Muslim Cousin Sex Story
मामा के घर से लौटने के बाद मेरी जिंदगी एकदम बदल गई थी। अकरम, मेरा चचेरा भाई, जिसने मुझे पहली बार पूरा लंड चखाया था, अब रोज़ नए-नए बहाने ढूँढता। कभी घर खाली मिलता तो मुझे दीवार से सटाकर पीछे से पेल देता, कभी रात को छत पर ले जाकर मेरी सलवार नीचे सरका के घंटों चोदता। Muslim Cousin Sex Story
उसका लंड मोटा था, पर दानिश का उससे भी ज्यादा खतरनाक था। दानिश अकरम का बचपन का यार था, 25-26 साल का जवान, चौड़ा सीना, मांसल बाहें और पैंट में हमेशा उभरा हुआ भारी सामान। जब अकरम ने मुझे बताया कि दानिश भी मेरे साथ खेलना चाहता है, मैंने हँसते हुए कहा था, “दो-दो लंड मिल रहे हैं, मना काहे करना।” बस फिर तिकड़ी बन गई।
कभी अकरम अकेला, कभी दोनों मिलकर मुझे चोदते। मेरी चूत दिन-रात भरी रहती। पर धीरे-धीरे दानिश की नज़र मेरी माँ पर टिकने लगी। माँ उस वक्त 38 की थीं, लेकिन देखने में 30 की लगती थीं। गोरा रंग, भारी भर कमर, गोल-गोल चूतड़ और हमेशा चुस्त सलवार-कमीज़ में ढके हुए भरे हुए मम्मे।
घर में वो अक्सर बिना दुपट्टे के घूमती थीं, जिससे गहरी गले की कमीज़ में मम्मों की गोलाई साफ़ झलकती। दानिश जब भी आता, उसकी नज़र माँ के मम्मों पर अटक जाती। एक दिन अकरम ने मुझे चुपके से बताया, “तेरी माँ को दानिश ने पटा लिया है।”
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मैंने हँस कर टाल दिया, “पागल है क्या?”
पर वो बोला, “सच कह रहा हूँ। कल रात मैंने देखा, दानिश चाची के कमरे में घुसा था, दरवाज़ा अंदर से बंद था।”
मुझे पहले तो गुस्सा आया, फिर चूत में अजीब सी खुजली हुई।
मैंने कहा, “दिखा मुझे भी कभी।”
अकरम ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है, जिस दिन प्रोग्राम बनेगा, बुला लूँगा।”
तीन दिन बाद दोपहर के करीब दो बजे अकरम ने मेरे कमरे में आकर कान में फुसफुसाया, “चल, आज तुझे तेरी माँ की असली सूरत दिखाता हूँ।” मैंने फटाफट दुपट्टा डाला और उसके पीछे-पीछे ऊपर वाली मंज़िल पर चली गई। वो मुझे एक पुराने स्टोर रूम में ले गया, जिसकी खिड़की सीधे माँ के बेडरूम में खुलती थी।
खिड़की पर पुराना पर्दा था, हमने उसे हल्का सा खोलकर झाँकना शुरू किया। कमरे में माँ और दानिश थे। माँ ने गुलाबी रंग की सलवार-कमीज़ पहनी थी, दुपट्टा कंधे पर लटका हुआ। दानिश माँ के पीछे खड़ा था, दोनों हाथों से माँ के मम्मों को दबा रहा था। माँ हँस रही थीं, “अरे पागल, कोई देख लेगा।”
दानिश ने मुँह से माँ के कान को चाबा और बोला, “देख ले तो देख ले चाची, मैं तो आज तुम्हें नंगा करके ही छोड़ूँगा।”
फिर उसने माँ की कमीज़ ऊपर उठाई, ब्रा के हुक खोले और दोनों भारी मम्मे आज़ाद कर दिए। मम्मे इतने गोरे और सख्त थे कि उछल कर बाहर आए। दानिश ने एक मम्मा मुँह में लिया और चूसने लगा, चट्ट-चट्ट… चॉंप-चॉंप की आवाज़ें आने लगीं। माँ की साँसें तेज़ हो गईं, “आह दानिश… धीरे… कोई आ जाएगा।”
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दानिश ने हँसते हुए कहा, “कोई नहीं आएगा चाची, अकरम ने सब संभाल लिया है।” मैंने पीछे मुड़कर देखा, अकरम मुस्कुरा रहा था, उसका लंड पैंट में तना हुआ था। दानिश ने माँ की सलवार का नाड़ा खींचा, सलवार नीचे सरका दी। माँ ने नीली पैंटी पहनी थी, जो चूत की गोलाई को साफ़ दिखा रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दानिश ने पैंटी एक झटके में नीचे खींची और माँ को बेड पर धकेल दिया। माँ अब सिर्फ़ दुपट्टे में थीं। दानिश ने अपनी शर्ट और पैंट उतारी, अंडरवियर में उसका लंड उछल रहा था। उसने अंडरवियर भी उतार फेंका। उसका लंड देखकर मेरी साँस रुक गई। 9 इंच से ज्यादा लंबा, बेहद मोटा, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल और चमकदार।
माँ ने उसे देखकर जीभ से होंठ चाटे और बोलीं, “आज फिर ये राक्षस मेरी चूत फाड़ेगा?”
दानिश ने लंड हिलाते हुए कहा, “हाँ चाची, आज तुम्हारी चूत को पूरा नाप लूँगा।”
माँ घुटनों के बल बैठ गईं और दानिश का लंड हाथ में लेकर प्यार से सहलाने लगीं। फिर जीभ निकाल कर सुपारे को चाटा, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गोग्ग्ग, पूरा मुँह में ले लिया। दानिश ने माँ का सिर पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया। माँ की ग्ग्ग्ग… गों… गों… गोग्ग्ग की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। “Muslim Cousin Sex Story”
अकरम मेरे पीछे चिपका हुआ था, उसका लंड मेरी गांड के बीच में घुसा हुआ था। वो धीरे-धीरे रगड़ रहा था। मेरी चूत भीग कर पैंटी गीली कर चुकी थी। दानिश ने माँ को बेड पर लिटाया, दुपट्टा भी खींच फेंका। माँ अब एकदम नंगी थीं। दानिश ने माँ की टाँगें चौड़ी कीं और चूत चाटने लगा।
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माँ की कराहट शुरू हो गई, “आह दानिश… जीभ अंदर डाल… आह ह ह ह… ह्हीईई… चाट मेरी चूत को… पूरा रस पी ले।” दानिश की जीभ चूत के अंदर-बाहर हो रही थी, फच-फच… चर्र-चर्र की आवाज़ें आ रही थीं। माँ की गांड उछल रही थी। फिर दानिश ने उँगलियाँ डालीं, दो उँगलियाँ तेज़-तेज़ अंदर-बाहर करने लगा।
माँ चिल्लाने लगीं, “आअह्ह्ह… बस… उंगली से ही झड़ जाऊँगी… आह ह ह ह… ओह्ह्ह दानिश… तेरा लंड डाल ना अब।”
दानिश ने हँसते हुए कहा, “चाची, पहले आज का स्पेशल गेम खेल लो।”
माँ ने आँखें चमकाकर पूछा, “कौन सा गेम?”
दानिश बोला, “जो तुम्हें सबसे पसंद है, वही वाला।”
माँ जोर से हँस पड़ीं, “अरे वही स्लाइड वाला? चलो, आज तुझे भी मज़ा दूँगी।”
फिर दोनों ने मिलकर रजाइयाँ, गद्दे, तकिए इकट्ठा किए और बेड के पास एक ऊँचा ढेर बना दिया। माँ उस ढेर पर चढ़ गईं। नीचे दानिश लेट गया, लंड सीधा खड़ा। माँ ने दोनों टाँगें चौड़ी कीं, चूत के फाँक हाथ से खोल लिए और बोलीं, “दानिश तैयार है ना मेरे राजा?”
दानिश ने लंड पकड़ कर बोला, “जी चाची, आपकी चूत का इंतज़ार कर रहा है।”
माँ ने हँसते हुए कहा, “ये गेम मैं माया के पापा के साथ भी खेलती थी जब बहुत मस्ती चढ़ती थी। आज तुझे भी पूरा मज़ा दूँगी।”
फिर वो फिसलीं। दोनों टाँगें फैलाकर, चूत एकदम खुली हुई, रस टपकाता हुआ। सीधे दानिश के लंड पर आ गिरीं। घप्प्प से पूरा लंड माँ की चूत में गायब। एक झटके में जड़ तक घुस गया। माँ की चीख निकल गई, “आआअह्ह्ह्ह्ह दानिश… मादरचोद… पूरा अंदर… ओह्ह्ह्ह्ह… फाड़ दी मेरी चूत आज।”
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दानिश ने कमर ऊपर उठाई और तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए, ठप्प… ठप्प… ठपाक-ठपाक। माँ की गांड उछल-उछल कर लंड पर गिर रही थी। माँ चिल्ला रही थीं, “हाँ ऐसे ही… और ज़ोर से… चोद मुझे… तेरी रंडी बना दे आज… आह ह ह ह ह्हीईईई… मेरी चूत में आग लगा दे दानिश… ओह्ह्ह्ह ऊउइइइइ… झड़ने वाली हूँ।”
चूत से फच-फच-फचाक-फचाक की आवाज़ें आ रही थीं। दानिश ने माँ को गोद में उठाया और खड़े-खड़े चोदने लगा। माँ की टाँगें दानिश की कमर में लिपटी थीं। फिर दानिश ने माँ को बेड पर पटका, टाँगें कंधे पर रखीं और घप-घप-घप-घप करके पेलने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
माँ की आँखें पलट गईं, “बस दानिश… और तेज़… हाँ ऐसे ही… आह ह ह ह… आज मेरी चूत को अपना बना ले… ओह्ह्ह्ह्ह्ह… आ गया… झड़ रही हूँ… आअह्ह्ह्ह्ह्ह।”
माँ का बदन काँपने लगा, चूत से रस की फव्वारा छूट गया। दानिश भी हाँफते हुए बोला, “चाची मैं भी आने वाला हूँ… कहाँ डालूँ?”
माँ ने कराहते हुए कहा, “अंदर ही डाल… पूरी मालिश कर दे मेरी चूत के अंदर… आह ह ह ह।”
दानिश ने आखिरी जोरदार धक्के मारे और लंड को जड़ तक घुसाकर झड़ गया। माँ की चूत से वीर्य और रस का मिश्रण लुबक-लुबक बाहर बहने लगा। दोनों हाँफते हुए लेट गए। माँ ने दानिश के गाल पर किस किया और बोलीं, “कैसा लगा मेरा गेम?” दानिश ने हँसते हुए कहा, “चाची, इससे खतरनाक गेम मैंने जिंदगी में नहीं खेला।”
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इतना देखकर अकरम मुझे खींचकर स्टोर रूम से बाहर ले आया। मेरी टाँगें काँप रही थीं, चूत से रस पैंटी में बह रहा था। अकरम ने मुझे अपने कमरे में ले जाकर दरवाज़ा बंद किया और बिना एक शब्द बोले मेरी सलवार नीचे खींच दी। मैंने खुद अपनी पैंटी उतार फेंकी।
अकरम ने मुझे दीवार से सटाया और पीछे से पूरा लंड एक झटके में घुसेड़ दिया। मैं चिल्लाई, “आह अकरम… धीरे… अभी तो माँ की चुदाई देखकर गर्म हूँ।” वो हँसा और बोला, “अब मेरी बारी है, आज तुझे भी स्लाइड गेम सिखाऊँगा।” फिर उसने मुझे घंटों चोदा, जब तक मैं बेहोश सी बिस्तर पर नहीं गिर गई।
Frankly samar says
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