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हवसी नेहा मैडम की चुदास मिटाई

March 16, 2026 by crazy Leave a Comment

Teacher Student Chudai Kahani

मेरा नाम हर्ष है। उम्र 23 साल, कद 5 फुट 11 इंच, पतला-छरहरा जिस्म पर ऊर्जा सी भरी हुई। मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूँ। मेरा औज़ार 7 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है — यह सोचकर ही मैं मुस्कुरा देता हूँ। मेरी इंग्लिश कमज़ोर थी, इसलिए मैंने एक ट्यूशन टीचर रखी। नाम है नेहा मैडम। उम्र 31 साल। पति एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं और 20 दिन बाहर रहते हैं। Teacher Student Chudai Kahani

पहली मुलाकात में ही मेरी नज़रें उन पर टिक गईं। उन्होंने सफेद कॉटन साड़ी पहनी थी, गीले बाल थे। जब वह झुककर किताब खोलने लगीं तो पल्लू फिसल गया। मैंने उसे वापस रखने की कोशिश में उनकी त्वचा को छू लिया। “थैंक यू,” उन्होंने कहा, मेरी आँखों में देखकर।

“मैडम जी, आप बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। उनके गालों पर लाली छा गई। “चुप रहो, पढ़ने दो।” लेकिन मैं उन्हें घूरता रहा। उनकी गर्दन लंबी थी, और जब वह झुकतीं तो ब्लाउज की गहराई से मेरी नज़रें नहीं हटतीं थीं। अगली बार जब मैं गया तो जानबूझकर थोड़ा लेट पहुँचा।

शाम के 6 बजे, बारिश में भीगा हुआ। मेरी टी-शर्ट चिपक गई थी मेरे जिस्म पर। “अरे, तुम तो पूरे भीग गए!” वह चौंकीं। “आपकी याद आ रही थी पूरे दिन,” मैंने कपड़े ठीक करते हुए कहा। उनकी नज़रें मेरे सीने पर टिकीं। “जाओ, ऊपर बाथरूम में तौलिया ले लो।” जब मैं नीचे आया तो उन्होंने चाय दी। मैंने जानबूझकर उनके पास बैठते समय अपना पैर उनके पैर से छुआ दिया।

“सॉरी मैडम जी,” मैंने कहा।

“कोई बात नहीं,” वह पल्लू ठीक करने लगीं।

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मैंने अपना हाथ ड्राइंग टेबल पर रखा, जहाँ उनका हाथ पहले से था। “मैडम जी, आपके हाथ बहुत नरम हैं।” “हर्ष…” वह घबराईं, “यह ठीक नहीं है।” “क्यों? मैं तो बस सच बोल रहा हूँ,” मैंने उनकी उँगलियों को छुआ। वह हाथ हटाने लगीं, लेकिन मैंने हल्के से दबाव बनाए रखा। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने उनका हाथ अपने होंठों के पास लाया और हल्का सा चूम लिया।

“हर्ष! यह क्या कर रहे हो!” वह उठ खड़ी हुईं।

“मैडम जी, मैं जानता हूँ आप भी यही महसूस करती हैं,” मैंने कहा।

“चुप! पढ़ाई करो,” वह सख्त होने की कोशिश की, लेकिन उनकी आँखें कुछ और ही कह रही थीं। कुछ दिन बाद फिर मिलना हुआ। इस बार मैंने दरवाज़ा बंद करते समय जानबूझकर चाबी लगा दी। वह नीले रंग की साड़ी में थीं। “आज क्या पढ़ाना है मैडम जी?” मैंने पास बैठते हुए पूछा।

जब वह झुकीं, तो मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी पीठ पर रख दिया। “हर्ष!” वह चौंकीं। “क्या हुआ? मैं तो बस देख रहा था कि आप ठीक तो हैं,” मैंने उनके कंधे पर हाथ फेरा। वह मुड़ीं। मैं उनके बहुत करीब था। “यह गलत है… मैं तुमसे 8 साल बड़ी हूँ… और शादीशुदा भी…” “तो क्या हुआ? दिल तो उम्र नहीं देखता,” मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में भर लिया।

“प्लीज़…” वह धीमी आवाज़ में बोलीं, “अगर किसी को पता चल गया तो…” “किसी को पता नहीं चलेगा,” मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए। वह सिहर उठीं। मैंने उनकी गर्दन को चूमना शुरू किया, हल्के-हल्के चुंबन देते हुए ऊपर की ओर बढ़ा। जब मैंने उनके कान के पास होंठ रखे तो वह काँपने लगीं।

“कैसा लग रहा है मैडम जी?” मैंने फुसफुसाते हुए कहा। “अच्छा… मतलब… नहीं… रुको…” वह उलझन में थीं। मैंने उनका चेहरा उठाया और उनके होंठों पर चुंबन कर दिया। वह पहले तो हिचकिचाईं, फिर धीरे से जवाब देने लगीं। हमारी जुबानें मिलीं। वह मीठी लग रही थीं, चाय की तरह गरम।

मैंने अपने हाथ उनकी कमर पर ले गया और उन्हें अपनी ओर खींचा। “हर्ष… हमें रुकना चाहिए…” वह मेरे होंठों के बीच बोलीं। “क्यों?” मैंने उनके होंठ चूमते हुए कहा। “क्योंकि यह… यह बहुत आगे बढ़ रहा है…” मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। “मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ।” “मैं डर रही हूँ…” उनकी आँखें नम थीं। मैंने उन्हें सीने से लगाया। “मैं हूँ ना।”

मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे, फिर धीरे से नीचे की ओर सरक गए। जब मैंने उनकी साड़ी के ऊपर से ही कमर को सहलाया, तो वह काँप उठीं। “आपकी कमर बहुत नरम है,” मैंने फुसफुसाते हुए कहा। “हर्ष… प्लीज़… आज के लिए बस इतना ही…” मैंने रुककर उनका चेहरा देखा। “कल?” वह शरमा गईं और नीचे देखने लगीं। “कल… देखेंगे…” हफ्ता बीतता गया और हमारी मुलाकातें जारी रहीं।

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हर बार हम थोड़ा और करीब आते। एक शाम, जब बारिश तेज़ हो रही थी, मैं फिर से भीगा हुआ पहुँचा। वह गुलाबी रंग की साड़ी में थीं। “आ गए?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी आँखों में अजीब सी चमक थी। मैंने उनका हाथ पकड़ा। “आपकी याद आ रही थी पूरी रात।” वह कुछ नहीं बोलीं। बस मेरी ओर देखती रहीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में भरा और होंठों पर चुंबन कर दिया। इस बार वह पूरी तरह से जवाब देने लगीं, कोई हिचकिचाहट नहीं थी। मैंने उन्हें सोफे पर लिटाया और उनके ऊपर झुक गया। मेरे होंठ उनके होंठों से होते हुए गर्दन पर आए, फिर कंधे पर, फिर उनकी बाहों पर। “आपके जिस्म की खुशबू बहुत अच्छी है,” मैंने कहा।

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। अब उनके कंधे और ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। “हर्ष… हम…” वह रुक गईं। “हाँ?” मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके स्तनों को छुआ। “हम… आगे बढ़ सकते हैं… लेकिन धीरे-धीरे…” मैंने उनकी आँखों में देखा। “मैं आपकी रफ़्तार से चलूँगा।”

मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक… दो… तीन… ब्लाउज खुल गया। अंदर क्रीम रंग की ब्रा थी। मैंने ब्रा को ऊपर किया। उनके गोल स्तन बाहर आ गए। निप्पल गहरे भूरे रंग के, खड़े हुए थे। “आप बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने कहा और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। “ओह… हर्ष… वहाँ…” वह सिसक उठीं।

मैंने चूसना शुरू किया, हल्के-हल्के दांतों से काटा, फिर जीभ से सहलाया। दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को दबा रहा था। “बहुत अच्छा लग रहा है…” वह आँखें बंद करके बड़बड़ा रही थीं। मैंने नीचे की ओर चुंबन देना शुरू किया। उनके सीने के बीच से होता हुआ, पेट पर आया। उनके पेट पर हल्की सी चर्बी थी, मैंने उसे चूमा।

“यहाँ भी बहुत प्यारा है,” मैंने कहा। मैंने उनकी साड़ी का नाड़ा खोला। साड़ी फैल गई। फिर पेटीकोट की डोरी खोली। “हर्ष… मैं शर्मा रही हूँ…” वह अपने हाथों से चेहरा ढकने लगीं। “मत देखिए मुझे… बस महसूस कीजिए,” मैंने उनके हाथ हटाए। मैंने उनकी पेटीकोट नीचे खींची। अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। “Teacher Student Chudai Kahani”

मैंने उनके पैरों के बीच में आकर उनकी जाँघों पर चुंबन दिए। “आपके पैर बहुत सुंदर हैं,” मैंने कहा। जाँघों के ऊपरी हिस्से पर चुंबन देते हुए, मैं धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा। उनकी त्वचा काँप रही थी। “हर्ष… वहाँ मत… बहुत पास हो रहे हो…” वह शरमा रही थीं। “मैं वहीं जाना चाहता हूँ जहाँ आपकी सबसे ज़्यादा खुशी है,” मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से चूमा।

वह उछल पड़ीं। “ओह गॉड… प्लीज़…” “मैडम जी… अब मैं आपको पूरा महसूस करना चाहता हूँ… अंदर…” मैंने धीरे से कहा। वह मेरे सीने पर सिर रखते हुए बोलीं, “हर्ष… अभी नहीं… हमें थोड़ा वक्त देना चाहिए… यह सब बहुत जल्दी हो रहा है…” “लेकिन मैं तो…” मैंने उनके चेहरे को उठाया। “मैं जानती हूँ तुम क्या चाहते हो… और मैं भी चाहती हूँ… लेकिन अगले हफ्ते… जब मैं पूरी तरह तैयार हो जाऊँ… आज यहीं रुकते हैं…” मैंने उनके होंठों पर चुंबन किया।

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“ठीक है… जैसी आपकी मर्जी… लेकिन मैं कल भी आऊँगा।” “कल नहीं… परसों… और तब भी सिर्फ़ इतना ही… जब तक मैं खुद न कहूँ…” मैंने उनके बालों को सहलाया। “मैं इंतज़ार करूँगा… लेकिन याद रखिए… मैं आपको पूरा अपना बनाना चाहता हूँ… हर तरह से…” वह शरमा गईं और मेरे सीने में मुँह छुपा लिया।

“मैं भी… बस थोड़ा वक्त दो…” वह रात हम दोनों के लिए नई शुरुआत थी। हमने वादा किया कि पहले हफ्ते में सिर्फ़ ऐसे ही एक-दूसरे को छूएँगे, लेकिन असली मिलन अगले हफ्ते होगा… जब नेहा मैडम पूरी तरह तैयार होंगी। पूरा हफ्ता मैंने कुछ नहीं सोचा सिवाय नेहा मैडम के। मेरे शरीर में आग लगी रहती थी।

हर रात मैं उन्हें याद करके अपना हाथ अपने औज़ार पर फेरता, लेकिन वो मज़ा नहीं आता था जो उनके मुँह में था। ठीक एक हफ्ते बाद मैं उनके दरवाज़े पर खड़ा था। शाम के पाँच बजे, लेकिन मेरे दिल की धड़कन ऐसे चल रही थी जैसे मैं पहली बार मिलने आ रहा हूँ। मैंने दरवाज़ा खटखटाया। नेहा मैडम ने दरवाज़ा खोला। मेरी साँसें थम गईं।

उन्होंने गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी थी — बनारसी सिल्क। उनके बाल खुले थे, गीले भी थोड़े, इतर की खुशबू आ रही थी। उनकी आँखों में वो चमक थी जो पहले नहीं थी। “आ गए?” उन्होंने पूछा, आवाज़ में हल्की सी कँपकँपी थी। “जी मैडम जी… आप… आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं,” मैंने अंदर आते हुए कहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

इस बार उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और चाबी भी लगा दी। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। “हफ्ता कैसा रहा?” उन्होंने पूछा, पीठ मेरे सीने से लगाते हुए। “बहुत लंबा… बहुत कठिन…” मैंने उनकी कमर पकड़ ली। वह मुड़ीं। उनके होंठ मेरे होंठों से इंच भर दूर थे। “मैंने भी बहुत सोचा… रोज़ सोचा… तुम्हें…” “क्या सोचा मैडम जी?” मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए।

“ये सोचा कि मैं… मैं तैयार हूँ… पूरी तरह…” मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में भरा। “पक्का? कोई जल्दबाज़ी नहीं है…” “नहीं… अब और इंतज़ार नहीं होता… मैंने पूरे हफ्ते अपने आपको तैयार किया… मैं चाहती हूँ तुम्हें… पूरा…” मैंने उन्हें गोद में उठाया। वह हल्की सी चीखीं, फिर मेरे गले से लिपट गईं। “Teacher Student Chudai Kahani”

मैं उन्हें बेडरूम में ले गया। वहाँ पर सफ़ेद चादरें बिछी थीं, कमरे में इतर की खुशबू थी। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। वह पीठ के बल लेटी थीं, साँसें तेज़ चल रही थीं। मैं उनके ऊपर झुका और होंठों पर चुंबन किया — गहरा, प्यार भरा चुंबन। “आज मैं आपको पूरी तरह अपना बनाऊँगा,” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।

“हाँ… प्लीज़… धीरे से… मैं थोड़ी घबरा रही हूँ… इतने बड़े औज़ार से…” “डरो मत… मैं आपको दर्द नहीं दूँगा… सिर्फ़ खुशी…” मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। बनारसी सिल्क फिसलती हुई उतर गई। फिर मैंने नाड़ा खोला और साड़ी पूरी उतार दी। वह पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। मैंने उनके पैरों पर चुंबन किया — पहले टखनों पर, फिर घुटनों पर, फिर जाँघों पर।

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वह काँप रही थीं। “हर्ष… प्लीज़… जल्दी करो… मैं रुक नहीं पा रही…” “सब्र रखो मैडम जी… आज रात लंबी है…” मैंने उनकी पेटीकोट उतारी। अंदर गोल्डन रंग की पैंटी थी। मैंने उसे भी नीचे खींचा। वह पूरी तरह नंगी नीचे से थीं, ऊपर ब्लाउज और ब्रा में। मैंने उनकी जाँघों के बीच में जगह देखी। काले बाल, गीली योनि — पिछले हफ्ते की तरह ही, लेकिन आज और भी ज़्यादा गीली।

मैंने जीभ लगाई। वह उछल पड़ीं। “ओह गॉड… हाँ… वहीं…” मैंने उन्हें चाटना शुरू किया — क्लाइटोरिस को चूसा, जीभ से छेद में डाली, फिर ऊपर-नीचे किया। उनकी कमर उठने लगी। “मैं झड़ने वाली हूँ… प्लीज़ रुको मत…” मैंने और तेज़ किया। कुछ ही देर में वह झड़ गईं — उनकी योनि ने मेरी जीभ को कसकर पकड़ा और फुरफुराने लगी।

वह चीखीं, मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाए रखा। जब वह शांत हुईं, मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा औज़र पूरी तरह खड़ा था — 7 इंच लंबा, 2.5 इंच मोटा, नसों से भरा हुआ। नेहा मैडम ने उसे देखा और निगल लीं। “यह… यह सच में बहुत बड़ा है…” मैंने उनके पास लेटा और उनके हाथ को अपने औज़ार पर रखा। “छुओ इसे… महसूस करो… यह आपके लिए तैयार है।”

उन्होंने हाथ से सहलाया, फिर मुँह में लेने लगीं। कुछ देर चूसने के बाद मैंने उन्हें रोका। “अब नहीं… अब मैं आपके अंदर जाना चाहता हूँ…” वह पीठ के बल लेट गईं। मैंने उनके पैर फैलाए। उनकी योनि गीली और थोड़ी खुली हुई थी, लेकिन फिर भी मेरे मोटे औज़ार के लिए तंग थी। मैंने औज़र का सिरा उनके छेद पर रखा। “Teacher Student Chudai Kahani”

“तैयार हो?” “हाँ… धीरे से… प्लीज़…” मैंने धीरे से धक्का दिया। सिरा अंदर गया। वह कराह उठीं। “दर्द हो रहा है?” “थोड़ा… और अंदर करो… धीरे-धीरे…” मैंने थोड़ा और अंदर किया — आधा औज़र। वह साँसें फूलने लगीं, हाथों से चादर पकड़ ली। “बहुत मोटा है… लग रहा है फट जाऊँगी…” “नहीं फटोगी… आप बहुत गीली हो… अब आराम से लूँगा…”

मैंने रुका और उनके स्तनों को चूमने लगा। जब वह थोड़ी ढीली हुईं, मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और पूरा 7 इंच अंदर कर दिया। “आह्ह्ह… ओह गॉड… हर्ष… यह बहुत अंदर चला गया…” वह रोने लगीं, खुशी और दर्द से। मैंने उनके होंठों पर चुंबन किया और धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर गति बढ़ाता गया।

“कैसा लग रहा है मैडम जी? अब दर्द कम है?” “दर्द… दर्द बदल गया है… अब बस मज़ा आ रहा है… और तेज़ करो… प्लीज़…” मैंने गति बढ़ा दी। बिस्तर की चरपराहट और हमारी साँसें मिलकर एक अजीब सा संगीत बना रही थीं। मैं उनकी गर्दन पर चुंबन कर रहा था, कानों में फुसफुसा रहा था — “आप बहुत अच्छी हो… मैं आपसे प्यार करने लगा हूँ…” “मैं भी… ओह हाँ… वहीं… बस वहीं…”

मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और और गहरा धक्का लगाया। मेरा औज़र उनके गर्भाशय के मुँह से टकरा रहा था। “मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… इस बार बहुत ज़ोर से… तुम भी… मेरे साथ… प्लीज़…” “हाँ… मैं भी… तैयार हो जाओ…” मैंने और तेज़ धक्के लगाने शुरू किए।

उनकी योनि ने मेरे औज़र को कसकर पकड़ लिया — वह झड़ गईं, शरीर तन कर सिकुड़ा, पैरों ने मेरी कमर कसकर पकड़ी। और मैं भी उनके अंदर ही झड़ गया। मेरा वीर्य उनकी योनि में भर गया, गर्म-गर्म। हम दोनों एक साथ काँपते रहे, एक-दूसरे से लिपटे हुए। जब हम शांत हुए, मैंने अपना औज़र बाहर निकाला। “Teacher Student Chudai Kahani”

उनकी योनि से मेरा वीर्य और उनका रस बह रहा था। बिस्तर पर एक गीला धब्बा बन गया। नेहा मैडम ने मुझे सीने से लगाया। “शुक्रिया… मैंने कभी सोचा नहीं था कि… यह इतना खूबसूरत हो सकता है…” “यह तो सिर्फ़ शुरुआत है,” मैंने उनके बालों को सहलाते हुए कहा। “आज रात अभी बाकी है… और पूरी ज़िंदगी…” हम उलझे हुए थे एक-दूसरे में, जैसे समय थम गया हो।

लगभग एक घंटे बाद, जब हमारी साँसें थोड़ी शांत हुईं, तो नेहा उठीं और मेरा हाथ पकड़कर मुझे बाथरूम की ओर ले गईं। शायद आधी रात हो गई थी, कमरे में सिर्फ बाहर से आती सड़क की रोशनी थी। “नहा लो,” उन्होंने कहा और शावर चालू किया। गर्म पानी की बौछार में हम फिर से एक-दूसरे को छूने लगे। मैंने उनकी पीठ पर साबुन लगाया, धीरे-धीरे उनकी कमर से होते हुए उनकी जाँघों तक गया।

वह कांप गईं जब मेरे हाथ उनके अंदरूनी हिस्सों को छुए। “हर्ष, मुझे लगता है मैं फिर से… तुम्हें चाहती हूँ,” वह शरमा कर मेरे कान में फुसफुसाईं। “अभी?” मैंने मुस्कुराते हुए पूछा। “कहीं भी… बस तुम चाहिए,” वहने मेरे औज़र को पकड़ लिया जो फिर से खड़ा हो रहा था। इस बार हमने खड़े होकर किया। मैंने उनका एक पैर उठाया और बाथरूम के दरवाज़े पर टिका दिया।

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पीछे से मैं उनके अंदर घुसा। गीले शरीर, भाप और पानी की बौछार में हम फिर से एक हो गए। उनकी पीठ मेरे सीने से सटी थी, और मैं उनके स्तनों को सहला रहा था। “यहाँ… बहुत गहरा है… तुम मुझे पूरा भर रहे हो,” वह दीवार से सटकर कराह रही थीं। पानी की आवाज़ में हमारी साँसें मिल रही थीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए, हर बार जब मैं अंदर जाता तो वह सिसक उठतीं। “Teacher Student Chudai Kahani”

हम लगभग पंद्रह मिनट तक इसी तरह एक-दूसरे में खोए रहे, फिर जब वह झड़ने लगीं तो मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और खुद भी उनके साथ छोड़ दिया। हम दोनों की गर्मी पानी में मिलकर बह गई। नहाने के बाद हम वापस बिस्तर पर आए। इस बार कोई कपड़े नहीं थे, कोई बाधा नहीं थी। हम एक-दूसरे के बिना कपड़ों के शरीरों को महसूस करते रहे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

वह मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं, मेरी उँगलियाँ उनके बालों में फंसी हुई थीं। “कभी सोचा नहीं था कि रात इतनी लंबी हो सकती है,” नेहा ने धीमी आवाज़ में कहा। “तुम्हारे साथ तो वक़्त रुक जाता है,” मैंने उनके माथे पर चूमा। कुछ देर बाद, जब बाहर का अंधेरा हल्का पड़ने लगा और सड़क पर सुबह की पहली गाड़ियों की आवाज़ आने लगी, तो नेहा की आँखें खुलीं।

वह मुझे देख रही थीं, जैसे पहली बार देख रही हों। “सुबह हो गई,” उन्होंने कहा, उनकी उँगलियाँ अभी भी मेरे सीने पर चल रही थीं। “तो?” मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया। “तो तुम्हें जाना चाहिए… पड़ोसी जाग जाते हैं,” उन्होंने चिंता से कहा, लेकिन उनका शरीर मुझे छोड़ने को तैयार नहीं था। “मैं नहीं जाना चाहता,” मैंने उनके होंठ चूमे।

“प्लीज़… अगले हफ्ते फिर आना… लेकिन अब जाओ…” मैंने धीरे से अपने कपड़े उठाए। वह चादर में लिपटी खड़ी रहीं, मुझे देखती रहीं। उनकी आँखों में आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी थी। दरवाज़े पर, मैंने मुड़कर देखा। वह हाथ हिला रही थीं। “मैं तुमसे प्यार करती हूँ हर्ष,” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा। “मैं भी… हमेशा,” मैंने जवाब दिया। और मैं उनके घर से निकला, जानते हुए कि यह शुरुआत थी… एक ऐसे रिश्ते की जो हमें पूरी तरह बदल देगा। बाहर सुबह की हवा में ओस की खुशबू थी, और मेरे शरीर में अभी भी उनकी गर्मी बची हुई थी।

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