Land Lady Chudai Story
मैं विकास एक 21 वर्ष का लड़का हूँ, आप लोगों को अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। पिछले साल से ही मैं दिल्ली में एक कनाडा वाले भैया के घर में किराये पर रहता हूँ। कनाडा वाले भैया साल में करीब 10 महीने घर पर नहीं रहते, उनकी नई-नवेली दुल्हन बेचारी अकेली ही एक नौकरानी के साथ रहती है। Land Lady Chudai Story
मैं जब यहाँ आया तो दिसम्बर का महीना था। एक तो मैं पहली बार घर से दूर रहने आया था और ऊपर से दिसम्बर में मेरा जन्मदिन होता है.. तो मुझे घर वालों की काफी याद आ रही थी। इस शहर में नए दोस्तों के अलावा जान-पहचान का कोई न था। यहाँ शिफ्ट होते ही मैंने पाया कि दिल्ली के लोगों की बोलने की टोन थोड़ी अलग है।
मैं ठहरा बिहार का लड़का… थोड़ा अजीब तो लग रहा था.. पर क्या करता। दिन भर पढ़ाई और दोस्तों के बीच ही बीत जाता था। किराए इस घर में सिर्फ रात में सोने जाया करता था और अगली सुबह 10:30 बजे घर से निकल भी जाता था। मेरे वहाँ पहुँचने के दो दिनों बाद कनाडा वाले भैया कनाडा पर चले गए।
अगले महीने जब मैं रेंट देने गया तो उनकी बीवी सोनिया आई। उसका नाम सुन के ही दिल में कुछ कुछ होने लगता है। गोरा रंग.. पतली कमर.. दुपट्टा कर रखा था.. इसलिए वक्ष का पता नहीं चल रहा था कि कैसे थे.. पर पूरा बदन एकदम मस्त था। मैंने सोचा कि वक्ष भी ज़रूर मस्त ही होंगे।
वो किराए के पैसों का हिसाब एक डायरी में रखती हैं। तो उन्होंने डायरी निकाली और मुझे दे दी। उन्होंने मुझसे कहा- तुम ही इसमें नोट लिख दो। मैंने भी लिख दिया.. पर सिग्नेचर तो उनको ही करना था। सिग्नेचर करते वक्त उनका दुपट्टा धीरे-धीरे सरक कर नीचे गिर गया।
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उस पल में कमीज के पतले कपड़े के ऊपर से उसके दोनों स्तनों की गहरी गोलाई साफ नजर आ गई। गुलाबी निप्पल्स हल्के से उभरे हुए थे और कपड़े पर दो छोटे-छोटे उभार साफ दिख रहे थे। स्तनों की नरम, भरी-भरी बनावट देखकर मेरी सांसें रुक सी गईं।
मेरी नजरें वहीं ठहर गईं और लंड अपने आप सख्त होने लगा, पैंट के अंदर तनाव बढ़ने लगा। मैंने किसी तरह खुद को संभाला और नजरें हटाईं, लेकिन दिल की धड़कन तेज हो चुकी थी। उस दिन मैं सिर्फ यही सोचता रहा कि काश कोई गर्ल-फ्रेंड मिल जाती तो मज़ा आ जाता.. अकेलापन भी दूर हो जाता और मेरे लिंग की भी ज़रूरत पूरी हो जाती।
पर अपने को कहाँ इतना समय था। बाहर पढ़ने आया था.. लड़की पटाने नहीं। दिल में बस एक इच्छा थी.. सो क्या कर सकता था.. मन मसोस कर रह गया। फिर अगला महीना आया.. रेंट देने गया। इस बार फिर मैंने डायरी में सब कुछ नोट किया.. उसने सिग्नेचर किए। जैसे ही मैं जाने लगा.. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
सोनिया ने मुझे रोका- तुम करते क्या हो?
‘जी पढ़ता हूँ.. और थोड़ी मस्ती..’
‘कैसी मस्ती करते हो?’
‘बस कुछ दोस्त हैं उन्हीं के साथ..’
‘कोई गर्ल फ्रेंड?’
‘अभी तक तो नहीं..’
उसने कहा- मुझे देखो शादी हो गई फिर भी अकेली हूँ। मेरे लिए भी यह शहर नया है.. दिल नहीं लगता।
मेरा मन तो कर रहा था कि बोल दूँ कि एक बार बोल तो जान.. सारा दिन तेरे साथ बिताऊँगा।
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उसने कहा- मुझसे दोस्ती करोगे? मैंने झट से ‘हाँ’ कर दी। फिर तो दिन पर दिन हमारी दोस्ती बढ़ती गई और हम अपनी बातें एक-दूसरे से शेयर करने लगे। एक दिन उसने मुझे बताया कि वो अभी तक वर्जिन है। मैं नहीं माना..
तो उसने बताया- सुहागरात को तुम्हारे भैया ने सेक्स के लिए बहुत कहा था पर मैं डर के मारे मानी ही नहीं थी, मेरी सहेलियों ने मुझे बहुत डरा रखा था कि खून निकलेगा, बहुत दर्द होगा, चीखें निकलेंगी। पर अब मुझे भी सेक्स की इच्छा होने लगी है, जो भी होगा देखा जाएगा।
मैंने बताया- आज तक मुझे भी उस सुख की प्राप्ति नहीं हुई है।
यह सुन कर मानो उसका चेहरा खिल उठा। उस रात मैं ठीक से सो नहीं पाया, उसके बदन को छूने की चाह बहुत तेज़ थी। उसके दो दिन बाद उसने नौकरानी से बोल कर मुझे अपने घर बुलवाया, नौकरानी चली गई। अब घर में हम दोनों अकेले थे। उसने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और अन्दर चली गई।
कुछ मिनट बाद वो वापिस आई तो एक पतली, हल्की नीली नाइटी में थी जो उसके शरीर से चिपकी हुई थी। नाइटी के नीचे कुछ नहीं था, इसलिए उसके निप्पल्स कपड़े पर साफ उभरे हुए दिख रहे थे और नीचे की तरफ उसकी चूत की हल्की आकृति भी झलक रही थी।
मैं हैरान हो गया.. मैंने सोचा कि यह आज क्या करने वाली है। वो धीरे-धीरे मेरे पास आई, मेरे सामने खड़ी होकर मेरी आँखों में देखती रही। फिर उसने मेरे गाल पर हाथ रखा, धीरे से झुककर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो हल्का-सा चुंबन था, सिर्फ होंठों का स्पर्श।
फिर उसने धीरे-धीरे होंठ खोले और जीभ से मेरे होंठों को सहलाया। मैंने भी जवाब दिया, अपनी जीभ उसके मुंह में डाली और हम दोनों गहरे चुंबन में खो गए। उसके होंठ नरम, गर्म और मीठे थे। हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं, कभी लिपट रही थीं, कभी चूस रही थीं। चुंबन के दौरान उसकी सांसें तेज हो गईं और वो मेरे सीने से चिपक गई।
मैंने धक्का देकर उसे हटाया तो उसने कहा- मैं पागल हो चुकी हूँ सेक्स के लिए.. ब्लू फ़िमें देख देख कर मेरा दिमाग खराब हो गया है और तुम्हारे अलावा कोई मुझे यह सुख नहीं दे सकता। मैंने भी सोचा कि आज तो इसे पूरा मजा देकर ही रहूँगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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मैंने अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट और अंडरवियर भी निकाल दिया। मेरा लंड पहले से ही सख्त था, सिरा चमक रहा था और हल्का-सा तरल निकल रहा था। मैंने उसे हाथ पकड़कर बेडरूम में ले जाया और बिस्तर पर बैठा दिया। फिर मैंने उसकी नाइटी के कंधों से पट्टियाँ धीरे-धीरे नीचे सरकाईं।
नाइटी धीरे-धीरे नीचे सरकी और उसके नंगे बदन का नजारा सामने आ गया। उसके गोरे स्तन भरे हुए थे, निप्पल्स गुलाबी और सख्त। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को सहलाया, हल्के से दबाया। वो सिहर उठी। फिर मैंने एक निप्पल को मुंह में लिया, जीभ से घुमाया, चूसा और हल्के से दांतों से काटा।
वो कराहने लगी, “आह्ह.. विकास..” दूसरा स्तन भी मैंने वैसा ही किया। उसके निप्पल्स और सख्त हो गए। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, उसकी टांगें धीरे से फैलाईं। उसकी चूत हल्की-सी गीली थी, होंठ फूले हुए और क्लिटोरिस छोटा-सा उभरा हुआ। मैंने पहले उंगलियों से उसके होंठों को सहलाया, फिर बीच वाली उंगली धीरे से अंदर डाली।
वो तंग थी, गर्म और नम। मैंने उंगली अंदर-बाहर की, फिर दो उंगलियाँ डालकर हल्के से हिलाई। वो कमर उठा-उठाकर सांस ले रही थी। फिर मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रखा। पहले मैंने बाहर से उसके नरम, फूले हुए होंठों को हल्के से चूमा, होंठों पर होंठ रखकर धीरे-धीरे चूसा।
उसकी चूत की गर्माहट और हल्की नमकीन खुशबू मेरे नाक में घुसी। फिर मैंने जीभ बाहर निकाली और क्लिटोरिस को बहुत हल्के से छुआ, सिर्फ टिप से टिप छूकर। वो पूरी तरह सिहर उठी, उसकी जांघें कांपने लगीं और एक छोटी सी आह निकली। मैंने जीभ को थोड़ा तेज किया।
अब जीभ से क्लिटोरिस को गोल-गोल घुमाने लगा, ऊपर-नीचे, बाएं-दाएं। कभी जीभ को सपाट करके पूरा क्लिटोरिस ढक लिया और चाटा, कभी नुकीला करके सिर्फ नोक से दबाया। साथ ही मैंने अपनी मध्यमा उंगली उसकी चूत के मुंह पर रखी, धीरे से अंदर सरकाई। वो बहुत तंग थी, लेकिन गीली होने की वजह से उंगली आसानी से अंदर चली गई।
मैंने उंगली को थोड़ा मुड़ा और G-स्पॉट की जगह ढूंढी – वो थोड़ा ऊपर की तरफ, खुरदरी सी जगह। वहां हल्के से दबाकर सहलाने लगा, छोटे-छोटे सर्कल बनाते हुए। उसकी सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं, छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। वो कराह रही थी, “आह.. हाँ.. ऐसे ही.. मत रुकना..”
उसकी चूत और ज्यादा गीली हो गई, रस मेरी उंगली पर बहने लगा और मेरे मुंह तक पहुंच गया। मैंने जीभ को पूरी तरह अंदर डाल दिया, जितना हो सके उतना गहराई में घुसाकर चाटा। फिर क्लिटोरिस को मुंह में लेकर हल्के से चूसा, जीभ से तेजी से फड़फड़ाया। “Land Lady Chudai Story”
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वो अब कांप रही थी, कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी, जांघें मेरे सिर को दबा रही थीं। अचानक उसका पूरा शरीर तन गया, चूत सिकुड़ने लगी, और वो जोर से किलकारी मारकर झड़ गई। गर्म रस मेरे मुंह में भर आया, मैंने सब चाट लिया। वो कुछ सेकंड कांपती रही, फिर धीरे-धीरे शांत होकर लेट गई, सांसें अभी भी तेज थीं।
उसके बाद उसने मेरे बाल पकड़े और मुझे ऊपर खींचा। अब वो मेरे लंड को हाथ में ले रही थी। पहले उसने हथेली से पूरा लंड सहलाया, सिरे से लेकर जड़ तक, हल्के-हल्के मसलते हुए। फिर उसने जीभ से सिरे पर लगा तरल चाटा, स्वाद लिया। उसके बाद लंड को मुंह में लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके गर्म, गीले मुंह ने मेरे लंड को पूरी तरह घेर लिया। वो धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी, जीभ से सिरे को गोल-गोल घुमाती हुई। कभी गले तक ले जाती, कभी सिर्फ सिरे को चूसती। मैंने उसके बालों में उंगलियां फंसाईं और हल्के से रिदम दिया, वो मेरे इशारे पर तेज हो गई। हाथ से जड़ को सहला रही थी, मुंह से चूस रही थी।
कुछ देर बाद मेरी सनसनी चरम पर पहुंच गई, लंड फड़कने लगा और मैंने उसके मुंह में ही गर्म-गर्म वीर्य छोड़ दिया। वो सब निगल गई, फिर जीभ से साफ करके मुझे देखकर मुस्कुराई। हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे, एक-दूसरे को चूमते, स्तनों को सहलाते, निप्पल्स को हल्के से दबाते।
मेरे लंड ने फिर से तनाव महसूस किया, वो भी अपनी चूत को मेरे हाथ पर रगड़कर गीली होने का एहसास करा रही थी। अब समय था असली काम का। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, उसकी टांगें चौड़ी करके फैलाईं और अपने कंधों पर रख लीं। अपना सख्त लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। “Land Lady Chudai Story”
वो सिहर गई, उसकी सांसें रुक-रुककर आने लगीं। मैंने बहुत धीरे से सिरा अंदर डाला। वो इतनी तंग थी कि मुझे हर इंच के लिए धैर्य रखना पड़ रहा था। मैं रुक-रुककर आगे बढ़ता रहा, उसे आदत पड़ने देता रहा। जैसे ही पूरा सिरा अंदर गया, उसने मुझे कसकर पकड़ लिया, नाखून पीठ में गड़ गए और मुंह से तेज चीख निकली, “आह्ह्ह.. दर्द हो रहा है..”
लेकिन उसकी आंखों में दर्द के साथ उत्सुकता और चाहत भी थी, वो मुझे रोक नहीं रही थी। मैंने धीरे-धीरे और अंदर धकेला। एक हल्के झटके में पूरा लंड अंदर चला गया, उसकी झिल्ली फट गई और थोड़ा गर्म खून मेरी जांघ पर लगा। वो दर्द से कराह रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी कराह में मजा मिलने लगा।
मैंने चोदना शुरू किया – पहले बहुत छोटे-छोटे धक्के, सिर्फ सिरा बाहर-भीतर। फिर धीरे-धीरे गहराई और गति बढ़ाई। उसकी चूत मेरे लंड को इतनी कसकर पकड़ रही थी कि हर धक्के में मजा दोगुना हो रहा था। दर्द कम होने पर वो भी कमर हिलाने लगी, मेरे धक्कों से ताल मिलाने लगी। “और जोर से.. तेज करो विकास..” वो फुसफुसा रही थी। “Land Lady Chudai Story”
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मैंने गति बढ़ाई, अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। हर धक्के पर उसकी चूत सिकुड़ रही थी, वो दो बार झड़ चुकी थी – हर बार चूत कसकर मेरे लंड को दबाती और रस छोड़ती। उसकी कसी हुई, गर्म चूत में लंड को इतना मजा आ रहा था कि मैं रुक नहीं पा रहा था। काफी देर तक हम ऐसे ही चुदाई करते रहे, पसीना छूट रहा था, सांसें तेज थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
आखिरकार मैं चरम पर पहुंचा। लंड तेजी से फड़कने लगा और मैंने गर्म वीर्य उसकी चूत की गहराई में छोड़ दिया। वो भी उसी पल तीसरी बार जोर से झड़ गई, उसका पूरा शरीर कांप उठा। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर, कांपते हुए लेट गए, सांसें धीमी होने लगीं। उसके बाद से हम आए दिन चुदाई करने लगे और मैं अक्सर उसके साथ ही सोने लगा। वो भी खुश रहती है और मैं भी मजा कर रहा हूँ। आज तक हम लोग कुल 79 बार चुदाई कर चुके हैं और यह सिलसिला अभी यूं ही जारी रहेगा।
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