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माँ को चुदवाने के प्लान में थी दीदी

December 22, 2025 by crazy

Bhai Bahan Sex Masti

मैं जतिन, उम्र 22 साल, मेरी फैमिली में चार लोग हैं। मैं, मेरी दीदी प्रिया, उम्र 25 साल, स्लिम फिगर, 34-28-36, लंबे काले बाल, और चेहरा ऐसा कि कोई भी देखकर दीवाना हो जाए। मेरी मम्मी, उम्र 45 साल, अभी भी जवानी में ढलती हुई, 36-30-38 का फिगर, गोरी चमड़ी, और आँखें जो हर बार कुछ ना कुछ छुपाती सी लगती हैं। Bhai Bahan Sex Masti

मेरे पापा, उम्र 47 साल, बिजनेस मैन, ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं। पिछली कहानी में आपने पढ़ा था कि कैसे मैं और प्रिया दीदी का रिश्ता भाई-बहन से आगे बढ़ गया और हम दोनों ने चुदाई की दुनिया में कदम रख दिया। हम दोनों का रिश्ता अब पूरी तरह से बदल चुका था।

हम हर दो-तीन दिन में चुदाई करते थे। प्रिया दीदी की चूत की गर्मी और मेरे लंड का जोश हर बार हमें एक-दूसरे के और करीब ले आता था। हम दोनों को अब इसकी आदत सी हो गई थी। हर बार जब हम अकेले होते, दीदी की आँखों में वो शरारत और मेरे दिल में वो आग जल उठती थी।

लेकिन अब कहानी में एक नया मोड़ आने वाला था, जो मेरे और दीदी के रिश्ते को और भी उलझा देगा। एक सुबह की बात है। मैं और प्रिया दीदी रात भर चुदाई के बाद थककर सो गए थे। रात को हमने इतना जोश में सेक्स किया था कि दीदी की ब्रा और पैंटी बेड के किनारे पड़ी थीं।

मैं सुबह अपने रूम में चला गया था। दीदी अपने रूम में अकेली सो रही थीं। तभी मम्मी दीदी को उठाने उनके रूम में आईं। दीदी का रूम का गेट खुला था, क्योंकि रात को हम इतने थके थे कि गेट लॉक करना भूल गए। मम्मी अंदर आईं और दीदी को ब्रा-पैंटी में बेड पर लेटा देखकर गुस्से से लाल हो गईं।

मम्मी ने गुस्से में दीदी को झकझोरते हुए कहा, “प्रिया, ये क्या तमाशा है? मैंने तुझे कितनी बार मना किया कि ऐसे आधी नंगी मत सोया कर!”

प्रिया दीदी नींद में थीं, लेकिन मम्मी की आवाज़ सुनकर हड़बड़ा कर उठ बैठीं। अपनी ब्रा को ठीक करते हुए बोलीं, “सॉरी मम्मी, लेकिन रात को ऐसे सोने में ही मज़ा आता है। दिनभर तो टाइट कपड़ों में घूमते हैं, रात को तो थोड़ी राहत चाहिए।”

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मम्मी का गुस्सा और बढ़ गया। “राहत चाहिए तो कम से कम दरवाजा तो लॉक कर लिया कर। घर में तेरा भाई है, पापा हैं, तुझे इतनी भी अक्ल नहीं?”

प्रिया दीदी अब थोड़ा गुस्से में आ गईं। “मम्मी, आप मुझ पर क्यों चिल्ला रही हैं? बस गेट खुला रह गया, क्या हो गया? और वैसे भी, आप तो खुद पापा के साथ हर रात ब्रा-पैंटी में सोती होंगी। आपको तो पापा सपोर्ट करते होंगे, फिर मुझे क्यों रोक रही हैं?”

मम्मी का चेहरा अचानक उदास हो गया। “तेरे पापा तो अब कुछ करते ही नहीं…” इतना कहकर मम्मी रुक गईं, जैसे कुछ छुपाना चाहती हों। फिर बिना कुछ और बोले, उदास चेहरा लिए कमरे से बाहर चली गईं। प्रिया दीदी को मम्मी की ये बात अजीब लगी। वो सोच में पड़ गईं कि मम्मी बार-बार ऐसी बातें क्यों करती हैं और फिर चुप क्यों हो जाती हैं। दीदी ने कपड़े पहने और तैयार होकर मेरे रूम में आईं। मुझे बेड पर लेटा देखकर वो मेरे पास आईं और मेरे होंठों पर एक गर्म सा किस दे दिया।

“गुड मॉर्निंग, मेरे प्यारे भाई,” दीदी ने शरारती अंदाज़ में कहा।

मैंने दीदी को अपनी बाहों में खींच लिया और बोला, “गुड मॉर्निंग, मेरी जान।” मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और उनके होंठों को चूमने लगा। उनकी साँसें तेज हो रही थीं, और मैंने उनके टॉप के ऊपर से उनके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया। दीदी ने हल्का सा विरोध किया, “जतिन, रुक जाओ, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।”

मैंने चूमना बंद किया और पूछा, “क्या हुआ, दी? सब ठीक है ना?”

दीदी ने मम्मी वाली पूरी बात बताई। कैसे मम्मी उदास हो गई थीं, और कैसे वो बार-बार कहती हैं कि पापा कुछ करते नहीं। मैंने ध्यान से सुना और बोला, “दी, लगता है कुछ गड़बड़ है। तुम ऐसा करो, आज जब पापा ऑफिस चले जाएँ, मैं भी कॉलेज के लिए जल्दी निकल जाऊँगा। तुम मम्मी के साथ अकेले में बात करो और पता लगाओ कि माजरा क्या है।”

प्रिया दीदी ने सहमति में सिर हिलाया। “हाँ, ये ठीक रहेगा। मैं पहले मम्मी से माफ़ी माँगूँगी, फिर धीरे-धीरे बात निकालूँगी।”

मैंने दीदी को फिर से अपनी बाहों में खींच लिया। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे से मिल गए। मैंने दीदी के टॉप के नीचे हाथ डाला और उनकी ब्रा के ऊपर से उनके मम्मों को सहलाने लगा। दीदी की साँसें और तेज हो गईं। “आह्ह… जतिन, अभी नहीं… तुझे जल्दी जाना है,” दीदी ने हँसते हुए कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में वो शरारत थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैंने हल्का सा दबाव डाला और बोला, “बस थोड़ा सा मज़ा, दी।” मैंने उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और उनके निप्पल्स को उंगलियों से सहलाने लगा। दीदी की आँखें बंद हो गईं, और वो “उम्म… आह्ह…” की आवाज़ें निकालने लगीं। मैंने उनके निप्पल्स को हल्का सा चूमा, और उनकी चूत को जीन्स के ऊपर से सहलाया। दीदी ने मुझे धक्का देकर हँसते हुए कहा, “बस कर, बदमाश! अब तैयार हो जा।”

मैं हँसते हुए उठ गया और तैयार होने चला गया। दीदी भी कॉलेज के लिए तैयार होने लगीं। ब्रेकफास्ट के बाद पापा ऑफिस चले गए, और मैं भी कॉलेज के लिए निकल गया। अब घर में सिर्फ दीदी और मम्मी थीं। प्रिया दीदी ने मौका देखकर मम्मी के पास जाकर उन्हें गले लगाया। “मम्मी, मुझे माफ़ कर दो। सुबह मैंने आप पर गुस्सा कर दिया।”

मम्मी ने हल्की सी मुस्कान दी, लेकिन उनकी आँखों में उदासी साफ दिख रही थी। “ठीक है, प्रिया। लेकिन मेरा मन अभी भी उदास है।”

दीदी ने मौका देखकर कहा, “मम्मी, मुझे आपसे एक बात पूछनी है। लेकिन पहले आप वादा करो कि आप मुझे डाँटेंगी नहीं।”

मम्मी ने हैरानी से देखा। “पहले बता, क्या बात है?”

“नहीं मम्मी, पहले आप वादा करो,” दीदी ने जिद की।

मम्मी ने हँसते हुए कहा, “ठीक है, वादा किया। अब बता, क्या पूछना है?”

दीदी ने मम्मी का हाथ अपने सिर पर रखवाया और बोली, “मम्मी, मेरी कसम। अब जो भी पूछूँगी, सच-सच बताना।”

मम्मी थोड़ा घबरा गईं। “प्रिया, ये क्या किया तूने? ये गलत है।”

“मुझे नहीं पता, मम्मी। बस मुझे सच चाहिए,” दीदी ने गंभीर स्वर में कहा।

मम्मी ने गहरी साँस ली। “ठीक है, पूछो। मैं सच बोलूँगी।”

दीदी ने सीधे सवाल दागा, “मम्मी, आप सुबह क्यों उदास हो गई थीं? और ये जो आप बार-बार कहती हैं कि पापा कुछ करते नहीं, वो क्या बात है? आप हर बार बोलते-बोलते रुक क्यों जाती हैं?”

मम्मी ने नज़रें झुका लीं। “ऐसा कुछ नहीं है, प्रिया। छोड़ दे ये बात।”

“मम्मी, आपने कसम खाई है। सच बताइए,” दीदी ने दबाव डाला।

मम्मी चुप रहीं, लेकिन दीदी ने फिर कहा, “प्लीज मम्मी, मुझे बताइए। मैं आपकी बेटी हूँ। आप मुझसे कुछ नहीं छुपा सकतीं।”

मम्मी ने गहरी साँस ली और फिर चुप हो गईं।

प्रिया दीदी मम्मी के सामने बैठी थीं, उनकी आँखों में जिज्ञासा और चिंता दोनों थीं। दीदी ने मम्मी का हाथ पकड़कर फिर कहा, “मम्मी, प्लीज़ बताइए ना। आपने मेरी कसम खाई है, अब सच-सच बताना होगा।”

मम्मी ने गहरी साँस ली, उनकी आँखें थोड़ी नम हो गईं। “ठीक है, प्रिया, मैं बताती हूँ। लेकिन तू ये बात किसी को नहीं बताएगी, वादा कर।”

“पक्का मम्मी, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी,” दीदी ने तुरंत वादा किया।

मम्मी ने धीरे से बोलना शुरू किया, “बात ये है, प्रिया, कि तेरे पापा अब मुझसे पहले जैसा प्यार नहीं करते। वो दिन-रात बस अपने काम में डूबे रहते हैं। मैं हर रात उनका इंतज़ार करती हूँ कि शायद वो आएँ, मुझसे बात करें, मुझे प्यार करें, मेरे साथ वक्त बिताएँ। लेकिन ऐसा कुछ होता ही नहीं। मैं अकेली पड़ी रहती हूँ। कई बार मन करता है कि किसी से अपनी बात शेयर करूँ, लेकिन किससे कहूँ? इसीलिए मैं बोलते-बोलते रुक जाती हूँ।”

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दीदी मम्मी की बात सुनकर हैरान थीं। “मम्मी, आप मुझसे तो ये सब कह सकती हैं। मैं आपकी बेटी हूँ। अब आप वादा करो कि अगर कोई भी ऐसी बात होगी, तो आप मुझसे ज़रूर कहेंगी। मैं आपको समझूँगी और आपका साथ दूँगी।”

मम्मी ने हल्की सी मुस्कान दी। “थैंक यू, बेटा। तू इतना समझती है, इसका दिल से शुक्रिया। मैं अब तुझसे सब कुछ शेयर करूँगी।”

फिर दीदी ने मम्मी को गले लगाया। मम्मी ने भी दीदी को ज़ोर से गले लगाया। ये गले लगना थोड़ा अलग था। मम्मी ने दीदी को इतनी देर तक गले लगाए रखा कि दीदी को हँसते हुए कहना पड़ा, “मम्मी, अब छोड़ो ना, कितना टाइट पकड़ लिया!” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मम्मी ने हँसकर कहा, “बेटा, आज इतना अच्छा लग रहा था। ध्यान ही नहीं रहा।”

इसके बाद दीदी मम्मी को बाय बोलकर कॉलेज चली गईं। दिनभर कुछ ख़ास हुआ नहीं। रात को जब सब सो गए, मैं और दीदी फिर दीदी के रूम में मिले। जैसे ही मैंने दीदी को गले लगाया, उनकी नरम-नरम चूचियाँ मेरे सीने से टकराईं। दीदी ने मुझे देखकर कहा, “जतिन, आज मम्मी ने मुझे वही गले लगाया था, जैसा तू अभी कर रहा है। और हाँ, मम्मी ने बताया कि पापा अब उनसे प्यार नहीं करते। शायद उन्हें भी सेक्स की कमी खल रही है।”

मैंने दीदी की कमर पकड़कर उन्हें और करीब खींचा। “हाँ दी, बिना चुदाई के तो कोई भी उदास हो जाएगा। शायद मम्मी को भी लंड की ज़रूरत है।”

दीदी ने शरारती अंदाज़ में मेरी तरफ देखा। “हाँ, ऐसा ही लगता है। लेकिन अब क्या करें?”

मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया। “दी, अगर तुम बुरा ना मानो, तो एक बात बोलूँ?”

दीदी ने मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्मा लिया और बोली, “बोल ना, मेरी जान।”

मैंने धीरे से कहा, “जैसे तुम सेक्स के लिए तरस रही थीं, वैसे ही मम्मी भी तरस रही हैं। क्यों ना हम उन्हें भी अपने साथ जोड़ लें? घर की बात घर में रहेगी, और मम्मी भी खुश हो जाएँगी।”

दीदी ने एक पल सोचा, फिर बोली, “मम्मी के हिसाब से तो ये गलत होगा। लेकिन एक औरत के हिसाब से देखूँ, तो ये सही लगता है।”

बातें करते-करते हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतार दिए। दीदी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थीं, और मैं सिर्फ़ अपने लोअर में। मेरा 7 इंच का लंड पहले से ही खड़ा था। दीदी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और हँसते हुए बोली, “लगता है इस लंड को अब मुझे शेयर करना पड़ेगा। एक बेटी होने के नाते मम्मी की मदद तो करनी ही पड़ेगी।”

मैंने हँसकर कहा, “हाँ दी, मम्मी के लिए इतना तो बनता है। और इससे हमें भी और मज़ा आएगा। वैसे भी पापा तो अब ज्यादातर बाहर ही रहते हैं।”

दीदी ने मेरे लंड को और ज़ोर से पकड़ा और बोली, “हाँ, बहुत मज़ा आएगा। ठीक है, फिर ये फाइनल कि हम मम्मी को भी जोड़ेंगे। लेकिन अभी अपनी बहन की चूत की आग बुझा, फिर मम्मी के बारे में सोचेंगे।”

मैंने दीदी की ब्रा उतार दी। उनकी 34 साइज़ की चूचियाँ बाहर आ गईं। मैंने उनके निप्पल्स को मुँह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह… जतिन… और ज़ोर से चूस… उम्म्म…” दीदी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मैंने एक हाथ से उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाना शुरू किया। दीदी की चूत पहले से ही गीली थी। मैंने उनकी पैंटी उतारी और उनकी चिकनी चूत को देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। “Bhai Bahan Sex Masti”

मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और उनकी टाँगें फैलाईं। उनकी चूत की गुलाबी पंखुड़ियाँ मेरे सामने थीं। मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू किया। “आह्ह… जतिन… उफ्फ… कितना मज़ा आ रहा है…” दीदी की सिसकारियाँ और तेज हो गईं। मैंने उनकी चूत के दाने को चूसा और अपनी एक उंगली अंदर डाल दी। दीदी की चूत इतनी गीली थी कि मेरी उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी।

“जतिन… अब और मत तड़पाओ… अपना लंड डाल दो… आह्ह…” दीदी ने मुझसे मिन्नत की। मैंने दीदी को 69 की पोजीशन में लाया। मैं उनकी चूत चाट रहा था, और दीदी मेरा लंड मुँह में लेकर चूस रही थीं। “उम्म… दी, तुम तो लंड चूसने में मास्टर हो…” मैंने सिसकारी भरी। दीदी ने मेरे लंड को गले तक लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं।

कुछ देर बाद मैंने दीदी को पलटा और उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। “आह्ह… जतिन… कितना मोटा है तेरा लंड… उफ्फ…” दीदी की सिसकारियाँ और तेज हो गईं। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ दीदी की चूचियाँ हिल रही थीं। “जतिन… और ज़ोर से… फाड़ दे मेरी चूत को…” दीदी चिल्ला रही थीं।

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मैंने स्पीड बढ़ाई और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। “पच… पच… पच…” की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। दीदी की चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी। मैंने दीदी को घोड़ी बनाया और पीछे से उनका भोसड़ा चोदने लगा। “आह्ह… जतिन… और ज़ोर से… उफ्फ… कितना मज़ा आ रहा है…” दीदी की सिसकारियाँ मुझे और जोश दिला रही थीं। मैंने उनकी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे। “Bhai Bahan Sex Masti”

करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने दीदी की चूत में ही अपना माल छोड़ दिया। “आह्ह… जतिन… कितना गर्म है तेरा माल…” दीदी ने सिसकारी भरी। हम दोनों थककर बेड पर लेट गए। दीदी मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जतिन, अब मम्मी को भी ऐसा ही मज़ा देना होगा।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

रात को हमने एक प्लान बनाया। अगले दिन दीदी जल्दी कॉलेज चली गईं। जाते-जाते मम्मी से बोलीं, “मम्मी, जतिन को ज़रूर उठा देना। वो बहुत गहरी नींद में सोता है। ज़ोर से हिलाना पड़ेगा।”

दीदी ने मुझे पहले ही उठा दिया था और एक लंबा चुम्मा देकर गई थीं। “जतिन, अब तू सोने की एक्टिंग करना। देखते हैं मम्मी क्या करती हैं,” दीदी ने शरारती अंदाज़ में कहा।

सुबह मम्मी मुझे उठाने मेरे रूम में आईं। मैं सिर्फ़ लोअर में था, बिना अंडरवेयर के। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था, और लोअर में साफ दिख रहा था। मम्मी ने मेरे लंड को देखा और कुछ देर रुक गईं। फिर उन्होंने मुझे हिलाकर उठाने की कोशिश की।

मैंने एक्टिंग की और नहीं उठा। मैंने अपने लंड को हल्का सा हिलाया, जिसे मम्मी और ध्यान से देखने लगीं। वो मेरे और करीब आईं, मेरे लंड को गौर से देखा, और फिर मुझे ज़ोर से हिलाकर उठा दिया। “जतिन, उठ जा, देर हो रही है,” कहकर मम्मी जल्दी से चली गईं। “Bhai Bahan Sex Masti”

मैं उठा और तैयार होकर नीचे आया। मम्मी किचन में थीं। मैंने पीछे से जाकर मम्मी को गले लगाया। मेरा खड़ा लंड उनकी गाँड से टच हो रहा था। मम्मी ने कुछ नहीं कहा, बस चुप रही। मैंने थोड़ा और टाइट गले लगाया और उनकी पीठ को सहलाने लगा।

मम्मी ने धीरे से कहा, “बेटा, ये क्या कर रहा है?”

मैंने मासूमियत से कहा, “बस आपको गले लगा रहा हूँ, मम्मी।”

“लेकिन तूने पहले कभी ऐसा नहीं किया,” मम्मी ने थोड़ा हिचकते हुए कहा।

“तो पहले नहीं किया, तो अब नहीं कर सकता? अगर आपको अच्छा नहीं लगा, तो नहीं करूँगा,” मैंने कहा।

मम्मी ने हल्की सी मुस्कान दी। “नहीं बेटा, अच्छा लगा। और आज तो पहले से भी ज़्यादा अच्छा लगा।”

मम्मी की आवाज़ में एक अजीब सी खुशी थी। मैंने मौका देखकर पूछा, “तो मैं ऐसा कर सकता हूँ ना?”

मम्मी ने हँसते हुए कहा, “हाँ, बेटा, गले लगाने में कोई दिक्कत नहीं। लेकिन आज जैसा किया, वैसा किसी के सामने मत करना।”

मैंने हाँ में सिर हिलाया और बोला, “लव यू मम्मी!” मम्मी ने भी कहा, “लव यू टू, जतिन।”

फिर हम दोनों ने ब्रेकफास्ट साथ किया। ब्रेकफास्ट के दौरान मैंने कहा, “मम्मी, आज मैं आपको खिलाऊँ?”

मम्मी ने हैरानी से देखा। “क्या बात है, बेटा? आज मम्मी पर इतना प्यार क्यों?”

मैंने गंभीर होकर कहा, “मम्मी, मैं देखता हूँ कि आप पापा को बहुत मिस करती हैं। वो अब ज्यादातर बाहर रहते हैं। मैंने सोचा कि अब मैं आपको पापा की कमी नहीं महसूस होने दूँगा। मैं आपको वो सारा प्यार दूँगा जो पापा को देना चाहिए।”

मम्मी की आँखें नम हो गईं। वो उठीं और मुझे गले लगाया। इस बार उनका गले लगाना और गहरा था। मेरे सीने से उनकी चूचियाँ दब रही थीं, और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मम्मी ने कहा, “बेटा, तू मेरा इतना ख्याल रखता है।”

मैंने उनके आँसू पोंछे और गले लगाते हुए कहा, “मम्मी, अब आपको जो भी चाहिए, मुझसे कह देना। अब से मैं ही आपका सब कुछ हूँ।”

मम्मी की साँसें तेज हो रही थीं। मेरा लंड उनकी चूत के पास टच हो रहा था। मम्मी ने हल्का सा हिलने की कोशिश की, लेकिन गले नहीं छोड़ा। कुछ देर बाद हमने गले लगाना छोड़ा और ब्रेकफास्ट खत्म किया। फिर मैं कॉलेज जाने से पहले मम्मी के फोन में कुछ सेट कर दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैं कॉलेज जाने से पहले मम्मी के फोन में कुछ हॉट देसी चुदाई की कहानियाँ डाल गया था। माँ-बेटे, भाई-बहन, और माँ-बेटी की कहानियाँ, जो मम्मी के मन में आग लगा दें। कॉलेज से लौटते ही मैंने मम्मी को किचन में जाकर पीछे से गले लगाया। मेरा 7 इंच का लंड लोअर में तना हुआ था और उनकी गाँड से सट रहा था। मैंने उनके गाल पर एक गर्म सा चुम्मा लिया और बोला, “मम्मी, आज आप कितनी प्यारी लग रही हैं।” “Bhai Bahan Sex Masti”

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मम्मी ने हल्का सा शरमाते हुए कहा, “जतिन, तू भी ना, आजकल बड़ा प्यार जता रहा है। कुछ चाहिए क्या?” उनकी आवाज़ में शरारत थी।

मैंने मासूमियत से कहा, “नहीं मम्मी, बस आपको देखकर मन करता है कि आपको और प्यार दूँ। पापा तो अब घर पर कम रहते हैं, तो आपकी खुशी का ख्याल तो मुझे ही रखना है।” मम्मी ने मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा और अपना काम करने लगीं। मैंने चुपके से उनके फोन को चेक किया। मेरे होश उड़ गए—मम्मी ने सारी कहानियाँ पढ़ ली थीं! मेरे चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गई।

शाम को प्रिया दीदी कॉलेज से लौटीं। मैंने उन्हें ये बात बताई। दीदी की आँखें चमक उठीं। “जतिन, हमारा प्लान तो धमाल मचा रहा है!” दीदी ने जोश में कहा। हम दोनों मम्मी को किचन में काम करते देख रहे थे। दीदी ने मुझे पास बुलाया और मेरे होंठों पर एक लंबा, गीला चुम्मा जड़ दिया। हम पाँच मिनट तक एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे। दीदी की साँसें तेज हो रही थीं, और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। “Bhai Bahan Sex Masti”

दीदी ने मेरे कान में फुसफुसाया, “अब हमें और आगे बढ़ना है। मैं फ्रेश होकर आती हूँ। रात को तुझे दो बातें बताऊँगी।” मैं सोच में पड़ गया कि दीदी क्या बताने वाली हैं, लेकिन मैंने अपना प्लान चालू रखा। शाम को मम्मी और दीदी किचन में खाना बना रही थीं। मैं वहाँ गया और मम्मी को फिर से पीछे से गले लगाया। मेरा लंड उनकी गाँड पर रगड़ रहा था। दीदी ने ये देखकर मज़ाक में कहा, “अरे वाह, जतिन! मम्मी पर तो तेरा पूरा ध्यान है आजकल।”

मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ दी, पापा तो अब घर पर रहते नहीं। मम्मी को प्यार देना तो मेरा काम है।”

दीदी ने शरारती अंदाज़ में कहा, “फिर तो मम्मी से पूछ लो, उन्हें ये प्यार चाहिए कि नहीं।”

मैंने मम्मी की तरफ देखा और बोला, “मम्मी, मैंने तो पहले ही कह दिया था। अब पापा की जगह हम दोनों आपको ढेर सारा प्यार देंगे।”

मम्मी ने हल्का सा शरमाते हुए कहा, “हाँ, प्रिया, जतिन ने मुझसे बात कर ली थी। तुम दोनों मेरा इतना ख्याल रखते हो, मुझे कोई शिकायत नहीं। तुम जो चाहो, वो कर सकते हो।” मम्मी की आवाज़ में एक अजीब सी गर्मी थी।

दीदी ने हँसकर कहा, “वाह, मम्मी, आपने तो हरी झंडी दे दी!” फिर दीदी ने भी मम्मी को गले लगाया। मम्मी ने हम दोनों को पलटकर गले लगाया, और उनकी आँखें हल्की नम थीं।

दीदी ने मज़ाक में कहा, “मम्मी, ये जतिन तो सिर्फ़ आपको प्यार देता है। मुझे तो भूल ही गया।”

मैंने हँसते हुए जवाब दिया, “अरे दी, मम्मी को तो मैं ज़्यादा प्यार करता हूँ।” ये कहते हुए मैंने मम्मी के गालों पर चुम्मे लेने शुरू कर दिए। मम्मी ने हल्का सा टोका, “जतिन, ये क्या? प्रिया ठीक कह रही है। तुम दोनों को बराबर प्यार करना चाहिए।”

मैंने हँसकर कहा, “ठीक है, मम्मी।” फिर मैंने दीदी को मम्मी के सामने टाइट गले लगाया और उनके गाल पर चुम्मा लिया। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था, और अब दीदी की गाँड से रगड़ रहा था।

दीदी ने मज़ाक में कहा, “नहीं, मैं मम्मी को ज़्यादा प्यार करती हूँ!” और वो भी मम्मी के गाल पर चुम्मे लेने लगीं। हम दोनों मम्मी के एक-एक गाल पर चुम्मे दे रहे थे। हमारा प्लान सही चल रहा था। फिर हमने जानबूझकर एक साथ मम्मी के होंठों पर चुम्मा ले लिया। “Bhai Bahan Sex Masti”

हम तीनों के होंठ एक पल के लिए टकराए। मैं और दीदी तुरंत पीछे हटे और माफ़ी माँगने लगे। “मम्मी, सॉरी, गलती से हो गया,” मैंने कहा।

मम्मी ने शरमाते हुए कहा, “कोई बात नहीं, बेटा। मैं समझ गई, गलती से हुआ। बस अब आपस में लड़ना बंद करो।” मम्मी की शरमाई हुई मुस्कान और उनकी आँखों में हल्की सी चमक बता रही थी कि वो इस पल को एंजॉय कर रही थीं।

मेरा लंड अभी भी तना हुआ था। मैंने मौके का फायदा उठाया और मम्मी को सामने से गले लगाया। मेरा लंड उनकी चूत पर दब रहा था। मैंने गले लगाते हुए उनके कानों में फुसफुसाया, “मम्मी, आप बहुत प्यारी हैं।” मम्मी ने कुछ नहीं कहा, बस हल्का सा मुस्कुराईं।

खाना बनने के बाद हम सबने साथ खाया और अपने-अपने रूम में चले गए। रात को दीदी का मैसेज आया। मैं उनके रूम में गया। दीदी ने मुझे देखते ही ज़ोर से गले लगाया और मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्मा जड़ दिया। मैंने भी उनके होंठ चूसने शुरू किए। उनकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने दीदी को दीवार से सटाया और उनके टॉप के ऊपर से उनकी 34 साइज़ की चूचियाँ दबाने लगा। “आह्ह… जतिन… और ज़ोर से…” दीदी सिसक रही थीं। “Bhai Bahan Sex Masti”

मैंने उनका टॉप उतारा और उनकी ब्रा के ऊपर से उनके निप्पल्स को चूमा। दीदी की सिसकारियाँ बढ़ रही थीं। “उम्म… जतिन… पहले मेरी बात सुन…” दीदी ने कहा।

मैंने उनके निप्पल्स चूसते हुए कहा, “बोलो, दी।”

दीदी ने बताया, “पहली बात, तूने जो कहानियाँ मम्मी के फोन में डाली थीं, वो उन्होंने सारी पढ़ लीं। और जब मैं फ्रेश होने गई थी, तो मैंने देखा कि मम्मी की पैंटी सुख रही थी। वो पूरी गीली थी। इसका मतलब मम्मी ने दिन में ही वो पैंटी धोई, यानी कहानियाँ पढ़ते हुए उनकी चूत गीली हो गई थी।”

मैंने दीदी की ब्रा उतारी और उनकी चूचियाँ चूसते हुए कहा, “वाह, दी, ये तो कमाल की खबर है। मतलब मम्मी भी अब गरम हो रही हैं।”

दीदी ने मेरे लंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और बोली, “हाँ, और दूसरी बात ये कि जब तूने शाम को मम्मी को गले लगाया था, तो मैंने देखा कि मम्मी का चेहरा लाल हो गया था। वो शरमा रही थीं, लेकिन उनकी आँखों में एक अलग सी खुशी थी।”

मैंने दीदी की पैंटी उतारी। उनकी चूत पहले से ही गीली थी। मैंने उनकी चूत को सहलाना शुरू किया। “आह्ह… जतिन… और ज़ोर से…” दीदी सिसक रही थीं। मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और उनकी टाँगें फैलाईं। उनकी गुलाबी चूत मेरे सामने थी। मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत चाटना शुरू किया। “उम्म… जतिन… कितना मज़ा आ रहा है…” दीदी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “Bhai Bahan Sex Masti”

मैंने उनकी चूत के दाने को चूसा और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। दीदी की चूत इतनी गीली थी कि मेरी उंगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं। “जतिन… अब डाल दे… और मत तड़पाओ…” दीदी ने मिन्नत की। मैंने अपना 7 इंच का लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। “आह्ह… जतिन… कितना मोटा है तेरा लंड…” दीदी चिल्ला उठीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : चोदने भाभी को गया माँ को चोद दिया

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। “पच… पच… पच…” की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। दीदी की चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं। “जतिन… और ज़ोर से… मेरी चूत फाड़ दे…” दीदी चिल्ला रही थीं। मैंने स्पीड बढ़ाई और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। फिर मैंने दीदी को घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चूत में लंड डाला। “आह्ह… जतिन… और ज़ोर से… उफ्फ…” दीदी की सिसकारियाँ मुझे और जोश दिला रही थीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे। बीच-बीच में मैंने दीदी की गाँड पर हल्का सा थप्पड़ मारा, जिससे वो और सिसक उठीं। “जतिन… तू तो जंगली हो गया… आह्ह…” दीदी की आवाज़ में मज़ा और शरारत थी। मैंने दीदी को फिर पलटा और उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं। इस बार मैंने उनकी चूत को और गहराई तक चोदा। “आह्ह… जतिन… तेरा लंड मेरी बच्चेदानी तक जा रहा है…” दीदी चिल्ला रही थीं।

करीब 25 मिनट की चुदाई के बाद मैंने दीदी की चूत में अपना माल छोड़ दिया। “आह्ह… जतिन… तेरा माल कितना गर्म है…” दीदी ने सिसकारी भरी। हम दोनों थककर बेड पर लेट गए। दीदी मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जतिन, अब मम्मी को भी यही मज़ा देना होगा।”

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