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चुलबुली आंटी ने अँधेरे में चुदवा लिया

January 31, 2026 by crazy Leave a Comment

Sexy Aunty Ki Suhagrat

दोस्तो, मैं विनय आपको अपनी सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसमें मेरी बिल्डिंग की एक हॉट आंटी ने मुझे अपनी मुस्कान से लाइन मारना शुरू किया और एक शाम मैंने उसे बिल्डिंग की छत पर दबोच लिया। यह मेरी जिंदगी में पहली बार था जब मैंने किसी परिपक्व आंटी को चोदा और उसका मजा इतना गहरा था कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है। Sexy Aunty Ki Suhagrat

मैं एक अच्छी कसरती बॉडी वाला लड़का हूं, मेहनत से जिम में पसीना बहाया है और मेरा लंड भी पूरा मर्दाना है, सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा, जो रोज मुठ मारने की आदत से और भी सख्त हो गया है। मेरी रगों में हमेशा ठरक दौड़ती रहती है, बस मौका ढूंढता हूं किसी भाभी या आंटी की मुलायम चूत में अपना लंड पेलने का। और आखिरकार वह मौका मुझे मिल ही गया।

उस आंटी का नाम था कल्पना। मैं उन्हें कल्पना आंटी कहता था। वह मेरी ही बिल्डिंग में नीचे वाले फ्लोर पर रहती थीं। जब भी मैं उनके दरवाजे से गुजरता, वह मुझे देखकर एक अजीब सी मुस्कान देतीं, ऐसी मुस्कान जो होंठों पर खेलती और आंखों में चमक लाती। पहले तो मैं समझ नहीं पाया, लेकिन हर बार वही नरम, आमंत्रण भरी मुस्कान।

धीरे-धीरे मुझे लगा कि यह सिर्फ साधारण नमस्ते नहीं है, बल्कि कुछ और है। मैंने भी ध्यान देना शुरू किया और जवाब में मुस्कुराने लगा। फिर बातें शुरू हुईं। आते-जाते हल्की-फुल्की बातें, हंसी-मजाक और जल्दी ही हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए। उनकी आवाज में एक मिठास थी जो सुनते ही बदन में सिहरन दौड़ जाती। उनकी खुशबू, हल्की फूलों वाली परफ्यूम की महक, जब पास से गुजरतीं तो नाक में घुस जाती और लंड में हलचल मचा देती।

एक शाम की बात है। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम की कोई गर्म कहानी पढ़ रहा था। मेरा हाथ लोअर के अंदर था, लंड को धीरे-धीरे सहला रहा था, प्रीकम की चिपचिपी बूंदें उंगलियों पर लगी हुई थीं। तभी बाहर सीढ़ियों पर पायल की झनकार सुनाई दी। मैंने लंड को लोअर में ठूंसकर हाथ पोछा और दरवाजा खोलकर देखा। आवाज ऊपर छत की ओर जा रही थी। मैं चुपके से उनके पीछे-पीछे गया।

छत पर हल्का अंधेरा छा रहा था, सूरज डूब चुका था और हवा में ठंडक घुल रही थी। कल्पना आंटी तार पर सूखे कपड़े उतार रही थीं। उनकी साड़ी हवा में लहरा रही थी, पल्लू थोड़ा सरक गया था और गहरी ब्लाउज से उनके भारी स्तन झांक रहे थे। मैं छुपकर देखता रहा। जब उन्होंने अपनी ब्रा और पैंटी उतारीं, तो जल्दी से उन्हें दूसरे कपड़ों के नीचे छुपा लिया, लेकिन मैंने साफ देख लिया।

सफेद ब्रा में उनके बड़े-बड़े स्तन कैसे सिमटे हुए थे और पैंटी पर हल्का गीला निशान साफ दिख रहा था। मेरी नजर उन पर टिक गई और मेरा लंड लोअर में तनकर दर्द देने लगा। आंटी मेरे पास से गुजरते हुए रुक गईं। उनकी नजर मेरे उभरे हुए लंड पर पड़ी और वह हल्के से मुस्कुराईं। फिर बोलीं, “विनय, तुम्हारी लोअर में तो कोई चूहा घुस आया है क्या?” उनकी आवाज में शरारत थी, आंखें चमक रही थीं।

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मैंने भी हंसते हुए कहा, “नहीं आंटी, यह तो काला सांप है, अपना फन फैला रहा है।”

वह और करीब आईं, उनकी गर्म सांस मेरे कान को छू रही थी। “तो क्या यह सांप हमेशा अंदर ही फन फैलाता रहता है?”

“नहीं आंटी, बाहर निकलकर डसता भी है, लेकिन आजकल शिकार नहीं मिल रहा।”

आंटी की आंखों में आग भड़क उठी। वह हल्के से हंसीं और बोलीं, “सांप और पानी तो अपना रास्ता खुद बना लेते हैं ना? जब बाहर निकालोगे तभी तो शिकार मिलेगा।”

यह सिग्नल इतना साफ था कि मैंने एक पल गंवाया नहीं। मैंने अपनी लोअर नीचे सरका दी। मेरा सख्त लंड हवा में उछलकर उनके सामने फनफनाया। उसकी नसें उभरी हुई थीं, सुपारा लाल और चमकदार। आंटी की सांस तेज हो गई। मैंने उनके हाथ से कपड़े ले लिए और अपना लंड उनके नरम हाथ में रख दिया।

पहले तो उन्होंने हाथ छुड़ाने का नाटक किया, लेकिन जैसे ही उनकी उंगलियां मेरे गर्म लंड को छुईं, उनकी सांस फूल गई। मैंने फिर उनका हाथ पकड़कर लंड पर कस दिया। अब वह धीरे-धीरे मुझे सहलाने लगीं, उनकी हथेली की गर्मी मेरे लंड को और सख्त कर रही थी। मैंने उनका पल्लू नीचे खींच दिया।

ब्लाउज में कैद उनके भारी स्तन उभर आए। मैंने ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें दबाना शुरू किया। मुलायम, गर्म और भारी। आंटी की पकड़ मेरे लंड पर और मजबूत हो गई। मैंने उनके गले पर होंठ रखे, हल्के से चूमा और फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए। नीचे सफेद ब्रा में उनके गुलाबी निप्पल साफ दिख रहे थे।

मैंने ब्रा को ऊपर सरकाया और उनके स्तनों को मुंह से पकड़ लिया। उनकी त्वचा पर हल्की पसीने की नमकीन महक थी। मैंने एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसा, जीभ से घुमाया, फिर हल्के से दांतों से काटा। आंटी सिसकारीं, “आह्ह… विनय… धीरे…” लेकिन उनका हाथ मेरे लंड को और तेजी से हिला रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

काफी देर तक मैं उनके दोनों स्तनों को चूसता रहा, बारी-बारी से निप्पलों को चाटता, काटता। उनकी सिसकारियां हवा में घुल रही थीं। फिर अचानक आंटी अलग हुईं, ब्रा ठीक की और कपड़े उठाकर नीचे जाने लगीं। मेरा लंड तड़प रहा था। उनकी मोटी, गोल गांड साड़ी में लहराती हुई मुझे पागल बना रही थी। मैंने पीछे से उन्हें जकड़ लिया, उनके स्तनों को जोर से भींचा और अपना सख्त लंड उनकी गांड के बीच रगड़ने लगा।

वह सिसकारीं, “छोड़ विनय… रात है… कोई देख लेगा…”

मैंने कान में फुसफुसाया, “तो मेरे कमरे में चलो आंटी, वहां कोई नहीं देखेगा।”

वह हल्के से मुस्कुराईं और बोलीं, “नहीं… फिर कभी… अभी घर में कोई नहीं, तुम्हारे अंकल टूर पर हैं।”

और वह सीढ़ियां उतरने लगीं। मैं उनके पीछे-पीछे। जैसे ही वह मेरे दरवाजे के सामने से गुजरीं, मैंने उनका हाथ पकड़ा, दरवाजा खोलकर उन्हें अंदर खींच लिया और कुंडी लगा दी। अंदर कमरे की हल्की रोशनी में वह और खूबसूरत लग रही थीं। मैंने उन्हें बांहों में भर लिया, उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

उनकी सांसें गर्म थीं, होंठ मुलायम और रसीले। मैंने जीभ अंदर डाली, वह भी जवाब देने लगीं। काफी देर तक हम एक-दूसरे को चूमते रहे, लार मिलाते रहे। फिर मैंने उन्हें दीवार से सटाया, उनके हाथ ऊपर उठाकर पकड़ लिए और गर्दन पर किस करना शुरू किया। उनकी त्वचा की खुशबू नाक में भर रही थी।

वह पहले तो बोलीं, “छोड़ दे विनय… कोई देख लेगा…” लेकिन धीरे-धीरे उनका विरोध खत्म हो गया। मैंने उनका ब्लाउज पूरी तरह उतार दिया। छत पर ब्रा पहले ही उतार चुकी थीं, इसलिए उनके भारी, गुलाबी स्तन पूरी तरह नंगे हो गए। मैंने उन्हें मुंह से पकड़ लिया, एक को चूसता, दूसरे को हाथ से मसलता।

निप्पल मेरी जीभ पर सख्त हो रहे थे। आंटी की सिसकारियां तेज हो गईं, “आह्ह… विनय… आराम से… आह्ह… मजा आ रहा है…” मैं नीचे झुका, उनकी नाभि को जीभ से चाटा, फिर पेटीकोट का नाड़ा खींचा। पेटीकोट नीचे गिरा। उनकी गोरी, मोटी जांघें खुल गईं।

पैंटी पर गीलेपन का बड़ा निशान था। मैंने घुटनों पर बैठकर पैंटी में मुंह दबाया। उनकी चूत की गर्मी और हल्की सी मादक खुशबू मेरे नाक में घुस गई। मैंने उनकी एक टांग उठाई, जांघें चौड़ी कीं और पैंटी के ऊपर से ही चूत को जीभ से रगड़ने लगा। वह कांप रही थीं, हाथ मेरे सिर पर थे।

फिर मैंने पैंटी नीचे खींच दी। उनकी चूत पर हल्के काले बाल थे, होंठ गुलाबी और सूजे हुए। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया, क्लिटोरिस को चूसा। आंटी की कमर उछल रही थी, “आह्ह… विनय… क्या कर रहे हो… उफ्फ… चूसो… हां… ऐसे ही…” उनकी चूत से रस बह रहा था, मीठा-नमकीन। मैंने जीभ अंदर तक डाली, चूत को चाट-चाटकर साफ किया। वह झड़ गईं, उनका रस मेरे मुंह में भर गया।

फिर उन्होंने मुझे नंगा किया। घुटनों पर बैठकर मेरा लंड मुंह में लिया। उनकी गर्म, गीली जीभ मेरे सुपारे पर घूम रही थी। मैंने उनके सिर पकड़कर मुंह चोदा। काफी देर तक वह चूसीं, गपागप आवाजें कर रही थीं। मैं बेकाबू हो गया। उन्हें बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं और लंड चूत पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा। वह चीखीं, उनकी चूत टाइट और गर्म थी। मैंने होंठ चूमते हुए धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। जल्दी ही वह भी कमर उछालने लगीं।

फिर मैंने उनकी टांग कंधे पर रखी और गहराई तक पेला। पच-पच की आवाजें आने लगीं। वह खुद अपने स्तनों को मसल रही थीं। कुछ ही देर में वह दूसरी बार झड़ीं। मैंने उन्हें घोड़ी बनाया, बालों की चोटी पकड़ी और पीछे से जोर-जोर से चोदा। थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई और आखिरकार उनकी चूत में अपना वीर्य उड़ेल दिया। गर्म वीर्य उनकी बच्चेदानी तक पहुंचा।

हम दोनों थककर लेट गए। उन्होंने बताया कि वह पहले भी मेरा लंड चोरी से देख चुकी थीं, जब मैं कमरे में मुठ मार रहा था। बोलीं, “महीनों से सपना देख रही थी कि यह मोटा लंड मेरी चूत में घुसे। मेरा पति तो जल्दी झड़ जाता है, मेरी भूख कभी नहीं मिटाता।”

फिर उनका हाथ फिर मेरे लंड पर आ गया। हम 69 पोजीशन में आ गए। मैं उनकी चूत चाट रहा था, वह मेरा लंड चूस रही थीं। उनकी चूत फिर गीली हो गई। वह ऊपर चढ़ गईं, लंड पर बैठीं और उछलने लगीं। उनके भारी स्तन हवा में लहरा रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर नीचे से ठोका।

फिर घोड़ी बनाकर बाल पकड़कर चोदा। वह चिल्ला रही थीं, “फाड़ दे… और तेज… चोद… भुर्ता बना दे…” वह तीसरी बार झड़ीं। मैंने उन्हें फिर लिटाकर मिशनरी में तेज-तेज ठोका और दूसरी बार उनकी चूत में वीर्य भर दिया। हम थककर सो गए। सुबह पांच बजे आंख खुली।

मैंने उन्हें जगाया। वह साड़ी-ब्लाउज पहनने लगीं। मैंने उन्हें बुलाया, खड़ा हुआ और लंड उनके मुंह में दे दिया। वह मुस्कुराईं और चूसने लगीं। कुछ देर चुसवाने के बाद उन्होंने कहा, “अब जाना होगा विनय, कोई देख लेगा।” और चली गईं। मैं दरवाजा बंद करके फिर मुठ मारकर सो गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

अब कई बार आंटी को मैं अपने रूम के बाहर ही पकड़ लेता था। उनके पति की ड्यूटी कभी दिन में तो कभी रात को होती थी। इसलिए कई बार आंटी दिन में फ्री रहती थी। रूम में लाकर मैं आंटी को नंगी कर लेता था और उसको पटक कर चोद देता था। उनकी सिसकारियां, उनकी गर्म सांसें, उनकी चूत का रस मेरे लंड पर लगकर जो चिकनाई बनाता, वह सब मुझे पागल कर देता।

एक दिन आंटी ने बताया कि अगले दिन से अंकल की नाइट शिफ्ट शुरू हो रही है। मैं ये सुनकर बहुत खुश हो गया। रात की मेरी तन्हाई अब दूर होने वाली थी। मेरे दिमाग में बस एक ही ख्याल घूमने लगा कि अब पूरी रात आंटी की मुलायम चूत और मोटी गांड मेरे लिए खुली रहेगी।

दोस्तो, दिन में चुदाई कितनी भी मस्त हो लेकिन असली मजा तो रात की चुदाई में ही आता है, जब सारा जहां सो रहा होता है और प्यासी चूत और लौड़े जाग रहे होते हैं। रात की ठंडी हवा, कमरे में हल्की रोशनी और आंटी की गर्म बॉडी का मिलन, सोचकर ही लंड में हलचल होने लगती।

अगले दिन मैं बस सायं होने का इंतजार कर रहा था। रात के 8 बजे अंकल घर से निकलने वाले थे। मैं बस उनके जाने का इंतजार कर रहा था। मिनट गिन-गिनकर देख रहा था। अब तक मैंने आंटी को अपने रूम में ही चोदा था। आज की रात आंटी की चुदाई उनके घर में ही होने वाली थी। मुझे पूरा अंदाजा था कि आंटी अपनी चूत चुदवाने के लिए मुझे नीचे ही बुलायेगी। उनकी आंखों में वो भूख मैं देख चुका था।

मुझसे रुका न गया और मैं 8 बजे के पहले ही आंटी के यहां पहुंच गया। अभी तक अंकल ड्यूटी के लिए निकले नहीं थे। मुझे वहां देखकर वो थोड़ा हैरान हुए। अंकल से मेरी बात कई बार हो चुकी थी लेकिन अभी तक मैं उनके घर में नहीं गया था।

फिर मैंने बहाना बनाते हुए कहा कि मेरे घर में दाल खत्म हो गयी है और मैं दाल लेने के लिए आया हूं। तभी पीछे से आंटी बोली- हां तो इसमें शर्माने की क्या बात है, खुलकर बोल देना चाहिए। हम कोई अजनबी थोड़े ही हैं? उनकी आवाज में एक मिठास थी, आंखें मेरी ओर देखकर चमक रही थीं।

फिर आंटी बोली- अगर तुम चाहो तो नीचे खाना तैयार है। तुम्हारे अंकल तो अब निकल रहे हैं, मैं यहां अकेली पड़ जाऊंगी। तुम मेरे यहां पर ही खा लेना! उनकी मुस्कान में छुपा आमंत्रण साफ दिख रहा था। मैंने अंकल के चेहरे की ओर देखा और पूछा- अंकल आपकी नाइट ड्यूटी लगने वाली है क्या?

वो बोले- हां बेटा, आज से नाइट में ड्यूटी करनी है।

मैं बोला- कोई बात नहीं, रात में तो ज्यादा आसान होता है ड्यूटी करना। कुछ काम भी नहीं करना होता।

वो बोले- हां ये तो है बेटा। अब मैं थोड़ी ही देर में निकलने वाला हूं। तुम अपनी आंटी का ख्याल रखना।

अंकल भी समझ रहे थे कि आंटी अकेली हो जायेगी इसलिए वो बस इतना बोलकर मुस्करा दिये। वो भी राजी हो गये थे। उनकी मुस्कान में एक अजीब सी स्वीकृति थी।

फिर मैं बोला- ओके अंकल, मैं ध्यान रखूंगा।

आंटी से मैंने कहा- ठीक है आंटी, मैं जरा नहा धोकर आता हूं।

फिर मैं वहां से खुश होते हुए निकल गया। 15 मिनट के बाद मैं वापस आया तो अंकल जा चुके थे। आंटी भी तैयार हो चुकी थी। उसने एक गुलाबी रंग की साड़ी पहन ली थी जिसमें वो एकदम मस्त माल लग रही थी। साड़ी उनके गोरे बदन पर चिपकी हुई थी, स्तन उभरे हुए और कमर की लचक साफ दिख रही थी। उनकी खुशबू कमरे में फैल रही थी।

हम दोनों ने साथ में खाना खाया और फिर सारा काम खत्म करके हम बेडरूम में आ गये। आते ही मैंने आंटी को बांहों में भर लिया। उसको जोर से अपनी बांहों में जकड़ कर किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी। उनके होंठ गर्म और रसीले थे, जीभ एक-दूसरे से लड़ रही थी। उनकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे पर लग रही थी।

चुदाई की गरम देसी कहानी : दीदी चुदासी होकर मेरा लंड सहला रही थी

मैं आंटी को रात भर चोदना चाहता था इसलिए मैंने पहले ही वियाग्रा की गोली खा ली थी। उसका असर धीरे-धीरे चढ़ रहा था, लंड में एक अलग सी सख्ती महसूस हो रही थी। फिर आंटी ने अलग होकर अपनी साड़ी उतार दी। देखते ही देखते वो नंगी हो गयी। उनकी गोरी त्वचा बेडरूम की हल्की रोशनी में चमक रही थी।

उसके मोटे मोटे बूब्स को देखकर मैं उन पर टूट पड़ा। जोर जोर से आंटी के स्तनों को दोनों हाथों में लेकर मसलने लगा। वो इतने मुलायम और भारी थे कि हाथों में समाते नहीं थे। निप्पल सख्त होकर मेरी हथेली में चुभ रहे थे। आंटी भी मस्त होकर सिसकारने लगी। मेरा लौड़ा पूरे जोश में आ चुका था।

नीचे हाथ ले जाकर मैं उसकी चूत को उंगली से सहलाने लगा। उनकी चूत पहले से ही गीली थी, रस मेरी उंगलियों पर लग रहा था। उसकी सिसकारियां और भी तेज हो गयीं। वो मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगी। उनकी हथेली की गर्मी पैंट के ऊपर से ही महसूस हो रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

फिर मैंने आंटी को अपनी टांगों में बिठा लिया और उसके सामने अपनी पैंट की जिप खोल दी। इससे पहले मैं कुछ करने के लिए कहता, आंटी ने मेरी जिप में अंदर हाथ डाला और मेरे अंडरवियर के कट में से हाथ देकर लंड को बाहर निकाल लिया। मेरा सात इंच का मोटा लंड उनके हाथ में थरथरा रहा था।

मेरे लौड़े का टोपा प्रीकम में गीला हो चुका था। आंटी ने लंड के टोपे पर चूमा और मेरा कामरस में सना सुपारा अपने मुंह में भर लिया। वो मस्ती में मेरे लंड को चूसने लगी और मैं जैसे जन्नत की सैर करने लगा। उनकी गर्म, गीली जीभ मेरे सुपारे पर घूम रही थी, मुंह की चूषण से आवाजें आ रही थीं।

मर्द के लंड को चूसने का तजुरबा आंटी को बहुत ज्यादा था। वो ऐसे लंड को चूसती थी जैसे कि बहुत सालों से लंड की प्यासी हो। कभी जीभ से चाटतीं, कभी गोटियों को मुंह में लेकर चूसतीं। मैंने आंटी के सिर को पकड़ लिया और उसके मुंह में धक्के देकर लंड को चुसवाने लगा।

लंड चूसते हुए ही आंटी ने मेरी पैंट को उतरवा दिया। फिर मैंने अपनी चड्डी भी उतार दी। आंटी ने एक बार फिर से मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। फिर मैंने शर्ट भी निकाल दी। अब हम दोनों पूरे के पूरे नंगे हो चुके थे। मैंने आंटी को बेड पर लिटा लिया और उसकी गीली चूत में लंड रगड़ने लगा।

मेरे लंड का सुपारा उनकी चूत के होंठों पर फिसल रहा था, रस की चिकनाई से दोनों चमक रहे थे। वो जोर से सिसकारते हुए बोली- आह्ह… विनय… चोद दो। अब नहीं रुका जा रहा। उनकी आवाज में हवस भरी हुई थी। मेरी हालत भी ऐसी ही थी। मैं भी और नहीं रुक सकता था। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैंने आंटी की चूत पर लंड को रखा और एक जोर धक्का दे दिया। आंटी थोड़ी सी उचकी और मेरा लंड आधा आंटी की चूत में उतर गया। उनकी चूत की गर्मी और टाइटनेस मेरे लंड को निचोड़ रही थी। एक बार फिर से मैंने आंटी के होंठों को चूसते हुए दूसरा धक्का मारा और अबकी बार मेरा पूरा का पूरा लंड आंटी की चूत में उतर गया।

मैंने आंटी की चुदाई शुरू कर दी और गपागप… गपागप… आंटी की चूत में मेरा लंड अंदर बाहर होने लगा। हर धक्के के साथ उनकी चूत से रस की आवाज आ रही थी। उसके मुंह से अब चुदाई की मस्ती से बहुत ही कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह… विनय… आह्ह… चोदते रहो… अम्म… आह्ह… और चोदो, पूरी रात चोदते रहो। मैंने भी उसकी चूत में लंड को पेलते हुए कहा- हां मेरी रानी… आज सारी रात तेरी चूत को ऐसे ही बजाऊंगा मैं!

काफी देर तक इसी पोज में चोदने के बाद मैंने आंटी को लंड पर बिठा लिया और नीचे से गांड उठाकर चोदने लगा। उनके भारी स्तन उछल रहे थे, मैंने उन्हें पकड़कर मसलना शुरू किया। आंटी उसके दो मिनट के बाद ही झड़ गयी। उनकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ा और रस की बाढ़ आ गई। मगर मेरा लंड अभी ज्यों का त्यों वैसे ही तना हुआ था। वियाग्रा का पूरा असर था।

अब मैंने तेल की शीशी उठा ली। उसकी चूचियों पर तेल की बूंदें डालीं और लंड को रगड़ते हुए चोदने लगा। उसकी चूचियां तेल में नहाकर एकदम से चिकनी हो गयीं। क्या मस्त चूची लग रही थी आंटी की! ऐसी चूचियां पोर्न वीडियो में दिखाई जाती हैं। मैंने उन्हें हाथों में फिसलाते हुए मसलता रहा, निप्पल तेल से चमक रहे थे।

आंटी की चूचियों को मसलते हुए मैं उसकी चूत को पेले जा रहा था। फिर मैंने आंटी को पेट के बल लिटा लिया और उसकी गांड में तेल की बूंदें डाल दीं। आंटी की गांड में उंगली से मैंने तेल को अंदर पहुंचा दिया। उनकी गांड की टाइटनेस उंगली पर महसूस हो रही थी। फिर मैं उसकी गांड के छेद को अपने लंड के टोपे से सहलाने लगा। सुपारा उनकी गांड के छेद पर गोल-गोल घूम रहा था। आंटी भी सिसकारने लगी। उनकी सांसें तेज हो गईं। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैंने पूछा- आंटी पहले भी चुदवा चुकी हो क्या पीछे वाला छेद?

वो बोली- नहीं रे, तेरे अंकल से चूत तो चोदी नहीं जाती, गांड क्या खाक चोदेंगे?

ये सुनकर मैं खुश हो गया। मुझे चूत भले ही खुली हुई मिली थी लेकिन गांड टाइट मिल गयी थी चोदने के लिए। मैंने आंटी की गांड के छेद पर लंड को लगाया और उसकी गांड में अंदर पेल दिया। वो एकदम से चिल्ला पड़ी- ऊईई… ईईई… आआ आह्ह… मर गयी रे… फाड़ दी हरामी… इतनी जोर से क्या जरूरत थी… आह्ह… हाये… मेरी गांड… मर गयी मम्मी।

उनकी आवाज में दर्द और हवस दोनों थे। मैंने पीछे से आंटी को कस कर पकड़ लिया और उनकी चूचियों को सहलाते हुए पीठ पर किस करने लगा। उनकी पीठ पर पसीना छूट रहा था। लंड अभी आधे से भी कम अंदर गया था। मैंने आंटी को चूमना जारी रखा और धीरे धीरे लंड को गांड में चलाता रहा।

आंटी को धीरे धीरे मजा आने लगा और आहिस्ता से मैंने पूरा लंड आंटी गांड में उतार दिया। उनकी गांड की गर्मी और टाइटनेस मेरे लंड को पागल कर रही थी। मेरे लंड पर गोली का असर था इसलिए वो आंटी की गांड में जाकर पूरा फूल गया था। मैंने आंटी की गांड चुदाई शुरू कर दी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

थोड़ी देर के अंदर ही वो गांड चुदवाने का मजा लेने लगी। उनकी गांड खुद पीछे धकेलने लगी। अब मैं और जोर जोर से झटके देने लगा और वो बोली- विनय… आह्ह… आज फाड़ दे मेरी गान्ड। तेरे अंकल के लंड में दम नहीं है, 5 मिनट में झड़ जाता है। मैं बोला- आह्ह… हां… तभी तो तू मुझसे चुदवाती है… आह्ह फाड़ दूंगा तेरी गांड को मैं आज।

कहकर मैं झटके पर झटके मारने लगा। थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। कई मिनट तक मैंने आंटी की गांड चोदी और फिर दोबारा उसको सीधी किया और उसकी चूत में लंड को पेल दिया। चूत पहले से ज्यादा गीली और गर्म थी। पांच मिनट तक उसकी चूत चोदने के बाद मैंने आंटी की चूत में ही माल निकाल दिया।

गर्म वीर्य की पिचकारियां उनकी बच्चेदानी तक पहुंचीं। आंटी भी मेरे लंड का माल चूत में लेकर मस्त हो गयी और हम दोनों थक कर लेट गये। उस रात को फिर मैंने दोबारा चुदाई नहीं की क्योंकि अंकल की अब नाइट शिफ्ट शुरू हो चुकी थी और अब हर रात को आंटी की चूत मुझे ही बजानी थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : पड़ोसन भाभी की पलंगतोड़ ठुकाई 1

फिर सुबह उठकर मैं अपने रूम में चला गया। दिन में मैं सोता रहा। शाम में आंटी छत पर कपड़े डालने आई तो आंटी की चाल बदली हुई थी। आंटी की चूत और गांड की चुदाई से वो लंगड़ा कर चल रही थी। उनकी गांड हल्के से दर्द में थी, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की चमक थी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैं भी देख कर खुश हो रहा था कि मेरे लंड ने आंटी की चूत की प्यास को कुछ हद तक तो शांत किया ही होगा। अब मैं दोबारा से रात होने का इंतजार करने लगा। रात को मैं फिर से आंटी के रूम पर पहुंच गया। दोस्तो, अब कल्पना आंटी के घर में जैसे विनय का ही विनय था। मैं ही आंटी की चूत और घर का मालिक बन गया था।

हमने खाना खाया और मैं आंटी को बेड पर ले गया। आज आंटी मैक्सी में ही थी। मैंने आंटी को बेड पर गिरा लिया और उसकी मैक्सी में हाथ देकर उसकी चूचियों को दबाने लगा। वो नीचे से शायद पूरी की पूरी नंगी थी। उसने न तो ब्रा पहनी थी और पैंटी भी नहीं पहनी थी।

चेक करने के लिए मैंने आंटी की चूत को छूकर देखा तो चूत नंगी थी। नंगी चूत छूकर मेरे बदन में वासना की लहरें उठने लगीं। उनकी चूत पहले से गर्म और हल्की गीली थी। मैंने जोर जोर से आंटी के बूब्स को दबाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में आंटी के मुंह से सिसकारियां निकलना शुरू हो गयीं। उसने भी मेरी लोअर में हाथ डाल लिया। मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मुझे मजा नहीं आ रहा था। मैंने अपनी लोअर नीचे कर ली और आंटी ने अंडरवियर में हाथ डाल लिया। मेरे लौड़े को हाथ में भरकर वो उसकी गर्मी लेने लगी। उनकी उंगलियां मेरी नसों पर दौड़ रही थीं। फिर मैंने आंटी की मैक्सी को उतरवा दिया और उसको पूरी नंगी कर दिया। उसने भी मेरी टीशर्ट और लोअर को निकलवा दिया। फिर उसने मेरे अंडरवियर को भी उतरवा दिया। मैं भी पूरा नंगा हो गया।

हम दोनों जोर से एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे। फिर हम 69 की पोजीशन में आ गये। मैं आंटी की चूत में जीभ देकर उसकी चूत की दीवारों को चाटने लगा और आंटी मेरे लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी। उनकी चूत का रस मीठा-नमकीन था, जीभ पर फैल रहा था।

आज आंटी की चूत के रस का स्वाद मुझे कुछ ज्यादा ही मजा दे रहा था। वो मेरे लंड को जैसे खाने ही वाली थी। मेरे लंड के टोपे को चूसती तो कभी मेरी गोटियों को मुंह में भरकर चूसने लगती। मैं भी पागल सा हो गया था और उसकी चूत को जीभ से ही चोदने लगा था। उनकी क्लिटोरिस को दांतों से हल्के से काटता तो वो सिसकार उठतीं। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

जब बात दोनों के बर्दाश्त के बाहर हो गयी तो हमने चुदाई की पोजीशन ले ली। मैंने आंटी की टांगों को हाथों में थामा और उसकी चूत पर लंड रख दिया। लंड को चूत पर रखकर मैंने आंटी की चूत में एक धक्का दे दिया। मेरा लंड गप्प से अंदर चला गया। उसकी हवस भरी सिसकारी निकल गयी- आह्ह… विनय… और उसने मुझे अपने ऊपर पकड़ कर खींच लिया और मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी चूत को मेरे लंड की ओर धकेलने लगी।

मैंने भी आंटी की चुदास देखकर उसकी ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी। कुछ ही देर में वो मदहोश होने लगी और बड़बड़ाने लगी- आह्ह विनय… तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिले… आह्ह… तुम्हारा लंड तो बच्चेदानी तक जाता है… ओह्ह… चोदो मेरी जान… ऐसे ही चोदते रहो मुझे। दिन रात चुदूंगी मैं तुमसे।

धक्के मारते हुए मैंने भी कहा- हां मेरी चुदक्कड़ रांड, मैं तेरी चूत को अब रोज ऐसे ही बजाऊंगा। तेरी प्यास को शांत कर दूंगा। फिर मैंने उसे बेड से नीचे उतार लिया और उसके मुंह में लंड दे दिया। वो रंडी की तरह मेरे लंड को चूसने लगी। उनका लार मेरे लंड पर चमक रहा था।

उसके बाद मैंने उसको वहीं फर्श पर झुका लिया और उसकी गांड पर लंड को रगड़ने लगा। उसकी चिकनी गांड पर लंड फिसल गया और फिर से उसकी चूत में जा घुसा। मैंने धक्का दिया और पूरा लौड़ा उसकी चूत में समा गया। कल्पना अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी और लंड से टकराने लगी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

जब उसकी गांड मेरे लंड पर आकर लगती तो थप-थप की आवाज होने लगी। मुझे और ज्यादा जोश आने लगा। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर मसलना चालू कर दिया। अब मेरे धक्के और ज्यादा तेज हो गये थे। उसकी सिसकारियों से पूरा कमरा गूंज उठा। कुछ देर तक मैंने उसको ऐसे ही चोदा और फिर उसको लंड पर बैठने के लिए कहा।

उसने मुझे फर्श पर लिटा लिया और अपनी गांड खोलकर मेरे लंड पर चूत को रख दिया। उसने मेरे लंड को अंदर चूत में लिया और उस पर कूदने लगी। रंडियों की तरह वो मेरे लंड को चोदने लगी। मुझे भी उसकी चूत से चुदने में मजा आ रहा था। उनके स्तन हवा में उछल रहे थे, पसीना उनके बदन पर चमक रहा था।

अब आंटी की चूत पूरी फूल चुकी थी। मैंने धक्कों की रफ्तार पूरी तेज कर दी और उसकी चूत में पानी छोड़ दिया। जैसे ही वीर्य निकलना शुरू हुआ मैंने उसको नीचे पटक लिया और वीर्य की बूंद बूंद उसकी चूत में निचोड़ दी। फिर आधे घंटे तक हम दोनों शांत पड़े रहे।

उसके बाद मैंने फिर से आंटी पर चढ़ाई कर दी। उस रात मैंने आंटी को तीन बार और चोदा। इस तरह से अब हम रात में चुदाई का मजा लेने लगे। हम दोनों ने अंकल की नाइट ड्यूटी रहने तक रोज रात में चुदाई की। फिर अंकल की शिफ्ट बदल गयी। मगर इन 15 रातों में मैंने आंटी की चुदाई की शिफ्ट चलाई थी। आंटी की चुदाई करके मुझे बहुत मजा आया।

इस तरह से आंटी की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गयी थी। मुझे भी आंटी की चूत मारे बिना ठीक से नींद नहीं आती थी। एक दिन अंकल ने कहा- मैं गांव जा रहा हूं कुछ दिन के लिये, यहां पर तुम्हारी आंटी को तुम्हारे भरोसे छोड़कर जा रहा हूं। अगर इसको कुछ मदद की जरूरत हो तो तुम देख लेना। उनकी आवाज में एक छुपी हुई स्वीकृति थी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैं बोला- जी अंकल। आप चिंता न करें।

फिर आंटी ने भी कहा- तुम खाना भी यहीं पर खा लेना। मैं नीचे ही बना लूंगी। तुम्हें अलग से बनाने की जरूरत नहीं है।

उनकी आंखों में एक शरारत भरी चमक थी। मैं आंटी की ओर देखकर मुस्करा दिया। फिर मैं भी अंकल को छोड़ने के लिए ऑटो स्टैंड तक चला गया। वहां पर विदा लेने से पहले अंकल ने कहा- तुम ऐसा करना, नीचे ही अपनी आंटी यहां सो जाना। वो अकेली रहेगी तो डरती रहेगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

अंकल ने आंटी को भी फोन करके बोल दिया कि तीन दिन तक विनय को नीचे ही सुला लेना। मैं भी जानबूझकर नाटक करने लगा- छोड़िये न अंकल, क्यों परेशान कर रहे हैं उनको? मगर अंदर ही अंदर मैं खुश हो रहा था। तीन पूरी रातें आंटी के साथ, सोचकर ही लंड में हलचल होने लगी।

उसके बाद मैंने उनको विदा किया। आते टाइम मैंने हम दोनों के लिए सेक्स की गोली और एक बोतल पीने के लिए ले ली। रात को 8.30 बजे आंटी का फोन आया कि खाना तैयार है। मैं नीचे आ गया। जब आंटी को देखा तो देखता ही रह गया। वो दुल्हन की तरह तैयार हो चुकी थी। लाल साड़ी, भारी गहने, सिन्दूर, मंगलसूत्र, सब कुछ। उनकी खुशबू कमरे में फैली हुई थी, हल्की चंदन और फूलों की महक।

मैंने पूछा- क्या बात है आंटी… आज तो… कमाल लग रही हो।

वो बोली- हां, आज रात हम दोनों की सुहागरात होने वाली है।

मैंने हंसने लगा और सोचा आंटी शायद मजाक कर रही है। मगर फिर बेड की ओर नजर गयी तो पूरा बेड गुलाब के फूलों से सजा हुआ था। ताजे लाल गुलाब की पंखुड़ियां बिछी हुई थीं, उनकी मीठी खुशबू हवा में घुल रही थी। खुश होकर मैंने आंटी को गोद में उठा लिया। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

वो बोली- इतनी भी क्या जल्दी है? अब तो सारी रात ही हमारी है।

उनकी गर्म सांसें मेरे कान को छू रही थीं। फिर मैंने उनको नीचे उतार दिया और वो खाने का इंतजाम करने लगीं। इतने में मैंने अपने बैग से दारू की बोतल बाहर निकाल ली और पैग बनाने की तैयारी करने लगा। वो मेरे पास आ गयीं। मैंने पैग बनाकर आंटी को दिया तो वो बोली- ये क्या है?

मैं बोला- बस कुछ मत पूछो, चुपचाप पी जाओ।

मैंने आंटी के पैग में वियाग्रा की गोली डाल दी थी। आंटी पूरा गिलास एक घूंट में खाली कर गयी और बुरा सा मुंह बना लिया। फिर मैंने अपना पैग खाली कर दिया। मैंने भी वियाग्रा उसमें मिला ली थी। कुछ देर के बाद आंटी पर गोली और शराब दोनों का ही सुरूर चढ़ने लगा। वो मुझे खींचकर बेड पर ले गयी। मुझे अपने ऊपर गिरा लिया और मेरे बालों में हाथ फिराते हुए बोली- विनय, क्या तुम आज रात के लिए मेरे पति बनोगे? वन नाइट हस्बैंड?

मैं हंसने लगा और बोला- आंटी ज्यादा चढ़ गयी लगता है। मैं विनय हूं।

वो बोली- हां जानती हूं। मेरे पति बन जाओ ना विनय… प्लीज।

अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : गर्लफ्रेंड की भाभी की चूत से मूत निकल गया

अब मैं भी थोड़ा गंभीर हो गया। दरअसल आंटी ने कभी मुझसे इस तरह की बात नहीं की थी। उसने मेरे गाल पर चूम लिया और बोली- प्लीज… बन जाओ ना… एक रात के लिये। मैंने कहा- ओके, जैसे आपकी मर्जी। मैं आज आपका पति बनूंगा।

फिर वो सिन्दूर और मंगलसूत्र लाई। मैंने उसकी मांग भरी और मंगलसूत्र पहना दिया। वो मेरे पैर छूने लगी। मैंने उसे उठाकर गले लगा लिया और बिस्तर पर ले आया। उनकी आंखें नम थीं, लेकिन हवस से भरी हुई। हमने एक हल्का पैग लिया और फिर उसको मैंने दोबारा से बेड पर लिटा लिया।

उसकी साड़ी को कंधे से उतार दिया और नीचे गिरा दिया। उसके ब्लाउज में कैद उसकी चूचियां बहुत मस्त लग रही थीं। इससे पहले मैंने आंटी को ऐसे रूप में नहीं देखा था। अब मैंने उनकी साड़ी को पेटीकोट से निकाल लिया। उसको बेड पर ही खड़ी कर लिया और घुमाते हुए उसकी सारी साड़ी खींच डाली। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

साड़ी उसके बदन से बिल्कुल अलग हो गयी। फिर एक एक करके उसके गहने उतार दिये। अब वो केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी। मैंने आंटी को बेड पर लिटा लिया और उसके होंठों पर होंठों को रख दिया। आंटी के मुंह से शराब की गंध आ रही थी जो मुझे और ज्यादा उकसा रही थी।

मैं उसके होंठों को चूसने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं आंटी के पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत को सहला रहा था। उनकी चूत की गर्मी कपड़े के ऊपर से महसूस हो रही थी। वो भी मुझे अपनी बांहों लिये हुए अपनी टांगें खोलकर अपनी चूत को रगड़वा रही थी। बेड से आ रही गुलाबों की खुशबू दोनों को मदहोश कर रही थी।

अब मैंने आंटी को पलटा दिया और उसका ब्लाउज खोलने लगा। मैंने उसकी पीठ से ब्लाउज को हटा दिया। उसने नीचे से ब्रा भी नहीं डाली हुई थी। मैं उसकी गोरी चिकनी पीठ पर चुम्बन देने लगा। आंटी हल्के हल्के सिसकारियां लेने लगी। उसके चूतड़ों का ऊपरी हिस्सा पेटीकोट के नाड़े के ऊपर तक दिख रहा था।

उस वक्त उसकी गांड बहुत ही मस्त लग रही थी। पीठ को चूमने के बाद मैंने आंटी को सीधा किया और उसके चूचों को चूसने लगा। आज उसकी चूचियों से अलग ही खुशबू आ रही थी। उनके बड़े बड़े निप्पल कुछ ज्यादा ही रसीले लग रहे थे। मैं जोर जोर से निप्पलों को काटने लगा और वो आह्ह… आह्ह… करते हुए मेरे सिर के बालों में हाथ फिराने लगी। मेरा दूसरा हाथ आंटी की चूत को रगड़े जा रहा था।

आंटी का हाथ अब मेरे ओअर पर आ गया था और वो मेरे लंड को जोर जोर से सहला रही थी। मैंने जोर से उसके निप्पल पर काटा तो आंटी ने मेरे लंड को जोर से भींच दिया और मेरी भी आह्ह… निकल गयी। वो जोर जोर से मेरे लंड की मुट्ठ मारने लगी। अब मुझसे रुका न गया और मैंने लोअर को नीचे खींच दिया। आंटी ने मेरी चड्डी के ऊपर से मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया और तेजी से सहलाने लगी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

अब मैंने अपनी अंडरवियर भी निकाल दी और आंटी की गर्दन पकड़ कर नीचे अपनी जांघों की ओर दबा दी। उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगी। उनकी गर्म, गीली जीभ मेरे सुपारे पर घूम रही थी। मैं पीठ के बल पीछे गिर गया और आंटी के सिर को अपने लंड पर दबाते हुए आंख बंद करके लंड चुसवाने का मजा लेने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

वो मेरे लंड को पूरा गले तक लेने की कोशिश कर रही थी और मैं कहीं आनंद के आसमान में उड़ रहा था। अपने दोनों हाथों को मैंने मोड़कर अपनी गर्दन के पीछे कर लिया और आराम से टांगें फैलाकर लंड चुसवाने लगा। मेरी आंखें बंद थीं और मेरे मुंह से आनंद के सीत्कार फूट रहे थे।

आंटी मेरे लंड को बार बार जीभ लगाकर चूस रही थी। जब भी उसकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर लगती थी तो मैं एकदम से सिसकार उठता था। वो मेरी गोटियों को भी साथ साथ सहला रही थी। आज वो मेरे लंड की कुछ ज्यादा ही दीवानी लग रही थी। शायद गोली का असर पूरा चढ़ गया था। ऊपर से हम दोनों ने शराब भी पी रखी थी।

आंटी ने जी भरकर मेरे लंड को चूसा। जब उसकी चूत में खुजली उठी तो उसने लंड को मुंह से निकाल दिया। वो ऊपर आकर मेरे होंठों को चूसने लगी। मैंने उसके पेटीकोट में हाथ दे दिया और उसकी पैंटी में घुसा दिया। चूत पर मेरा हाथ जा लगा। आंटी की चूत एकदम से चिपचिपा गयी थी। मैंने चूत में उंगली दे दी और अंदर बाहर करते हुए आंटी के होंठों को चूसता रहा।

कुछ ही देर में आंटी पागल हो गयी और मेरे कपड़े फाड़ने लगी। मैं समझ गया कि आंटी अब लंड के बिना नहीं रह सकती है। उसने मेरे कपड़ों को खींच कर मुझे पूरा नंगा कर दिया। फिर मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और उसका पेटीकोट और पैंटी एक साथ उतार दिया। अब वो मेरे सामने नंगी थी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैं उसकी मखमली गुलाबी चूत को चाटने लगा। उनकी चूत का रस मीठा-नमकीन था, जीभ पर फैल रहा था। उसकी चूत में जीभ देकर अंदर तक घुमाने लगा। आंटी मेरे सिर को पकड़ कर चूत में दबाने लगी। अपनी टांगों में उसने मेरे सिर को बहुत जोर से जकड़ लिया था। मेरा पूरा मुंह आंटी की चूत में धंसा हुआ था।

वो तेजी से अपनी गांड को ऊपर नीचे करते हुए अपनी चूत को चुसवा रही थी। उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह… विनय… मेरे राजा… खा ले मेरी चूत को… आह्ह… बहुत मजा देता है रे तू… मेरे पति… आह्ह मैं तेरी पत्नी… तेरी चुदाई की दीवानी… चोद दे… फाड़ दे। आंटी ने ऐसे कहते हुए इतनी जोर से मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबाया कि मेरी सांस ही रुक गयी।

उसकी चूत से एक गर्म फव्वारा फूट पड़ा और मेरा मुंह उसकी चूत के रस से सराबोर हो गया। आंटी की चूत का सारा पानी मैंने पी लिया और चूत को चाटकर साफ कर दिया। वो उठी और फिर से मेरे लंड को चूसने लगी। लग रहा था जैसे मेरे लंड को आकर खाकर ही दम लेगी। मैंने मुश्किल से लंड छु़ड़ाया और फिर से उसको बेड पर पटक लिया।

वो बोली- विनय… मेरे पति… अपनी इस कल्पना को आज खूब चोदना।

मैं उसकी चूत को रगड़ते हुए कहा- हां मेरी जान… आज तेरा पति बनकर तेरी चुदाई करूंगा।

मैं उसके ऊपर आ गया और लन्ड को उसकी मखमली गुलाबी चूत में रख दिया। उसकी चूत पर लंड को रगड़ने लगा तो वो तड़प उठी और अपनी गर्म, गीली चूत को नीचे से उठाकर मेरे लंड पर रगड़वाने लगी। लंड का टोपा मैंने उसकी चूत पर सेट किया और एक धक्का दे दिया। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मेरा लंड आंटी चूत में जा घुसा और वो एकदम से चिल्लाई। मैंने उसके मुंह को दबा लिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा। मैं इतनी कसकर दबा रहा था कि उसकी चूचियों में खून उतर आया और गोरी चूचियां एकदम से लाल हो गयीं। चूचियों के दर्द में वो चूत का दर्द भूल गयी। फिर मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और धीरे धीरे उसकी चूत में लंड को चलाने लगा।

कुछ देर के बाद वो खुद ही गांड मटकाने लगी। मैंने अपना लौड़ा तीसरे गीयर में कर दिया और झटकों की रफ्तार बढ़ा दी। मैं तेजी से उसकी चूत को पेलने लगा और पूरा कमरा आह्ह… आह्ह… आईई… ओह्ह… उफ्फ… हाह्ह… चोदो… आह्ह… और चोदो… जैसी आवाजों से गूंज उठा। उसके दो मिनट बाद ही उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया।

उसे उठाकर फिर मैंने गोद में कर लिया और झटके मारने लगा। उसकी चूचियां मेरे मुंह में आने लगीं। मैं तेज़ झटके मारने लगा और उसकी आवाज तेज होने लगी। कल्पना की चूत अब लंड का मज़ा लेने लगी। फिर मैं खड़ा हुआ और लंड को उसके मुंह में डाल दिया। वो तेजी से रंडियों की तरह मेरे लौड़े को चूसने लगी। उसके बाद मैंने लंड निकलवा दिया और नीचे लेट गया। वो ऊपर आ गयी और मेरे लंड पर बैठने लगी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

धीरे धीरे उसने मेरे लंड को चूत में ले लिया और बैठकर चुदने लगी। नीचे से मैंने भी झटके मारने शुरू कर दिये। धीरे धीरे उसकी सिसकारियां और मेरे लन्ड की रफ्तार तेज होने लगी। अब वो मेरे लंड पर खूब उछलने लगी और मैं भी तेज़ तेज़ झटके मारने लगा। फच-फच… फच-फच की आवाज से पूरा कमरा गूंज उठा। मेरे झटके से उसकी सिसकारी निकल जाती थी।

फिर मैंने लंड ढीला छोड़ दिया और वो खुद ही झटका मारने लगी। अपनी चूचियों को दबाते हुए वो चुद रही थी। मेरा लंड पूरा उसकी चूत की जड़ में जाकर ठोक रहा था जिससे उसे और ज्यादा मजा आ रहा था। इसी मजे के चलते वो दो-तीन मिनट के बाद फिर से झड़ गयी। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैंने अब उसको बिस्तर पर पेट के बल लिटा लिया और उसकी गान्ड में थूक लगा दिया। थूक लगाकर मैं उसकी गांड में मसाज करने लगा। वो सिसकारियां भर रही थी। उसकी गांड अंदर से बहुत गर्म थी। वो गांड में लेने के लिये मना करने लगी लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और लन्ड पर तेल लगाया। फिर तेल उसकी गांड में भी डाला और उंगली से अंदर तक चोदने लगा। उसकी गांड अंदर तक चिकनी हो गयी। उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बना लिया और अपना लौड़ा उसकी गांड में घुसा दिया। वो छटपटाने लगी लेकिन मैंने गांड को जोर से दबाया हुआ था।

वो रोने चिल्लाने लगी तो मैंने उसको सहला कर शांत किया। फिर उसकी चूचियों से खेलने लगा। कुछ देर के बाद उसकी गांड ने लंड को एडजस्ट कर लिया और मेरा पूरा लंड आराम से उसकी गांड में समा गया। धीरे धीरे मैंने आंटी की गांड चुदाई शुरू की। धीरे धीरे मैं मेरे लौड़े को अंदर बाहर करने लगा।

कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : जवान साली की वासना की आग बुझाई

थोड़ी देर बाद कल्पना की गांड में मजा आने लगा तो फिर मैंने लंड की रफ्तार बढ़ा दी और तेजी से लंड को अंदर-बाहर करने लगा। अब वो भी धीरे धीरे सिसकारियां भरने लगी। मुझे भी उसकी गांड चोदने में गजब का मजा आ रहा था। उसके चूतड़ों पर चांटा मार मारकर मैं उसे चोद रहा था। मैंने उसके चूतड़ों को लाल कर दिया था।

मैं पहली बार कल्पना की गांड चोद रहा था। वो भी मस्ती में चुदवा रही थी। फिर मैंने पूरा लंड अंदर देकर और बाहर निकाल कर फिर से अन्दर देना शुरू किया। उसकी गांड का छेद पूरा खुल गया। एक बार फिर से मैंने रफ्तार पकड़ी और फिर दो मिनट की चुदाई के बाद मेरा पानी निकलने को हो गया। “Sexy Aunty Ki Suhagrat”

मैंने पूछा- कहां निकालना है?

वो बोली- चूत में निकालो।

मैंने लंड को गांड से निकाल कर चूत में दे दिया और चोदने लगा। एक बार फिर मैंने लंड को निकाला और उसकी चूत के रस से सने लौड़े को उसके मुंह में दे दिया। वो लौड़ा पूरा चूस गयी। अब फिर से मैंने उसकी चूत में लंड डाला और चोदने लगा। कुछ ही पल के बाद मेरा वीर्य निकलने को हो गया और मैं तेजी से उसकी चूत में लंड को ठोकने लगा।

फिर एकाएक मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी और मैं आंटी की चूत में झड़ने लगा। इतने में ही उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। मैं हाँफते हुए उसके ऊपर ही गिर गया। हम दोनों निढाल हो गये थे। इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद आंटी का पूरा बदन लाल-नीला हो गया था।

फिर हमें कब नींद आई कुछ नहीं पता चला। दारू और चुदाई के नशे में होश ही नहीं रहा था कि कहां पड़े हुए हैं। सुबह ही आंख खुली। फिर मैं अपने रूम में चला गया। अंकल तीन दिन तक नहीं थे। मैंने हर रोज आंटी की चुदाई की और उसके साथ बहुत मजा लिया। आंटी भी बहुत खुश हो गयी थी। तीन दिन तक उसकी चूत को विनय का लंड मिल गया था। इस तरह से आंटी ने मेरे साथ अपनी सुहागरात मनाई और मैंने भी पति बनकर उसकी खूब चुदाई की।

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