Village Incest Chudai
दोस्तों ये मेरी जीवन की रियल कहानी है जो मैं बताने जा रहा हूं इसमें कोई मिलावट नहीं है। बात तब की है जब मैं 18 वर्ष के था और मेरी दीदी अंकिता 20 वर्ष की थी। दीदी की फिगर की बात करु तो उस वक्त मेरी दीदी अंकिता बेहद खूबसूरत और सेक्सी दिखती थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां और चौड़ी गान्ड थीं। हल्की मोटी भी थी।वो हमेशा सज संवर कर रहतीं थीं। Village Incest Chudai
दोस्तों.. गांव के बहुत लड़के मेरी दीदी की खूबसूरती पर फिदा थे हर कोई मेरी दीदी को पटाकर चोदना चाहता था। लेकिन मेरी नियत हमेशा दीदी की प्रति निष्ठावान रहता था कभी कभी मेरे अंदर भी गंदे ख्याल आते थे लेकिन मैं इग्नोर कर देता था। लेकिन वो दो वजहें जिसकी वजह से मुझे अपनी दीदी की चुत मारने को मिली।
पहली वजह तो मेरी उस वक्त की गरीबी बनी क्योंकि उसे वक्त मेरे पास एक ही कमरे थे वह भी मिट्टी से बना हुआ इस घर में एक ही बेड पर घर के सभी सदस्य 6 भाई बहन और एक मम्मी कुल 7 लोग किसी तरह एडजस्ट होकर सोते थे। दूसरी वजह मम्मी बनी जो दीदी को मेरे बगैर कहीं अकेले नहीं जाने देती थी.
जहां तक की दीदी बाथरूम करने खेतों में जाती थी तो भी मुझे साथ में भेज देती थी क्योंकि मेरी दीदी के पीछे कई लड़के पड़े थे। इसलिए मम्मी डरती थी की कोई मेरी बेटी को पकड़कर चोद न लें। और समाज में मेरी नाक ना कटवा दें। मम्मी की डर भी सही था उस वक्त गांव में सभी लोग बाथरूम के लिए खेतों में ही जाया करते थे.
तो गांव के दो चार लफंगे लड़कियों को रात के अंधेरे में पकड़कर चोद भी देता था जिसकी चर्चा हमेशा गांव में चली रहती थी। दोस्तों.. मैं हमेशा दीदी के साथ रहता था रात को भी एक ही बेड पर सोते थे। फिर भी मेरे लिए साफ़ रहती थी लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया हुआ यह की दीदी एक रोज बाथरूम के लिए निकलीं.
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तो मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिया तभी मेरी नज़र उसकी चौड़ी गान्ड पर पड़ी दीदी मटक मटक कर चल रही थी जिसे उसकी गांड लेफ्ट राइट हो रहा था और दीदी जो काले रंग की पैंटी पहनी थी वह भी दिख रहा था। यह सब देखकर मेरे अंदर वासना की आग भड़कने लगा और मैं दीदी को गंदी नजर से देखने लगा और मेरी चाहत भी बढ़ने लगा.
अब मेरे अंदर दीदी बुर चोदने की तलब बढ़ने लगा था और फिर डर भी लग रहा था दीदी बाथरूम के लिए खेतों के अंदर घुसी तो मैं भी झांककर देखने की कोशिश कर रहा था लेकिन दीदी खेतों के काफी अंदर घुस गई थी दिखाई नहीं देती थी तो मै सड़क पर ही खड़ा होकर दीदी की आने का इंतजार कर रहा था।
काफी देर बाद दीदी बाहर आई मैं दीदी को घर छोड़ दिया और दोबारा उसी जगह पर गया जहां पर दीदी ने बाथरूम की थी। देखा तो दीदी ने जहां बाथरूम के लिए बैठी थी वहां पर पेशाब के धार से जमीन में गड्ढे पड़ा हुआ था। फिर मैं इधर-उधर देखा तो जमीन पर छोटे-छोटे बोल पड़े हुए थे।
तभी मुझे शक होगा कि इसका मतलब दीदी ने आज अपनी झाट सफाई की है। तो सोचकर ही मेरा लन्ड खड़ा गया था फिर मैं और भी गौर से जमीन को देखने लगा तो मुझे मिट्टी के अंदर दबी हुई एक लिफाफे दिखाई पड़ी तो तो मैंने उसे बाहर निकाल लिया और खोल कर देखा तो मेरा होश उड़ गया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उस लिफाफे के अंदर एक सेक्सी एल्बम थी जिसमें लड़के लड़कियों की बिल्कुल नंगी तस्वीर छपा हुआ था को भी पेला पेली करते हुए। मैं पहली बार देख रहा था किसी लड़की को नंगी तस्वीर जो मैं पागल होने लगा था उसके बाद मै फिर से लिफाफे में हाथ डाला तो उसमें से एक रेजर ब्लेड और एक छोटी सी बैगन मिली।
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तो मैं समझ गया कि दीदी रोज सेक्सी एल्बम देखकर अपनी बुर में बैंगन घुसेड़ती है और हमेशा अपनी बुर की बाल साफ़ करके रखतीं हैं। और मैं मैं यह भी स्पष्ट समझ गया था कि दीदी को भी अपनी बुर में लन्ड डलवाने की चाहत है अगर मैं थोड़ी कोशिश करूंगा तो मान जाएगी।
हम दोनों में बस एक ही अर्चन था जो कि हम दोनों भाई बहन थे। तो उस अर्जन को दूर करने के लिए कल होकर मैंने एक सेक्सी कहानियां वाली एक किताब खरीद लाया जिसमें ज्यादातर भाई बहन की सेक्स स्टोरी लिखी थी और मैं चुपचाप उसी जगह पर रख दिया जहां पर दीदी हमेशा बाथरुम करतीं थीं उसकी लिफाफे में नहीं डाला नहीं तो दीदी को मेरे उपर ही सक करने लगतीं।
दोस्तों.. उसी दिन शाम को दीदी फिर से बाथरूम करने निकली तो मैं भी उसके साथ गया और चोरी छिपे देखने लगा कि दीदी को मेरे सेक्सी किताबें मिलीं की नहीं देखा तो दीदी को सेक्स स्टोरी की किताब मिल गई थी और पढ़ भी रही थी। दीदी मेरी उतनी पढ़ी लिखी नही थी लेकिन थोड़ी बहुत हिन्दी पढ़ लेती थी। “Village Incest Chudai”
जैसे मैंने देखा दीदी पढ़ रहीं हैं तो मैं बाहर निकल आया फिर दीदी की चुत मारने की और भी तरकीब ढूंढने लगा तो मेरे दिमाग में एक आइडिया आया कि क्यों न दीदी को मैं अपने मोटा और लम्बा लन्ड किसी बहाने से दिखा दु तो बात बन सकती है। मैं ये सब सोच ही रहा था कि दीदी बाहर आई और बोली चलो तो हम दोनों भाई बहन घर पर आ गया.
उस वक्त घर में कोई नहीं था तो मैंने कमरे में जाकर नंगें हो गया सिर्फ एक तौलिया लपेटकर सोने कि नाटक करने लगा और अपने मुंह पर दीदी की ही जालीदार चुनरी डाल लिया ताकि मेरे लन्ड देखकर दीदी जो भी रिएक्शन देंगी वो मैं भी देख सकूं।
दोस्तो.. थोड़ी देर बाद दीदी भी कमरे में आ गई जैसे आई वैसे ही उसकी नजर मेरे खड़े लन्ड पर पड़ी तो वो एकदम रुक गई और बड़े ही प्यासी निगाहों से निहारने लगी मैंने देखा दीदी की मुंह से लार टपकने लगीं थीं लेकिन डर भी रही थी कभी कभी गेट से बाहर भी झांकती थी कि कोई आ न जाए।
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करीब 10मिनट तक निहारतीं रहीं फिर हिम्मत करके दीदी ने मेरे लन्ड पर पड़ी तौलिया को हटा दिया तो दीदी मेरे मोटे लम्बे लन्ड को देखकर कांपने लगी मेरा लन्ड दीदी को देखकर और भी तनकर फुफकार रहा था। दीदी डरती डरती मेरे लन्ड अपनी हाथ में पकड़ने की कोशिश कर रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
लेकिन तभी मम्मी आ गई तो दीदी ने झट से मेरे उपर कम्बल डालकर बाहर निकल गई। दोस्तों.. करीब एक महीने तक लगातार हर तरह की कोशिश करके देख लिया लेकिन दीदी को चोद नहीं पाया मैं थक हार कर सबकुछ छोड़ दिया दीदी की चुत मारने की ख्याल भी मन से निकाल दिया था। “Village Incest Chudai”
मुझे दीदी से इस बारे में बात करने में बहुत ज्यादा डर भी लगता था। उसके बाद करीब दो महीने बाद एक रात वो हुआ जो मैं कभी सोचा नहीं था। दोस्तों… हुआ ये कि उस रात अचानक मुझे कुछ महसूस हुआ तो मेरी आंखें खुल गईं तो देखा दीदी अपनी पैरों से मेरे लन्ड को सहला रही थी और मेरे पैन्ट की बटन अपनी पैरों से ही खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन खुल नहीं रहा था.
तो मैंने खुद अपने पैंट की बटन खोलकर लन्ड को बाहर निकाल दिया तो दीदी ने मेरे नंगें लन्ड को सहलाने लगी थोड़ी देर बाद दीदी ने अपने पैर से मेरे पैर को भांपते हुए अपनी बुर के पास ले गयी मानों वो मुझे इशारा कर रही थी कि तुम भी मेरी बुर को सहलाओ तो मैंने भी अपने पैर से उसकी गर्म बुर जो भट्टी की जल रही थी उसे सहलाने लगा.
और महसूस किया कि दीदी बुर एक भी बाल नहीं थे और बहुत ही मुलायम बुर थी करीब 1 घंटे तक हम दोनों भाई बहन एक दूसरे की लन्ड बुर को सहलाने के बाद अब हम दोनों एक दूसरे को पाना चाह रहे थे। यानी अब दीदी अपनी बुर में मेरे लन्ड लेने के लिए व्याकुल हो उठी थी मैं भी दीदी को चोदने के व्याकुल हो गया था.
लेकिन बात नहीं बन पा रहा था क्योंकि बेंड पर और भी लोग सोये हुए थे और तो और मम्मी दीदी की बगल में लेटी हुई थी जो मुझे और दीदी दोनों को डर लग रहा था। इसलिए उस रात भी दीदी को चोद नहीं पाया। इसी तरह हर रोज रात को हम दोनों भाई बहन सिर्फ वासनाओं के आग में जलता ही रहता था बाकी कुछ नहीं होता था एक दुसरे को बोलने में डर भी लगता था। “Village Incest Chudai”
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लेकिन एक दिन मैंने शराब पी ली और नशें में मैंने दीदी से बोल दिया कि दीदी कब तक हम दोनों वासनाओं में जलेंगे चलों बाहर खेतों में एक दूसरे को जरुरत को पूरा करते हैं. तो दीदी बोली लेकिन तुझे शर्म नहीं आती कोई अपनी बहन को ऐसे बोलता है तो मैंने कहा कुछ नहीं है आजकल सभी अपने भाई बहन में सेक्स करते हैं.
फिर भी दीदी ने दो तीन बार मना कर दिया था लेकिन बाद में मान गई और बोली ठीक लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए तो मैंने दीदी मैं पागल हु जो दुनिया को बोलुंगा कि मैं अपनी दीदी को चोद रहा हूं। तो दीदी बोली अच्छा अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो तो मैंने बोला दीदी आप टेंशन मत लो मैं आपको दवा दिला दूंगा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
तो दीदी मान गई और मेरे साथ चल पड़ी मैं दीदी को लेकर खेतों की ओर चल पड़ा अपने ही सरसों वाली खेत में जो गांव से थोड़ी दूरी पर था वहां कोई नहीं जाता था मेरे लिए सबसे सेफ जगह था। दीदी खेत के पास पहुंचकर फिर से नाटक करने लगी थी बोल रही ये सब ठीक नहीं है भाई बहन में.
तो मैंने उसकी बाहें पकड़कर खिंचते हुए खेतों के अंदर ले गया और अपनी तोलिया खोलकर बिछा दिया उसके उपर दीदी को लेटाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा. थोड़ी देर में दीदी शान्त हो गई तो तसल्ली से उसकी एक-एक करके सारे कपड़े उतारकर हटा दिया मेरी दीदी बिना कपड़ों की और भी कयामत लग रही थी उसकी चिकनी बदन को देखकर मैं पागल होने लगा था.
जब दीदी पैन्टी और ब्रा में थी तो मन कर रहा था कि दीदी को नोचकर खा लूं। लेकिन दीदी बोली ठीक है भाई अगर करना ही है तो आराम से करो तो मैंने उसकी होंठों को चूसते हुए कहा दीदी तुम्हें चोदने के पिछले तीन महीनों से मैं बेताब हूं। तो दीदी बोली तो क्या हुआ अब मैं आ गई हूं तो मुझे मार ही डालेगा। “Village Incest Chudai”
तो मैंने कहा कुछ नहीं होगा तुम अब अपनी टांगें फैला दो तो दीदी ने अपने टांगें फैला दी और फिर बोली तेरे लन्ड बहुत बड़ी है तभी डर रही हूं। तो मैंने कहा दीदी एक बार थोड़ी सी दर्द होगी फिर तुम्हें भी मज़ा आने लगेगा तो दीदी बोली ठीक भाई धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी बुर में डाल दो मैं भी कयी महीने से लन्ड लेने के लिए तरफ रही थी।
तो मैंने उसकी बुर के छेद पर अपने लन्ड डाल दिया और एकदम जोर से धक्का मार दिया मेरे पुड़ी लन्ड दीदी की बुर को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया। तो दीदी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और छटपटाने लगी और गालियां देने लगी माधर्चोद बहन चोद तुने मेरी बुर फाड़ कर रख दिया। तो मैंने कहा बस दीदी अब हों गया।
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दीदी चिल्लाती रही और मैं उसकी दोनों चूचियों को पकड़कर पेलता रहा। पहली बार मैं थोड़ा जल्दी झड़ गया था लेकिन तब भी मेरा लन्ड खड़ा के खड़ा था तो मैंने दस मिनट बाद दोबारा से दीदी को चोदने लगा अब उसे भी मजा आने लगीं थीं अब दीदी अपनी गान्ड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर में अंदर तक ले रही थी.
और बोल रही थी भाई और जोर जोर से धक्का मारकर चोद मुझे बहुत मजा आ रही है तो मैंने उसकी कमर के नीचे कपड़े डालकर थोड़ा उपर उठा दिया और जोर जोर से धक्का मारकर दीदी को चोदने लगा ।दीदी आह उह उह ओह भाई करके अपने दोनों टांगों को उपर उठाकर चुद रही थी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
इस बार मैं दीदी को करीब 30 मिनट तक चोदा तब जाकर झड़ा उस दिन मैं दीदी को 5 बार जमकर चोदा फिर मेरा मन नहीं भरा लेकिन दीदी हाथ जोड़कर विनती करने लगी बोली भाई अब कल दुग्गी अभी मेरी बुर में जलन हो रही है तो मैंने दीदी को छोड़ दिया। दोस्तों अब अगले भाग में आपको बताउंगा कहानी बहुत लम्बी है क्योंकि 4 साल तक मैं अपनी दीदी को बीवी की तरह चोदा इस बिच मेरी दीदी मुझसे प्रेग्नेंट भी हो गई थी और एक बार में पकड़ा भी गया था.
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