Garam Chut Ki Mahak
मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती थी राजश्री… उसकी शादी से पहले उसकी चुदाई करने का मौका आसानी से मिल जाता था लेकिन शादी के बाद मुश्किल से ही कुछ हो पाता था। एक बार वो अपने मायके यानि मेरे पड़ोस में आई हुई थी, दिन में ही हमारी मुलाकात हो गई थी और उसे देखते ही मेरा पप्पू छलांगें मारने लगा था। Garam Chut Ki Mahak
उसकी आँखों में भी एक अजीब सी तड़प साफ दिखाई दे रही थी जिसे मैं अच्छी तरह पहचानता था। खैर दिन में हमने कुछ करने की कोशिश भी नहीं की क्योंकि सारा दिन वो अपने घर वालों और सहेलियों के साथ व्यस्त रहने वाली थी। जैसे तैसे दिन गुज़र गया और रात हो गई जिसका हम दोनों को बेसब्री से इंतज़ार था।
गर्मी की रात थी और सब लोग छत पर सो रहे थे लेकिन हम दोनों की आँखों से नींद कोसों दूर थी। उधर चूत सिसक रही थी और इधर लंड तड़प रहा था। रात को करीब बारह बजे तीन बार माचिस की तीली जलती देख मुझे उसकी तरफ से सिग्नल मिल गया जैसे वो शादी से पहले अक्सर देती थी।
मैं दबे पाँव उसके घर की तरफ चल दिया, उसके घर की एक तरफ की दीवार छोटी थी जिसे फांदकर जाना मेरी आदत हो गई थी। मैं उसकी दीवार कूदकर उसके घर में घुस गया। तब तक वो भी छत से नीचे आ चुकी थी। मिलते ही चुम्बन का दौर शुरू हो गया।
हम दोनों एक-दूसरे से चिपक गए थे जैसे कोई हमें अलग करने की कोशिश करे तो भी न छूटें। उसके होंठ मेरे होंठों से टकराए, नरम, गर्म और हल्के से काँपते हुए। मैंने उसके निचले होंठ को अपनी दांतों से हल्का सा दबाया, फिर जीभ से सहलाया। उसने तुरंत अपना मुँह खोला और अपनी जीभ मेरी जीभ से मिला दी।
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हमारी जीभें एक-दूसरे के चारों ओर लिपटने लगीं, चूसने-चुसवाने का खेल शुरू हो गया। उसके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी जो मेरे कानों में मधुर संगीत की तरह गूँज रही थी। मैंने उसके गालों को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे और गहराई से चूमने लगा, जैसे पूरा का पूरा उसे निगल जाना चाहता हूँ।
उसे चूमते हुए मैं उसे धीरे-धीरे कमरे की ओर ले गया। उसका शरीर मेरे शरीर से रगड़ खा रहा था, उसकी साँसें तेज और गर्म मेरे गले पर लग रही थीं। कमरे में पहुँचते ही मैंने उसे बिस्तर पर धीरे से लेकिन जोर से पटक दिया। वह पीठ के बल लेट गई, उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
कमरे में हल्की रोशनी में उसकी गुलाबी नाइटी बहुत सुन्दर लग रही थी, पतली सिल्क वाली, जो उसके शरीर से चिपकी हुई थी और उसके हर उभार को साफ-साफ उभार रही थी। मैंने बिना समय गँवाए उसकी नाइटी के किनारे पकड़े और एक झटके में उसे ऊपर की ओर खींच दिया। नाइटी उसके सिर से निकलकर फर्श पर गिर गई।
उसके नीचे कुछ भी नहीं था — न ब्रा, न पैंटी। उसकी नंगी देह मेरे सामने थी, गुलाबी निप्पल्स तने हुए, पेट पर हल्की सी चमकती पसीने की परत, और उसकी जांघों के बीच में चमकती हुई, गीली चूत जो पहले से ही तैयार थी। उसकी चूत की लिपियाँ सूजी हुई लग रही थीं, बीच में से चिकना रस धीरे-धीरे बह रहा था। लग रहा था जैसे उसकी जलती जवानी आज मुझे भी जलाकर रख देगी।
उसकी शादी के बाद हम आज पहली बार इस तरह से मिल रहे थे। मैंने भी फटाफट अपने कपड़े उतार फेंके — टी-शर्ट, पजामा, अंडरवियर सब फर्श पर जा गिरे। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा था, सिर लाल और चमकदार, नसें उभरी हुईं, और सुपारा पहले से ही रस टपक रहा था।
मैं उसके ऊपर झुका और सबसे पहले उसके पैरों से शुरू किया। मैंने उसके दाहिने पैर का अंगूठा अपने मुँह में लिया, जीभ से चाटा, फिर धीरे-धीरे पिंडली की तरफ बढ़ा। उसकी त्वचा गर्म थी, नरम थी, पसीने से हल्की नम थी। मैंने उसकी टाँगों को फैलाया और बीच में बैठ गया।
मेरे होंठ अब उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर पहुँच गए थे। मैंने वहाँ धीरे-धीरे चूमना शुरू किया, जीभ से गोल-गोल घुमाया, हल्का सा काटा। उसकी सिसकारियाँ तेज हो गईं, उसने अपने हाथ मेरे बालों में डाल दिए और हल्का सा खींचने लगी। फिर मैं ऊपर की ओर बढ़ा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके पेट पर जीभ फेरते हुए मैंने उसकी नाभि में जीभ डाल दी, गोल-गोल घुमाई। उसका पेट काँप रहा था। अब मेरे होंठ उसके बूब्स के पास थे। मैंने पहले बायें बूब को दोनों हाथों से पकड़ा, हल्का दबाया, फिर निप्पल को अपनी उँगलियों से मसला। निप्पल पहले से ही सख्त और उभरा हुआ था।
मैंने उसे अपने मुँह में लिया, जीभ से चाटा, फिर हल्का सा दाँतों से काटा। राजश्री ने जोर से सिसकारी भरी, उसकी पीठ मेहराब की तरह ऊपर उठ गई। मैंने दूसरे बूब पर भी वैसा ही किया, दोनों बूब्स को बारी-बारी चूसता रहा, दबाता रहा, निप्पल्स को अपनी जीभ से रगड़ता रहा।
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मैं उसे किस कर रहा था और वो सिसकारियाँ लेते हुए अपने आप में सिमटती जा रही थी। मेरे होंठ जैसे ही उसके होठों के पास आये, उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर चिपका दिए और चूसने लगी जैसे वो जन्म जन्म से प्यासी हो। मैंने अपने हाथों से उसके बूब्स को कस लिया और दबाने लगा। निप्पल मसलने का अपना अलग ही मज़ा है।
थोड़ी देर ऐसे ही हम दोनों एक दूसरे के होठों का रसपान करते रहे, फिर मैंने अपनी स्थिति को बदला और 69 की स्थिति में आते हुए अपना लंड उसके मुँह पर रख दिया और उसकी चूत के पास अपना मुँह लगा दिया।
मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाकर अपनी बाहों में पकड़ लिया और अपने चेहरे को उसकी जांघों के बीच में डुबो दिया। उसकी चूत पहले से ही पूरी तरह गीली थी, होंठ सूजे हुए और चमकते हुए, बीच की दरार से पारदर्शी रस की पतली धार निकल रही थी। मैंने सबसे पहले अपनी जीभ की नोक से उसके क्लिटोरिस को छुआ, हल्का सा स्पर्श किया।
राजश्री ने तुरंत सिहरकर अपनी कमर ऊपर उठा दी और एक लंबी सिसकारी ली। मैंने अपनी जीभ को सपाट करके उसके क्लिट पर गोल-गोल घुमाना शुरू किया, फिर नीचे की ओर सरकते हुए चूत की पूरी लंबाई पर जीभ फेरी। उसका रस मेरी जीभ पर फैल गया, नमकीन-मीठा स्वाद जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
मैंने अपनी जीभ को अंदर डालने की कोशिश की, पहले हल्के से, फिर गहराई तक। उसकी चूत की दीवारें गर्म और नरम थीं, मेरी जीभ के चारों ओर सिकुड़ रही थीं। मैंने तेजी से जीभ अंदर-बाहर करने लगा, साथ ही अपने अंगूठे से उसके क्लिट को रगड़ता रहा। उधर मेरा लंड उसके मुँह के ठीक सामने था, सुपारा पहले से ही रस से चमक रहा था। “Garam Chut Ki Mahak”
राजश्री ने दोनों हाथों से मेरे लंड को पकड़ा, एक हाथ से जड़ को मजबूती से थामा और दूसरे से सुपारे को सहलाया। फिर उसने अपना मुँह खोला और मेरे लंड को धीरे-धीरे अंदर लिया। उसके गर्म, गीले मुँह ने मेरे लंड को पूरी तरह लपेट लिया। उसकी जीभ सुपारे के नीचे की नस पर बार-बार फिसल रही थी, होंठों से कसकर चूस रही थी।
मैंने अपनी कमर हल्की-हल्की हिलानी शुरू की, उसके मुँह में धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। वो मेरे लंड को गले तक ले जा रही थी, फिर बाहर निकालकर सुपारे को चाट रही थी, कभी दांतों से हल्का सा काटती, कभी जीभ से घुमाती। हम दोनों एक-दूसरे के जननांगों को मुंह से चोद रहे थे, सिसकारियाँ और चाटने-चूसने की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।
मुझे भी आज बहुत दिनों के बाद ऐसा मज़ा आ रहा था। काफी देर तक वो मेरे और मैं उसके मुँह को चोदते रहे। मेरी जीभ अब उसके क्लिट पर तेजी से घूम रही थी, उँगली अंदर डालकर आगे-पीछे कर रहा था। तभी उसका शरीर अकड़ने लगा, उसकी जांघें मेरे सिर के चारों ओर कस गईं, कमर ऊपर उठी और उसने मेरे मुँह में अपने कामरस की धार छोड़ दी।
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गर्म, चिपचिपा रस मेरे मुँह में भर गया, कुछ कसैला सा स्वाद जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मैंने उसका रस पी लिया, जीभ से साफ करते हुए। उसी समय मेरा भी निकलने वाला था, लेकिन मैं रुक गया और लंड बाहर निकाल लिया। वापस उसके ऊपर आकर मैंने उसके बायें बूब को मुँह में डाल लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
निप्पल पहले से ही सख्त था, मैंने उसे होंठों से कसकर चूसा, जीभ से गोल-गोल घुमाया, हल्का सा दांतों से दबाया। साथ ही दाहिने बूब को हाथ से दबाने लगा, निप्पल को उँगलियों से मसलता रहा। उसके चूचुक को रगड़ने में बड़ा मज़ा आ रहा था। अब तक मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी थी। “Garam Chut Ki Mahak”
इतनी देर तक रगड़म रगड़ाई से उसकी चूत का बुरा हाल होने लगा था, अंदर से और गीली हो गई थी, दीवारें सिकुड़-फैल रही थीं। वो मेरा लंड पकड़ कर हिलाने लगी, सुपारे को सहलाती हुई और चूत में डालने का इशारा करने लगी। उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियों के अलावा कोई आवाज़ नहीं निकल पा रही थी।
मैंने भी देर न करते हुए लंड को चूत के मुहाने पर रख दिया। सुपारा उसकी गीली लिपियों पर रगड़ा, फिर मैंने कमर को एक तेज झटका दिया। आधा लंड उसकी चूत में चला गया। शादी के बाद भी उसकी चूत काफी कसी हुई लग रही थी, दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं।
पूछने पर उसने बताया कि उसके पति का लंड लंबा तो है पर मोटा नहीं है इसलिए मेरा लंड आसानी से नहीं जा पा रहा था। मेरे अगले झटके से लंड उसकी चूत की गहराई में उतर चुका था, जड़ तक। उस समय मेरे दोनों हाथ उसके चूतड़ के नीचे होते हैं जो उसकी गांड को महसूस कर रहे होते हैं, नरम गोल चूतड़ों को दबाते हुए।
मेरे होंठ उसके होठों को कब्जाए हुए थे, जीभें फिर से एक-दूसरे में उलझी हुईं। और लंड चूत में अपना काम कर रहा होता है, धीरे-धीरे बाहर-भीतर हो रहा था, हर झटके के साथ चूत से चटक-चटक की आवाज आ रही थी। शरीर के सारे अंग अपने अपने काम में व्यस्त!
इसी तरह करीब दस मिनट की ज़बरदस्त चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए। मेरे लंड से गर्म वीर्य की धारें उसकी चूत की गहराई में निकलने लगीं, जबकि उसकी चूत फिर से सिकुड़ी और मेरे लंड को दबाते हुए अपना रस छोड़ रही थी। थोड़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे, साँसें तेज, पसीना बहता हुआ।
फिर मैंने चूत से लंड निकालना चाहा लेकिन उसने मना कर दिया और बोली- इसको ऐसे ही रहने दो। मैंने उसकी बात मान ली और लंड को अन्दर ही रहने दिया। कुछ देर हम लोग ऐसे ही पड़े हुए बातें कर रहे थे लेकिन लंड चूत में कब तक सो सकता था।
जल्दी ही लंड ने हमें बता दिया कि चूत उसका ऑफिस है जहाँ उसे काम करना होता है आराम नहीं! और पूरी ईमानदारी के साथ लंड ने खड़े होकर चूत को सलामी देनी शुरू कर दी। चुदाई के बाद भी लंड बाहर नहीं निकला था तो हम दोनों के कामरस की वजह से चूत बहुत चिपचिपी हो गई थी।
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उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड के चारों ओर चिपकी हुई थीं, हमारा मिला-जुला रस गाढ़ा और गर्म होकर चूत के मुहाने से धीरे-धीरे रिस रहा था, मेरी जांघों पर और बिस्तर की चादर पर फैल रहा था। चिपचिपाहट इतनी ज्यादा थी कि हर हल्की सी हलचल पर चटक-चटक की आवाज आ रही थी। मैंने उसकी आँखों में देखते हुए धीरे से कहा- मुझे तेरी चूत में पेशाब करना है।
वो मुस्कुराई, उसकी साँसें अभी भी तेज थीं, और बोली- मेरी चूत, गांड, मुंह और बूब्स सब तुम्हारा ही है। जहाँ भी जो भी करना है कर लो, मैंने कभी रोका है क्या? मैंने अपने लंड को चूत से बाहर निकाले बिना ही मूत्राशय को ढीला छोड़ दिया। गर्म पेशाब की पहली धार सीधी उसकी चूत की गहराई में निकली, मेरे लंड के चारों ओर बहती हुई, उसकी चूत की दीवारों को धोते हुए। “Garam Chut Ki Mahak”
पेशाब की तेज धारा ने हमारे मिले हुए रस को और पतला कर दिया, फिर चूत के मुहाने से बाहर बहकर मेरी जांघों पर, उसके चूतड़ों पर और बिस्तर पर गिरने लगा। राजश्री ने आँखें बंद कर लीं, एक लंबी सिसकारी ली और अपनी कमर हल्की सी ऊपर उठाई, जैसे उस धार का आनंद ले रही हो। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
पेशाब की गर्माहट और चूत की नमी मिलकर एक अलग ही उत्तेजक एहसास दे रही थी। पेशाब खत्म होते ही हमने जगह बदल ली। अब वो मेरे ऊपर आ गई थी और मैं उसके नीचे लेट गया। ऐसा हमेशा होता था, एक बार वो नीचे रहकर चुदवाती थी और एक बार मेरे ऊपर आकर!
राजश्री ने अपने घुटनों के बल मेरे दोनों तरफ बैठकर अपना वजन मेरे ऊपर डाला। उसने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा, जो अभी भी गीला और सख्त था, सुपारे को अपनी चूत के मुहाने पर रगड़ा, फिर धीरे से नीचे बैठ गई। पूरा लंड एक बार में उसकी चूत में समा गया, चूत की दीवारें फिर से मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया।
वो ऊपर-नीचे होने लगी, पहले धीरे-धीरे, फिर तेजी से। उसकी चूत हर बार नीचे आने पर मेरे लंड को जड़ तक निगल लेती थी और ऊपर उठते समय बाहर तक खींचती थी। कमरे में फच्च फच्च की गूँजती आवाजें भर गईं, चूत से निकलने वाला रस हर धक्के के साथ छींटे मार रहा था।
उसकी सिसकारियाँ तेज हो गईं, आह्ह… उफ्फ… जैसे संगीत की तरह गूँज रही थीं। मैं एक बार पहले झड़ चुका था तो अब दोबारा झड़ने में बहुत देर लगने वाली थी। मेरा लंड उसकी चूत में गहराई तक था और उसके दोनों बूब्स मेरे हाथों में थे। मैंने उन्हें कसकर पकड़ा, निप्पल्स को उँगलियों से मसला, फिर बारी-बारी से मुँह में लिया।
बायें बूब को चूसते हुए जीभ से निप्पल को गोल-गोल घुमाया, दाँतों से हल्का सा काटा, फिर दाहिने बूब पर वैसा ही किया। राजश्री के बूब्स मेरे मुँह में दब रहे थे, निप्पल्स सख्त और संवेदनशील होकर मेरी जीभ पर काँप रहे थे। वो अपने चरम पर थी, अपनी कमर तेजी से हिला रही थी, मेरे बालों को दोनों हाथों से खींच रही थी-
आआह्हः चोदो फाड़ दो मेरी चूत को… भोसड़ा बना दो इसका… आअह्ह्ह्ह करते हुए उसने अपना पानी छोड़ दिया। उसकी चूत अचानक सिकुड़ी, मेरे लंड को इतनी जोर से दबाया कि मुझे लगा जैसे वो फट जाएगा। गर्म कामरस की धार मेरे लंड पर पड़ी, चूत से बहकर मेरी जांघों पर गिरा। उसका शरीर काँप रहा था, साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं। “Garam Chut Ki Mahak”
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अब मेरी बारी थी लेकिन मेरा लंड अब भी झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैंने उसे धीरे से उठाया, पलटकर घोड़ी बना दिया। राजश्री घुटनों और हाथों के बल झुक गई, उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी, चूत पीछे से पूरी तरह खुली हुई लग रही थी, रस से चमक रही थी। मैंने पीछे से लंड को उसके चूत के मुहाने पर रखा, एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया।
फिर धक्के पड़ने लगे, तेज और गहरे। हर धक्के पर उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी, थप्पड़ जैसी आवाज आ रही थी। मैंने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा, दबाया, फिर कमर पकड़कर और जोर-जोर से चोदा। उसकी चूत अब पूरी तरह ढीली और गीली हो चुकी थी, लेकिन फिर भी मेरे लंड को अच्छे से लपेट रही थी।
करीब पंद्रह-बीस मिनट की इस जोरदार चुदाई के बाद मैंने आखिरकार झड़ दिया। मेरे लंड से गर्म वीर्य की मोटी-मोटी धारें उसकी चूत की गहराई में निकलीं, बार-बार सिकुड़ते हुए। राजश्री ने भी फिर से हल्का सा काँपकर अपना रस छोड़ा। इस पलंग तोड़ चुदाई से हम दोनों बहुत थक गए थे, उसी हालत में एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। एक हफ्ते तक वो साथ रही और हर रात हमने मस्ती की, वो कहानी फिर कभी!
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