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You are here: Home / Bhai Bahan Ki Chudai / आशना दीदी और मेरे राज 5

आशना दीदी और मेरे राज 5

October 8, 2026 by crazy Leave a Comment

Muslim Didi Sexy Bur

हेल्लो फ्रेंड्स, आप सभी का एक बार फिर मेरी कहानी में स्वागत है. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आशना दीदी और मेरे राज 4 पढ़ा होगा, जिसमें की मैंने बताया था की मैं चुपके से दीदी को उनकी सहेली की शादी में लेकर चला गया, और दीदी बहुत खुश हो गई. फिर दीदी ने अपने वादे के अनुसार मुझे अपने सहेली के सुहागरात के लिए बुक किये होटल में ले गई. और रूम में जाकर दीदी मेरे सामने पूरी नंगी हो गई. अब आगे- Muslim Didi Sexy Bur

यह मेरी ज़िंदगी में पहली बार हुआ था कि आशना दीदी पूरी तरह से बिना कपड़ों के, अपनी जाँघें पूरी तरह फैलाए हुए उस फूलों से सजे बिस्तर पर लेटी हुई थीं, और उनकी इस बेफिक्र और खुली अदा को देखकर मेरी धड़कनें बेकाबू हो रही थीं।

मैं ठीक उनकी जाँघों के बीच में बैठा हुआ था, अपनी काँपती हुई जीभ से उनकी उस गीली चुत को छू रहा था, जिसके हर एक छूने पर उनका बदन हल्के से हिल जाता था। एक पल के लिए मुझे अपनी आँखों पर और इस नजारे पर किसी भी बात पर यकीन नहीं हो रहा था, क्योंकि कुछ ही दिनों पहले मेरी आशना दीदी मुझ पर बहुत गुस्सा थीं क्योंकि मैंने पहली बार उनके मर्जी के बिना उनकी चुत को छुआ था।

लेकिन आज का सच उस पुरानी बात से बहुत अलग था। आज न तो कोई नाराजगी थी और न ही कोई झिझक, बल्कि दीदी खुद अपनी पूरी मर्जी से अपनी दोनों टाँगें चौड़ी करके उस फूलों से सजे बिस्तर पर लेटी हुई थीं और अपनी भारी, गर्म साँसों के बीच बार-बार मुझसे कह रही थीं कि मैं और गहराई से उनकी चुत को चाटूँ, ताकि उनके बदन की जलती हुई गर्मी शांत हो सके।

मैंने अपना चेहरा आशना दीदी की टाँगों के और ज्यादा पास कर लिया, जिससे उनके शरीर की खुशबू और वहाँ की महक सीधे मेरी साँसों में घुलने लगी। उनके शरीर की गर्मी मुझे साफ महसूस हो रही थी। मैंने बिना किसी झिझक के अपनी जीभ को आगे बढ़ाया और उनकी गीली चुत पर रख दी।

जैसे ही मेरी जीभ ने उन्हें छुआ, दीदी का शरीर हल्के से काँप गया। वहाँ से जो गर्म और चिपचिपा पानी निकल रहा था, वह लगातार मेरी जीभ पर बहने लगा। वह रस इतना गर्म और गाढ़ा था कि उससे मेरा जोश और भी ज्यादा बढ़ गया। मैंने अपनी जीभ को थोड़ा और अंदर की तरफ किया और ऊपर-नीचे तेजी से चलाना शुरू कर दिया।

जैसे ही मैंने अपनी जीभ की रफ्तार बढ़ाई, आशना दीदी के मुँह से जोरदार आह निकल पड़ी। वह मजे में कराहते हुए अपनी आँखें बंद कर गईं। उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया, ताकि वह इस मजे को पूरी तरह से महसूस कर सकें।

उनके मुँह से निकलती धीमी-धीमी आवाज़ें और उनकी भारी साँसें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। अपनी जीभ की रफ्तार और थोड़ी तेज करते हुए, मैंने अपनी साँस रोककर और दीदी के करीब आकर फुसफुसाया, “दीदी, आपकी चुत बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और मजेदार है…” मेरी बात सुनते ही आशना दीदी का शरीर और ज्यादा ऐंठ गया।

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उन्होंने हाँफते हुए और अपनी आँखें कसकर बंद करते हुए कहा, “गोलू… इस वक्त कोई बात मत करो, बस चाटते रहो…” उनकी इस बात ने मेरी बची-कुची कसर भी पूरी कर दी। उनकी दीवानगी देखकर मेरा जोश और भी बढ़ गया।

मैंने बिना एक पल भी गँवाए अपनी जीभ को और ज्यादा जोश और गहराई के साथ उनके बदन पर चलाना शुरू कर दिया, जिससे कमरे में सिर्फ उनके मजे की आहें और मेरी साँसों की आवाज़ ही गूँज रही थी। उनकी इस बात के बाद मैंने अपनी जीभ की रफ्तार और भी तेज कर दी।

मैंने कभी उनकी चुत के ऊपर वाले हिस्से को सहलाया, तो कभी अपनी जीभ को पूरी तरह अंदर ले जाकर गोल-गोल घुमाने लगा। मेरे इस तरह से चाटने पर आशना दीदी का शरीर एक अलग ही नशे में झूम उठा। वह हाँफते हुए बिस्तर पर इधर-उधर हाथ मारने लगीं।

कभी वह मेरे बालों में अपनी उँगलियाँ फँसाकर कस लेतीं, तो कभी अपनी टाँगों को और चौड़ा कर देतीं ताकि मैं उनके इस हिस्से पर पूरी तरह से हावी हो सकूँ। एक पल के लिए मेरे दिल में एक अजीब सा झटका लगा और मैंने खुद से पूछा, मैं कैसा भाई हूँ जो अपनी ही बहन की चुत चाटने का ऐसा गंदा और हवस भरा शौक पाल बैठा हूँ?

मन के किसी कोने में एक पल के लिए यह लगा कि मैं गलत कर रहा हूँ, लेकिन मेरा यह गिल्ट या पछतावे का ख्याल उस वक्त के जोश में टिक नहीं पाया। आशना दीदी की नशीली आहें, उनके बदन की महक और मेरे अंदर जल रही हवस ने उस सोच को पलभर में दबा दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मेरा दिमाग और मेरी जीभ दोनों ही इस बात पर अड़ गए थे कि अब सही-गलत सोचने का वक्त नहीं है; मुझे बस अपनी दीदी के बदन के इस खास और मजेदार हिस्से को पूरी तरह से चखना है। थोड़ी ही देर में मैंने अपने हाथ बढ़ाकर उनके भारी और हिलते हुए स्तन को अपनी हथेलियों में पकड़ लिया।

मेरे एक हाथ में उनके दूध जैसे गोरे और उभरे हुए स्तन दबे हुए थे, और दूसरे हाथ से मैं लगातार उनकी चुत पर अपने होंठों और जीभ से उन्हें और ज्यादा बेचैन किए जा रहा था। दीदी अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं, और उनके मुँह से सिसकियों और आहों के अलावा और कुछ नहीं निकल रहा था।

आशना दीदी की आँखें पूरी तरह बंद थीं और उनका शरीर मेरे हर एक छूने पर काँप रहा था। तभी उनकी सिसकियों और लंबी साँसों के बीच से उनकी काँपती हुई आवाज़ आई, “गोलू… तुम बहुत अच्छा कर रहे हो… आह… बस… मत रुको…” उनकी उस बात ने मेरे अंदर एक अजीब सी और तेज आग लगा दी।

इस वक्त मेरी जीभ उनकी गीली और हिलती हुई चुत के अंदर पूरी तरह गई हुई थी। मैं अपनी जीभ को ऊपर-नीचे और गोल-गोल घुमाकर उनकी नाजुक जगह को लगातार सहला रहा था। मेरी जीभ की हर हरकत पर उनकी चुत का अंदर का हिस्सा और कस जाता था, जिससे मुझे साफ महसूस होता था कि वो इस सब में पूरी तरह डूब चुकी हैं।

मेरा एक हाथ अभी भी उनके दूध जैसे गोरे, भारी और उभरे हुए स्तन को कसकर दबाए हुए था, जबकि मेरा अंगूठा उनके सख्त हो चुके निप्पल को हल्के-हल्के छू रहा था। मुँह से मैं उनकी चुत के रस को लगातार चूस रहा था, और मेरी गर्म साँसें सीधे उनकी जाँघों के बीच पड़ रही थीं।

जब उन्होंने कहा कि उन्हें यह बहुत अच्छा लग रहा है, तो मेरे दिल में एक अजीब सी और गहरी खुशी की लहर दौड़ गई। इस बात का एहसास कि मेरी अपनी सगी बहन मेरी जीभ के स्वाद और मेरे इस तरीके पर इतनी फिदा हो रही हैं, और बेझिझक मुझसे कह रही हैं कि मैं रुकूँ नहीं, इस बात ने मेरे अंदर के सारे डर को पूरी तरह मिटा दिया।

मुझे इस बात पर बहुत रोमांच हो रहा था कि मेरी जीभ उनकी चुत के अंदर हिल रही है और वो मेरे इस काम से पागल हुई जा रही हैं। मैंने अपनी रफ्तार और तेज कर दी, और अपनी जीभ को पूरी ताक़त के साथ उनके अंदर और गहराई से चलाने लगा।

मेरी रफ्तार तेज होते ही आशना दीदी के नरम शरीर में एक और जोरदार झटका लगा। उनकी कमर अपने आप हवा में उठ गई और उन्होंने बेकाबू होकर अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को कसकर अपनी भीगी हुई जाँघों के बीच दबा लिया, जैसे वो चाहती थीं कि मैं उनके और करीब आ जाऊँ।

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उनकी साँसें अब पूरी तरह उखड़ने लगी थीं, सीने का हर उभार तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था, और उनके मुँह से सिर्फ दबी हुई सिसकियाँ और आहें निकल रही थीं, “आह… गोलू… बस… अब और नहीं… ओफ्फ… मैं बस फटने वाली हूँ… जा रही हूँ…”

उनकी इन टूटी-फूटी, बेबस आवाज़ों और उनके काँपते हुए शरीर ने मेरे अंदर का जोश बहुत बढ़ा दिया। उनके शरीर का हर काँपता हुआ रोआँ मुझे और ज्यादा पागल कर रहा था। मैंने अपनी जीभ को और तेज, गहरा और बिना रुके चलाना शुरू कर दिया, लगातार उनके रस को अपने मुँह में खींचता और सहलाता रहा।

कुछ ही पलों में, आशना दीदी का पूरा बदन बिजली के तेज झटके की तरह जोर से काँप उठा। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं, मुँह आधा खुला का खुला रह गया और उनके अंदर से एक लंबी, गहरी आह निकली जो उस बंद कमरे की चुप्पी में गूँज उठी।

उनकी नरम चुत से निकलता हुआ सारा गाढ़ा रस मेरी जीभ, ठोड़ी और होठों पर फैल गया, और उनका गर्म, मुलायम पानी सीधे मेरे मुँह के अंदर बह निकला। वो चरम सुख के बाद कुछ पलों के लिए बिल्कुल सुन्न होकर मेरे बालों को कसकर पकड़े हुए बिस्तर पर बेजान सी लेट गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उनकी छाती अब भी तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी, साँसें बहुत भारी थीं और उनके पसीने से भीगे माथे पर बाल बिखरे हुए थे, जो उस पल में उन्हें और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे थे। कुछ देर तक लगातार चले इस पागलपन के बाद हम दोनों पूरी तरह से थक चुके थे और बेहोशी जैसी हालत में बिस्तर पर ही लेट गए।

कमरे में कुछ देर तक हम दोनों बिल्कुल चुप रहे। मैं अपनी तेज चलती साँसों को ठीक करने की कोशिश कर रहा था और दीदी भी कुछ देर तक आँखें बंद करके चुपचाप लेटी रहीं। मेरे मुँह में अभी भी दीदी की चुत का स्वाद और महक बसी हुई थी, जो बार-बार मुझे अभी-अभी हुए उस पल की याद दिला रही थी। “Muslim Didi Sexy Bur”

कुछ मिनटों तक इसी तरह चुप रहने और थकान कम होने के बाद, आशना दीदी की आँख खुली और उन्होंने बिना ज्यादा कुछ कहे जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए। उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए, बालों को संभाला और एक बार कमरे में चारों तरफ देखकर यह भी देख लिया कि उनकी कोई चीज़ वहाँ छूट तो नहीं गई।

मैंने भी उठकर बाथरूम में जाकर मुँह धोया, पानी पिया और खुद को संभालने की कोशिश की। इसके बाद हम दोनों उस होटल के कमरे से बाहर निकले और चुपचाप लिफ्ट से नीचे आकर अपनी कार में बैठ गए। होटल से बाहर निकलते वक्त हम दोनों ने ज्यादा बात नहीं की।

घर जाने से पहले हमें एक बार फिर उसी मैरिज हॉल जाना था, क्योंकि दीदी को वहाँ वापस जाकर अपनी सहेली को कमरे की चाबी देनी थी। रास्ते में कार के अंदर ही दीदी ने अपने कपड़े बदलने की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने अपने शादी वाले कपड़े उतारकर वापस घर वाले कपड़े पहने और उनके ऊपर बुर्का पहन लिया, ताकि मैरिज हॉल से बाहर निकलते समय उन्हें कोई पहचान न सके और सब कुछ ठीक लगे।

कपड़े बदलने के बाद उन्होंने अपना चेहरा भी बुर्के से ठीक तरह ढक लिया और अपना सामान संभालकर बैठ गईं। जब हम मैरिज हॉल पहुँचे, तो मैंने कार थोड़ी दूर रोक दी ताकि किसी की नजर हम दोनों पर न पड़े। दीदी ने एक बार बाहर देखा और फिर बुर्के में अपना चेहरा ठीक से ढककर कार से नीचे उतर गईं।

वह अकेले ही अंदर चली गईं और सीधे अपनी सहेली के पास पहुँचीं। उन्होंने चुपके से कमरे की चाबी अपनी सहेली को वापस दे दी और वहाँ ज्यादा देर रुके बिना वापस बाहर आ गईं। कुछ देर बाद वह वापस कार में आकर बैठ गईं। उनके बैठते ही मैंने कार स्टार्ट कर दी और हम सीधे अपने घर की तरफ निकल गए।

अब हमारा पूरा ध्यान सिर्फ समय पर घर पहुँचने पर था, क्योंकि अब्बू के वापस आने का समय करीब आ रहा था। रास्ते में हम दोनों काफी चुप रहे। मैं बार-बार घड़ी देख रहा था और मन ही मन हिसाब लगा रहा था कि घर पहुँचने में कितना वक्त लगेगा। “Muslim Didi Sexy Bur”

दीदी भी खिड़की के बाहर देखते हुए चुपचाप बैठी थीं। जैसे-जैसे हमारा घर वाला इलाका पास आने लगा, मैंने कार की रफ्तार कम कर दी। आखिरकार हम अपने घर के पास पहुँच गए। मैंने कार वहीं खड़ी की, हम दोनों नीचे उतरे और घर की तरफ ऐसे चल पड़े जैसे हम पूरे दिन सिर्फ मार्केट के काम से ही बाहर गए थे।

घर पहुँचते ही हमने राहत की साँस ली। अब्बू के आने से ठीक पहले हम दोनों घर के अंदर आ चुके थे। कार से उतरने के बाद हमने एक-दूसरे की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सीधे घर के अंदर चले गए। दीदी बिना किसी फालतू बात के सीधे अपने कमरे में चली गईं और मैं भी चुपचाप अपने कमरे में आ गया।

मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और कुछ देर वहीं बैठा रहा। बाहर से देखने पर सब कुछ बिल्कुल ठीक लग रहा था, लेकिन मेरे दिमाग में अभी भी दिनभर की सारी बातें चल रही थीं। इसके कुछ ही मिनट बाद अब्बू भी घर लौट आए। उनके घर आते ही मैं अपने कमरे में ही चुप रहा और ऐसा बर्ताव करता रहा जैसे दिनभर कुछ खास हुआ ही न हो।

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घर का माहौल भी ऐसा था कि किसी को दूर-दूर तक कोई शक नहीं हो सकता था। जब तक रात का खाना तैयार नहीं हुआ, मैं अपने कमरे से बाहर नहीं निकला। मैं बार-बार यही सोच रहा था कि नीचे जाने पर दीदी का सामना कैसे करूँगा और क्या हम दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से बात कर पाएँगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

लेकिन कुछ देर बाद डिनर का वक्त हो गया, इसलिए मैं भी नीचे हॉल में चला गया। वहाँ बाकी लोग पहले से ही डाइनिंग टेबल के पास अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठे हुए थे। मैं हमेशा की तरह आशना दीदी के पास वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गया और सबके साथ डिनर शुरू कर दिया।

बाहर से देखने पर उस टेबल पर सब कुछ बिल्कुल आम लग रहा था। घर के बाकी लोग आपस में बातें कर रहे थे और अपने-अपने खाने में लगे हुए थे। लेकिन मेरे और आशना दीदी के बीच की चुप्पी कुछ और ही बता रही थी। होटल के कमरे में जो कुछ भी हुआ था, उसका असर अभी भी हमारे दिमाग में था। “Muslim Didi Sexy Bur”

हम दोनों एक-दूसरे की तरफ देखने से बच रहे थे। कभी मैं उनकी तरफ देखने की कोशिश करता, तो वह तुरंत अपनी नजरें खाने की प्लेट पर कर लेतीं। वह भी मेरी तरफ सीधे देखने से बच रही थीं। हम दोनों के पास एक-दूसरे से कहने के लिए बहुत कुछ था, लेकिन परिवार के सामने कुछ भी बोलना मुमकिन नहीं था।

इसलिए हम चुपचाप अपनी-अपनी प्लेट में खाना खाते रहे और ऐसे दिखाने की कोशिश करते रहे जैसे हमारे बीच कुछ हुआ ही नहीं था। डाइनिंग टेबल पर मेरा मन बार-बार आशना दीदी से कुछ बात करने का हो रहा था, लेकिन शर्म और अजीब सी झिझक की वजह से मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि बात शुरू कैसे करूँ।

इसी सोच में मैं चुपचाप बैठा रहा। डिनर खत्म होने के बाद मैं बिना किसी से ज्यादा बात किए सीधे अपने कमरे में चला गया और सोने की कोशिश करने लगा। लेकिन नींद मेरी आँखों से बहुत दूर थी। मेरे मुँह में अब भी दीदी की चुत का वह स्वाद साफ महसूस हो रहा था।

बिस्तर पर लेटे-लेटे दिमाग में वही सब घूम रहा था, कैसे मैंने उनके नरम दूध जैसे स्तनों को दबाया था, कैसे वे मजे से कसकर आहें भर रही थीं, और कैसे मैंने अपने होंठों से उनकी गीली चुत को छुआ था। इन यादों और ख्यालों से ही मेरे अंदर हवस की आग फिर से भड़क उठी और मेरा बदन सुलगने लगा।

आधी रात होने वाली थी, और मैं किसी तरह अपने दिमाग को उस बात से हटाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ और सिर्फ मेरी दीदी और वही पुराने पल घूम रहे थे। मैं खुद को और ज्यादा नहीं रोक पाया; मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं सीधा उठकर दीदी के कमरे के दरवाज़े पर जा पहुँचा और धीरे से दरवाज़ा खटखटाया। “Muslim Didi Sexy Bur”

कुछ ही मिनटों बाद दीदी ने दरवाज़ा खोला और हैरानी से पूछा, ” गोलू? इस वक्त यहाँ क्या कर रहे हो? ” मैंने बिना एक भी शब्द बोले, सीधे उनके कमरे के अंदर कदम रखा और पीछे से दरवाज़ा बंद करके लॉक कर दिया। दीदी बिस्तर के पास ही खड़ी थीं और हैरानी और उलझन भरी नज़रों से मेरा चेहरा देखने लगीं।

मेरे पास कहने के लिए कोई बना-बनाया बहाना या लंबी बात नहीं थी। मेरे सीने के अंदर उठती हवस की आग और दिल की बेचैनी से मेरा दम घुट रहा था। मैं बिना एक पल गँवाए सीधे उनके करीब गया और उनकी आँखों में देखते हुए सीधे कह दिया, “दीदी…क्या मैं आपको चोद सकता हूँ? “

मेरी बात इतनी अचानक और सीधे मुँह से निकली थी कि आशना दीदी एकदम चुप रह गईं। वह बुरी तरह चौंक गईं, क्योंकि इस तरह खुलकर और बिना किसी झिझक के बात करने की हिम्मत मैंने उनसे पहले कभी नहीं की थी। इससे पहले तो मुझसे आँखें मिलाकर बात करने की भी हिम्मत नहीं होती थी, लेकिन वह दिन अलग था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

क्योंकि मैंने उन्हें इतना करीब से पहली बार पूरी तरह बिना कपड़ों के देखा था, उनके बदन को अपनी उँगलियों से छुआ था और अपनी जीभ से उनके सबसे निजी हिस्से को चखा था। उस एक दिन ने मेरे अंदर का सारा डर और झिझक मिटा दी थी, और इसी पागलपन की वजह से आज मेरे अंदर इतनी हिम्मत आ गई थी कि मैं उनसे इतनी सीधे तरीके से बात कर रहा मेरी बात सुनकर एक पल के लिए दीदी को समझ ही नहीं आया कि वह इस पर क्या जवाब दें।

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फिर लगभग गुस्से में फुसफुसाते हुए उन्होंने कहा, “पागल मत बनो गोलू, ऐसी गंदी बातें मुँह से मत निकालो! आज शादी में जाने के लिए तुमने मेरी मदद की और इसके बदले में मैंने में तुम्हें बस एक बार छूट दे दी थी… इसका मतलब यह नहीं कि तुम सिर पर ही चढ़ जाओगे। अब यह सब पागलपन बंद करो और चुपचाप अपने कमरे में जाओ!”

दीदी के मुँह से यह बात सुनते ही मेरा दिल जैसे टुकड़ों में बिखर गया। मुझे लगा था कि हमारे बीच सब कुछ बदल गया है और मैं उनके साथ अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता हूँ। लेकिन उनके इस तरह मना करने पर मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं कैसे रिएक्ट करूँ। “Muslim Didi Sexy Bur”

मेरा दिल टूट गया और मैं बिना कुछ कहे वापस अपने कमरे में आ गया। बिस्तर पर चुपचाप बैठकर मैं यही सोच रहा था कि अब ऐसा क्या करूँ जिससे मुझे अपनी बहन के साथ दोबारा वो सब करने का मौका मिल सके। मैं इसी बेचैनी में डूबा हुआ था कि तभी कुछ मिनट बाद मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और आशना दीदी चुपचाप अंदर आ गईं।

मैंने बिना कुछ कहे बस चुपचाप उनका चेहरा देखा। कुछ पल तक कमरे में चुप्पी रही। फिर उन्होंने खुद ही बात शुरू की, “गोलू… मैं जानती हूँ कि तुमने मेरी डायरी पढ़ ली है। उसमें मैंने अपनी कुछ ऐसी बातें और ख्वाहिशें लिखी हैं, जिन्हें मैं अपनी शादी से पहले पूरा करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी उन ख्वाहिशों को पूरा करने में मेरी मदद करो। अगर तुम मेरे लिए इतना करोगे, तो मैं भी तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करूँगी।”

उनकी यह बात सुनकर मैं उलझन में पड़ गया और उनके चेहरे की तरफ देखते हुए कहा, “दीदी, मैं समझा नहीं… आप क्या कहना चाहती हैं?” दीदी ने एक लंबी और गहरी साँस ली, जैसे वह अपने दिल में रखी कोई बहुत बड़ी बात बताने वाली हों।

फिर उन्होंने धीरे से कहा, “गोलू… मैं आम लड़कियों की तरह अपनी ज़िंदगी जीना चाहती हूँ। मैं बाहर छोटे कपड़े पहनना चाहती हूँ, रात में देर तक गाड़ी चलाना चाहती हूँ, शराब चखना चाहती हूँ और किसी पार्टी में खुलकर नाचना चाहती हूँ। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो मैं करना चाहती हूँ। और अगर तुम इन सब में मेरी मदद करोगे, तो इसके बदले मैं भी तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करूँगी। जब भी मेरी कोई एक ख्वाहिश पूरी होगी, मैं तुम्हारी भी एक पसंद पूरी करूँगी। चाहे तुम्हारा लंड चूसना हो या तुम्हें अपने बुब्स दबाने की पूरी छूट देना हो, तुम जो चाहोगे, मैं दूँगी।”

दीदी की यह बात सुनकर मेरी साँसें जैसे मेरे सीने में ही अटक गईं। अभी कुछ मिनट पहले ही तो वह मुझे अपने करीब आने से मना कर रही थीं और मुझसे दूर रहने को कह रही थीं, लेकिन अब अचानक वह मेरे सामने इतनी खुली बात रख रही थीं। “Muslim Didi Sexy Bur”

मैंने भरोसा न होने वाली नजरों से उनकी तरफ देखते हुए कहा, “दीदी… आप मुझसे झूठ बोल रही हैं, ऐसा थोड़ी हो सकता है… आप मेरे साथ ऐसा क्यों करेंगी?” मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर बस एक हल्की सी मुस्कान आई। उन्होंने एक पल की भी देरी किए बिना अपने हाथ अपनी नाइटी के बटन्स पर रख दिए।

उनकी उँगलियों ने एक-एक करके सारे बटन नीचे तक खोल दिए और उस नाइटी को कंधों से नीचे सरकाकर ज़मीन पर गिरा दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ अपने रात के पतले इनरवियर में थीं। कमरे की हल्की रोशनी में उनके जिस्म का एक-एक हिस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

लेकिन इसके बाद दीदी ने रुकने का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने अपनी ब्रा की स्ट्रिप्स को कंधों से नीचे खिसकाया और उसे उतारकर फेंक दिया। उनके बड़े, भारी और गोल स्तन अब पूरी तरह सामने थे। उनके दोनों स्तन काफी बड़े और भारी थे, जिनका गोरापन और वजन साफ दिख रहा था और उनके ऊपर बने गहरे भूरे रंग के निप्पल बिल्कुल कड़े और उठे हुए थे, जो हल्की रोशनी में चमक रहे थे।

इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपनी पैंटी को भी पैरों से नीचे सरकाकर पूरी तरह उतार दिया और अब वह मेरे सामने बिल्कुल बिना कपड़ों के खड़ी थीं। उनकी टाँगों के बीच उनकी मलाईदार और चिकनी जाँघों के ठीक ऊपर उनकी चुत पूरी तरह खुली हुई थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उनकी चुत के होंठ थोड़े उभरे हुए और गुलाबी थे, जिन पर हल्की सी नमी चमक रही थी और बीच की चीर साफ दिखाई दे रही थी। बिना एक भी शब्द बोले, दीदी ने तुरंत अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन के पीछे डाले और मुझे खींचकर अपने एकदम साथ चिपका लिया। “Muslim Didi Sexy Bur”

उनके खुले हुए भारी स्तन सीधे मेरे सीने से कसकर लग गए। उनके जिस्म की तेज खुशबू और उनकी गर्म साँसें मेरे चेहरे पर पड़ने लगीं। मेरे हाथ खुद-ब-खुद उनकी चिकनी कमर और बिना कपड़ों वाली पीठ पर फिसलने लगे और मैंने बिना किसी झिझक के उनके पूरे जिस्म को अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया।

दीदी के खुले हुए और भारी स्तन सीधे मेरे सीने पर बुरी तरह से दब रहे थे। उनके बिना कपड़ों वाले जिस्म की गर्मी और उनके बदन की तेज खुशबू सीधे मेरे अंदर उतर रही थी। उसी हालत में उन्होंने बहुत ही धीमी और दबी हुई आवाज़ में पूछा, “क्या अब भी तुम्हें मुझ पर यकीन नहीं आ रहा है?”

उनकी यह बात सुनकर मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो गया था। मेरे मुँह से कोई शब्द नहीं निकल पा रहा था, क्योंकि मेरे जिस्म की सारी ताकत और ध्यान सिर्फ इस बात पर था कि उनके बड़े स्तन मेरे सीने पर कसकर दब रहे थे और उनके निचले सदन से आने वाली उस हल्की और कामुक महक को मैं अपनी हर साँस के साथ महसूस कर रहा था।

खुद को संभाल न पाते हुए, मैंने काँपती हुई आवाज़ में उनके कान के पास कहा, “दीदी… मेरा लंड अब बहुत ज़्यादा सख्त हो चुका है… क्या आप इसके लिए कुछ कर सकती हैं?” दीदी ने बिना एक भी पल गंवाए अपनी बाँहें मेरे गले से हटाईं और सीधे मेरे ठीक सामने फर्श पर घुटनों के बल बैठ गईं। “Muslim Didi Sexy Bur”

कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : आंटी की नजर मेरे लंड पर बहुत दिनों से थी

उन्होंने बिना किसी झिझक के अपने दोनों हाथों से मेरे शॉट्स के किनारे पकड़े और उन्हें खींचकर नीचे पैरों तक उतार दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने मेरे अंडरवियर को भी पकड़ा और एक ही बार में नीचे सरकाकर पूरी तरह हटा दिया। अब मेरा पूरी तरह से अकड़ा हुआ, गर्म और भारी लंड एक झटके में पूरी तरह बाहर आ गया और उनके चेहरे के ठीक सामने हवा में लटकने लगा।

मेरे लंड की नीली और मोटी नसें उस पर साफ उभरी हुई थीं । यह जिंदगी में पहली बार था जब दीदी ने अपनी खुली आँखों से मेरे इतने सख्त लंड को इतने करीब से देखा था। वे कुछ सेकंड तक बिल्कुल बिना हिले, बिना पलकें झपकाए बस उसे देखती रहीं।

उनकी नाक से निकलती हुई गर्म और भारी साँसें सीधे मेरे लंड की नरम त्वचा पर पड़ रही थीं, जिससे मेरा पूरा शरीर सिहर उठा। दीदी ने एक बार धीरे से अपनी नजरें ऊपर उठाकर मेरी आँखों में देखा, और इसके बाद अपनी पलकें वापस झुकाकर अपने दाहिने हाथ को थोड़ा आगे बढ़ाया… For next part tell me golutales07@gmail.com

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