Chudai Kahani Wife Friend
मेरा नाम सचिन है मेरठ का रहने वाला हूँ। मैं बहुत ही सेक्सी मर्द हूँ और ऐसी कोई रात नहीं जाती जब मैं अपनी बीबी को चोदकर अपने लंड की आग को शांत न करूं। मेरे अंदर इतनी कामवासना भरी है कि शांत ही नहीं होती है। मेरे शरीर में हर समय एक तीव्र जलन दौड़ती रहती है जिससे मेरा मोटा आठ इंच का लंड बार बार खड़ा हो जाता है और गोलियां भारी होकर नीचे लटकने लगती हैं। Chudai Kahani Wife Friend
अपनी बीबी की गांड चोद चोदकर मैंने उसे काफी बड़ी कर दी है और अब तो इतनी फैला दी है कि उसमें दो तीन लंड एक साथ आसानी से चले जाएं जिससे उसकी गांड की अंदरूनी दीवारें पूरी तरह खुल चुकी हैं और चुदाई के दौरान वो जोर जोर से कराहती है। दोस्तों मेरी बीबी पिछले दस दिनों से मायके गई हुई थी और इधर मेरा लंड फिर से किसी कसी चूत को खोज रहा था।
दस दिन से बिना किसी चुदाई के मेरी हालत खराब हो चुकी थी लंड बार बार कड़ा होकर कच्छे में तन जाता था और मन में बस यही ख्याल घूमता रहता था कि किसी जवान औरत की गीली गुलाबी चूत को फाड़कर उसके अंदर गहराई तक धक्के मारूं।
मैं घर पर बैठा टीवी देख रहा था और सिर्फ कच्छे में था। मेरे मोटे लंड ने कच्छे का कपड़ा पूरी तरह तान रखा था और हल्का सा पारदर्शी लीक भी निकल रहा था जिसकी गर्माहट मेरी जांघों पर महसूस हो रही थी। यही सोच रहा था कि अगर कोई हसीन औरत अभी आ जाए तो उसे चोद डालूं।
इतने में दरवाजे की घंटी बजी। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा और पूरे शरीर में कामवासना की लहरें दौड़ पड़ीं। मैं उठा और सिर्फ अंडरवियर में चला गया। मेरे कदम तेज थे क्योंकि मेरी नसों में खून उबल रहा था। दरवाजा खोला तो मनीषा सामने खड़ी थी।
वो मेरी बीबी की सबसे अच्छी सहेली है। पास ही दो घर छोड़कर रहती है। काफी अच्छा नेचर है उसका। वो साड़ी ब्लाउस में थी। लाल रंग की साड़ी उसके गोरे मोटे शरीर पर चिपकी हुई थी ब्लाउस के ऊपर से उसके भरे भरे दूध उभरकर दिख रहे थे और कूल्हे हल्के से लहराते हुए सेक्सी आकर्षण पैदा कर रहे थे। उसे देखकर मेरी कामवासना जाग गई।
अरी मनीषा तू मैंने कहा।
भाभी नहीं है क्या वो बोली फिर मेरे अंडरवियर की तरफ देखने लगी।
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मैं पूरी तरह से नग्न था सिर्फ अंडरवियर ही पहने था। मेरा आठ इंच का लंड और पोता उठा उठा उसे दूर से ही दिख रहा था कच्छे के अंदर से साफ उभरा हुआ था और हल्का सा स्पंदन कर रहा था जिससे मनीषा की नजरें एक पल के लिए उस पर अटक गईं। मनीषा झेंप गई और नजरें तुरंत दूसरी ओर घुमा ली। काफी जवान औरत थी वो।
है अंदर है आँचल मेरी बीबी मैंने कहा।
मनीषा अंदर आ गई और कमरे में चली गई। मैंने दरवाजा बंद किया और अंदर चला गया। उसे मेरी बीबी कहीं नहीं दिखाई थी। मैंने अंदर जाकर मनीषा का हाथ पकड़ लिया और उसे बाहों में भर लिया और गालों पर पप्पी लेने लगा। उसके नरम गालों की गर्माहट मेरे होंठों पर महसूस हुई उनकी मुलायम त्वचा की खुशबू मेरे नाक में घुल गई और मेरे लंड में और तेजी से खून दौड़ने लगा।
ये क्या कर रहे हो सचिन भैया मनीषा अपने हाथ को छुड़ाते हुए बोली।
जान आज मैं बिलकुल अकेला हूँ। तुम राजी हो तो तुमको चोदकर मजे दे दूं मैंने कहा और मनीषा से लपटा लपटी करने लगा। उसके नरम स्तनों का दबाव मेरी छाती पर महसूस हो रहा था और उसकी सांसें तेज होती जा रही थीं।
नहीं सचिन भैया मैं तो आपको अपना भैया मानती हूँ। उस नजर से नहीं देखती हूँ मनीषा नजरें चुराकर बोली।
तू भी कहां इन सब चक्करों में पड़ी है। हर भैया रात में सैयां होता है मैंने कहा.
और उसे सीने से चिपका लिया और उसके होठों पर चुम्मा देने लगा। उसके मुलायम ओंठों का स्वाद मीठा और गर्म था और मेरी जीभ उनके बीच घुसकर उन्हें चूसने लगी। मनीषा छब्बीस साल की शादी शुदा औरत थी। एक बच्चे की मां थी और इतनी गजब की माल थी कि मैं क्या बताऊं। अक्सर ही मेरे घर आती रहती थी। उसे देख देखकर कई बार बाथरूम में जाकर मुठ मार देता था।
मनीषा बिलकुल देसी इंडियन लड़की थी और काफी सुंदर थी। उसके गाल फूले फूले थे और काफी अच्छा स्वस्थ था। उसके दूध बत्तीस इंच के थे और फिगर बत्तीस अट्ठाईस चौंतीस का था। वो एक बच्चे की मां जरूर थी पर काफी कम उम्र की लड़की जैसी दिखती थी। कुल मिलाकर मुझे बहुत पसंद थी। फिर मैंने उसकी कमर में हाथ डाल दिया और खुद से चिपकाने लगा। फिर उसके फूले फूले गालों पर अनेक किस कर दिए।
सचिन भैया पराये पुरुष से चुदना पाप होता है। नहीं ऐसा मत करो मनीषा कहने लगी।
पर मैं माना ही नहीं। उसकी कमर में अपने दोनों हाथ डालकर सहलाने लगा और उसके गले और चेहरे पर किस करने लगा। नहीं ऐसा मत करो वो बराबर कहे जा रही थी। उसे लेकर मैं सोफे पर जाकर बैठ गया और उसे सोफे पर ही लिटा दिया। मनीषा का रंग काफी साफ था और बड़ी चिकनी माल थी।
वैसे भी मुझे पता नहीं क्यों शादी शुदा चुदी चुदाई खाई खेलाई औरतों में कुछ ज्यादा ही मजा आता है। वो साड़ी में लिपटी हुई थी। उसी वक्त मेरी काम पिपासा अचानक से जाग गई। मैं अपनी बीबी की सहेली मनीषा को सोफे पर बिठा दिया और उसकी साड़ी को पैरों के पास से उठाना शुरू कर दिया।
मैंने उसे सोफे पर ही लिटा दिया। उसकी भरी हुई चूत देखने और चोदने को मैं आतुर हो गया था। मेरे अंदर कामदेव जाग गया था। मेरे पूरे शरीर में एक अचानक तीव्र गर्मी फैल गई थी जिससे मेरी नसों में खून उबलने लगा था और मेरा मोटा आठ इंच का लंड पहले से भी ज्यादा कड़ा होकर कच्छे के कपड़े को तानने लगा था।
मेरी सांसें भारी हो गई थीं और मेरी छाती जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी। इसलिए मैं उसकी साड़ी को पेटीकोट के साथ ही ऊपर को उठाने लगा। मेरे हाथों में हल्का कंपन था लेकिन वासना ने उन्हें इतना मजबूत बना दिया था कि मैं धीरे धीरे लेकिन दृढ़ता से कपड़े को ऊपर खींचने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मनीषा ने आज लाल रंग की साड़ी पहनी थी जिसमें वो काफी खिल रही थी। लाल रंग उसकी गोरी त्वचा के साथ मिलकर उसे और भी ज्यादा आकर्षक और सेक्सी बना रहा था। धीरे धीरे मैं साड़ी को पेटीकोट के साथ ही घुटनों तक उठा दिया। कपड़े की सरसराहट की हल्की आवाज कमरे में गूंज रही थी और जैसे जैसे कपड़ा ऊपर सरकता गया वैसे वैसे उसकी निचली टांगों की गर्माहट मेरी उंगलियों को छूने लगी। “Chudai Kahani Wife Friend”
मुझे उनकी सफेद दूधिया टांगें दिखने लगी जो बहुत खूबसूरत थीं। वे टांगें मोटी मुलायम और पूरी तरह चिकनी थीं जिनकी त्वचा दूध की तरह सफेद और नरम थी। मैं उसकी टांगों पर हाथ लगाने लगा और किस करने लगा। मेरे गर्म होंठ उनकी ठंडी नरम त्वचा पर बार बार लग रहे थे मैं हल्के हल्के चूस भी लेता था और अपनी जीभ से उनकी त्वचा पर गीले निशान छोड़ देता था।
नहीं सचिन भैया ये सब अच्छी बात नहीं मैं उस तरह की औरत नहीं हूँ वो कहने लगी।
उसकी आवाज कांप रही थी लेकिन उसमें एक हल्की सी लहर भी महसूस हो रही थी जो उसके शरीर की बढ़ती गर्मी को छुपा नहीं पा रही थी। मैंने उनकी एक बात नहीं सुनी और उनकी टांगों पर हाथ घुमाता हुआ उसके खूबसूरत घुटनों तक पहुंच गया और बार बार किस किए जा रहा था।
मेरी उंगलियां उनकी जांघों की नरम मांसलता को दबा दबाकर महसूस कर रही थीं और कभी कभी मैं उनकी त्वचा को हल्का सा नोच भी लेता था। फिर साड़ी को और ऊपर तक उघाड़ दिया जिससे उसकी खूबसूरत कदली समान सेक्सी जांघों के दर्शन हो गए तो जीवन सफल हो गया।
उसकी जांघें मोटी गोल और पूरी तरह भरी हुई थीं जिनके बीच की जगह गहरी और गर्म थी जहां से हल्की पसीने की मीठी महक आने लगी थी। मेरी आंखों में वासना की लहरें दौड़ने लगी और मैं उसकी दोनों जांघों पर हाथ लगाकर उसकी सुंदरता को महसूस करने लगा।
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मेरे हाथ ऊपर नीचे घूम रहे थे कभी जोर से दबाते कभी नरम नरम सहलाते और फिर काफी किस किया। मैंने अपनी गर्म जीभ निकालकर उनकी जांघों पर लंबे लंबे चाटे दिए जिनसे उसकी त्वचा गीली हो गई थी। अब मेरे से रहा नहीं गया। मनीषा की चूत की एक झलक पाने को मेरी आंखें तरसी जा रही थीं।
मैंने मन ही मन सोच लिया कि आज इस माल को चोद लूंगा फिर चाहे जो हो जाए। मेरे मन में अब कोई संकोच या डर बाकी नहीं बचा था। मैंने उसी वक्त मनीषा की साड़ी को पेटीकोट के साथ ही बिलकुल ऊपर उठा दिया तो सामने उसकी मुनिया रानी यानी जवां चूत के दर्शन हो गए मुझे। “Chudai Kahani Wife Friend”
उसकी चूत बिलकुल गुलाबी फूली हुई और थोड़ी सी गीली थी दो मोटी लबियां हल्के से अलग हो रही थीं और बीच में चमकता हुआ गुलाबी रंग दिख रहा था। हल्के भूरे बालों की पतली लाइन ऊपर की ओर जा रही थी जो उसकी जवानी को और भी आकर्षक बना रही थी। उसका दिल भी धड़कने लगा कि अब क्या होगा।
टांग खोलो मनीषा जान मैंने कहा।
मेरी आवाज भारी और वासना से भरी हुई थी। वो बराबर इंकार करती रही पर पैर खोल दी। उसके पैर धीरे धीरे अलग हुए और उसकी चूत पूरी तरह खुलकर मेरे सामने आ गई। मैं बिलकुल करीब आकर उस पूनम के चांद उसके भोसड़े का दीदार करने लगा। उसकी चूत से एक मीठी मदमाती और थोड़ी नमकीन सी खुशबू निकल रही थी जो मेरी नाक में घुसकर मेरी वासना को और भड़का रही थी।
फिर मैं भी मनीषा पर लेट गया और उसकी चूत के पास नाक लगाकर उसकी सुगंध लेने लगा। मैंने गहरी सांस लेकर उसकी पूरी महक अपने फेफड़ों में भर ली और मेरी जीभ बाहर निकल आई। मित्रों मनीषा मेरे घर पिछले तीन चार सालों से आ रही थी। इसलिए हमेशा से वो मुझे पसंद थी।
बड़े दिनों की तमन्ना थी मेरी उसके साथ मजे लूटने की। उसकी भरी हुई चूत मेरे लिए सबसे आकर्षण का केंद्र थी। मैं उंगलियां लगाकर उसे छूकर देखने लगा। मेरी मोटी उंगली उसके गीले फूले लबियों पर फिसल रही थी और मैं धीरे धीरे उन्हें अलग अलग करके अंदर का गुलाबी हिस्सा देख रहा था।
फिर जीभ लगाकर चाटने लगा। मैंने अपनी गर्म जीभ को उसके चूत के निचले हिस्से से शुरू करके ऊपर की ओर चलाया क्लिटोरिस पर हल्का सा दबाव दिया और उसे चूसने लगा। मनीषा ओह मां ओह मां उ उ उ उ उ अअअअअ आआआआ करने लगी। नहीं सचिन भैया मैं उस तरह की औरत नहीं वो कहने लगी। “Chudai Kahani Wife Friend”
मैंने नहीं सुनी और काफी देर तक उसकी चूत को चाटता रहा। मेरी गर्म जीभ उसकी गुलाबी फूली हुई चूत की लबियों पर बार बार घूम रही थी मैंने अपनी जीभ को पूरी लंबाई में फैलाकर निचले हिस्से से शुरू किया और ऊपर की ओर एक लंबा चाटा दिया जिससे उसकी चूत से निकलने वाला मीठा गाढ़ा रस मेरी जीभ पर फैल गया और उसका नमकीन स्वाद मेरे मुंह में घुल गया।
जल्दी जल्दी जीभ लगा लगाकर गुलाबी और खूबसूरत चूत को चाट रहा था। मेरी जीभ उसके क्लिटोरिस पर हल्का सा दबाव बनाकर तेजी से घुमने लगी कभी मैं उसे चूसता तो कभी हल्के दांतों से काटकर खींचता जिससे मनीषा का पूरा शरीर झटके खाने लगता था। धीरे धीरे मनीषा ने अपने पैर पूरे ही खोल दिए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके मोटे जांघों की मांसलता पूरी तरह फैल गई और उसकी चूत अब पूरी तरह खुलकर मेरे मुंह के सामने आ गई जहां से गर्म पसीने और चूत के रस की तीखी खुशबू मेरी नाक में घुस रही थी। मैंने खूब मजा ले लिया। अपनी पेंट मैंने उसी वक्त उतार दी और निकर भी उतार दिया।
मेरा मोटा आठ इंच का लंड अब पूरी तरह आजाद होकर हवा में लहराने लगा उसकी नसें फूली हुई थीं और सिरे से पारदर्शी लीक टपक रहा था। फिर अपनी बीबी की सहेली की चूत में लंड पकड़कर चूत में घुसा दिया। मैंने अपने लंड का गर्म सिरा उसके गीले लबियों पर रगड़ा थोड़ा दबाव देकर अंदर धकेला और फिर चोदने लगा।
जैसे ही मेरा लंड उसकी घुफा में घुसा मनीषा ओह मां ओह मां उ उ उ उ उ अअअअअ आआआआ करने लगी। उसकी चूत की अंदरूनी दीवारें मेरे मोटे लंड को जकड़कर खींच रही थीं जैसे कोई गर्म नम गुफा हो जो हर धक्के पर और भी सिकुड़ जाती थी। मैं उसकी कमर को पकड़कर उसे पेलने लगा। “Chudai Kahani Wife Friend”
मेरी मजबूत उंगलियां उसकी पतली कमर पर गड़ गईं और मैं पूरी ताकत से आगे पीछे झुककर लंड को गहराई तक धकेलने लगा। वो आहें भरने लगी। सोफे पर ही आज उसकी चूत का काम लगाए जा रहा था। उसके नंगे शरीर का पसीना सोफे की चादर पर छूट रहा था और हर धक्के के साथ उसके भरे हुए दूध हिल हिलकर ऊपर नीचे उछल रहे थे।
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वो न न करती रही और मैंने गेम बजा दिया। चार पांच मिनट जब चूत में धक्के देता रहा तो मनीषा भी मान गई और अपने पैर खोलकर अच्छे से सेक्स करने लगी। उसके पैर अब मेरी कमर के चारों ओर लिपट गए थे और वह अपनी एड़ियों से मेरी पीठ को दबा रही थी। मैं कमर उठा उठाकर उसका काम लगाने लगा।
मेरी कमर हर बार ऊपर उठती और फिर जोरदार धक्के से नीचे गिरती जिससे मेरा लंड उसकी चूत की सबसे गहरी जगह तक पहुंच जाता और उसके अंदर का गर्म रस बाहर निकलकर मेरे लंड और गोलियों को भीगने लगा। कुछ ही देर में वो मुझसे पट गई और आराम से सेक्स करने लगी।
हूं ऊं ऊं सी सी सी सी चोदो चोदो आज मेरी चूत फाड़ फाड़कर इसका भरता बना डालो जानननन वो कहने लगी।
उसकी आवाज अब पूरी तरह कामवासना से भरी हुई थी और हर शब्द के साथ उसकी चूत मेरे लंड को और जोर से जकड़ रही थी।
क्यों डार्लिंग अभी तो मुझे भैया भैया बोल रही थी। अब क्या हुआ मेरी जान मैंने कहा और चूत में जल्दी जल्दी धक्के देता रहा।
मेरे धक्के अब और तेज और गहरे हो गए थे जिससे सोफा हिलने लगा था और मनीषा की चूत से चप चप की आवाजें निकल रही थीं।
अब भैया सैयां बन गया वो कहने लगी।
फिर हम दोनों ही मजे करने लगे। मैं उस पर अच्छे से लेट गया और तेज तेज धक्के चूत में देने लगा। ओह कितनी कसी चूत थी उसकी। मेरा तो लंड ही जकड़ा जा रहा था। काफी देर मैंने मनीषा का गेम बजाया। फिर लंड बाहर निकाल दिया। उसकी चूत का दीदार करने लगा। अब उसकी चूत पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी दोनों लबियां अलग होकर बीच में गहरा गुलाबी गड्ढा दिखा रहा था जहां से सफेद गाढ़ा रस धीरे धीरे बाहर रिस रहा था। “Chudai Kahani Wife Friend”
चलो मनीषा डार्लिंग नंगी हो जाओ ये पर्दा क्यों मैंने कहा।
अब मनीषा मेरी आशिक बन गई थी। खुद अपने हाथों से अपने ब्लाउस के बटन खोलने लगी और मुझे देख के मुस्करा रही थी। धीरे धीरे उसने अपनी साड़ी ब्लाउस को खोल दिया। फिर ब्रा पेंटी को उताकर पूरी तरह से नंगी हो गई। मैं सोफे पर बैठ गया।
आ जाओ डार्लिंग मेरा लंड चूसो मैंने बोला।
मनीषा तो पहले से काफी सेक्सी और जवान थी। मेरे आठ इंच के खंबे को उसने पकड़ लिया और फेटने लगी। मैं सोफे पर आराम से हाथ खोलकर लेट गया। मनीषा मेरे मोटे खंबे से खेलने लगी।
सचिन भैया आपका लंड तो कुछ ज्यादा ही मोटा है वो बोली।
क्यों तेरे पति का इससे पतला है क्या मैंने कहा।
उनका तो नन्हा सा है मनीषा बोली।
उसकी चूचियां बत्तीस इंच की थीं। गोल गोल और बड़ी प्यासी। मैं हाथ से उसकी निपल्स को छेड़ने लगा। सफेद चूचियों पर काले चमकदार सिक्के जैसे निपल्स बला की खूबसूरत लग रही थी। मनीषा ने मेरे खंबे को जीभ लगाकर चाटने लगी।
जैसे जैसे मेरे खूटे को पकड़कर मुठ देने लगी वैसे वैसे मुझे बड़ा आराम मिलने लगा। बड़ा आनंद आने लगा। मनीषा बहुत अच्छा फेट रही थी। दूसरे हाथ से मेरी गोलियों के साथ खेलने लगी। फिर झुक गई और एक हाथ से लंड फेटती रही और मुंह लगाकर मेरी गोलियों को मुंह में लेकर चूसने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उ उ सी सी सी ऊं ऊं वाह मेरी जान क्या मस्त चूसती है तू अअअअअ मैंने कहा।
फिर तो मनीषा पूरी तरह कामवासना में होकर जल्दी जल्दी मेरी दोनों गोलियों को टॉफी की तरह चूसने लगी और मुझे गर्म करने लगी। उसकी गर्म नम जीभ मेरी भारी गोलियों पर घूम रही थी वह एक एक गोली को मुंह में भरकर जोर जोर से चूसती और अपनी जीभ से उन्हें अंदर बाहर घुमाती जिससे मेरी गोलियों की नसें फूल जातीं और पूरे लंड में तीखी गर्मी दौड़ने लगती।
साली अभी नहीं नहीं बोल रही थी। अब सही सही कर रही थी। जल्दी जल्दी मेरे खंबे को फेट रही थी जैसे रंडियां अपने आशिकों के लंड फेटती हैं। उसकी उंगलियां मेरे मोटे लंड को जकड़कर ऊपर नीचे तेजी से सरक रही थीं कभी वह अपनी हथेली को घुमाकर मेरा लंड सिरा रगड़ती.
तो कभी नाखूनों से हल्का खरोंचती जिससे मेरी कमर खुद ब खुद उठने लगती। मैं भी बिलकुल मस्त हो गया। अब मेरी बीबी की सहेली मनीषा ने मेरे सुपाड़े को मुंह में ले लिया और फिर संपूर्ण लंड ही अंदर मुंह में लील गई और दबा दबाकर चूसने लगी।
ओह जान तेरा जवाब नहीं कहां सीखा ये सब मैंने कहा।
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मनीषा अपने काम पर लगी रही और जल्दी जल्दी चूसती रही। उसके मुंह की गर्मी और जीभ की नमी मेरे पूरे लंड को लपेटे हुए थी हर बार जब वह गला तक लंड निगलती तो उसकी गले की मांसपेशियां मेरे लंड को जकड़ लेतीं और मैं महसूस करता कि मेरा सुपाड़ा उसके गले की दीवार से रगड़ खा रहा है।
मुझे लगा कि कहीं झड़ गया तो इसकी गांड नहीं चोद पाऊंगा। इसलिए मैं अपने दिमाग को काबू कर रहा था। मनीषा ने मुझे अत्यधिक आनंद दे दिया। सोफे पर मुझे लिटाकर आधे घंटे मेरे लंड को किसी रंडी की तरह अपने खूबसूरत ओंठों से चूस डाला। मैं स्वर्ग में पहुंच गया। “Chudai Kahani Wife Friend”
फिर उसके सिर पर हाथ रखकर मैंने उसके मुंह को और लंड पर दबा दिया। मेरा आठ इंच का मोटा खंबा उसके गले तक घुस गया और मुझे बहुत अच्छा लगा। चूस चूसकर उसने मुझे अत्यधिक सुख दिया। फिर लंड अपने मुंह से बाहर निकाला।
चलो जान आओ मेरे लंड की सवारी करो मैंने बोला।
मनीषा उठी और मेरे लंड पर आकर बैठ गई। मेरे खूटे को पकड़कर उनसे चूत में लगा लिया और जैसे ही नीचे बैठी मेरा लंड उसकी भोसड़ी में घुस गया। मनीषा अहहह स्सीईईईइ अअअअअ आहा हा हा सी सी सी करने लगी। फिर मेरे सीने पर उसने अपने हाथ रख दिए और उठ उठकर संभोग करने लगी।
उसकी बत्तीस इंच की चूचियों को मैंने दोनों हाथों से पकड़ लिया और दबाने लगा और खेलने लगा। वो खुद ही उठ उठकर काम लगवाने लगी। मुझे उसकी अदाएं बहुत अच्छी लगीं। उसने छोटी कर रखी थी। उसी वक्त मेरी बीबी आँचल का फोन आ गया। मैं फोन को पिक किया और कान से लगा लिया।
कैसे हो जान क्या कर रहे हो मेरी बीबी।
कुछ नहीं बस आराम चल रहा है मैं बोला।
देखो अगर कुछ स्पेशल खाने का मन हो तो मनीषा को बुला लेना आँचल बोली।
हां जान ठीक है। मैं मनीषा से ले लूंगा मैंने कहा और फोन काट दिया।
उसके बाद हम दोनों चुदाई पर फोकस करने लगे।
सचिन भैया कैसा लग रहा है वो पूछने लगी।
मजा आ रहा है रानी चलो जल्दी जल्दी से मेरे लंड पर कूदो और मुझे मजा दो मैंने कहा।
अब मनीषा गमा गम मेरे लंड पर ऐसे कूदने लगी जैसे फुटबॉल खेल रही हो। उसकी तनी हुई चूची भी हिल हिलकर डांस करने लगी। जल्दी जल्दी मेरे लंड पर उठने बैठने लगी तो कितना मजा मुझे मिलने लगा। मैं भी अई अई अई इसस्स्स्स्स्स्स्स् उहहह्ह ओह्हहह की आवाजें निकालने लगा।
मनीषा बड़ी चुदक्कड़ औरत निकली और अपने पतली कमर को मटका मटकाकर सेक्स करने लगी। मुझे तो बहुत अच्छा लगा। अपनी चक्की में लेकर मेरे लंड को चबाए जा रही थी। मेरा तो पसीना निकलवा दिया उसने और बुरा हाल कर दिया। मुझे तो पीस डाला उसने। “Chudai Kahani Wife Friend”
मनीषा जान तू तो बड़ी चुदक्कड़ औरत निकली मैंने हांफते हुए सांसें भरते कहा।
मेरी छाती जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी पसीने की बूंदें मेरी गर्दन से नीचे सरक रही थीं और मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर गर्म और पिसता हुआ महसूस हो रहा था। वो हंसने लगी।
सचिन भैया तुम क्या सोच रहे थे कि एक तुम भी चोदू मर्द हो। मैं तुमसे बड़ी चुदक्कड़ औरत हूँ वो कहने लगी।
फिर आगे को मेरी तरफ झुक गई और अपनी चूत को जल्दी जल्दी चलाने लगी। इस तरह मुझे बहुत मजा मिला। फिर मैं भी नीचे से धक्के देने लगा और फिर मनीषा की चुदाई में शहीद हो गया। वो मेरे ऊपर ही पसर गई और हम दोनों मोहब्बत के पेंच लगाए लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
कुछ देर बाद वो कपड़े पहनकर चली गई। कुछ दिन गुजर गए। फिर से मेरा लंड महाराज खड़ा होने लगा और किसी चूत की डिमांड करने लगा। फिर से मुझे मनीषा की याद आई। उसका घर तो मेरा पास में ही था। मैंने कपड़े पहने और अच्छी तरह से तैयार होकर उसके घर चला गया। मैंने उसके दरवाजे पर दस्तक दी। वो समझी कि उसका पति आया है।
आती हूँ बाबा वो अंदर से बोली।
जब दरवाजा खोला तो मुझे देखकर फक्क रह गई।
सचिन भैया तुम यहां क्यों आए हो अगर किसी से देख लिया तो वो बोली।
मुझे देखकर वो ज्यादा खुश नहीं थी। नाराज दिख रही थी।
मनीषा जान तू कह रही थी कि मेरे घर आएगी पर तुम तो उस दिन से गायब हो गई हो। मेरे अंदर आग लगी हुई है। तेरी कसी चूत मारने की तलब बहुत तेज लगी है मैंने कहा।
देखो यहां मत आया करो मेरे पति ने देख लिया तो मेरा गला दबा देगा। वैसे ही वो मुझ पर शक करता है मनीषा बोली।
ठीक है अगली बार नहीं आऊंगा। पर अभी तो चूत दे ही दे मैंने कहा।
वो बड़ी मुश्किल से राजी हुई। उसके चेहरे पर हिचकिचाहट साफ दिख रही थी। आंखें नीचे की ओर झुकी हुई थीं और वह बार बार होंठों को काट रही थी। फिर भी उसने धीरे से सिर हिलाकर हामी भर दी। दरवाजे के सामने से हट गई। मैं अंदर चला गया।
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मनीषा ने अगल बगल देखा कि कोई है तो नहीं। उसकी नजरें सड़क और आसपास के घरों पर घूम गईं जैसे कोई देख न ले। फिर वो भी दरवाजे पर कुंडी लगाकर अंदर आ गई। हम दोनों उसके बेडरूम में चले गए। उसके बाद दोनों ही बेड पर जाकर बैठ गए। फिर से मैंने उसे जल्दी से बाहों में भर लिया। “Chudai Kahani Wife Friend”
आज मेरी बीबी की सहेली और मेरी बुलबुल नीली मैक्सी में थी और बहुत जंच रही थी। नीली मैक्सी उसके गोरे शरीर पर चिपकी हुई थी जो उसके बड़े बड़े दूधों को अच्छी तरह उभार रही थी और कूल्हों की गोलाई को और भी आकर्षक बना रही थी। मैंने उसे बाहों में भरके खूब किस किया। मेरे गर्म होंठ उसके नरम गालों पर फिर गर्दन पर घूमे और अंत में उसके मुलायम ओंठों पर जम गए।
ओंठों पर किस किया। मैंने उसके ऊपर वाले ओंठ को चूस लिया। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से उलझकर लार का आदान प्रदान करने लगी। फिर कपड़े उतारकर उसके मस्त मस्त बत्तीस इंच के दूध चुसे। मैंने मैक्सी को उसके सिर के ऊपर से खींचकर उतार दिया। ब्रा की हुक खोलकर उसे भी फेंक दिया और उसके भरे हुए गोल गोल दूध मेरे हाथों में आ गए।
मैंने उन्हें जोर से दबाया मसल डाला और मुंह लगाकर एक एक निप्पल को चूसने लगा। अपनी गर्म जीभ से उन्हें घुमाता और हल्के दांतों से काटता जिससे मनीषा के शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। फिर मनीषा को लिटाकर उसके पैर खोलकर उसकी चूत फिर से बजा डाली। मैंने उसके पैरों को चौड़ा किया और अपना कड़ा लंड उसकी पहले से गीली चूत पर रगड़ा।
फिर एक जोरदार धक्का देकर पूरा लंड अंदर डाल दिया। उसकी चूत अभी भी कसी हुई थी जो मेरे मोटे लंड को अच्छी तरह जकड़ ले रही थी। मैं तेज तेज धक्के मारने लगा। उसकी चूत से चप चप की आवाजें आने लगीं और वो कराह रही थी। जल्दी निपटाकर मैं उसके घर से चला गया। दोस्तों मेरी बीबी और सात दिनों तक मायके में रुकी रही और इस बीच मनीषा मेरे घर पर आकर चुपके से चुदवा लेती थी।
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