Maa Ki Jabardasti Chudai
एक और माँ की चुदाई कहानी के साथ वापस आ गया है। दोस्तों, नया घर बनकर पूरा हुआ ही है, हर परिवार के लिए वो कितना खास मौका होता है न? हमारे लिए भी था। पापा पूरी जिंदगी मेहनत करके ये नया मकान बनाया था, तीन मंजिला, बंगला जैसा, बाहर से बाड़ा में आम का पेड़ भी लगाया था। Maa Ki Jabardasti Chudai
आज ही गृह प्रवेश की पूजा थी, सुबह से ही घर में हलचल थी। मैं 21 साल का हूं, कॉलेज जाता हूं, तो मैं भी पूरी सुबह इधर-उधर भाग रहा था, सामान लगा रहा था, मुन्नी मां की मदद कर रहा था। मां मेरी मुन्नी 40 साल की है, पर देखने में ऐसी लगती है कि अभी 30 की भी नहीं।
गोरा मलाई जैसा बदन, कमर पतली, कूल्हे ऐसे उठे हुए कि कोई भी देखकर एक बार जरूर मुड़कर देखे। आज गृह प्रवेश था तो उसने लाल रंग की साड़ी पहनी थी, हल्की पतली ब्लाउज, जिसमें उसके मोटे चूचे का निशान साफ दिख रहा था, निप्पल भी हल्के से उभर आ रहे थे।
मैंने ही उससे कहा था न “मां, ये ब्लाउज थोड़ा ज्यादा ही पतला है, कोई दूसरा पहन लो” पर वह हंसकर बोली “आज पूजा है न, नयी साड़ी पहनूंगी ही, क्या फर्क पड़ता है।” पापा भी खुश थे, उन्होंने कुछ नहीं कहा। पंडित जी को बुलाया था जो गांव से आते हैं, बड़े पंडित हैं, सब उन्हीं से पूजा करते हैं।
मैंने सुना था कि वह उम्र में 50 साल के हैं, पर जब वह घर में घुसे तो मैंने देखा वह काफी जवान लगते हैं, शरीर भी मजबूत, चेहरे पर दाढ़ी थी पर आंखें बड़ी चमकदार थी। वह अंदर आते ही सबसे पहले मुन्नी मां को ही देखा, एक पूरी नजर पूरे शरीर पर घुमा दी—नीचे से ऊपर तक, चूचों से लेकर कूल्हों तक, हर हिस्से को खाकर निगल लिया।
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मैंने देखा उसकी नजर मां के चूचों पर थोड़ी देर रुकी, फिर कूल्हे पर घूमी और थोड़ी देर वहां भी रुकी, फिर वो हंसकर पापा से हाथ मिलाया। पूजा शुरू हुई, मंदिर के कमरे में सब बैठे थे। पंडित जी ने पूजा की सामग्री निकाली, मंत्र बोलने शुरू किए।
बीच में कई बार ऐसा हुआ कि वह बहाने से मां के पास जाते, कि ये प्रसाद लाओ, ये घी डालो, ये फूल चढ़ाओ। और हर बार वह किसी न किसी तरह मां के शरीर को छू जाते, न छोड़ते। पहली बार तो मां ने सोचा होगा कि गलती से छू गया होगा।
पर दूसरी बार जब वह घी लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसका हाथ पूरी तरह मां के कूल्हे पर लगा, और वह वहां थोड़ी देर रुका भी, हल्की से दबाव भी दिया, हाथ को घुमा कर मसल दिया। मां एकदम सख्त हो गई, वह पीछे हट गई, पर पापा सामने बैठे थे, उन्होंने कुछ नहीं देखा।
पंडित जी बस मुस्कुराकर बोले “बहन जी, थोड़ी जल्दी करो न, मुहूर्त निकल जाएगा।” जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मां चुप रही, वह क्या करती? अभी पूजा चल रही है, अगर वह कुछ बोलेगी तो पापा ही उसे डांटेंगे कि पूजा में विघ्न मत डालो, तुम्हें ही हर चीज में गलत नजर आता है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मां भी यही सोच कर चुप रह गई, बस थोड़ी सी असहज हो गई, पीछे हटकर खड़ी रह गई। पर पंडित जी रुका नहीं। वह अगले ही पल फिर बहाना बनाया कि पूजा की कलश को पानी से भरना है, मुन्नी से ही भरवाना है। मां आगे आई, पानी भर रही थी, तो पंडित जी उसके पीछे खड़ा हो गया, उसका दबाव मां की पीठ पर लग रहा था।
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फिर अचानक वह अपना हाथ मां की साड़ी के नीचे, पेट के पास घुसा दिया, और बोला “देखो बहन जी, कलश ठीक से रखो…” और हाथ घुमा कर मां के निचले हिस्से तक चला गया, हल्के से चूत के ऊपर से होकर निकल गया। मां कांप गई, पानी का गिलास हाथ से हिल गया, थोड़ा पानी फर्श पर गिर गया।
पर वह फिर भी चुप रही, बस अपना काम करके वापस चली गई। फिर पंडित जी ने आरती की बारी आई। आरती उतारने के लिए मां को आगे आना था, सबके सामने आरती करनी थी। मां आगे आई, पंडित जी ने आरती की थाली उसे दी।
और जब मां ने थाली ली तो पंडित जी ने अपना दूसरा हाथ मां की कमर पर रख दिया, आगे की तरफ धकेलते हुए बोले “आगे आओ बहन जी, पूरे घर की आरती करनी है।” उसका हाथ मां की कमर पर पूरी तरह फैला हुआ था, निचली हिस्से तक, फिर वह ऊपर सरका, मां के एक चूचे को हल्के से मुट्ठी में जाम कर मसल दिया।
मां ने जोर से सांस ली, पर चुप रही, पापा पीछे खड़े थे, वह फोन पर किसी से बात कर रहे थे, उन्होंने कुछ नहीं देखा। मेरी नजर तो लगी हुई थी, मैंने देखा पंडित जी का हाथ मां के चूचे को निचोड़ रहा था, दबा रहा था, मां का चूचा उसकी मुट्ठी में दबकर बदल रहा था।
मैंने देखा मां के गाल लाल हो गए, वह एकदम जम गई, पर चुप रही, कुछ नहीं बोली। मेरे अंदर भी कुछ हलचल हुई, मेरा लौड़ा भी कच्छे में खड़ा हो गया, मैंने उसे दबा लिया, चुपचाप देखता रहा। पंडित जी का धोती में मेरी नजर गई। मैंने देखा कि उसकी धोती के सामने एक बड़ा उभार आया हुआ था, साफ दिख रहा था।
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उसका लौड़ा वहां खड़ा था, धोती के कपड़े के ऊपर से भी पता चल रहा था कि कितना बड़ा और मोटा है। मैंने देखकर हैरान रह गया, ये पंडित होकर भी इतनी हवस है उसकी? मां को देखकर उसका लौड़ा खड़ा हो गया सीधा। फिर जब आरती खत्म हुई, मां वापस जा रही थी.
तो पंडित जी ने उसका हाथ पकड़कर बोले “बहन जी, रुको। नए घर में नजर उतारनी पड़ेगी, मुझे तुम्हारे माथे पर टिका लगाना है।” मां रुक गई, वह अपना चेहरा आगे की तरफ किया। पंडित जी ने टिका लगाते समय अपना अंगूठा मां के माथे पर ही नहीं, उसकी भौंहों से लेकर गाल तक, होंठ तक घुमा दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर वह हाथ नीचे लाया, गर्दन पर, फिर कंधे पर, फिर सीधा ब्लाउज के अंदर घुसा दिया, दोनों हाथों से मां के दोनों चूचे पकड़ कर जोर-जोर से मसलने लगा। मां चीखने लगी “अरे! क्या कर रहे हो आप!” पर पंडित जी चुपचाप मसल रहा था, उसकी उंगलियां निप्पल को घुमा रही थीं, मां का बदन पूरी तरह कांप रहा था।
फिर वह हाथ और नीचे ले गया, साड़ी की झांप के बीच से कच्छी में हाथ घुसा दिया, सीधा मां की चूत पर, और उंगलियों से चूत को सहलाने शुरू कर दिया। चूत पहले से ही मां के कांपने से थोड़ी गीली हो गई थी, पंडित जी की उंगली आसानी से घूम रही थी।
मां कांप गई, पर हिली नहीं, क्योंकि पापा अभी भी पीछे फोन पर बात कर रहा था, उसे कुछ पता नहीं था। पंडित जी ने थोड़ी देर चूत सहलाई, फिर हाथ निकाल लिया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, और मुस्कुराकर बोला “हो गया नजर उतार दी अब सब ठीक है।”
मां पूरी लाल हो गई, भागकर पीछे चली गई, वह समझ गई थी कि ये पंडित हवसी है, उसका चुतिया बना रहा है, बस बहाने से उसके शरीर के मजे ले रहा है। पर वह क्या करती? घर की पूजा है, सबके सामने कुछ बोले तो घर की बदनामी होगी, पापा का नाम खराब होगा। इसलिए वह चुप रही बस असहज होकर खड़ी रही। पूजा का अंतिम चरण आया। “Maa Ki Jabardasti Chudai”
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पंडित जी ने अचानक चेहरा गंभीर कर लिया, पापा की तरफ देखकर बोले “जी महाराज, मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा। इस नए घर में कुछ नकारात्मक शक्ति आ गई है, नजर लग गई है इस पूरे परिवार को। खासकर आपकी मुन्नी बहन जी पर, वो जितनी सुंदर है उतनी ही जल्दी नजर लग जाती है। अगर अभी शुद्धिकरण नहीं किया तो पूरा परिवार बर्बाद हो जाएगा, आने वाले समय में हर तरफ से नुकसान ही नुकसान होगा।”
पापा घबरा गए, वह हमेशा से पंडितों की बातों पर पूरा विश्वास करते हैं। उन्होंने जल्दी से पूछा “तो क्या करें पंडित जी, आप ही बताइए, हम क्या करें जो सब ठीक हो जाए?” पंडित जी ने गंभीर होकर कहा “मुझे एक गुप्त पूजा करनी पड़ेगी। इसके लिए पूरे घर का दरवाजा बंद करना पड़ेगा, बाहर कोई नहीं आ सकता, और इस कमरे में सबको आंखों पर पट्टी बांधनी पड़ेगी। एक घंटे तक कोई भी अपनी पट्टी नहीं हटा सकता, किसी ने भी हटाई तो पूजा फेल हो जाएगी, और किस्मत बिगड़ जाएगी हमेशा के लिए।”
पापा ने तुरंत हां कर दी, “ठीक है पंडित जी, जो आप कहो वो करेंगे।” मां का चेहरा सफेद हो गया, वह घबरा गई, पर वह कुछ बोल नहीं पाई। पंडित जी ने पहले पापा की आंख पर पट्टी बांधी, फिर मेरी बारी आई। मैंने भी सोचा चलो पूजा ही है, कर लेते हैं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उन्होंने मेरी आंख पर भी पट्टी बांध दी। फिर वह मां के पास गया, उसने भी मां की आंख पर सफेद कपड़े से पट्टी बांध दी। कसकर बांधी कि कुछ भी दिखाई न दे। फिर वह कमरे का दरवाजा बंद कर दिया, अंदर से कुंडी लगा दी। मैं अंदर से सुन रहा था, वह मंत्र बोलने लगा।
पर वो मंत्र नहीं था, पहले से रिकॉर्ड किया हुआ मंत्र था, जो किसी स्पीकर से बज रहा था। आवाज तो मंत्र की थी पर गति एक जैसी थी, कोई बदलाव नहीं था। मैंने समझ लिया कि ये क्या खेल है। मां को भी लग गया होगा, वह थोड़ी हिली हुई लग रही थी। “Maa Ki Jabardasti Chudai”
फिर मैंने सुना, पंडित जी के कदमों की आहट मां की तरफ बढ़ रही है। मां की सांसें तेज हो गईं। तभी मैंने सुना, पंडित जी की आवाज धीमी थी, “चुप रहो बहन जी, पूजा चल रही है, हिलो नहीं।” फिर मैंने सुना, कपड़े धीरे से खोलने की आवाज, ब्लाउज के बटन खोले गए, फिर साड़ी का नाड़ा खुला।
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फिर पंडित जी ने कहा, “अब शुद्धिकरण के लिए मुझे तुम्हारे मुंह में ब्रह्मांड का प्रतीक घुसाना पड़ेगा।” फिर मैंने सुना, मां ने अपना मुंह घुमा लिया, वह पट्टी हटाने की कोशिश की, और धीमी आवाज में बोली “मत करो… प्लीज छोड़ो…”
पापा ने पट्टी बांधी हुई थी, उन्होंने सुना, पूछा “क्या हुआ मुन्नी? क्यों बोल रही हो?”
पंडित जी हंसकर बोला “कुछ नहीं महाराज जी, आपकी बीबी प्रसाद के लिए बोल रही है, मना कर रही है कि मुझे ये लेना ही नहीं। पर बिना ये लिए पूजा पूरी नहीं होगी।”
पापा तुरंत डांटकर बोले “क्या हो गया है तुम्हें मुन्नी! पंडित जी जो कह रहे हैं वो चुपचाप करो, पूजा में विघ्न मत डालो। हमारे पूरे घर की किस्मत दांव पर लगी है।”
मां चुप हो गई, पर वह फिर भी अपना मुंह हिला रही थी। तभी मैंने सुना, पंडित जी ने जोर से मां का सिर पकड़ा, आगे की तरफ खींचा, और धमाके से बोला “अब बस करो, आसुरी शक्ति को बाहर निकालो! अपना मुंह खोलो!”
फिर एक धक्के की आवाज आई, और पंडित जी की गहरी आवाज, जो मजे से भरी हुई थी, पूरे कमरे में गूंजी: “असली पूजा अब शुरू हुई है…”अगर कहानी अच्छी लगी हो तो फीडबैक जरूर दे जिसका अगला पार्ट जल्दी आएगा टेलीग्राम “chikutvv” या ईमेल पार: chikutvstories@gmail.Com
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