Hardcore Threesome Chudai Stroy
मेरा नाम मोना है। उम्र 32 साल, मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और झाँसी में रहती हूँ। मेरा फिगर 34-30-34 है – भरावदार सीने, पतली कमर और गोल-मटोल हिप्स जो मेरी टाइट ड्रेस में और भी उभर कर आते हैं। मेरी त्वचा गोरी-चिट्टी है, लंबे घने काले बाल कंधों तक लहराते हैं, और मेरी आँखें ऐसी हैं कि एक नज़र में मर्दों को मदहोश कर देती हैं। Hardcore Threesome Chudai Stroy
ये मेरी सच्ची कहानी है, पहली बार किसी के साथ शेयर कर रही हूँ। मेरे पति विदेश में नौकरी करते हैं, साल में मुश्किल से एक बार आते हैं। घर में सिर्फ मैं और मेरा 5 साल का बेटा। दिन भर घर के काम, बच्चे की देखभाल, लेकिन रातें… रातें बहुत लंबी, बहुत अकेली और तन की आग से भरी होती हैं।
नींद नहीं आती, बदन में एक अजीब सी बेचैनी रहती है। चादर के नीचे हाथ खुद-ब-खुद नीचे सरक जाता है, लेकिन वो सुकून कहाँ जो एक मर्द का गरम बदन दे सकता है। गर्मियों की छुट्टियाँ थीं, तो मैंने सोचा अपनी पुरानी सहेली संगीता के घर चली जाऊँ। संगीता भी मेरी तरह ही है – पति विदेश में, अकेली बच्चे और कभी-कभी सास के साथ।
उसकी सास उस समय तीर्थ यात्रा पर गई थीं, तो घर में सिर्फ वो और उसका बेटा। हम कॉलेज के दिनों से बेस्ट फ्रेंड्स हैं – वो दिन याद आते हैं तो हँसी छूट जाती है। शादी के बाद मुलाकातें कम हो गईं, लेकिन दिल से आज भी हम एक-दूसरे की सबसे करीब हैं। मैंने अपना छोटा सा बैग पैक किया और बस पकड़ ली।
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बस में भयंकर भीड़ थी। मैंने टाइट गुलाबी कुर्ती और सफेद सलवार पहनी थी, जो मेरे कर्व्स को अच्छे से हाइलाइट कर रही थी। मर्दों की नज़रें मेरे सीने पर, कमर पर, गांड पर टिकी हुई थीं। पीछे से एक अनजान आदमी बार-बार मुझे छू रहा था। उसका गरम बदन मेरी गांड से सटा हुआ था, और मुझे उसके लंड की हल्की-हल्की हरकत महसूस हो रही थी – वो धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा था।
पहले तो मैं शर्मा गई, दूर हटने की कोशिश की, लेकिन फिर… अंदर से एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई। कितने महीनों बाद किसी मर्द का स्पर्श महसूस कर रही थी। मैंने खुद को थोड़ा पीछे सरकाया, उसका लंड अब और साफ मेरी गांड की दरार में दब गया।
मेरी साँसें तेज हो गईं, चूत में हल्की सी नमी महसूस हुई। मैंने रोका नहीं, आँखें बंद करके उस पल को जी लिया – बस की झूलती हरकत के साथ उसका लंड मेरी गांड पर रगड़ खा रहा था। जब मेरा स्टॉप आया तो मन किया और देर तक खड़ी रहूँ, लेकिन उतर गई।
संगीता के घर पहुँची तो शाम के सात बज रहे थे। उसने मुझे गले लगाया, दोनों खुश हो गए। बच्चों को खिलाया-पिलाया, खेलाया और फिर सुला दिया। अब सिर्फ हम दोनों। देर रात तक बातें करती रहीं – कॉलेज के दिन, पुरानी शरारतें, हँसी-मजाक। फिर बातें गहरी हो गईं।
मैंने उससे कहा, “संगीता, सच बता… कितने महीनों से कुछ हुआ ही नहीं। तन जल रहा है हर रात। नींद नहीं आती, बस बेचैनी रहती है।”
वो हँस पड़ी और बोली, “पागल, मैं भी तो ठीक वैसी ही हूँ! लेकिन मैंने तो इसका रास्ता निकाल लिया है।”
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उसने धीरे-धीरे मुझे बताया कि उसे दो बहुत अच्छे, भरोसेमंद मर्द पता हैं – दिनेश और मुकेश। दोनों हट्टे-कट्टे, जिम जाते हैं, बॉडी कमाल की, और लंड… वो तो ऐसे हैं कि एक बार लेने के बाद भूल नहीं सकतीं।
“मेरे रेगुलर हैं, कभी कोई प्रॉब्लम नहीं हुई। सेफ, क्लीन, और बहुत स्टैमिना। अगर तू चाहे तो आज ही बुला लूँ। दोनों साथ आएँगे, तेरी सारी प्यास बुझा देंगे।”
मैं पहले तो हिचकिचाई। पराए मर्दों के साथ? लेकिन अंदर से तन मचल रहा था। चूत में एक अजीब सी खुजली सी हो रही थी। मैंने शर्मा कर पूछा, “सेफ तो होंगे ना? कंडोम वगैरह?” संगीता ने मेरी आँखों में देखा, मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और बोली, “मोना, मुझ पर पूरा भरोसा रख। मैं भी तो साथ हूँ ना। तू बस हाँ कर दे।”
मैंने सोचा – इतने दिन हो गए, अब और नहीं सहन होता। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया और धीरे से कहा, “ठीक है… बुला ले।” संगीता की आँखें चमक उठीं। उसने फोन निकाला और कॉल कर दी। “आ जाओ दोनों, आज स्पेशल ट्रीट है।”
रात के दस बज रहे थे। हमने जल्दी से डिनर किया। बाहर ऑटो की आवाज़ आई। दरवाज़ा खोला तो दो साँड जैसे मर्द अंदर आए। दिनेश 30-32 का, चौड़ा सीना, मजबूत बाजू, गहरा रंग, लेकिन चेहरा बहुत हैंडसम। मुकेश 34-35 का, लंबा कद, मसल्स फट रही थीं, हल्की दाढ़ी, आँखों में शरारत। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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दोनों ने आते ही मुझे ऊपर से नीचे तक स्कैन किया – आँखों में साफ भूख दिख रही थी। हम चारों लिविंग रूम में सोफे पर बैठे। पहले तो नॉर्मल बातें – मौसम, ट्रैफिक, लेकिन जल्दी ही माहौल गरम हो गया। दिनेश और मुकेश आपस में धीरे-धीरे बात कर रहे थे, मुझे सुनाई दे रहा था – “यार, क्या माल है रे… ये बूब्स तो दबा-दबा कर लाल कर दूँगा। गांड तो फाड़ के रख देंगे।”
संगीता तो उनकी पुरानी थी, लेकिन मुझे देख कर दोनों पागल से हो रहे थे। दिनेश मेरे ठीक बगल में आकर बैठ गया। उसका गरम हाथ मेरी जांघ पर रखा, धीरे-धीरे ऊपर सरकाने लगा। मैंने रोका नहीं, बस आँखें नीची करके मुस्कुरा दी। मुकेश ने संगीता को गोद में उठा लिया और उसके होंठों पर किस करने लगा।
दिनेश ने मेरे कान में फुसफुसाया, “भाभी, तुम तो आग हो। आज तुम्हें स्वर्ग का मज़ा देंगे।”
मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी चौड़ी छाती पर हाथ फेर दिया। उसने मेरे होंठ अपने होंठों से दबा लिए। किस इतना गहरा, इतना जुनूनी कि मेरी साँसें रुक सी गईं। मैंने भी पूरा जवाब दिया – अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी, दोनों की जीभें लड़ने लगीं। उसका हाथ मेरी कुर्ती के अंदर घुस गया, ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा – इतनी जोर से कि मीठा दर्द हुआ।
फिर सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ। मैंने खुद अपनी कुर्ती ऊपर उठाई, दिनेश ने पीछे से हुक खोल कर ब्रा उतार दी। मेरे गुलाबी निप्पल्स बाहर आ गए – पहले से ही टाइट और सख्त। मुकेश ने मेरी सलवार का नाड़ा खींचा, पैंटी नीचे सरका दी। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी, हल्के-हल्के बाल थे जो इसे और भी सेक्सी बनाते थे। दिनेश मेरे बूब्स चूसने लगा. “Hardcore Threesome Chudai Stroy”
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एक निप्पल मुंह में लेकर जोर-जोर से चूस रहा था, दूसरा उंगलियों से मसल रहा था। मुकेश नीचे बैठ गया, मेरी टांगे चौड़ी कीं और चूत चाटने लगा। उसकी जीभ क्लिट पर घूम रही थी, कभी अंदर तक घुसा रहा था। पुछ-पुछ, चप-चप की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। मेरी आहें निकल रही थीं – “आह्ह्ह… उमम्म्म… हाँ… और अंदर…”
मैंने दिनेश का पैंट खोला और लंड बाहर निकाला – 8 इंच का मोटा, नसें फूली हुईं, सुपारा गुलाबी। मैंने खुद मुंह में लिया और चूसने लगी – गले तक, लार टपक रही थी। वो दोनों मेरे जिस्म पर पागल हो रहे थे, लेकिन मैं भी पूरी तरह उनके साथ थी – कमर ऊपर उठा कर चूत मुकेश के मुंह से और सटा रही थी।
दिनेश ने मुझे गोद में उठाया, अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैंने खुद उसका लंड पकड़ा और छेद पर सेट कर दिया। “डालो ना… अब और नहीं सहन होता,” मैंने धीरे से कहा। वो धीरे-धीरे अंदर घुसा – पूरा 8 इंच। “आह्ह्ह… कितना मोटा है…” मैं चीखी। मुकेश पीछे से आया, मेरी गांड पर थूक लगाई, पहले एक उंगली, फिर दो।
पहले थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने खुद कमर पीछे की और बोली, “धीरे से… लेकिन डालो।” उसका लंड – 7.5 इंच लेकिन और भी मोटा – धीरे-धीरे गांड में घुस गया। अब मैं बीच में थी – आगे चूत में दिनेश का लंड, पीछे गांड में मुकेश का। दोनों ने रिदम पकड़ा, पहले धीरे-धीरे फिर तेज़ स्पीड।
थप-थप, चप-चप की आवाज़ें, मेरी मदहोश चीखें – “आह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो मुझे… हाँ… दोनों साथ…” कभी मुझे घोड़ी बना कर चोदते, मेरे बाल पकड़ कर पीछे से धक्के मारते। कभी दीवार से सटा कर, मेरी एक टांग ऊपर उठा कर। कभी गोद में उछाल-उछाल कर। मेरे बूब्स लाल हो गए थे इतने मसलने-चूसने से, निप्पल्स सूज गए थे, लेकिन मज़ा अलग लेवल का था। “Hardcore Threesome Chudai Stroy”
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मैं तीन बार झड़ चुकी थी – पूरा बदन काँप रहा था, चूत से पानी की फव्वारे छूट रहे थे। आखिर करीब 35 मिनट बाद मुकेश ने मेरी गांड में गर्म वीर्य की धार छोड़ी – इतना गरम कि मुझे फिर से ऑर्गेज़म आ गया। फिर दिनेश ने चूत में सारा माल उड़ेल दिया। हम तीनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपक कर सोफे पर गिर पड़े। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर बाद मैंने खुद दोनों के लंड फिर मुंह में लिए, चूसे और हाथ से मुठ मारी। फिर उन्होंने संगीता को भी खूब चोदा – वो तो एक्सपर्ट थी, अलग-अलग पोज़ में ले रही थी। वो लोग करीब ढाई घंटे रुके, फिर चले गए। सुबह तक मैं बिस्तर पर पड़ी रही – चूत और गांड में मीठा-मीठा दर्द, लेकिन दिल और तन दोनों पूरी तरह तृप्त। कितने दिनों बाद ऐसा सुकून मिला था।
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