दिया, जहाँ मेरा हाथ नहीं पहुँच सकता था। मैंने दोनों हाथों से अपना लंड छिपा लिया। शरम से मेरा चेहरा लाल हो रहा था। भाभी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं।
“अब पेशाब नहीं आ रही क्या? जो अपना… क्या कहते हैं इसे?”
“लंड…” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
“हाँ, अपना लंड हाथों में छुपाए खड़े हो। कितनी शरम आ रही है।” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
मैंने कहा, “आप जाओ, मैं आता हूँ।”
पर भाभी पास आ गईं। “तुम झूठ बोल रहे हो। मैं जानती हूँ तुम्हें सूसू नहीं आ रही। अब कर के दिखाओ।”
कहते हुए उन्होंने अपना हाथ मेरी कमर के पीछे डाल दिया और मेरी गांड को सहलाने लगीं। मैं काँप गया। उनके भारी, नंगे बूब्स मेरे सीने से लग रहे थे। शर्म और गर्मी के मारे मैंने झटके से उनके बूब्स नोच लिए।
“आया…” भाभी ने सिसकारी भरी, लेकिन हँस भी दीं। “आज तुम्हें सूसू किए बगैर जाने नहीं दूँगी।”
उन्होंने मेरे दोनों हाथ ज़बरदस्ती मेरे लंड से हटा दिए। मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ, खड़ा और लाल हो चुका था। भाभी ने झुककर उसके सिरे पर एक जोरदार चुम्मा दे दिया।
“करो पेशाब… वरना आज तुम यहीं बंद रहोगे।”
मैं डर गया। “आप इसे छोड़ो तो सूसू करूँ।”
भाभी ने हँसते हुए मेरा लंड छोड़ दिया, लेकिन पीछे आकर खड़ी हो गईं। उन्होंने अपने भारी बूब्स मेरे कंधों पर टिका दिए। उनकी गरम सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।
“अब करो… मैं देखूँगी तुम्हें सू-सू आती भी है या नहीं।”
मैंने कहा, “आप हटो, मैं नली पर कर लूँगा।”
“नहीं, यहीं करो… बीच बाथरूम में।”
मैं साँस भरकर रह गया। फिर भी कोशिश की, लेकिन पेशाब नाम को भी नहीं आ रही थी। सिर्फ 10-12 बूँदें टपककर रह गईं। भाभी ने मेरे लंड को झटका दिया। कुछ बूँदें उनके जाँघों पर गिर गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“है-है… तुम्हारी पेशाब मेरे ऊपर आ गई। अब साफ करो।”
मैंने कहा, “आप मेरे आगे आई ही क्यों? अब मैं साफ नहीं करूँगा, आप खुद करो।”
भाभी ने घूरा, फिर मुस्कुराकर अपनी जाँघों और पेट पर हाथ फिराया। मेरी पेशाब की बूँदें उन्होंने अपने बदन पर रगड़ लीं। मैं देखता ही रह गया। उनका एक हाथ अब भी मेरे लंड को पकड़े हुए था। मेरा लंड फिर से फुल टाइट होकर तनटना रहा था।
“ये अभी तक इतना टाइट क्यों है?”
“पता नहीं…”
“लगता है तुम्हारी सूसू खत्म हो गई। अब मुझे सूसू आ रही है।”
भाभी ने कहा, “चलो, मेरी पैंटी उतारो।”
मैं पीछे हटने लगा, लेकिन उन्होंने मेरा लंड और कसकर पकड़ रखा था। आखिरकार मुझे उनकी पैंटी उतारनी पड़ी। जैसे ही मैं झुका, उनके भारी बूब्स मेरे मुंह से टकराने लगे। मैंने पैंटी नीचे सरका दी। भाभी मेरे लंड को पकड़े हुए ही बैठ गईं और पेशाब करने लगीं।
“देखो… ऐसे करते हैं सूसू।”
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पहली बार मैं किसी औरत को पेशाब करते देख रहा था। गर्म पेशाब उनके गुलाबी चूत के छेद से निकलकर जाँघों पर बह रही थी। मैं देखता रह गया। अचानक भाभी खड़ी हो गईं और सारी पेशाब मेरे पैरों और जाँघों पर गिरने लगी।
“ये तुमने क्या किया?” मैं बोला।
“तुम पीछे हटे तो मुझे खड़ा होना पड़ा।”
अब उन्होंने मेरा लंड छोड़ दिया। मैं निक्कर की तरफ भागा, लेकिन वो ऊपर लटका था।
“मेरा निक्कर दो भाभी।”
“पहले सू-सू तो धो लो।”
मैंने हाथ धोए। फिर उन्होंने कहा, “और लंड नहीं धोगे? गंदा रह जाएगा।”
उन्होंने मुझे वॉशबेसिन के पास खींच लिया। “तुम पानी डालो, मैं धो देती हूँ।”
मैं पानी डालता रहा और भाभी मेरे लंड को धीरे-धीरे रगड़ने लगीं। उनकी उँगलियाँ शाफ्ट पर ऊपर-नीचे घूम रही थीं। मेरा लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया।
“लगता है फिर से सूसू आ रही है…” उन्होंने शरारत से कहा।
“नहीं आ रही…”
“तो फिर इतना टाइट क्यों हो रहा है? मैं बता दूँगी क्यों।”
उन्होंने लंड छोड़ दिया और अपनी चूत की तरफ इशारा किया। “अब तुम इसे साफ करो।”
मैंने बहुत मना किया, लेकिन भाभी नहीं मानीं। आखिरकार मुझे उनकी चूत साफ करनी पड़ी। उन्होंने पानी लिया, मैंने हाथ लगाया। उनकी गर्म, गीली चूत मेरी उँगलियों पर थी। मैं सहलाने लगा। उँगली उनके छेद में भी चली गई।
“हाँ… यहीं पर रगड़ के साफ करो…” उनकी आवाज भारी हो गई थी।
मुझे भी मज़ा आने लगा। मैं धीरे-धीरे उनकी चूत की फाँकें सहलाने लगा। भाभी की साँसें तेज हो गईं। थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, “अब काफी हो गया।” उन्होंने पैंटी वहीं छोड़ दी और नंगी ही बाहर निकल गईं। मैंने निक्कर माँगा, लेकिन उन्होंने बाहर ले जाकर कहा, “पहले सूख जा, फिर पहनना।” मैं नंगा ही बाहर निकला। जैसे ही मैं लॉबी में आया, भाभी दरवाजे के पीछे से आ गईं और मेरी गांड के बीच हाथ फेर दिया।
“क्या करती हो भाभी?” मैं चिहुँक गया।
“चलो रूम में… सूखने के बाद निक्कर पहन लेना।”
हम दोनों नंगे ही बेडरूम में गए। भाभी ने कहा, “बेड पर लेट जाओ। पहले मैं तुम्हारा लंड सूखा देती हूँ, फिर तुम मेरी चूत सूखा देना।”
मैं लेट गया। भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लिया और फूँक मारने लगीं। फिर खाल ऊपर की और अंदर फूँक मारी। मज़ा इतना आया कि “आह…” निकल गई। अचानक उन्होंने थूक गिरा दिया मेरे लंड पर।
“ये क्या किया?”
“सॉरी… अब साफ कर देती हूँ।”
कहते हुए उन्होंने मेरा पूरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मेरे शरीर में आग लग गई। मैं उठ बैठा, “क्या कर रही हो भाभी… ची!”
“नहीं ची… इसी में मज़ा आता है। अच्छा, दूध पीना है?”
उन्होंने अपना सिर मेरे मुँह की तरफ किया। उनके भारी बूब्स मेरे चेहरे पर आ गए। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। कुछ नहीं निकला।
“दूध तो है ही नहीं…”
भाभी हँस पड़ीं, “अभी से थोड़े ही आता है। बच्चा होने के बाद आएगा।”
“तो कब आएगा?”
“जब तुम्हारे भैया चाहेंगे… पर तुम उनसे पूछ मत लेना।”
फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। उनके नंगे बूब्स मेरे मुँह से चिपके हुए थे।
“रुको… मैं अभी तुम्हें दूध पिलाती हूँ…”
भाभी कहकर उठीं और किचन में चली गईं। मैंने सोचा अब पीछा छूट गया। जल्दी-जल्दी मैंने अपना निक्कर और बनियान पहन लिया। लेकिन वो दो मिनट में ही वापस आ गईं – खाली हाथ। मैं समझ गया था कि वो दूध का गिलास लेकर आएंगी।
“अरे! तुमने कपड़े पहन लिए क्यों?” भाभी ने पूछा।
“अब आप भी पहन लो, फिर सोते हैं,” मैंने कहा।
पर भाभी नहीं मानीं। “मैं तुम्हें दूध पिलाने आई थी और तुमने कपड़े पहन लिए? जल्दी से उतारो, वरना मैं उतारूँगी तो फट सकते हैं।”
मैंने बहुत मना किया, लेकिन वो अड़ी रहीं। आखिर हारकर मैंने बनियान उतार दी।
“और निक्कर?”
“नहीं भाभी, अब रहने दो। मुझे नींद आ रही है।”
“सो जाना, लेकिन निक्कर तो उतारना ही पड़ेगा।”
उनकी ज़िद देखकर मैंने निक्कर भी उतार दिया। मेरा लंड अब मुरझाया हुआ था। भाभी ने देखा और मुस्कुराईं।
“हाय! तुम्हारा लंड तो फिर से सो गया। अभी इसे जगाते हैं। चलो, पहले दूध पियो।”
उन्होंने बेड पर बैठकर मुझे अपनी गोद में खींच लिया। उनके निप्पल चमक रहे थे।
“दूध आ गया क्या भाभी?”
“हाँ… तुम पियो तो।”
जैसे ही मैंने एक निप्पल मुँह में लिया, मीठा शहद का स्वाद आया। भाभी ने निप्पलस पर शहद लगा रखा था। मीठा स्वाद और उनका नरम, गर्म स्तन… मैं जोर-जोर से चूसने लगा। उसी वक्त भाभी ने मेरा लंड पकड़ लिया। वो पहले से ही शहद से चिपचिपा था। मैं चौंक गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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“हाथ तो धो आती भाभी…”
“क्यों? मैंने ही लगाया है। तुम मेरा दूध पी रहे हो, मैं भी तो कुछ पियूँगी।”
“तो क्या आप मेरा पेशाब पियोगी?”
“अरे नहीं… मैं तुम्हारा दूध पियूंगी।”
उन्होंने मेरे छोटे निप्पल्स को चाटा और फिर मेरे ऊपर घोड़ी बन गईं। उनकी चूत मेरे मुँह के बिल्कुल सामने थी। हल्की सी मीठी खुशबू आ रही थी। मैंने फूँक मारी। उधर उन्होंने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मैं घबरा गया। उन्होंने लंड बाहर निकाला और कहा, “फूँक मारते रहो… वरना काट लूँगी।” कहकर उन्होंने दाँत लगा दिए। मैं डरकर फिर फूँक मारने लगा। भाभी काफी देर तक मेरा लंड चूसती रहीं। मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो चुका था।
“क्या कभी मलाई नहीं निकली इसमें से?”
“कौन सी मलाई? इसमें तो सिर्फ सू-सू आती है…”
“अच्छा रहने दो, चलो सोते हैं।”
मैं निक्कर उठाने गया तो उन्होंने मना कर दिया। “इतनी गर्मी में कपड़े नहीं पहनते। ऐसे ही सोएंगे।”
मैं उनके से चिपक गया। वो मेरा लंड हाथ में पकड़े सहलाती रहीं। मैं उनके स्तन चूसता हुआ सो गया। सुबह जब आँख खुली तो भाभी अभी सो रही थीं। उनका मुँह मेरे पैरों की तरफ था। शायद रात भर मेरा लंड चूसते हुए ही सो गई थीं। मेरा लंड अब भी सख्त था।
मैंने उनकी तरफ देखा। उनके बूब्स साइड में लटक रहे थे। फिर नजर उनकी चूत पर गई। दोनों होंठ थोड़े खुले हुए थे। मैंने उँगली से छेड़ा। भाभी के पैर सिकुड़ गए और मेरा हाथ उनके जाँघों के बीच फंस गया। उन्होंने आँखें खोलीं और मुस्कुराईं।
“क्या कर रहे हो संजू जी? कल तक शर्मा रहे थे, आज उँगलियाँ बहुत चल रही हैं।”
“इसमें उँगली नहीं… लंड डालते हैं,” उन्होंने कहा।
“कैसे भाभी? ये तो मेरे साथ जुड़ा हुआ है…”
“बता दूँगी… रात को। अब कपड़े पहनकर घर जाओ।”
मैं कपड़े पहनकर घर गया, लेकिन मन कहीं नहीं लग रहा था। पूरा दिन भाभी के इंतजार में कटा। शाम को मैं खाना लेकर 7:30 बजे ही पहुँच गया।
भाभी हँसीं, “अरे तुम इतनी जल्दी आ गए? मैं तो तुम्हारे घर आ रही थी।”
“मेरा खाना यहीं खा लूँगा,” मैंने कहा।
उन्होंने मैक्सी उतारी और साड़ी पहन ली। हम दोनों मेरे घर गए। मम्मी से बातें कीं।
मम्मी ने मजाक किया, “सोनिया, तुमने तो हमारे लड़के पर जादू कर दिया है।”
भाभी ने मेरे गाल खींचे, “ये है ही इतना प्यारा।”
रात 9 बजे हम वापस उनके घर आए। खाना खाने के बाद भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में आ गईं। खाते वक्त उन्होंने मेरे निक्कर के ऊपर से लंड पकड़ लिया।
“इसे संभालो… जहाँ-तहाँ खड़ा हो जाता है।”
रात को लेटने के बाद उन्होंने नाईटी पहनी। मैं सोच रहा था कि आज वो मुझे सब सिखाएंगी, लेकिन वो सो गईं। आधी रात को मेरी नींद खुली। भाभी गहरी नींद में थीं। उनकी नाईटी खुली हुई थी। मैंने धीरे से उनकी पैंटी उतारी। उनकी चूत पूरी तरह नंगी थी।
मैंने उँगली डाली – गर्म और गीली। फिर मैं उनके ऊपर चढ़ा और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा, लेकिन सही से अंदर नहीं जा पाया। आखिर मैं हारकर उनके पास लेट गया। उनका हाथ मेरे लंड पर रख दिया और उनकी चूत पर अपना हाथ। पता नहीं कब नींद आ गई।
सुबह भाभी ने मुझे उठाया। “मेरी पैंटी तुमने उतारी?”
मैंने उल्टा कहा, “आप ही करती हो सब।”
भाभी हँसीं, “तुम बहुत नॉटी हो गए हो। आज रात को मैं तुम्हें सब बताऊँगी कि लंड चूत में कैसे जाता है।”
उसी दिन मम्मी-पापा बाहर जा रहे थे। मम्मी ने कहा, “संजू को भाभी के घर छोड़ दो।”
भाभी मुस्कुराईं, “हाँ, इसे यहीं छोड़ दो।”
मम्मी-पापा के जाते ही भाभी ने मुझे देखा और बोलीं, “चलो… नहा लो।”
मैं कपड़े उतारकर तौलिया लपेटकर बाथरूम गया। दरवाजे की कुंडी मेरी पहुँच से बाहर थी।
मैं शावर के नीचे खड़ा था, पानी मेरे शरीर पर गिर रहा था। अचानक बाथरूम का दरवाजा खुला। भाभी अंदर आईं – सिर्फ नाईटी पहने हुए।
“मुझे भी नहाना है… चलो साथ में ही नहाते हैं।”
उन्होंने नाईटी उतारकर कील पर टांग दी। ब्रा और पैंटी में वो शावर के नीचे आ गईं। पानी उनके शरीर पर बहने लगा। ब्रा और पैंटी भीगकर पारदर्शी हो गईं। उनके भारी बूब्स और गुलाबी निप्पल साफ दिख रहे थे। मैं दीवार से सटा खड़ा था।
भाभी नीचे झुकीं और एक झटके में मेरी अंडरवियर नीचे खींच दी। अब मैं बिल्कुल नंगा था। मैंने ऊपर करने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे दीवार और अपने बीच दबा लिया। उनके गीले, भारी बूब्स मेरे मुँह के सामने थे। उनका एक हाथ मेरे लंड को पकड़ चुका था। मैंने झटके से उनके बूब पर काट लिया।
“आया…” भाभी सिसकारी भरकर पीछे हटीं। मैंने तुरंत उनकी पेंटी पकड़ कर नीचे खींचनी शुरू कर दी। उन्होंने खुद ही पैंटी उतार दी और ब्रा की पट्टी खोलने लगीं। मैंने दोनों हाथों से उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए।
“आह्ह… तुम तो एक ही दिन में मर्द हो गए!”
भाभी ने ब्रा उतार दी। हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। उन्होंने मुझे टब में बिठा लिया।
“अब बताओ… मेरा लंड आपकी चूत में कैसे जाएगा?” मैंने पूछा।
“सब्र करो… बताती हूँ।”
वे काफी देर तक मेरे लंड को सहलाती रहीं। मैं उनके बूब्स दबाता, चूसता रहा। फिर वो उठीं और टब से बाहर निकल गईं। झुककर टब की साइड पकड़ लीं। उनकी गोल गांड मेरे लंड के सामने थी।
“अब मेरे पीछे आओ…”
मैं पीछे गया। उनकी चूत और गांड दोनों दिख रही थीं।
“कौन से छेद में डालना है?”
“नीचे वाले में…”
मैंने लंड पकड़ा और कोशिश की, लेकिन घुस नहीं रहा था। एक-दो बार सिरा अंदर गया, फिर बाहर निकल आया।
“यहाँ नहीं हो पाएगा… चलो कमरे में।”
हम दोनों नंगे और भीगे हुए ही बेडरूम में आए। भाभी ने मुझे कुर्सी पर बिठाया और नीचे बैठकर मेरे लंड को मुठ मारने लगीं। काफी देर तक रगड़ने के बाद भी कुछ नहीं निकला।
“जलन हो रही है भाभी…”
“माल तो निकलना ही पड़ेगा।”
उन्होंने मेरे लंड पर ठंडी फूँक मारी और पूरा मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा था, लेकिन मलाई नहीं निकली। फिर उन्होंने अलमारी से क्रीम निकाली और मेरे लंड पर लगाई। खुद बेड पर लेट गईं, पैर फैलाए और अपने पैरों से मेरे पैर फँसा लिए। मैं सरककर उनके पास आ गया। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत में धकेल दिया।
“आह्ह…”
धीरे-धीरे उनकी गांड हिलने लगी। मेरा लंड उनकी चूत में आधा-अधा अंदर-बाहर हो रहा था। क्रीम की वजह से आसानी से घुस रहा था। भाभी की आहें भरने लगीं – “हाँ संजू… धीरे… और गहरा…” काफी देर बाद उनकी चूत सिकुड़ी और झड़ गई। उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“ऐसे निकलता है माल… तुम अभी छोटे हो, इसलिए तुम्हारा नहीं निकल रहा।”
उस पूरे दिन हम नंगे ही रहे। भाभी ने शहद लगाकर मुझे चटाया, मैंने उनके बूब्स और चूत पर शहद लगाकर चाटा। उन्होंने कंडोम निकाला और बताया कि इसे लंड पर पहनते हैं ताकि बच्चा न हो। मैंने उसे लंड पर चढ़ाया। जब वो किचन में खाना बना रही थीं, मैंने कंडोम का एक सिरा उनकी चूत में डाल दिया और दूसरे सिरे से फूँक मारी। कंडोम अंदर फूल गया। भाभी सिसकारी भर रही थीं – “क्या कर रहे हो… आह्ह!”
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खाना खाने के बाद 69 पोजीशन में लेटे। वो मेरे लंड को शहद लगाकर चूस रही थीं, मैं कंडोम से हवा भरकर उनकी चूत फुला रहा था। उनकी चूत कई बार झड़ी। मेरे लंड से अभी भी कुछ नहीं निकला। उस दिन से हम रोज नंगे सोने लगे। साथ में पेशाब करते। भाभी मेरा लंड पकड़कर मेरी धार इधर-उधर घुमातीं। मैं उनकी चूत में उँगली डालकर उनकी धार रोक देता। फिर एक-दूसरे को धोकर फूँक मारकर सुखाते।
एक रात भाभी ने मेरा लंड नापा – “लगभग 4 इंच… अभी तुम 18 के हो, 20 साल में 7-8 इंच हो जाएगा। तब बहुत मज़ा आएगा।”
कुछ दिन बाद भैया आ गए। उस रात हम कपड़े पहनकर सोए। आधी रात को भैया आए, मुझे उठाकर ड्रॉइंग रूम में सुला दिया। मैं जाग गया। खिड़की का पर्दा हटाकर देखा। भैया भाभी को किस कर रहे थे। नाइट्टी उतार दी, ब्रा-पैंटी निकाल दी। भाभी ने उनके अंडरवियर के ऊपर से लंड सहलाया। भैया ने उन्हें गोद में उठाया, शायद बाथरूम ले गए।
थोड़ी देर बाद वापस आए। भैया ने भाभी के पैर कंधों पर रखे और जोर-जोर से चोदने लगे। भाभी की आहें – “आह्ह… और तेज… फाड़ दो…” फिर उन्होंने भाभी को उल्टा करके चोदा। भाभी ने खिड़की की तरफ देखकर आँख मारी। मैं समझ गया वो जानती हैं कि मैं देख रहा हूँ। भैया का लंड बाहर निकाला, कंडोम उतारा और भाभी के मुँह में दे दिया। भाभी ने चूसकर साफ किया। फिर शहद लगाकर चूसने-चटाने का खेल शुरू हुआ।
सुबह भाभी ने मुझे जगाया। “बड़े मज़े आ रहे थे रात को… तुम 8 बजे तक सो रहे हो?”
“आपको कैसे पता चला कि मैं देख रहा था?”
“अंदाजा लगा लिया…” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। “अब एक हफ्ते के लिए घर जाओ।”
भैया एक हफ्ते रहे। मैं घर पर रहा। अब मुझे लंड रगड़ने की आदत हो गई थी, लेकिन मलाई अभी नहीं निकल रही थी।
एक हफ्ते बाद भैया गए। जाते वक्त बोले, “संजू, आज रात से फिर भाभी के पास सोना।”
मैं मुस्कुराया। भाभी भी मुस्कुराईं।
दोस्तों, यहीं मेरी और भाभी की कहानी का आखिरी हिस्सा था। उसके बाद भी हमने बहुत मजे किए। भाभी ने मुझे सब कुछ सिखा दिया।
जब तक भैया बाहर रहते, भाभी मेरी थी।
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