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गर्लफ्रेंड ने सहेली और कजिन को भी चुदवाया

June 24, 2026 by crazy Leave a Comment

Free Group Chudai Kahani

यह मेरी सच्ची कहानी है। मेरी एक गर्लफ्रेंड हुआ करती थी काजल। वह बेहद खूबसूरत, आकर्षक और सेक्सी लड़की थी जिसके साथ मेरा रिश्ता बेहद गहरा और भावुक था। करीब छह साल पहले हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब थे और शादी करने की गंभीर सोच रखते थे। Free Group Chudai Kahani

हम रोज मिलने की कोशिश करते थे और सेक्स भी करीब रोज ही करते थे। उन दिनों हमारी शारीरिक भूख इतनी प्रबल थी कि हमने घर की बंद कमरों में जहां हवा भी गर्म हो जाती थी, गाड़ी की पिछली सीट पर जहां तंग जगह हमें और ज्यादा उत्तेजित करती थी.

शॉपिंग सेंटर की पार्किंग में जहां बाहर की भीड़ की आवाजें हमें छिपने का रोमांच देती थीं और जंगल की घनी छांव वाली सुनसान जगहों पर जहां प्रकृति की खुशबू हमारे पसीने में मिलकर एक अनोखा नशा पैदा करती थी, कई बार जोरदार और लंबे सेक्स सेशन्स का भरपूर आनंद लिया था।

हर बार काजल का गर्म और नरम शरीर मेरे हाथों में कांप उठता, उसकी तेज सांसें मेरे कानों में गूंजतीं, उसके होंठों की नमी और चूत की गीली गर्माहट मुझे पूरी तरह पागल बना देती थी। यह उस दिन की बात है जब काजल की एक चचेरी बहन और उसकी सहेली उसके घर रहने आई हुई थीं।

तीनों एक से बढ़कर एक बेहद सुंदर और यौवन से लबरेज थीं। उनकी चमकती त्वचा, आकर्षक आंखें, मादक मुस्कान और शरीर की आकर्षक बनावट देखकर किसी भी मर्द का दिल धड़क उठे बिना नहीं रह सकता था। कमरे में उनकी मौजूदगी से ही हवा में एक खास तरह की मादकता भर गई थी।

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काजल ने मुझे रात को करीब डेढ़ बजे फोन किया और बोली, “मिलने का मन कर रहा है!” उसकी आवाज में एक खास तरह की कामुकता और बेचैनी थी जो मेरे कानों में मीठी-मीठी लग रही थी और मेरे पूरे शरीर में तुरंत एक गर्म लहर दौड़ गई थी।

मैंने फटाफट अपनी गाड़ी निकाली और रात के अंधेरे और ठंडी हवा को चीरते हुए तेजी से उससे मिलने पहुंच गया। किसी तरह मैं उनके मोहल्ले वालों की सतर्क नजरों से बचकर उसके घर पहुंचा। दिल की धड़कन तेज थी और मन में काजल के साथ बिताने वाले पलों की ललक बढ़ रही थी।

वहां मैं उसकी चचेरी बहन नव्या से मिला जो मेरी काफी अच्छी दोस्त बन चुकी थी लेकिन उसकी सहेली अंशिका से पहली बार मिला। हमने फोन पर तो कई बार बात की थी पर मिले हम पहली बार थे। अंशिका के मम्मे उसकी उम्र के हिसाब से बहुत बड़े, भरे हुए और आकर्षक थे जो टी शर्ट के नीचे से साफ उभरकर दिख रहे थे और मेरी नजरें उन पर अटक गई थीं।

तीनों ने निक्कर और टी शर्ट पहनी थी और उन्हें देखते ही मुझे ठरक चढ़ गई। उनकी चिकनी टांगें, उभरी हुई छाती और हल्के कपड़ों में झलकता यौवन देखकर मेरे मन में गंदी और कामुक कल्पनाएं घूमने लगीं। पर मैंने सोचा कि मैं तो काजल के साथ गंभीर हूं, अगर हमारे संबंध गंभीर ना होते तो मैं आज इन तीनों को चोद देता।

हम लोगों ने थोड़ी देर बातें कीं और फिर नव्या और अंशिका के बॉयफ्रेंड का फोन आ गया। क्योंकि हमारे पास एक ही कमरा था तो हम सब बिस्तर पर बैठे हुए थे। हमने लाइट बंद की और कमरे में अंधेरा छा गया। सिर्फ बाहर की हल्की रोशनी का साया था। मैं और काजल लेटकर बातें करने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

थोड़ी देर में हमारी एक तरफ नव्या और दूसरी तरफ अंशिका आकर लेट गईं। अभी भी दोनों फोन पर ही थीं। मैं और काजल काफी पास लेटे हुए धीरे-धीरे बातें कर रहे थे। करीब तीन बजे मुझे लगा कि अंशिका और नव्या सो गई हैं तो मैंने मन में सोचा कि थोड़े मजे ले लिए जाएं।

कमरे में गहरा अंधेरा फैला हुआ था और सिर्फ बाहर से आती हल्की रोशनी की एक पतली किरण दीवार पर पड़ रही थी। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। उत्तेजना की लहर पूरे शरीर में दौड़ रही थी लेकिन साथ ही पकड़े जाने का डर भी था। लेटे-लेटे ही बिना काजल को कोई आभास होने दिए मैंने बहुत सावधानी से अपना दायां हाथ अंशिका की तरफ सरकाया।

मेरी उंगलियां धीरे से उसकी गोल और भरी हुई गांड पर रख दी गईं। निक्कर के पतले कपड़े के ऊपर से भी उसकी नरम मांसल गांड की गर्माहट और लचक मेरी हथेली को पूरी तरह महसूस हो रही थी। पांच-दस सेकंड बीत गए लेकिन अंशिका बिल्कुल नहीं हिली। उसकी सांसें एकदम नियमित और गहरी चल रही थीं।

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मैंने इसे हरे रंग का इशारा समझ लिया। अब मेरी हिम्मत बढ़ गई थी। मैंने धीरे-धीरे अपनी हथेली को उसके गांड के गोलाकार हिस्से पर फेरना शुरू कर दिया। मेरी उंगलियां उसके नितंबों की दरार के पास तक पहुंच गईं और फिर नीचे उसकी चिकनी रेशमी टांगों पर सरक गईं।

उसकी त्वचा इतनी मुलायम और गर्म थी कि मेरी उंगलियां खुद-ब-खुद फिसलती जा रही थीं। मेरे लंड में तनाव बढ़ता जा रहा था। तब भी अंशिका कुछ नहीं बोली। फिर मैंने सोचा कि क्यों न अपनी असली साली नव्या पर भी हाथ फेरा जाए। किसी तरह मैंने काजल से बचते-बचाते हुए उसकी दूसरी तरफ आ गया और नव्या की तरफ बिस्तर पर लेट गया।

अंधेरे में कुछ दिख तो नहीं रहा था और मैंने धीरे-धीरे हाथ नव्या की तरफ बढ़ाना शुरू किया। बिल्कुल पहले की तरह नींद की एक्टिंग करते हुए मैंने अपना हाथ नव्या के मम्मे से थोड़ा नीचे रख लिया। मेरा हाथ उसके पेट के ऊपरी हिस्से पर था लेकिन उसकी हर सांस के साथ हल्का-हल्का ऊपर-नीचे हो रहा था।

उसके बड़े भरे हुए मम्मों का निचला हिस्सा मेरी उंगलियों को बार-बार छू रहा था। मैंने एक झटके में हाथ हटाने के चक्कर में जानबूझकर उसके मम्मे से टकराता हुआ हाथ वापस अपने पास रख लिया। उसकी छाती की नरमाई और गर्मी मेरी हथेली पर अभी भी महसूस हो रही थी।

उसने भी कोई हरकत नहीं की। मैं समझ गया कि या तो दोनों मजे देने के चक्कर में हैं या फिर दोनों गहरी नींद में सो चुकी हैं क्योंकि उन तीनों ने रात की पार्टी में थोड़ी व्हिस्की पी हुई थी। मैंने उस समय ठान लिया कि आज तो दोनों से पूरे मजे लेने हैं वरना यह मौका पता नहीं दोबारा मिले या न मिले। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

तो मैंने फिर अच्छी तरह कभी नव्या तो कभी अंशिका पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। कभी मैं अंशिका की गांड और टांगों को सहलाता तो कभी नव्या के मम्मों और कमर पर उंगलियां फिराता। मेरी उंगलियां दोनों लड़कियों की नरम त्वचा की हर बनावट को महसूस कर रही थीं।

करीब दस मिनट तक यह सिलसिला चलता रहा। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा होकर निक्कर के अंदर तनाव महसूस कर रहा था। करीब दस मिनट के बाद अंशिका मेरी तरफ मुड़ी और मैं जैसे ही हाथ हटाने लगा उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी निक्कर के अंदर अपनी कच्छी में डाल दिया।

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उसकी कच्छी पहले से ही गर्म और थोड़ी नम थी। मेरी उंगलियां सीधे उसके मुलायम और गीले चूत के होंठों पर पहुंच गईं। मैं पागल हो गया। मैंने काजल की तरफ देखा तो वो मुझे देखकर मुस्कुराई। वो थोड़ी सी नशे में थी। मैंने सोचा कि अब होने दो जो होता है। देख लेंगे।

मैं उठा और मैंने अंशिका और काजल को जोर से चूमना शुरू कर दिया। मैं बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया। मेरा पूरा शरीर उत्तेजना से कांप रहा था। अंशिका की तरफ झुककर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया। मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर घुस गई और उसकी जीभ से उलझ गई।

उसकी नमी भरी जीभ का स्वाद मीठा और नशीला था। काजल को अपनी बाईं बांह से कसकर जकड़ लिया। मैंने उसकी गर्दन पर गहरे चुंबन दिए। उसके होंठों को चूसते हुए मेरे दांत हल्के से उसके निचले होंठ को काट रहे थे। दोनों लड़कियां एकदम मस्त हो रही थीं। उनकी सांसें तेज और गर्म हो गई थीं। “Free Group Chudai Kahani”

अंशिका की छाती मेरी छाती से सटकर ऊपर-नीचे हो रही थी। काजल की उंगलियां मेरी पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थीं। इतने में मेरे पीछे से मेरे ऊपर नव्या आकर लेट गई और बोली, “मेरे पास पहले क्यों नहीं आया तू सागर?” उसका गर्म शरीर मेरी पीठ पर पूरी तरह लेट गया।

उसके बड़े भरे हुए मम्मे मेरी पीठ पर दब रहे थे। उसकी नरम चूत मेरी कमर पर रगड़ खा रही थी। उसका गर्म सांस मेरे कान के पास महसूस हो रहा था। उसका इतना ही बोलना था कि मैं पीछे की ओर पलटा और मैंने नव्या के मम्मे दबाने शुरू कर दिए। उस दिन उन तीनों में से किसी ने ब्रा नहीं पहनी थी।

मैंने नव्या के दोनों मम्मों को दोनों हाथों से जोर से दबाया। मेरी उंगलियां उसके नरम और भारी मांस में धंस गईं। उसके स्तन की त्वचा गर्म और चिकनी थी। मैंने एक मम्मे को मुंह में ले लिया। मेरी जीभ उसके काले और सख्त हो चुके चुचुक को घेरकर चूसने लगी। नव्या की सांसें भारी हो गईं। वह हल्के-हल्के कराह रही थी।

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मैं तीनों के मम्मे दबाने और चूसने लगा। कभी अंशिका के मम्मों को चूसता तो कभी काजल के। तीनों लड़कियां मुझे पूरे शरीर पर चूमने लगीं। उनकी गर्म और नम जीभ मेरी गर्दन, छाती, पेट और जांघों पर फिर रही थी। उनके दांत हल्के-हल्के मेरी त्वचा को काट रहे थे। मेरा लंड जो बहुत देर से खड़ा था, अंशिका के हाथ में आ गया। उसने अपनी नरम हथेली से मेरे लंड को जकड़ लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।

मैंने तीनों को बोला, “अगर लंड देखना है तो तीनों अपने कपड़े उतारने दो मुझे!” मेरी आवाज में भूख साफ झलक रही थी।

तो वो तीनों मान गईं। मैंने एक-एक करके तीनों को चूमते हुए उनके कपड़े उतार दिए। पहले नव्या की टी-शर्ट ऊपर की। उसके बड़े मम्मे बाहर आ गए। फिर उसकी निक्कर नीचे सरकाई। उसकी चिकनी और गीली चूत पूरी तरह नंगी हो गई। फिर काजल की टी-शर्ट और निक्कर उतारी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उसकी परिचित चूत पर मेरी उंगलियां फिर गईं। आखिर में अंशिका को नंगा किया। उसके बड़े मम्मे और भारी गांड अब पूरी तरह मेरे सामने थे। अब तीनों मेरे सामने बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थीं। उनकी चमकती त्वचा, उभरी हुई छातियां, गीली चूतें और गोल गांड देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया। “Free Group Chudai Kahani”

मैंने बारी-बारी तीनों की योनि चाटी। पहले अंशिका की चूत पर मुंह रखा। मेरी जीभ उसके बाहरी होंठों को चाटती हुई अंदर घुस गई। उसका चूत का रस मीठा-खट्टा और गर्म था। अंशिका की जांघें कांप रही थीं। फिर काजल की चूत चाटी। उसकी परिचित खुशबू मुझे पागल कर रही थी।

आखिर में नव्या की चूत में जीभ घुसाई। तीनों की चूतों का रस मेरे मुंह पर लगा हुआ था। मैंने उन तीनों के पूरे शरीर पर हाथ फेरा। उनकी गर्दन, मम्मे, पेट, जांघें, गांड हर जगह उंगलियां फिराईं। अब तीनों बुरी तरह गरम हो चुकी थीं। उनकी सांसें फूल रही थीं। चेहरे पर कामुकता साफ दिख रही थी।

मैंने उनसे पूछा, “लंड देखना है?”

तो तीनों उठ खड़ी हुईं।

मैं बिस्तर पर बैठ गया और उनसे बोला, “मेरी निक्कर को बिना हाथ लगाए उतारो और देख लो मेरा लंड!”

तीनों तुरंत उठीं और मेरी निक्कर अपने दांतों से खींचने लगीं। नव्या ने दांत से मेरा कमर का बैंड पकड़ा। अंशिका और काजल ने दोनों तरफ से मदद की। उनकी गर्म सांसें मेरे लंड के पास महसूस हो रही थीं। मैं उन तीनों को देखकर और पागल हो रहा था, साथ ही तीनों के मम्मे, चूत और गांड पर हाथ फेर रहा था।

मेरी उंगलियां उनके गीले चूत के होंठों पर घूम रही थीं। इतने में मेरी निक्कर नीचे खींच ली उन्होंने। मेरा लंड पूरी ताकत से बाहर निकल आया। वह सख्त, लाल और नसों से फूला हुआ था। बस फिर क्या था – कोई लंड को चूम रही थी तो कोई मेरे अंडकोषों से खेल रही थी। “Free Group Chudai Kahani”

अंशिका ने सबसे पहले मेरा लंड मुंह में ले लिया। उसकी गर्म और नम जीभ मेरे लंड के सिरे को चाट रही थी। काजल ने मेरे अंडकोषों को मुंह में लिया और चूसने लगी। नव्या मेरी जांघों और पेट को चूम रही थी। फिर वे बारी-बारी बदलने लगीं। कभी नव्या लंड चूसती तो अंशिका अंडकोष चूसती।

तीनों ने मुझे बीच में लेटा कर खूब चूमा। उनकी जीभें मेरे पूरे शरीर पर नाच रही थीं। उनके मुंह से निकलती गीली आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। फिर जब मुझे से रहा न गया तो मैं बोला, “मैं झड़ने वाला हूं, तो जिसने चूसना है वह अपने मुंह में ले ले!”

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मेरा इतना बोलना था कि तीनों मेरे लंड के लिए लड़ने लग पड़ीं। अंशिका ने लंड मुंह में दबोच लिया। काजल और नव्या उसके साथ जुड़ गईं। तीनों की जीभें एक साथ मेरे लंड पर घूम रही थीं। उनके होंठ मेरे लंड के चारों तरफ फिसल रहे थे। वो समय मेरी जिंदगी में आज तक का सबसे मजेदार समय था। मैं तो अपने आप को भगवान मान रहा था।

फिर करीब पांच मिनट के बाद मैं झड़ गया। तीनों के होठों पर मेरा वीर्य लगा था! गर्म और गाढ़ा वीर्य उनके मुंह, होंठों और चेहरे पर छिटक गया। तीनों ने उसे चाटा और एक-दूसरे के मुंह से साफ किया। तब करीब पांच बज रहे थे और हम थक चुके थे। हम चारों उठे, रोशनी होने से पहले मैं फटाफट घर भागना चाहता था पर बाहर देखा तो काफी लोग सुबह की सैर के लिए निकल चुके थे।

पकड़े जाने के डर से मैं अगला पूरा दिन उन तीनों के साथ उसी एक कमरे में रहा। अगले दिन की कहानी सुनने के लिए थोड़ा सब्र करो! अब हम चारों की अलग-अलग शादी हो चुकी है पर मेरे पास अभी भी उनकी उस दिन की नंगी तस्वीरें हैं जो मैंने बहुत संभाल कर रखी हुई हैं।

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